Lebanese Actress protest against Gaza attack
Lebanese Actress protest against Gaza attack

Lebanese Actress protest against Gaza attack

इज़राइली सेना द्वारा फिलिस्तीन के लोगों पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। सोमवार (14 मई) को इजरायली सैनिकों ने 60 से ज्‍यादा मासूम नागरिकों की गोली मारकर हत्‍या कर दी। जो बड़े पैमाने पर यरूशलेम में अमेरिकी दूतावास खोलने के विरोध में शामिल हुए थे।

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सारी दुनिया के साम्राज्यवादी चुपचाप इस जनसंहार को देख रहे हैं। साम्राज्यवादी मीडिया इज़रायल के इस नंगे झूठ का भोंपू बना हुआ है कि उसने यह हमला फिलिस्‍तीनियों को सीमा में घुसने से रोकने के लिए किया है।

इसी बीच फ्रांसीसी-लेबनानी अभिनेत्री मनाल इसा ने गाज़ा सीमा पर इज़राइली हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने फ्रांस में आयोजित कान इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल में एक तख़्ती उठाकर गाज़ा सीमा पर इज़राइली हमले बंद करने की अपील की।

बोलता यूपी.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को फिल्म “सोलो: ए स्टार वॉर्स स्टोरी” के प्रीमियर में भाग लेने पहुंची इसा ने अपना विरोध उस वक्त दर्ज किया जब वो रेड कार्पेट पर थीं और वहां मौजूद तमाम कलाकार और पत्रकार उन्हें देख रहे थे। बता दें कि नई फिल्मों के प्रीमियर के लिए कान दुनिया भर में सबसे बड़े और प्रभावशाली फ़िल्म फेस्टिवल्स में से एक है।

Lebanese Actress protest against Gaza attack

रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 का कान फेस्टिवल गाज़ा में बढ़ती हिंसा के साथ हुआ। इजरायली बलों ने सोमवार को अमरीकी दूतावास के उद्घाटन का विरोध कर रहे तकरीबन 60 फिलिस्तीनी नागरिकों को मार डाला। इस हमले में कई बच्चे भी मारे गए। ग़ौरतलब है कि 2014 के बाद इज़राइल का फिलिस्तान पर यह सबसे बड़ा हमला है। जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश बढ़ गया है।

बोलता यूपी.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, दूतावास का उद्घाटन 70 वें वार्षिक नकबा दिवस से एक दिन पहले किया गया। 1948 में इसी दिन इजरायल बना था, जिसके चलते हज़ारों फिलिस्तीनियों को अपने घर छोड़ने पड़े थे। फिलिस्तीन में नकबा (कयामत) के तौर पर मनाया जाता है, जबकि इज़राइल में इस दिन जश्न मनाया जाता है।

बता दें कि, इजरायल लगातार फिलिस्‍तीन की जमीन पर कब्‍जा कर रहा है। 1947 से लेकर आज तक इज़रायली ही हमलावर रहे हैं और उन्होंने फिलिस्तीन के लगभग 70 प्रतिशत भाग पर कब्ज़ा कर रखा है और मासूम लोगों का खून बहा रहे हैं। जब उनकी फौज मासूमों का कत्‍लेआम करती है तो वहां के नागरिक पहाड़ों की चोटी पर बैठकर उस पर जश्‍न मनाते हैं।

 

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