सरकार नीति में मुसलमान युवाओं को शरीक करे – क़ादरी

muslim student organization India
  • मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ का एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन

नई दिल्ली, 12 अगस्त। देश में पहली बार मुस्लिम युवा छात्रों ने मिलकर राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में उन्हें सम्मिलित कर सहयोग लेने की अपील की है। अगर भारत सरकार नहीं जानती है कि विश्व पर वहाबी ख़तरे का स्तर कितना विशाल है तो हम उन्हें बता सकते हैं। यह बात आज एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में उभरकर सामने आई जिसे भारत के सबसे बड़े मुस्लिम छात्र संगठन मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ ने दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित किया था।

इस मौक़े पर खचाखच भरे स्पीकर हॉल में युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता और संगठन के पूर्व अध्यक्ष सैयद मुहम्मद क़ादरी ने कहाकि भारत एक बहुलवादी देश है और इसकी एकता को बनाए रखने के लिए युवा सबसे महती भूमिका निभा सकते हैं। प्राय देश में यह माहौल बनाया जा रहा है कि भारत का मुसलमान एक ज़िम्मेदार नागरिक नहीं है जबकि हमारा तो यह दावा है कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में शामिल किए जाने से मुस्लिम युवाओं की भूमिका का सही आंकलन हो सकेगा और राष्ट्रीय एकता के लिए यह आवश्यक तत्व है। उन्होंने कहाकि हम देश के निर्माण, प्रगति, सुरक्षा और स्थिरता को लेकर कई विकासवादी क़दम उठा सकते हैं। हमें गर्व है कि हमारे 38 वर्ष पुराने संगठन में यह कार्य बहुत ज़िम्मेदारी से निभाए जा रहे हैं। सैयद मुहम्मद क़ादरी ने उपस्थित युवाओं से अपील की कि वह देश को कमजोर करने वाली ताक़तों से डटकर मुकाबला करें और भारत की स्थिरता के लिए अपने प्राणों की बलि देने में भी पीछे नहीं रहें क्योंकि 1857 से लेकर 1947 तक चली 90 साल की क्रांति में मुसलमानों के बलिदान की बेशुमार कहानियाँ हैं और यह हमारे बुज़ुर्गों की सुन्नत है।

इस मौक़े पर तंज़ीम उलामा ए इस्लाम के अध्यक्ष और सभा के अध्यक्ष मुफ्ती अशफाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि आज़ादी औऱ ज़िम्मेदारी एक ही शाख़ के दो फूल हैं। हमें नहीं भूलना चाहिए कि संभाल कर नहीं रखी गई आज़ादी गैर जिम्मेदारी के साथ ख़तरे में पड़ जाती है। हुसैन ने युवाओं को पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद की कई उक्तियों और क़ुरान के संदर्भ में समझाने की कोशिश की कि देश के प्रति ज़िम्मेदारी और प्रेम का नाम ही राष्ट्र प्रेम है। मुफ्ती अशफाक़ हुसैन ने कहाकि देश और दुनिया को वहाबी विचारधारा से गंभीर ख़तरे हैं और तथाकथित इस्लामी आतंकवाद इसी वहाबी नीति का दुष्परिणाम है। अगर भारत सरकार समझना चाहे तो हम उनकी मदद कर सकते हैं लेकिन कम से कम मुसलमानों को साथ लेकर चलना पहले सीखे। उन्होंने कहाकि देश के साथ मुसलमान का प्रेम और बढ़ जाता है जबकि उसे नीति में भागीदारी मिले। नीति में भागीदारी को सत्ता में भागीदारी से बड़ा समझा जाना चाहिए क्योंकि सत्ता को नीति ही नियमित करती है। मुफ्ती अशफ़ाक़ हुसैन ने बताया कि हज़रत हुसैन ने मानवता की रक्षा के लिए अपने पवित्र प्राणों की बलि दे दी थी जो हमें राष्ट्र और मानवता के सेवा करने के लिए हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

सभा में मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष मुफ्ती ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही ने कहाकि देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण तत्वों को बचाने, विकसित करने और संजोने के लिए युवाओं को प्रेरित करना आवश्यक है। यह देखा जाना चाहिए कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर युवाओं को देश को कमज़ोर करने वाली ताक़तों, विचारधाराओं, साज़िश और गतिविधियों को समझने, सूंघने और सुलझाने का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। हमारे संगठन ने गौरवपूर्ण तरीक़े से इस चुनौती से निपटने के लिए युवाओं को वहाबी विचारधारा को समझने और इससे निपटने का प्रशिक्षण और शिक्षा दी जाती है। कई सफल प्रयोगों में हमने कई कट्टरवादी तत्वों को सूफ़ीवाद की विचारधारा की तरफ़ मोड़कर राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है।

अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी केरल सेंटर के शाहनवाज़ अहमद मलिक वारसी ने कहा कि देश में मानवाधिकार और सामाजिक न्याय के सम्मुख चुनौतियों से समाज में बहुत गंभीरता से विचार हो रहा है। मुसलमानों और दलित- जनजातियों को बेवजह निशाना बनाना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि देश की मूल भावना और सामाजिक ताना बाना निहित राजनीतिक स्वार्थों से अतिरिक्त है। इस पर गंभीरता से विचार करके सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने के प्रयासों और इसके लिए किए गए सूफ़ी आध्यात्मिक प्रयोगों पर चर्चा करना चाहिए। हमें गर्व है कि कई विश्वास, धर्म और नस्ल के लोगों के बीच भारतीय आध्यात्मिक सामाजिक समरसता के विचार को हमने सार्वजनिक किया है और इसके विकास, उत्थान और विस्तार के लिए हमको लगातार प्रयत्नशील रहना चाहिए, इसके लिए इंटरफेथ कॉन्फ्रेंस और सिम्पोज़ियम के बेशुमार कार्यक्रम किए जा चुके हैं और विश्वास है कि भविष्य में भी किए जाते रहेंगे।

सम्मलेन के संयोजक और कन्जुल इमान के एडिटर मौलाना ज़फरुद्दीन बरकाती ने कहाकि भारत का स्वभाव बहुलता में एकता में निहित है। इसलिए देश के सामने साम्प्रदायिक घटकों की चुनौती को कम करके नहीं आंका जा सकता। हर समुदाय को इससे निपटना चाहिए जिसमें मुसलमानों के बीच सबसे बेहतर सूफ़ी विचारधारा इसका निवारण प्रस्तुत करती है।

अम्बर मिस्बाही ने कहाकि हमें देश के प्रति जवाबदेही के लिए अन्तर सामाजिक कार्यक्रमों की आवश्यकता है क्योंकि देश में परस्पकर सामुदायिक अज्ञानता के अभाव में दूषित और असत्य जानकारी का आदान प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने तकनीक के बेहतर इस्तेमाल करने और इसे समाज, देश और खुद को मज़बूत करने में इस्तेमाल किए जाने पर बल दिया।

मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष शुजात अली क़ादरी ने कहाकि भारत का स्वभाव सामुदायिक है जिसे एक रंग, भाषा और सम्प्रदाय के तौर पर नहीं लाया जा सकता। हमें लगता है कि भारतीय मुस्लिम युवा जिसमें बहुमत सूफ़ी समुदाय का है, वह देश के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को समझता है। उन्होंने कहाकि रोज़गार और कौशल प्रशिक्षण से उसे अपने साथ लाया जा सकता है। इस मौक़े पर एक रेंडम सर्वे के आधार पर शुजात क़ादरी ने युवाओं से कई सवाल पूछे जिसके प्रत्युत्तर में उन्होंने एक छह सूत्रीय प्रतिवेदन का प्रारूप तैयार किया जिसे बाद में डाक से भारत सरकार के नाम भेजा जाएगा।

छह सूत्रीय प्रतिवेदन

इस मौक़े पर मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया ने सभा में उपस्थित लोगों के लिए छह सूत्रीय प्रतिवेदन पेश किया जिसमें देश की सुरक्षा, सामाजिक न्याय, आतंकवाद एवं कट्टरता से निवारण, रोज़गार एवं कौशल प्रबंधन, सामाजिक कार्यक्रम और पर्यावरण से जुड़े बिन्दुओं पर युवाओं को दिशा निर्देश दिए गए। इस मौक़े पर उपस्थित जनसमुदाय को यह प्रतिवेदन पढ़ कर सुनाया गया। सभी ने देश की नीति में मुस्लिम सूफ़ी युवाओं की भूमिका पर इस प्रतिवेदन को स्वीकार किया और इसे लागू किए जाने की भारत सरकार से अपील की।

यह भी रहे शामिल

सभा में कारी सगीर रिज़वी, मौलाना अब्दुल वाहिद, डॉ इमरान कुरैशी, MSO दिल्ली प्रदेश सचिव साकिब बरकाती, मुमताज़ अत्तारी, आफताब रिज़वी के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्र  भी शामिल रहे और देश की सलामती और सद्भावना के लिए सभी ने कार्यक्रम के अंत में दुआ माँगी।

ओवैसी की मांग में कुछ गलत भी तो नहीं

Owaisi Muslim Demand Correct

मुझे याद है कि देश के बंटवारे के बाद राजनीतिज्ञ और राजनयिक सैयद शहाबुद्दीन मुसलमानों का मत व्यक्त करते थे। उन्होंने अलग होने की बात तो नहीं कही लेकिन देश के भीतर ही मुसलमानों के लिए स्वशासन का सुझाव दिया था। उन्हें किसी ने गंभीरता से नहीं लिया, यहां तक कि मुसलमानों ने भी नहीं क्योंकि बंटवारा दोनों समुदायों के लिए मुसीबत लाया था।

Owaisi mODI bOSS
Owaisi mODI bOSS

अब आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने  सेना में मुसलमानों के लिए आरक्षण मांगा है। ओवैसी ने सही कहा है कि सेना में मुसलमानों की संख्या कम हो गई है लेकिन यह तो होना ही था क्योंकि बंटवारा मजहब के नाम पर हुआ और मुस्लिम सेना पाकिस्तान की तरफ चली गई। यह सोच गलत है। मुझे याद है कि संविधान सभा आरक्षण (सरदार पटेल ने मुसलमानों को 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव रखा था) पर बहस कर रही थी तो मुसलमान नेता उठे और कहा कि हमें आरक्षण नहीं चाहिए क्योंकि इसके कारण आगे चल कर पाकिस्तान बना।

ओवैसी की शिकायत है कि प्रधानमंत्री के 15 सूत्रीय कार्यक्रम में साफ तौर पर कहा गया है कि केन्द्र सरकार की नौकरियों में मुसलमानों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए हर तरह के प्रयास किए जाएंगे लेकिन बहुत कम किए गए। ओवैसी ने हाल ही में एक जनसभा में इसी बात का ध्यान दिलाया और लोगों ने ठीक ही उनके अद्र्धसैनिक बलों में भर्ती को धर्म से जोडऩे पर सवाल उठाया लेकिन ओवैसी ने अपने बयान का बचाव किया और कहा, ‘‘वे लोग पूरी तरह अनजान और घमंडी हैं और वे पढ़ते नहीं। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या यह मुद्दा प्रधानमंत्री के 15 सूत्रीय कार्यक्रम से जुड़ा नहीं है?

asaduddin owaisi
asaduddin owaisi

इन 15 कार्यक्रमों में 10वां कार्यक्रम राज्य तथा केन्द्र सरकारों में मुसलमानों के लिए नौकरी की बात करता है। नियम के अनुसार अगर 10 लोगों की भी भर्ती होनी है तो इनमें दलित, आदिवासी और मुस्लिम समुदाय के लोग होने चाहिएं।’’ उन्होंने कहा कि यह कार्मिक विभाग की ओर से जारी पत्र में है। ओवैसी ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के इस दावे को गलत बताया कि सरकारी नौकरियों में मुसलमानों का प्रतिशत बढ़ा है। ‘‘मैंने उनके गलत दावों का पर्दाफाश किया था।’’ उन्होंने कहा। उनके अनुसार,‘‘ सीआईएसएफ में सिर्फ 3.7 प्रतिशत मुसलमानों की भर्ती की गई है।

सी.आर.पी.एफ .में वे सिर्फ 5.5 प्रतिशत हैं और रैपिड एक्शन फोर्स में 6.9 प्रतिशत।’’ उन्होंने नरेन्द्र मोदी सरकार को सभी सरकारी संस्थानों में भर्ती के आंकड़े जारी करने की चुनौती दी। हैदराबाद के सांसद ने कहा कि सरकार को यह बताने के लिए कि कितने अल्पसंख्यकों की बहाली हुई है, बैंक, रेलवे और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों में भॢतयों के आंकड़े जारी करने चाहिएं। ‘‘भाजपा अल्पसंख्यकों के साथ न्याय नहीं कर रही है। सरकार से सवाल करने का मुझे पूरा हक है।’’ ओवैसी ने कहा। कांग्रेस अकेली पार्टी है जो मुसलमानों के दृष्टिकोण का समर्थन कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में राहुल गांधी, जिन्होंने आजमगढ़ की एक सभा मेें तीन तलाक को जारी रखने का समर्थन किया था, की टिप्पणी के आधार पर कांग्रेस पर मुसलमानों की पार्टी होने का आरोप लगाया।

‘‘पिछले दो दिनों से सुन रहा हूं कि नामदार नेता (राहुल गांधी को प्रधानमंत्री व्यंग्य से यही कह कर बुलाते हैं) ने कहा है कि कांग्रेस एक मुस्लिम पार्टी है। मुझे अचरज नहीं हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी एक बार कहा था कि देश के प्राकृतिक संसाधनों पर मुसलमानों का पहला हक है।’’ मोदी ने याद दिलाया। पूर्व प्रधानमंत्री ने 2006 में राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में कहा था, ‘‘यह सुनिश्चित करने के लिए कि अल्पसंख्यक, खासकर मुसलमान विकास में बराबरी से फायदा ले सकें, हमें मौलिक योजना बनानी पड़ेगी। संसाधनों पर उनका पहला हक होना चाहिए।’’ मोदी ने यह सवाल किया कि क्या कांग्रेस को सिर्फ मुसलमान पुरुषों की चिंता है या उनकी औरतों की भी। ‘‘मैं कांग्रेस के नामदार से पूछना चाहता हूं कि क्या यह पार्टी सिर्फ  मुसलमान पुरुषों के लिए है? वे तीन तलाक और निकाह हलाला के सवालों पर मुस्लिम औरतों के साथ खड़े नहीं होते।’’ उन्होंने कहा।

