इस्लाम में निकाह के फायदे, पढ़ कर आँखें खुली रह जाएंगी, पढ़ें क़ुरान और हदीस की रोशनी में…

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हर इन्सान बालिग होने के बाद इस बात की शदीद ख़ाहिश रखता है कि इस का कोई हमसफ़र , राज़दाँ और ख़लवत व जलोत का साथी हो जिससे वो जिस्मानी और रुहानी सुकून हासिल करसके । ये इन्सानी फ़ित्रत है जिसे कभी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता , अल्लाह ताला का इरशाद है :
ये अल्लाह की वो फ़ित्रत है जिस पर उसने लोगों को पैदा किया , अल्लाह की ख़लक़त में कोई तबदीली नहीं , यही दरुस्त देन है लेकिन अक्सर लोग जानते नहीं ।(अल रूम 30)

जो मुआशरा अल्लाह ताला के मुक़र्रर करदा इन उसूल-ए-फ़ित्रत से इन्हिराफ़ करने की कोशिश करेगा, ना वो सिर्फ़ ख़ुद को हलाकत में डालेगा बल्कि सारे इन्सानी मुआशरे के लिए एक नासूर बन जाएगा।कुछ लोगों ने ये कोशिश की कि वो अल्लाह ताला के मुक़र्रर करदा इन उसूलों से राह-ए-फ़रार इख़तियार करें लेकिन नबी ने उनके साथ सख़्ती का बरताव किया और ये वाज़िह फ़र्मा दिया कि जो शख़्स मेरी सुन्नत को ठुकरा कर अपने वज़ा करदा उसूलों की पाबंदी करेगा, उस का मुझसे कोई ताल्लुक़ नहीं चुनांचे हज़रत अनस रज़ी अललहू ताला अनहु फ़रमाते हैं।

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तीन आदमी रसूल-ए-अकरम की बीवीयों के पास आपकी इबादत का हाल दरयाफ़त करने के लिए आए। जब आपकी इबादत की उन्हें ख़बर दी गई तो गोया उन्होंने इस को बहुत थोड़ा तसव्वुर किया , फिर उन्होंने आपस में कहा :
हमारा अल्लाह के रसूल से किया मुक़ाबला , अल्लाह ताला ने आपके मर्तबे को बहुत बुलंद किया है, फिर उनमें से एक ने कहा :
मैं हमेशा सारी रात नमाज़ पढूँगा ।
दूसरे ने कहा:
मैं ज़िंदगी भर रोज़ा रखूँगा ,कभी रोज़ा नहीं छोड़ूँगा।
तीसरे ने कहा :
मैं औरतों से अलग रहूँगा और कभी शादी नहीं करूँगा।
फिर अल्लाह के रसूल उनके पास तशरीफ़ लाए और उनसे फ़रमाया :
क्या तुम लोगों ने ही ये बातें की हैं ? अल्लाह की क़सम ! में, तुम सबसे ज़्यादा अल्लाह ताला से डरने वाला और इस का तक़्वा रखने वाला हूँ लेकिन मैं रोज़ा रखता भी हूँ और छोड़ता भी हूँ , रात को नमाज़ भी पढ़ता हूँ और सोता भी हूँ और औरतों से शादी ब्याह भी करता हूँ।
और फ़रमाया :
याद रखो! जो मेरी सुन्नत और तरीक़े से मुँह मोड़े वो मुझसे नहीं ।
शादी ब्याह महिज़ नफ़सानी ख़ाहिश की तसकीन का ज़रीया ही नहीं बल्कि उस के कई दुनयवी और उखरवी समरात-ओ-बरकात भी हैं ,मसलन,
शादी में नस्ल-ए-इन्सानी की बक़ा है , जैसा कि फरमान-ए-इलाही है :
अल्लाह ने तुम्ही से तुम्हारे जोड़े बनाए और तुम्हारे इन जोड़ों से बेटे और पोते बनाए। ( अलनहल72)
अल्लाह के रसूल का इरशाद-ए-गिरामी है।
तुम ज़्यादा मुहब्बत करने वाली और ज़्यादा बच्चों को जन्म देने वाली औरतों से शादी करो क्योंकि दीगर उम्मतों के मुक़ाबले में मुझे अपनी उम्मत की कसरत-ए-तादाद पर फ़ख़र होगा। (अब्बू दाऊद, निसाई)।
शादी की बदौलत आदमी की आँखें और शर्मगाह महफ़ूज़ हो जाती हैं , जैसा कि अल्लाह के रसूल से मर्वी है।
ए नौजवानो! तुम में से जो ताक़त रखता है, इस को चाहीए कि वो शादी करले (बुख़ारी)।
क्योंकि ये नज़र को झुकाने वाली और शर्मगाह की हिफ़ाज़त करने वाली है । जो शादी की ताक़त नहीं रखता ,उसे चाहीए कि वो कसरत से रोज़े रखे , ये गुनाह से बचाओ के लिए ढाल है ।

इस में रुहानी-ओ-नफ़सानी सुकून है , इरशाद-ए-बारी ताला है :
अल्लाह ताला की क़ुदरत की निशानीयों में से ये भी एक निशानी है कि उसने तुम्हारी ही जिन्स के तुम्हारे जोड़े बनाए ताकि तुम उनसे सुकून हासिल करो और तुम्हारे दरमयान मुहब्बत और मेहरबानी डाली। ( अल रूम 21) ।
शादी के मतलूबा फ़वाइद-ओ-समरात और फ़ज़ाइल-ओ-बरकात के हुसूल के लिए ज़रूरी है कि आदमी नेक बीवी का इंतिख़ाब करे। अल्लाह ताला ने नेक बीवी के औसाफ़ बयान करते हुए इरशाद फ़रमाया है।
बेहतरीन औरत वो है कि शौहर अगर उस की तरफ़ देखता है तो वो उसे ख़ुश कर देती है , अगर वो उसे हुक्म देता है तो इस की इताअत करती है और जब इस से गैरहाज़िर हो तो उस के माल की भी हिफ़ाज़त करती है और अपनी आबरू की भी और अगर वो उसे क़सम दे दे तो वो उसकी कसम को सच्चा कर दिखाती है।

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उम्र ओ से मर्वी है कि नबी इरशाद फ़रमाते हैं :
दुनिया सारी की सारी सामान-ए-ज़िंदगी है और इस मताअ-ए-दुनिया में सबसे बेहतरीन चीज़ नेक औरत है। (मुस्लिम)।
एक हदीस में आपका इरशाद-ए-गिरामी है।
औरत से 4 चीज़ों की बिना पर शादी की जाती है। इस के माल की वजह से ,हसब-ओ-नसब या ख़ानदान की वजह से ,हसन और दीन के सबब से, तुम दीन वाली का इंतिख़ाब करलो । इस हदीसॱएॱ मुबारक से मालूम हुआ कि कामयाब ज़िंदगी उसी शख़्स की होगी जिसके घर में दीन-दार बीवी आजाए।

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