Asaduddin owaisi pakistan bayan
Asaduddin owaisi pakistan bayan

हैदराबाद: दारुस्सलाम में आयोजित आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जलसे में AIMIM के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कुछ लोग प्रधानमंत्री मोदी को चायवाला बोलकर तंज़ मारते है, ये गलत है. चाय बेचना कोई बुरी बात नहीं है, अगर कोई आदमी चाय बेचकर अपने घर का खर्च चलाता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है. मैंने भी अपने पढ़ाई के वक़्त लंदन में रेस्टोरेंट में टेबल कुर्सी और टॉयलेट की सफाई कर के अपना खर्च चलाया है. आगे ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी आपको अगर कोई चायवाला कहता है तो आपको बुरा लगता है, ज़रा सोचिये हमारे ऊपर क्या बीत रही है जब 70 सालों से हमें पाकिस्तानी कहा जा रहा है. क्या आप ऐसे लोगों को सजा दिलाने के लिए कानून बनाएंगे ?

ओवैसी ने नदवी का नाम लिए बिना कहा, ‘‘कुछ लोग मोदी के इशारों पर नाच रहे हैं।’’ ऐसे लोग आस्तीन के सांप से भी ज्यादा खतरनाक है. इनसे होशियार रहने और इनका सामाजिक बहिस्कार करने की जरुरत है. हर दौर में ऐसे मेरे जाफर और मेरे सादिक पैदा हुए है.

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ओवैसी ने बोर्ड की तीन दिवसीय बैठक के समाप्त होने के बाद बोर्ड की ओर से आयोजित सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते हुए नदवी पर बोर्ड के रुख से अलग जाने पर निशाना साधते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता. नदवी ने शुक्रवार को शुरू हुई बोर्ड की 26वीं पूर्ण बैठक की पूर्वसंध्या पर बेंगलुरु में श्री श्री रविशंकर से मुलाकात की थी और यह प्रस्ताव रखा था कि छह दिसंबर, 1992 तक जिस जमीन पर बाबरी मस्जिद खड़ी थी, उस जमीन को राम मंदिर निर्माण के लिए छोड़ देना चाहिए और किसी और जमीन पर मस्जिद का निर्माण करना चाहिए.

ओवैसी ने कहा कि नदवी उन मौलवियों में से हैं, जिन्होंने 2001 में उस फतवे पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें कहा गया था कि मस्जिद को अनंत काल तक के लिए मस्जिद ही रहने देना चाहिए और मुसलमान बाबरी मस्जिद की जमीन नहीं छोड़ सकते. बता दें कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जमीन को राम मंदिर के निर्माण के लिए छोड़ देने के अपने प्रस्ताव को लेकर नदवी ने रविवार को हुई बोर्ड की बैठक से खुद को अलग कर लिया. हालांकि बोर्ड ने दावा किया कि उन्हें निकाल दिया गया है.

ओवैसी ने बोर्ड के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि बाबरी मस्जिद इस्लाम का महत्वपूर्ण हिस्सा है. मुस्लिम मस्जिद को कभी छोड़ नहीं सकते. न ही मस्जिद के लिए जमीन को बदल सकते हैं और न ही मस्जिद की जमीन किसी को तोहफे में दे सकते हैं. बोर्ड ने कहा, ‘बाबरी मस्जिद एक मस्जिद है और कयामत तक मस्जिद रहेगी. उसे शहीद करने से उसकी पहचान नहीं खो जाती.’

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