2019 के चुनावी साल में मीडिया की लाश आपके घर आने वाली है, आपकी क्या तैयारी है

Ravish Kumar Media Fact

2019 के चुनाव में अब 9 महीने रह गए हैं। अभी से लेकर आख़िरी मतदान तक मीडिया के श्राद्ध का भोज चलेगा। पांच साल में आपकी आंखों के सामने इस मीडिया को लाश में बदल दिया गया। मीडिया की लाश पर सत्ता के गिद्ध मंडराने लगे हैं। बल्कि गिद्धों की संख्या इतनी अधिक हो चुकी है कि लाश दिखेगी भी नहीं। अब से रोज़ इस सड़ी हुई लाश के दुर्गन्ध आपके नथुनों में घुसेंगे। आपके दिमाग़ में पहले से मौजूद सड़न को खाद देंगे और फिर सनक के स्तर पर ले जाने का प्रयास करेंगे जहां एक नेता का स्लोगन आपका स्लोगन हो जाएगा। मरा हुआ मीडिया मरा हुआ नागरिक पैदा करता है। इस चुनावी साल में आप रोज़ इस मीडिया का श्राद्ध भोज करेंगे। श्राद्ध का महाजश्न टीवी पर मनेगा और अखबारों में छपेगा।

Ravish Kumar TV
Ravish Kumar TV

2019 का साल भारत के इतिहास में सबसे अधिक झूठ बोलने का साल होगा। इतने झूठ बोले जाएंगे कि आपके दिमाग़ की नसें दम तोड़ देंगी। न्यूज़ चैनल आपकी नागरिकता पर अंतिम प्रहार करेंगे। ये चैनल अब जनता के हथियार नहीं हैं। सरकार के हथियार हैं। चैनलों पर बहस के नक़ली मुद्दे सजाए जाएंगे। बात चेहरे की होगी, काम की नहीं। चेहरे पर ही चुनाव होना है तो बॉलीवुड से किसी को ले आते हैं। प्रवक्ता झूठ से तमाम बहसों को भर देंगे। किसी सवाल का सीधा जवाब नहीं होगा। भरमाने का महायुद्ध चलेगा। भरमाने का महाकुंभ होगा। चलो इस जनता को अब अगले पांच साल के लिए भरमाते हैं। जनता झूठ की आंधियों से घिर जाएगी। निकलने का रास्ता नहीं दिखेगा। मीडिया उसे गड्ढे में गिरने के लिए धक्का दे देगा। जनता गड्ढे में गिर जाएगी।

2019 का चुनाव जनता के अस्तित्व का चुनाव है। उसे अपने अस्तित्व के लिए लड़ना है। जिस तरह से मीडिया ने इन पांच सालों में जनता को बेदखल किया है, उसकी आवाज़ को कुचला है, उसे देखकर कोई भी समझ जाएगा कि 2019 का चुनाव मीडिया से जनता की बेदखली का आखिरी धक्का होगा। टीवी की बहस में हर उस आवाज़ की हत्या होगी जो जनता की तरफ से उठेगी। छोटे से कैंपस में नकली जनता आएगी। वो ताली बजाएगी। चेहरे और नेता के नाम पर। कुर्सी फेंक कर चली जाएगी। हंगामा ही ख़बर होगा और ख़बर का हंगामा।

Ravish Kumar Narendra Modi
Ravish Kumar Narendra Modi

मुद्दों की जगह प्रचार के चमत्कार होंगे। प्रचार के तंत्र के सामने लोकतंत्र का लोक मामूली नज़र आने लगेगा। धर्म के रूपक राजनीतिक नारों में चढ़ा दिए जाएंगे। आपके भीतर की धार्मिकता को खंगाला जाएगा। उबाला जाएगा। इस चुनाव में नेता आपको धर्म की रक्षा के लिए उकसाएंगे। हिन्दू मुस्लिम डिबेट चरम पर होगा। इस डिबेट का एक ही मकसद है। बड़ी संख्या में युवाओं को दंगाई बनाओ। दंगों के प्रति सहनशील बनाओ। उनके मां-बाप की मौन सहमति इन युवाओं को ऊर्जा देगी।

भारत एक नए दौर में जा रहा है। हत्याओं के प्रति सहनशील भारत। बलात्कार के प्रति सहनशील भारत। बस उसकी सहनशीलता तभी खौलेगी जब अपराधी का धर्म अलग होगा। बलात्कार और हत्या की शिकार का धर्म अलग होगा तो कोई बात नहीं। धर्म से नहीं बहकेंगे तो पाकिस्तान के नाम पर बहकाया जाएगा। भारत में सांप्रदायिकता पारिवारिक हो चुकी है। मां बाप और बच्चे खाने की मेज़ पर सांप्रदायिकता से सहमति जताते हैं। नफ़रत सामाजिक हो चुकी है। इसी की जीत का साल होगा 2019। इसी की हार का साल होगा 2019। मुकाबला शुरू हुआ है। अंजाम कौन जानता है।

मेरी समझ से 2019 का चुनाव जनता के नागरिक होने के बोध की हत्या का साल होगा। जनता खुद ही पुष्टि करेगी कि हां हमारी हत्या हो चुकी है और हम मर चुके हैं। अब हमें ज़ुबान की ज़रूरत नहीं है। अपनी आवाज़ की ज़रूरत नहीं है। प्रचंड प्रचार के संसाधनों के बीच आखिर जनता ज़िंदा होने का सबूत कैसे देगी। सबके बस की बात नहीं है झूठ की आंधी को समझना और उससे लड़ना। मुख्यधारा के प्राय सभी मीडिया संस्थानों का मैदान साफ है। सरकार के दावों को ज़मीन से जांचने वाले पत्रकार समाप्त हो चुके हैं। गोदी मीडिया के गुंडे एंकर आपको ललकारेंगे। आपके दुख पर पत्थर फेंकेंगे और आपके हाथ में माला देंगे कि पहना दो उस नेता के गले में जिसकी तरफदारी में हम चीख रहे हैं।

Ravish Kumar Ji
Ravish Kumar Ji

जनता इस चुनाव में मीडिया हार जाएगी। मीडिया की चालाकी समझिए। वो चुनावी साल में अपनी री-ब्रांडिंग कर रहा है। उसे पता है कि जनता को मालूम है कि मीडिया गोदी मीडिया हो गया था। उसके एंकरों की साख समाप्त हो चुकी है। इसलिए बहुत तेज़ी से मीडिया हाउस अपनी ब्रांडिंग नए सिरे से करेंगे। सच को लेकर नए नए नारे गढ़े जाएंगे। मीडिया जनता के लिए आंदोलनकारी की भूमिका में आएगा। आप झांसे में आएंगे। ज़मीन पर जाकर दावों की परीक्षा नहीं होगी क्योंकि इसमें जोखिम होगा। सरकार को अच्छा नहीं लगेगा।

