मीडिया की आज़ादी सत्ता को क्यों मंज़ूर नहीं है?

Media bol press freedom narendra modi govt

मीडिया बोल की 62वीं कड़ी में उर्मिलेश मीडिया की आज़ादी पर पूर्व पत्रकार व आप नेता आशुतोष और वरिष्ठ पत्रकार नीरेंद्र नागर से चर्चा कर रहे हैं.

 

Source: thewirehindi.com

2019 में लोकसभा के साथ ही हो सकते हैं विधानसभाओं के चुनाव

2019 mai Loksabha election ke sath hi ho sakte hain vidhansabha election

पूरे देश में लोकसभा व विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने में भले ही संवैधानिक दिक्कतें हों, लेकिन अगले साल लोकसभा के साथ एक दर्जन राज्यों के विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। एक साथ चुनाव कराए जाने की दिशा में यह बड़ी शुरुआत होगी। इसके लिए किसी तरह के संविधान संशोधन व कानूनी बदलावों की जरूरत भी नहीं होगी।
भाजपा व सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, चूंकि चुनाव आयोग व अधिकांश दल एक साथ चुनाव कराए जाने के समर्थन में हैं, ऐसे में अगले साल लोकसभा चुनावों से इसकी शुरुआत हो सकती है। इसके लिए जो फार्मूला तैयार किया गया है उसके अनुसार लोकसभा चुनावों के साथ ओडिशा, आंध्र प्रदेश व तेलंगाना के चुनाव तो होने ही हैं। अन्य कुछ राज्य भी शामिल हो सकते हैं।

कुछ महीने बढ़ सकते हैं चार राज्यों के चुनाव
इसके पहले इस साल के आखिर में जिन चार राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान व मिजोरम के चुनाव होने हैं उनमें कुछ की विधानसभा अवधि फरवरी 2019 तक है। ऐसे में वहां पर दो-चार महीने का राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। चूंकि चुनाव आयोग भी एक देश एक चुनाव के पक्ष में हैं, इसलिए ऐसा करने में ज्यादा दिक्कत नहीं है।

लोकसभा के बाद वाले तीन राज्य पहले करा सकते हैं चुनाव
लोकसभा चुनावों के बाद हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड के विधानसभा चुनाव नवंबर 2019 में होने हैं। इन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं और वे पहले चुनाव करा सकती हैं। जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन है और वहां भी अगले साल चुनाव संभावित हैं। इस तरह लोकसभा के साथ अप्रैल मई में कम से कम 11 राज्यों के चुनाव हो सकते हैं।

बिहार भी हो सकता है शामिल
इसमें बिहार भी शामिल हो सकता है। वहां के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इसके समर्थक हैं और भाजपा के साथ गठबंधन में फिर से जनादेश लेने में वह भी समय से पहले चुनाव के लिए तैयार हो सकते हैं। भाजपा के एक प्रमुख नेता ने कहा है कि अगर एक साथ एक दर्जन राज्य विधानसभा चुनाव में जाते हैं तो उसके बाद देश भर में एक देश एक चुनाव का माहौल बनेगा। ऐसे में जरूरी संवैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करना भी आासल होगा।

 

Source: hindi.siasat.com

अमित शाह के बेटे की एक और बड़ी लूट! 5 करोड़ की कंपनी को मिला 97 करोड़ का कर्ज, कर्ज देने वाले बैंक ‘भाजपा’ से संबंधित

Amit Shahs son get crores of credit on basis of cheap guarantees

भाजपा ने कई साल तक राहुल गाँधी को ‘शहज़ादा’ नाम से पुकारा। लेकिन पिछले साल से भारतीय राजनीति में एक नया शहज़ादा आया है जिसे राजनीतिक पार्टियाँ और मीडिया “शाहज़ादा” कहकर बुलाती है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह को इस नाम से पुकारा जा रहा है। इसका कारण है उनकी कंपनियों में अचानक आया कई गुना मुनाफा और उसका राजनीतिक संबंध। अब एक बार फिर से उनकी ऐसी ही एक कंपनी का खुलासा हुआ है।

‘द कैरावान’ पत्रिका की एक खबर के मुताबिक, जय शाह की कंपनी ‘कुसुम फिनसर्व’ को पिछले कुछ सालों में सहकारी बैंक, निजी बैंक और सरकारी कंपनी से 97.35 करोड़ रुपये का कर्ज मिला है। जबकि कंपनी लगातार घाटे में रही है और कंपनी का कुल मूल्य 5.83 करोड़ रुपये हैं। जो कर्ज के मुकाबले बहुत कम है।

जिन ज़मीनों को गिरवी रख ये कर्ज दिए जा रहे हैं उनकी कीमत भी कर्ज के मुकाबले बहुत कम है।

कर्ज देने वाले बैंक और सरकारी कंपनी से भाजपा और केंद्र सरकार का संबंध है। इसलिए इस बात का संदेह पैदा होता है कि अमित शाह अपने राजनीतिक कद का फायदा अपने बेटे जय शाह को फायदा पहुँचाने के लिए उठा रहे हैं और भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं।

गौरतलब है कि इस से पहले भी न्यूज़ वेबसाइट ‘द वायर’ ने खुलासा कर बताया था कि जय शाह की एक कंपनी ‘टेम्पल एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड’,जिसको 2014 में 50,000 का मुनाफा हुआ था, उसका मुनाफा अगले साल बढ़कर 80.5 करोड़ रुपयें हो गया। खुलासे के बाद अक्टूबर 2016 में इस कंपनी ने काम करना बंद कर दिया।

 

Source: boltaup.com

PM मोदी के इंटरव्यू पर कांग्रेस का पलटवार, कहा ‘जुमलों के शहंशाह ने छिड़का परेशान देश के जख्मों पर झूठ का नमक’

Congress is angry on PM Modi interview

नई दिल्ली – कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बीते रविवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि यूं तो कहा यह जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने विभिन्न मुद्दों पर खुलकर विचार रखे. लेकिन पहले से तय कथित प्रश्नों के पूर्व नियत और निर्धारित उत्तरों में वे अपनी सरकार की एक भी उपलब्धि या पहल नहीं बता पाए. कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि अपने एकालाप में पीएम ने अर्थव्यवस्था और विकास पर सफेद झूठ बोला और सामाजिक समरसता के तहस नहस होने पर घड़ियाली आंसू बहाए.

उन्होंने कहा कि देश प्रधानमंत्री से यह एकतरफा कथ्य की नहीं बल्कि सत्य सुनना चाहता है. कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पीएम ने एक बार लोगों को अच्छे दिनों का झांसा देने की कोशिश की.कांग्रेस ने कहा कि 2014 में उन्होंने देश को सुनहरे सपने दिखाए थे, कि 60 महीने में अच्छे दिन आ जाएंगे, लेकिन जब सरकार का कार्यकाल पूरा हो रहा है और वे हर मोर्चे पर नाकाम हुए हैं तो सपनों की डेडलाइन 2022 कर दी गई है यानी 108 महीने.

पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पीएम को बताना चाहती है कि उनकी सरकार अब सिर्फ 9 महीने से ज्यादा नहीं चल पाएगी. और भले ही वे विपक्ष को कितने उलाहने दें और बुरा भला कहें, देश के लोग बीजेपी और मोदी को 2019 में करारा जवाब देंगे.कांग्रेस ने उन सभी मुद्दों को उठाया, जिन्हें प्रधानमंत्री ने अपने कथित इंटरव्यू में पेश किया था कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हर साल दो करोड़ नौकरियां और रोजगार का वादा किया था. लेकिन उनकी सरकार हर साल सिर्फ कुछ लाख नौकरियां और रोजगार ही दे सके. प्रधानमंत्री ने 20 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव के दौरान अपने भाषण में कहा था कि बीते एक साल में एक करोड़ रोजगार पैदा हुए हैं.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कुछ नहीं बस लोगों को गुमराह करने वाला बयान है, जिसका उपहास आम लोग उड़ा रहे हैं.कांग्रेस ने कहा कि सिर्फ ईपीएफओ में पंजीकरण का मतलब ही रोजगार या नौकरी की उपलब्धता नहीं मानी जा सकती, क्योंकि ये आंकड़े सिर्फ उन लोगों के होते हैं जो अनौपचारिक क्षेत्र से औपचारिक क्षेत्र में काम शुरु कर देते हैं.

पवन खेड़ा ने बताया कि कोई भी उपक्रम अगर 20 या अधिक लोगों को अपने यहां काम पर रखता है तो उसे नियमानुसार ईपीएफओ में सभी को पंजीकृत कराना जरूरी है. उन्होंने बताया कि अगर कोई ऐसा संस्थान जिसके यहां पहले से 19 कर्मचारी काम कर रहे थे और वहां एक और व्यक्ति को काम मिलता है तो उसे ईपीएफओ मे पंजीकरण कराना होता है. यह नई बीस नौकरियां नहीं हैं, बल्कि सिर्फ एक नई नौकरी है.

उन्होंने कहा कि नोटबंदी ने अनौपचारिक क्षेत्र की कमर तोड़कर रख दी और एक अव्यवस्थित और जल्दबाज़ी में लागू जीएसटी ने ट्रेडर और कारोबारियों की जिंदगी दुश्वार कर दी है. उन्होंने बताया कि नोटबंदी के पहले दो महीने में ही कम से कम 1.26 करोड़ लोगों से रोजगार छिन गया था. आईएलओ का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि उसके मुताबिक 2019 तक देश के 77 फीसदी कामकाजी लोगों के सामने नौकरी का खतरा मंडराता रहेगा.

कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा ऋण योजना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते रहे हैं. पवन खेड़ा ने बताया कि अगर प्रधानमंत्री के शब्दों से ही गणना करें तो पता चलता है कि इस योजना के 91 फीसदी लाभार्थियों को मात्र 23,000 रुपए का कर्ज मिला. इस पैसे से क्या कोई पकोड़े की दुकान खोलेगा?प्रधानमंत्री द्वारा जीएसटी पर पूछे सवाल में डकैत शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर पवन खेड़ा ने कहा कि असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल करना प्रधानमंत्री की आदत बन चुकी है. सब जानते हैं कि वे आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं जिनके आपत्तिजनक और असंसदीय शब्दों को संसद की कार्यवाही से निकाला गया है. ऐसे में उनसे डकैत शब्द सुनना अधिक हैरान नहीं करता. हकीकत यह है कि देश भर में अब भी जीएसटी का विरोध हो रहा है. अभी पिछले महीने ही देश भर ट्रकों की हड़ताल थी और इसका सर्वाधिक असर बीजेपी शासित महाराष्ट्र और गुजरात में था. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि हर चुनाव से पहले प्रधानमंत्री जीएसटी दरों में फेरबदल कर कुछ सामान सस्ते कर देते हैं ताकि वोटरों को लुभाया जा सके.

कांग्रेस ने बैंकों के लगातार बढ़ते एनपीए पर भी प्रधानमंत्री पर हमला बोला और कहा कि उनके शासन में बैंकों के एनपीए में जबरदस्त इजाफा हुआ है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि असम के एनआरसी को प्रधानमंत्री विभाजनकारी नीति और ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री विदेशियों को देश से भगाने के मुद्दे पर झूठ बोलना बंद करें.

कांग्रेस ने कहा कि संसद में दिए गए जवाबों से साबित होता है कि 2005 से 2013 के बीच यूपीए सरकार ने 82,728 बांग्लादेशी विदेशियों को देश से बाहर भेजा, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में मात्र 1,822 बांग्लादेशियों को ही देश से बाहर भेजा गया है.कांग्रेस ने एक बार फिर राफेल विमान सौदे का मुद्दा उठाया. कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से सीधे सवाल पूछे कि आखिर देश को हर विमान की कीमत क्यों नहीं बताई जा रही? ऑफसेट कांट्रेक्ट हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से छीनकर एक ऐसी निजी कंपनी को क्यों दिया गया जिसे इस क्षेत्र का कोई अनुभव नहीं है? 26 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने से पहले सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से मंजूरी क्यों नहीं ली गई?

सभार नवजीवन

मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर बोले केंद्रीय मंत्री वीके सिंह- यह समस्या पूरे भारत में है, पश्चिमी यूपी ही क्यों

VK Singh says of Mob Lynching in western up

पिछले कुछ दिनों से देश में लगातार बढ़ रहीं मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट पीटकर की जाने वाली हत्या) की घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार विपक्षी पार्टियों के निशाने पर है। इसी बीच, मॉब लिंचिंग को लेकर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने एक बड़ा दिया है।

समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने कहा, ‘मॉब लिंचिंग की समस्या पूरे भारत में हैं, पश्चिम यूपी को क्यों कहते हो’। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, यह समस्या किसी एक हिस्से में नहीं बल्कि पूरे देश में है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री वीके सिंह उत्तर प्रदेश के मेरठ में चल रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की कार्यसमिति की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इस दौरान जब मीडियाकर्मियों ने केंद्रीय मंत्री वीके सिंह से मॉब-लिंचिंग की घटनाओं को लेकर पूछा तो उन्होंने यह जवाब दिया।

बता दें कि इससे पहले एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में पीएम मोदी ने मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों पर हर किसी को राजनीति से ऊपर उठकर समाज में शांति और एकता सुनिश्चित करने के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा था ऐसे विषयों पर राजनीति करना गलत है, साथ ही पीएम मोदी ने ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठा रहा है।

गौरतलब है कि अलग-अलग वजहों से हुई मॉब लिंचिंग के चलते कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. जिसके चलते विपक्ष सरकार पर इस मुद्दे को लेकर कई बार हमला बोल चुका है। अभी हाल ही में राजस्थान के अलवर जिले में एक मुस्लिम युवक को कथित गो-तस्करी के आरोप में पीट-पीटकर भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया था।

Source: jantakareporter.com

ममता सरकार द्वारा न्यूज़ चैनलों को बंद किए जाने के अमित शाह के आरोपों पर पुण्य प्रसून बाजपेयी का तंज, बोले- “वाक़ई देश में लोकतंत्र है, अच्छा लगा सुनकर”

Punya Prasun Bajpai attack Amit Shah

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार (11 अगस्त) को कोलकाता में ममता सरकार पर हमला करते हुए कहा कि बंगाल को घुसपैठियों का घर नहीं बनने देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी शरणार्थियों के खिलाफ नहीं। रैली के दौरान उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस बांग्लादेश से घुसपैठ को संरक्षण दे रही है। ऐेसी सरकार को हटाना होगा।

इस दौरान अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बीजेपी अध्यक्ष ने ममता सरकार पर बंगाली चैनलों के सिग्नल को प्रभावित करने का आरोप लगाया। अमित शाह ने कहा कि रैली के दौरान अनेक प्रकार का व्यवधान डालने का काम किया गया। आज बंगाल की जनता रैली न देख पाए इसलिए सारे बांग्ला चैनलों को डाउन (बंद) कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि अभी यह रैली बंगाल की जनता देख नहीं पा रही है। बीजेपी अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि ममताजी हमारी आवाज बंद करने से यह आवाज रूकेगी नहीं। मैं बंगाल के हर जिले में जाऊंगा और टीएमसी को उखाड़ दूंगा। लोकतंत्र का इतिहास उठाकर देख लीजिए, जिन्होंने भी आवाज दबाने का काम किया है वह खत्म हो गए।

पुण्य प्रसून बाजपेयी ने कसा तंज

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा ममता सरकार पर बंगाली न्यूज चैनलों के सिग्नल को प्रभावित किए जाने के आरोपों पर वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने ट्वीट कर तंज कसा है। बाजपेयी ने ममता सरकार द्वारा चैनलों को बंद किए जाने के अमित शाह के बयान को शेयर करते हुए लिखा है, “वाक़ई देश में लोकतंत्र है…अभिव्यक्ति की आज़ादी होनी चाहिए…अच्छा लगा सुन कर”।

बता दें कि देश के प्रमुख हिंदी समाचार चैनल ABP न्यूज में पिछले दिनों भारी उथल पुथल देखने को मिला। मोदी सरकार के आलोचक के रूप में चैनल में कार्यरत प्रमुख नामों को या तो इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया गया या उन्हें रिपोर्ट ना करने के लिए निर्देश दे दिया गया। मोदी सरकार के कार्यों को लेकर सवाल पूछने वाले चैनल में कार्यरत कई पत्रकारों को तो जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है।

ABP न्यूज़ में 1-2 अगस्त को जो कुछ हुआ, वह काफी भयानक था। 24 घंटे के अंदर चैनल के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर और वरिष्ठ पत्रकार व एंकर पुण्य प्रसून बाजपेयी ने ABP न्यूज से इस्तीफा दे दिया। प्रसून के अलावा अभिसार शर्मा को भी लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है। बता दें कि बाजपेयी का ‘मास्टर स्ट्रोक’ शो हर रोज सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे आता था।

माना जा रहा है कि मिलिंद खांडेकर और पुण्य प्रसून बाजपेयी की विदाई ‘मास्टरस्ट्रोक’ के कारण ही हुई है। देश के वरिष्ठ पत्रकारों में से एक बाजपेयी अपने शो ‘मास्टर स्ट्रोक’ से मोदी सरकार की ना​कामियों और जनता से किए कथित झूठे वादों का सच उजागर कर रहे थे। जिसके चलते अब उन्हे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ गया है।

जानें, लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष और 10 बार सांसद रहे सोमनाथ चटर्जी के जीवन से जुड़ी 15 खास बातें

Somnath Chatterjee passed away

लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का सोमवार (13 अगस्त) सुबह कोलकाता के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। चटर्जी 89 वर्ष के थे और उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा एवं दो बेटियां हैं। चटर्जी को कल ‘‘दिल का हल्का दौरा’’ पड़ा था, जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई और सोमवार सुबह करीब सवा आठ बजे उनका निधन हो गया। चटर्जी को किडनी से संबंधित बीमारी थी और उन्हें गत मंगलवार को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

चटर्जी को कल सुबह दिल का दौरा पड़ा था। उनका आईसीयू में इलाज चल रहा था। लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष को पिछले महीने मस्तिष्क में रक्तस्राव हुआ था। उनका पिछले 40 दिन से इलाज चल रहा था और स्वास्थ्य में सुधार होने के चलते उन्हें तीन दिन के लिए अस्पताल से छुट्टी दी गई थी। लेकिन पिछले मंगलवार को उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

जानें, चटर्जी के जीवन से जुड़ीं खास बातें

  • सोमनाथ चटर्जी का जन्म 25 जुलाई, 1929 को असम के तेजपुर में हुआ था।
  • उनके पिता का निर्मल चंद्र चटर्जी और मां का नाम वीणापाणि देवी था।
  • मशहूर वकील निर्मलचंद्र चटर्जी अखिल भारतीय हिंदू महासभा से जुड़े थे।
  • सोमनाथ चटर्जी की शिक्षा-दीक्षा कलकत्ता और ब्रिटेन में हुई। उन्होंने ब्रिटेन के मिडल टेंपल से बैरिस्टर की पढ़ाई की थी।
  • चटर्जी ने पहली बार 1971 में लोकसभा चुनाव लड़ा और संसद पहुंचने में कामयाब रहे।
  • 1971 में पहली बार सांसद बने चटर्जी 10 बार लोकसभा सदस्य के रूप में चुने गए।
  • चटर्जी माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य थे। वह 1968 में माकपा में शामिल हुए थे।
  • वह वर्ष 2004 से 2009 तक लोकसभा के अध्यक्ष रहे।
  • उन्होंने 35 सालों तक सांसद के तौर पर देश की सेवा की और इसके लिए उन्हें साल 1996 में सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • माकपा के संप्रग की पहली सरकार से समर्थन वापस ले लेने के बावजूद चटर्जी ने लोकसभा के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था।
  • इस वजह से वरिष्ठ नेता को वर्ष 2008 में माकपा से निष्कासित कर दिया गया था।
  • ममता बनर्जी ने 1984 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर सोमनाथ चटर्जी को पटखनी दी थी।
  • सोमनाथ चटर्जी का आदर सभी पार्टियों में था। उन्हें एक बहुत ही सम्मान नेता के तौर पर देखा जाता है।
  • साल 2004 में 14वीं लोकसभा के अध्यक्ष के रूप में सोमनाथ चटजी का सर्वसम्मति से निर्वाचन सदन में एक इतिहास रच गया।
  • चटर्जी 89 वर्ष के थे और उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा एवं दो बेटियां हैं।

Source: jantakareporter.com

राहुल गांधी आज तेलंगाना दौरे पर, छात्रों-बेरोजगारों को करेंगे संबोधित

Rahul Gandhi is all set to kick start his party poll campaign in Telangana on monday

कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद अपनी पहली तेलंगाना यात्रा पर राहुल गांधी सोमवार और मंगलवार को हैदराबाद में अलग-अलग कार्यक्रमों में महिला स्वयं सहायता समूहों, विद्यार्थियों, बेरोजगार युवकों और उद्यमियों को संबोधित करेंगे.

विधानपरिषद में कांग्रेस के उपनेता पी सुधाकर रेड्डी ने कहा, ‘यह यात्रा पार्टी का मनोबल ऊंचा करेगी. पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद उनकी यह पहली तेलंगाना यात्रा है. उन्होंने तेलंगाना बनने में अहम भूमिका निभाई है.’

सोमवार दोपहर को राहुल गांधी कर्नाटक के बीदर में नेहरू स्टेडियम में एक जनसभा को संबोधित करेंगे. उसके बाद तेलंगाना दौरे पर जाएंगे, जहां उनका दो दिन प्रवास का कार्यक्रम है.

तेलंगाना कांग्रेस की ओर से घोषित कार्यक्रम के मुताबिक गांधी सोमवार दोपहर पहुंचेंगे और महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ बातचीत के लिए यहां शम्साबाद के कन्वेंशन सेंटर में जाएंगे.

मंगलवार को गांधी 31600 बूथ कमेटी अध्यक्षों, मंडल और जिला कांग्रेस अध्यक्षों और प्रदेश इकाई के पदाधिकारियों के साथ टेलीकॉन्फ्रेंस करेंगे. उसके बाद वह होटल में एक घंटे तक मीडिया संपादकों और ब्यूरो प्रमुखों के साथ बातचीत करेंगे. उसके बाद वह तेलंगाना और आंध्रप्रदेश के करीब 150 युवा उद्योगपतियों और मुख्य कार्यकारियों को संबोधित करेंगे.

शाम में कांग्रेस अध्यक्ष सरूरनगर स्टेडियम में विद्यार्थियों और बेरोजगार युवकों की एक जनसभा में जाएंगे. रात साढ़े आठ बजे वह दिल्ली रवाना हो जाएंगे.

