बाबरी मस्जिद केस : नई संविधान पीठ का हुआ गठन, इस तारीख को सुनाएगी सुप्रीम कोर्ट फैसला, पढ़ें

लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और बाबरी मस्जिद का मुद्दा ना उठे ऐसा मुमकिन नहीं है भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा राम मंदिर और बाबरी मस्जिद पर ऐसे ऐसे बयान दिए जाते हैं जिससे यह पार्टी अपना वोट बैंक बढ़ाने का काम करती है।

अब खबर सामने आ रही है कि अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से नहीं संविधान पीठ का गठन किया है जिसकी सुनवाई 29 जनवरी को होने वाली है आपको बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस मामले में सुनवाई करने के लिए पांच जजों की नई संविधान पीठ बनाई है। इसमें जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर को जोड़ा गया है। नई पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्‍दुल नजीर शामिल हैं।

जस्टिस यूयू ललित के नाम पर जताई गई थी आपत्ति

आपको बता दें कि अयोध्या में स्थित बाबरी मस्जिद मामले में इस से पहले जस्टिस यूयू ललित के नाम पर आपत्ति जताई गई थी। जिसके बाद उन्होंने अपना नाम इस केस से वापस ले लिया था। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में एक मुस्लिम पक्षकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने यह कहा था कि जस्टिस यू यू ललित बतौर अधिवक्ता साल 1997 के आसपास एक संबंधित मामले में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की तरफ से पेश हुए थे और उन्होंने अयोध्या में बाबरी मस्जिद पर यथास्थिति बनाए रखने का आश्वासन पूरा करने में सफलता हासिल नहीं की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद मामले में लिया बड़ा फैसला

गौरतलब है कि अयोध्या में स्थित बाबरी मस्जिद को 6 दिसंबर 1992 को गिराया गया था। उस संविधान पीठ के सदस्यों में जस्टिस एसए बोबडे, एनवी रमण, उदय यू ललित और डीवाई चंद्रचूड़ शामिल थे। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में 20 मिनट तक तक चले इस मामले की सुनवाई में बेंच ने अपने आदेश में स्थित का जिक्र करते हुए कहा है कि जस्टिस यू यू ललित भरा इस मामले की सुनवाई करने पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन इस बारे में अंतिम निर्णय तो जज को ही करना है।