बात कुछ भी हो, मुसलमान सरकारी मामलों से जुड़ा हुआ नहीं महसूस करते। ओवैसी ठीक कहते हैं कि अगर देश के विकास में मुसलमान हिस्सा लेते हैं तो दुनिया के बाकी हिस्सों में भी लोग इस उदाहरण पर चलेंगे। वे उन संकीर्ण विचारों को  खुद छोड़ेंगे, जिन्हें वे समर्थन देते हैं।

मैंने देखा है कि मुसलमान नेता सह-अस्तित्व की शब्दावली में बात करते हैं मानो वे दो राष्ट्र हों। उन्हें यह समझना चाहिए कि सिर्फ एक ही राष्ट्र है भारत, और मजहब बाद में आता है। ज्यादा दिन नहीं हुए, मैं भाषण देने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवॢसटी गया था और यह देख कर अचरज में पड़ गया कि छात्र उम्मत, अपने समुदाय की बात करते हैं। उस समय के उप-कुलपति ने उन्हें यह कह कर शांत कराया कि एक पक्का भारतीय होने और एक पक्का मुसलमान होने के बीच कोई विरोध नहीं है।

Owaisi mODI bOSS
Owaisi mODI bOSS

मेरी भावना यह है कि हम पहले भारतीय हैं, फिर हिंदू, मुसलमान, सिख या ईसाई। देश के चरित्र को व्यक्त करने के लिए संविधान की प्रस्तावना में ‘सैकुलर’ शब्द है। इस शब्द को जोड़ने वाली उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं। जनता पार्टी ने उस सब को बदल दिया जो उन्होंने जोड़ा था, लेकिन प्रस्तावना को ज्यों का त्यों रहने दिया, बिना संशोधन के।

—कुलदीप नैय्यर

मुसलमान की लिंचिंग इस देश में वोट की खेती बन गया है

Muslim lynched India

कुछ लोगों का तर्क है कि मुसलमान गाय से दूरियां बना लें तो वे हराम मौत मरने से बच जायेंगे। मैं इस तर्क से सहमत नहीं हूं, क्योंकि मुसलमान का लिंचिंग करके मारा जाना इस देश में वोट की खेती बन गया है। अगर मुसलमान गाय के बजाय भैंस का व्यापार करने लगें तो क्या गारंटी है कि भैंस के लाने ले जाने पर गौआतंकी उनकी हत्या नहीं करेंगे ? इसकी गारंटी इसलिये नहीं ली जा सकती क्योंकि भैंसा यमराज का वाहन होता है इसलिये भैंस से भी भावनाओं को जोड़कर मुसलमानों की हत्या करने का बहाना तलाश लिया जायेगा।

Stop Muslim lynched India
Stop Muslim lynched India

जिस राजस्थान में पहलू खान, अकरम, और अब अकबर खान की गाय के नाम पर हत्या हुई है उसी राजस्थान की एक ऑडियो कुछ साल पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उधर कोई राजस्थान पुलिस का अधिकारी था और इधर दिल्ली से कोई गौरक्षा दल का पदाधिकारी बोल रहा था। गौरक्षा दल का पदाधिकारी कह रहा था कि गाय का सर फलां जगह मिला है इसमें किसका हाथ है? इस पर राजस्थान पुलिस का अधिकारी कह रहा था कि गाय अपने आप मरी थी और उसे कुत्ते खींच कर ले आये थे, पदाधिकारी बोला कि कहीं इसमें किसी का हाथ तो नहीं तो उस अधिकारी ने कहा नहीं, हमने जांच कर ली है इसमें कुत्ते ही गाय को खींच लाये थे। और अगर किसी दूसरे ‘कुत्तो’ की इसमें कोई भूमिका होती तो उनका हश्र भी ऐसा ही कर देता जैसा गाय का हुआ है। फिर उस पुलिस अधिकारी ने जोर का ठहाका लगाया, और फोन काट दिया। वह पुलिस अधिकारी एक पूरे समाज को कुत्ता कह रहा था, विडंबना देखिये उन्हीं के कांधों पर समाज की रक्षा की जिम्मेदारी हैं।

जब गाय के नाम पर हत्या करने वालों को महिमामंडन किया जाता हो, उन्हें फूल मालाऐं पहनाईं जाती हों, उन्हें भगत सिंह कहकर संबोधित किया जाता हो, और अगर कोई गौआतंकी डेंगू की वजह से मर जाये तो उसकी लाश पर तिरंगा ढ़ाप दिया जाता हो ऐसे में लिंचिंग की घटनाओं पर कैसे विराम लग सकता है?

इस देश में 30 – 35 फीसदी ऐसा तबका पैदा हो गया है जो सिर्फ मुसलमानों से नफरत करता है, उसे जीएसटी की मार मंजूर है, उसे नोटबंदी की मार मंजूर है, अच्छे दिन का लॉलीपॉप मंजूर है, बेरोजगारी मंजर है, मंहगाई मंजूर है लेकिन मुसलमान मंजूर नहीं। वह वर्ग सिर्फ ओ सिर्फ मुसलमानो से नफरत करने के लिये ही तैयार किया गया है।

Muslim lynched
Muslim lynched

उसे इससे परवाह नहीं कि टीवी चैनल पर बैठकर भारतीय मुसलमानों को गालियां देने वाला तारेक फतेह पाकिस्तानी यानी शत्रू देश का नागरिक है। उसे इसकी भी परवाह नहीं कि मुसलमानो को गालियां बकने वाली तस्लीमा नसरीन वही बंग्लादेशी है जिन्हें भारत से निकालने के लिये मुहिम चलाई जाती हैं। वह खुश है कि क्योंकि तारेक फतेह मुसलमानो को गालियां दे रहा है, इसलिये उस वर्ग को पाकिस्तानी भी मंजूर है।

इज़रायल फिलिस्तीनियों को मारता है तो भारत का वही वर्ग लाशों को विकेट गिरना बताता है, कश्मीर में बाढ़ आती है तो वही वर्ग सोशल मीडिया पर कहता है कि राहत सामग्री में कंडोम भी भेज दिये जायें, ताकि सेना के जवान अपनी ‘प्यास’ बुझा सकें। ऐसा कहकर वह भारतीय सेना का भी अपमान करता है। चूंकि मरने वाले मुसलमान हैं इसलिये सब मंजूर है।

देश के गृहमंत्री कहते हैं कि सबसे खतरनाक मॉबलिंचिंग 84 के सिक्ख दंगे थे, लेकिन वे भूल जाते हैं कि गुजरात 2002 जैसी मॉबलिंचिंग भी तो इसी देश में हुई है। दरअसल मुसलमान मारने का बहाना चाहिये फिर चाहे गाय हो या भैंस कोई न कोई बहाना तलाश कर मार दिया जायेगा, क्योंकि जब फिलिस्तीनियों के मरने पर भारत में जश्न मनाया जा सकता है फिर पहलू अखलाक, पहलू, अकबर के मरने जश्न तो बनता ही है।

एससी/एसटी सांसदों ने मोदी सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

SC ST MP against Modi

नई दिल्ली। एससी/एसटी एक्ट पर फैसला देने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एके गोयल को नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) का अध्यक्ष बनाए जाने पर एससी/एसटी सांसदों ने सवाल उठाया है. 23 जुलाई को मोदी सरकार में मंत्री रामविलास पासवान के घर पर एनडीए के दलित सांसदों की बैठक हुई जिसमें एससी/एसटी अत्याचार निरोधक कानून और सरकारी नौकरियों में प्रोमोशन में आरक्षण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. इसी बैठक में जस्टिस गोयल को हटाने के लिए दलित सांसदों ने सहमति दी थी. जस्टिस गोयल छह जुलाई को सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए थे और उसके बाद सरकार ने उन्हें एनजीटी अध्यक्ष नियुक्त किया था. एनडीए के सांसदों का कहना है कि जस्टिस गोयल की नियुक्ति से दलितों के बीच अच्छा संदेश नहीं गया है और इससे आगामी चुनावों में नुकसान हो सकता है.

इस बीच रामविलास पासवान के सांसद बेटे चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर एनजीटी अध्यक्ष को पद से बर्खास्त करने की मांग की है. साथ ही सरकार से एससी/एसटी एक्ट पर अध्यादेश लाने की मांग की है. चिराग पासवान ने पीएम को पत्र लिखकर कहा है कि जल्द से जल्द जस्टिस (रिटायर्ड) एके गोयल को एनजीटी चेयरमैन पद से बर्खास्त किया जाए. चिराग ने पत्र में कहा- ”संसद के चालू सत्र में विधेयक लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रभाव से अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के कानूनी सुरक्षा की व्यवस्था को बहाल किया जाए. अगर इसमें कोई अड़चन है तो संसद के चालू सत्र को दो दिन पहले खत्म कर अध्यादेश लाया जाए.”

dr b r ambedkar
dr b r ambedkar

बताते चलें कि 20 मार्च को जस्टिस गोयल और जस्टिस उदय उमेश ललित की पीठ ने एससी/एसटी एक्ट में बड़े बदलाव का एक्ट पारित किया था. इस आदेश के बाद दलित समाज की ओर से 2 अप्रैल को देश भर में बड़ा आंदोलन हुआ था. विपक्षी दलों और दलित चिंतकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने मजबूती से पक्ष नहीं रखा, जिसकी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला दिया और कानून कमजोर हुआ. विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार धीरे-धीरे आरक्षण खत्म करना चाहती है. अब इसी मुद्दे को लेकर तमाम दलित सांसदों के साथ आने से सरकार मुश्किल में घिर गई है.

रवीश कुमार: ‘चौकीदार की यह कैसी चौकसी कि चौकी लेकर भागा चौकसी’

Ravish kumar Modi Bhagidar hai

चौकसी अपनी चौकी लेकर भारत से भागा था, भाग रहा था मगर अब थक कर उसने अपनी चौकी एंटिगुआ में टिका दी है। हीरा व्यापारी मेहुल चौकसी ग़ज़ब का हीरा निकला। उसके चौकीदार भी हीरा निकले। चौकीदार चौकीदारी करते रह गए और चौकसी की टैक्सी उस एंटीगुआ में पार्क हो गई है जहां के कर्टली एम्ब्रोस की घातक गेंदबाज़ी से भारतीय बल्लेबाज़ डरते थे। जिस तेज़ी से मेहुल और नीरव पंजाब नेशनल बैंक के 13,500 करोड़ लेकर भागे हैं, कर्टली एम्ब्रोस उतनी तेज़ी से भाग ही नहीं सकते हैं।

Ravish Kumar Rafale Deal expose
Ravish Kumar Rafale Deal expose

मेहुल चौकसी ने एंटीगुआ का पासपोर्ट बनवा लिया है। कुछ पैसे देकर उसकी नागरिकता ले ली है। भारत की नागरिकता और पासपोर्ट छोड़ दिया है। प्रधानमंत्री मोदी कहते रहते हैं कि भारत के पासपोर्ट का भाव बढ़ गया है। नीरव मोदी को भी खूब घूमने का शौक है। भारत से भागने के बाद उसने कई देशों की यात्राएं की हैं। तब जब भारत ने उसका पासपोर्ट रद्द कर दिया था। अब चूंकि प्रधानमंत्री के हिसाब से भारत के पासपोर्ट का भाव बढ़ गया है इसलिए तमाम मुल्कों के इमिग्रेशन विभाग ने रद्द किए हुए पासपोर्ट पर भी नीरव को घूमने दिया है। चौकसी ने भारत का पासपोर्ट त्याग कर प्रधानमंत्री का अपमान किया है। एंटीगुआ अगर भारत को ऐसे आंख दिखाएगा तो हमारे मोदी जी उसे निकारागुआ भेज देंगे!