भारत का मीडिया खासकर न्यूज़ चैनल भारत के लोकतंत्र की हत्या करने में लगे हैं। यकीन न हो तो यू ट्यूब पर जाकर आप इन पांच साल के दौरान हुए बहसों को निकाल कर देख लें। आपको पता चल जाएगा कि ये आपको क्या बनाना चाहते थे। आपको यह भी पता चलेगा कि जो बनाना चाहते थे, उसका कितना प्रतिशत बन पाए या नहीं बन पाए। आप कुछ नहीं तो प्रधानमंत्री मोदी के दो इंटरव्यू देख लीजिए। एक लंदन वाला और एक पकौड़ा वाला। आपको शर्म आएगी। अगर शर्म आएगी तो पता चलेगा कि आपके भीतर की नागरिकता अभी बची हुई है। अगर नहीं आएगी तो कोई बात नहीं। री-ब्रांडिंग के इस खेल में विश्वसनीयता खो चुके एंकरों से दूरी बनाने की रणनीति अपनाई जाएगी। चैनलों में काफी बदलाव होगा। एंकरों के स्लाट बदलेंगे। कार्यक्रम के नाम बदलेंगे। मुमकिन है कि इंटरव्यू के लिए नए एंकर तलाशे जाएं। हो सकता है मुझ तक भी प्रस्ताव आ जाए। यह सब खेल होगा। सत्ता इस्तमाल करने के लिए लोगों को खोज रही है। बहुत चालाकी से गोदी मीडिया आपको गोदी जनता में बदल देगा।

जनता क्या कर सकती है? मेरी राय में उसे पहली लड़ाई खुद को लेकर लड़नी चाहिए। उसे 2019 का चुनाव अपने लिए लड़ना होगा। वह हिन्दी के अख़बारों को ग़ौर से देखे। दूसरे अख़बारों को भी उसी निर्ममता के साथ देखे। किस पार्टी का विज्ञापन सबसे ज़्यादा है। किस पार्टी के नेताओं का बयान सबसे ज़्यादा है। अखबारों के पत्रकार नेताओं के दावों को अपनी तरफ से जांच कर रहे हैं या सिर्फ उन्हें जस का तस परोसने की चतुराई कर रहे हैं।

जब भी आप न्यूज़ चैनल देखें तो देखें कि प्रधानमंत्री की रैली कितनी बार दिखाई जाती है। कितनी देर तक दिखाई जाती है। उनके मंत्रियों की रैली कितनी बार दिखाई जाती है। कितनी देर तक दिखाई जाती है। फिर देखिए कि विपक्ष के नेताओं की रैली कितनी बार दिखाई जाती है। कितनी देर तक दिखाई जाती है। बात बार और देर की नहीं बात है कि मुद्दों को रखने की जिस पर नेता जवाब दें। न कि नेताओं के श्रीमुख से निकले बकवासों को मुद्दा बनाए। आपको पता चलेगा कि आने वाला भारत कैसा होने जा रहा है।

मरे हुए मीडिया के साथ आप इस चुनावी साल में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए इस मीडिया को परखिए। इम्तहान पत्रकार दे रहा है और प्रश्न पत्र की सेटिंग मालिक कर रहे हैं। इस खेल को समझने का साल है। इस चुनाव में न्यूज़ चैनल और अख़बार विपक्ष की हत्या करेंगे। विपक्ष भी अपनी हत्या होने देगा। वह अगर मीडिया से नहीं लड़ेगा तो आपके भीतर के विपक्ष को नहीं बचा पाएगा। आप देखिए कि विपक्ष का कौन नेता इस गोदी मीडिया के लिए लड़ रहा है। इस बार अगर आप नागरिकता के इस इम्तहान में हारेंगे तो अगले पांच साल ये मीडिया अपने कंधे पर आपकी लाश उठाकर नाचेगा।

अपवादों से कुछ मत देखिए। इस देश में हमेशा कुछ लोग रहेंगे। मगर देखिए कि जहां बहुत लोग हैं वहां क्या हो रहा है। आपकी हार मैं जानता हूं, क्या आप अपनी जीत जानते हैं? 2019 के जून में इस पर बात होगी। मीडिया को मारकर आपको क्या मिलेगा, इस पर एक बार सोच लीजिएगा।

नोटबंदी के बाद सिर्फ BJP के आए अच्छे दिन, भाजपा की कमाई 570 करोड़ से बढ़कर 1034 करोड़ हुई

Notebandi Benefit BJP

नोटबंदी से भले ही 100 से ज्यादा मौतें हो गई हैं, लाखों लोगों को अपना रोजगार खोना पड़ा हो लेकिन बीजेपी दिन दूना रात चौगुनाढ़ती चली गई। इस दौरान भाजपा की कमाई 570.86 करोड़ से बढ़कर 1034 करोड़ हो गई यानी लगभग दोगुना । दिलचस्प बात तो यह है कि पारदर्शिता की बात करने वाली पार्टी ने इस कमाई के सोर्स को उजागर करने से मना कर दिया.

नोटबंदी के दौरान बीजेपी की इनकम 81.18% की दर से बढ़ी है लेकिन कांग्रेस की इनकम 14% की दर से घटी है और देश की अर्थव्यवस्था की तो रीढ़ ही टूट गई। इससे स्पष्ट हो जाता है कि नोटबंदी किसके लिए की गई थी और नोटबंदी से किसके अच्छे दिन आए हैं। इसी साल अप्रैल में ‘डेली ओ’ पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, देश की राष्ट्रीय पार्टियों की कुल कमाई का 66.4% अकेले भाजपा के खाते में आया है और कांग्रेस के खाते में सिर्फ 14 %. कांग्रेस मुक्त भारत का दावा करने वाले नरेंद्र मोदी सत्ता में आते ही अपनी पार्टी को कांग्रेस से ज्यादा कमाई करवाने लगे।

क्या आर्थिक मोर्चे पर की गई हर धोखाधड़ी का जवाब सिर्फ यही होगा कि मैं गरीब का बेटा हूं और मैं चाय बेचा करता था! क्या यह देश इतने बड़े निर्णय पर सवाल नहीं करेगा कि देश के लाखों करोड़ दांव पर लगा देने के पीछे तर्क ए क्या था ! जब नोटबंदी से हर वर्ग बेहाल है तो भारतीय जनता पार्टी मालामाल कैसे हो गई है!

नोटबंदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे साहसिक फैसला कहा जा सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसका देश के तकरीबन हर व्यक्ति पर सीधा असर होना था. ऐलान के शुरुआती दिनों में आम लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी. बैंकों की लाइनों में लोगों ने तकलीफ सहीं, एटीएम सेंटर के बाहर रात गुजारीं, पुलिस की लाठियां भी खाईं, लेकिन पीएम मोदी की मंशा पर कोई बड़ा सवाल नहीं खड़ा किया. जिन विपक्ष दलों ने इस मुद्दे पर पीएम को व्यक्तिगत रूप से घेरना चाहा उन्हें जनता का समर्थन नहीं मिला. ममता, केजरीवाल की इस मुद्दे पर हुई रैलियों में जुटी गिनी-चुनी भीड़ इसका सबूत है. आम लोगों का यही विश्वास पीएम मोदी का कद बढ़ाने में मददगार रहा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फरमान को लोगों ने काले धन, भ्रष्टाचार और नकली नोटों को अर्थव्यवस्था से खत्म करने के कदम के रूप में देखा. हालांकि इन मुद्दों पर नोटबंदी से कोई बहुत उल्लेखनीय उपलब्धि नहीं हासिल हुई लेकिन इसके बाजवूद ज्यादातर लोगों का मानना है कि नोटबंदी सही और जरूरी कदम था लेकिन उसे लागू करने को लेकर या तैयारियों के स्तर पर सरकार से कुछ चूकें हुईं.

आम खास सब बराबर

नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी से आम जनता में ये संदेश गया कि मोदी के राज में आम हों या खास, सब बराबर है. बैंकों की लाइन में खड़े मजदूर इस बात से खुश थे कि उन्हें थोड़ी मुश्किल जरूर हुई लेकिन उनका मालिक या साहूकार ज्यादा परेशान है. एक तरह से अमीरों को हुई दिक्कत गरीबों को लिए संतोष बन गई जिसका फायदा मोदी को हुआ क्योंकि आम जनता का उनमें विश्वास बढ़ा.

कालेधन और आतंकियों को झटका
नोटबंदी के अपने ऐतिहासिक ऐलान के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि ये फैसला कालेधन, भ्रष्टाचर और आतंकवादी संगठनों पर लगाम लगाने के लिए है. भले ही इस संबंध में अभी कोई ठोस आंकड़े सामने नहीं आए हैं, लेकिन इसका असर जरूर दिखा है. इसे देश की अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आई है और कालेधन पर कुछ हद तक नियंत्रण दिखा. यही वजह थी कि मोदी के नोटबंदी के फैसले को देश की जनता का भरपूर सहयोग मिला. क्योंकि देश की आवाम भ्रष्टाचार और कालेधन से आजिज हो गई थी. बीजेपी ने भी इसे जन आंदोलन का रूप दिया, जिसे बाकायदा लोगों ने स्वीकार किया.

शर्मनाक: सुधीर चौधरी बोले, पेट्रोल-डीजल मंहगा हुआ तो दिक्कत क्या है, इंटरनेट डाटा तो सस्ता हुआ !

Sudhir Chaudhary Shameless

पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। हाईकोर्ट ने भी इस मामले में बोलने से इंकार कर दिया है। मगर गोदी मीडिया मोदी सरकार का बचाव करने में लगा हुआ है। ऐसा इसलिए क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतों पर विपक्ष ने भारत बंद बुलाया. इसके बाद जी न्यूज़ के एंकर और खुद को पत्रकार कहने वाले सुधीर चौधरी ने जो कहा वो अपने आप में इतिहास है।

दरअसल हर रोज रात के नौ बजे जी न्यूज़ पर सुधीर चौधरी सरकार का बचाव करने उतर आते है। चाहे वो तेल की बढ़ती कीमतें हों या फिर बेरोजगारी पर पकौड़े की दुकान खुलवाने की प्रधानमंत्री मोदी की सलाह। हर चीज़ को बड़े ही आसान शब्दों में गुमराह करने का हुनर डीएनए के प्राइम टाइम एंकर के पास है।

सुधीर चौधरी ने पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों पर जनता को समझाने की कोशिश की। बताया कैसे साल 2014 में जो चीजें महंगी थी वो अब सस्ती हो गई हैं। रामराज्य का माहौल है, जनता सुखी जीवन जी रही है, पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने से उन्हें फर्क नहीं पड़ता।

ज़ी के एंकर ने समझाया कि कैसे साल 2014 में एक जीबी डेटा 270 रु का था और अब यानी साल 2018 में मात्र 19 रु का हो गया है। मगर ये बताना भूल गए कि सवा सौ करोड़ की आबादी वाले इस देश में कितने लोग है इन्टरनेट का प्रयोग कर रहे है।

sudhir chaudhary funny
sudhir chaudhary funny

नोटबंदी का दौर और उसके ऑफ्टरशॉक्स खत्म हो चुके हैं, लेकिन उससे जुड़े मजेदार वीडियो सोशल मीडिया पर अब भी धमाल मचा रहे हैं। अपने मजेदार वीडियो के लिए मशहूर एआईबी ने ऐसा ही एक वीडियो बनाया था जिसे सोशल मीडिया पर एक बार फिर से लोग पंसद कर रहे हैं। इस वीडियो में देश के एक नामी हिन्दी न्यूज चैनल जी न्यूज के चर्चित चेहरे सुधीर चौधरी पर तंज कसा गया है, वीडियो में दो लोग सुधीर चौधरी पर हल्के फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं। जब नोटबंदी के दौरान सरकार ने 2 हजार रुपये के नये नोट जारी किये तो उससे जुड़ी तमाम तरह की अफवाहें चल पड़ी। कुछ लोग कह रहे थे इस नोट में चिप लगा है जिससे नोट का लोकेशन पता चल पाता है, तो कुछ कहना था कि इसमें पीएम मोदी नज़र आते हैं।

