आपको बताते है उन मुसलमान के बारे में जिन पर हज करने के लिए है रोक, देखें

इस्लाम में हज करना फर्ज़ किया गया है, और हर मालदार मुसलमान पर जिंदगी में एक बार हज करना ज़रूरी है, हज मक्का शरीफ में पाँच दिनों में होता है, इस दौरान अल्लाह के रसूल के बताए गए तरीके से हज किया जाता है, आज दुनिया भर से लोग हज करने के लिए पहुँचते हैं, और पूरी दुनिया में जहां भी मुस्लिम रहते हैं, वह जिंदगी में एक बार हज के लिए मक्का शरीफ और मदीना शरीफ ज़रूर जाना चाहते हैं।

लेकिन दुनिया में अपने आप को मुस्लिम कहने वाला एक पंथ ऐसा भी है,जिसके हज करने पर रोक लगी हुई है, और अगर वह चोरी छुपे सऊदी अरबिया पहुँच भी जाते हैं, तो अगर पता चल जाता है, तो इन्हें तुरंत इन के देश वापस कर दिया जाता है, और इन्हें हज नहीं करने दिया जाता है, यह पंथ हिंदुस्तान में कादियानी कहलाता है, वहीं दूसरे देशों में इन्हें अहमदी भी कहा जाता है। इस पंथ का बानी मिर्ज़ा गुलाम अहमद कादियानी है, बताया जाता है कि मिर्ज़ा गुलाम अहमद कादियानी ने अपने नबी होने का ऐलान किया था, और भी इसके मानने वाले मिर्ज़ा गुलाम अहमद कादियानी को नबी मानते हैं।

जबकि दुनिया भर के मुसलमानों का अक़ीदा है कि अल्लाह के रसूल हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लाहू अलैहि वसल्लम आखिरी नबी हैं, और कुरान पाक अल्लाह ताला की आखिरी किताब है, हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लाहू अलैहि वसल्लम के बाद अब क़यामत तक दुनिया में कोई नबी नहीं आ सकता है, और यह बात कुरान में भी मौजूद है, इसी वजह से अहमदी लोगों को दुनिया भर के मुसलमान मुस्लिम नहीं मानते हैं।

लेकिन दूसरी तरफ अहमदी लोग अपने आप को मुस्लिम कहलवाना पसंद करते हैं, यह अपने बच्चों के नाम भी मुस्लिम की तरह ही रखते हैं, और मस्जिद मदरसे भी बनाते हैं, इन का कहना है कि हम मुस्लिम हैं, और यह अल्लाह ताला जानता है, लेकिन कुरान और हदीस की रोशनी में यह मुस्लिम नहीं हैं, बल्कि यह लोग इस्लाम से खारिज हैं, इसी वजह से इन्हें हज नहीं करने दिया जाता है।