Source: hindi.firstpost.com

सरकार नीति में मुसलमान युवाओं को शरीक करे – क़ादरी

muslim student organization India
  • मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ का एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन

नई दिल्ली, 12 अगस्त। देश में पहली बार मुस्लिम युवा छात्रों ने मिलकर राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में उन्हें सम्मिलित कर सहयोग लेने की अपील की है। अगर भारत सरकार नहीं जानती है कि विश्व पर वहाबी ख़तरे का स्तर कितना विशाल है तो हम उन्हें बता सकते हैं। यह बात आज एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में उभरकर सामने आई जिसे भारत के सबसे बड़े मुस्लिम छात्र संगठन मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ ने दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित किया था।

इस मौक़े पर खचाखच भरे स्पीकर हॉल में युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता और संगठन के पूर्व अध्यक्ष सैयद मुहम्मद क़ादरी ने कहाकि भारत एक बहुलवादी देश है और इसकी एकता को बनाए रखने के लिए युवा सबसे महती भूमिका निभा सकते हैं। प्राय देश में यह माहौल बनाया जा रहा है कि भारत का मुसलमान एक ज़िम्मेदार नागरिक नहीं है जबकि हमारा तो यह दावा है कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में शामिल किए जाने से मुस्लिम युवाओं की भूमिका का सही आंकलन हो सकेगा और राष्ट्रीय एकता के लिए यह आवश्यक तत्व है। उन्होंने कहाकि हम देश के निर्माण, प्रगति, सुरक्षा और स्थिरता को लेकर कई विकासवादी क़दम उठा सकते हैं। हमें गर्व है कि हमारे 38 वर्ष पुराने संगठन में यह कार्य बहुत ज़िम्मेदारी से निभाए जा रहे हैं। सैयद मुहम्मद क़ादरी ने उपस्थित युवाओं से अपील की कि वह देश को कमजोर करने वाली ताक़तों से डटकर मुकाबला करें और भारत की स्थिरता के लिए अपने प्राणों की बलि देने में भी पीछे नहीं रहें क्योंकि 1857 से लेकर 1947 तक चली 90 साल की क्रांति में मुसलमानों के बलिदान की बेशुमार कहानियाँ हैं और यह हमारे बुज़ुर्गों की सुन्नत है।

इस मौक़े पर तंज़ीम उलामा ए इस्लाम के अध्यक्ष और सभा के अध्यक्ष मुफ्ती अशफाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि आज़ादी औऱ ज़िम्मेदारी एक ही शाख़ के दो फूल हैं। हमें नहीं भूलना चाहिए कि संभाल कर नहीं रखी गई आज़ादी गैर जिम्मेदारी के साथ ख़तरे में पड़ जाती है। हुसैन ने युवाओं को पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद की कई उक्तियों और क़ुरान के संदर्भ में समझाने की कोशिश की कि देश के प्रति ज़िम्मेदारी और प्रेम का नाम ही राष्ट्र प्रेम है। मुफ्ती अशफाक़ हुसैन ने कहाकि देश और दुनिया को वहाबी विचारधारा से गंभीर ख़तरे हैं और तथाकथित इस्लामी आतंकवाद इसी वहाबी नीति का दुष्परिणाम है। अगर भारत सरकार समझना चाहे तो हम उनकी मदद कर सकते हैं लेकिन कम से कम मुसलमानों को साथ लेकर चलना पहले सीखे। उन्होंने कहाकि देश के साथ मुसलमान का प्रेम और बढ़ जाता है जबकि उसे नीति में भागीदारी मिले। नीति में भागीदारी को सत्ता में भागीदारी से बड़ा समझा जाना चाहिए क्योंकि सत्ता को नीति ही नियमित करती है। मुफ्ती अशफ़ाक़ हुसैन ने बताया कि हज़रत हुसैन ने मानवता की रक्षा के लिए अपने पवित्र प्राणों की बलि दे दी थी जो हमें राष्ट्र और मानवता के सेवा करने के लिए हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

सभा में मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष मुफ्ती ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही ने कहाकि देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण तत्वों को बचाने, विकसित करने और संजोने के लिए युवाओं को प्रेरित करना आवश्यक है। यह देखा जाना चाहिए कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर युवाओं को देश को कमज़ोर करने वाली ताक़तों, विचारधाराओं, साज़िश और गतिविधियों को समझने, सूंघने और सुलझाने का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। हमारे संगठन ने गौरवपूर्ण तरीक़े से इस चुनौती से निपटने के लिए युवाओं को वहाबी विचारधारा को समझने और इससे निपटने का प्रशिक्षण और शिक्षा दी जाती है। कई सफल प्रयोगों में हमने कई कट्टरवादी तत्वों को सूफ़ीवाद की विचारधारा की तरफ़ मोड़कर राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है।

अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी केरल सेंटर के शाहनवाज़ अहमद मलिक वारसी ने कहा कि देश में मानवाधिकार और सामाजिक न्याय के सम्मुख चुनौतियों से समाज में बहुत गंभीरता से विचार हो रहा है। मुसलमानों और दलित- जनजातियों को बेवजह निशाना बनाना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि देश की मूल भावना और सामाजिक ताना बाना निहित राजनीतिक स्वार्थों से अतिरिक्त है। इस पर गंभीरता से विचार करके सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने के प्रयासों और इसके लिए किए गए सूफ़ी आध्यात्मिक प्रयोगों पर चर्चा करना चाहिए। हमें गर्व है कि कई विश्वास, धर्म और नस्ल के लोगों के बीच भारतीय आध्यात्मिक सामाजिक समरसता के विचार को हमने सार्वजनिक किया है और इसके विकास, उत्थान और विस्तार के लिए हमको लगातार प्रयत्नशील रहना चाहिए, इसके लिए इंटरफेथ कॉन्फ्रेंस और सिम्पोज़ियम के बेशुमार कार्यक्रम किए जा चुके हैं और विश्वास है कि भविष्य में भी किए जाते रहेंगे।

सम्मलेन के संयोजक और कन्जुल इमान के एडिटर मौलाना ज़फरुद्दीन बरकाती ने कहाकि भारत का स्वभाव बहुलता में एकता में निहित है। इसलिए देश के सामने साम्प्रदायिक घटकों की चुनौती को कम करके नहीं आंका जा सकता। हर समुदाय को इससे निपटना चाहिए जिसमें मुसलमानों के बीच सबसे बेहतर सूफ़ी विचारधारा इसका निवारण प्रस्तुत करती है।

अम्बर मिस्बाही ने कहाकि हमें देश के प्रति जवाबदेही के लिए अन्तर सामाजिक कार्यक्रमों की आवश्यकता है क्योंकि देश में परस्पकर सामुदायिक अज्ञानता के अभाव में दूषित और असत्य जानकारी का आदान प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने तकनीक के बेहतर इस्तेमाल करने और इसे समाज, देश और खुद को मज़बूत करने में इस्तेमाल किए जाने पर बल दिया।

मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष शुजात अली क़ादरी ने कहाकि भारत का स्वभाव सामुदायिक है जिसे एक रंग, भाषा और सम्प्रदाय के तौर पर नहीं लाया जा सकता। हमें लगता है कि भारतीय मुस्लिम युवा जिसमें बहुमत सूफ़ी समुदाय का है, वह देश के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को समझता है। उन्होंने कहाकि रोज़गार और कौशल प्रशिक्षण से उसे अपने साथ लाया जा सकता है। इस मौक़े पर एक रेंडम सर्वे के आधार पर शुजात क़ादरी ने युवाओं से कई सवाल पूछे जिसके प्रत्युत्तर में उन्होंने एक छह सूत्रीय प्रतिवेदन का प्रारूप तैयार किया जिसे बाद में डाक से भारत सरकार के नाम भेजा जाएगा।

छह सूत्रीय प्रतिवेदन

इस मौक़े पर मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया ने सभा में उपस्थित लोगों के लिए छह सूत्रीय प्रतिवेदन पेश किया जिसमें देश की सुरक्षा, सामाजिक न्याय, आतंकवाद एवं कट्टरता से निवारण, रोज़गार एवं कौशल प्रबंधन, सामाजिक कार्यक्रम और पर्यावरण से जुड़े बिन्दुओं पर युवाओं को दिशा निर्देश दिए गए। इस मौक़े पर उपस्थित जनसमुदाय को यह प्रतिवेदन पढ़ कर सुनाया गया। सभी ने देश की नीति में मुस्लिम सूफ़ी युवाओं की भूमिका पर इस प्रतिवेदन को स्वीकार किया और इसे लागू किए जाने की भारत सरकार से अपील की।

यह भी रहे शामिल

सभा में कारी सगीर रिज़वी, मौलाना अब्दुल वाहिद, डॉ इमरान कुरैशी, MSO दिल्ली प्रदेश सचिव साकिब बरकाती, मुमताज़ अत्तारी, आफताब रिज़वी के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्र  भी शामिल रहे और देश की सलामती और सद्भावना के लिए सभी ने कार्यक्रम के अंत में दुआ माँगी।

कोलकाता में अमित शाह का भारी विरोध, लगे – ‘BJP वापस जाओ’ के पोस्‍टर

Posters of go back BJP pop up in Kolkata ahead of Amit Shah rally

पश्चिम बंगाल में अपनी जड़े मजबूत करने में जुटी बीजेपी का भारी विरोध हो रहा है। कोलकाता में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली से पहले पूरे शहर में ‘BJP वापस जाओ’ के पोस्‍टर देखने को मिल रहे है। हालांकि बीजेपी का दावा है कि ये पोस्टर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा लगाये गए हैं।

एएनआई ने पोस्टरों के तस्वीर जारी की हैं। इन पोस्टरों पर ‘‘भाजपा बंगाल छोड़ो’’ और ‘‘बंगाल विरोधी भाजपा वापस जाओ’’ लिखा है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक ये पोस्टर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा लगाये गए हैं। हालांकि इस आरोप से पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इनकार किया।

उधर, बीजेपी ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अमित शाह की रैली में आनेवाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। इतना ही नहीं बीजेपी ने दावा किया कि कुछ अज्ञात लोगों ने नयाबसात इलाके में शुक्रवार देर रात एक बस पर हमला कर दिया। इस बस में अमित शाह की रैली में जाने वाले कार्यकर्ता शामिल थे। हालांकि, घटना में कोई घायल नहीं हुआ है।

जानकारी के मुताबिक मायो रोड पर बीजेपी अध्यक्ष शाह ‘युवा स्वाभिमान समवेश’ रैली को संबोधित करेंगे। यह रैली दोपहर 1 बजे होगी। बता दें कि बंगाल में लोकसभा की 43 सीटें हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी को अकेले 34 सीटें मिली थीं।

VIDEO: राफेल डील के खिलाफ संसद परिसर में कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों का प्रदर्शन, सोनिया गांधी भी प्रदर्शन में हुईं शामिल

Sonia Gandhi protest rafale deal issue

‘जनता का रिपोर्टर’ द्वारा राफेल विमान सौदे को लेकर किए गए खुलासों के बाद कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियां विमान सौदे में कथित गड़बड़ी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हर रोज निशाना साध रही है। कांग्रेस राफेल का मुद्दा लगातार चर्चा में बनाए रखना चाहती है। इसी के तहत खुद पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर राफेल विमान सौदे में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए रोजाना ट्वीट कर रहे हैं।

इस बीच राफेल डील के खिलाफ कांग्रेस का विरोध-प्रदर्शन जारी है। गुरुवार (10 अगस्त) को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले संसद परिसर में कांग्रेस के सांसदों ने राफेल विमान सौदे के खिलाफ हाथ में तख्ती लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस के अलावा सीपीआई, आरजेडी और आम आदमी पार्टी सहित अन्य पार्टियों के सांसद भी शामिल हुए।

इस प्रदर्शन में यूपीए चेयरमैन सोनिया गांधी भी शामिल हुईं। इसके अवाला शुक्रवार को राफेल डील का मुद्दा संसद में भी सुनाई दी। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने राफेल डील को लेकर मोदी सरकार पर उठाए सवाल। कांग्रेस नेता ने कहा कि राफेल डील में मोदी सरकार ने बड़ा घोटाला किया है, इस पर बहस जरूर होनी चाहिए।

संसद परिसर में राफेल डील के खिलाफ प्रदर्शन में सोनिया गांधी के अलावा गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और अम्बिका सोनी समेत कांग्रेस के कई सांसद शामिल हुए। बता दें कि राहुल गांधी राफेल डील को लेकर मोदी सरकार पर लगातार हमला कर रहे हैं। उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भी यह मुद्दा उठाया था।

कांग्रेस ने इसी मामले में प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे रखा है। पार्टी का आरोप है कि राफेल विमानों की कीमत बताने के संदर्भ में मोदी और सीतारमण ने सदन को गुमराह किया है। पिछले दिनों राहुल के गंभीर आरोपों का रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब देते हुए कहा था कि 25 जनवरी 2008 को फ्रांस के साथ सीक्रेसी अग्रीमेंट कांग्रेस की ही सरकार ने किया था, हम तो इसे आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि इस अग्रीमेंट में राफेल डील भी शामिल है। रक्षा मंत्री ने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार थी उस समय तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने फ्रांस की सरकार के साथ सीक्रेसी अग्रीमेंट्स किया था। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस के अध्यक्ष जब फ्रेंच प्रेजिडेंट से मिले तो क्या बात हुई, नहीं पता।

बता दें ‘जनता का रिपोर्टर’ ने राफेल विमान सौदे को लेकर दो भागों (पढ़िए पार्टी 1 और पार्टी 2 में क्या हुआ था खुलासा) में बड़ा खुलासा किया था। जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में भुचाल आ गया। कांग्रेस राफेल डील को लेकर मोदी सरकार पर सीधे तौर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है। खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘जनता का रिपोर्टर’ की खबर को शेयर कर कई बार मोदी सरकार पर हमला बोल चुके हैं।

 

Source: jantakareporter.com

तीन तलाक़ बिल: बीजेपी ने व्हिप जारी किया, सोनिया गांधी ने कहा- ‘कांग्रेस का रुख साफ़ है’

Sonia Gandhi says our party position is absolutely clear Triple Talaq bill

संसद के मॉनसून सत्र का शुक्रवार (10 अगस्त) को अंतिम दिन है। सरकार शुक्रवार को राज्यसभा में तीन तलाक विधेयक को पेश करेगी। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने कहा कि ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख साफ है और वो इससे ज्यादा और कुछ नहीं कहना चाहती है।

आपको बता दें कि बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। लिहाजा, इस बिल को संसद की मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

वहीं, कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने इस मसले पर विपक्ष से सलाह-मशविरा नहीं किया। वहीं, विपक्ष राफेल डील को लेकर सदन में हंगामा कर सकता है।

आपको बता दें कि इससे पहले गुरुवार (09 अगस्त) को सरकार ने मुस्लिमों में तीन तलाक से जुड़े प्रस्तावित कानून में आरोपी को सुनवाई से पहले जमानत जैसे कुछ संरक्षणात्मक प्रावधानों को मंजूरी दे दी थी।

सरकार ने इस कदम से इन चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया है कि तीन तलाक की परंपरा को अवैध घोषित करने तथा पति को तीन साल तक की सजा देने वाले इस प्रस्तावित कानून का दुरुपयोग किया जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, मोदी सरकार ट्रिपल तलाक बिल को राज्यसभा में पेश करेगी और इसे पास कराने की पूरी कोशिश करेगी। सूत्रों के अनुसार, सरकार तीन तलाक बिल को संसद के दोनों सदनों में पारित कराने के लिए एक दिन का सत्र भी बढ़ा सकती है।

 

Source: hindi.siasat.com

दिल्ली में NRC जैसा अभियान कराना चाहती है भाजपा, आप ने किया कड़ा विरोध

BJP Leaders demand in assembly assam like NRC in Delhi

दिल्ली विधानसभा में विपक्षी भाजपा ने राष्ट्रीय राजधानी से अवैध आव्रजकों को बाहर निकालने के लिए राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) जैसा अभियान चलाने की मांग की. इसका आप विधायकों ने जमकर विरोध किया. दोनों दलों की इस मांग और विरोध के बीच सदन में जमकर हंगामा हुआ.

बीजेपी विधायक विजेन्द्र गुप्ता और उनके साथियों ने जैसे ही यह मांग उठाई आप विधायक तुरंत इसका विरोध करने लगे. दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा और किसी ने सदन में शांति बनाए रखने की विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गायेल की अपील नहीं सुनी. कुछ विधायक तो प्रदर्शन करते हुए अध्यक्ष के आसन तक आ पहुंचे.

बता दें कि असम के पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत ने सरकार से पश्चिम बंगाल के निवासियों के लिये भी इसी तरह की सूची तैयार करने का अनुरोध किया था. उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल भी बांग्लादेश से ‘अवैध प्रवासियों से प्रभावित’ है.

BJP Leaders demand in assembly assam like NRC in Delhi
BJP Leaders demand in assembly assam like NRC in Delhi

उन्होंने यह भी कहा कि असम में एनआरसी को अद्यतन करने की चल रही प्रक्रिया पुख्ता होनी चाहिये और किसी भी भारतीय को छोड़ा नहीं जाना चाहिये. असम निवासियों की अंतिम सूची में किसी भी अवैध प्रवासी का नाम नहीं शामिल किया जाना चाहिये.

महंत ने भी 1985 के असम समझौते पर हस्ताक्षर किया था. इस समझौते में राज्य से अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें उनके देश भेजने का प्रावधान था. उन्होंने कहा कि यहां तक कि पश्चिम बंगाल के स्थानीय निवासी भी राज्य में एनआरसी के पक्ष में हैं.

Source: hindi.siasat.com

BJP के दो पूर्व मंत्रियों ने माना- राफेल विमान सौदा आजाद भारत का सबसे बड़ा ‘रक्षा घोटाला’ है

Yashwant and Arun Shourie press conference on Rafale Deal

राफेल विमान को लेकर अब मोदी सरकार पर सबसे बड़ा वार कर दिया गया है। पहले इस घोटाले को लेकर आरोप केवल सड़क पर थे जिसे विपक्ष ने संसद में पहुँचाया। और अब भाजपा के अपने ही नेताओं ने इन आरोपों को अख़बारों की सुर्खियाँ बनने पर मजबूर कर दिया है।

राफेल विमान सौदा आजाद भारत का सबसे बड़ा रक्षा सौदा घोटाला और इससे देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया है। ये आरोप भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने लगाए।

इन आरोपों को उन्होंने किसी अखबार में लेख लिखकर नहीं बल्कि खुलेआम सबूत और दलीलें पेश करते हुए पूरी मीडिया के सामने लगाया है। इसके लिए इन तीनों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेस की थी।

दिल्ली के प्रेस क्लब में हुई एक प्रेस कांफ्रेंस में अरुण शौरी ने कहा कि राफेल विमान डील आजाद भारत का सबसे बड़ा डिफेंस घोटाला है और इसमें एक नहीं कई गड़बड़ियां की गई हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री ने लोकसभा में कहा था कि अनिल अंबानी की कंपनी को राफेल विमान बनाने का ऑर्डर क्यों और कैसे मिला, इसकी जानकारी नहीं दे सकतीं, क्योंकि वे फ्रांस सरकार के साथ हुए गोपनीयता के समझौते से बंधी हुई हैं।

अरुण शौरी ने कहा कि रक्षा मंत्री ने लोकसभा में सबसे बड़ा झूठ बोला। उन्होंने बताया कि भारत और फ्रांस के बीच हुए गोपनीयता समझौते में साफ लिखा है कि सिर्फ विमान की तकनीक से जुड़ी जानकारियों के लिए ही यह समझौता प्रभावी होगा। उन्होंने सवाल पूछा कि रक्षा मंत्री बताएं कि अनिल अंबानी की कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट क्यों दिया गया, क्योंकि यह समझौता इसका जवाब देने से नहीं रोकता है।

कीमत का खुलासा न करने का तर्क भी बेकार है। सरकार के रक्षा राज्यमंत्री 18 नवम्बर 2016 को खुद लोकसभा में कीमत बता चुके हैं- 670 करोड़ प्रति विमान, जिसमें हथियार से लेकर टेक्नालॉजी ट्रांसफर तक सब कुछ शामिल है।

शौरी ने कहा कि सरकार की गाइडलाइन कहती है कि हर ऑफ़सेट कॉन्ट्रेक्ट चाहे वह जिस भी क़ीमत का हो, रक्षा मंत्री की मंज़ूरी से होगा। सरकार झूठ बोल रही है कि रिलायंस को कॉन्ट्रेक्ट डेसाल्ट ने दिया।

प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मोदी सरकार ने राफेल डील में देश की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ किया है।

प्रशांत भूषण ने कहा कि इस सौदे से देश को 35000 करोड़ दी चपत लगी है। सौदे में विमान की तादाद घटाए जाने से देश की सुरक्षा को ख़तरा बढ़ा है। प्रशांत भूषण ने कहा कि देश को सुरक्षा के लिए सात स्क्वाड्रन की ज़रूरत है, तभी 126 विमानों की बात हुई थी। लेकिन मोदी सरकार ने इस हकीकत को जानते हुए भी यह संख्या 36 कर दी, वह भी बिना किसी की जानकारी के। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ है।

तादाद 126 से 36 किए जाने की जानकारी न तो रक्षा मंत्री को थी न वायुसेना में किसी को। सरकार गोपनीयता नियम का बहाना करके छिपाना चाह रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी की मंजूरी के बिना प्रधानमंत्री को कोई अधिकार नहीं था कि वे यह समझौता करते, इस नाते यह आपराधिक आचरण का मामला बनता है। यह जानते हुए ही सरकार ने उस कानून को संशोधित कर दिया।

प्रशांत भूषण ने कहा कि इस सौदे में पहले सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को राफेल विमान बनाने की तकनीक मिलनी थी, लेकिन फ्रांस के साथ राफेल विमान सौदे से महज पांच महीने पहले अचानक अस्तित्व में आई अनिल अंबानी की कंपनी को फ्रांस के साथ राफेल विमान बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिल गया।

उन्होंने कहा कि अनिल अंबानी की कंपनी को साधारण विमान बनाने का भी कोई अनुभव नहीं है। प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि कंपनी बनाई ही इसलिए गई ताकि ये कॉन्ट्रैक्ट हासिल हो सके। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी बात ये है कि जिस उद्योगपति को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी गई, उसका पिछला इतिहास यही कहता है कि उसके ज्यादातर बड़े प्रोजेक्ट्स नाकाम साबित हुए और उसकी कंपनी बड़े कर्ज में डूबी हुई है।

प्रेस कांफ्रेंस में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि विदेश सचिव ने समझौते से दो दिन पहले कहा था कि पुरानी डील को ही आगे बढ़ाएंगे, पर वहां जाकर नई डील कर ली गई। उन्होंने कहा कि इस लोकसभा में संयुक्त संसदीय समिति को मौका नहीं मिलेगा, क्योंकि समय कम है। इसलिए इस मामले की सीएजी से जांच कराई जानी चाहिए और तीन महीने के अंदर समयबद्ध जांच हो।

उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी के बाद जो दो हजार के नोट छपवाये गये थे, अब वे बाजार में जल्दी नहीं दिखते। दो हजार के अधिकांश नोटों को कालेधन के रुप में जमा कर रखा गया है और जरुरत पड़ने पर उन्हे खर्च किया जाएगा।

Source: boltaup.com

राज्यसभा उपसभापति चुनाव: PDP ने मतदान नहीं करने का फैसला लिया!

