जिस मुस्लिम पुरातत्ववेत्ता ने बताया था बाबरी मस्जिद के निचे था मंदिर, उसको मोदी सरकार ने……

गणतंत्र दिवस पर 112 लोगों पुरस्कार देने की घोषणा भारत सरकार ने की है। हालाँकि इसमें से एक लेखिका उड़िया के मुख्यमंत्री की बहन गीता मेहता ने सरकार द्वारा दिए गए इस सम्मान को लेने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा है कि लोकसभा चुनाव अब सर पर आ गया है। उन्होंने कहा है कि यह वक़्त सही नहीं है इसलिए वह यह पुरस्कार नहीं ले सकती हैं। कादर खान को भी अवार्ड से सम्मानित किया गया है। लेकिन इसमें सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है एक मुहम्मद नाम के मुस्लिम शक्स की। यह शख्स पुरातत्ववेत्ता हैं। लेकिन इनका नाम एक विवाद से जुड़ा हुआ है। बाबरी मस्जिद और अयोधना की राम मंदिर से जुड़ा हुआ है।

यह वही मुस्लिम पुरातत्ववेत्ता है जिन्होंने दावा किया था कि मस्जिद के नीचे मंदिर था। अब सरकार की तरफ से मिले ईनाम के बाद उन पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हालाँकि कुछ लोग उन्हें बधाई भी दे रहे हैं। लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि सरकार ने उन्हें बदले में ईनाम दिया है। बधाई देने वाले लोगों का कहना है कि सरकार ने उन्हें सच बोलने का ईनाम दिया है। मुस्लिम पुरातत्ववेत्ता भगवान् राम के प्रति विश्वास जताते रहते हैं और राम को इमाम-ए- हिंद भी करते हैं।

मुस्लिम पुरातत्ववेत्ता अपनी बात के समर्थन में मुस्लिम-बहुसंख्यक दक्षिण पूर्व एशियाई देशों उदहारण देते हैं। वह कहते हैं कि वहां पर भगवन राम बहुत लोकप्रिय है और पूजनीय माने जाते हैं। इन्होने बी.बी. लाल के साथ काम किया है। जिनकी टीम ने मस्जिद स्थल पर हिंदू मंदिर के अवशेषों का पता लगने का दावा किया था।

उन्होंने यह दावा 1976 -77 में किया था। एक बार उन्होंने बयान देते हुए कहा था कि पुरातत्ववेत्ता सबूतों के आधार पर बोलते हैं। उनका कहना है कि खुदाई के समय वह भी मौजूद थे और उन्होंने मंदिर की उपस्थिति के सबूत देखे थे।