ऐसे ही एक रिपोर्ट में जी न्यूज के सीनियर एंकर सुधीर चौधरी बताते हैं कि कालेधन पर रोक लगाने के लिए स्टेट ऑफ द आर्ट नैनो टेक्नॉलजी का इस्तेमाल होगा। इस नोट में NGC यानी कि नैनो जीपीएस चिप लगाया जाएगा, इस चिप की मदद से सरकारी एजेंसियां जरुरत पड़ने पर नोट के लोकेशन का पता लगा सकेंगी। आगे इस वीडियो में सुधीर चौधरी बताते हैं कि जब भी सिक्युरिटी एंजेसियों को इन नोटों का लोकेशन जानना होगा, वे सैटेलाइट के जरिये सिग्नल इन चिप्स को भेजेंगे, नोटों में लगे ये चिप्स सैटेलाइट को सिग्नल रिफ्लेक्ट कर अपना लोकेशन बताएंगी। सुधीर चौधरी के इस बयान पर AIB के एंकर चुटकी लेते दिख रहे हैं, AIB का एक एंकर कहता है कि सुधीर चौधरी और कहते हैं कि जितने साइंटिफिक टर्म का इस्तेमाल सुधीर चौधरी इस रिपोर्ट में कर रहे हैं उतना तो इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान हम वाइवा में करते थे जब हमें कुछ भी नहीं आता था।

sudhir chaudhary nano chip
sudhir chaudhary nano chip

इस वीडियो को फेसबुक पर अनओफिशियल पीएमओ इंडिया नाम के यूजर ने जारी किया है। दो दिन में इस वीडियो को सवा लाख लोग देख चुके हैं, जबकि लगभग ढाई हजार लोगों ने इसे शेयर किया है और 5 हजार लोगों ने इसे लाइक किया है। फेसबुक पर लगातार लोग इस वीडियो को देख रहे हैं। इस वीडियो पर लोग अलग अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, अनुराग अरोरा नाम के यूजर ने लिखा है कि जी न्यूज में सच दिखाने की हिम्मत है, जी न्यूज ने पश्चिम बंगाल के मालदा में दंगे से जुड़ी खबर दिखाई जबकि दूसरे चैनल बैठे रहे, जबकि सफां मुहम्मद नाम के शख्स ने लिखा है कि इस वीडियो को देखकर ‘भक्त’ भाग जाएंगे।

इंग्लेंडः 50 पौंड पर टीपू सुल्तान की वंशज नूर इनायत खान की फ़ोटो छाप रहा है बैंक ऑफ इंग्लैंड,जानिए पूरा मामला?

Tipu Sultan Relative on Pound

नई दिल्ली – बैंक ऑफ इंग्लैंड ने 50 पाउंड की नई करेंसी छापने की घोषणा की है जिसमें वो अपने पूर्व क्रांतिकारियों की फ़ोटो छापकर उन्हें श्रद्धांजलि देने चाहते हैं,भारत के सबसे बहादुर बादशाह शेर मैसूर टीपू सुल्तान की वंशज नूर इनायत खान की फ़ोटो को भी शामिल किया गया है। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने हाल ही में 2020 से प्रिंट में जाने के लिए बड़े मूल्य नोट के नए बहुलक संस्करण की योजना की घोषणा की थी और संकेत दिया था कि यह नए अक्षरों पर संभावित पात्रों के लिए सार्वजनिक नामांकन आमंत्रित करेगा।

Haider ali tipu
Haider ali tipu

इस हफ्ते के शुरू में शुरू किए गए अभियान के पक्ष में एक ऑनलाइन याचिका ने बुधवार तक 1,200 से अधिक हस्ताक्षरों को आकर्षित कर लिया है, खान को पहली जातीय अल्पसंख्यक ब्रिटिश महिला माना जाता है। बता दें की नूर का जन्म 1914 में मॉस्को में हुआ था लेकिन उनकी परवरिश फ्रांस में हुई और वे रहीं ब्रिटेन में। उनके अब्बा हिंदुस्तान से थे और सूफी मत को मानते थे। उनकी मां अमरीकन थीं लेकिन उन्होंने भी बाद में सूफी मत को अपना लिया था। दूसरे विश्व युद्ध के समय से परिवार पेरिस में रहता था।

Tipu Sultan Tank
Tipu Sultan Tank

लेकिन जर्मनी के हमले के बाद उन लोगों ने देश छोड़ने का फैसला किया। श्राबणी बसु नूर इनायत खान की याद में एक संगठन भी चलाती हैं। उन्होंने बताया, “नूर एक वालंटियर के तौर पर ब्रितानी सेना में शामिल हो गईं। वह उस देश की मदद करना चाहती थीं जिसने उन्हें अपनाया था। उनका मकसद फासीवाद से लड़ना था।”

बाद में वो एयरफोर्स की सहायक महिला यूनिट में भर्ती हो गईं। ये 1940 की बात है। फ्रेंच बोलने में उनकी महारत ने स्पेशल ऑपरेशन एग्जिक्यूटिव के सदस्यों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस गुप्त संगठन को ब्रितानी प्रधानमंत्री चर्चिल ने बनाया था जिसका काम नाजी विस्तारवाद के दौरान यूरोप में छापामार कार्रवाई को बढ़ावा देना था।

खुफिया अभियान

महज तीन साल के भीतर 1943 में नूर ब्रितानी सेना की एक सीक्रेट एजेंट बन गईं। श्राबनी बसु कहती हैं कि नूर एक सूफी थीं, इसलिए वे हिंसा पर यकीन नहीं करती थीं लेकिन उन्हें मालूम था कि इस जंग को उन्हें लड़ना था। नूर की विचारधारा की वजह से उनके कई सहयोगी ऐसा सोचते थे कि उनका व्यक्ति खुफिया अभियानों के लिए उपयुक्त नहीं है।

एक मौके पर तो उन्होंने यह भी कह दिया कि मैं झूठ नहीं बोल सकूंगी। बसु बताती हैं, “ये बात किसी ऐसे सिक्रेट एजेंट की जिंदगी का हिस्सा नहीं हो सकती हैं जो अपना असली नाम तक का इस्तेमाल न करता हो और जिसके पास एक फर्जी पासपोर्ट हो।”

ब्रिटेन के नेशनल आर्काइव्स के दस्तावेजों के मुताबिक इसके बावजूद नूर के आला अफसरों को लगता था कि उनका किरदार एक दृढ़ इरादे वाली महिला का है। उन्हें जो जिम्मेदारी दी गई, वो बहुत खतरनाक किस्म की थी। नूर को एक रेडियो ऑपरेटर के तौर पर ट्रेन किया गया और जून, 1943 में उन्हें फ्रांस भेज दिया गया।

Noor Inayat Khan
Noor Inayat Khan

इस तरह के अभियान में पकड़े जाने वाले लोगों को हमेशा के लिए बंधक बनाए जाने का खतरा रहता था। जर्मन सीक्रेट पुलिस ‘गेस्टापो’ इन इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स की पहचान और इनके स्रोत को पकड़ सकती थी। बसु के मुताबिक उनकी खतरनाक भूमिका को देखते हुए कई लोग मानते थे कि फ्रांस में वह छह हफ्ते से अधिक जीवित नहीं रह पाएंगी। नूर के साथ काम कर रहे दूसरे एजेंटों की जल्द ही पहचान कर ली गई। उनमें से ज्यादातर गिरफ्तार कर लिए गए लेकिन नूर फरार होने में कामयाब रहीं।