आने दीजिए रवांडा से मोदी जी को, 200 गायों की इंटरनेशनल डिलिवरी में ज़्यादा वक्त नहीं लगता है। ये काम तो आमेज़ॉन कर सकता था मगर गाय का मामला है तो मोदी जी ख़ुद लेकर गए हैं। वहां से लौटते ही वे ख़ुद ही वहां के
राष्ट्रपति को फोन करेंगे और कहेंगे कि मैं अपने नागरिक को भारत नहीं ला सका, कम से कम तुम अपने नागरिक को भारत भेज दो। तब तक सुष्मा जी एंटीगुआ के राजदूत को बुलाकर उन्हें इस्लामाबाद भेज दें। एंटीगुआ ने मेहुल चौकसी को पासपोर्ट देकर भारत को चुनौती दी है। उसकी हिम्मत देखिए, इंटरपोल के ज़रिए भारत को नहीं बताया, बल्कि सीधे बताया है। ऐसा इंडियन एक्सप्रेस में सूत्रों के हवाले से छपा है।

अच्छी बात है कि एंटीगुआ जाकर भी मेहुल चौकसी भारत में भीड़ द्वारा की जा रही हत्या की ख़बरों को ग़ौर से पढ़ रहा है। एक बैंक की हत्या करते वक्त उसे डर नहीं लगा मगर अलवर, दादरी और धुले की घटना पढ़कर डर गया है। उसने भारत की अदालत को बता दिया है कि इसी कारण वह भारत नहीं आ रहा है। अब तो सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक व्यवस्था भी दे दी है कि भीड़ की हत्या को कैसे रोकना है, इसके बाद भी चौकसी ने अपनी चौकी यहां से उठाकर एंटीगुआ में टिका दी है।

कांग्रेस के नेता एंटीगुआ के राष्ट्रपति के साथ भारत के चौकीदार की बातचीत की तस्वीरें साझा कर रहे हैं। तस्वीर देखकर लगता है कि कल ही मोदी जी कह रहे हों कि एंटीगुआ में चौकसी को एडजस्ट कर लीजिए। लेकिन वो तस्वीर पुरानी है। इस घटना से उसका कोई संबंध नहीं है। बड़े नेता फोटो खींचाते रहते हैं।

मेहुल चौकसी को भीड़ से डर लग रहा है या उन लोगों से जो अपना नाम बाहर आने के डर से उसे डरा रहे हैं। मेरी राय में मेहुल चौकसी को एंटीगुआ के संविधान की शपथ लेते हुए सबके नाम बता देने चाहिए। आपको याद होगा नीरव मोदी के पीछे लगी जांच एजेंसी रेवाड़ी पहुंच गई, योगेंद्र यादव के रिश्तेदारों के घर। क्योंकि उन्होंने नीरव मोदी के यहां से ख़रीदारी की थी। वैसे उसकी दुकान से औरों ने भी की होगी तो क्या वहां छापे पड़े होंगे। हिसाब मांगे गए। ज़ाहिर है योगेंद्र यादव को किस लिए सज़ा दी जा रही थी।

Ravish Kumar Bihar Girls News
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अब संसद में फिर से चौकीदार बनाम कामदार चलेगा। राहुल गांधी बोलेंगे कि चौकीदार भागीदार हो गया है। ये कैसी चौकसी कि चौकसी ही भाग गया, भागा ही नहीं ,भारतीय से एंटीगुअन हो गया। राहुल गांधी कहेंगे कि चौकसी के चौकीदार हाज़िर हों। मोदी जी कहेंगे कि हम कामदार हैं, नामदार नहीं हैं। मेरा काम दिल्ली में तिजोरी की रक्षा करना था। किसी भागते हुए को पकड़ना नहीं। इसके बाद भी मैं तब से देश देश घूम रहा हूं कि कहीं तो माल्या मेहुल मिलेंगे। अब तो मैं गौशाला तक जाने लगा कि वहां भी छिपे होंगे तो मिल जाएंगे। नहीं मिल रहे हैं तो ये राहुल गांधी राजनीति कर रहे हैं। जो चौकीदारी मैं नहीं कर सकता, वो चौकीदारी करने के ख़्वाब देख रहे हैं।

इन सबके बीच जो मालदार है वो फ़रार हैं। वो समझ गए हैं कि चुनाव आ रहे हैं। अभी सबको हमारी ज़रूरत है। रैलियां होनी हैं। सोशल मीडिया पर अभियान चलने हैं। वैसे एक भागे हुए मालदार ने संकेत दिया है कि वह भारत आ सकता है। बिजनेस स्टैंडर्ड में ख़बर छपी है कि विजय माल्या भारत आ सकता है। वो जांच एंजेसिंयो का सामना करने के लिए तैयार हो गया है।

अगर चैनलों पर हिन्दू मुस्लिम मसले पर डिबेट बढ़ा दें तो देश को इन सब मुद्दों से बचाया जा सकता है। टीवी पर ये सब डिस्कस करना ठीक नहीं लगता कि कोई 13,500 करोड़ लेकर भाग गया है। वैसे भी चुनाव आ रहे हैं तो पैसे की ज़रूरत पड़ती है। सबको पड़ती है।

औवेसी का PM मोदी को चैलेंज, ‘इधर आ सितमगर हुनर आजमाऐं, तू तीर आजमा हम जिगर आजमाऐं’

नई दिल्ली – एक तरफ जहां मॉब लिंचिंग की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं तो दूसरी तरफ हालत ये है कि नेता कुछ इस तरह के बयानबाजी कर रहे हैं जो इस तरह की हिंसा करने वालों के हौसले बढ़ाते हैं. कुछ इसी तरह का बयान राजस्थान सरकार में मंत्री जयंत यादव का आया है. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को चाहिये कि वो हिन्दू समाज की धार्मिक भावनाओं को समझें, अगर वो ऐसा कर पाएंगे तो मॉब लिंचिंग अपने आप बंद हो जायेगी. उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को ये व्यापार ही बंद कर देना चाहिए.

Muslim leader Owaisi
Muslim leader Owaisi

उनके इस बयान की राजनीतिक और सामाजिक गलियारे में निंदा हो रही है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि जिन लोगों ने हिंसा की है उन पर सख्त कार्रावाई होनी चाहिए और किसी को क़ानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है.

Owaisi Modi ka baap
Owaisi Modi ka baap

उधर उनके इस बयान से राजस्थान सरकार के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने पल्ला झाड लिया है. Nवहीं इस मामले पर विपक्ष ने भाजपा को घेर लिया है. उधर आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस बारे में टिपण्णी की. उन्होंने राजस्थान सरकार के मंत्री जयंत यादव के बयान को री-ट्वीट करते हुए एक शेर लिखा है.

Owaisi Boss Yogi ka
Owaisi Boss Yogi ka

उन्होंने लिखा है,”इधर आ सितमगर हुनर आजमाएं/तू तीर आज़मा हम जिगर आज़माएँ” औवेसी के शेर का अर्थ ये समझा जा सकता है कि जो सितम करने वाला है उससे हुनर आज़माते रहें, वो तीर से खेले और हम जिगर आगे करते रहेंगे. सरकार इस मामले में कार्रावाई करने का भरौसा तो दिला रही है लेकिन पुलिस से हुई ग़लतियों की वजह से राजस्थान की वसुंधरा सरकार पर भी आलोचनाओं के हमले हो रहे हैं.

Modi Dare Owaisi se
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रवीश का लेखः एक कैंपस के भीतर 29 बच्चियों के साथ दरिंदगी होती रही और बिहार सोता रहा

Ravish Kumar Bihar Girls News

बिहार के मुज़फ्फरपुर में एक बालिका गृह है। इसे चलाते हैं एन जी ओ और सरकार पैसे देती है। इस बालिका गृह में भागी भटकी हुई लड़कियों को ला कर रखा जाता है, जिनका कोई ठिकाना नहीं होता है, मां बाप नहीं होते हैं। इस बालिका गृह में रहने वाली लड़कियों की उम्र 7 से 15 साल के बीच बताई जाती है। टाटा इस्टिट्यूट ऑफ साइंस जैसी संस्था ने इस बालिका गृह का सोशल ऑडिट किया था जिसमें कुछ लड़कियों ने यौन शोषण की शिकायत की थी।

उसके बाद से 28 मई को एफ आई आर दर्ज हुआ और कशिश न्यूज़ चैनल ने इस ख़बर को विस्तार से कवर किया। यहां रहने वाली 42 बच्चियों में से 29 के साथ बलात्कार और लगातार यौन शोषण के मामले की पुष्टि हो चुकी है। एक कैंपस में 29 बच्चियों के साथ बलात्कार का नेटवर्क एक्सपोज़ हुआ हो और अभी तक मुख्य आरोपी का चेहरा किसी ने नहीं देखा है। पुलिस की कार्रवाई चल रही है मगर उसी तरह चल रही है जैसे चलती है। मई से जुलाई आ गया और पुलिस मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर को रिमांड पर नहीं ले सकी।

इस मामले को शिद्दत से कवर करने वाले संतोष सिंह को राजधानी पटना की मीडिया की चुप्पी बेचैन कर रही है। वे हर तरह से समझना चाहते हैं कि एक कैंपस में 29 बच्चियों के साथ बलात्कार का एक पूरा नेटवर्क सामने आया है जिसमें राजनीतिक, न्यायपालिका, नौकरशाही और पत्रकारिता सब धुल मिट्टी की तरह लोट रहे हैं फिर भी मीडिया अपनी ताकत नहीं लगा रहा है। रिपोर्टर काम नहीं कर रहे हैं। संतोष को लगता है कि पूरा तंत्र बलात्कारी के साथ खड़ा है। इस मामले को लेकर विधानसभा और लोकसभा में हंगामा हुआ है मगर रस्मे अदाएगी के बाद सबकुछ वहीं है। ख़बर की पड़ताल ठप्प है तब भी जब 11 में से 10 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

“जिस बालिका गृह में 42 में से 29 लड़कियों के साथ रेप हुआ हो, यह कैसे संभव है कि वहां हर महीने जांच के लिए जाने वाले एडिशनल ज़िला जज के दौरे के बाद भी मामला सामने नहीं आ सका। बालिका गृह के रजिस्टर में दर्ज है कि न्याययिक अधिकारी भी आते थे और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी के लिए भी सप्ताह में एक दिन आना अनिवार्य हैं ।”

यह हिस्सा संतोष सिंह के पोस्ट का है। संतोष ने लिखा है कि बालिका गृह की देखरेख के लिए पूरी व्यवस्था बनी हुई है। समाज कल्याण विभाग के पांच अधिकारी होते हैं, वकील होते हैं, समाजिक कार्य से जुड़े लोग होते हैं। एक दर्जन से ज्यादा लोगों की निगरानी के बाद भी 29 बच्चियों के साथ बलात्कार हुआ है।आप जानते हैं कि हाईकोर्ट के अधीन राज्य विधिक आयोग होता है जिसके मुखिया हाईकोर्ट के ही रिटायर जज होते हैं । बालिका गृहों की देखरेख की जिम्मेवारी इनकी भी होती है। मामला सामने आते ही उसी दिन राज्य विधिक आयोग कि टीम बालिका गृह पहुंची। उसकी रिपोर्ट के बारे में जानकारी नहीं है।

संतोष सिंह ने लिखा है कि बालिका गृह को चलाने वाला ब्रजेश ठाकुर पत्रकार भी रहा है और पत्रकारों के नेटवर्क में उसकी पैठ है। संतोष समझना चाहते हैं कि क्या इस वजह से मीडिया में चुप्पी है। बिहार के अख़बारों और चैनलों ने इस ख़बर को प्रमुखता नहीं दी। ज़िला संस्करण में ख़बर छपती रही मगर राजधानी पटना तक नहीं पहुंची और दिल्ली को तो पता ही नहीं चला। ब्रजेश ठाकुर के कई रिश्तेदार किसी न किसी चैनल से जुड़े हैं। इन रिश्तेदारों की भूमिका स्पष्ट नहीं है।

ब्रजेश ठाकुर गिरफ्तार भी हुआ मगर तीसरे दिन बीमारी के नाम पर अस्पताल पहुंच गया। अस्पताल से ही फोन करने लगा तो बात ज़ाहिर हो गई। पुलिस को वापस जेल भेजना पड़ा। ब्रजेश ठाकुर के परिवार वालों का कहना है कि रिपोर्ट में उनका नाम इसलिए आया कि उन्होंने पैसा नहीं दिया। न ही समाज कल्याण विभाग के एफ आई आर में उनका नाम है। किसी का भी नाम नहीं है। फिर उन्हें निशाना क्यों बनाया जा रहा है।इस बात की तो पुष्टि हो ही चुकी है कि 29 बच्चियों के साथ बलात्कार हुआ है। यह रिपोर्ट तो झूठी नहीं है। लेकिन 29 बच्चियों के साथ किन लोगों ने लगातार बलात्कार किया है, यह कब पता चलेगा।

ब्रजेश ठाकुर दोषी है या नहीं, यह एक अलग सवाल है मगर जांच नहीं होगी तो पता कैसे चलेगा। जांच कैसे हो रही है, इस पर नज़र नहीं रखी जाएगी तो जांच कैसी होगी, आप समझ सकते हैं। सबके हित में है कि जांच सही से हो। संतोष सिंह ने ब्रजेश ठाकुर के रिमांड न मिलने पर भी हैरानी जताई है।

” ऐसा पहला केस देखने को मिला है जिसमें पुलिस ब्रजेश ठाकुर से पुछताछ के लिए रिमांड का आवेदन देती है लेकिन कोर्ट ने रिमांड की अनुमति नहीं दी। पुलिस ने दोबारा रिमांड का आवेदन किया तो कोर्ट ने कहा कि जेल में ही पूछताछ कीजिए । बाद में पुलिस ने कहां कि जेल में ब्रजेश ठाकुर पुछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं,, दो माह होने को है अभी तक पुलिस को रिमांड पर नहीं मिला है ।” संतोष की इस बात पर ग़ौर कीजिए।

बिहार सरकार भी इस मामले में चुप रही। टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस ने 23 अप्रैल को बिहार समाज कल्याण विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। फिर भी कोई एक्शन नहीं हुआ। कशिश न्यूज़ ने इसका खुलासा नहीं किया होता तो किसी को भनक तक नहीं लगती और क्या पता बच्चियों के साथ बलात्कार होते रहता। एक महीने बाद समाज कल्याण विभाग एफ आई आर दर्ज करता है।

संतोष ने यह भी लिखा है कि मुज़फ्फरपुर की एस एस पी हरप्रीत कौर ने अगर सक्रियता न दिखाई होती तो इस मामले में थोड़ी बहुत कार्रवाई भी नहीं होती। आप इसे चाहे जैसे देखें, मगर सिस्टम में इतना घुन लग गया है कि पेशेवर तरीके से कुछ भी होने की कोई उम्मीद नहीं है। वर्षों मुकदमा चलेगा, किसी को कुछ नहीं होगा। आखिर बिहार का मीडिया और मुज़फ्फपुर का नागरिक समाज इस सवाल पर चुप क्यों है कि एक कैंपस में 29 बच्चियों के साथ बलात्कार हुआ है। उसे यह जानने में दिलचस्पी या बेचैनी क्यों नहीं है कि किन किन लोगों के सामने इन्हें डरा धमका कर पेश किया गया। क्या ये बलात्कार के लिए बाहर ले जाई गईं या बलात्कारी बालिका गृह के भीतर आए?

