Jagran defends BJP Varanasi flyover collapse
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भारत के संविधान की धारा 51-ए में कहा गया है कि भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे। जरा सोचिए, भारत में कितने ऐसे मीडिया संस्थान हैं जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देते है?

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कितने ऐसे मेनस्ट्रीम मीडिया संस्थान हैं जहां राषिफल, अंक ज्योतिषियों, ज्योतिषियों के सलाह, शुभ-लाभ, कर्मकांड आदि प्रकाशित या प्रदर्शित नहीं किए जाते? पिछले कुछ सालों से तो टीवी मीडिया कभी समुद्र के नीचे द्वारका ढूंढने जा रहा है तो, कभी स्वर्ग का रास्ता खोजा जा रहा है, कभी रामसेतु के प्रमाण ढ़ूढ रहा है…

अब सवाल उठता है कि क्या ऐसा करना वैज्ञानिक सोच को चुनौती देना नहीं है? क्या इस तरह के कंटेंट से मनुस्ट्रीम मीडिया संविधान को चुनौती नहीं दे रहा है? क्या मीडिया अंधविश्वास, रूढिवाद को संरक्षित करने का काम कर रहा है?

लगता तो यही है। मीडिया पर सवाल इसलिए भी उठाया जाना चाहिए क्योंकि ये करोड़ों लोगों को प्रभावित करता है। अगर मीडिया कुछ दिखाती या बताती है तो उसे आमजनता बिना पड़ताल किए सच मान लेते हैं। इसमें लोगों की ज्यादा गलती नहीं है, बस मीडिया अपने दर्शकों-पाठकों के विश्वास के साथ खिलवाड़ कर रही है।

वाराणसी में मंगलवार की शाम निर्माणाधीन फ्लाईओवर के हिस्से के गिरने से 18 लोगों की मौत हो गई। कई दर्जन लोग घायल हैं। फ्लाईओवर हादसे का कारण लापरवाही और प्रशासनिक चूक को माना जा रहा है। उपमुख्यमंत्री केश्व प्रसाद मौर्य ने वाराणसी में हुए हादसे में चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर एचसी तिवारी समेत चार लोगों को सस्पेंड कर दिया है।

इसके अलावा आगे की जांच के लिए तीन सदस्यीय तकनीकी समिति का गठन भी कर दिया गया है। लेकिन बुधवार की दैनिक जागरण ने इस हादसे के लिए तीन ग्रहों को जिम्मेदार बताया है। दैनिक जागरण के मुताबिक सूर्य, मंगल और शनि के त्रिकोण की वजह से फ्लाईओवर हादसा हुआ है।

कोई ज्योतिषविद् पं चक्रपाणि भट्ट हैं। अब पता नहीं जागरण वाले चक्रपाणि से मिलने गए या चक्रपाणि जागरण वालों से मिलने आए लेकिन पूरी खबर चक्रपाणि के ज्योतिषविद्या के आधार पर लिखी गई है। जागरण ने अपने खबर की दूसरी लाइन में लिखा है ”ज्योंतिषविदों” ने इस घटना को ग्रहों का खेल बताया है।

गौर करने वाली बात ये कि जागरण ने लिख तो ”ज्योंतिषविदों” ने है लेकिन खबर में सिर्फ एक ज्योतिष का जिक्र है। शायद खबर की दूसरी लाइन में ”ज्योंतिषविदों” इसलिए लिखा गया है ताकि कंटेंट गंभीर और सही लगे!

खैर, कथित ज्योतिषविद् चक्रपाणि भट्ट का कहना है कि ”इस संवत राजा सूर्य है और मंत्री शनि है। दोनों में पिता-पुत्र का संबंध है लेकिन दोनों में आपस में बनती नहीं है। उनके आपसी मतभेद का असर सीधा जनता पर पड़ेगा।…”

चक्रपाणि द्वारा कही गई ये बात बेहद ही तर्कहीन और अंधविश्वास से भरी हुई है। वैज्ञानिक कब का इन पोंगा-पंडितों द्वारा फैलाए जा रहे ग्रहों वाली नौटंकी को नकार चुके हैं। ये वही ज्योतिषविद हैं जो कहते थें कि सारे ग्रह पृथ्वी के इर्दगिर्द चक्कर लगाते हैं जबकि वैज्ञानिक कॉपरनिकस ने ये साबित किया कि सारे ग्रह पृथ्वी नहीं सूर्य के चक्कर लगाते हैं। क्योंकि सूर्य ग्रहों का केंद्र है।

ये वही ढ़ोगी पंडित हैं जो ग्रहण को ईश्र्वरीय बताते थे और अभी भी बताते हैं। ग्रहण के नाम पर तमाम तरह का अंधविश्वास फैलाते हैं। लेकिन भारतीय वैज्ञानिक आर्यभट्ट ने बताया था कि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है। और ग्रहण लगने की वजह राहू केतु नहीं ग्रहों की छाया हैं। ये घटना भौतिक है इसका ईश्र्वरीय ताकत से कोई ताल्लुक नहीं है।

Jagran defends BJP
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तो जागरण द्वारा ऐसी खबर फैलाने की वजह क्या है?