इसके बाद भी जर्मन पुलिस की नाक के नीच नूर ने फ्रांस में अपना ऑपरेशन जारी रखा। लेकिन अक्टूबर, 1943 में नूर धोखे का शिकार हो गईं। श्राबनी बसु कहती हैं, “उनके किसी सहयोगी की बहन ने जर्मनों के सामने उनका राज जाहिर कर दिया। वह लड़की ईर्ष्या का शिकार हो गई थी क्योंकि नूर हसीन थीं और हर कोई उन्हें पसंद करता था।”

इसके बाद जर्मन पुलिस ने उन्हें एक अपार्टमेंट से गिरफ्तार कर लिया। लेकिन नूर ने आसानी से सरेंडर नहीं किया। वह लड़ीं और बसु के मुताबिक छह हट्टे-कट्टे पुलिस अधिकारियों ने मिलकर उन्हें काबू में किया। दो मौकों पर उन्होंने भागने की कोशिश की लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाईं। जर्मन एजेंटों ने ब्रितानी ऑपरेशन के बारे में जानकारी निकलवाने के लिए नूर को बहुत प्रताड़ित किया।

लेकिन नूर अपने नोटबुक्स नष्ट नहीं कर पाई थीं और इससे मिली जानकारी के आधार पर जर्मनों ने कुछ ब्रितानी एजेंटों को गिरफ्तार कर लिया। कैदी के रूप में एक साल गुजारने के बाद उन्हें दक्षिणी जर्मनी के एक यातना शिविर में भेज दिया गया जहां उन्हें नए सिरे से प्रताड़ित किया गया। बाद में नाजियों ने उन्हें तीन अन्य महिला जासूसों के साथ गोली मार दी।

मौत के वक्त उनकी उम्र महज 30 साल थी। इस घटना के साक्षियों का कहना है कि मौत के वक्त उन्होंने आजादी का नारा दिया था। नूर की बहादुरी को उनकी मौत के बाद फ्रांस में ‘वॉर क्रॉस’ देकर सम्मानित किया गया। ब्रिटेन में उन्हें क्रॉस सेंट जॉर्ज दिया गया। अब तक केवल तीन और महिलाओं को इस सम्मान से नवाजा गया है।

कांग्रेस का वचन, सत्ता मिलने पर होगा हर जिले में गौशाला

Rahul with Cow

कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के लिए अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। कांग्रेस ने इस अपना ‘वचन पत्र’ बताया है, और जनता के लिए वादों की झड़ी लगा दी है.

Rahul Ji ka Hah Gaay ke sath
Rahul Ji ka Hah Gaay ke sath

भोपाल में घोषणा पत्र जारी करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस का वचन पत्र अलग-अलग विषयों पर आधारित है। कमलनाथ ने कहा कि महिलाओं को सक्षम बनाने के लिए उन्हें स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जाएगा.

कमलनाथ ने मंडी शुल्क को 1 फीसदी करने का वादा किया। उन्होंने कहा कि अगर राज्य में कांग्रेस सत्ता में आती है तो दैनिक वेतन भोगी और सफाई कर्मचारियों को स्थायी किया जाएगा। वहीं एमपी कांग्रेस के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वचन पत्र जारी करते हुए कहा कि हर परिवार में एक बेरोजगार एक युवा को कांग्रेस देगी 10 हज़ार रुपये प्रति महीना देगी जब तक कि उसको नौकरी ना मिल जाए.

Rahul Gandhi Love India
Rahul Gandhi Love India

उन्होंने ऐलान किया कि एमपी के हर जिले के 10वीं टॉपर को एक लैपटॉप मुफ्त में सरकार देगी. कांग्रेस ने राज्य में विधान परिषद के गठन का भी वादा किया है। यही नहीं कमलनाथ ने कहा कि अगर सूबे में कांग्रेस की सरकार बनती है तो बेटियों के विवाह के लिए 51 हजार रुपये का अनुदान भी सरकार देगी.

राज्य सरकार ने सत्ता में आने पर एमपी के सभी पंचायतों में एक गोशाला बनाने का वादा किया है. एमपी में कांग्रेस की ओर से सीएम पद के दावेदारों में शामिल कमलनाथ ने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो किसानों का कर्जा माफ किया जाएगा, साथ ही किसानों का बिजली बिल आधा कर दिया जाएगा.

कमलनाथ ने जन आयोग का गठन कर करप्शन के खिलाफ बड़ी लड़ाई की घोषणा की है। सामाजिक सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि को 300 रुपये से बढ़ाकर 1000 हजार रुपये किया जाएगा.

किसी दिन ये नेता सुप्रीम कोर्ट से कह देंगे कि जनादेश हमारे पास है, फैसला हम करेंगे- रवीश कुमार

ravish kumar On Babri masjid

Ravish Kumar on Supreme Court Diwali order

रात 10 बजते ही भारत का सुप्रीम कोर्ट अल्पसंख्यक की तरह सहमा-दुबका खड़ा नज़र आने लगा. कहां तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश बहुमत/बहुसंख्यक की इच्छा हो जानी चाहिए थी मगर यहां तो बहुमत के नाम पर बहुसंख्यक सुप्रीम कोर्ट को अपनी इच्छा का आदेश देने लगा है.

10 बजते ही उसका एक बड़ा हिस्सा सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करने लगा. 23 अक्टूबर का आदेश कि सिर्फ रात आठ से दस के बीच ही पटाखे फोड़े जाएंगे, धुआं-धुआं हो चुका था. सुप्रीम कोर्ट की इच्छा अब सुप्रीम नहीं रही.

आज़ाद भारत के इतिहास की यह सबसे शर्मनाक दिवाली रही. जिन लोगों ने भी 10 बजे के बाद पटाखे फोड़े हैं या तो वे वाकई मासूम थे या फिर जान रहे थे कि वे क्या कर रहे हैं. ये लोग परंपरा के भी अपराधी हैं और संविधान के भी अपराधी हैं.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश व्यावहारिक नहीं था. सरकार अगर आदेशों को लागू न करे तो सुप्रीम कोर्ट का हर आदेश ग़ैर व्यावहारिक हो सकता है. एक दिन ये नेता यह भी कह देंगे कि सुप्रीम कोर्ट का होना ही व्यावहारिक नहीं है. हमें जनादेश मिला है, फैसला भी हमीं करेंगे.