(लेखक जाने माने पत्रकार एंव एंकर हैं, यह लेख उनके फेसबुक पेज से लिया गया है)

भाजपाई चला रहे सबसे ज्यादा बूचड़खाने, मुसलमान तो पाल रहे है सिर्फ गाय

BJP beef party

देश में गाय के नाम पर एक तरफ मुस्लिमों की हत्याओं का सिलसिला जारी है तो दूसरी और इस पर होने वाली राजनीति में भी कोई कमी नहीं है। आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि लोग बीफ खाना छोड़ दे तो मोब लिचिंग की घटनाए रुक जाएगी। हालांकि बीफ खाने को लेकर उनका इशारा मुस्लिमों पर था।

इस मामलेमें समाजवादी पार्टी के नेता रामगोविंद चौधरी ने दावा किया है हिंदुस्तान के मुसलमान गोमांस नही खाते बल्कि गायें पालते हैं। बलिया के बैरिया में कार्यकताओं की बैठक को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘हिंदुस्तान के मुसलमान गोमांस नहीं खाते बल्कि मुसलमान तो गाय का पालन करते हैं।’

उन्होने ये भी कहा कि कहा कि देश में चल रहे कत्लखानों में से ज्यादातर को भाजपा के लोग चला रहे हैं। कत्लखाने चलाने वाले लोग सबसे ज्यादा भाजपा के हैं। चौधरी ने कहा, ‘सबसे ज्यादा स्लॉटर हाउस भारतीय जनता पार्टी के लोग चलाते हैं और सबसे ज्यादा निर्यात जैन धर्म के लोग करते हैं।’

चौधरी ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ पर हिटलर की विचारधारा को मानने का आरोप लगाते हुए कहा कि हिटलर की पूरी थयोरी को संघ और भाजपा के लोग मानते हैं। बता दें कि इससे पहले चौधरी ने शुक्रवार को कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता लालकृष्ण आडवाणी ने रथ यात्रा नहीं निकाली होती और अयोध्या में बाबरी मस्जिद नहीं ढहाई जाती तो अब तक राम मंदिर मसले का हल निकल चुका होता।

उन्होंने कहा था कि ‘अयोध्या में विवादित स्थल का मसला मंदिर का ताला खुलवाये जाने और शिलान्यास कराए जाने के बाद ही हल हो गया होता और देश में शांति तथा भाईचारा बना रहता लेकिन वर्ष 1990 में उसी समय आडवाणी ने देश में रथ यात्रा निकाली और उससे फैले उन्माद की वजह से मस्जिद ढहा दी गई। इसी कारण मामला अटक गया।’

अल कबीर
देश का सबसे बड़ा बूचड़खाना तेलंगाना के मेडक ज़िले में रूद्रम गांव में है. तक़रीबन 400 एकड़ में फैले इस बूचड़खाने के मालिक सतीश सब्बरवाल हैं. यह बूचड़खाना अल कबीर एक्स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड चलाता है.

मुंबई के नरीमन प्वॉइंट स्थित मुख्यालय से मध्य-पूर्व के कई देशों को बीफ़ निर्यात किया जाता है.

यह भारत का सबसे बड़ा बीफ़ निर्यातक भी है और मध्य-पूर्व के कई शहरों में इसके दफ़्तर हैं.

अल कबीर के दफ़्तर दुबई, अबू धाबी, क़ुवैत, ज़ेद्दा, दम्मम, मदीना, रियाद, खरमिश, सित्रा, मस्कट और दोहा में हैं.

अरेबियन एक्सपोर्ट्स
अरेबियन एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लमिटेड के मालिक सुनील कपूर हैं. इसका मुख्यालय मुंबई के रशियन मैनशन्स में है. कंपनी बीफ़ के अलावा भेड़ के मांस का भी निर्यात करती है.

इसके निदेशक मंडल में विरनत नागनाथ कुडमुले, विकास मारुति शिंदे और अशोक नारंग हैं.

एमकेआर एक्सपोर्ट्स
एमकेआर फ़्रोज़न फ़ूड एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक मदन एबट हैं. कंपनी का मुख्यालय दिल्ली में है.

एबट कोल्ड स्टोरेजेज़ प्राइवेट लिमिटेड का बूचड़खाना पंजाब के मोहाली ज़िले के समगौली गांव में है. इसके निदेशक सनी एबट हैं.

अल नूर एक्सपोर्ट्स
अल नूर एक्सपोर्ट्स के मालिक सुनील सूद हैं. इस कंपनी का दफ़्तर दिल्ली में है. लेकिन इसका बूचड़खाना और मांस प्रसंस्करण संयंत्र उत्तर प्रदेश के मुजफ़्फ़रनगर के शेरनगर गांव में है.

इसके अलावा मेरठ और मुबई में भी इसके संयंत्र हैं. इसके दूसरे पार्टनर अजय सूद हैं. इस कंपनी की स्थापना 1992 में हुई और यह 35 देशों को बीफ़ निर्यात करती है.

एओवी एक्सपोर्ट्
एओवी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का बूचड़खाना उत्तर प्रदेश के उन्नाव में है. इसका मांस प्रसंस्करण संयंत्र भी है. इसके निदेशक ओपी अरोड़ा हैं.

यह कंपनी साल 2001 से काम कर रही है. यह मुख्य रूप से बीफ़ निर्यात करती है. कंपनी का मुख्यालय नोएडा में है.

अभिषेक अरोड़ा एओवी एग्रो फ़ूड्स के निदेशक हैं. इस कंपनी का संयंत्र मेवात के नूह में है.

स्टैंडर्ड फ़्रोज़न फ़ूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड
इसके प्रबंध निदेशक कमल वर्मा हैं.

इस कंपनी का बूचड़खाना और सयंत्र उत्तर प्रदेश के उन्नाव के चांदपुर गांव में है. इसका दफ्तर हापुड़ के शिवपुरी में है.

‘दम पूरा लगाया, पर नहीं चल पाया हिंदू कार्ड’

पोन्ने प्रोडक्ट्सएक्सपोर्ट्स
पोन्ने प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट्स के निदेशक एस सास्ति कुमार हैं.

यह कंपनी बीफ़ के अलावा मुर्गी के अंडे और मांस के व्यवसाय में भी है.

कपंनी का संयंत्र तमिलनाडु के नमक्काल में परमति रोड पर है.

अश्विनी एग्रो एक्सपोर्ट्स
अश्विनी एग्रो एक्सपोर्ट्स का बूचड़खाना तमिलनाडु के गांधीनगर में है. कंपनी के निदेशक के राजेंद्रन धर्म को व्यवसाय से बिल्कुल अलग रखते हैं.

वे कहते हैं, “धर्म निहायत ही निजी चीज है और इसका व्यवसाय से कोई ताल्लुक नहीं होना चाहिए.”

राजेंद्रन ने इसके साथ यह ज़रूर माना कि उन्हें कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा है. कई बार ‘स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें परेशान’ किया है.

महाराष्ट्र फ़ूड्स प्रोसेसिंग

रवीश कुमार: रफ़ाल लड़ाकू विमान को लेकर लड़ाई किस बात की हो रही

Ravish Kumar Rafale Deal expose

हमने इस विवाद को समझने के लिए बिजनेस स्टैंडर्ड के अजय शुक्ला और टाइम्स ऑफ इंडिया के रजत पंडित की रिपोर्टिंग का सहारा लिया है। ये दोनों ही रक्षा मामलों के बेहतरीन रिपोर्टर/विशेषज्ञ माने जाते हैं। आप भी खुद से तमाम लेख को पढ़कर अपना सूची बना सकते हैं और देख सकते हैं कि कौन पक्ष क्या बोल रहा है। हिन्दी में ऐसी सामग्री कम मिलेगी, सिर्फ नेताओं के आरोप मिलेंगे, मगर डिटेल छानने की हिम्मत कोई नहीं करेगा वरना वे जिसके गुलाम है उससे डांट पड़ेगी ।

Rafale Deal expose
Rafale Deal expose

7 फरवरी 2018 के टाइम्स आफ इंडिया में रजत पंडित की रिपोर्ट का सार यह है कि यूपीए ने फ्रांस से रफाल लड़ाकू विमान ख़रीदने का करार किया था। 18 विमान तैयार मिलेंगे और 108 विमान तकनीकि हस्तांतरण के ज़रिए भारत में बनेंगे। इसे लेकर मामला अटका रहा और सरकार चली गई। जून 2015 में मोदी सरकार ने पहले के करार को समाप्त कर दिया और नया करार किया कि अब 18 की जगह 36 रफाल विमान तैयार अवस्था में दिए जाएंगे और इसके लिए तकनीकि का हस्तांतरण नहीं होगा मगर जब भी वायुसेना को ज़रूरत पड़ेगी, फ्रांस मदद करेगा। जब मेक इन इंडिया पर इतना ज़ोर है तो फिर तकनीकि हस्तांतरण के क्लाज़ को क्यों हटाया गया, इस पर रजत और अजय के लेख में जानकारी नहीं मिली।

Expose Rafale Deal
Expose Rafale Deal

रजत पंडित ने लिखा है कि इसके लिए रिलायंस डिफेंस और रफाल बनाने वाली DASSAULT AVIATION के बीच करार हुआ। इस विवाद में रिलायंस डिफेंस पर आरोप लगे हैं मगर कंपनी ने इंकार किया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि एक उ्द्योपगति मित्र को लाभ पहुंचाने के लिए मोदी सरकार ने ये जादू किया है कि जो विमान हम 540 करोड़ में ख़रीद रहे हैं, उसी को विमान निर्माण के मामले में नौसीखिया कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए 1600 करोड़ में ख़रीदा जा रहा है। यूपीए और एन डी ए के समय रफाल के दाम में इतना अंतर क्यों हैं, ज़रूर घोटाला हुआ है और प्रधानमंत्री इन सवालों पर सीधा जवाब नहीं दे पा रहे हैं।

रजत पंडित ने लिखा है कि निर्मला सीतारमण इसी साल फरवरी में भी संसद को बता चुकी है कि दो सरकारों के बीच हुए करार के आर्टिकल-10 के अनुसार वे इस सौदे से संबंधित जानकारियां सार्वजनिक नहीं कर सकती हैं लेकिन 18.11.2016 को रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे संसद में लिखित जवाब दे चुके हैं कि एक रफाल विमान का औसत दाम 670 करोड़ होगा और सभी अप्रैल 2022 तक भारत आ जाएंगे।

सादे विमान का दाम 670 करोड़ लेकिन इसे हथियार के अनुकूल बनाने, हथियार से लैस करने, कल पुर्ज़े देने और रख रखाव को जोड़ने के बाद औसत दाम 1640 करोड़ हो जाता है।

यहां तक रजत पंडित का लिखा है। अब राहुल गांधी यह नहीं बताते कि उनके समय में 540 करोड़ में एक विमान ख़रीदा जा रहा था तो वह सादा ही होगा, हथियारों से लैस करने के बाद एक विमान की औसत कीमत क्या पड़ती थी? ज़रूर यूपीए के समय एक रफाल विमान का दाम 540 करोड़ बताया जा रहा है और मोदी सरकार के समय एक का दाम 700 करोड़ से अधिक जबकि मोदी सरकार 18 की जगह 36 रफाल विमान खरीद रही है।

अब आते हैं 22 जुलाई के बिजनेस स्टैंडर्ड में छपे अजय शुक्ला के लेख की तरफ।

आप जानते हैं कि अविश्वास प्रस्ताव के समय रक्षा मंत्री ने कहा कि फ्रांस और भारत के बीच गुप्त शर्तों के कारण जानकारी सार्वजनिक नहीं हो सकती और यह करार 2008 में यूपीए ने ही किया था। आपने रजत पंडित के लेख में देखा कि निर्मला सीतरमण इसी फरवरी में अपनी सरकार के समय किए गए करार की गुप्त शर्तों का हवाला दे चुकी हैं।

अब यहां अजय शुक्ला निर्मला सीतरमण की बात में एक कमी पकड़ते हैं। अजय कहते हैं कि निर्मला सीतरमण ने संसद को यह नहीं बताया कि 2008 के ही करार को मोदी सरकार ने इसी मार्च में दस साल के लिए बढ़ा दिया है।
इस साल मार्च में फ्रांस के राष्ट्रपति भारत के दौरे पर थे, तभी यह करार हुआ था।

अजय शुक्ला ने लिखा है कि फ्रांस में समय समय पर यह जानकारी सार्वजनिक की जाती है कि हर रफाल की बिक्री पर सेना को कितने पैसे मिले हैं। वैसे में शायद ही फ्रांस भारत की परवाह करे। दूसरी ओर जब रक्षा राज्य मंत्री संसद में बयान दे रहे हैं कि सरकार रफाल सौदे की सारी बातें सीएजी के सामने रखेगी। आप जानते हैं कि सीएजी अपनी सारी रिपोर्ट पब्लिक करती है। अगर सीएजी से पब्लिक होगा तो सरकार खुद ही क्यों नहीं बता देती है।

अजय शुक्ला लिखते हैं कि 23 सितंबर 2016 को रक्षा मंत्रालय ने ख़ुद ही रफाल के दाम सार्वजनिक कर चुका है। रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी ने कुछ पत्रकारों के साथ ऑफ रिकार्ड ब्रीफिंग की थी जिसमें एक एक डिटेल बता दिया गया था। इसी ब्रीफिंग के आधार पर कई अखबारों में ख़बर छपी थी। 24 सितंबर 2016 के बिजनेस स्टैंडर्ड में लिखा है कि भारत ने 36 रफाल विमान के लिए 7.8 बिलियन यूरो का करार किया है। तब यह रिपोर्ट हुआ था कि बिना किसी जोड़-घटाव के सादे रफाल विमान की एक कीमत 7.4 अरब है तय हुआ है, यानी 700 करोड़ से अधिक। जब इन विमानों को भारत की ज़रूरत के हिसाब से बनाया जाएगा तब एक विमान की औसत कीमत 1100 करोड़ से अधिक होगी।

