Kejriwal Govt installing CCTV cameras classroom
Kejriwal Govt installing CCTV cameras classroom

राजधानी दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने बुधवार (17 जनवरी) को शिक्षा व बाल सुरक्षा व्यवस्था को ठीक करने के लिए के अहम कदम उठाया है। जहां मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने तीन महीने के अंदर सरकारी स्कूलों में CCTV कैमरा लगाने का काम शुरू करने का निर्देश जारी कर दिया है। जी हाँ, अब दिल्ली के सरकारी विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावक अब कैमरे की मदद से अपने बच्चों पर नजर रख सकेंगे।

खबर के मुताबिक, बुधवार को स्कूलों में CCTV लगाए जाने को लेकर हुई बैठक में लोक निर्माण विभाग मंत्री सत्येन्द्र जैन, मुख्य सचिव अंशु प्रकाश और दूसरे सरकारी अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के बाद अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि, “सभी माता-पिता अपने फोन पर वास्तविक समय में बच्चों को कक्षा में पढ़ते हुये देख सकेंगे। इससे पूरी प्रणाली पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी। इससे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।”

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बता दें कि केजरीवाल सरकार के इस बड़े फैसले को जहां सतोषपूर्वक देखा जा रहा है, हालांकि इस पहल पर अभी तक विपक्षी पार्टियों द्वारा कोई राजनीतिक टीका टिप्पणी भी नहीं की गई है, लेकिन एक ऐसा वर्ग भो है जो सरकार के इस फैसले से सहमत नज़र नहीं आ रहा है। जहां किसी भी योजना के सभी पहलुओं पर चर्चा करने वाले लोगों का कहना है कि केजरीवाल के इस फैसले से बच्चों की परवरिश पर बुरा असर पड़ेगा। वही कुछ लोग इसे बच्चों की निजता के हनन के तौर पर देख रहे हैं।

श्याम आलोक लिखते हैं कि…

”बच्चों की कक्षाओं में कैमरे लगाना ताकि अभिवावक जब चाहे अपने बच्चों को देख सकें। स्कूली बच्चों की सुरक्षा का यह अजीबोगरीब फ़ॉर्मूला ढूंढा गया है।

यह बेहद मूर्खतापूर्ण है. इसका बाल मनोविज्ञान पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ना है। एक बच्चा हमेशा इस ‘स्ट्रेस’ में बैठा हो कि मेरा बाप मुझे देख रहा होगा। एक बच्ची इस स्ट्रेस में बैठी हो कि मेरा बाप ही नहीं, चुन्नू, मुन्नू, रिंकी, गुड्डी का बाप भी मुझे देख रहा होगा।

स्ट्रेस कि पता नहीं किसका किसका बाप किसे किसे देख रहा हो।

कक्षाओं में सीसीटीवी लगाकर लगातार नजर रखना किसी भी दृष्टिकोण से बुरा है जबकि बच्चों का एक बड़ा समय कक्षाओं में बीतता है। स्कूल प्रिंसिपल और प्रबंधन तक के पास यह अवसर नहीं होना चाहिए कि वह कक्षाओं में कैमरे लगाकर लगातार बच्चों पर नजर टिकाये रखे और नाक खुजाने से लेकर किसी सहपाठी को हाथ हिलाने तक में एक बच्चा स्ट्रेस में रहे कि ‘आँखें’ निगरानी कर रही।

पता नहीं केजरीवाल इतने इन्नोवेटिव आईडियाज़ क्या खाकर पाते हैं। सीसीटीवी को लेकर तो एक असामान्य उत्तेजना ही है उनके अंदर और पहले भी इस हवाले से उटपटांग बयान देते रहे हैं। यहाँ सीसीटीवी, वहां सीसीटीवी। क्यों न एक सीसीटीवी वे अपने ऊपर लगा लें ताकि दिल्ली की जनता उनपर नजर बनाए रखे कि पता नहीं निगरानी के अभाव में वे आगे क्या हरक़त कर जाएं।

मैं एक बार एक अध्ययन पढ़ रहा था कि पोर्न फ़िल्म दर्शक सीसीटीवी कैमरे से बने गुप्त विडियोज़ की बेहद मांग रखते हैं।

न्यायालय को हस्तक्षेप करते हुए शिक्षाविदों और बाल मनोविज्ञानियों के हवाले से एक रिपोर्ट मांग लेनी चाहिए। मुझे कोई भ्रम नहीं कि इसका बच्चों के स्वतंत्र मानसिक विकास पर बेहद बुरा असर पड़ेगा।”

समाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर अपनी राय रखने वाले ध्रुव राठी का कहना है कि ”कक्षा में सीसीटीवी कैमरा लगाना एक अच्छा कदम है, लेकिन इस तरह से हर वक्त बच्चों पर निगरानी रखना अच्छा नहीं है। प्रत्येक बच्चे को निजता का अधिकार मिलना चाहिए। कृप्या इस फैसले पर पुनर्विचार करें। बच्चों में डर उनके विकास को बाधित करेगा।”

इतना ही नहीं ध्रुव राठी ने अरविंद केजरीवाल को सुझाव दिया है कि वो Black Mirror शो के चौथे सीजन का दूसरा एपिसोड देखे।

आपको बता दें कि Black Mirror एक अमेरिकी शो है, जिसमें टेक्नोलॉजी के कुप्रभाव को दिखाया गया है। ध्रुव राठी ने जिस चौथे सीजन के दूसरा एपिसोड को देखने की सलाह दी है, उसमें बच्चों से जुड़ी समस्याओं को दिखाया गया है।

इस एपिसोड में दिखाया गया है कि जब बच्चों पर 24 घंटे निगरानी रखी जाती है और उसके लिए टेक्नोलॉजी का स्तेमाल किया जाता है तो उसका क्या नुकसान होता है।

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