Rajya Sabha Deputy Chairman Election PDP decided not to vote

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने तय किया है कि वह राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए होने वाले मतदान मे हिस्सा नहीं लेगी। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रफी अहमद मीर ने कहा, ‘‘पीडीपी ने मतदान से अलग रहने का फैसला लिया है… यह फैसला भाजपा के साथ गठबंधन टूटने के आलोक में लिया गया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘साथ ही संप्रग ने समर्थन के लिए पीडीपी से संपर्क नहीं किया है। इसलिए, विचार-विमर्श के बाद यह उचित लगा कि मतदान से अलग रहना पार्टी के हित में है।’’ गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से राज्यसभा की तीन सीटें हैं। इनमें से दो सीटें पीडीपी के पास हैं, जबकि एक भाजपा के पास है।

उपसभापति पद के लिए कल होने वाले चुनाव में राजग के उम्मीदवार हरिवंश और विपक्ष के उम्मीदवार बी. के. हरिप्रसाद के बीच दिलचस्प मुकाबला होने की उम्मीद है क्योंकि दोनों ही पक्ष बहुमत होने का दावा कर रहे हैं। हालांकि बहुमत का झुकाव सत्तारूढ़ राजग के पक्ष में दिख रहा है।

 

Source: hindi.siasat.com

मंजू वर्मा के इस्तीफे पर बोले तेजस्वी- फ़ुल टॉस बॉल पर ही नीतीश जी का एक विकेट गिर गया, अभी तो बाउन्सर, गुगली बाकी है

Tejashwi Yadav react on Manju Verma resign

मुज्ज़फरपुर रेप कांड में समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा है। ऐसा खुद मंजू वर्मा का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष और मीडिया ने उनपर जो सवाल उठाये है इसके चलते उन्होंने अपना पद छोड़ दिया है। वहीँ मंजू वर्मा के इस्तीफे के बाद राजद नेता तेजस्वी यादव ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है।

क्रिकेटर से नेता बने तेजस्वी यादव ने क्रिकेट की भाषा में ही अपना जवाब दिया है। उन्होंने मंजू वर्मा के इस्तीफे को अपना पहले विकेट बताते हुए चेतावनी दी की अभी तो बाउन्सर, गुगली, दूसरा और यॉर्कर फेका जाना बाकी है।

तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर लिखा, फ़ुल टॉस बॉल पर ही नीतीश जी का एक विकेट गिर गया। अभी बाउन्सर, गुगली, दूसरा और यॉर्कर तो बाक़ी है। देखते रहना, विपक्ष की आक्रामक फ़ील्डिंग और बालिंग के आगे बेचैनी में कहीं हिट विकेट आउट ना हो जाए।

गौरतलब हो कि पटना में मुजफ्फरपुर मामले में जेल में बंद ठाकुर समेत 10 आरोपियों की आज विशेष पॉक्सो कोर्ट में पेशी थी। इसी दौरान ठाकुर ने नीतीश सरकार में समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति के साथ अपने रिश्तों पर बोलते हुए ठाकुर ने बताया कि मेरा उनसे कोई रिश्ता नहीं हाँ कभी कभी बात ज़रूर होती थी।

बता दें कि मंजू वर्मा के इस्तीफे मांग विपक्ष कर रहा था। अब जब मंजू वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है तो इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता की बालिका गृह मामले में बच्चियों के साथ दुष्कर्मों में उनकी भूमिका थी या नहीं इसकी जांच सीबीआई को करनी है।

 

Source: boltaup.com

महिलाओ में फैला आतंक, योगी के एनकाउंटर वाली सरकार पर अखिलेश ने झाड़ा

Akhilesh Yadav speech on encounters in Uttar Pradesh policy by Yogi Adityanath

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपराध के मुद्दे पर बीजेपी सरकार को घेरा है। योगी सरकार भले ही एनकाउंटर के जरिए यूपी को अपराध मुक्त बनाने के दावे कर रही हो, लेकिन अखिलेश यादव सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराधियों की जगह आज नारी आतंकित हो रही है।

Akhilesh Yadav speech on encounters in Uttar Pradesh policy by Yogi Adityanath
Akhilesh Yadav speech on encounters in Uttar Pradesh policy by Yogi Adityanath

ये है अखिलेश का ट्वीट

अखिलेश यादव ने इस संबंध में ट्वीट कर योगी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने ट्वीट में हाल की कुछ आपराधिक घटनाओं का उदाहरण दिया।

उन्होंने लिखा, ‘प्रदेश में कहीं कोचिंग की छात्रा की सरेआम गोली मारकर हत्या हो रही है, तो कहीं भाजपा विधायक पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली महिला सरकार से निराश होकर मुख्यमंत्री आवास पर आत्मदाह कर रही है। क्या यही है ‘एनकाउंटर वाली’ सरकार का खौफ कि अपराधियों की जगह आज नारी आतंकित हो रही है।’

Akhilesh Yadav speech on encounters in Uttar Pradesh policy by Yogi Adityanath
Akhilesh Yadav speech on encounters in Uttar Pradesh policy by Yogi Adityanath

बीजेपी विधायक पर आरोप

रविवार को राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के सामने एक महिला ने आत्मदाह की कोशिश की थी। महिला ने उन्नाव के बांगरमऊ से बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर गैंगरेप का आरोप लगाया है। आरोप है कि विधायक पक्ष की तरफ से पीड़ित महिला के परिवार पर हमला किया गया, जिसमें घायल पीड़िता के पिता अस्पताल में मौत हो गई है।

इसी मुद्दे को आधार बनाते हुए अखिलेश यादव ने यूपी में कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर योगी सरकार को घेरा है।

गौरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा पर मोदी की चुप्पी, थरूर ने उठाए सवाल

Modi's silence on the violence of gau rakshak Tharoor

देश में गौरक्षा के नाम पर जारी हिंसा को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पीएम मोदी पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद के नाम पर ‘हिंदू राष्ट्र परियोजना’ को आगे बढ़ाया जाना मूलभूत रूप से भारत के अतीत और उसके संवैधानिक मूल्यों के साथ विश्वासघात होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को अग्निपरीक्षा से गुजारा जा रहा है और जो ‘भारत माता की जय’ कहने पर सहमत नहीं होते हैं (ऐसा सरकार की शह पर कराया जाता है) उन्हें परेशान किया जा रहा है।

थरूर ने कहा, ‘‘वे सहिष्णुता के मुख्य हिंदू मूल्य को धता बता रहे हैं जिसने हमें इस देश में साढ़े छह दशक तक सांप्रदायिक सद्भाव दिया। उन्होंने ऐसा राष्ट्रवाद के नाम पर किया है जो अपने आप में देशभक्ति से परे है।’’

Modi's silence on the violence of gau rakshak Tharoor
Modi’s silence on the violence of gau rakshak Tharoor

कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘हिंदू राष्ट्र परियोजना मूलभूत रूप से भारत के अतीत के साथ विश्वासघात होगी, यह हमारे देश के संवैधानिक मूल्यों के साथ मूलभूत रूप से विश्वासघात होगी।’’ बता दें कि इससे पहले थरूर ने  पीएम द्वारा मुसलमानों की टोपी न पहने पर भी उनकी निंदा की थी।

उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपनी यात्राओं के दौरान ‘अजीब सी’ नगा और दूसरी टोपियां पहनते हैं, लेकिन मुसलमानों की टोपी पहनने से मना कर देते हैं। थरूर ने कहा, ‘मैं आपसे पूछता हूं कि हमारे प्रधानमंत्री देश-विदेश में जहां कहीं भी जाते हैं, हर तरह की अजीबो गरीब टोपियां क्यों पहनते हैं? वह मुसलमानों की टोपी पहनने क्यों हमेशा मना कर देते हैं?’

बोफोर्स से बड़ा राफेल घोटाला, सरकारी खजाने को ज्यादा बड़ा नुकसान- अरुण शौरी

Big Rafael scam from Bofors big loss to government treasury Arun Shourie

नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का मामला विवादों में घिरता जा रहा है. जहां एक तरफ बीते कुछ महीनों के दौरान कांग्रेस पार्टी ने राफेल सौदे में अनियमितता का दावा करते हुए कई बार प्रेस कांफ्रेंस की है वहीं अब अन्य राजनीतिक दलों के नेता और समाजसेवी भी डील पर उंगली उठा रहे हैं.

इसी क्रम में बुधवार को मशहूर वकील प्रशांत भूषण, असंतुष्ट बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने दावा किया कि मोदी सरकार की राफेल डील ने सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान पहुंचाने का काम किया है और इस डील से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का काम किया गया है.

तीनों नेताओं ने दावा किया कि राफेल डील में पारदर्शिता की कमी के साथ-साथ निर्धारित मानदंडों को नजरअंदाज करने का काम किया गया है. इसके साथ ही इन नेताओं ने आरोप लगाया कि इस डील के जरिए अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को फायदा पहुंचाने का काम किया गया है.

तीनों नेताओं ने आरोप लगाया कि 2015 में मोदी सरकार ने फ्रांस दौरे के वक्त जब डील का ऐलान किया तब उन्होंने न सिर्फ प्रोटोकॉल को नजरअंदाज किया बल्कि पूर्व की कांग्रेस सरकार (यूपीए) के कार्यकाल में की गई सस्ती राफेल डील को भी किनारे कर दिया.

इन नेताओं ने दावा किया कि यूपीए सरकार ने दसॉल्ट के साथ बिडिंग प्रक्रिया के बाद 18 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट खरीदने का समझौता किया. इस समझौते के तहत जहां कंपनी को रेडी टू फ्लाई एयरक्राफ्ट देने के साथ ही केन्द्र सरकार की कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को टेक्नोलॉजी समेत 108 अन्य एयरक्राफ्ट बनाने में मदद देगी. इन तीनों नेताओं ने दावा किया कि यूपीए सरकार की इस डील से सरकारी खजाने पर महज 40 हजार करोड़ रुपए का बोझ पड़ा.

वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब फ्रांस के साथ यह डील की तो उसने पुरानी डील का संज्ञान नहीं लिया और 36 एयरक्राफ्ट को खरीदने के लिए 60 हजार करोड़ रुपये में समझौता किया. खास बात है कि 2015 में की गई इस डील में यूपीए की डील के तहत एचएएल द्वारा 108 एयरक्राफ्ट निर्मित कराने पर कोई समझौता नहीं शामिल किया गया. वहीं चौंकाने वाली बात यह भी है कि 2015 में किए गए करार में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के संबंध में भी कोई समझौता नहीं किया गया जिसके चलते सरकारी खजाने को एक तरह से नुकसान पहुंचाने का काम किया गया.

शौरी, भूषण और सिन्हा ने यह भी दावा किया कि संभव है कि केन्द्र सरकार जानबूझकर इस डील पर से पर्दा नहीं उठाना चाहती है. तीनों नेताओं ने बताया कि इस डील से महज एक हफ्ते पहले तत्कालीन केन्द्रीय रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने फ्रांस सरकार से 126 फाइटर जेट खरीदने का बयान जारी किया था.

लेकिन हफ्ते भर बाद जब खुद पीएम मोदी ने 36 विमान खरीदने का ऐलान फ्रांस दौरे पर किया तो एक बात पूरी तरह साफ हो गई कि इस डील के ऐलान से पहले देश के रक्षा मंत्री को डील के संबंध में कुछ नहीं पता था. इस सच्चाई से भी यह डील संदेह के घेरे में आती है.

राफेल डील पर केन्द्र सरकार के बयानों में खामी दर्शाने के लिए तीनों नेताओं ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा राफेल डील का ऐलान करने से महज 2 दिन पहले तत्कालीन विदेश सचिव एस जयशंकर दो अहम बात की. पहली, कि फ्रांस सरकार के साथ राफेल पर बातचीत में एचएएल की भी भूमिका है वहीं प्रधानमंत्री मोदी का फ्रांस दौरा महज दो देशों के नेतृत्व स्तर पर मुलाकात के लिए है. जयशंकर के मुताबिक प्रधानमंत्री के दौरे में राफेस समझौते का एजेंडा नहीं शामिल है.लिहाजा, आखिर कैसे संभव हुआ कि विदेश सचिव के बयान के दो दिनों के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फ्रांस के साथ नई राफेल डील का ऐलान कर दिया. इन तीनों नेताओं ने संकेत दिया राफेल डील में रक्षा मंत्री की तरह विदेश सचिव को भी भूमिका नहीं अदा करने दी गई.अंत में तीनों नेताओं ने दावा किया राफेल डील पर जारी सस्पेंस से साफ है कि यह डील भी बोफोर्स डील की तर्ज पर संदिग्ध है. इन नेताओं ने दावा किया कि जिस तरह से बोफोर्स डील में कांग्रेस सरकार ने सच्चाई छिपाने की कोशिश की उसी तरह राफेल डील में मोदी सरकार सच्चाई पर पर्दा डालने का काम कर रही है.

हालांकि तीनों नेताओं ने दावा किया कि राफेल डील में भ्रष्टाचार का स्तर 1980 के दशक में हुए बोफोर्स घोटाले के भ्रष्टाचार से काफी बड़ा है और राफेल डील ने बोफोर्स डील से बड़ा नुकसान सरकारी खजाने को पहुंचाने का काम किया है.

 

Source: hindi.siasat.com

मुस्लिमो की आवाज़ बनी मायावती, मोदी सरकार से लगायी ये गुहार

Mayawati asked for reservation to Muslims

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा चीफ मायावती ने मुस्लिमों के लिए आरक्षण की मांग की है। लोकसभा में सोमवार को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन विधेयक, 2018 के पारित होने के बाद उन्होने ये मांग की है।

Mayawati asked for reservation to Muslims
Mayawati asked for reservation to Muslims

बीएसपी चीफ ने कहा, ‘अगर केंद्र सरकार संविधान में संशोधन कर ऊंची जाति के गरीबों को आरक्षण देने का कोई कदम उठाती है तो बसपा इसका पहले स्वागत करेगी। चूंकि मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों में काफी गरीबी है। ऐसे में अगर केंद्र सरकार ऊंची जाति के गरीबों के लिए कोई कदम उठाती है तो मुसलमानों और दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।’

मायावती ने कहा विभिन्न राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए ही केंद्र सकार ने मजबूरी में एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून को पहले की तरह मूल रूप में बहाल करने संबंधित संशोधन विधेयक लाया। जो लोकसभा में पास हो गया है। बसपा को उम्मीद है कि ये राज्यसभा में भी जरूर पास हो जाएगा।

Mayawati asked for reservation to Muslims
Mayawati asked for reservation to Muslims

उन्होंने कहा​ कि इस विधेयक को काफी देर से लाया गया, जिसके कारण इन वर्गों को काफी नुकसान हुआ है। फिर भी बसपा इस विधेयक का स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि इसका श्रेय उनकी पार्टी एससी-एसटी वर्गों के तमाम लोगों को देती है, जिसमें बसपा समर्थक भी शामिल हैं।

बता दें कि लोकसभा में सोमवार को अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन विधेयक, 2018 पारित हो गया था। इस संशोधन के जरिए सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश निष्प्रभावी हो जाएगा, जिसके तहत एससी/एसटी अत्याचार निवारण के मामले में आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई थी।

बैंक ऑफ बड़ौदा के चेयरमैन रवि वेंकटेशन बोले, ‘मोदी सरकार की नीतियों ने बर्बाद किए सरकारी बैंक’

Ravi venkatesan attack on PM Modi on bank

गिरीश मालवीय

नई दिल्ली – देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक पीएनबी को इस वित्तवर्ष की पहली तिमाही में 940 करोड़ का घाटा हुआ है और तीसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक , बैंक ऑफ बड़ौदा (बॉब) के चेयरमैन रवि वेंकटेशन ने कहा है कि मोदी सरकार की कड़ी नीतियों की वजह से बैंकिंग सेक्टर खत्म होता जा रहा है.

बॉब के चेयरमैन का कहना है कि सरकार की कड़ी नीतियों की वजह से सरकारी बैंकों के सामने नए निवेशकों को लुभाने और बुरे वित्तीय हालातों से निकलना मुश्किल हो गया है अंग्रेजी वेबसाइट ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में वेंकटेशन ने कहा कि भारत को इस समय कम, बेहतर पूंजीकृत और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की आवश्यकता है लेकिन इसके उलट काम हो रहा है।

वेंकटेशन का कहना है कि आज जानबूझकर बैंकों के निजीकरण पर जोर दिया जा रहा है. इसका कारण यह है कि आज सरकारी बैंक अपनी पूंजी और मार्केट शेयर गवां रहे हैं. बॉब चेयरमैन ने कहा कि बीते वित्त वर्ष में करीब 70 फीसदी जमा प्राइवेट बैंकों के पास हुआ है. उन्होंने अनुमान जताया कि 2020 तक खराब लोन बढ़कर 80 फीसदी तक पहुंच जाएगा. खराब लोन के बढ़ने से सरकारी बैंकों को पूंजी बढ़ाने और नए लोन देने में परेशानी होती है.

वेंकटेशन ने कहा कि खराब बैलेंस शीट और 51 फीसदी शेयर सार्वजनिक क्षेत्र के लिए रखने के नियम से सरकारी बैंकों की नई पूंजी के लिए सरकार पर निर्भरता बढ़ रही हैं। रवि वेंकटेशन ने कहा कि मोदी सरकार की बैंकिंग सेक्टर की कायापलट करने की योजना को पूरा करने असंभव है. इसका कारण यह कि देश के कुल खराब लोन में 90 फीसदी हिस्सेदारी सरकारी बैंकों की है।

(पूरा इंटरव्यू पत्रिका में छपा है जिसे आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं)

DMK ने करुणानिधि की मौत के बाद उनके लिए मरीना बीच की जंग जीती

After the death of karunanidhi dmk won the war of marina beach for them

प्रसिद्ध मरीना बीच DMK अध्यक्ष एम करुणानिधि की जीवनयात्रा का अंतिम स्थान होगा. मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को उन्हें बीच पर दफनाने का रास्ता साफ कर दिया.

मरीना बीच पर करुणानिधि को दफनाने के लिए स्थान देने की DMK की याचिका पर विशेष सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने राज्य सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि इसमें कानूनी अड़चनें हैं.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एच जी रमेश और न्यायमूर्ति एस एस सुंदर की पीठ ने कहा, ‘स्थान आवंटित ना करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है. याचिकाकर्ता द्वारा दी गई रूपरेखा के अनुसार सम्मानजनक रूप से दफनाने के लिए फौरन एक स्थान मुहैया कराएं.’

कोर्ट ने कहा कि सरकार यह बताने में विफल रही कि मरीना बीच पर नेता को दफनाने की अनुमति देने के रास्ते में कौन सी कानूनी अड़चनें हैं. इससे पहले पारिस्थितिकी और अन्य चिंताओं को लेकर बीच पर दफनाने के खिलाफ पांच याचिकाएं वापस ले ली गई.

पीठ ने कहा, ‘स्थान आवंटित करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं है. पहले ही सभी द्रविड नेताओं के लिए मरीना में स्थान आवंटित किया हुआ है. मौजूदा मामले में अलग रुख अपनाने की कोई जरुरत नहीं है.’

कोर्ट का आदेश आते ही वहां से करीब आठ किलोमीटर दूर राजाजी हॉल में DMK के हजारों समर्थकों ने ‘कलैगनार पुगाझ ओनगुगा’ के नारे लगाए.

मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ ट्रैफिक रामस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में मरीना बीच पर करुणानिधि के अंतिम संस्कार के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. रामस्वामी की इस अपील को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया.

करुणानिधि के ताबूत के पास खड़े उनके बेटे और DMK के कार्यकारी अध्यक्ष एम के स्टालिन फूट फूटकर रो रहे थे लेकिन जब उन्हें फैसले की खबर लगी तो उनके मुरझाए चेहरे पर संतोष के भाव दिखे.

इससे पहले मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी आधुनिक समय के सबसे बड़े DMK नेता को श्रद्धांजलि देने राजाजी हॉल पहुंचे तो उन्हें ‘वेंडम वेंडम, मरीना वेंडम’ के नारे सुनने पड़े.

कोर्ट का आदेश AIADMK के लिए बड़ा झटका है जिसने करुणानिधि को मरीना बीच पर दफनाने का स्थान ना देने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

सरकार ने यह हवाला देते हुए करुणानिधि को वहां दफनाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया कि AIADMK संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री एम जी रामचंद्रन और उनकी शिष्या जे जयललिता को बीच पर इसलिए दफनाया गया क्योंकि पद पर रहते हुए उनका निधन हुआ था लेकिन करुणानिधि को ऐसी मंजूरी नहीं दी जा सकती क्योंकि वह मौजूदा मुख्यमंत्री नहीं थे.

DMK संस्थापक और करुणानिधि के मार्गदर्शक सी एन अन्नादुरई भी 1969 में अपने निधन के समय मुख्यमंत्री थे. हालांकि, कोर्ट ने सरकार की यह दलील खारिज कर दी.

Source: hindi.firstpost.com

देवरिया मामला: CM योगी ने की CBI जांच की सिफारिश, सरकार ने माना- शेल्टर होम में लड़कियों का हुआ यौन शोषण

Deoria Shelter abuse case

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में भी शेल्टर होम ((मां विंध्यवासिनी बालिका संरक्षण गृह) में बिहार के मुजफ्फरपुर जैसा मामला सामने आने के बाद सरकार से लेकर प्रशासनिक अमले तक के होश उड़ गए हैं। मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने देवरिया में नारी संरक्षण गृह में चल रहे सेक्स रैकेट मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की सिफारिश की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार (7 अगस्त) को खुद इसकी जानकारी दी।

Deoria Shelter abuse case
Deoria Shelter abuse case

सीएम योगी ने कहा, ‘देवरिया की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी गंभीरता को देखते हुए दोपहर में बैठक की थी… बालिकाओं के बयान और अन्य स्थितियों को देखते हुए मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए ही इसे सीबीआई को भेजने का निर्णय किया गया है।’ उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने स्तर से एसआईटी क

गठन किया है, जो इस पूरे प्रकरण की जांच करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल कल्याण समिति ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया, इसलिए उसे निलंबित करने का फैसला किया जा रहा है। बता दें कि देवरिया स्थित मां विंध्यवासिनी महिला एवं बालिका संरक्षण गृह की मान्यता स्थगित होने के बाद भी संरक्षण गृह को हाईकोर्ट से स्थगनादेश लेकर चलाया जा रहा था। रविवार (5 अगस्त) की रात इस संस्था से सेक्स रैकेट संचालित होने का खुलासा हुआ, जिसके बाद शासन गंभीर हो गया।

लड़कियों के साथ हुआ शारीरिक शोषण

इस बीच महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने यह बात स्वीकार की है कि शेल्टर होम में लड़कियों का शारीरिक शोषण होता था। उच्च स्तरीय जांच कमिटी की रिपोर्ट के बाद मंत्री ने मीडिया से बातचीत में यह बात स्वीकार की है कि शेल्टर होम में लड़कियों के साथ शारीरिक शोषण की बात से इनकार नहीं किया जा सकता है।

जोशी ने कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि देवरिया में लड़कियों के साथ यौन शोषण हुआ है। रिपोर्ट आने के बाद इसमें जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा जताया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने इस मसले पर विपक्षी दलों खासकर सपा व बसपा पर जमकर हमला बोला। कहा यह सारे कारनामे इन दोनों पार्टियों की सरकारों के समय के हैं।

मामले में एक और गिरफ्तार

नारी संरक्षण गृह की घिनौनी घटना मामले में पुलिस ने संचालिका गिरिजा त्रिपाठी व उसके पति मोहन त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद मंगलवार (7 अगस्त) को बेटी व नारी संरक्षण गृह की अधीक्षक कंचनलता को भी गिरफ्तार कर लिया है। वहीं इस मामले में तत्कालीन जिला प्रोवेशन अधिकारी प्रभात कुमार की तहरीर पर पुलिस ने अधीक्षक कंचनलता, उसकी मां व संचालिका गिरिजा त्रिपाठी और पिता मोहन त्रिपाठी के खिलाफ मानव तस्करी, देह व्यापार व बालश्रम से जुड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।

सोमवार को गिरिजा त्रिपाठी व मोहन त्रिपाठी को पुलिस ने जेल भेज दिया, जबकि फरार अधीक्षक कंचनलता की लोकेशन लखनऊ में मिलने पर दो टीमें लखनऊ पहुंचीं और छापेमारी की, लेकिन वह नहीं मिली। मगर मंगलवार सुबह पुलिस ने अधीक्षक कंचनलता को ढूंढ़ निकाला और गिरफ्तार कर लिया। उसे पुलिस लाइन में रखकर पूछताछ की जा रही है।

 

Source: jantakareporter.com

मध्य प्रदेश: विधानसभा चुनाव से पहले BJP और CM शिवराज के लिए बुरी खबर, स्थानीय चुनावों में कांग्रेस की बड़ी जीत

Congress sweeps MP civic body polls

मध्य प्रदेश में इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए बुरी खबर है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नगरपालिका और नगर पंचायत के उपचुनाव चुनावों में सत्ताधारी पार्टी की हार हुई है, जबकि विपक्षी पार्टी कांग्रेस का जलवा देखने को मिला है। मध्यप्रदेश के 14 नगरीय निकायों में एक-एक वार्ड में पार्षद पद के लिए उपचुनाव में तीन जुलाई को हुए मतदान के परिणाम मंगलवार (7 अगस्त) को घोषित कर दिए गए।

इनमें 9 स्थानों पर कांग्रेस तथा चार स्थानों पर बीजेपी तथा एक स्थान पर निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली है। मालूम हो कि इस साल ही अंत में प्रदेश में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। आधिकारिक तौर पर बताया गया कि प्रदेश में 14 नगरीय निकायों में उपचुनाव के तहत एक-एक वार्ड के पार्षद पद के लिए तीन जुलाई को हुए मतदान के परिणाम मंगलवार को घोषित किए गए।

मीडिया रिपोर्ट्स में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि राज्य में 14 नगरपालिकाओं में पार्षद पद के लिए हुए उपचुनाव में बीजेपी की करारी हार हुई है। जबकि कांग्रेस के सबसे ज्यादा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। राज्य के 14 स्थानों पर हुए पार्षदों के उपचुनाव में कुल 14 सीटों में से 9 पर कांग्रेस, 4 पर बीजेपी और 1 पर निर्दलीय ने चुनाव जीते हैं।

समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय से दी गई जानकारी के अनुसार, मंगलवार को हुई मतगणना में बुरहानपुर के नेपानगर, नीमच के सरवानिया महाराज, छिंदवाड़ा के न्यूटन खिलची, ग्वालियर के डबरा, छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव, सिंगरौली के सिंगरौली, सतना के सतना, गुना के राघौगढ़ की नगरीय निकाय के एक-एक वार्ड में कांग्रेस के उम्मीदवार विजयी रहे।

वहीं, दमोह नगर पालिका के एक वार्ड, मंदसौर के शामगढ़ के एक वार्ड, दतिया के एक वार्ड और अनूपपुर के बिजुरी के एक वार्ड से भाजपा उम्मीदवार जीते। इसके अलावा भिंड के गोरमी से निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। मतदान तीन अगस्त को हुआ था।

इसके साथ ही दो नगरीय निकायों में अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने के लिए हुए निर्वाचन में खरगौन जिले के नगर परिषद करही पांडल्याखुर्द में बीजेपी की आशा प्रेमचंद्र बासुरे विजयी रहीं। बालाघाट जिले की नगर परिषद लांजी में बहुजन समाज पार्टी की मीरा नानाजी समरीते विजयी रहीं। पहले भी यही अध्यक्ष थीं।

पंचायत निर्वाचन में एक जिला पंचायत सदस्य, 12 जनपद पंचायत सदस्य, 98 सरपंच पद के लिए भी मतगणना हुई। 12 जनपद पंचायत सदस्य में से आठ निर्विरोध और संरपच के लिए 21 प्रत्याशी निर्विरोध विजयी घोषित किए गए। विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्यमंत्री शिवराज के लिए इसे करारा झटका माना जा रहा है।

गौरतलब है कि इस साल के आखिरी में देश के तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। जिसमें मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। खास बात यह है कि इन तीनों राज्यों में बीजेपी की ही सरकार है। मध्य प्रदेश में अक्टूबर से दिसंबर के बीच में विधानसभा चुनाव होने की उम्मीद है, जिससे पहले नगर पालिका और नगर पंचायत के उप चुनावों की जीत किसी खुशखबरी से कम नहीं है।

 

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महिलाओं पर जितने अत्याचार 4 साल में हुए उतने 70 साल में नहीं: राहुल गांधी

Rahul Gandhi attack on PM Modi issue of Torture on women

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में महिला अधिकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी, बीजेपी और संघ पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा है कि केवल पुरुष ही इस देश पर राज करें और महिलाओं की जगह सिर्फ पिछली पंक्ति में है.

