Bombay High Court hospital

Bombay High Court hospital

बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार (12 जनवरी) को बड़ा फ़ैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि बिलों का भुगतान नहीं होने पर किसी मरीज को अस्पताल में रोककर रखना गैरकानूनी है और सभी को इस बात की जानकारी होनी चाहिए।

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खबर के मुताबिक, न्यायमूर्ति एस सी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति भारती डोगरा की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग को रोगियों के कानूनी अधिकारों और दोषी अस्पतालों के खिलाफ लागू होने वाले दंडनीय प्रावधानों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करने का निर्देश दिया।

पीठ ने फ़ैसला देते हुए कहा कि, ‘कोई अस्पताल किसी व्यक्ति को केवल इस आधार पर कैसे रोककर रख सकता है कि शुल्क का भुगतान नहीं हुआ, जबकि उसे सेहतमंद घोषित किया गया है। इस तरह का अस्पताल किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत आजादी का हरण कर रहा है।’

पीठ ने आगे कहा, ‘जनता के प्रत्येक सदस्य को पता होना चाहिए कि अस्पताल की ओर से इस तरह की कार्रवाई गैरकानूनी है।’ कोर्ट ने कहा हम इन मुद्दों पर नियम जारी करके न्यायिक अधिकारों से परे नहीं जा सकते, हालांकि हम स्पष्ट कर दें कि हम इस तरह के मुद्दे को लेकर सहानुभूति रखते हैं।”

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार को इस तरह के मरीजों और उनके परिवार को संरक्षण देने की की प्रणाली बनानी चाहिए। जिससे अस्पताल अपने बकाया बिल वसूलने के लिए हमेशा कानूनी तरीके अपना सकते हैं।

आपको बता दें कि कोर्ट एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें 2 मामलों का जिक्र किया गया जिनमें निजी अस्पतालों में मरीजों को कथित तौर पर बिलों पर विवाद के चलते रोककर रखा गया।

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