मुसलमानों के लिए मोदी सरकार का ये बड़ा तोहफ़ा क्या हो सकता है चुनावी मुद्दा ? जानें

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देश में होने वाले आगामी लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. दरअसल मोदी सरकार का यह कार्यकाल ख़त्म होने को है और लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी ने जो जो वादे किये थे, कमोबेश सभी को पूरा करने में वह नाकामयाब साबित हुए है. ऐसे में उनके पास कोई मुद्दा नहीं है, जिन्हें लेकर वह जनता के बीच जा सकें और पार्टी के लिए वोट मांग सकें. इसलिए मोदी सरकार ने चुनाव से पहले यह कदम उठाया है.

दरअसल मज़हब की सियासत के बाद अब मोदी सरकार ऊँची जाती के लोगों को संतुष्ट करने के लिए ऊंची जाति में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐलान किया है. हालाँकि उसके इस ऐलान में कई विसंगतियां हैं और कोर्ट में जाने के बाद इसे बचा पाना बेहद मुश्किल काम है. क्योंकि संविधान में जाति के आधार पर आरक्षण देने की बात कही गई है लेकिन मोदी सरकार ने आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का ऐलान किया है.

बहरहाल, फिलहाल कहा जा रहा है कि अगर ऐसा हो जाता है तो इसके तहत ईसाईयों और ग़रीब मुस्लिमों को भी इसका लाभ मिल सकता है. आपको बता दें कि इस आरक्षण की कैटेगरी में वह लोग आयेंगे,

जिसकी सालाना कमाई 8 लाख से कम होगी. कहा जा रहा है कि शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन संविधान संशोधन के लिए बिल पेश किया जायेगा और इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में बदलाव लाया जाएगा. बहरहाल, कहा जा रहा है कि मोदी सरकार इसके ज़रिये ऊँची जाति के लोगों को अपने पक्ष में लाना चाहती है.

फिलहाल पार्टी का जनाधार दरक रहा है. वहीँ पिछले और दलित समाज के लोग भी अब भाजपा से किनारा कर रहे हैं क्योंकि इस सरकार में जातिगत हिंसा मे काफी इजाफा हुआ है. इसलिए भाजपा ऊँची जाति के वोटरों को संतुष्ट करना चाहती है.

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