देश में लगातार हो रही रेप की घटनाओं पर राहुल ने पीएम मोदी पर निशाना साधा और कहा कि वो इन घटनाओं पर चुप्पी साध लेते हैं और कुछ बोलते नहीं. राहुल ने कहा कि 4 साल में महिलाओं पर जितने अत्याचार हुए हैं वो उनते पिछले 70 सालों में भी नहीं हुए.

राहुल गांधी ने महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए कहा कि यह सरकार इस बिल को लेकर खूब बातें करती हैं. यह बिल लंबे समय से लंबित है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने साफ कहा है कि जिस दिन सरकार इस बिल को पास करने के लिए संसद में पेश करेगी पूरी पार्टी इसके साथ खड़ी होगी. लेकिन इस पर पीएम मोदी कुछ नहीं कह रहे हैं.

सम्मेलन में बोलते हुए राहुल ने कहा कि बीजेपी सरकार कहती और पीएम मोदी कहते हैं कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’. हमें समझ नहीं आया कि बेटी किससे बचानी थी. राहुल ने कहा कि बेटियों को बीजेपी विधायकों से बचाने की जरूरत है.

राहुल ने कहा कि जिस दिन यह सरकार महिला आरक्षण बिल लेकर आएगी, हम लोग इसे पास कराने में अपना समर्थन देंगे. लेकिन अगर यह सरकार बिल को लेकर नहीं आती है तो कांग्रेस के सत्ता में आते ही हम इसे पास कराएंगे.

 

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कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में बोले राहुल: मोदी के ‘झूठे अच्छे दिन’ के वादे का देना होगा विकल्प

Rahul gandhi in Congress parliamentary party meet says must have to give the alternative of bogus acche din

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के शासनकाल में भ्रष्टाचार,आर्थिक विफलता, अक्षमता और सामाजिक भेदभाव चरम पर पहुंच गया है और उन्होंने पार्टी सांसदों से लोगों को विकल्प मुहैया कराने को कहा.

गांधी ने संसद भवन में कांग्रेस संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता व्यवस्था के प्रति आक्रोश बढ़ रहा है और पार्टी सांसदों को मोदी के ‘अच्छे दिन’ के झूठे वादों का विकल्प लोगों के समक्ष पेश करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि भारत की जनता मोदी सरकार को हटाने के लिए और उसे ऐसी सरकार से बदलने के लिए कांग्रेस और उसकी गठबंधन पार्टियों की ओर उम्मीद से देख रहीं है जो उनकी बात सुनें, उनकी समस्याओं को समझे और देश में गरीबी, बेरोजगारी और असमानता को समाप्त करने के समाधान तलाशे. उन्होंने कहा, ‘आज हम सब के ऊपर लोकतांत्रिक ताकतें एवं सामाजिक न्याय बनाम निरंकुशता और सामाजिक पदक्रम के बीच ऐतिहासक संघर्ष को जीतने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है.’

हिंसा फैलाने वाली ताकतों के सत्ता में आने से रोकना होगा

राहुल गांधी ने कांग्रेस सांसदों से कहा, ‘हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि घृणा, विभाजनकारी और हिंसा फैलाने वाली ताकतें जो कि संविधान को कुचल रहीं हैं उन्हें दोबारा सत्ता में आने से रोका जाए.’

‘हम आज यहां ऐसे समय में बैठक कर रहे हैं जब नरेंद्र मोदी सरकार के तहत भारत में शासन का संकट है- भ्रष्टाचार है, पूर्ण आर्थिक विफलता है, अक्षमता है और सामाजिक भेदभाव- ये सब अपने चरम पर है.’

उन्होंने कहा, ‘वर्तमान सत्ता व्यवस्था के प्रति आक्रोश की लहर बढ़ रही है जो कि हम सब से भारत की जनता को वो विकल्प मुहैया कराने के लिए कड़ी मेहनत करने की मांग कर रही है जिसके वे हकदार हैं- मोदी जी के अच्छे दिन के झूठे वादे का विकल्प.’

कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी के सदस्यों से देश के किसानों और युवाओं की आंखों में उम्मीद की किरण जगाने,आवश्यक वस्तुओं के बढ़ते मूल्य और घरेलू ऋण की दोहरी मार झेल रहे आम परिवारों को राहत पहुंचाने,महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दलितों की रक्षा करने को कहा.

कांग्रेस प्रमुख ने मोदी के 2014 के उस बयान को याद किया जिसमें उन्होंने कहा था कि स्वतंत्रता के बाद भारत 70 वर्ष तक ‘पैसेंजर ट्रेन’ बना रहा और उनके शासन में वह चमचमाती हुई ‘जादुई ट्रेन’ बन जाएगा.

भारत की जनता कर रही बदलाव की मांग

उन्होंने कहा, ‘मोदी जी ने कहा था मुझे अपने वोट दीजिए और मैं आपको आपके जीनव की सबसे अच्छी और यादगार यात्रा पर ले चलूंगा. दुख की बात है कि मोदी के चार साल के कार्यकाल में भारत एक ऐसी रेलगाड़ी नजर आता है जिसे एक निरंकुश, अक्षम और अहंकारी चालक विध्वंस के रास्ते पर ले जा रहा है और जिसे इस बात की जरा भी परवाह नहीं है कि उन यात्रियों के साथ क्या होगा जिनकी जिम्मेदारी उनके ऊपर है.’

उन्होंने कहा कि भारत की जनता बदलाव की मांग कर रही है और वह मोदी की ऐसी जादुई ट्रेन के झांसे में नहीं आएगी जो दुर्घटना की ओर बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जनता की आवाज बनने वाले संस्थानों का निर्माण किया जिनके दम पर राष्ट्र निर्माण हुआ.

राहुल गांधी ने कहा, ‘जब से आरएसएस और बीजेपी सत्ता में आई हैं हमने अपने प्रत्येक संस्थान पर एक के बाद एक हमले देखे हैं. आधुनिक भारत में ये संस्थांए लोकतंत्र का मंदिर कहलाती थीं और आज आरएसएस उस प्रत्येक संस्थान को ध्वस्त करने पर तुली हुई है. उनके लोग प्रत्येक संस्थान में दखल दे रहे हैं और संस्थानों का मूल स्वरूप बदल रहा है.

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राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए बीके हरिप्रसाद होंगे कांग्रेस के उम्मीदवार

BK Hariprasad likely to be joint opp candidate for deputy chairperson post of rajyasabha

कांग्रेस ने राज्यसभा के उपसभापति के उम्मीदवार के तौर पर बीके हरिप्रसाद का नाम आगे किया है. इस पद के लिए विपक्ष की ओर से कई नामों की चर्चा हो रही है लेकिन कांग्रेस ने बीके हरिप्रसाद का नाम फाइनल किया है. इसके पहले मंगलवार को एनसीपी की वंदना चव्‍हाण के बारे में बताया जा रहा था कि वो विपक्ष की उम्मीदवार हो सकती हैं.

मंगलवार को इस संबंध में विपक्षी दलों की तीन बैठकें हुईं. लेकिन इसके बाद भी कोई फैसला नहीं लिया जा सका. बताया गया कि बुधवार को इस पर फैसला लिया जाएगा और आज सुबह बीके हरिप्रसाद का नाम सामने आया है. बताया जा रहा है कि अब बीके हरिप्रसाद संयुक्‍त विपक्ष के उम्‍मीदवार होंगे.

इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए बीके हरिप्रसाद ने कहा है कि पार्टी ने सोच समझ कर ही ये फैसला लिया होगा. हमलोग सभी विपक्षी दलों से बातचीत करेंगे.

मंगलवार को विपक्ष की मीटिंग के आखिरी दौर में टीडीपी ने अपना उम्मीदवार आगे करने की पेशकश रखी थी. हालांकि इस बारे में अभी तक साफ नहीं हो पाया है. उधर सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस का कहना है कि अगर टीडीपी के उम्मीदवार पर सहमति नहीं बनती है तो कांग्रेस की ओर से बीके हरिप्रसाद विपक्ष के उम्मीदवार होंगे.

राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए NDA ने जेडीयू सांसद हरिवंश को चुना है. पहले ऐसी खबरें थीं कि NDA के दो सहयोगी, अकाली दल और शिवसेना हरिवंश के नाम को लेकर खुश नहीं थे और वो राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन के चुनाव से बाहर भी रह सकते हैं. लेकिन एनडीए उम्मीदवार हरिवंश के लिए समर्थन जुटाने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू नेता नीतीश कुमार ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव से फोन पर बातचीत की और उनसे समर्थन करने का अनुरोध किया.

Source: hindi.firstpost.com

AAP विधायक को आतंकवादी बताने पर भड़के केजरीवाल, कहा- जो पाकिस्तान चाहता है वही कर रही है BJP

Arvind Kejriwal slams bjp and PM Modi over AAP MLA called terrorist

दिल्ली विधानसभा में बीजेपी विधायक द्वारा आम आदमी पार्टी के विधायक को आतंकवादी शब्द प्रयोग करने पर सीएम केजरीवाल ने पीएम मोदी और बीजेपी को खूब खरी खरी सुनाई है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भाजपा विधायक को देखिए- शर्मनाक, भाजपा भारत को हिंदू-मुसलमान में बाँटना चाहती है यही पाकिस्तान चाहता है।

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा पाक के मंसूबे पूरे कर रही है। मोदी जी नवाज़ शरीफ़ से मिलने पाक क्यों गए, ISI को पठानकोट में जाँच के लिए क्यों बुलाया? भाजपा और पाकियों के क्या गुपचुप रिश्ते हैं?

दरअसल दिल्ली विधानसभा में बिजली पानी के मुद्दे पर बहस चल रही थी। जिसमें बीजेपी विधायक ओपी सिंह अपनी बात रख रहे थे तभी आप विधायक ने उन्हें टोक दिया। जिसका जवाब देते हुए बीजेपी विधायक ने कहा ठीक से बात करो आतंकवादियों की तरह बात मत कर, वो यही नहीं रुके बीजेपी विधायक ने सड़क की भाषा का प्रयोग करते हुए कहा कि तेरे जैसे बहुत सड़कछाप गुंडे देखें है ज्यादा फन्ने खां मत बन समझा।

बता दें कि ओपी शर्मा कई सदन में हंगामा करने के लिए सुर्खियो में बने रहते है। मगर इस बार उनके बयान ने दिल्ली की सियासत तेज कर दी है।

इस मामले पर कल सदन में मौजूद उपमुख्यमंत्री ने नाराजगी ज़ाहिर करते हुए कहा कि दुर्भाग्यवश इस देश में और यहां विपक्ष में ऐसे लोग बैठे हैं। जो बात को यहां तक लाना चाहते है कि मुसलमान का मतलब आतंकवादी ही होता है। इस सदन में ये बर्दाश्त नहीं होगा और बीजेपी विधायक को इस पर पूरे देश से माफ़ी मांगनी चाहिए।

 

Source: boltaup.com

देवरिया बालिका गृह: योगी सरकार ने मानी ज़िला प्रशासन की लापरवाही, लोकसभा-राज्यसभा में हंगामा

Uttar Pradesh deoria shelter home sexual abuse case 24 girls rescued

लखनऊ/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने देवरिया में बच्चियों से कथित तौर पर जबरन वेश्यावृत्ति कराए जाने के खुलासे के बाद सवालों से घिरे बालिका संरक्षण गृह और स्थानीय प्रशासन के बीच सांठगांठ की ओर इशारा करते हुए मंगलवार को कहा कि इस गृह को बंद करने के आदेश के बारे में शासन-प्रशासन को मालूम था लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

प्रदेश की महिला एवं परिवार कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने संवाददाताओं को बताया कि देवरिया में हुई घटना की जांच के लिए गई उनके विभाग की प्रमुख सचिव रेणुका कुमार और अपर पुलिस महानिदेशक (महिला हेल्पलाइन) अंजू गुप्ता की टीम ने पड़ताल की कि जब महकमे ने जून 2017 में इसे बंद करने का नोटिस देकर ज़िलाधिकारी को जानकारी दी थी तो उसके बावजूद वहां किन हालात में बच्चों को भेजा गया.

मंत्री ने कहा कि देवरिया के ज़िलाधिकारी को संरक्षण गृह बंद करने और उनमें रह रहे बच्चों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए कम से कम 15 नोटिस दिए गए. निदेशालय से पांच पत्र भेजे गए. निश्चित रूप से स्थानीय स्तर पर लापरवाही हुई है.

मालूम हो कि बीते पांच अगस्त को उत्तर प्रदेश के देवरिया शहर के एक बालिका संरक्षण गृह में कथित तौर पर जिस्मफ़रोशी का धंधा संचालित होने की ख़बर सामने आई.

मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने यहां से 24 लड़कियों को मुक्त कराने के बाद उसे सील कर दिया. बालिका गृह में 42 लड़कियों का पंजीयन कराया गया है इनमें से 18 लड़कियों के गायब होने की भी सूचना है. उनकी तलाश की जा रही है.

पुलिस ने इस संबंध में तीन लोगों बालिका गृह की अधीक्षिका कंचनलता, संचालिका गिरिजा त्रिपाठी तथा उसके पति मोहन त्रिपाठी को गिरफ़्तार किया है.

इस मामले का पता तब चला जब पांच अगस्त को एक लड़की देवरिया के महिला थाना क्षेत्र पहुंची और मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान द्वारा शहर कोतवाली क्षेत्र में संचालित बाल एवं महिला संरक्षण गृह में रह रहीं लड़कियों को रात में कार से अक्सर बाहर ले जाए जाने और सुबह लौटने की बात बताई है. 10 वर्षीय यह लड़की बिहार के बेतिया की रहने वाली बताई जा रही है.

मालूम हो कि इस बालिका गृह का रजिस्ट्रेशन विभिन्न अनियमितताओं के आरोप में जून 2017 में रद्द कर दिया गया था और प्रशासन ने वहां रह रही लड़कियों को कहीं और स्थानांतरित करने को कहा था. बार-बार कहे जाने के बावजूद ऐसा नहीं किया जा रहा था.

पुलिस अधीक्षक रोहन पी. कनय ने बताया था कि इस संबंध में 31 जुलाई को मुक़दमा भी दर्ज कराया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मामले की शिकायत करने महिला थाने पहुंची 10 वर्षीय बालिका ने बताया था, ‘बड़ी मैम ले जाती थीं कभी सफेद, लाल, काली गाड़ी आती थी… शाम चार बजे जाती थी… सुबह आती थी… दीदी सुबह कुछ नहीं कहती थी… उसकी आंख सूज आती थी.’

महिला एवं परिवार कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा, ‘शासन और प्रशासन को साफ मालूम था कि इसे बंद कर दिया गया है. इस बात की जांच की गई है कि ज़िलाधिकारी को भेजे गए पत्रों पर कार्रवाई हुई या नहीं. ज़िला प्रोबेशन अधिकारी, ज़िला बाल संरक्षण अधिकारी के रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है कि उन्होंने इस मामले में कितनी गंभीरता दिखायी. बहरहाल, यह लापरवाही थी या सांठगांठ, इस बारे में जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता लगेगा. यह रिपोर्ट मंगलवार शाम तक मुख्यमंत्री के पास पहुंचेगी.’

रीता ने बताया कि जांच टीम ने विस्तृत तफ्तीश की. उसने संरक्षण गृह में रहने वाले बच्चों के अलग-अलग बयान लिए. साथ ही सारे रिकॉर्ड की जांच की. रिकॉर्ड में और जो कुछ संस्था के लोग कह रहे हैं, उनमें कोई तालमेल नहीं मिल रहा है. जब इस संरक्षण गृह को बंद करने के आदेश दिए गए थे तब उसमें 28 बच्चे थे, मगर अब 23 हैं. इनमें 20 लड़कियां और तीन लड़के हैं.

संस्था संचालक का कहना है कि उनके यहां 42 बच्चे थे. बाकी बच्चों का पता लगाया जा रहा है. अगले 24 से 48 घंटे में पता लग जाएगा.

मंत्री ने कहा कि सरकार ने इस मामले का खुलासा होने के बाद तत्परता से बिल्कुल निष्पक्ष कार्रवाई की है. मैं आश्वस्त कराना चाहती हूं कि परोक्ष प्रत्यक्ष रूप से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.

रीता ने प्रदेश की पूर्ववर्ती बसपा, सपा सरकारों पर देवरिया में लड़कियों से जबरन वेश्यावृत्ति कराए जाने के आरोप में घिरे बालिका संरक्षण गृह की संचालक संस्था को पोषित करने का आरोप लगाया है.

उन्होंने कहा कि संस्था ‘मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान’ को वर्ष 2010 में सरकारी काम मिला था. उस वक्त प्रदेश में बसपा की सरकार थी. वर्ष 2010 से 2014 के बीच इस संस्था को बालिका बाल गृह, शिशु गृह, स्वधार गृह, अडॉप्शन होम वगैरह काम दे दिए गए. उस वक्त बसपा और सपा की सरकारें थीं.

मंत्री ने कहा कि चाइल्ड वर्किंग कमेटी को बाल गृहों की समीक्षा और मुआयने की ज़िम्मेदारी दी जाती है. ये सारी कमेटियां पिछली सपा सरकार के शासनकाल में गठित कर दी गई थीं. सपा, बसपा के कार्यकाल में इतने गलत लोगों को इन समितियों में रखा गया था. हम 70 लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि आज सपा के लोग वहां पर धरना प्रदर्शन करने गए हैं. जिन लोगों ने ख़ुद गलत काम किए वे लोग आज कह रहे हैं कि हम संवेदनहीन हैं. अगर हम संवेदनहीन होते तो क्या उस संरक्षण गृह की संचालक संस्था को नोटिस जारी करते? क्या हम उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा लिखवाते?

उधर, प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य सुनील सिंह ने इस घटना को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में ‘राक्षसराज’ है. यह घटना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि गोरखपुर से सटे देवरिया ज़िले में हुई है. प्रदेश के नारी संरक्षण गृहों को ‘बाबा संरक्षण गृह’ कहना चाहिए.

कांग्रेस नेता अशोक सिंह ने भी घटना की सीबीआई जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि नारी के सम्मान की बात करके सत्ता में आयी भाजपा के शासन में ऐसी घटनाएं बेहद शर्मनाक हैं.

संरक्षण गृह प्रकरण: ज़िलाधिकारी हटाए गए, तत्कालीन डीपीओ निलंबित
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बालिका गृह में लड़कियों से कथित रूप से वेश्यावृत्ति कराए जाने के सनसनीखेज खुलासे के बाद सख़्त कार्रवाई करते हुए बीते सोमवार को ज़िलाधिकारी को हटा दिया और तत्कालीन ज़िला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) को निलंबित कर दिया.

प्रदेश की महिला एवं परिवार कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने इस मामले पर मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद संवाददाताओं को बताया कि देवरिया के ज़िलाधिकारी सुजीत कुमार को हटा दिया गया है. वह एक वर्ष से वहां के ज़िलाधिकारी थे. उन्हें उस बालिका गृह को बंद करने के लिए कई बार पत्र लिखे गए लेकिन उन्होंने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. जांच रिपोर्ट आने के बाद उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी.

उन्होंने बताया कि संरक्षण गृह को बंद करने का आदेश दिए जाने से छह महीने बाद तक देवरिया के डीपीओ रहे अभिषेक पांडेय को निलंबित कर दिया गया है. उनके बाद दो अधिकारियों नीरज कुमार और अनूप सिंह को उनके विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था. इन दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया गया है.

लोकसभा में गृहमंत्री ने कहा, किसी अपराधी को बख़्शा नहीं जाएगा
देवरिया में बाल गृह में बच्चियों से कथित यौन उत्पीड़न की ख़बरों पर विपक्ष के प्रहार के बीच गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को ज़ोर देते हुए कहा कि इस घटना में शामिल किसी अपराधी को बख़्शा नहीं जाएगा और राज्य सरकार इस मामले में तेज़ी से कार्रवाई कर रही है.

लोकसभा में गृह मंत्री ने कहा, ‘इस प्रकार की घटना कहीं भी घटे, वह दुखद, दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है.’

शून्यकाल में समाजवादी पार्टी, राजद और कांग्रेस के सदस्यों ने देवरिया बाल गृह की घटना को उठाया और सरकार से ऐसी जघन्य घटना की निष्पक्ष जांच कराने एवं दोषियों को सख़्त सज़ा देने की मांग की.

इस विषय पर राजनाथ सिंह ने कहा, ‘किसी भी अपराधी को बख़्शा नहीं जाएगा.’

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से 10 साल की बच्ची ने इस मामले में बयान दर्ज कराया. मैं इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को बधाई देता हूं कि तुरंत संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाई और त्वरिक कार्रवाई की. इस मामले में ज़िला प्रशासनिक अधिकारी को निलंबित किया गया.

गृह मंत्री ने कहा कि बाल गृह की संचालिका और उसके पति को गिरफ्तार कर लिया गया है. उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच अतिरिक्त मुख्य सचिव और डीजी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं.

इससे पहले शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने कहा कि बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर की घटना के बाद अब उत्तर प्रदेश के देवरिया में ऐसी घटना सामने आई है. वहां बालिका गृह में 18 बच्चियां गायब हैं और वहां यौन उत्पीड़न की ख़बरें सामने आई हैं. बच्चियों का शोषण और उन पर अत्याचार हुआ है.

उन्होंने कहा कि यह संवेदनशील मुद्दा है, उत्तर प्रदेश सरकार मौन है.

यादव ने कहा कि इस मामले में दोषियों के ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई की जाए. देश के अंदर सभी बाल गृहों की जांच कराई जाए.

देवरिया से भाजपा सांसद कलराज मिश्रा ने कहा कि उक्त बाल गृह का संचालन एक स्वैच्छिक संगठन करता था. साल भर पहले उसका लाइसेंस निरस्त हो गया. इसके बाद लड़कों, लड़कियों को वहां से हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई. इसके बाद वह स्वैच्छिक संगठन अदालत चला गया.

उन्होंने कहा कि इस बीच एक लड़की ने इस प्रकार की घटना का ज़िक्र किया. इसके बाद तत्काल उत्तर प्रदेश सरकार ने कार्रवाई की.

कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस मामले में राजनीति करने की ज़रूरत नहीं है. यह गंभीर मामला है. ऐसे में सदन की एक समिति बनाई जाए और जहां-जहां ऐसी घटनाएं समने आएं, वह इसकी जांच करे.

राजद के जयप्रकाश नारायण यादव ने कहा कि ऐसी घटनाओं से देश-दुनिया में नाम ख़राब हुआ है. ऐसे मामले में साक्ष्य मिटाने के प्रयास भी हो रहे हैं.

इससे पहले मंगलवार सुबह सदन की बैठक शुरू होते ही सपा, राजद और माकपा के सदस्य बैनर दिखाते हुए देवरिया मामले को उठाने लगे. तब लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि इस तरह से करना ठीक नहीं है. प्रश्नकाल चलने दें. शून्यकाल में वह बोलने का अवसर देंगी. इसके बाद हंगामा कर रहे सदस्य बैठ गए.

इस विषय पर समाजवादी पार्टी और राजद सदस्यों ने मंगलवार को संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना प्रदर्शन भी किया.

राज्यसभा में भी हंगामा, 12 बजे तक बैठक थी स्थगित
बालिका गृह में बच्चियों का कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किए जाने के मुद्दे पर मंगलवार को राज्यसभा में विपक्षी आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने हंगामा किया जिसकी वजह से बैठक शुरू होने के करीब 15 मिनट बाद ही दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.

हंगामे की वजह से मंगलवार को उच्च सदन में शून्यकाल नहीं हो पाया.

बैठक शुरू होने पर सभापति एम. वेंकैया नायडू ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए. फिर उन्होंने कहा कि उन्हें सदन का नियत कामकाज रोककर एक मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए नियम 267 के तहत कुछ नोटिस मिले हैं जिन्हें उन्होंने स्वीकार नहीं किया है.

सभापति ने कहा कि वह सदस्यों को लोक महत्व के मुद्दे के तौर पर शून्यकाल में उनके मुद्दे उठाने की अनुमति देंगे.

आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने देवरिया बालिका गृह के मुद्दे पर चर्चा के लिए नोटिस दिया था. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अत्यंत गंभीर है.

सभापति ने कहा कि उन्होंने सिंह को बोलने की अनुमति नहीं दी है लिहाज़ा वह बैठ जाएं. उन्होंने सिंह को आगाह भी किया कि वह बुलेटिन में उनका नाम लेंगे.

इसी बीच, समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने भी देवरिया बालिका गृह का मुद्दा उठाया. सभापति ने सदस्यों से कहा कि वह शून्यकाल चलने दें और उसी दौरान लोक महत्व के मुद्दे के तौर पर इस विषय को उठाएं.

अपनी बात का असर न होते देख उन्होंने 11 बज कर करीब 15 मिनट पर बैठक को दोपहर बारह बजे तक स्थगित कर दिया.

विधानसभा में विपक्ष के नेता ने देवरिया जाने को लेकर धरना दिया, बाद में अनुमति मिली
बलिया: देवरिया के बालिका गृह में कथित देह व्यापार के खुलासे के बाद प्रदर्शन करने जा रहे उत्तर प्रदेश विधानसभा में विरोधी दल के नेता रामगोविंद चौधरी को बलिया और देवरिया की सरहद पर प्रशासन ने डेढ़ घंटे तक रोके रखा तथा मौके पर धरना देने के बाद प्रदर्शन की अनुमति दी.

राज्य विधानसभा में विरोधी दल के नेता समाजवादी पार्टी के रामगोविंद चौधरी ने देवरिया कांड को बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर से भी बड़ा और वीभत्स क़रार दिया तथा कहा कि इस कांड ने देश-दुनिया मे प्रदेश के सम्मान और प्रतिष्ठा पर कालिख़ पोत दी है.

चौधरी ने देवरिया कांड के लिए योगी सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि इस कांड में सरकार के लोग भी संलिप्त थे.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि योगी सरकार इस मामले की लीपापोती में जुटी है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

 

Source: thewirehindi.com

सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश को लगाई फटकार, पूछा- बिना जांच पड़ताल किए ‘बालिका गृह’ को पैसा कौन दे रहा था?

Supreme court ask who funded shelter home in bihar

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भले ही बालिका गृह में हुए दुष्कर्मों पर अपने बचाव में बार-बार प्रेस कांफ्रेंस करते नज़र आ रहे हों। नीतीश ने सोमवार को ठहाके लगवाते हुए कहा कि हम एक्शन ले रहे हैं और शर्मसार भी हैं लेकिन वहां जो कुछ भी हुआ उसके लिए शासन ज़िम्मेदार है। मगर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में कोर्ट ने नीतीश कुमार की सरकार को जमकर फटकार लगाई है।

सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश सरकार से सवाल करते हुए कहा “आखिर मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह को राज्य में पैसा कौन दे रहा था? कोर्ट का ये सवाल अपने आप सारी बातें बयां कर रहा है। क्योंकि नीतीश सरकार हर साल बृजेश ठाकुर द्वारा चलाए जा रहे बालिका गृह को सालाना 40 लाख दे रही थी।

अब नीतीश सरकार को इसका साफ जवाब देना है कि आखिर वो जो बृजेश ठाकुर को पैसे दे रही थी, तो उसके बाद इतना बड़ा कांड होने के बाद आखिर किसी को पता कैसे नहीं चला?

पिछले दिनों राज्य के बाल अधिकार आयोग ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा था कि उन्होंने पिछले साल ही इस बालिका गृह को बंद करने की सिफारिश की थी।

बाल आयोग के अधिकारियों ने कहा था कि “वहां पर लड़कियों को कमरे में बंद देखा गया था, उसी वक़्त सवाल उठाये गए थे कि आखिर क्यों उन लड़कियों को कैद करके रखा गया है? लेकिन इसपर बताया गया था कि ऐसा इसलिए किया गया क्योकि लड़कियां भाग न जाये इसलिए उन्हें बंद करके रखा गया है।

 

Source: boltaup.com

मेजर सहित 4 जवान शहीद होने पर शिवसेना का मोदी सरकार पर हमला, “4 सालों में हमारे जवान जितने शहीद हुए हैं उतने पिछले 50 सालों में नहीं हुए”

Shivsena attacks modi govt

जम्मू एवं कश्मीर के गुरेज सेक्टर में मंगलवार (7 अगस्त) को पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ की कोशिश के दौरान मुठभेड़ में भारतीय सेना के एक मेजर व तीन जवान शहीद हो गए। घुसपैठ की इस कोशिश को नाकाम कर दिया गया।अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि कम से कम दो आतंकवादी भी मारे गए हैं।

उन्होंने बताया कि बांदीपुरा जिले के गुरेज सेक्टर के गोविंद नाला में सेना के गश्ती दल और घुसपैठ कर रहे समूह के बीच मुठभेड़ हुई। अधिकारी ने बताया कि दोनों आतंकवादियों के शव दूर से देखे जा सकते हैं जबकि दो अन्य आतंकवादियों के मारे जाने की भी संभावना है।

शहीदों की पहचान मेजर के पी राणे, हवलदार जैमी सिंह और विक्रमजीत तथा राइफलमैन मनदीप के तौर पर हुई है।अधिकारी ने बताया कि प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार आठ लोगों का एक समूह देश में घुसने की कोशिश कर रहा था। इनमें से चार पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में वापस भाग गए।

शिवसेना का मोदी सरकार पर हमला

मेजर सहित चार जवानों के शहीद होने पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा, “हमारे जवान जितने शहीद पिछले 4 सालों में हुए हैं उतने पिछले 50 सालों में नहीं हुए।”

समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने कहा कि बांदीपोरा के गुरेज सेक्टर की नियंत्रण रेखा की तरफ से आतंकवादियों के एक समूह ने घुसपैठ करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, नियंत्रण रेखा के हमारे तरफ उनकी घुसपैठ की कोशिश को देखकर उन्हें चुनौती दी गई। इस मुठभेड़ में दो आतंकवादियों को मार गिराया गया। कालिया ने कहा, इस अभियान में एक मेजर सहित चार जवान शहीद हुए हैं।

 

Source: jantakareporter.com

उत्तर प्रदेश में भाजपा की भक्तों पर नज़र, 2019 के आम चुनावों की तैयारी में जुटी पार्टी

BJP to collect data of temple ashram and SC OBC

साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की तैयारी शुरू हो चुकी है. वरिष्ठ नेताओं के संपर्क फॉर समर्थन अभियान के साथ बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं ने कमर कस ली है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में भाजपा बूथ स्तर पर अब मंदिर, मठों और आश्रमों के आंकड़े जुटा रही है.

इस रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर, मठ और आश्रमों के अलावा अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की जनसंख्या का भी आंकड़ा भी जुटाया जा रहा है.

एक सूत्र के अनुसार पार्टी की प्रदेश यूनिट में 1.4 लाख बूथ इंचार्ज हैं, जिन्हें एक प्रारूप बांटा गया है, जिसमें धार्मिक स्थल, धार्मिक स्थल का पता, वहां के पुजारी या प्रतिनिधि का नंबर और उनके मोबाइल फोन नंबर शामिल हैं.

इसके पीछे पार्टी का इरादा मठों और मंदिर के पुजारी के बदौलत उनके भक्तों के वोट साधना है. साथ ही अब पार्टी एससी और ओबीसी वोटरों को भी लुभाना चाहती है.

पार्टी ने अनिवार्य किया है कि हर बूथ समिति में दो अनुसूचित जाति के सदस्य और दो महिलाएं होनी चाहिए. भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे ऐसे सभी प्रभावशाली व्यक्तियों का संपर्क भी जुटाएं, जो वोटरों को प्रभावित करते हैं.

उत्तर प्रदेश में कुल 1.6 लाख पोलिंग बूथ है. भाजपा ने योजना बनाई है, जिसके अनुसार हर बूथ पर 21 सदस्यों की समिति होगी, जिसमें एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष, एक महासचिव और बूथ एजेंट होंगे.

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जेपीएस राठौड़ ने बताया कि बूथ सेक्शन कमेटी की बैठक 16 अगस्त से 25 अगस्त के बीच आयोजित की जाएगी. उन्होंने बताया कि बूथ प्रबंधक समिति 29 लाख समर्पित कार्यकर्ताओं की टीम तैयार करेगी.

लगभग 11 लाख कार्यकर्ता ब्लॉक और जिला स्तर पर काम करेंगे ताकि पूरे प्रदेश में 40 लाख कार्यकर्ताओं की भर्ती का लक्ष्य पूरा किया जा सके. ये कार्यकर्ता भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकार के कामों और योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने का काम करेंगे.

भाजपा ने हर बूथ को एक अलग कोड में बांटा है, जो निर्वाचन क्षेत्र या बूथ पार्टी के पक्ष वाला होगा उसे ‘ए’ कोड में रखा जाएगा. जहां पर पार्टी के 60-40 प्रतिशत चांस होगा उसे ‘बी’ और जो इलाक़ा अल्पसंख्यक बाहुल्य होगा उसे ‘सी’ श्रेणी में रखा जाएगा.

उत्तर प्रदेश भाजपा के संगठन मंत्री सुनील बंसल ने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव के लिए प्रभावी रणनीति के माध्यम से सूचनाएं एकत्र की जा रही हैं. उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी सिर्फ मंदिर नहीं बल्कि गुरुद्वारों का भी आंकड़े एकत्र कर रही है.

 

Source: thewirehindi.com

जस्टिस केएम जोसेफ बने सुप्रीम कोर्ट के जज, वरिष्ठता संबंधी आपत्तियां केंद्र द्वारा ख़ारिज

KM Joseph will sworn as judge on tuesday in supreme court

सुप्रीम कोर्ट के कुछ वरिष्ठ जजों ने जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति में वरिष्ठता के क्रम को लेकर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा था कि कॉलेजियम ने उनके नाम की सिफारिश सबसे पहले की थी इसलिए उन्हें वरिष्ठता के क्रम में पहले नंबर पर रखा जाना चाहिए.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त हुए जस्टिस केएम जोसेफ ने मंगलवार को साढ़े दस बजे सुप्रीम कोर्ट के जज के पद की शपथ ली. उन्हें वरिष्ठता के क्रम में तीसरे नंबर पर शपथ दिलाई गई. गौरतलब है कि उनकी वरिष्ठता का क्रम बीते दिनों से विवाद में रहा है.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने शपथ दिलाई.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने केएम जोसेफ की वरिष्ठता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जजों की आपत्तियों को खारिज कर दिया था. जस्टिस जोसेफ के अलावा जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस विनीत सरन ने भी शपथ ली.

सूत्रों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि सरकार ने तीनों जजों की नियुक्ति की नोटिफिकेशन जारी करते वक्त उनकी वरिष्ठता का ध्यान रखा है और ये प्रक्रिया वैध, पारदर्शी और पारंपरिक तरीके से हुई है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के कुछ सीनियर जजों ने जस्टिस केएम जोसेफ की वरिष्ठता को लेकर आपत्ति जाहिर की थी और शपथ ग्रहण समारोह को टालने की मांग की थी. जजों का तर्क है कि चूंकि कॉलेजियम ने पहले ही जस्टिस जोसेफ के नाम की सिफारिश की थी इसलिए उन्हें पहले नंबर पर रखा जाना चाहिए.

कॉलेजियम ने 10 जनवरी को वरिष्ठ अधिवक्ता इंदु मल्होत्रा के साथ जस्टिस जोसेफ के नाम की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के लिए की थी. हालांकि, सरकार ने जस्टिस जोसेफ का नाम कॉलेजियम के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया था, जबकि इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति को हरी झंडी दे दी थी.

कॉलेजियम ने 16 मई को सैद्धांतिक रूप से जस्टिस जोसेफ को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने के अपने फैसले को दोहराया था, लेकिन सरकार को दोबारा सिफारिश जुलाई में भेजी गई. इसे आखिरकार सरकार ने स्वीकार कर लिया.

बता दें कि केएम जोसेफ उस पीठ के प्रमुख थे जिसने 2016 में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के केंद्र के फैसले को निरस्त कर दिया था. उत्तराखंड में तब कांग्रेस की सरकार थी. विपक्ष का आरोप है कि जस्टिस जोसेफ के इसी फैसले की वजह से पहले केंद्र ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त नहीं होने देने की कोशिश की और अब उनकी वरिष्ठता को कम किया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने ट्वीट कर कहा, ‘जस्टिस केएम जोसेफ की वरिष्ठता को कम करके उनकी पदोन्नति करना सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में आज काला दिन होगा. न्यायपालिका को अपनी अंतरात्मा में झांकने की जरूरत है.’

तीन नए न्यायाधीशों के शपथ लेने के बाद शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है. हालांकि इसके बाद भी सुप्रीम कोर्ट में छह जजों के लिए पद खाली हैं.

जस्टिस इंदिरा बनर्जी के शपथ लेने बाद ही सुप्रीम कोर्ट में पहली बार तीन महिला न्यायाधीश हो गईं हैं. दो अन्य न्यायाधीशों में जस्टिस आर. भानुमति और जस्टिस इंदु मल्होत्रा शामिल हैं.

जस्टिस जोसेफ 14 अक्टूबर 2004 को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने और 31 जुलाई 2014 को वह उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए.

केएम जोसेफ सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर 16 जून 2023 को सेवानिवृत्त होंगे. इसी तरह जस्टिस इंदिरा बनर्जी पांच फरवरी 2002 को हाई कोर्ट की न्यायाधीश बनीं और वह पांच अप्रैल 2017 को मद्रास उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश बनाई गईं.

इंदिरा बनर्जी 23 सितंबर 2022 को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के तौर पर सेवानिवृत्त होंगी. वहीं, जस्टिस सरन 14 फरवरी 2002 को हाई कोर्ट के जज बनाए गए थे. उन्हें 26 फरवरी 2016 को उड़ीसा हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया. वे 10 मई 2022 को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होंगे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

 

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मुझे कहा गया कि न मोदी का नाम लूं, न ही उनकी तस्वीर दिखाऊं: पुण्य प्रसून बाजपेयी

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अपने इस लेख में मास्टरस्ट्रोक कार्यक्रम के एंकर रहे पुण्य प्रसून बाजपेयी उन घटनाक्रमों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं जिनके चलते एबीपी न्यूज़ चैनल के प्रबंधन ने मोदी सरकार के आगे घुटने टेक दिए और उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा.

क्या ये संभव है कि आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम न लें. आप चाहे तो उनके मंत्रियों का नाम ले लीजिए. सरकार की नीतियों में जो भी गड़बड़ी दिखाना चाहते हैं, दिखा सकते हैं. मंत्रालय के हिसाब से मंत्री का नाम लीजिए, पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ज़िक्र कहीं ना कीजिए.

लेकिन जब प्रधानमंत्री मोदी ख़ुद ही हर योजना का ऐलान करते हैं. हर मंत्रालय के कामकाज से ख़ुद को जोड़े हुए हैं और उनके मंत्री भी जब उनका ही नाम लेकर योजना या सरकारी नीतियों का ज़िक्र कर रहे हैं तो आप कैसे मोदी का नाम ही नहीं लेंगे.

अरे छोड़ दीजिए… कुछ दिनों तक देखते हैं क्या होता है. वैसे आप कर ठीक रहे हैं… पर अभी छोड़ दीजिए.

भारत के आनंद बाज़ार पत्रिका समूह के राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल एबीपी न्यूज़ के प्रोपराइटर जो एडिटर-इन-चीफ भी हैं उनके साथ ये संवाद 14 जुलाई को हुआ.

यूं तो इस निर्देश को देने से पहले ख़ासी लंबी बातचीत ख़बरों को दिखाने, उसके असर और चैनल को लेकर बदलती धारणाओं के साथ हो रहे लाभ पर भी हुई.

एडिटर-इन-चीफ ने माना कि ‘मास्टरस्ट्रोक’ प्रोग्राम ने चैनल की साख़ बढ़ा दी है. ख़ुद उनके शब्दों में कहें तो, ‘मास्टरस्ट्रोक में जिस तरह की रिसर्च होती है… जिस तरह ख़बरों को लेकर ग्राउंड ज़ीरो से रिपोर्टिंग होती है. रिपोर्ट के ज़रिये सरकार की नीतियों का पूरा खाका रखा जाता है. ग्राफिक्स और स्क्रिप्ट जिस तरह लिखी जाती है, वह चैनल के इतिहास में पहली बार उन्होंने भी देखा.’

तो चैनल के बदलते स्वरूप या ख़बरों को परोसने के अंदाज़ ने प्रोपराइटर व एडिटर-इन-चीफ को उत्साहित तो किया पर ख़बरों को दिखाने-बताने के अंदाज़ की तारीफ़ करते हुए भी लगातार वह ये कह भी रहे थे और बता भी रहे थे कि क्या सब कुछ ऐसे ही चलता रहे और प्रधानमंत्री मोदी का नाम न हो तो कैसा रहेगा?

ख़ैर, एक लंबी चर्चा के बाद सामने निर्देश यही आया कि प्रधानमंत्री मोदी का नाम अब चैनल की स्क्रीन पर लेना ही नहीं है.

तमाम राजनीतिक ख़बरों के बीच या कहें सरकार की हर योजना के मद्देनज़र ये बेहद मुश्किल काम था कि भारत की बेरोज़गारी का ज़िक्र करते हुए कोई रिपोर्ट तैयार की जा रही हो और उसमें सरकार के रोज़गार पैदा करने के दावे जो कौशल विकास योजना या मुद्रा योजना से जुड़ी हो, उन योजनाओं की ज़मीनी हक़ीक़त को बताने के बावजूद ये न लिख पाएं कि प्रधानमंत्री मोदी ने योजनाओं की सफलता को लेकर जो दावा किया वह है क्या?

यानी एक तरफ़ प्रधानमंत्री कहते हैं कि कौशल विकास योजना के ज़रिये जो स्किल डेवलपमेंट शुरू किया गया उसमें 2022 तक का टारगेट तो 40 करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग देने का रखा गया है, पर 2018 में इनकी तादाद दो करोड़ भी छू नहीं पायी है.

और ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि जितनी जगहों पर कौशल विकास योजना के तहत केंद्र खोले गए उनमें से हर 10 में से 8 केंद्र पर कुछ नहीं होता. तो ग्राउंड रिपोर्ट दिखाते हुए क्यों प्रधानमंत्री का नाम आना ही नहीं चाहिए?

तो सवाल था मास्टरस्ट्रोक की पूरी टीम की कलम पर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शब्द ग़ायब हो जाना चाहिए पर अगला सवाल तो ये भी था कि मामला किसी अख़बार का नहीं बल्कि न्यूज़ चैनल का था.

यानी स्क्रिप्ट लिखते वक़्त कलम चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न लिखे लेकिन जब सरकार का मतलब ही बीते चार बरस में सिर्फ़ नरेंद्र मोदी है तो फिर सरकार का ज़िक्र करते हुए एडिटिंग मशीन ही नहीं बल्कि लाइब्ररी में भी सिर्फ़ प्रधानमंत्री मोदी के ही वीडियो होंगे.

और 26 मई 2014 से लेकर 26 जुलाई 2018 तक किसी भी एडिटिंग मशीन पर मोदी सरकार ही नहीं बल्कि मोदी सरकार की किसी भी योजना को लिखते ही जो वीडियो या तस्वीरों का कच्चा-चिट्ठा उभरता उसमें 80 फीसदी प्रधानमंत्री मोदी ही थे.

यानी किसी भी एडिटर के सामने जो तस्वीर स्क्रिप्ट के अनुरूप लगाने की ज़रूरत होती उसमें बिना मोदी के कोई वीडियो या कोई तस्वीर उभरती ही नहीं.

और हर मिनट जब काम एडिटर कर रहा है तो उसके सामने स्क्रिप्ट में लिखे, मौजूदा सरकार शब्द आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ही तस्वीर उभरती और आॅन एयर ‘मास्टरस्ट्रोक’ में चाहे कहीं भी प्रधानमंत्री मोदी शब्द बोला-सुना ना जा रहा हो पर स्क्रीन पर प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर आ ही जाती.

तो ‘मास्टरस्ट्रोक’ में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर भी नहीं जानी चाहिए, उसका फ़रमान भी 100 घंटे बीतने से पहले आ जाएगा, ये सोचा तो नहीं गया पर सामने आ ही गया. और इस बार एडिटर-इन-चीफ के साथ जो चर्चा शुरू हुई वह इस बात से हुई कि क्या वाकई सरकार का मतलब प्रधानमंत्री मोदी ही है.

यानी हम कैसे प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर दिखाए बिना कोई भी रिपोर्ट दिखा सकते हैं. उस पर हमारा सवाल था कि मोदी सरकार ने चार बरस के कार्यकाल के दौरान 106 योजनाओं का ऐलान किया है. संयोग से हर योजना की ऐलान ख़ुद प्रधानमंत्री ने ही किया है.

हर योजना के प्रचार-प्रसार की ज़िम्मेदारी चाहे अलग-अलग मंत्रालय पर हो, अलग-अलग मंत्री पर हो, लेकिन जब हर योजना के प्रचार-प्रसार में हर तरफ़ से ज़िक्र प्रधानमंत्री मोदी का ही हो रहा है तो योजना की सफलता-असफलता पर ग्राउंड रिपोर्ट में भी ज़िक्र प्रधानमंत्री का रिपोर्टर-एंकर भले ही न करे लेकिन योजना से प्रभावित लोगों की ज़ुबां पर नाम तो प्रधानमंत्री मोदी का ही होगा और लगातार है भी.

चाहे किसान हो या गर्भवती महिला, बेरोज़गार हो या व्यापारी. जब उनसे फसल बीमा पर सवाल किया जाए या मातृत्व वंदना योजना या जीएसटी या मुद्रा योजना पर पूछा जाए या फिर योजनाओं के दायरे में आने वाला हर कोई प्रधानमंत्री मोदी का नाम ज़रूर लेता है. कोई लाभ नहीं मिल रहा है, अगर कोई ये कहता तो उनकी बातों को कैसे एडिट किया जाए.

तो जवाब यही मिला कि कुछ भी हो पर ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर-वीडियो भी मास्टरस्ट्रोक में दिखायी नहीं देना चाहिए.’