पटाखे न छोड़ने का आदेश 23 अक्टूबर को आया था मगर भीड़ की हिंसा पर काबू पाने का आदेश तो जुलाई में आया था. कोर्ट ने ज़िला स्तर पर पुलिस को क्या करना है, इसका पूरा खाका बना दिया था. फिर भी दशहरे के बाद बिहार के सीतामढ़ी में क्या हुआ.

यहां पुलिस ने जिस रास्ते से मूर्ति विसर्जन का जुलूस नहीं ले जाने को कहा था, भीड़ उसी इलाके से ले जाने की ज़िद पर अड़ गई. दोनों तरफ से पथराव शुरू हो गया. 80 साल के जैनुल अंसारी को भीड़ ने पीट-पीट कर मार दिया.

भीड़ की हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तीन महीने बाद भी एक बुज़ुर्ग मार दिया गया. मार देने के बाद जैनुल अंसारी के शव को जलाने की भी कोशिश हुई. क्या अब हम ये कहेंगे कि भीड़ की हिंसा काबू नहीं की जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू ही नहीं हो सकता. क्या बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यह कहना चाहते हैं?

इसलिए सवाल यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश व्यावहारिक था. सवाल यह है कि जिन पर आदेश लागू कराने की ज़िम्मेदारी है क्या उनकी भाषा और करतूत संवैधानिक है? क्या प्रधानमंत्री ने पटाखे नहीं छोड़ने की अपील की?

क्या अमित शाह ने अपील की, क्या किसी भी मुख्यमंत्री ने पटाखे न छोड़ने की अपील की? सरकार के पास अगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू कराने का ढांचा और इरादा नहीं है तो फिर सुप्रीम कोर्ट को ही सरकार से पूछ लेना चाहिए कि हम आदेश देना चाहते हैं पहले आप बता दें कि आप लागू करा पाएंगे या नहीं.

Ravish Kumar on Supreme Court Diwali order

‘मैं केरल की कम्युनिस्ट सरकार को चेतावनी देने आया हूं, सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के नाम से भगवान अयप्पा के भक्तों का दमन न करें. केरल सरकार सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट की आड़ में भगवान अयप्पा के भक्तों पर अत्याचार बंद करे. ये कम्युनिस्ट सरकार कान खोल कर सुन ले, जिस प्रकार से भगवान अयप्पा के भक्तों पर दमन का कुचक्र चला रहे हो, भारतीय जनता पार्टी पूरे देश भर के केरल के आस्थावान भक्तों के साथ चट्टान की तरह खड़ी रहेगी. मैं मुख्यमंत्री विजयन को चेतावनी देने आया हूं कि अगर आपने यह कुचक्र दमन का बंद नहीं किया तो बीजेपी का कार्यकर्ता आपकी सरकार की ईंट से ईंट बजा देगा. आपकी सरकार ज़्यादा दिन नहीं चल सकेगी. जहां तक आस्था का सवाल है मैं मानता हूं कि बीजेपी का कार्यकर्ता भगवान अयप्पा के भक्तों के साथ चट्टान की तरह खड़ा रहेगा. हमें कोई डिगा नहीं सकता है.’

यह अमित शाह की भाषा है, जो भारत में दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. जिस पार्टी की केंद्र और 19 राज्यों में सरकार है. ये आस्था के सवाल पर भक्तों के साथ हैं और इनके भाषण में आपको कहीं भी नहीं सुनाई देगा कि ये सुप्रीम कोर्ट के आदेश के साथ हैं. बल्कि भाषा सुप्रीम कोर्ट के ख़िलाफ़ है.

यह भाषा पहली बार नहीं बोली जा रही है. 1992 में भी बोली गई थी. तब तो सुप्रीम कोर्ट को लिखकर भरोसा दिया गया था मगर उसकी भी परवाह नहीं की गई. अब तो सुप्रीम कोर्ट के लिखे हुए आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.

अमित शाह केरल के मुख्यमंत्री को चुनौती दे रहे हैं कि आप सुप्रीम कोर्ट के अनेक आदेश लागू नहीं कर सके, सिर्फ एक ही आदेश को लागू करने के पीछे क्यों पड़े. क्या अमित शाह साफ-साफ नहीं कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने की हिम्मत कैसे की?

आप केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की भाषा को सुनिए. कैसे सुप्रीम कोर्ट को चुनौती दी जा रही है. गिरिराज सिंह हिंदू सब्र के टूटने की बात कर रहे हैं. दिल्ली में धार्मिक नेता जमा होते हैं, प्रधानमंत्री को राम का अवतार कहते हैं और सुप्रीम कोर्ट को मंदिर विरोधी. वहां इस तरह के बयान दिए गए कि सुप्रीम कोर्ट में मंदिर विरोधी लोग हैं.

धर्म के दायरे से लगातार सुप्रीम कोर्ट की साख़ पर हमला हो रहा है. उसके वजूद पर हमला हो रहा है. यही बात अल्पसंख्यक समुदाय का कोई सनकी मौलाना कह देता तो गोदी मीडिया आग उगलने लगता.

न्यूज़ एंकर दंगों के पहले बंटने वाले पम्फलेट की भाषा अब खुलेआम बोलने लगे हैं. अब समझ में आ रहा है, सुप्रीम कोर्ट को चुनौती देने वाली भाषा से दिक्कत नहीं है. यह भाषा कौन बोल रहा है, उसका मज़हब क्या है, उसकी पार्टी क्या है, इससे दिक्कत है. सुप्रीम कोर्ट को कौन चुनौती दे सकता है, यह धर्म और उसके कपड़े के रंग से तय होगा.

दिवाली की रात दस बजे के बाद पटाखे छोड़ने वाले यही भाषा बोल रहे थे. जिन लोगों ने सिर्फ पटाखों का शोर सुना, उन्होंने कुछ नहीं सुना. उन्हें यह सुनना चाहिए था जिसकी आहट से हमारी पब्लिक स्पेस भर गई है.

न्यूज़ चैनलों की भाषा और उनके स्क्रीन के रंग देखिए. मीडिया 1992 में भी सांप्रदायिक हो गया था. 2018 में उससे अधिक सांप्रदायिक हो गया है. यह स्थिति पहले से भी ख़तरनाक है. सरकार चलाने वालों और उनके समर्थकों की भाषा भीड़ को सामान्य बना रही है.

उसे आने वाले वक्त के लिए तैयार कर रही है. जैसे ही आप हिंसा और अवमानना की भाषा के प्रति सामान्य होने लगते हैं, आप उस भीड़ में शामिल होने और हिंसा करने के लिए ख़ुद को तैयार करने लगते हैं.

