मराठा आरक्षण आंदोलन को बदनाम कर रहे हैं कुछ लोग: शिवसेना नेता

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा इस वक्त जोरों-शोरों से उठाया जा रहा है. मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान 9 अगस्त को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया गया था लेकिन इस बंद के दौरान आंदोलन हिंसक हो गया और लोगों ने तोड़फोड़ की.

इस हिंसा पर लोकसभा में शिवसेना नेता चंद्रकांत खैरे ने कहा कि कुछ लोग मराठा आरक्षण आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. खैरे ने कहा कि मराठा आरक्षण की मांग को लेकर किए गए शांतिपूर्ण बंद को कुछ लोग बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए चंद्रकांत खैरे ने कहा कि गुरुवार को मराठा आरक्षण की मांग को लेकर हुआ महाराष्ट्र बंद शांतिपूर्ण रहा. लेकिन मराठा समुदाय के लोगों को बदनाम करने के लिए कुछ असामाजिक तत्वों ने एक औद्योगिक क्षेत्र में तोड़फोड़ की और पुलिस मूकदर्शक बनी रही.

उन्होंने मांग की कि इस घटना की जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो.

शून्यकाल में ही बीजेपी के रमेश पोखरियाल ने कहा कि उत्तराखंड के हरिद्वार में आदमखोर बाघ के अलावा हाथी से लोगों को खतरा पैदा हो रहा है. इसलिए, वह जंगली जानवरों से लोगों की सुरक्षा के लिए तार की बाड़ लगाने या दीवारें खड़ी करने का अनुरोध करते हैं. उन्होंने जानवरों के हमलों में मारे गए लोगों के आश्रितों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की भी मांग की.

समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने कहा कि उत्तरप्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षा प्रेरकों की नौकरी चली गई है. वे बेरोजगार हो गए हैं. जब शिक्षा प्रेरक आंदोलन कर रहे थे तब केंद्रीय गृह मंत्री ने इस विषय पर आश्वासन दिया था. उन्होंने मांग की कि इन शिक्षा प्रेरकों के बकाए का भुगतान किया जाए.

इनेलो के दुष्यंत चौटाला ने मांग की कि दूध के लिए 40 रुपए प्रति लीटर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए. बीजेपी के पशुपति नाथ सिंह ने पूरे देश में एक तरह की न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करने की मांग की.

Source: hindi.firstpost.com

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