‘दैनिक जागरण’ देश का सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाला अखबार। जनवरी 2018 में मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल यानी एमआरयूसी ने वर्ष 2017 का रीडरशिप सर्वे जारी करते हुए बताया था कि भारत के सभी भाषाओं के अखबारों की कुल पाठक संख्या के आधार पर जो टाप ट्वेंटी की लिस्ट बनी है, उसमें दैनिक जागरण नंबर एक पर है।

इस सर्वे की रिपोर्ट को माने तो दैनिक जागरण को पढ़ने वालों की संख्या 7,03,77,000 (7 करोड़ से ज्यादा) है। ये संख्या बहुत भारी है, जाहिर हैं दैनिक जागरण पर जिम्मेदारी भी बहुत ज्यादा होगी! लेकिन ऐसा नहीं है। जागरण अपनी रीडरशिप इस्तेमाल प्रोपगेंडा फैलाने में कर रहा है।

जागरण कठुआ वाले मामले आलोचना झेलने के बाद भी नहीं सुधरा है। ये सत्ताधारी बीजेपी के लिए समर्पित हो चुका है। इस खबर का मुख्य उद्देश ही है सरकार को उसकी जिम्मेदारी से मुक्त करना। सीधी सी बात है जब फ्लाईओवर ग्रहों की वजह से गिरा है तो सरकार से सवाल क्यों पूछना। बात यहीं खत्म हो जाती है। सरकार अपने दोषों से बाइज्जत बरी हो जाती है।

जागरण को तुरंत केशव प्रसाद मौर्य को लताड़ते हुए खबर करनी चाहिए, क्योंकि जब फ्लाईओवर ग्रहों की वजह से गिरा है तो चार अधिकारियों को क्यों सस्पेंड करना? मोदी सरकार को अपने मुआवजे का ऐलान भी वापस ले लेना चाहिए। क्योंकि सरकार की तो कोई गलती ही नहीं है, सारी गलती ग्रहों की है। चक्रपाणि ने तो ये भी बाताया है कि ग्रहों की वजह से ही आतंकवादी हमला होता है फिर बार बार पाकिस्तान की आलोचना क्यों करना?

वैसे आश्चर्य की बात ये है कि जब दो साल पहले कोलकता में ब्रीज गिरा था तब जागरण ने किसी ग्रहों को जिम्मेदार नहीं बताया था। क्यों? क्योंकि वहां बीजेपी की नहीं टीएमसी की सरकार है!

जागरण ने गलत खबर की है, ये बात वो खुद मान चुका है!

जागरण समुह द्वारा की गई ग्रहों वाली खबर गलत है ये बात खुद जागरण भी मान चुका है। क्योंकि जागरण ने अपने वेबपोर्टल से इस खबर को डीलीट कर दिया है। अब सबके घर से अखबार वापस तो लाया नहीं जा सकता, लेकिन वेबसाइट से खबर डीलीट की जा सकती है। तो जागरण ने खबर डीलीट कर दिया है।

jagran fake news
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लेकिन गुगल पर अब भी उसका लिंक मौजूद है, लिंक को खोलने पर Eror 404 आ रहा है यानी कंटेंट डीलीट हो चुका है। अब अगर जागरण को विश्वास था कि उसने सही खबर की है तो डीलीट क्यों किया? जाहिर सी बात है जागरण को भी पता है कि उसने गलत खबर की है।

लेकिन इसमें भी एक खेल

इसके पीछे की राजनीति को समझने के लिए दैनिक जागरण के रीडरशीप की संख्या को याद कीजिए। और दैनिक जागरण जिन क्षेत्रों में पढ़ा जाता है उन्हें भी याद कीजिए। दैनिक जागरण ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ा जाता है। इसका मतलब ये हुआ कि दैनिक जागरण ने 7 करोड़ लोगों के दिमाग में ये बात डालने में कामयाब रहा है कि फ्लाईओवर प्रशासन की लापरवाही और भ्रष्टाचार की वजह से नहीं बल्कि ग्रहों की वजह से गिरा है। इतना ही नहीं जो मूर्ख बीजेपी भक्ति में इस घटने के लिए सरकार को जिम्मेदार नहीं मान रहे थें उनके भी हौसले बुलंद हो गए।

दैनिक जागरण का क्या होगा?

दैनिक जागरण का कुछ नहीं होगा। ज्यादा से ज्यादा एक माफी मांग लेगा या वो भी नहीं। अगर दैनिक जागरण माफी मांग भी लेता है तो सात करोड़ लोगों के दिमाग से ये बात निकल जाएगी की फ्लाईओवर हादसा ग्रहों के उठापटक से गिरा है।

वैसे पत्रकारिता का कोई स्वर्णिम दौर तो नहीं था लेकिन ये सबसे शर्मनाक दौर जरूर है। लोकतंत्र का चौथा खंभा सड़ चुका है। संपादक अपना इमान अपने राजनीति आकाओं के हाथों बेच चुके हैं। टीवी, अखबार हर रोज अपने पाठकों दर्शकों से झूठ बोल रहा है।

कोबरा पोस्ट ने अभी कुछ दिन पहले ही अपने स्टींग ऑपरेशन में खुलासा किया था कि कैसे अखबार और न्यूज चैनल पैसा लेकर राजनीतिक पार्टियों के पक्ष में माहौल बनाने को तैयार हैं। किस तरह मीडिया राजनीतिक पार्टियों द्वारा किए जा रहे धर्म के धंधें में उनका सहयोग कर रही है। ये फरेब कितना साल चलेगा? एक दिन जनता होश में आएगी और पत्रकारिता के अस्तित्व को ही नकार देगी।

Source: http://www.boltaup.com

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