बहुत ही अनोखा है भारत का ये गाँव, यहाँ के निवासियों के पास है दो देशों की नागरिकता, जानें

दोस्तों, भारत में ऐसे बहुत से गाँव है जिनकी ख़ूबसूरती देखते ही बनती है| मगर आज हम आपको एक ऐसे गाँव के बारे में बताने जा रहे है जो भारत में होने के बावजूद दुसरे देश की भी नागरिकता रखता है|

नागालैंड की राजधानी कोहिमा से करीब ३८० किमी की दूरी पर स्थित नार्थ-ईस्ट की ओर ‘लोंगवा’ नामक गाँव है| ये गाँव अपनी ख़ूबसूरती के लिए भी बेहद प्रसिद्ध है| ख़ूबसूरती के अलावा इस गाँव की एक और खासियत यह है कि इस गाँव के लोगों को दो देशों की नागरिकता प्राप्त है और इसी वजह से इसे दुनिया के बाकी गाँवों से अलग करती है|

भारत की पूर्वी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बसा हुए लोंगवा गाँव के बीचों-बीच भारत और म्यांमार की सीमा गुजरती है| जिसकी वजह से इस गाँव के निवासियों को दोनों देशों की नागरिकता प्राप्त है| पूर्वोत्तर भारत के ७ राज्यों में से एक नागालैंड ११ जिलों से मिलकर बना है| इन जिलों में से उत्तरी भाग में स्थित मोन जिले में लोंगवा गाँव आता है|

भारत और म्यांमार के बीच बेस इस गांव का आधा भाग भारत और आधा भाग म्यांमार में पड़ता है| गाँव के बीचो-बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा के होने के बावजूद इस गाँव को सीमाओं में ना बांटते हुए दोनों देशों की नागरिकता दी गयी है| इस जगह पर ‘कोनियक नागा’ जनजाति के लोग रहते है जो यहाँ रहने वाली १६ जनजातियों में सबसे बड़ी है| यह जनजाति एक समय पर ‘हेड हंटिंग’ यानी सर काटकर हत्या करने के लिए बहुत मशहूर थी|

कोनियक जनजाति के मुखिया को अंग कहा जाता है| जो कि आस-पास के करीब ७५ गाँवों पर राज करता है| जिसका मतलब अंग का शासन म्यांमार से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैला हुआ है| दोस्तों, अगर आपको हमारी यह जानकारी अच्छी लगी हो तो कृपया इसे लाइक और शेयर जरूर कीजियेगा और कमेंट बॉक्स में इसके बारे में लिखकर अपनी प्रतिक्रिया जरूर व्यक्त कीजियेगा|