Punya Prasun Bajpai ABP News masterstroke Modi govt media
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वैसे ये सवाल अब भी अनसुलझा सा था कि आख़िर प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर या उनका नाम भी जुबां पर न आए तो उससे होगा क्या, क्योंकि जब 2014 में सत्ता में आई बीजेपी के लिए सरकार का मतलब नरेंद्र मोदी है और बीजेपी के स्टार प्रचारक के तौर पर प्रधानमंत्री मोदी ही हैं.

संघ के चेहरे के तौर पर भी प्रचारक रहे नरेंद्र मोदी हैं, दुनिया भर में भारत की विदेश नीति के ब्रांड अंबेसडर नरेंद्र मोदी हैं, देश की हर नीति के केंद्र में नरेंद्र मोदी हैं तो फिर दर्जन भर हिंदी राष्ट्रीय न्यूज़ चैनलों की भीड़ में पांचवें-छठे नंबर के राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल एबीपी के प्राइम टाइम में सिर्फ घंटेभर के कार्यक्रम ‘मास्टरस्ट्रोक’ को लेकर सरकार के भीतर इतने सवाल क्यों हैं?

या कहें वह कौन सी मुश्किल है जिसे लेकर एबीपी न्यूज़ चैनल के मालिकों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वह प्रधानमंत्री मोदी का नाम न लें या फिर तस्वीर भी न दिखाए.

दरअसल मोदी सरकार में चार बरस तक जिस तरह सिर्फ़ और सिर्फ़ प्रधानमंत्री मोदी को ही केंद्र में रखा गया और भारत जैसे देश में टीवी न्यूज़ चैनलों ने जिस तरह सिर्फ़ और सिर्फ़ उनको ही दिखाया और धीरे-धीरे प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर, उनका वीडियो, उनका भाषण किसी नशे की तरह न्यूज़ चैनलों को देखने वाले के भीतर समाता गया.

उसका असर ये हुआ कि प्रधानमंत्री मोदी ही चैनलों की टीआरपी की ज़रूरत बन गए और प्रधानमंत्री के चेहरे का साथ सब कुछ अच्छा है या कहें अच्छे दिन की ही दिशा में देश बढ़ रहा है, ये बताया जाने लगा तो चैनलों के लिए भी यह नशा बन गया और ये नशा न उतरे इसके लिए बाकायदा मोदी सरकार के सूचना मंत्रालय ने 200 लोगों की एक मॉनिटरिंग टीम को लगा दिया गया.

बाकायदा पूरा काम सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एडिशनल डायरेक्टर जनरल के मातहत होने लगा, जो सीधी रिपोर्ट सूचना एवं प्रसारण मंत्री को देते और जो 200 लोग देश के तमाम राष्ट्रीय न्यूज़ चैनलों की मॉनिटरिंग करते हैं वह तीन स्तर पर होता.

150 लोगों की टीम सिर्फ़ मॉनिटरिंग करती है, 25 मॉनिटरिंग की गई रिपोर्ट को सरकार के अनुकूल एक शक्ल देती है और बाकि 25 फाइनल मॉनिटरिंग के कंटेंट की समीक्षा करते हैं.

उनकी इस रिपोर्ट पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तीन डिप्टी सचिव स्तर के अधिकारी रिपोर्ट तैयार करते और फाइनल रिपोर्ट सूचना एवं प्रसारण मंत्री के पास भेजी जाती. जिनके ज़रिये पीएमओ यानी प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी सक्रिय होते और न्यूज़ चैनलों के संपादकों को दिशा निर्देश देते रहते कि क्या करना है, कैसे करना है.

और कोई संपादक जब सिर्फ़ ख़बरों के लिहाज़ से चैनल को चलाने की बात कहता है तो चैनल के प्रोपराइटर से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय या पीएमओ के अधिकारी संवाद कायम करते या बनाते.

दबाव बनाने के लिए मॉनिटरिंग की रिपोर्ट को नत्थी कर फाइल भेजते और फाइल में इसका ज़िक्र होता कि आख़िर कैसे प्रधानमंत्री मोदी की 2014 में किए गए चुनावी वादे से लेकर नोटबंदी या सर्जिकल स्ट्राइक या जीएसटी को लागू करते वक़्त दावों भरे बयानों को दोबारा दिखाया जा सकता है. या फिर कैसे मौजूदा दौर की किसी योजना पर होने वाली रिपोर्ट में प्रधानमंत्री के पुराने दावे का ज़िक्र किया जा सकता है.

दरअसल मोदी सत्ता की सफलता का नज़रिया ही हर तरीके से रखा जाता रहा है. इसके लिए ख़ासतौर से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से लेकर पीएमओ के दर्जन भर अधिकारी पहले स्तर पर काम करते हैं.

दूसरे स्तर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री का सुझाव होता है, जो एक तरह का निर्देश होता है और तीसरे स्तर पर बीजेपी का लहज़ा, जो कई स्तर पर काम करता है. मसलन अगर कोई चैनल सिर्फ़ मोदी सत्ता की सकारात्मकता को नहीं दिखाता है या कभी-कभी नकात्मक ख़बर करता है या फिर तथ्यों के सहारे मोदी सरकार के सच को झूठ क़रार देता है तो फिर बीजेपी के प्रवक्ताओं को चैनल में भेजने पर पाबंदी लग जाती है.

यानी न्यूज़ चैनल पर होने वाली राजनीतिक चर्चाओं में बीजेपी के प्रवक्ता नहीं आते हैं. एबीपी पर ये शुरुआत जून के आख़िरी हफ्ते से ही शुरू हो गई. यानी बीजेपी प्रवक्ताओं ने चर्चा में आना बंद कर दिया.

दो दिन बाद से बीजेपी नेताओं ने चैनल को बाईट देना बंद कर दिया और जिस दिन प्रधानमंत्री मोदी के ‘मन का बात’ का सच ‘मास्टरस्ट्रोक’ में दिखाया गया उसके बाद से बीजेपी के साथ-साथ आरएसएस से जुड़े उनके विचारकों को भी एबीपी न्यूज़ चैनल पर आने से रोक दिया गया.

तो ‘मन की बात’ के सच और उसके बाद के घटनाक्रम को समझ उससे पहले ये भी जान लें कि मोदी सत्ता पर कैसे बीजेपी का पैरेंट संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी निर्भर हो चला है.

इसका सबसे बड़ा उदाहरण 9 जुलाई 2018 को तब नज़र आया जब शाम चार बजे की चर्चा के एक कार्यक्रम के बीच में ही संघ के विचारक के तौर पर बैठे एक प्रोफेसर का मोबाइल बजा और उधर से कहा गया कि वह तुरंत स्टुडियो से बाहर निकल आएं और वह शख़्स आॅन एयर कार्यक्रम के बीच ही उठ कर चल पड़ा.

फोन आने के बाद उसके चेहरे का हावभाव ऐसा था मानो उसने कोई बहुत बड़ा अपराध कर दिया है या कहें बेहद डरे हुए शख़्स का जो चेहरा हो सकता है वह उस वक़्त में नज़र आ गया.

पर बात इससे भी बनी नहीं क्योंकि इससे पहले जो लगातार ख़बरें चैनल पर दिखायी जा रही थीं उसका असर देखने वालों पर क्या हो रहा है और बीजेपी के प्रवक्ता चाहे चैनल पर न आ रहे हों पर ख़बरों को लेकर चैनल की टीआरपी बढ़ने लगी. और इस दौर में टीआरपी की जो रिपोर्ट 5 और 12 जुलाई को आई उसमें एबीपी न्यूज़ देश के दूसरे नंबर का चैनल बन गया.

Punya Prasun Bajpai ABP News masterstroke Modi govt media
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और ख़ास बात तो ये भी है कि इस दौर में ‘मास्टरस्ट्रोक’ में एक्सक्लूसिव रिपोर्ट झारखंड के गोड्डा में लगने वाले थर्मल पावर प्रोजेक्ट पर की गई. चूंकि ये थर्मल पावर तमाम नियम-कायदों को ताक पर रखकर ही नहीं बन रहा है बल्कि ये अडानी ग्रुप का है और पहली बार उन किसानों का दर्द इस रिपोर्ट के ज़रिये उभरा कि अडानी कैसे प्रधानमंत्री मोदी के क़रीब हैं तो झारखंड सरकार ने नियम बदल दिए और किसानों को धमकी दी जाने लगी कि अगर उन्होंने अपनी ज़मीन थर्मल पावर के लिए नहीं दी तो उनकी हत्या कर दी जाएगी.

एक किसान ने बाकायदा कैमरे पर कहा, ‘अडानी ग्रुप के अधिकारी ने धमकी दी है ज़मीन नहीं दोगे तो ज़मीन में गाड़ देंगे. पुलिस को शिकायत किए तो पुलिस बोली बेकार है शिकायत करना. ये बड़े लोग हैं. प्रधानमंत्री के क़रीबी हैं.’

इस दिन के कार्यक्रम की टीआरपी बाकी के औसत मास्टरस्ट्रोक से पांच पॉइंट ज़्यादा थी. यानी एबीपी के प्राइम टाइम (रात 9-10 बजे) में चलने वाले मास्टरस्ट्रोक की औसत टीआरपी जो 12 थी उस अडानी वाले कार्यक्रम के दिन 17 हो गई.

यानी तीन अगस्त को जब संसद में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मीडिया पर बंदिश और एबीपी न्यूज़ को धमकाने और पत्रकारों को नौकरी से निकलवाने का ज़िक्र किया तो सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कह दिया, ‘चैनल की टीआरपी ही मास्टरस्ट्रोक कार्यक्रम से नहीं आ रही थी और उसे कोई देखना ही नहीं चाहता था तो चैनल ने उसे बंद कर दिया.’

तो असल हालात यही से निकलते हैं क्योकि एबीपी की टीआरपी अगर बढ़ रही थी. उसका कार्यक्रम मास्टरस्ट्रोक लोकप्रिय भी हो रहा था और पहले की तुलना में टीआरपी भी अच्छी-ख़ासी शुरुआती चार महीनों में ही देने लगा था (मास्टरस्ट्रोक से पहले ‘जन गण मन’ कार्यक्रम चला करता था जिसकी औसत टीआरपी 7 थी, मास्टरस्ट्रोक की औसत टीआरपी 12 हो गई).

यानी मास्टरस्ट्रोक की ख़बरों का मिज़ाज़ मोदी सरकार की उन योजनाओं या कहें दावों को ही परखने वाला था जो देश के अलग-अलग क्षेत्रों से निकल कर रिपोर्टरों के ज़रिये आती थी. और लगातार मास्टरस्ट्रोक के ज़रिये ये भी साफ़ हो रहा था कि सरकार के दावों के भीतर कितना खोखलापन है और इसके लिए बाकायदा सरकारी आंकड़ों के अंतर्विरोध को ही आधार बनाया जाता था.

तो सरकार के सामने ये संकट भी उभरा कि जब उनके दावों को परखते हुए उनके ख़िलाफ़ हो रही रिपोर्ट को भी जनता पसंद करने लगी है और चैनल की टीआरपी भी बढ़ रही है तो फिर आने वाले वक़्त में दूसरे चैनल क्या करेंगे?

क्योंकि भारत में न्यूज़ चैनलों के बिज़नेस का सबसे बड़ा आधार विज्ञापन है और विज्ञापन को मापने के लिए संस्था बार्क (ब्रॉडकास्ट आॅडिएंस रिसर्च काउंसिल इंडिया) की टीआरपी रिपोर्ट है. और अगर टीआरपी ये दिखलाने लगे कि मोदी सरकार की सफलता को ख़ारिज करती रिपोर्ट जनता पसंद कर रही है तो फिर वह न्यूज़ चैनल जो मोदी सरकार के गुणगान में खोये हुए हैं उनके सामने साख़ और बिज़नेस यानी विज्ञापन दोनों का संकट होगा.

तो बेहद समझदारी के साथ चैनल पर दबाव बढ़ाने के लिए दो कदम सत्ताधारी बीजेपी के तरफ़ से उठे. पहला, देशभर में एबीपी न्यूज़ का बायकट हुआ और दूसरा, एबीपी का जो भी सालाना कार्यक्रम होता है जिससे चैनल की साख़ भी बढ़ती है और विज्ञापन के ज़रिये कमाई भी होती है. मसलन एबीपी न्यूज़ चैनल के ‘शिखर सम्मेलन’ कार्यक्रम में सत्ता और विपक्ष के नेता-मंत्री पहुंचते और जनता के सवालों का जवाब देते तो उस कार्यक्रम से बीजेपी और मोदी सरकार दोनों ने हाथ पीछे कर लिए. यानी कार्यक्रम में कोई मंत्री नहीं जाएगा.

ज़ाहिर है जब सत्ता ही नहीं होगी तो सिर्फ़ विपक्ष के आसरे कोई कार्यक्रम कैसे हो सकता है. यानी हर न्यूज़ चैनल को साफ़ संदेश दे दिया गया कि विरोध करेंगे तो चैनल के बिज़नेस पर प्रभाव पड़ेगा.

यानी चाहे-अनचाहे मोदी सरकार ने साफ़ संकेत दिए कि सत्ता अपने आप में बिज़नेस है और चैनल भी बिना बिज़नेस ज़्यादा चल नहीं पाएगा. पर पहली बार एबीपी न्यूज़ चैनल पर असर डालने के लिए या कहें कई सारे चैनल मोदी सरकार के गुणगान को छोड़कर ग्राउंड ज़ीरो से ख़बरें दिखाने की दिशा में बढ़ न जाएं. उसके लिए शायद दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में लोकतंत्र का मित्र बनकर लोकतंत्र का ही गला घोंटने की कार्यवाही सत्ता ने शुरू की.

यानी इमरजेंसी थी तब मीडिया को एहसास था कि संवैधानिक अधिकार समाप्त हैं पर यहां तो लोकतंत्र का राग है और 20 जून को प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये किसान लाभार्थियों से बात भी की.

उस बातचीत में सबसे आगे छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले के कन्हारपुरी गांव में रहने वाली चंद्रमणि कौशिक थीं. उनसे जब प्रधानमंत्री ने कमाई के बारे में पूछा तो बेहद सरल तरीके से चंद्रमणि ने बताया कि उसकी आय कैसे दोगुनी हो गई. आय दोगुनी हो जाने की बात सुनकर प्रधानमंत्री खुश हो गए, खिलखिलाने लगे, क्योंकि किसानों की आय दोगुनी होने का लक्ष्य प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2022 में रखा है.

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पर लाइव टेलीकास्ट में कोई किसान कहे कि उसकी आय दोगुनी हो गई तो प्रधानमंत्री का खुश होना तो बनता है. पर रिपोर्टर-संपादक के दृष्टिकोण से हमें ये सच पचा नहीं क्योंकि छत्तीसगढ़ यूं भी देश के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक है, फिर कांकेर ज़िला, जिसके बारे में सरकारी रिपोर्ट ही कहती है कि जो अब भी कांकेर के बारे में सरकारी वेबसाइट पर दर्ज है कि ये दुनिया के सबसे पिछड़े इलाके यानी अफ्रीका या अफगानिस्तान की तरह है.

ऐसे में यहां की कोई महिला किसान आय दोगुनी होने की बात कह रही है तो रिपोर्टर को ख़ासकर इसी रिपोर्ट के लिए वहां भेजा गया. 14 दिन बाद 6 जुलाई को जब ये रिपोर्ट दिखायी गई कि कैसे महिला को दिल्ली से गए अधिकारियों ने ट्रेनिंग दी कि उसे प्रधानमंत्री के सामने क्या बोलना है, कैसे बोलना है और कैसे आय दोगुनी होने की बात कहनी है.

इस रिपोर्ट को दिखाये जाने के बाद छत्तीसगढ़ में ही ये सवाल होने लगे कि कैसे चुनाव जीतने के लिए छत्तीसगढ़ की महिला को ट्रेनिंग दी गई. (छत्तीसगढ़ में पांच महीने बाद विधानसभा चुनाव है) यानी इस रिपोर्ट ने तीन सवालों को जन्म दे दिया.

पहला, क्या अधिकारी प्रधानमंत्री को खुश करने के लिए ये सब करते हैं. दूसरा, क्या प्रधानमंत्री चाहते हैं कि सिर्फ़ उनकी वाहवाही हो तो झूठ बोलने की ट्रेनिंग दी जाती है. तीसरा, क्या प्रचार-प्रसार का यही तंत्र ही है जो चुनाव जिता सकता है.

हो जो भी पर इस रिपोर्ट से आहत मोदी सरकार ने एबीपी न्यूज़ चैनल पर सीधा हमला ये कहकर शुरू किया कि जान-बूझकर ग़लत और झूठी रिपोर्ट दिखायी गई. और बाकायदा सूचना एवं प्रसारण मंत्री समेत तीन केंद्रीय मंत्रियों ने एक सरीखे ट्वीट किए और चैनल की साख़ पर ही सवाल उठा दिए. ज़ाहिर है ये दबाव था. सब समझ रहे थे.

ऐसे में तथ्यों के साथ दोबारा रिपोर्ट फाइल करने के लिए जब रिपोर्टर ज्ञानेंद्र तिवारी को भेजा गया तो गांव का नज़ारा ही कुछ अलग हो गया. मसलन गांव में पुलिस पहुंच चुकी थी. राज्य सरकार के बड़े अधिकारी इस भरोसे के साथ भेजे गए थे कि रिपोर्टर दोबारा उस महिला तक पहुंच न सके.

पर रिपोर्टर की सक्रियता और भ्रष्टाचार को छिपाने पहुंचे अधिकारी या पुलिसकर्मियों में इतना नैतिक बल न था या वह इतने अनुशासन में रहने वाले नहीं थे कि रात तक डटे रहते, तो दिन के उजाले में खानापूर्ति कर वे अधिकारी लौट आए.

शाम ढलने से पहले ही गांव के लोगों ने और दोगुनी आय कहने वाली महिला समेत उनके साथ काम करने वाली 12 महिलाओं के समूह ने चुप्पी तोड़कर सच बता दिया कि हालत तो और खस्ता हो गई है

9 जुलाई को इस रिपोर्ट के ‘सच’ शीर्षक के प्रसारण के बाद सत्ता-सरकार की खामोशी ने संकेत तो दिए कि वह कुछ करेगी और उसी रात सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन काम करने वाले न्यूज़ चैनल मॉनिटरिंग की टीम में से एक शख़्स ने फोन से जानकारी दी कि आपके मास्टरस्ट्रोक चलने के बाद से सरकार में हड़कंप मचा हुआ है.

बाकायदा एडीजी को सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने हड़काया है कि क्या आपको अंदेशा नहीं था कि एबीपी हमारे ट्वीट के बाद भी रिपोर्ट फाइल कर देता है. अगर ऐसा हो सकता है तो हम पहले ही नोटिस भेज देते जिससे रिपोर्ट के प्रसारण से पहले उन्हें हमें दिखाना पड़ता.

ज़ाहिर है जब ये सारी जानकारी नौ जुलाई को सरकारी मॉनिटरिंग करने वाले सीनियर मॉनिटरिंग का पद संभाले शख़्स ने दी तो मुझे पूछना पड़ा कि क्या आपको नौकरी का ख़तरा नहीं है, जो आप हमें सारी जानकरी दे रहे हैं.

तो उस शख्स ने साफ़ तौर पर कहा कि 200 लोगों की टीम है. जिसकी भर्ती ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन इंडिया लिमिटेड करती है. छह महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर रखती है चाहे आपको कितने भी बरस काम करते हुए हो. छुट्टी की कोई सुविधा है नहीं. मॉनिटरिंग करने वालों को 28,635 रुपये मिलते हैं तो सीनियर मॉनिटरिंग करने वाले को 37,350 रुपये और कंटेट पर नज़र रखने वालों को 49,500 रुपये मिलते हैं. इतने वेतन की नौकरी जाए या रहे फ़र्क़ क्या पड़ता है.

पर सच तो यही है कि प्राइम टाइम के बुलेटिन पर नज़र रखने वालों को यही रिपोर्ट तैयार करनी होती है कितना वक़्त आपने प्रधानमंत्री मोदी को दिखाया. जो सबसे ज़्यादा दिखाता है उसे सबसे ज़्यादा अच्छा माना जाता है.

हम मास्टरस्ट्रोक में प्रधानमंत्री मोदी को तो ख़ूब दिखाते हैं इस पर लगभग हंसते हुए उस शख़्स ने कहा आपके कंटेंट पर अलग से एक रिपोर्ट तैयार होती है और आज जो आपने दिखाया है उसके बाद तो कुछ भी हो सकता है. बस सचेत रहिएगा.

यह कहकर उसने तो फोन काट दिया तो मैं भी इस बारे में सोचने लगा. इसकी चर्चा चैनल के भीतर हुई भी पर ये किसी ने नहीं सोचा था कि हमला तीन स्तर पर होगा और ऐसा हमला होगा कि लोकतंत्र टुकुर-टुकुर देखता रह जाएगा क्योंकि लोकतंत्र के नाम पर ही लोकतंत्र का गला घोटा जाएगा.

अगले ही दिन से जैसे ही रात के नौ बजे एबीपी न्यूज़ चैनल का सैटेलाइट लिंक अटकने लगा और नौ बजे से लेकर रात दस बजे तक कुछ इस तरह से सैटेलाइट की डिस्टरबेंस रही कि कोई भी मास्टरस्ट्रोक देख ही न पाए या देखने वाला चैनल बदल ले और दस बजते ही चैनल फिर ठीक हो जाता.

ज़ाहिर है ये चैनल चलाने वालों के लिए किसी झटके से कम नहीं था. ऐसे में चैनल के प्रोपराइटर व एडिटर-इन-चीफ ने तमाम टेक्नीशियंस को लगाया कि ये क्यों हो रहा है. पर सेकेंड भर के लिए किसी टेलीपोर्ट से एबीपी सैटेलाइट लिंक पर फायर होता और जब तक एबीपी के टेक्नीशियन एबीपी का टेलीपोर्ट बंद कर पाते तब तक पता नहीं कहां से फायर हो रहा है तब तक उस टेलीपोर्ट के मूवमेंट होते और वह फिर चंद मिनट में सेकेंड भर के लिए दोबारा टेलीपोर्ट से फायर करता.

यानी औसतन 30 से 40 बार एबीपी के सैटेलाइट लिंक पर ही फायर कर डिस्टरबेंस पैदा की जाती और तीसरे दिन सहमति यही बनी कि दर्शकों को जानकारी दे दी जाए.

19 जुलाई को सुबह से ही चैनल पर ज़रूरी सूचना कहकर चलाना शुरू किया गया, ‘पिछले कुछ दिनों से आपने हमारे प्राइम टाइम प्रसारण के दौरान सिग्नल को लेकर कुछ रुकावटें देखी होंगी. हम अचानक आई इन दिक्कतों का पता लगा रहे हैं और उन्हें दूर करने की कोशिश में लगे हैं. तब तक आप एबीपी न्यूज़ से जुड़े रहें.’

Punya Prasun Bajpai ABP News masterstroke Modi govt media
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ये सूचना प्रबंधन के मशविरे से आॅन एयर हुई पर इसे आॅन एयर करने के दो घंटे बाद ही यानी सुबह 11 बजते-बजते हटा लिया गया. हटाने का निर्णय भी प्रबंधन का ही रहा. यानी दबाव सिर्फ़ ये नहीं कि चैनल डिस्टर्ब होगा बल्कि इसकी जानकारी भी बाहर नहीं जानी चाहिए यानी मैनेजमेंट कहीं साथ खड़ा न हो.

और इसी के समानांतर कुछ विज्ञापनदाताओं ने विज्ञापन हटा लिए या कहें रोक लिए. मसलन सबसे बड़ा विज्ञापनदाता जो विदेशी ताकतों से स्वदेशी ब्रांड के नाम पर लड़ता है और अपने सामान को बेचता है उसका विज्ञापन झटके में चैनल के स्क्रीन से गायब हो गया.

फिर अगली जानकारी ये भी आने लगी कि विज्ञापनदाताओं को भी अदृश्य शक्तियां धमका रही हैं कि वे विज्ञापन देना बंद कर दें. यानी लगातार 15 दिन तक सैटेलेइट लिंक में दख़ल और सैटेलाइट लिंक में डिस्टरबेंस का मतलब सिर्फ़ एबीपी का राष्ट्रीय हिंदी न्यूज़ चैनल भर ही नहीं बल्कि चार क्षेत्रीय भाषा के चैनल भी डिस्टर्ब होने लगे यानी रात नौ से दस बजे कोई आपका चैनल न देख पाए तो मतलब है जिस वक़्त सबसे ज़्यादा लोग देखते है उसी वक़्त आपको कोई नहीं देखेगा.