इस प्रकार रफाल सौदे की जानकारी तो पब्लिक में आ गई थी। ख़ुद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण बोल चुकी थीं कि वे कुछ भी नहीं छिपाएंगी, देश को सब बताएंगी। लेकिन कुछ दिनों के बाद मुकर गईं और कह दिया कि फ्रांस और भारत के बीच गुप्त करार है और वे सौदे की जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकती हैं।

दिसंबर 2017 से कांग्रेस रफाल डील को लेकर घोटाले का आरोप लगा रही है। उसका कहना है कि इस विमान के लिए हिन्दुस्तान एरोनोटिक्स लिमिटेड को सौदे से बाहर रखा गया और एक ऐसी कंपनी को प्रवेश कराया गया जिसकी पुरानी कंपनियों ने कई हज़ार करोड़ का लोन डिफाल्ट किया है। जिसकी वजह से बैंक डूबने के कगार पर हैं। ऐसी कंपनी के मालिक को इस सौदे में शामिल किया गया जिसका विमान के संबंध में कोई अनुभव नहीं है।

राहुल गांधी का आरोप है कि यूपीए के समय में एक रफाल विमान की कीमत 540 करोड़ थी, अब उसी विमान को मोदी सरकार 1600 करोड़ में किस हिसाब से ख़रीद रही है। प्रधानमंत्री ने ये जादू कैसे किया है। अविश्वास प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी ने इस बात को उठाते हुए दावा किया कि उनकी फ्रांस के राष्ट्रपित से मिला और उन्होंने बताया कि ऐसा कोई करार भारत और फ्रांस के बीच नहीं है। आप यह बात पूरे देश को बता सकते हैं। इस बयान के तुरंत बाद फ्रांस के राष्ट्रपति ने इसका खंडन कर दिया। बीजेपी इस बात को लेकर आक्रामक हो गई और राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया गया है।

मोबाइल एप लांच कर देना ही डिजिटल इंडिया नहीं है

भारतीय रेल के 50 मोबाइल एप हैं। क्या रेल मंत्रालय का एक एप नहीं होना चाहिए था जहां से सारे एप तक पहुंचा जा सके। 50 एप का क्या मतलब है। क्या ये सारे एप डाउनलोड भी किए जाते हैं? पिछले दो साल में ही भारतीय रेल ने 25 मोबाइप एप बनाए हैं। तीन चार मोबइल एप को छोड़ कर बाकी किसी एप की कोई पूछ नहीं है। वे बेकार बन कर पड़े हुए हैं। उन्हें डाउनलोड करने वाला कोई नहीं है।

कृषि मंत्रालय के 25 एप हैं। चावल उत्पादन को लेकर ही सात प्रकार के एप हैं। नेशनल मोबाइल गवर्नेंस इनिशिएटिव (NMGI) की वेबसाइट के अनुसार 30 प्रकार के एप हैं जिनमें एक मात्र भीम एप है जिसे एक करोड़ लोगों ने डाउनलोड किया है। बाकी एप सिंगल डिजिट में ही डाउनलोड किए गए हैं।

यह मेरी जानकारी नहीं है। 21 जुलाई के बिजनेस स्टैंडर्ड में करण चौधरी और शाइनी जेकब की रिपोर्ट है। दोनों ने यह बात उजागर की है कि डिजिटल इंडिया को सक्रिय दिखाने के लिए विभाग के बीच मोबाइल एप बनाने की होड़ मची है। एक ही बात के लिए कई कई एप बने हैं और जो काम एक एप में हो सकता है, उसके लिए अलग-अलग एप बनाए जा रहे हैं।

ज़ाहिर है ज़्यादतर एप का मतलब आंखों में धूल झोंकना है। प्रचार पाना है कि बड़ा भारी काम हो गया है, एप लांच हो गया है। इस होड़ में सरकार ने 2000 से अधिक एप बना दिए हैं। एक मोबाइल एप को बनाने में पांच हज़ार से एक लाख तक ख़र्च आ जाता है।

Image of Rahul Gandhi with portrait of Aurangzeb in background viral on social media

Rahul Gandhi Image Nakli

An image of Rahul Gandhi captioned “इन देशभक्तों ने यह कौन से देश भक्त की तस्वीर लगा रखी है” (Which nationalist’s portrait have these patriots put up- translated) has been posted by Facebook page, हिंदुत्व को बचाना है भगवा लाना है Mission 2024 Successfull It had been shared more than 12700 times at the time of writing.

Hindutva Rahul Gandhi defame
Hindutva Rahul Gandhi defame

Moreover, It has been shared by another page, We Support Namo नरेंद्र मोदी The text sarcastically points out the highlighted photo frame of Aurangzeb painting calling it a picture of a patriot.

What is the truth? 

Alt News did a Google reverse image search and found a list of news reports on Rahul Gandhi filing his nomination for Congress President. An article published in The Indian Express article on Dec 4, 2017 was titled, “Congress hails Rahul Gandhi’s elevation as beginning ‘new era’: Who said what”. The original image has a Mahatma Gandhi portrait in the background.

Rahul Gandhi
Rahul Gandhi

At times when social media is rife with photoshopped images, users can utilize image verification tools like Google reverse image search which comes handy in debunking misinformation. In this case, however, it is plain ridiculous to believe that a political party would have a picture of Aurangzeb on their wall. Posts like these are aimed at the most gullible who unfortunately tend to believe and share such content.

पाकिस्तान में ओवैसी का यह भाषण सुनकर, भक्त भी हो जाएँगे उनके समर्थक

Bhakt bane Owaisi Fan

हैदराबाद से लोकसभा सांसद और एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी मोदी राज में देश के मुसलमानों के साथ हो रहे पक्षपात के खिलाफ आवाज़ उठाने में हमेशा आगे आते हैं। ओवैसी ने कई बार देश में बढ़ रही मॉब लिंचिंग के मामले में केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार को घेरा है। जिक्से चलते ओवैसी की छवि मुसलमानों के नेता के रूप में बन चुकी है।

Owaisi the great
Owaisi the great

1. पाकिस्तानी चैनल पर हुई डिबेट में शामिल हुए ओवैसी

हाल ही में असदुद्दीन ओवेसी पाकिस्तान के न्यूज़ चैनल जियो टीवी पर एक डिबेट शो में शामिल हुए। इस डिबेट शो का टाइटल था अमन की आशा ओवैसी के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर और बीजेपी सांसद कीर्ति आजाद भी उनके साथ इस डिबेट शो में शामिल हुए।

I love Asaduddin owaisi
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2. पाकिस्तानी नेताओं को लगाई लताड़

वही पाकिस्तान की तरफ से डॉक्टर फरीद अहमद पराचा, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के शाह महमूद कुरैशी पाकिस्तान लीग इन के खुर्रम दस्तगीर खान और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के सैयद नवीन कमर से शामिल हुए।पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल जियो टीवी के एंकर हामिद मीर ने पाकिस्तानी नेताओं और भारतीय नेताओं के बीच जिहाद और अन्य मामलों पर बहस छेड़ी। इस डिबेट शो में ओवैसी ने पाकिस्तानी नेताओं को जमकर लताड़ लगाई।

3. भारतीय मुसलमान की चिंता छोड़ दें

पाकिस्तानी नेताओं द्वारा भारत के मुसलमानों पर की जा रही टिप्पणी पर ओवैसी ने कहा कि बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का गुस्सा आपको भारत और पाकिस्तान पर नहीं निकालना चाहिए। इस मामले पर ओवैसी ने भारत के संविधान का हवाला देते हुए कहा कि हमारा देश एक सेकुलर देश है। भारत में रह रहे मुसलमानों का राष्ट्र भारत है। आप भारत के  मुसलमानों की चिंता करना बंद कर दें।

Asaduddin owaisi King Indian Politics
Asaduddin owaisi King Indian Politics

4. भारत एक सेक्युलर देश, मुसलमान वहां खुश

संविधान के मुताबिक, अल्पसंख्यकों को उनके अधिकार दिए गए हैं। भारत के मुसलमानों ने 60 साल पहले फैसला किया था अब भारत ही उनका देश है। इसके साथ ओवैसी ने कहा कि जिहाद आपके लिए कुछ और होगा। लेकिन हमारे में जिहाद के मायने कुछ और हैं। लोगों को मारना कहाँ का जिहाद है।

निष्कर्ष: गौरतलब है कि देश के मुसलमानों को आजकल छोटी सी बात पर देशद्रोही करार कर पाकिस्तान जाने की सलाह दे दी जाती है। लेकिन ओवैसी ने जो बयान दिया है, उससे साबित होता है कि देश के मुसलमान भारत से कितना प्यार करते हैं।

RSS-BJP के इशारे पर हुआ था हमला, जिंदा रहने की उम्‍मीद छोड़ दी थी: स्‍वामी अग्‍निवेश

RSS BJP hamla kiya

झारखंड के पाकुड़ में बीजेपी कार्यकर्ताओं के हमले के बाद स्वामी अग्निवेश ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ये हमला RSS और BJP के इशारे पर हुआ था। पुलिस प्रशासन यदि मुझे जरा भी सुरक्षा देती तो मुझ पर हमला नहीं होता।

उन्होंने कहा कि 100-150 लोगों की भीड़ ने मुझपर हमला किया था। वो एक हत्या करने वाली भीड़ थी और वो भीड़ कोई अनजाना चेहरा नहीं थी बल्कि इस भीड़ को राज्य और केंद्र सरकार के किसी व्यक्ति द्वारा प्रायोजित और समर्थित किया गया था।

स्वामी ने कहा कि 100-150 लोगों की भीड़ मेरे पास आई। किसी ने मेरी बात नहीं सुनी और मुझे मारने-पीटने लगे। मेरे कपड़े फाड़ने लगे, ढाई फुट गहरे गड्ढे में गिराकर पीटा गया। स्वामी अग्निवेश ने आगे बताया कि करीब 1-2 मिनट तक लोग उन्हें लगातार पीटते रहे और उस वक्त उन्होंने जिंदा बचने की उम्मीद भी छोड़ दी थी। स्वामी ने कहा कि सारा खेल नरेंद्र मोदी और अमित शाह खेल रहे हैं। वो देश की जनता को बेवकूफ बना रहे हैं। 2019 के चुनाव में और बवाल होगा। हमलोग कीड़े-मकोड़े की तरह मारे जाएंगे।

मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर उन्होंने कहा, ‘पहलू खान की हत्या जहां हुई थी, उसी जगह पर अकबर खान की हत्या कर दी, 28 साल के युवक को मार दिया। उसके बच्चों की तस्वीर देखी है, मैं सोच रहा हूं कि कैसे उन बच्चों के बाप को तुम लोग मार सकते हो। ये सब हो रहा है और नरेंद्र मोदी चुप हैं, शरम नहीं आती उनको। दुनियाभर के भाषण झाड़ते हैं, सबसे ज्यादा बोलते हैं और अलग-अलग तरीके से अपना मन की बात अलग है तो मीडिया में अलग…. वो इस मुद्दे पर बोल क्यों नहीं रहे? और अगर बोल रहे हैं तो जवाब क्यों नहीं देते।

उन्होने कहा, आज से तीन साल पहले अखलाक को केवल शक के आधार पर उसकी पत्नी और बच्चों के सामने पीट-पीटकर मार डाला। बाद में कहने लगे कि हम उस मांस की जांच कराएंगे। जुमलेबाज प्रधानमंत्री हैं, भारत का दुर्भाग्य है और इस सबको ये हिंदुत्व के नाम पर ढो रहे हैं।’

बता दें कि स्वामी अग्निवेश 17 जुलाई को लिट्टीपारा में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए झारखंड के पाकुड़ पहुंचे थे। लेकिन कार्यक्रम स्थल से बाहर आते ही भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) और एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने उनपर हमला बोल दिया और उनकी पिटाई कर दी। उन्होंने अग्निवेश के कपड़े भी फाड़ दिए थे।

कट्टरपंथी हिन्दू, हिन्दू संस्कृति और सनातन धर्म के लिए खतरा है :- स्वामी अग्निवेश

सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने कथित तौर पर हुई पिटाई को लेकर एक बार फिर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि 100-150 लोगों की भीड़ ने मुझपर हमला किया था। वो एक हत्या करने वाली भीड़ थी और वो भीड़ कोई अनजाना चेहरा नहीं थी बल्कि इस भीड़ को राज्य और केंद्र सरकार के किसी व्यक्ति द्वारा प्रायोजित और समर्थित किया गया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कट्टरपंथी हिंदुत्व को लेकर कहा कि जिसे कट्टरपंथी हिंदुत्व कहा जाता है, असल में वह हिंदू संस्कृति, या सनातन धर्म के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। मैं पिछले कई सालों से धर्म, जाति, बंधुआ मजदूर, महिलाओं और दलितों के समानता के अधिकार की लड़ाई लड़ता आया हूं। लेकिन ये ‘नकली हिंदू’ या कट्टरपंथी हिंदू मुझे हिंदुत्व का दुश्मन मानते हैं। ऐसा कट्टरपंथी दृष्टिकोण एक प्रकार का नवजात फासीवाद है। अगर हम इसे समय रहते जड़ से उखाड़ कर फेंक नहीं देते तो आगे चलकर ये भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

Swami Agnivesh Modi
Swami Agnivesh Modi

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा भीड़तंत्र पर काबू करने के लिए सरकार को दिए निर्देशों को लेकर भी कहा ‘सिर्फ फैसला सुना देना ही काफी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट को ऐसे सभी केसों की देखरेख के लिए एक निगरानी समिति का गठन करना चाहिए।’

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस दिन अपना फैसला सुनाया उसी दिन मेरे ऊपर हमला हुआ और भीड़ द्वारा मुझे पीटा गया। मेरे ऊपर हमला करने वाले 8 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया लेकिन क्यों उन्हें जल्दी ही छोड़ दिया गया? मैं चाहता हूं कि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी वर्तमान या सेवानिवृत जज द्वारा हो।

