CBI : अलोक वर्मा केस में मोदी सरकार पर उठी ऊँगली, मोदी को महंगा पड़ा सीबीआई से पंगा, जाने मामला

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मोदी सरकार को सत्ता में आये चार साल से ज्यादा का वक़्त बीत चुका है और अब यह सरकार का कार्यकाल ख़त्म होने को आया है. इतने सालों में शायद ही कोई ऐसा महीना गुज़रा होगा, जिसमे यह सरकार और उनके काम करने के तरीके विवादों में न आये हो. ऐसा मान लिया जा रहा है अब कि इस सरकार से सवाल करना या इसके इशारों पर काम न करने वाले अधिकारी पर गाज गिरजा लाज़मी है और इस सियासत में अब सीबीआई निदेशक पद से हटाए गए आलोक वर्मा भी भेंट चढ़ चुके है.

मोदी सरकार ने उन्हें अपने पद से हटा दिया और उनका दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया लेकिन आलोक शर्मा को यह नागवार गुज़रा और उन्होंने अपनी नौकरी से ही इस्तीफा दे दिया. इसके बाद उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए खुद को बेक़सूर बताया. वही इस बीच एक और चौंकाने वाली बात सामने आ रही है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके पटनायक ने इस मामले पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि आलोचक शर्मा को पद से यूँ हटाना गलत है और उन्होंने कहा है कि उनके खिलाफ करप्शन के आरोप नहीं थे, जैसा की कहा जा रहा है.

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हिन्दुस्तान टाइम्स से बात चीत के दौरान उन्होंने यह बात कही है. उन्होंने आगे कहा है कि चश्मदीद ने उन पर करप्शन के कोई आरोप नहीं लगाए थे.
उन्होंने यह साफ़ किया है कि सतीश बाबू ने ऐसा कोई आरोप आलोक शर्मा पर नहीं लगाया, जिसमे पैसे लेने की बात कही गई हो.

आपको बता दें कि राकेश अस्थाना ने अलोक शर्मा पर आरोप लगाया था कि उनका मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से गहरा कनेक्शन है. इसके अलावा आस्थाना ने कहा था कि आलोक शर्मा ने सतीश बाबू से दो करोड़ रुपये लिए. ऐसे में आलोक शर्मा के खिलाफ जो पूरा नैरेटिव खड़ा किया जा रहा है, वह पूरी तरफ बेबुनियाद और झूठा है.

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