दिवाली की आधी रात रौशनी से जहां देश जगमगाने के भ्रम में डूबा था, वहीं इस रौशनी के अंधेरे में हमारा सुप्रीम कोर्ट भीड़ से घेर लिए गए एक अल्पमत-अल्पसंख्यक की तरह अकेला खड़ा था.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्बन डाईआक्साइड की परतें जमने लगी हैं. ऑर्डर-ऑर्डर की आवाज़ आस्था से बनी भीड़ के बीच खोती चली जा रही है. योर ऑनर, योर ऑनर बोलने वाले लोग सुप्रीम कोर्ट के ऑनर से खिलवाड़ कर रहे हैं.

जो चुप हैं, वो अपने हाथ से बनाई संस्थाओं के मिटाने का इतिहास रच रहे हैं. शुक्रिया उन बच्चों का जो सुप्रीम कोर्ट को नहीं जानते, मगर हवा में तैर रहे उन काले कणों को जान गए हैं जिनसे उनका फेफड़ा ख़ाक हो सकता है.

भला हो उन नागरिकों का जो बच्चे नहीं हैं, मगर हवा में तैर रहे उन काले कणों को नहीं पहचान पा रहे हैं जिनसे लोकतंत्र ख़ाक हो सकता है. दिवाली मुबारक.

(यह लेख मूल रूप से रवीश कुमार के ब्लॉग कस्बा पर प्रकाशित हुआ है.)

भोपाल: BJP प्रवक्ता को बड़ा झटका, चुनाव आयोग ने संबित पात्रा के खिलाफ FIR की दर्ज

FIR against BJP Leader Sambit Patra

अक्सर अपने विवादित बयानों को लेकर मीडिया सुर्खियों में रहने वाले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, बीजेपी प्रवक्ता के खिलाफ 27 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के भोपाल में सड़क किनारे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पर आचार संहिता उल्लंघन के मामले में FIR दर्ज गई है।

बता दें कि, संबित पात्रा ने चुनाव आयोग की अनुमति के बिना भोपाल के एमपी नगर में सार्वजनिक स्थल पर पत्रकार वार्ता की थी। इस मामले में कांग्रेस की शिकायत पर निर्वाचन आयोग ने पुलिस में यह मामला दर्ज करवाया है।

FIR against BJP Leader Sambit Patra

वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी एल कान्ता राव ने समाचार एजेंसी ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में इसकी पुष्टि करते हुए शुक्रवार (9 नवंबर) को बताया कि संबित पात्रा का नाम सड़क किनारे की गई पत्रकार वार्ता से संबंधित मामले में जोड़ दिया गया है।

इससे पहले 27 अक्टूबर को भोपाल में सड़क किनारे पत्रकार वार्ता करने के लिए आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में एमपी नगर क्षेत्र में पात्रा की पत्रकार वार्ता के आयोजकों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराने का निर्देश दिया गया था। चुनाव आयोग का कहना था कि आयोजकों ने अनुमति के नियम व शर्तो का उल्लंघन किया है।

बता दें कि, 28 नवंबर को मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे, जबकि वोटो की गिनती 12 दिसंबर को होगी। गौरतलब है कि कांग्रेस पिछले 15 साल से मप्र में सत्ता से बाहर है। इस बार माना जा रहा है कि प्रदेश में शिवराज सिंह के खिलाफ एक माहौल है।

‘प्रधानमंत्री ने सूटबूट वाले दोस्तों को फायदा पहुंचाने के लिए युवाओं के सपने को मिट्टी में मिला दिया’- राहुल गांधी

Rahul Gandhi attacks PM Modi

देश में युवाओं को हर साल 2 लाख रोजगार देने का वादा करके सत्ता में आई बीजेपी के नेतृत्व वाली नरेंद्र मोदी सरकार के शासन में बेरोजगारी की दर दो साल के उच्चतम स्तर पर चले गई है। दरअसल, थिंक टैंक सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के मुताबिक इस साल अक्टूबर में देश में बेरोज़गारी की दर 6.9 फीसदी पर पहुंच गई है जो पिछले दो सालों में सबसे ज़्यादा है।  श्रमिक भागीदारी भी घटकर 42.4 फीसदी पर पहुंच गया है जो जनवरी 2016 के आंकड़ों से भी नीचे है।

इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश में बेरोज़गारी की दर दो साल के उच्चतम स्तर पर चले जाने संबंधी खबर को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि मोदी ने ‘सूटबूट वाले दोस्तों को फायदा पहुंचाने और युवाओं के सपने को मिट्टी में मिलाने का काम किया है।’

Rahul Gandhi attacks PM Modi

भाषा के हवाले से NBT में छपी खबर के मुताबिक,  राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए ट्वीट किया, ‘‘2014-ठग विद्या 1: मुझे प्रधानमंत्री बनाओ, मैं 2 करोड़ रोज़गार दिलाऊँगा। 2016-ठग विद्या 2: नोटबंदी में मेरा साथ दो, मैं काला धन वापस लाऊंगा।2018- असलियत: सूट बूट वाले दोस्तों को राफेल में उड़ाऊंगा, नौजवानों के सपने मिट्टी में मिलाऊँगा।’’

इतना ही नहीं, छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले के पखनजोर कस्बे में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, ‘नोटबंदी के समय आप सभी लोग लंबी लंबी लाइनों में खड़े रहे लेकिन काला धन रखने वाला कोई एक व्यक्ति भी वहां नज़र नहीं आया। वास्तव में जब आप लोग लाइनों में खड़े थे तब नीरव मोदी, ललित मोदी और मेहुल चौकसी आपका पैसा लेकर देश से भाग गए।’

 

मध्यप्रदेश चुनाव: कांग्रेस ने CM शिवराज के खिलाफ पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव को बनाया उम्मीदवार, अरुण बोले- यह लड़ाई असली और नकली किसान पुत्र के बीच होगी

Congress fields Arun Yadav against CM Shivraj

मध्य प्रदेश में 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई है। जहां एक तरफ राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी सत्ता बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश में जुटी है।

वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी के नेताओं को घेरने के लिए कारगर रणनीति बना रही है। जिसके चलते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ कांग्रेस ने अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव को बुधनी विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है।

न्यूज एजेसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस की ओर से गुरुवार रात जारी सूची में अरुण यादव का नाम है। अरुण यादव पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष हैं। शुक्रवार को अपने भाई सचिन यादव के साथ बुधनी पहुंचकर अरुण ने शिवराज सिंह के खिलाफ नामांकन दाखिल किया। बता दें कि, मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए 28 नवंबर को वोटिंग की जाएंगी, जबकि वोटो की गिनती 12 दिसंबर को होगी।