उन्होंने पुलिस पर भी सवालिया निशान लगाते हुए कि मुझे पुलिस पर विश्वास नहीं है। मैंने अपने दौरे को लेकर राज्य सरकार को पहले ही सूचित कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद मुझे सुरक्षा प्रदान नहीं की गई। इसके अलावा जब मेरे ऊपर हमला हुआ, उसके आधे घंटे तक पुलिस वहां पहुंची भी नहीं।

Swami Agnivesh Against Narendra Modi
Swami Agnivesh Against Narendra Modi

बता दें कि स्वामी अग्निवेश 17 जुलाई को लिट्टीपारा में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए झारखंड के पाकुड़ पहुंचे थे। लेकिन कार्यक्रम स्थल से बाहर आते ही भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) और एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने उनपर हमला बोल दिया और उनकी पिटाई कर दी। उन्होंने अग्निवेश के कपड़े भी फाड़ दिए थे। फिलहाल मामले की जांच चल रही

बेटियों ने पैसे जमा कर भेजा बाप को हज पर

Muslim girl Collect Money Send Father Hajj

आपको बताते चले कि खबर तो बेहद पुरानी है लेकिन कुछ खबर ऐसी होती जो कभी पुरानी नहीं होती जी हाँ कुछ ऐसी ही खबर ये भी है. जी हाँ आपको बतादें कि बात 2014 कि है पर ये खबर लोगों के लिए नसीहत है जो बेटियों को बेटों से कम आँकते हैं, लेकिन बेटियां बेटों से कम नहीं होती।

Dad love for daughter
Dad love for daughter

जी हाँ शाहपुर के युसूफ मौलाना की नौ बेटियों ने साल 2014 में अपने पिता को हज पर भेजकर जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा दिया है। 9 में से एक बहन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और दूसरी शिक्षिका है। सभी बहनों के पति मजदूरी करते हैं। बेटियों ने कम कमाई के बावजूद सालभर में 1.80 लाख रुपए जमा कर पिता को हज पर भेजा।

इतना ही नहीं शाहपुर के युसूफ मौलाना जामा मस्जिद में पेश इमाम हैं। 75 वर्षीय युसूफ मौलाना इंदौर से फ्लाइट से हज यात्रा के लिए रवाना हुए थे। पिता ने जब बेटियों से विदा ली थी तो उन सभी की आंखें खुशी से नम हो गईं। युसूफ मौलाना की 9 बेटियां हैं पर बेटा एक भी नहीं है। खुदा की इबादत के साथ उन्होंने घर-परिवार को संभाला। 7 साल पहले पत्नी छोटम बी का इंतकाल हो गया।

Dad love for daughter quotes
Dad love for daughter quotes

9 बेटियों को पाल-पोस कर आठ की शादी करवाई। एक विकलांग बेटी पिता के साथ ही रहती है। 9 बेटियों ने 1 साल तक अपने खर्च के रुपए बचाकर रखे। सभी बेटियों ने सालभर में 20-20 हजार रुपए के हिसाब से 1.80 लाख रुपए जमा किया। इन बेटियों ने निभाया बेटे का फर्ज

बांग्लादेश में ढ़ाई प्रतिशत बढ़ी हिन्दू आबादी, पत्रकार ने किया तंज ‘हिंदू कहीं ख़तरे में नहीं हैं सिवा बीजेपी शासित राज्यों के’

Bangladeshi hindu Increase

नई दिल्ली – भारत में हिन्दुवादी संगठनो की तरफ से अक्सर प्रोपगेंडा फैलाया जाता है कि बंग्लादेश और पाकिस्तान में हिन्दुओं पर अत्याचार किया जाता है, और उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है। बांग्लादेश और पाकिस्तान के कथित उत्पीड़न को लेकर भारत में ध्रुवीकरण कराने और मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने का काम किया जाता है। लेकिन सरकारी आंकड़ों कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

युवा पत्रकार जैग़म मुर्तज़ा ने ऐसे ही आंकड़े पेश करते हुए लिखा है कि बांग्लादेश में 2011 में हिंदू आबादी 8.4 फीसदी थी। भारत सरकार बता रही है कि 2017 में ये बढ़कर 10.7 फीसदी हो गई है। इसमे पाकिस्तान की ग़ायब हिंदू आबादी के सवाल का जवाब भी छिपा है। 1971 तक बांग्लादेश पाकिस्तान का हिस्सा था।

Hindu women
Hindu women

उन्होने आगे लिखा कि पाकिस्तान का बंटवारा होने के बाद अगर आप बांग्लादेशी हिंदुओं को पाकिस्तान में तलाशेंगे तो वो कैसे मिलेंगे? इधर अभी भी 1971 से पहले भारत आए 1.7 करोड़ बांग्लादेशी हिंदू भारत में अधिकृत और अनाधिकृत तरीक़े से रह रहे हैं। बहरहाल हिंदू कहीं ख़तरे में नहीं हैं सिवा बीजेपी शासित राज्यों के। यक़ीन न आए तो सऊदी अरब, दुबई, शारजाह, दोहा और बग़दाद जैसी जगहों पर बेहतरीन नौकरी और मौज करते हिंदुओं से मिलकर तस्दीक़ कर लें।

घर में ही अच्छे लगते हैं काबिल

सत्ता संघर्ष से मिलती है लेकिन हमारे विपक्ष के तमाम नेता न सिर्फ़ जेल जाने बल्कि सड़क पर आने से भी घबराते हैं। सत्ता पक्ष ने ये कमज़ोरी भांप ली है। शशि थरूर, लालू और ममता के मामलों ने विपक्ष को और ज़्यादा डरा दिया है। इधर जज लोया, गौरी लंकेश और हरेन पांड्या के मामले भी मज़बूत नज़ीर हैं। ऐसे में सिर्फ बयान या धरने प्रदर्शन से काम नहीं चलने वाला।

महाभारत की लड़ाई में साम, दाम, दंड, भेद, छल, कपट, धोखा, धूर्तता समेत कुछ भी अधर्म नहीं है। जो ये सब कर पाएगा वो ही विकल्प होगा। अच्छे और क़ाबिल आदमी तो साहित्य, समाज और घर में ही अच्छे लगते हैं।

अलवर हत्याकांड – MLA के कहने पर अकबर को जिंदा जलाने की थी साजिश

MLA involve in AKhbar Death

राजस्थान के अलवर में शुक्रवार को बच्चों के लिए दुधारू गाय लेकर जा रहे अकबर खान की गौरक्षकों ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। इस मामले में चश्मदीद असलम ने बड़ा खुलासा किया है।

Akhbar Family
Akhbar Family

असलम ने बयान दिया कि हमलावरों के साथ क्षेत्र का MLA है। जिसके कहने पर अकबर को जिंदा जलाने की साजिश थी। असलम ने बताया कि अकबर को पीटने के दौरान हमलावर बोल रहे थे कि इसे जिंदा जला दो, हमारे साथ एमएलए साहब है।

रामगढ़ थाने से बयान लेने आए एएसआई मोहनसिंह को दिए बयान में असलम ने बताया कि 20-21 जुलाई की आधी रात वह और अकबर व दो गाय लेकर ललावंडी के जंगलों से जा रहे थे। उसी वक्त 5-7 लोग आए और उन्होंने गाय व बछडे़ छींनकर हमारे साथ मारपीट करने लगे।

मैं किसी तरह भागकर कपास की फसल में छिप गया। इसके बाद हमलावर अकबर की लाठी डंडों से पिटाई करने लगे और आपस में एक दूसरे का नाम ले रहे थे। कह रहे थे कि हमारे साथ एमएलए साहब हैं। हमें डरने की जरूरत नहीं है तेल छिड़ककर इस गोतस्कर को जिंदा जला दो।  असलम  ने ललावंडी गांव के सुरेश, विजय, परमजीत, नरेश, धर्मेंद व दो अन्य के नाम भी हमालवरों में शामिल बताए हैं।

असलम ने बताया कि अकबर गायों के पीछे – पीछे चल रहा था जबकि में मोटरसाइकिल पर किनारे -किनारे चल रहा था। तभी एक फायर की आवाज सुनाई दी और कुछ लोग यह कहते हुए उनके पीछे दौड़े कि कोई गाय चुराकर लिए जा रहा है।

असलम ने बताया कि लोगों अपनी ओर आते देख मैं डरकर पास के एक खेत में छुप गया। अकबर गायों को पकड़कर चल रहा था इसलिए वह भागा नहीं। असलम ने बताया कि अंधेरे के कारण वह लोगों को पहचान तो नहीं सकता लेकिन उनकी आवाज पहचान सकता है क्योंकि वह बहुत जोर-जोर से मुझे गालियां दे रहे थे।

असलम रातभर डर के मारे खेत में छुपा रहा। शनिवार को वह सड़क के किनारे किनारे खेतों में चलकर काफी दूर निकल गया तो उसने सड़क पर जा रहे वाहनों से लिफ्ट ली। मुझे बाद में पता चला कि उन लोगों ने मेरे दोस्त की पीट-पीटकर हत्या कर दी।

सीधी बात में तीन तलाक़ को लेकर ओवैसी ने दिया बड़ा बयान

Owaisi Views on Triple talaq

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुसलमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ‘आजतक’ के खास कार्यक्रम ‘सीधी बात’ में आज के खास मेहमान हैं और इस कार्यक्रम में वह तीन तलाक से लेकर, सेकुलरिजम और मॉब लिंचिंग तक हर मुद्दे पर बोल रहे हैं।

Owaisi on Aaj Tak
Owaisi on Aaj Tak

इस कार्यक्रम को रविवार रात आठ बजे दोबारा देखा जा सकता है। ‘सीधी बात’ आजतक का खास कार्यक्रम है, जिसे एंकर श्वेता सिंह होस्ट करती हैं। इसमें देश-दुनिया के जाने-माने चेहरों का ज्वलंत मुद्दों पर इंटरव्यू लिया जाता है। अपने नाम की तरह इस कार्यक्रम में आने वाले मेहमानों से खरे अंदाज में सीधे सवाल पूछे जाते हैं।

asaduddin owaisi
asaduddin owaisi

सांसद ओवैसी अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं और ‘सीधी बात’ कार्यक्रम में भी अपनी बात रखेंगे। अलवर में हुई मॉब लिंचिंग की घटना के बाद ओवैसी ने मोदी सरकार को घेरा और उन्होंने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मोदी शासन के चार सालों को ‘लिंच राज’ की संज्ञा दे डाली।

ओवैसी ने घटना की आलोचना करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत देश में गाय का जीवन बुनियादी अधिकार बन गया है और उसकी वजह से जिन मुसलमानों को मारा जा रहा है, उन्हें जीने का कोई अधिकार नहीं है। ओवैसी ने सीधे तौर पर मोदी सरकार के चार सालों को लिंच राज करार दिया है।

मोदी भक्त ये ना देखे, देश के सबसे शिक्षित नेता का नाम

Educated indian politics

जानिए, देश के सबसे शिक्षित नेता का नाम, जिसके खाते में 20 डिग्रियां और 28 गोल्ड मेडल

कहते हैं कि शिक्षा संपत्ति का श्रृंगार एवं विपत्ति का आहार है. शिक्षा उस अनमोल खजाने का नाम है जिसे कोई चोरी नहीं कर सकता. शिक्षा मानव को सभी बंधनों से मुक्त करती है. आज देश में ऐसा माहौल बना दिया गया है जिसमें शिक्षित लोगों का मजाक उड़ाया जा रहा है.

शैक्षणिक योग्यताओं की खिल्ली उड़ाई जा रही है. वैसे लोग जिनकी अपनी डिग्री को लेकर देश भर को संदेह है, वो लोगों हॉवर्ड और हार्ड वर्क का प्रवचन देते फिर रहे हैं, फिर भी ऐसे लफ्फाजों की लफ्फाजी में शिक्षा का महत्व कम नहीं हो सकता.

आइए, आज हम बात करते हैं, देश के उन चुनिंदा नेताओं की जो बेहद शिक्षित और विद्वान नेता के तौर पर दुनिया में प्रतिष्ठा हासिल किए हुए है.

1. सुगाता बोस

Sugata Boos
Sugata Boos

पश्चिम बंगाल से आने वाले सुगाता बोस ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेता हैं. कैंब्रिज से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने हॉवर्ड में अध्यापन कार्य भी किया. इन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रसिद्ध गुगनहैम फेलोशीप प्राप्त है.

2. कपिल सिब्बल

Kapil Sibal
Kapil Sibal

हॉवर्ड और कैंब्रिज से शिक्षा प्राप्त कपिल सिब्बल देश के जाने माने नेता और अधिवक्ता हैं. कांग्रेस पार्टी के नेता और डॉ मनमोहन सिंह सरकार के दौरान इन्होंने कई मंत्रालयों की बागडोर संभाली और उन्हें उंचाईयों पर पहुंचाया. देश में इनकी पहचान लॉ एक्सपर्ट के तौर पर है.

3. अरविंद केजरीवाल

arvind kejriwal
arvind kejriwal

दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल भी देश के शिक्षित नेताओं में से एक हैं. केजरीवाल ने आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. देश को नया राजनीतिक विकल्प देने की बात करने वाले केजरीवाल भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी भी रह चुके हैं.

4. पी चिदंबरम

p chidambaram

p chidambaram
p chidambaram

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम की योग्यता से पूरा देश परिचित हैं. इन्होंने एक कुशल वित्त मंत्री और सख्त गृह मंत्री के तौर पर देश भर में अपनी पहचान बनाई है. बात योग्यता कि करें तो चिदंबरम ने मद्रास लॉ कॉलेज से एलएलबी, प्रेसिडेंसी कॉलेज से डिग्री और हॉवर्ड से एमबीए की पढ़ाई की है. चिदंबरम ने एमबीए उस दौर में कंप्लीट किया जब भारत में लोग इसका नाम भी नहीं जानते थें.

5. जयराम रमेश

jairam ramesh
jairam ramesh

डॉ मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रह चुके कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आईआईटी मुंबई से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. इसके साथ हीं रमेश ने कार्नेज मेलन यूनिवर्सिटी से एमएससी की पढ़ाई की है.

6. विजयंत पांडा

Vijayant panda
Vijayant panda

बीजू जनता दल के नेता विजयंत पांडा ने एमआईटी से मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है. सियासत में सक्रिय होने से पहले इन्होंने दुनिया की कई जानी मानी कॉरपोरेट कंपनियों के साथ काम किया है.

7. ज्योतिरादित्य सिंधिया

jyotiraditya scindia
jyotiraditya scindia

राहुल गांधी के मित्र और मध्य प्रदेश की गुना सीट से कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया राजघराने से आते हैं. इन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दून स्कूल से पूरी की है. हॉवर्ड यूनिवर्सिटी से इन्होंने इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की है. राजनीति में कदम रखने से पहले इन्होंने वित्तीय संस्था मॉर्गन स्टैनले के साथ बतौर इंवेस्टमेंट बैंकर काम किया है.

8. डॉ मनमोहन सिंह

Manmohan Singh
Manmohan Singh

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय अर्थव्यवस्था में उदारीकरण के जनक डॉ मनमोहन सिंह की शिक्षा के बार में लिखते लिखते शाम हो जाएगी. इन्होंने ऑक्सफोर्ड से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की है. देश के वित्त मंत्री से लेकर आरबीआई के गर्वनर के तौर पर भी काम कर चुके हैं.

9. जयंत सिन्हा

jayant sinha
jayant sinha

भाजपा नेता जयंत सिन्हा अभी केंद्र सरकार में राज्य मंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं. इन्होंन अमेरिका के पेन्सिलविया यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और हॉवर्ड से एमबीए किया है. मंत्री बनने से पूर्व इन्होंने कई कंपनियों के साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल होकर काम किया है.

10. डॉ श्रीकांत जिचकार

Dr Shrikant jichkar
Dr Shrikant jichkar

डॉ श्रीकांत जिचकार कांग्रेस पार्टी के नेता थें. आज अगर ये जिंदा होते तो इनका नाम दुनिया के सर्वाधिक शिक्षित नेताओं में होता क्योंकि इन्होंने अपने जीवन में दुनिया भर की 42 यूनिवर्सिटीज से 20 अलग अलग विषयों में डिग्रियां और गोल्ड मेडल हासिल किया था. ये आइएएस भी रहें और आइपीएस भी लेकिन देश प्रेम के जज्बे ने इन्हें कांग्रेस की ओर आकर्षित किया और राजनीति में आ गए. 2004 में एक सड़क दुर्घटना में इनकी मृत्यु हो गई.

निष्कर्ष : किसी ने ठीक कहा है कि शिक्षा बड़ा अनमोल रत्न. कब इसे तौल सका है धन. कोई उनको समझाए जो हॉवर्ड और हार्ड वर्क का जुमला उछाल कर उच्च शिक्षित लोगों पर ताने कसते हैं.

गौ तो भक्तों का बहाना है, असल में मुस्लिम निशाना हैं: आप विधायक

Alka lamba Beautiful

राजस्थान के अलवर में कथित गौरक्षा के नाम पर गौरक्षकों के हाथों मारे गए अकबर हत्याकांड पर प्रतिक्रिया देते हुए आम आदमी पार्टी की विधायक अलका लांबा ने कहा कि गाय तो सिर्फ बहाना है। असल में मुस्लिमों को निशाना बनाना है।

Alka lamba in Saree
Alka lamba in Saree

अलका ने ट्वीट करकहा कि कौन कहता है कि भक्त गौ के रक्षक हैं ? किसी हिन्दू को गौ ले जाते वक्त इन भक्तों द्वारा कभी उन्हें मारते देखा है क्या ? गौ तो भक्तों का बहाना है, असली में मुस्लिम ही इनका निशाना हैं। यह”गौ रक्षक”नही बल्कि “नर (मुस्लिम) भक्षक” है।

Alka lamba Tea

अलका ने इस घटना के बहाने केन्द्रीय मंत्री जयंत सिन्हा पर भी तंज किया है और कहा है कि जल्द इन्हें भी हार माला पहनाई जायेंगी। केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा झारखंड के हजारीबाग में उन लोगों का फूल माला पहनाकर सम्मान किया था जिन्होंने बीते साल अलीमुद्दीन नाम के एक शख्स को गाय के नाम पर पीट-पीट कर हत्या कर दी थी।

Alka lamba Great Leader
Alka lamba Great Leader

बता दें कि मृतक अकबर उर्फ़ रकबर पुत्र सुलेमान अपने साथी के साथ गायों को लेकर लालामंडी रामगढ़ से पैदल जा रहे थे। तभी रास्ते में कथित गौ रक्षकों के साथ ग्रामीणों ने उनकी पिटाई कर दी। इस दौरान अकबर का एक साथी तो भाग निकला, लेकिन अकबर भीड़ के हत्थे चढ़ गया। सूचना के बाद पुलिस ने अकबर को अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उसकी मौत हो गई।

ओवैसी की योगी को चुनौती – योगी दलितों के बड़े हमदर्द हैं तो आबादी के मुताबिक दें आरक्षण

Owaisi Boss Yogi ka

अलीगढ़ विश्वविद्यालय में दलितों को आरक्षण देने का मुद्दा उठाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती देते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुसलमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि योगी अगर दलितों के हमदर्द बन रहे हैं तो उनकी आबादी के मुताबिक उन्हें आरक्षण दें।

आज तक के ‘सीधी बात’ कार्यक्रम में ओवैसी ने कहा, ‘योगी जी अगर दलित के हमदर्द हैं तो उत्तर प्रदेश में उनकी आबादी के मुताबिक आरक्षण मुहैया कराएं। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ और जामिया में 50 फीसदी तो अपर कास्ट को मिल रहा है। योगी आदित्यनाथ यह प्रावधान हटा दें।

Muslim leader Owaisi
Muslim leader Owaisi

उन्होंने बीजेपी के दलित प्रेम पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ जिस जज ने फैसला दिया, उसे एनजीटी का अध्यक्ष बना दिया गया। इतना ही दलितों से प्रेम हो तो निजी क्षेत्र में भी उन्हें 50 फीसदी आरक्षण दीजिए।

ओवैसी ने मॉब लिंचिंग पर कहा कि पिछले 4 सालों में इस तरह की घटनाएं बढ़ी हैं। अगर 2009 की तुलना में देखें तो 85 फीसदी का इजाफा हुआ है। उन्‍होंने कहा कि इस सरकार में नफरत की दीवारें उठी हैं। मुसलमानों पर शक किया जा रहा है और सरकार में बैठे लोग इन सबकी वकालत करते हैं। अखलाक को मारने वाले को तिरंगे में लपेटा जाता है और मॉब लिंचिंग के आरोपियों का मंत्री स्वागत करते नजर आते है।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के टोपी पहनने से इंकार के सवाल पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘मैं अगर वहां पर होता तो उन्हें टोपी नहीं देता, आप सीएम हैं, आप कासिम को बुलाकर गले लगा लीजिए, उस कासिम को मारा पीटा गया जो पानी के लिए भीख मांग रहा था। उत्तर प्रदेश में बच्ची के साथ मोलेस्टेशन हुआ, उसे पास बुलाकर बोलते कि मैं तुम्हारा बाप हूं, तुम्हारा भाई हूं, ये कहना चाहिए था।’

Owaisi Boss BJP ka
Owaisi Boss BJP ka

उन्होंने कहा कि टोपी कौन पहनाएगा. टोपी तो ये पहना ही रहे हैं इतने सालों से। यह आपकी ड्यूटी है और आप कोई एहसान नहीं कर रहे, आप मुख्यमंत्री हैं। वो तो कर ही नहीं पा रहे।

सोनिया ने कहा: मोदी सरकार की ‘उलटी गिनती’ हुई शुरू

Sonia gandhi Modi sarkar bye bye

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने आज नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि देश की जनता को उस ‘खतरनाक शासन’ से बचाना होगा है जो भारत के लोकतंत्र को संकट में डाल रहा है।

वह नवगठित कांग्रेस कार्य समिति की बैठक को संबोधित कर रही थीं। सोनिया गांधी ने भारत के वंचितों और गरीबों पर ‘निराशा और डर के शासन’ को लेकर लोगों को आगाह किया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बयानबाजी उनकी इस ‘हताशा’ को दिखाती है कि मोदी सरकार के जाने की ‘ उलटी गिनती ’ शुरू हो गई है। संप्रग अध्यक्ष ने कहा, ‘‘हम गठबंधन करने और उसे सफल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इस प्रयास में हम सभी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ हैं। ’’

Sonia Gandhi Slam Narendra modi
Sonia Gandhi Slam Narendra modi

उन्होंने कहा, ‘‘हमें खतरनाक शासन से लोगों को बचाना होगा जो भारत के लोकतंत्र को संकट में डाल रहा है।’’ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल के नेतृत्व में आज नगठित कांग्रेस कार्यसमिति की पहली बैठक हुई।

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज कहा कि नवगठित कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच का सेतु है। साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे भारत के दबे – कुचले लोगों की लड़ाई लड़ें।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने संबोधन में कांग्रेस अध्यक्ष को भरोसा दिलाया कि वह और दूसरे सभी कांग्रेसजन भारत के सामाजिक सद्भाव और आर्थिक विकास को बहाल करने के मुश्किल भरे काम को पूरा करने में उनके साथ हैं।

सिंह ने कहा, ‘‘ मैं राहुल जी को विश्वास दिलाता हूं कि हम सामाजिक सद्भाव और आर्थिक विकास को बहाल करने के मुश्किल भरे काम को पूरा करने उनका पूरा सहयोग करेंगे।’’

क्या 2019 का भारत का आखिरी चुनाव होगा?

ban evm vvpat 2019 election

जून 24 2017 को टाइम्स ऑफ इंडिया में छपा हुआ आर्टीकल कहता है कि अगर 2019 में बीजेपी जीतती है तो भारत में क्या फिर कभी इलेक्शन होंगे?

ये आर्टिकल बहुत ही भयंकर जानकारी दे रहा है। इस आर्टिक्ल के अनुसार अगर बीजेपी 2019 में सत्ता में आती है तो समझ लेना के आपको दुबारा मतदान करने की जरुरत ही नहीं पडेगी। इसलिए काँग्रेस और भाजपा दोनों इसी एजेंडे पर काम कर रहे हैं। बहुत जल्द भाजपा और काँग्रेस कि साझेदारी होती हुई दिखाई देगी।

evm machine
evm machine

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार भाजपा के लिए 2019 का चुनाव बहुत ही महत्वपूर्ण होने वाला है। अगर 2019 का चुनाव भाजपा जीतती है तो भारत को आधिकारिक तौर पर हिन्दू राष्ट्र का दर्जा दे देगी। मगर इसमें सबसे बड़ी बाधा भारत का संविधान है। लोक सभा और राज्यसभा में बहुमत होने का कारण भाजपा 2019 के बाद भारत का संविधान बादल कर एक पार्टी द्वारा शासित देश कर सकती है।

evm vvpat 2019 election
evm vvpat 2019 election

ऐसे में भारत कि जनता के पास 2019 आखिरी मौका है संघी एजेंडे को फ़ेल करने का।

अगर भाजपा 2019 में बहुमत हासिल कर लेती है तो वो भारत के मौजूदा संविधान को खत्म कर “ब्राम्हण पीनल कोड” यानि ब्राह्मणों का राज “मनुस्मृति” के संविधान को लागू कर देगी।

इसीलिए हमें सबसे पहले ईवीएम को बैन करवाकर बैलेट पेपर पर चुनाव करने के संघर्ष करना चाहिए। जैसा कि चुनाव आयोग ने एक नया शोसा छोड़ दिया है VVPAT का, असल में देखा जाए तो ये वीवीपीएटी ही ईवीएम हैकिंग को कानूनी जामा पहनाने का एक हथियार है।

इसको एक छोटे से उदाहरण से समझा जा सकता है कि जैसे एटीएम से पैसा निकलते वक़्त आपके अकाउंट से पैसा तो कट जाता है मगर पैसा आपको नहीं मिलता, यानि एटीएम से पैसा आपको नहीं मिलता। उसके बाद लगते रहो कस्टमर केयर के चक्कर…!!!

#BAN_EVM_SAVE_NATION

विडियो: अलवर की घटना पर ओवैसी ने ‘मोदी राज’ को दिया ये खतरनाक नाम, मचा बवाल

Modi hai gau taskar

राजस्थान के अलवर में गो-तस्करी के शक में हुई मॉब लिं चिंग की घटना पर एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मोदी शासन के चार सालों को ‘लिंच राज’ की संज्ञा दी है।

Owaisi mODI bOSS
Owaisi mODI bOSS

अलवर में गोरक्षकों ने एक बार फिर आतंक मचाया है। आरोप है कि दो गाय ले जा रहे हरियाणा के अकबर खान को कुछ लोगों ने पकड़कर उनकी बुरी तरह पिटाई की, जिससे उनकी मौ त हो गई। इस घटना ने एक बार राजस्थान में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने एक बार फिर इस घटना के जरिए मोदी सरकार को घेरा है।

Owaisi tWEET
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ओवैसी ने घटना की आलोचना करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत देश में गाय का जीवन बुनियादी अधिकार बन गया है और उसकी वजह से जिन मुसलमानों को मा रा जा रहा है, उन्हें जीने का कोई अधिकार नहीं है। ओवैसी ने सीधे तौर पर मोदी सरकार के चार सालों को लिंच राज करार दिया है।

Owaisi Modi ka baap
Owaisi Modi ka baap

वहीं, सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने घटना की तो आलोचना की है, लेकिन सवाल भी खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यह घटनाएं क्यों होती हैं, इसके पीछे जाना होगा। बीजेपी शासित राज्यों में मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर मेघवाल ने कहा कि जैसे-जैसे मोदीजी पॉपुलर हो रहे हैं, इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सब मोदी जी की प्रसद्धि से डरकर किया जा रहा है।

रामगढ़ थाना क्षेत्र के लालवंडी गांव में कुछ लोगों ने अकबर खान को पीट-पीटकर मा र डाला। जानकारी है कि अकबर खान के साथ दो गाय थी। ऐसा देख गो-तस्करी के शक में कुछ लोगों ने पीट-पीटकर उसकी ह त्या कर दी। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है और गायों को गोशाला में भेज दिया गया है। मेडिकल बोर्ड से श व का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। मृ तक अकबर खान हरियाणा के कोलगांव का निवासी है।

Turkey President Recep Tayyib Erdogan, हुज़ूर Tajush shariah Rahmatullahi Alayhi को खिराजे aqeedat पेश करते हुए.