फ़र्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, वहीं, अरुण यादव ने नामांकन भरने के बाद मुख्यमंत्री चौहान पर बड़ा हमला बोला। अरुण यादव ने कहा कि हम शिवराज सिंह चौहान को हराएंगे। मुझे इस बात की खुशी है कि पार्टी ने मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है। हम लोग बुधनी जीतेंगे।

उन्होंने कहा कि हम शिवराज जी से लैंड माफिया, किसानों की आत्म हत्या और रेप के मामलों पर सवाल करेंगे। हम बीजेपी का पर्दाफाश भी करेंगे। शुक्रवार को सीहोर जिले की बुधनी से सीट से नामांकन दाखिल करने के बाद उन्होंने कहा कि मुझे मां नर्मदा ने अपनी रेत में हुए अवैध उत्खनन के 1-1 कण व भ्रष्टाचार का हिसाब लेने के लिए बुधनी बुलाया है।

मैं शिवराज को घेरने नहीं, पूरे दृढ़विश्वास के उन्हें हराने आया हूं। पूरी पार्टी मेरे साथ चट्टान की तरह खड़ी है। अरुण यादव ने कहा, यह लड़ाई किसान के नकली और असली पुत्र के बीच होगी।

Congress fields Arun Yadav against CM Shivraj

अरुण ने कहा, शिवराज कैबिनेट में 18 मंत्री खेती करने वाले हैं जिनकी आय कृषि के कारण पिछले 4 सालों में 144 प्रतिशत बढ़ी है। ऐसा 11 प्रत्याशियों के हाल ही में भरे नामांकन में सामने आया है। यदि यह सच है तो सीएम बताएं प्रदेश में उनके कार्यकाल में अब तक 36 हजार किसानों ने आत्महत्या क्यों की?

उन्होंने शिवराज सिंह चौहान से सवाल पूछा, प्रदेश में सबसे अधिक आत्महत्या करने वाले किसान उनके गृह जिले सीहोर के ही क्यों है? पिछले 14 सालों में शिवराज ने बुधनी के कितने युवाओं को रोजगार दिया?

अरुण यादव ने कहा, राहुल जी ने जो विश्वास दिखाया उसके लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। पिछले साढ़े चार वर्षों में प्रदेश अध्यक्ष पद पर रहते हुए जनता के दुख दर्द का सहभागी बना हूं और जनता के दुःख को बहुत करीब से देखा है। मैं किसानों, युवाओं और महिलाओं की लड़ाई आखरी सांस तक लड़ता रहूंगा।

बता दें कि, अरुण यादव खंडवा से दो बार सांसद भी रह चुके हैं। 2014 लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। अरुण यादव की एक और पहचान है, वे मध्य प्रदेश के कद्दावर कांग्रेसी नेता सुभाष यादव के बेटे हैं।

नोटबंदी से हुई तबाही की मार से अब तक नहीं उबरे हैं लोग- पूर्व पीएम मनमोहन सिंह

Manmohan Singh on 2 years of Demonetisation

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा देश में नोटबंदी लागू किये आज 2 साल पूरे हो गए हैं। साल 2016 में लागू इस फैसले का असर देश की अर्थव्यवस्था पर कितना गहरा पड़ा है, इसका अंदाजा देश में पिछले 2 सालों के दौरान लगातार बढ़ रही बेरोजगारी और नौकरी के कम होते अवसरों से चलता है। पिछले दो साल में देश में रोजगार का संकट और गंभीर स्तर पर पहुंच गया है।

देश में आर्थिक मामलों की प्रमुख थिंक टैंक सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) की ताजा रिपोर्ट इस बात की गवाही देती है। सीएमआईई के मुताबिक इस साल अक्टूबर में देश में बेरोजगारी की दर 6.9 फीसदी पर पहुंच गई है, जो पिछले दो सालों में सबसे ज्यादा है।

इतना ही नहीं, नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार द्वारा किए तमाम दावे झूठे साबित हुए हैं। सरकार ने कहा था कि इसके पीछे मुख्य मकसद कालाधन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है, लेकिन आरबीआई की रिपोर्ट ने सरकार के दावों पोल खोलकर रख दी है। आरबीआई के अनुसार अब तक कुल 15 लाख 31 हजार करोड़ रुपए के पुराने नोट वापस आ गए हैं।

Notebandi

उल्टा, नोटबंदी के वजह से देश की जनता को भारी मुश्किलों का सामना करना पढ़ा। 120 लोगों की जाने चली गई। अर्थव्यवस्था को लाखों करोड़ों का नुकसान हो गया। कई छोटे उद्योग धंधे बंद हो गए। लाखों लोग बेरोजगार हो गए।

वहीं, विपक्ष नोटबंदी के दो साल पूरे होने के मौके पर मोदी सरकार जमकर निशाना साध रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोदी सरकार के नोटबंदी के कदम को ‘‘विपदा’’ करार दिया। तो वहीं, कांग्रेस ने नोटबंदी को आजादी के बाद सबसे बड़ा ‘घोटाला’ बताया है।

Manmohan Singh on 2 years of Demonetisation

नोटबंदी से हुई तबाही की मार से अब तक नहीं उबरे हैं लोग- पूर्व पीएम 

इसी बीच , फ़र्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के दो साल पूरे होने के मौके पर नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर निशाना साधा और कहा कि अर्थव्यवस्था की ‘तबाही’ वाले इस कदम का असर अब स्पष्ट हो चुका है और इससे देश का हर व्यक्ति प्रभावित हुआ. सिंह ने एक बयान में कहा कि मोदी सरकार को अब ऐसा कोई आर्थिक कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे अर्थव्यवस्था के संदर्भ में अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो.

उन्होंने कहा, ‘मोदी सरकार ने 2016 में गलत ढंग से और सही तरीके से विचार किए बिना नोटबंदी का कदम उठाया था. आज उसके दो साल पूरे हो गए. भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज के साथ की गई इस तबाही का असर अब सभी के सामने स्पष्ट है.’ उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी से हर व्यक्ति प्रभावित हुआ, चाहे वह किसी भी उम्र का हो, किसी लैंगिक समूह का हो, किसी धर्म का हो, किसी पेशे का हो. हर किसी पर इसका असर पड़ा.’

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के मझोले और छोटे कारोबार अब भी नोटबंदी की मार से उबर नहीं पाए हैं. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा की जिसके तहत, उन दिनों चल रहे 500 रुपये और एक हजार रुपये के नोट चलन से बाहर हो गए थे।