Turkey President Recep Tayyip Erdogan Remember Tajushshariah Rahmatullahi Alaihi

Turkey President Recep Tayyib Erdogan, हुज़ूर Tajush shariah Rahmatullahi Alayhi को खिराजे aqeedat पेश करते हुए.

 

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Listen to the above audio in which Turkey president Recep Tayyib Erdogan remembering the Great Sufi scholar of Islam Hazrat Tajush shariah Rahmatullahi Alayhi.

Tajushshariah Rahmatullahi Alaihi Parda
Tajushshariah Rahmatullahi Alaihi Parda

An author of more than 50 books on Islamic theology and thought in Urdu and Arabic, Azhari inspired hundreds of scholars. After receiving his basic education at the Manzar-e-Islam madrassa of the Dargah Aala Hazrat and Islamia Inter College, Bareilly, he pursued higher studies at Al-Azhar University, Egypt. He was honoured with the prestigious ‘Fakhre Azhar’ (pride of Azhar) award by the university.

Namaze Janaza ka time me tabdeeli hue hai

Tajushshariah Rahmatullahi Alaihi
Tajushshariah Rahmatullahi Alaihi

Ahbaab e Ahl e Sunnat Ko Ittela Di Jaati Hai Ke Baroz Itwaar(Sunday) 22 July 2018 Ko Subha 10 Baje Islamiya Inter Collage Me Nabeera e Ala Hazrat Janasheen e Huzoor Mufti e Azam e Hind Sayyedna Huzoor Tajushshariyah Hazrat Allama Maulana Mufti Muhammad Akhtar Raza Khan Qadri Radiallahu Tala Anhu Ki Namaz e Janaza Ada Ki Jayegi

गले लगने के दौरान मोदी ने कान में कही ऐसी बात, जिसके जवाब में राहुल गाँधी ने मारी आँख!

Modi Roye Rahul Aankh mare

इस लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तेजी से बहस अचल रही है। इस दौरान संसद में बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे को जबरदस्त तरीके से आरोपों के घेरे में लेने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के निशाने पर आई बीजेपी इस वक़्त काफी कमज़ोर पड़ी हुई नज़र आ रही है। इस बार का मानसून सत्र सत्ता में बैठी मोदी सरकार का अंतिम मानसून सत्र है।

1. संसद में कांग्रेस के निशाने पर बीजेपी

Rahul Gandhi Ne Kiya Modi Ko Lal Pila
Rahul Gandhi Ne Kiya Modi Ko Lal Pila

इस आरोप-प्रत्यारोप के दौर के दौरान संसद में काफी हंगामा मचा रहा। हालांकि बीच में एक बार संसद सिर्फ 8 मिनट के लिए स्थगित की गई। लेकिन आज सात घंटे लगातार सदन में बहस जारी रही। आपको बता दें कि इस बार सदन में हंगामे के साथ और यहाँ पर कई ऐसे नज़ारे देखने को मिले जो इससे पहले कहीं पर भी नहीं देखे गए होंगे।

2. पीएम मोदी को राहुल ने लगाया गले

Rahul Gandhi Mile Modi K gale
Rahul Gandhi Mile Modi K gale

जी हाँ, बीजेपी पर हावी हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जमकर आरोप तो लगाए लेकिन बाद में राहुल ने ऐसा काम कर डाला जिसकी उम्मीद किसी ने भी नहीं की होगी। आपको बता दें बीजेपी पर कई आरोप लगाने के बाद राहुल चलकर देश के प्रधानमंत्री के पास पहुंचे और उन्हें गले लगा लिया।

3. पीएम मोदी को नहीं हुआ यकीन

Modi Ko Rulaya Rahul Ne
Modi Ko Rulaya Rahul Ne

राहुल के इस जैस्चर को देख कर एक बार तो पीएम मोदी भी आश्चर्यचकित हो गए। लेकिन पीएम मोदी ने भी राहुल के साथ गर्मजोशी से हाथ मिलाया और उनके कान में कुछ कहते हुए पीठ भी थपथपाई। इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिली है कि इन दोनों पीएम मोदी ने राहुल गाँधी के काम में क्या कहा।

4. पीएम मोदी को गले लगा राहुल ने मारी आँख

Rahil Wink Modi Blink
Rahil Wink Modi Blink

लेकिन इसके बाद अपनी सीट पर जाकर बैठे राहुल गाँधी ने एक नेता को आँख मार दी। जिसे लेकर सोशल मीडिया अपर हंगामा मच गया है। संसद में आँख मारते हुए राहुल की तस्वीर और वीडियो वायरल होने लगी है। इस दौरान सोशल मीडिया पर राहुल की तुलना इंटरनैट सेंसेशन बन चुकी प्रिया प्रकाश वारियर से हो रही है।

निष्कर्ष:  गौरतलब है कि राहुल गाँधी ने आज लोकसभा में हिन्दू होने की एक अलग परिभाषा दी है। उन्होंने कहा मैं किसी से नफरत नहीं करता और पीएम मोदी को गले लगा लिया।

Story Source: https://navbharattimes.indiatimes.com/india/rahul-gandhi-winks-after-hugging-pm-narendra-modi/articleshow/65068298.cms

JNU प्रकरणः दिल्ली हाईकोर्ट से मिला कन्हैय्या कुमार को इंसाफ, जानिये क्या है पूरा मामला?

Kanhaiya kumar Modi Dargaya

नई दिल्ली –  देश की प्रतिष्ठित यूनीवर्सिटी जवाहरलाल नेहरु विश्विद्यालय प्रशासन के लिए शुक्रवार को बड़े झटके वाली खबर आई. जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के पक्ष में शुक्रवार को दिल्ली की हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने विश्विद्यालय प्रशासन के उस फ़ैसले को रद्द कर दिया है जिसमें विश्विद्यालय की तरफ से कन्हैया कुमार पर 10 हज़ार रूपये का जुर्माना लगाया गया था. जानकारी के लिये बता दें कि हाल ही में विश्विद्यालय प्रशासन ने कन्हैया कुमार पर जुर्माना लगाया था. विश्निद्यालय ने इसकी वजह कन्हैय्या द्वारा अनुशासन तोड़ना बाताया था.

अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि कन्हैया कुमार के ऊपर की गई कार्रावाई अवैध है. हाईकोर्ट ने कहा कि विश्विद्यालय का आदेश तर्कहीन, अनियमित और अवैध है. अदालत का यह फ़ैसले के आते ही जेएनयू के वकील ने कहा कि वे कन्हैया कुमार पर लगाए गए जुर्माने को वापिस ले रहे हैं.

Kanhaiya kumar Real hero
Kanhaiya kumar Real hero

हाईकोर्ट ने जेएनयू के वकील से कहा कि,”ये बेहतर है कि आप जुर्माना वापस ले रहे हैं वरना हमने अपने आदेश में यह बताया था कि आपने जो जुर्माना कन्हैया कुमार पर लगाया है उसमें क्या-क्या खामियां हैं”. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि हमने बताया था कि ऐसे जुर्माने का कोई औचित्य नहीं है. कन्हैया कुमार के खिलाफ विश्विद्यालय प्रशासन द्वारा की गई कार्रावाई तर्कहीन है.

गौरतलब है कि कन्हैया के अलावा जेएनयू के ही छात्र उमर ख़ालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य समेत कई और जेएनयू छात्रों पर विश्विद्यालय प्रशासन ने जुर्माना लगाया था और उनका निष्कासन किया है, अब इस मामले में 16 अगस्त को अगली सुनवाई होगी.

JNU Sedition case
JNU Sedition case

बता दें 9 फ़रवरी 2016 को जेएनयू में कथित रूप से देश विरोधी नारे लगे थे, दक्षिणपंथी गुटों ने ये भी कहा था कि ये नारे कन्हैया और उनके समर्थकों द्वारा लगाए जबकि कन्हैया और उनके साथियों ने भाजपा के छात्रसंगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) जैसे दक्षिणपंथी गुटों को इसका ज़िम्मेदार बताया है.

अविश्वास प्रस्ताव: संसद में ओवैसी ने मोदी सरकार पर दागे ये 7 धाकड़ सवाल

Owaisi se dargaye Modi G

लोकसभा में टीडीपी द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर संसद में जबदस्त गहमागहमी देखने को मिली। इसी क्रम में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुसलमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए सात सवाल पूछे। उन्होंने काफी कम समय में अपनी बात रखी और सात सवाल पूछे।

असदुद्दीन ओवैसी के सात सवाल

1। प्रधानमंत्री बोलते हैं कि मुसलमानों के हाथ में कुरान और कंप्यूटर देखना चाहते हैं आखिर क्या वजह है कि 2013-2018 तक बजट में कोई वृद्धि नहीं हुई ?

2। प्रधानमंत्री के15 पॉइंट प्रोग्राम का यह नियम है कि तीन महीने में एक दफा कैबिनेट सेक्रेटरी बैठक लेगा, लेकिन चार साल में कोई बैठक क्यों नहीं हुई? इसी प्रोग्राम में 10वां बिंदु है जिसमें अकलियत को रेलवे, पैरामिलिट्री में रोजगार दिया जाएगा, लेकिन एक प्रतिशत रोजगार नहीं दिया गया।

3। प्रधानमंत्री ने 1400 करोड़ रूपए दौरे में खर्च किए लेकिन क्या वजह है कि नेपाल श्रीलंका और मालदीव चीन की गोद में बैठा है?

Modi Dare Owaisi se
Modi Dare Owaisi se

4। प्रधानमंत्री दलितों से मुहब्बत करने का जिक्र करती है लेकिन जिस जज ने एसएसी-एसटी एक्ट के खिलाफ फैसला दिया क्या वजह है कि उन्हे एनजीटी का चेयरमैन बना दिया गया?

5। कश्मीर को लेकर क्या पॉलिसी है जितने आतंकवादी मारे जाते हैं उतनी ही संख्या में हमारे जवान भी मारे जाते हैं।

6। जिस तरह से देश में दलितों और मुसलमानों का दमन हुआ है। क्या प्रधानमंत्री कांग्रेस मुक्त भारत चाहते हैं या दलित-मुसलमान मुक्त मुल्क चाहते हैं?

7। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा सबसे बड़ी लिंचिंग 1984 मे हुई, मैं कहना चाहता हूं कि लिंचिंग न सिर्फ 1984 में हुई बल्कि बाबरी की शहादत में और 2002 के गुजरात दंगों मे भी हुई थी।

बता दें कि बीते बजट सत्र में भी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश की गई थी, लेकिन तब हंगामे की वजह से प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सका था। लेकिन संसद के मॉनसून सत्र में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने टीडीपी द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

अविश्वास प्रस्ताव: संसद में विपक्ष पर जमकर बरसे राजनाथ सिंह

Rajnath singh Kadi ninda

शुक्रवार को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चल रहे बहस के दौरान केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपना पक्ष रखा। अपने भाषण में राजनाथ सिंह ने कहा कि इस सदन में राजीव गांधी के शासन के समय भारतीय जनता पार्टी की 2 सीट थी। जिस वक़्त हमारा मजाक उड़ाया गया था।

लेकिन आज हम इस सदन में सबसे ज्यादा सीट के साथ बहुमत वाली पार्टी हैं। राजनाथ सिंह ने कहा यह अविश्वास प्रस्ताव बेबुनियादी है, सरकार फास्टेस्ट ग्रोव्थिंग के साथ चल रही है लेकिन विपक्ष इसमें बाधा बन रहे हैं।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह के भाषण के दौरान विपक्ष का हंगामा

विपक्ष पर हमला बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा विपक्ष का एक अहम् रोल होता है जिसका सम्मान करना चाहिए। पिछले सरकार में हमने सरकार जैसे-तैसे चलने दिया। हम विपक्ष में थे लेकिन अविश्वास जैसे प्रस्ताव को लाकर बाधा नहीं डाला।

विपक्ष का फर्ज है कि जनता जनार्धन के निर्णय का सम्मान करें। जनता ने नरेंद्र मोदी को देश का नेता चुना है उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना बेबुनियादी है। राजनाथ सिंह ने कहा हमारी सरकार में महंगाई घटी है। यह प्रमाण देश का हर नागरिक दे रहा है।

Idiot Modi G
Idiot Modi G

जीडीपी ग्रोथ पर रखी बात

राजनाथ सिंह ने कहा हमारी सरकार के कारण ही 4 साल में भारत की रैंकिंग 9वें स्थान से 6वें स्थान पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सबसे मजबूत देश बना हुआ है। साथ ही कहा कि मोबाइल बनाने की फैक्ट्री 2 से 120 हमारे सरकार के कार्य के वजह से हुई है। नोटबंदी पर बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि नोटबंदी को बदनाम करने वाले यह क्यों भूल जाते हैं कि नोटबंदी के बाद भी उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत से हमारी सरकार बनी।

रक्षा को लेकर बताया सैनिक खुश हैं

राजनाथ सिंह ने कहा मई कश्मीर में अपना ज्यादा समय बिताता हूँ। वहां सैनिकों के बीच में रहता हूँ, मई इस सदन में कहना चाहता हूँ कि देश के सैनिक भी मोदी की निति से बेहद खुश हैं और समृद्ध महसूस कर रहे हैं। राजनाथ ने कहा कि देश से पैसा लेकर भागने वालों के लिए कानून हमारी सरकार में बनाए गए।