यानी टीआरपी कम होगी ही, यानी मोदी सरकार के गुणगान करने वाले चैनलों के लिए राहत कि अगर वह सत्तानुकूल ख़बरों में खोए हुए हैं तो उनकी टीआरपी बनी रहेगी और जनता के लिए सत्ता ये मैसेज दे देगी कि लोग तो मोदी को मोदी के अंदाज़ में सफल देखना चाहते हैं.

जो सवाल खड़ा करते हैं उसे जनता देखना ही नहीं चाहती. यानी सूचना एवं प्रसारण मंत्री को भी पता है कि खेल क्या है तभी तो संसद में जवाब देते वक़्त वह टीआरपी का ज़िक्र करने से चुके पर स्क्रीन ब्लैक होने से पहले टीआरपी क्यों बढ़ रही थी इस पर कुछ नहीं बोले.

ख़ैर ये पूरी प्रक्रिया है जो चलती रही और इस दौर में कई बार ये सवाल भी उठे कि एबीपी को ये तमाम मुद्दे उठाने चाहिए. मास्टरस्ट्रोक के वक़्त अगर सैटेलाइट लिंक ख़राब किया जाता है तो कार्यक्रम को सुबह या रात में ही रिपीट टेलीकास्ट करना चाहिए.

पर हर रास्ता उसी दिशा में जा रहा था जहां सत्ता से टकराना है या नहीं और खामोशी हर सवाल का जवाब ख़ुद-ब-खुद दे रही थी. तो पूरी लंबी प्रक्रिया का अंत भी कम दिलचस्प नहीं है क्योंकि एडिटर-इन-चीफ यानी प्रोपराइटर या कहें प्रबंधन जब आपके सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो जाए कि बताइए करें क्या?

इन हालातों में आप ख़ुद क्या कर सकते हैं… छुट्टी पर जा सकते हैं… इस्तीफ़ा दे सकते हैं. और कमाल तो ये है कि इस्तीफ़ा देकर निकले नहीं कि पतजंलि का विज्ञापन लौट आया.

मास्टरस्ट्रोक में भी विज्ञापन बढ़ गया. 15 मिनट का विज्ञापन जो घटते-घटते तीन मिनट पर आ गया था वह बढ़कर 20 मिनट हो गया. दो अगस्त को इस्तीफ़ा हुआ और दो अगस्त की रात सैटेलाइट भी संभल गया. और काम करने के दौर में जिस दिन संसद के सेंट्रल हाल में कुछ पत्रकारों के बीच एबीपी चैनल को मज़ा सिखाने की धमकी देते हुए पुण्य प्रसून ख़ुद को क्या समझता है कहा गया.

उससे दो दिन पहले का सच और एक दिन बाद का सच ये भी है कि रांची और पटना में बीजेपी का सोशल मीडिया संभालने वालों को बीजेपी अध्यक्ष निर्देश देकर आए थे कि पुण्य प्रसून को बख्शना नहीं है. सोशल मीडिया से निशाने पर रखे और यही बात जयपुर में भी सोशल मीडिया संभालने वालों को कही गई.

पर सत्ता की मुश्किल यह है कि धमकी, पैसे और ताक़त की बदौलत सत्ता से लोग जुड़ तो जाते हैं पर सत्ताधारी के इस अंदाज़ में ख़ुद को ढाल नहीं पाते तो रांची-पटना-जयपुर से बीजेपी के सोशल मीडिया वाले जानकारी देते रहे आपके ख़िलाफ़ अभी और ज़ोर-शोर से हमला होगा.

तो फिर आख़िरी सवाल जब खुले तौर पर सत्ता का खेल हो रहा है तो फिर किस एडिटर गिल्ड को लिखकर दें या किस पत्रकार संगठन से कहें संभल जाओ. सत्तानुकूल होकर मत कहो शिकायत तो करो फिर लड़ेंगे. जैसे एडिटर गिल्ड नहीं बल्कि सचिवालय है और संभालने वाले पत्रकार नहीं सरकारी बाबू हैं.

तो गुहार यही है, लड़ो मत पर दिखायी देते हुए सच को देखते वक़्त आंखों पर पट्टी तो न बांधो.

 

Source: thewirehindi.com

2 अप्रैल के भारत बंद से बने दबाव के बाद लाई सरकार एससी/एसटी बिल: मायावती

Mayawati statement about sc st prevention atrocities amendment bill

नई दिल्ली। एससी-एसटी (अत्याचार रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2018 सोमवार को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित हो गया है। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एससी/एसटी विधेयक में संशोधन का स्वागत किया है। मायावती ने कहा कि उन्हें उम्मीद है, लोकसभा में के बाद राज्यसभा में भी ये बिल पास हो जाएगा। मायावती ने इस बिल के लोकसभा में आने का श्रेय देश की जनता और बसपा के कार्यकर्ताओं को है, जिन्होंने इसके लेकर सड़कों पर संघर्ष किया।

Mayawati statement about sc st prevention atrocities amendment bill
Mayawati statement about sc st prevention atrocities amendment bill

भारत बंद के चलते लाया गया बिल

मायावती ने कहा है कि 2 अप्रैल को जनता और बसपा कार्यकर्ताओं ने जो भारत बंद बुलाया था, उसने सरकार पर दबाव बनाया। इसी बंद का असर था कि केंद्र की भाजपा सरकार इसे संसद में लेकर आई। मायावती ने केंद्र सरकार में शामिल दलित नेताओं की भी आलोचना करते हुए कहा कि जब 2 अप्रैल को देश के लोग आंदोलन के लिए सड़कों पर उतर थे तो केंद्र सरकार में शामिल दलित मंत्री चुप्पी लगाए बैठे थे।

Mayawati statement about sc st prevention atrocities amendment bill
Mayawati statement about sc st prevention atrocities amendment bill

शुक्रवार को पेश किया था बिल

एससी/एसटी एक्ट पर संशोधित बिल शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत ने बिल पेश किया था। जिसे सोमवार को लोकसभा में पास कर दिया गया। राज्यसभा से भी पास होने के बाद एससी/एसटी एक्ट अपने पुराने स्वरूप में आ जाएगा। इस साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट 1989 के तहत दर्ज मामलों में जांच से पहले गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। इसका देशभर में भारी विरोध हुआ था।

Mayawati statement about sc st prevention atrocities amendment bill
Mayawati statement about sc st prevention atrocities amendment bill

मार्च में हुआ था बदलाव

मार्च में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों गिरफ्तारी से पहले डीएसपी स्तर पर जांच और अग्रिम जमानत की बात कही थी। बिल में संसोधन के बाद अपराध की शिकायत मिलते ही पुलिस रिपोर्ट दर्ज करे, केस दर्ज करने से पहले जांच जरूरी नहीं होगी। गिरफ्तारी से पहले किसी की इजाजत लेना आवश्यक नहीं है और केस दर्ज होने के बाद अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं होगा।

Source: hindi.oneindia.com

अखिलेश यादव का ऐलान- बंगले में तोड़फोड़ करने वाले का नाम बताओ और 11 लाख पाओ

Akhilesh Yadav announces rs 11 lakh reward on culprits of Damaged Bungalow

यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के सरकारी बंगले में हुई तोड़फोड़ के मामले में हंगामा जारी है. अब अखिलेश यादव ने खुद इस बात का ऐलान किया है कि जो भी तोड़फोड़ के आरोपियों का नाम बता देगा, उन्हें 11 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा.

बता दें कि लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग पर आबंटित बंगले को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अखिलेश को खाली करना पड़ा था. उनके बंगला खाली करने के बाद उसमें तोड़फोड़ की तस्वीरें सामने आईं थी. इसके अलावा लोक निर्माण विभाग की हालही में पेश की गई रिपोर्ट में बंगले में करीब साढ़े चार करोड़ रुपए के अवैध निर्माण की बात सामने आई थी. हालांकि समाजवादी पार्टी ने इन आरोपों को विरोधियों की साजिश बताया था.

गौरतलब है कि बुधवार को लोक निर्माण विभाग ने सरकारी बंगले की जांच रिपोर्ट राज्य सम्पत्ति विभाग को सौंप दी थी. इस रिपोर्ट में बंगले में तोड़-फोड़ के कारण करीब 10 लाख रुपए के नुकसान का आकलन किया था. इस मामले में सीएम अखिलेश को नोटिस देने की तैयारी की जा रही है.

जनेश्वर मिश्रा कार्यक्रम में अखिलेश ने पीएम मोदी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पीएम आरक्षण की बात करते हैं, इस बात की उन्हें खुशी है लेकिन वह नफरत भी फैलाते हैं. अखिलेश ने कहा कि निषाद, बाथम और केवट समाज को कुछ भी नहीं दिया गया. उन्होंने मांग करते हुए कहा कि पिछड़ी जातियों को आबादी के हिसाब से अधिकार मिलना चाहिए.

Source: hindi.siasat.com

भाजपा नेताओं की संसदीय समिति ने कहा- मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र और सेनाओं को 1962 की स्थिति में पहुंचा दिया है

Modi government has weakened the armies

मोदी सरकार पर पिछले कुछ समय से लगातार आरोप लग रहा है कि वो राष्ट्रवाद का ढोंग कर देश के रक्षा क्षेत्र और देश की सेनाओं को कमज़ोर कर रही है। अब ये बात संसद की एक समिति ने भी मान ली है।

सबसे बड़ी चीज़ ये है कि इस समिति के अध्यक्ष किसी विपक्षी पार्टी के नेता नहीं बल्कि एक समय प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शक रह चुके भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी हैं। इतना ही नहीं समिति में 16 भाजपा सांसद भी हैं। मोदी सरकार पर ये अबतक का सबसे बड़ा धब्बा है।

मुरली मनोहर जोशी ने कहा है कि मोदी सरकार आज देश के रक्षा क्षेत्र को उस स्तिथि में ले आई जैसी 1962 में चीन से हार के बाद उसकी थी।

‘सशस्त्र बलों की रक्षा – रक्षा उत्पादन और खरीद’ पर महत्व देते हुए समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मोदी सरकार देश की राष्ट्रीय सुरक्षा की उपेक्षा कर रही है। ये भविष्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

समिति ने तीनों सेनाओं के प्रमुखों से भी बात की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018-19 के बजट में सरकार ने रक्षा क्षेत्र को जीडीपी का 1.6% हिस्सा दिया है। 1962 के बाद देश की रक्षा क्षेत्र को मिला ये जीडीपी का सबसे कम हिस्सा है।

समिति ने कहा है कि जब देश दो मोर्चों पर घिरा है। दूसरी तरफ हिन्द महासागर में भी उसे दबदबा बनाए रखना है। ऐसी स्तिथि में इतना कम बजट रक्षा को देना आलोचनात्मक है। समिति ने सिफरिश करते हुए कहा है कि रक्षा क्षेत्र को वर्तमान ज़रूरतों और भविष्य में हथियारों के आधुनिकरण के लिए प्रयाप्त बजट दिया जाए।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मोदी सरकार आने के बाद देश के रक्षा क्षेत्र पर सरकार ने पूंजी व्यय प्रतिशत यानि सालाना खर्च कम कर दिया है। 2013-14 में तत्कालीन सरकार ने सालाना खर्च का 39% रक्षा क्षेत्र को दिया था। लेकिन अब 2017-18 और 2018-19 में इसे घटाकर क्रमश: 33% और 34% कर दिया गया है।

Source: boltaup.com

 

जन सुनवाई बैठकों में हिस्सा नहीं लेने वाले अधिकारियों की सीएल काटी जाए: दिल्ली सरकार

CL cut off by officials not participating in public hearings

दिल्ली सरकार ने सभी विभाग प्रमुखों से कहा है कि वे उन अधिकारियों का आधे दिन का आकस्मिक अवकाश (सीएल) काट लें जो कामकाजी दिनों में जन सुनवाई बैठकों में हिस्सा नहीं लेते और अपनी अनुपस्थिति का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल मई में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे कामकाजी दिनों में अपने कार्यालयों में सुबह 10 से 11 बजे तक मुलाकात का समय लिये बिना लोगों से मिलें। दिल्ली सरकार के प्रशासनिक विभाग ने विभाग प्रमुखों से भी कहा है कि वे जन सुनवाई के समय में अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

विभाग ने विभागाध्यक्षों को हाल में लिखे पत्र में कहा, ‘आपात स्थिति, फील्ड विजिट ड्यूटी की स्थिति में सुबह 10 से 11 बजे के बीच जन शिकायतों को सुनने के लिये एक लिंक अधिकारी उपस्थित रहना चाहिये।’ पत्र में यह भी कहा गया है कि जन सुनवाई के समय में अनुपस्थिति के बारे में अधिकारियों का स्पष्टीकरण विशेष वैध कारणों से समर्थित होना चाहिये।

पत्र में कहा गया है, ‘अगर दोषपूर्ण अधिकारियों से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो विभागाध्यक्ष आधे दिन का आकस्मिक अवकाश काट सकते हैं और उसकी जानकारी प्रशासनिक सुधार विभाग को दी जानी चाहिये ताकि सक्षम प्राधिकार उसे देख सकें।’

पिछले साल केजरीवाल ने सभी मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे कामकाजी दिनों में अपने कार्यालयों में बिना मुलाकात का समय लिये, लोगों से मिलें। इसके दायरे से फील्ड कर्मचारियों को बाहर रखा गया था।

 

Source: jantakareporter.com

प्रणब मुखर्जी ने की ‘उथल पुथल वाले समय’ के दौरान आर्थिक विकास और राजनीतिक स्थिरता लाने में मनमोहन सिंह के नेतृत्व की प्रशंसा

Pranab Mukherjee lauds Manmohan singhs leadership

मनमोहन सिंह की सरकार में अहम पदों की जिम्मेदारी संभालने वाले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पूर्व प्रधानमंत्री की नेतृत्व की जमकर सराहना की है। मुखर्जी ने देश में राजनीतिक स्थिरता लाने और ‘उथल पुथल वाले समय’ के दौरान देश के वित्त मामलों का सफलतापूर्वक नेतृत्व करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री सिंह की शनिवार (4 अगस्त) को प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि सिंह ने वित्त मंत्री के रूप में राजनीतिक भूमिका ऐसे समय संभाली थी जब देश धन और वित्त के संबंध में अपनी अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता खो चुका था।

मुखर्जी ने कहा, ‘डॉ. सिंह ने अपने कौशल और निपुणता के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाया। मुखर्जी ने सूचना का अधिकार कानून और खाद्य सुरक्षा कानून जैसे कई कानूनों का जिक्र किया जिन्हें सिंह के प्रधानमंत्री काल में लागू किया गया था।

उन्होंने कहा, ‘हम सबसे अनिश्चित समय में राजनीतिक स्थिरता प्रदान करने के लिए आपके आभारी रहेंगे।’ पूर्व राष्ट्रपति यहां एक पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे जहां सिंह को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

 

Source: jantakareporter.com

गडकरी ने बेहतरीन सवाल किया कि नौकरियां कहां हैं: राहुल गांधी

Good question Rahul Gandhi replies in tweet to Nitin Gadkari on where are the jobs

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के रोजगार एवं आरक्षण संबंधी हालिया बयान को लेकर कटाक्ष करते हुए कहा कि देश का हर नागरिक यही सवाल पूछ रहा है कि नौकरियां कहां हैं. राहुल गांधी ने गडकरी के बयान वाली एक खबर को ट्विटर पर शेयर करते हुए कहा, ‘बेहतरीन सवाल गडकरी जी. आज हर भारतीय यही सवाल पूछ रहा है कि नौकरियां कहां हैं.’

पिछले दिनों महाराष्ट्र के औरंगाबाद में गडकरी ने मराठा आंदोलन पर कहा था, ‘केवल आरक्षण से क्या होगा? आरक्षण कोई रोजगार देने की गारंटी नहीं है क्योंकि नौकरियां कम हो रही हैं. आरक्षण तो एक ‘सोच’ है जो चाहती है कि नीति निर्माता हर समुदाय के गरीबों पर विचार करें.’

वरिष्ठ बीजेपी नेता नितिन गडकरी ने कहा था, ‘मान लीजिए कि आरक्षण दे दिया जाता है. लेकिन नौकरियां नहीं हैं, क्योंकि बैंक में आईटी के कारण नौकरियां कम हुई हैं. सरकारी भर्ती रूकी हुई है. नौकरियां कहां हैं?’ गडकरी महाराष्ट्र में आरक्षण के लिए मराठा आंदोलन और अन्य समुदायों द्वारा इस तरह की मांग से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे थे.

 

Source: hindi.siasat.com

दुनिया के सबसे बड़े मंच से पीएम मोदी ने झूठ बोला, वो रह जगह यही करते हैं- अखिलेश यादव

Akhilesh Yadav Attacks on PM Modi

सपा अध्‍यक्ष और पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को लखनऊ में जनेश्‍वर मिश्र की जीवनी पर आधारित किताब का लाेकार्पण किया। इस दौरान उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा।

उन्‍होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री मोदी हर जगह झूठ बोलते हैं. दुनिया के सबसे बड़े प्‍लेटफार्म में उन्‍होंने बोले दिया कि 600 करोड़ लोगों ने हमें वोट दिया है’।

सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने क‍हा कि हमें बीजेपी के खेल में नहीं उलझना है बल्कि गोरखपुर, फूलपुर और कैराना की तरह ही उसे हराना है। हमसे जो घर छीना गया, वो हमारा घर नहीं सरकारी था। उन्‍होंने कहा कि हमने कोई अवैध निर्माण नहीं कराया।

हम सभी ने एनओसी का सुबूत दे दिया। लखनऊ विकास प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया था। उन्‍होंने कहा कि हमने जब घर खाली किया तो रात में कुछ लोग हथौड़ा लेकर हमारे घर में गए।

 

Source: hindi.siasat.com

शाह झूठ बोल रहे हैं, UPA सरकार ने 80 हजार बांग्लादेशियों को लौटाया: कांग्रेस

Congress says UPA deported more than 80000 bangladeshis NDA just 1822 in 4 years

कांग्रेस ने अवैध प्रवासियों को देश से बाहर भेजने के अमित शाह के दावे को झूठ का पुलिंदा बताया है और उनसे गलतबयानी के लिए माफी मांगने को कहा.

कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2005 से 2013 के दरम्यान यूपीए सरकार ने 82,728 बांग्लादेशियों को प्रत्यर्पित किया, जबकि मोदी सरकार के पिछले चार साल में मात्र 1,822 लोगों को लौटाया गया है. सुरजेवाला ने एनआरसी को भी कांग्रेस का ‘विचार’ बताया.

सुरजेवाला ने प्रत्यर्पण से जुड़े आंकड़े बताने के लिए राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से दिए गए जवाबों का हवाला दिया. साल 2008, 2016 और 2018 में भारत से कितने विदेशी वापस भेजे गए, इस बाबत राज्यसभा में तीन अलग-अलग प्रश्न पूछे गए थे.

उसके जवाब में बताया गया था कि 2005-2013 के बीच (यूपीए सरकार के दौरान) 88,792 बांग्लादेशी नागरिक वापस भेजे गए, जबकि 2014 से 2017 के बीच 1,822 बांग्लादेशियों को बैरंग लौटाया गया. इस दौरान एनडीए की सरकार थी.

Congress says UPA deported more than 80000 bangladeshis NDA just 1822 in 4 years
Congress says UPA deported more than 80000 bangladeshis NDA just 1822 in 4 years

‘मई 2016 तक तरुण गोगोई सरकार ने NRC के 80% काम पूरा कर लिया था’

इससे पहले शनिवार को दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में सुरजेवाला ने कहा, ‘मई 2016 तक असम में तरुण गोगोई की सरकार ने एनआरसी के 80 प्रतिशत काम पूरा कर लिया था. कांग्रेस असम करार से पूरी तरह जुड़ी हुई है लेकिन इस प्रक्रिया से 40 लाख लोग बाहर रह गए. इसमें हिन्दू बंगाली हैं, सेना के लोग हैं, दूसरे राज्यों के लोगों के नाम भी हैं.’

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस का यह भी मानना है कि हर भारतीय नागरिक को अपनी नागरिकता साबित करने का भरपूर मौका मिलना चाहिए.’ सुरजेवाला ने आरोप लगाया, ‘बीजेपी पूरी प्रक्रिया को सामाजिक तानेबाने को तोड़ने के लिए इस्तेमाल कर रही है. इसका कारण है कि मोदी सरकार अपनी नाकामियों से देश का ध्यान भटकाना चाहती है.

Source: hindi.firstpost.com

‘पाक जाओ’ कहने वाले किसी भी देश को नहीं जानते: शरद पवार

do not know any country that says go Pakistan said Sharad Pawar

NCP प्रमुख शरद पवार ने रविवार को कहा कि जो लोग मुस्लिमों से ‘पाकिस्तान जाओ’ कहते रहते हैं वे पाकिस्तान और भारत दोनों के बारे में अज्ञान हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार वरिष्ठ पत्रकार संजय अवाते द्वारा लिखित पुस्तक ‘वी द चेंज’ के विमोचन के मौके पर बोल रहे थे.

पवार ने कहा, ‘जब अल्पसंख्यक समुदाय का कोई व्यक्ति अपनी राय जाहिर करता है और अगर वह राय कुछ लोगों को पसंद नहीं आती है तो उस व्यक्ति से पाकिस्तान जाने के लिए कहा जाता है. उससे कहा जाता है कि उसे इस देश में रहने का कोई हक नहीं है.’

उन्होंने कहा, ‘जो कहते रहते हैं कि ‘पाकिस्तान जाओ’, ऐसे लोगों को पाकिस्तान या भारत के बारे में कोई जानकारी नहीं है.’

पवार ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को मराठा समुदाय की आरक्षण की मांग पर फैसला करने के साथ वर्तमान आरक्षण में छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए. एससी, एसटी और ओबीसी के आरक्षण को नहीं छुआ जाना चाहिए.’

उन्होंने कहा ‘दोनों देशों के लोगों के बीच कोई विवाद नहीं है, पाकिस्तान की सरकार और सेना भारत के विरुद्ध प्रोपगेंडा चलाती है. मैं बहुत सारे पाकिस्तानियों से मिला हूं. मैंने महसूस किया है कि वह भारतीयों से स्नेह करते हैं. ऐसे कई लोग हैं जिनके रिश्तेदार भारत में रहते हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच मतभेद के चलते उन्हें कभी भारत आने का मौका नहीं मिला.’

 

Source: hindi.firstpost.com

जंतर-मंतर से बजी चुनाव की रणभेरी, मोदी को मात देने के लिए कांग्रेस का ‘मास्टर प्लान’ तैयार

To defeat Narendra Modi in 2019 lok sabha elections congress is ready with a master plan

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए 4 अगस्त का दिन खासा व्यस्त रहा. दिन में राहुल ने जहां कांग्रेस के कोर सदस्यों यानी कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्लूसी) को संबोधित किया, वहीं शनिवार शाम को वो जंतर-मंतर जा पहुंचे. यहां उन्होंने विपक्ष के नेताओं के साथ मंच साझा किया और मोमबत्ती जलाकर विपक्षी एकता और एकजुटता को प्रतीकात्मक रूप से रौशन किया.

संकेत स्पष्ट थे- 2019 के आम चुनाव के लिए रणभेरी बज चुकी है. कांग्रेस ने बीजेपी के विजयी रथ को रोकने के लिए कमर कस ली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टक्कर देने के लिए कांग्रेस खास रणनीति के साथ मैदान में उतरने के लिए तैयार है. विपक्षी एकता के आधार पर कांग्रेस देश में अपने लिए माहौल बनाने में जुट गई है.

2019 का आम चुनाव कांग्रेस गठबंधन के फॉर्मूले के तहत लड़ेगी

कांग्रेस ने अपनी कार्य समिति की बैठक में स्पष्ट कर दिया कि पार्टी गठबंधन को लेकर बेहद गंभीर है. लिहाजा आगामी आम चुनाव में कांग्रेस गठबंधन के फॉर्मूले के तहत ही मैदान में उतरेगी. ऐसे में विपक्षी गठबंधन को सही रूप और अटूट बल देने के लिए कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर काम करना शुरू कर दिया है.

कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर पदभार संभालने के तुरंत बाद राहुल गांधी ने 22 दिसंबर, 2017 को अपनी पहली सीडब्लूसी बैठक की थी. हालांकि तब सीडब्लूसी का पुनर्गठन नहीं हुआ था. उस बैठक की अध्यक्षता करते हुए राहुल ने पार्टी संगठन के पुनर्गठन पर जोर दिया था. राहुल ने पार्टी की राज्य इकाइयों (प्रदेश कांग्रेस समितियों) में सुधार, नई टीमों के गठन, पार्टी में नए चेहरों की एंट्री, पार्टी कैडर के बीच अनुशासन और हर 2 महीने में एक बार सीडब्लूसी की बैठक आयोजित करने की वकालत की थी. राहुल का मानना था कि पार्टी की रणनीति और संगठन में बदलाव करके ही प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी को प्रभावी ढंग से टक्कर दी जा सकती है.

To defeat Narendra Modi in 2019 lok sabha elections congress is ready with a master plan
To defeat Narendra Modi in 2019 lok sabha elections congress is ready with a master plan

कांग्रेस की नवगठित वर्किंग कमेटी बैठक में मोदी सरकार को मात देने के लिए गठबंधन पर जोर दिया गया है (फोटो: पीटीआई)
22 दिसंबर, 2017 को सीडब्लूसी की अपनी पहली बैठक में राहुल ने कहा था कि, ‘मैं चाहता हूं, कांग्रेस कार्य समिति की बैठक को संस्थागत बनाया जाए. मेरे ख्याल में सीडब्लूसी की बैठक हर 2 महीने में एक बार होना चाहिए, जिसकी तारीख हमें तय कर लेना चाहिए. हर 2 महीने में स्वभाविक रूप से, कार्यकारी समिति के सदस्यों को मुलाकात करना चाहिए, ताकि हमें पता चल सके कि आप क्या कहना चाहते हैं और देश क्या महसूस कर रहा है.’

लेकिन इस साल के आखिर में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनावों और 2019 के लोकसभा चुनाव की गंभीरता के मद्देनजर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को एक बार फिर से दोहराया कि सीडब्लूसी के सदस्यों को नियमित आधार पर मिलना चाहिए. उन्होंने सीडब्लूसी की बैठकों के अतीत के रूप से निकलने पर जोर दिया. राहुल ने कहा कि, सीडब्लूसी की बैठक हर एक या डेढ़ महीने में जरूर हो. बैठक में देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए. उनसे पार्टी को जरूरी राजनीतिक फैसले लेने में मदद मिलेगी. बाद में उन चुनिंदा मुद्दों और फैसलों को पार्टी आगे ले जाने का काम करेगी.

सीडब्लूसी की हुई दूसरी बैठक का मुख्य एजेंडा गठबंधन था

शनिवार को हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में वैसे तो राफेल डील में कथित भ्रष्टाचार, बैंकिंग घोटाला और देश में बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. लेकिन बैठक का मुख्य एजेंडा गठबंधन था. बैठक के दौरान खास तौर पर इस बात पर मंथन हुआ कि, बीजेपी विरोधी और हम ख्याल (समान विचारधारा वाले) राजनीतिक दलों के साथ मजबूत और विश्वसनीय गठजोड़ कैसे किया जाए.

शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी के एक शीर्ष सूत्र ने जोर देकर कहा था कि, ‘कांग्रेस अगर गठबंधन का गेम सही तरीके से खेल जाए, तो नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने का दूसरा मौका मिलना मुश्किल हो जाएगा.’

कांग्रेस के सूत्रों ने यह भी कहा था कि, बीजेपी-आरएसएस से मुकाबला करने के लिए पार्टी ने खास रणनीति बनाई है. जिसके तहत कांग्रेस सभी विपक्षी दलों को साझा मंच प्रदान करेगी. इसके अलावा पार्टी बीजेपी-आरएसएस के गठजोड़ के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की भूमिका भी निभाएगी.

To defeat Narendra Modi in 2019 lok sabha elections congress is ready with a master plan

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप कांड के विरोध में जंतर-मंतर पर विपक्षी पार्टियों के नेताओं का जमावड़ा लगा
बीजेपी के विजय अभियान को रोकने की कांग्रेस की रणनीति का खुलासा राहुल ने शनिवार शाम को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कर दिया. राहुल वहां राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव के धरने में शामिल होने पहुंचे थे. तेजस्वी का यह धरना बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप कांड के विरोध में था. तेजस्वी के इस धरने में राहुल के अलावा सीपीआई और सीपीएम समेत विपक्षी दलों के कई नेताओं ने शिरकत की. यानी मुजफ्फरपुर कांड के बहाने विपक्ष ने जंतर-मंतर पर एकजुटता दिखाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी.

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, ‘बिहार में आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव के साथ कांग्रेस का प्राकृतिक गठबंधन (नेचुरल अलायंस) है. जंतर-मंतर पर तेजस्वी यादव समेत अन्य विपक्षी नेताओं के साथ खड़े होकर कांग्रेस ने अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी है. गठबंधन के सभी सहयोगी एक साथ मिलकर एनडीए सरकार के खिलाफ मुकाबले को तैयार हैं.’

विपक्षी गठबंधन किसके नेतृत्व में मैदान में उतरेगा इस पर मतभेद बरकरार

बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों ने ताल जरूर ठोक दी है, लेकिन विपक्षी गठबंधन किसके नेतृत्व में मैदान में उतरेगा इस मुद्दे पर मतभेद बना हुआ है. लिहाजा एक मजबूत और विशाल विपक्षी गठबंधन को मूर्त रूप देने के लिए कांग्रेस ने पेशकदमी शुरू कर दी है. कांग्रेस अब विपक्षी गठबंधन के नेतृत्व के मुद्दे जैसे विवाद के संभावित कारकों पर ध्यान दे रही है. ताकि गठबंधन को वैचारिक दरारों से बचाया जा सके और उसे लेकर सही दिशा में आगे बढ़ा जा सके.

तकरीबन एक हफ्ते पहले कांग्रेस पार्टी ने आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए मायावती या ममता बनर्जी या किसी अन्य उम्मीदवार का समर्थन करने की इच्छा व्यक्त की थी. कांग्रेस का कहना था कि, पार्टी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर ऐसे किसी भी उम्मीदवार का साथ देने को तैयार है, जिसकी छवि स्वच्छ है और जो आरएसएस या बीजेपी द्वारा समर्थित नहीं है.

To defeat Narendra Modi in 2019 lok sabha elections congress is ready with a master plan

नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी को हराने के लिए कांग्रेस ने रणनीति बनाकर काम करना शुरू कर दिया है
हालांकि इससे पहले कांग्रेस ने घोषणा की थी कि, पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे. लेकिन फिलहाल मौके की नजाकत भांपते हुए कांग्रेस ने नया राग अलापना शुरू कर दिया है. ताकि नेतृत्व के मसले पर विपक्षी गठबंधन पर कोई आंच न आ जाए.

ऐसा लगता है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अब सियासी तौर पर चौकन्ने हो गए हैं. वह अब अतीत की तरह कोई मौका खोना नहीं चाहते. क्योंकि तब लगातार अवसर गंवाने की वजह से राहुल की पहचान एक ‘गैर-हाजिर नेता’ के रूप में स्थापित हो गई थी.

पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, दो हफ्तों के भीतर हुईं सीडब्लूसी की 2 बैठकों में कई अहम नीतियां बनी हैं. शनिवार को हुई बैठक में राहुल ने रणनीतिक मोर्चे के लिए एक रोडमैप पेश किया. जिसके जरिए कांग्रेस नेताओं को यह समझाया जाएगा कि उन्हें जनता के बीच किन मुद्दों के साथ जाना है. राहुल के रणनीतिक रोडमैप में इस बात का भी फार्मूला है कि विपक्षी गठबंधन के बाकी दलों के साथ कांग्रेस को कैसी नीति अपनानी है.

‘मोदी सरकार के खिलाफ फिजा बनाने की नीति निर्धारित की गई’

सीडब्लूसी की बैठक में मौजूद एक सदस्य ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया, ‘बैठक में यह फैसला लिया गया है कि, भ्रष्टाचार के मुद्दों जैसे- राफेल डील और बैंकिंग घोटाले लेकर आने वाले दिनों में मोदी सरकार के खिलाफ फिजा कैसे बनाई जाए. इनके अलावा युवाओं की बेरोजगारी, कृषि संकट, मॉब लिन्चिंग की बढ़ती घटनाओं, दलितों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरने की नीति निर्धारित की गई.’

कांग्रेस पार्टी गिरती अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं जैसे मुद्दों पर संसद के अंदर और बाहर बड़े पैमाने पर आंदोलन करना चाहती है. लिहाजा सरकार विरोधी आंदोलन खड़ा करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता बाकायदा एक खाका तैयार करेंगे. आंदोलन के इस ब्लूप्रिंट को बनाने में पार्टी के महासचिव, राज्य और जिला इकाइयों के सदस्य वरिष्ठ नेताओं की मदद करेंगे.

To defeat Narendra Modi in 2019 lok sabha elections congress is ready with a master plan

2019 में बीजेपी और एनडीए को हराने के लिए विपक्षी दल गठबंधन की एकता की बात कर रहे हैं
कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा है कि, ‘कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चाहते हैं कि, हमारी पार्टी के कार्यकर्ता और नेता संसद के बाहर सभी स्तरों पर इन मुद्दों को उठाएं, जबकि हमारे सांसद उन मुद्दों पर संसद में अपनी आवाज बुलंद करेंगे. हम सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर कर देंगे.’

Source: hindi.firstpost.com

मोदी सरकार से नहीं संभल रही अर्थव्यवस्था, चार महीने में विदेशी मुद्रा भंडार को एक लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान

Foreign exchange reserves lose one lakh crores in 4 month

मोदी सरकार एक तरह देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने का दावा कर रही है। वहीं दूसरी तरफ देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लाखों करोड़ रुपयें की कमी आई है।

विदेशी मुद्रा भंडार मुद्रा संकट की घड़ी में काम आता है। किसी भी आर्थिक संकट या युद्ध की स्तिथि में सरकार इसी पर आश्रित होती है। इसके बूते देशों की साख तय होती है, और अंतरराष्ट्रीय कर्ज की अदायगी भी होती है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में विदेशी मुद्रा भंडार में पैसों की भारी कमी आई है। पिछले चार महीनों में विदेशी मुद्रा भंडार 424 अरब डॉलर से घटकर 401 अरब डॉलर पर आ गया है। मतलब केवल चार महीनों में इसमें एक लाख 38 हज़ार 400 करोड़ रुपियें की कमी आई है।

वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने और रुपये के लगातार कमज़ोर होने को इसके बड़े कारण माना जा रहा है। दरअसल, कच्चे तेल के दाम बढ़ने के कारण उसकी कीमत तो ज्यादा चुकानी पड़ ही रही है वहीं दूसरी तरफ रुपये के कमज़ोर होने से कीमत में और भी बढ़ोतरी हो रही है।

साथ ही जिस तरह देश का व्यापार घाटा बढ़ रहा है वो भी इसका बड़ा कारण है। निर्यात और आयात के बीच के अंतर को व्यापार घाटा कहा जाता है। जो देश निर्यात के मुकाबले आयात ज्यादा करता है उसका व्यापार घाटा नुकसान में रहता है।

भारत के साथ भी यही स्तिथि है। और ये पिछले कुछ समय में और भी भयावह हुई है। इसी साल जून महीने का व्यापार घाटा पिछले पांच सालों में सबसे ज़्यादा रहा है।

मोदी सरकार आई तो थी ‘मेक इन इंडिया’ के नाम पर देश के उत्पादन को बढ़ाने जिस से देश का निर्यात भी बढ़ सके। लेकिन सरकार द्वारा लागू की गई नोटबंदी और जीएसटी ने उत्पादन क्षेत्र को भारी नुकसान पहुँचाया है। इस कारण निर्यात में बढ़ोतरी नहीं हो रही है और आयात बढ़ता जा रहा है।

 

Source: boltaup.com

बिना मर्जी मोबाइल में UIDIA नंबर हुआ सेव, यूजर बोले- सब संभव है लेकिन EVM से छेड़छाड़ संभव नहीं है !

People suspected on EVM is UIDAI number gets automatically saved in smartphones

भारत के लाखों स्मार्टफोन्स यूजर्स के फोन में आज सुबह UIDAI यूनिक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया का टोल फ्री हेल्पलाइन का नम्बर ऑटोमेटिक रूप से सेव हो गया ( आप भी अपने मोबाइल चेक कीजिए मेरे मोबाइल पर यह नम्बर दिख रहा है )

इस पर हंगामा मचते हुए देख अथॉरिटी को सामने आना पड़ा उसने कहा कि यह नंबर (1800-300-1947) गलत और आउटडेटेड है। स्मार्टफोन्स में इसे सेव कराने के लिए उसने किसी फोन निर्माता या मोबाइल ऑपरेटर कंपनी की सेवा नहीं ली।

लेकिन यदि ऐसा लाखों लोगों के साथ हो रहा है तो ऐसा हो क्यो रहा है इसका कोई सही जवाब अब तक नहीं मिल पाया है ?

इसी मुद्दे पर फ्रेंच सिक्योरिटी एक्सपर्ट एलियट एल्डरसन ने यूआईडीएआई से ट्विटर पर पूछा , ”कई लोग जो अलग-अलग टेलीकॉम ऑपरेटर का सिम इस्तेमाल करते हैं. इसमें कुछ लोगों के पास आधार है और कुछ के पास नहीं. उनके मोबाइल में यूआईडीएआई के नाम से एक नंबर सेव बता रहा है. कैसे?”

इस बात से जुड़े हुए खतरे साइबर एक्सपर्ट बता रहे है उनका मानना है कि यदि लोगों की मोबाइल फोन बुक तक अगर कोई पहुंच सकता है तो इससे लोगों की प्रोफाइलिंग भी की जा सकती है और उन्हें ट्रैक किया जा सकता है। सिर्फ नंबर सेव होने से ही कोई भी कंपनी या सरकार लोगों की लोकेशन, उनकी एक्टिविटी, पसंद-नापसंद, सामाजिक स्तर, विचारधारा, सेक्शुअल ओरिएंटेशन, बीमारी, दोस्त-दुश्मन, जाति, धर्म जैसी व्यक्तिगत और सेंसेटिव जानकारी हासिल कर सकती है.

वैसे इस दुनिया मे सब कुछ सम्भव है बस ईवीएम में छेड़छाड़ नहीं की जा सकती.

(Girish Malviya की फेसबुक वॉल से साभार)

 

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एनआरसी: मोदी सरकार को बताना चाहिए कि 40 लाख लोगों के साथ वह क्या करने वाली है?

असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को लेकर भाजपा पूरे देश में अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने को तैयार है. लेकिन सही मायने में केंद्र सरकार को देश की जनता एवं संसद को यह बताना चाहिए कि उसकी कार्ययोजना इस सूची से बाहर किए गए 40 लाख लोगों को लेकर क्या रहेगी.

असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की सूची आने के बाद से देश की राजनीति परवान पर है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने संसद में कहा, ‘कांग्रेस की सरकार में असम समझौता लागू करने की हिम्मत नहीं थी और अब उसे हम लागू करने जा रहे हैं.’

लेकिन अमित शाह यह भूल गए कि 1985 के बाद से असम एवं केंद्र में विभिन्न दलों की सरकारों ने शासन किया तो इस लिहाज से राज्य में असम गण परिषद के साथ ही उनकी सरकार जो 1996 से 2001 तक रही और केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार भी कायरों की श्रेणी में खड़ी हो गई.

असम देश का इकलौता ऐसा राज्य है जिसमें 1951 से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर बनाने की प्रक्रिया है. 1947 में जब देश आजाद हुआ तभी से असम में बांग्लादेश के नागरिक और असम से हमारे देश के नागरिक बांग्लादेश में हजारों की संख्या में आवाजाही करते थे.

इस आवाजाही को देखते हुए 8 अप्रैल 1950 को दिल्ली में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान में एक समझौता हुआ. यह समझौता उस वक्त की एक बड़ी मांग थी क्योंकि बंटवारे से प्रभावित इलाकों के नागरिक अपने पुश्तैनी घरों को छोड़ कर वतन बदल रहे थे.

दोनों तरफ के विस्थापित अल्पसंख्यकों को अपनी संपत्ति आदि के बेचने, अपने परिजनों से मिलने, लूटी हुई संपत्ति आदि को वापस प्राप्त करने के अधिकार मिलने के साथ ही दोनों देश दोबारा किसी युद्ध में ना उलझें इस मकसद से यह समझौता किया गया.

1979 से 1985 के बीच असम गण परिषद (1985 के समझौते के बाद बनी) व अन्य संस्थाओं ने असम में एक आंदोलन, अवैध तरीके से रह रहे लोगों की पहचान हेतु और उन्हें असम से वापस भेजने के लिए आंदोलन चलाया.

1985 में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सूझबूझ का परिचय देते हुए असम समझौता किया. इस समझौते के अनुसार असम में रह रहे नागरिकों को भारत का नागरिक माने जाने की दो शर्तें थीं या तो जिनके पूर्वजों के नाम 1951 राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में चढ़े हुए थे या फिर 24 मार्च 1971 की दिनांक तक या उससे पहले नागरिकों के पास अपने परिवार के असम में होने के सबूत मौजूद हो.

2005 में मनमोहन सरकार ने असम गण परिषद के साथ मिलकर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को दुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन मामला अदालत पहुंचा और रजिस्टर के नवीनीकरण हेतु अदालत ने संयोजक नियुक्त किया. नवीनीकृत रजिस्टर की सूची छापने की अंतिम तिथि 30 जुलाई 2018 थी.

समय अवधि समाप्त होने के पश्चात रजिस्टर को छापा गया जिसके तहत तीन करोड़ उनतीस लाख प्रार्थना पत्रों का सत्यापन करने के पश्चात दो करोड़ पिचासी लाख प्रार्थना पत्रों को वैध पाया गया. इस तरह से चालीस लाख असम में रहने वाले लोगों का भविष्य अधर में लटका हुआ है.

रजिस्टर की संख्या आने के पश्चात देश के गृहमंत्री ने संसद में बयान दिया और कहा, ‘मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि सरकार ने इसमें कुछ नहीं किया जो कुछ भी काम चल रहा है सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रहा है जो लिस्ट आई है वह भी अंतिम नहीं है और सभी को 28 अगस्त 2018 के बाद अपनी बात कहने का मौका मिलेगा इसके लिए दो-तीन महीने का वक्त दिया जाएगा और कब तक मामलों का निपटान होगा यह भी सुप्रीम कोर्ट को ही तय करना है. सभी को विदेशी ट्रिब्यूनल में जाने के रास्ते भी खुले है और इस पर किसी तरह का डर फैलाने की जरूरत नहीं है. किसी के साथ भी जबरदस्ती नहीं की जाएगी.’

केंद्र सरकार डर न फैलाने की बात कर रही है तो वहीं, दूसरी तरफ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भयभीत करने वाली भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह एक सोची समझी रणनीति है जो देश को 2019 तक सांप्रदायिक आधार पर बांट सकती है.

दो करोड़ पिचासी लाख नागरिकों की सूची प्रकाशित करने में बरसों लगे तो क्या यह संभव होगा कि चालीस लाख (अवैध नागरिक जैसा कि बहस चल रही है) जो कि कुल तीन करोड़ उनतीस लाख नागरिकों का 12% है, इन सभी की नागरिकता के दावे का निस्तारण दो से तीन महीने में पूरा हो जाएगा.

Assam NRC Modi government BJP Congress
Assam NRC Modi government BJP Congress

क्या सरकार इन सभी चालीस लाख नागरिकों को और समय प्रदान करेगी या फिर सर्वोच्च अदालत में ज्यादा समय दिए जाने की प्रार्थना करेगी.

हम देख रहे हैं कि रजिस्टर में ढेरों गलतियां हैं. उदाहरण के तौर पर पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय फखरुद्दीन अली अहमद के परिवार के सदस्यों का नाम इस लिस्ट में नहीं है.

इसके अलावा भारतीय सेना में रहकर देश की सेवा करने वाले जांबाज अजमल हक का नाम भी नहीं है जबकि उनके परिवार के तीन परिजनों का नाम रजिस्टर में शामिल है. भाजपा के विधायक अनंत कुमार मालो का नाम रजिस्टर में शामिल नहीं है.

यह तो दीपक तले अंधेरा वाली बात है कि स्वयं की सरकार होने के बाद भी भाजपा के नेताओं का नाम रजिस्टर से गायब है. सिलचर से 35 किलोमीटर दूर भुबन खाल गांव की शिप्रा अपने ससुर को लेकर चिंतित है. उसी गांव की अर्चना दास अपने पति रोंगेश दास जिनके वारंट जारी कर दिये गए है, लेकर परेशान है.

इसके अलावा अन्ना बाला रे, रेबाती दास के साथ मौलाना अमीरूदीन जो असम की प्रथम विधानसभा के उपसभापति रहे उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी सूची से गायब है.

प्रश्न यह उठता है कि देश के बारह सौ करोड़ रुपये खर्च करने के पश्चात भी सूची आधी अधूरी क्यों है? क्या केंद्र व राज्य सरकार इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई करेगी? शायद कोई कार्रवाई नहीं होगी क्योंकि इस खेल में सत्ता को हिंदू-मुसलमान बंटवारा दिखता है जिसके दम पर भाजपा 2019 में दोबारा केंद्र में सत्ता प्राप्त करना चाहती है.

चालीस लाख लोगों की जांच के पश्चात जो भी अवैध नागरिक बचेंगे सरकार के पास उन्हें वापस बांग्लादेश भेजने हेतु क्या कोई कार्य योजना तैयार है. जिस तरह से बांग्लादेश के सूचना प्रसारण मंत्री हसन उल हक इनु ने कहा, ‘यह भारत का आंतरिक मामला है. इसमें बांग्लादेश का कोई लेना-देना नहीं है. भारत में कोई भी बांग्लादेशी घुसपैठिया नहीं है जो लोग वहां रह रहे हैं काफी लंबे समय से रह रहे हैं और यह पूरा मामला भारत की सरकार को सुलझाना है. भारत में वर्षों से जातीय रूप से यह समस्या है.’

बांग्लादेश अवैध घुसपैठियों को लेने से मना कर रहा है और भाजपा असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को लेकर पूरे देश में अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने को तैयार है. केंद्र सरकार को निश्चित ही देश की जनता एवं संसद को यह बताना चाहिए कि उसकी कार्ययोजना इन अवैध ठहराए गए नागरिकों को लेकर क्या रहेगी?

या फिर यह मुद्दा भी भाजपा के लिए चुनावी जुमला होगा जिस तरह से 2017 में कैराना उत्तर प्रदेश से हिंदुओं के पलायन की खबरें समाचार जगत में छाई रही, परंतु आज तक एक भी हिंदू परिवार को भाजपा कैराना वापस नहीं भेज पाई. क्योंकि यह पलायन सच्चाई में सांप्रदायिक आधार पर नहीं था.

बाद में उन्हीं की पार्टी के सांसद स्वर्गीय हुकुम सिंह ने वह सूची वापस भी ली और गलत भी मानी. भाजपा ने कश्मीर से पंडितों के पलायन पर भी पूरे देश से वोट बटोरे लेकिन पिछले चार सालों में एक भी कश्मीरी पंडित को कश्मीर वापस नहीं भेज पाई.

यदि 5 साल के आंकड़े देखेंगे तो पता चलता है कि 2013 में केंद्र में कांग्रेस की सरकार ने 5,234 घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजा. केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद 2014 में (26 मई से पहले कांग्रेस सरकार थी) 989, 2016 में 308 और 2017 में 51 बांग्लादेशियों को वापस भेजा गया.

यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि केंद्र में भाजपा के शासन काल में बांग्लादेश घुसपैठियों को वापस भेजने की संख्या लगातार घट रही है. टेलीविजन पर होने वाली विभिन्न बहस कार्यक्रमों में भाजपा के द्वारा पूरे देश में प्रसारित किया जा रहा है कि असम में हिंदुओं की संख्या मुसलमानों से कम हो गई है और मुसलमान 77 प्रतिशत हो गई है जबकि 2011 की जनगणना के अनुसार असल में हिंदू 61.47 प्रतिशत, मुस्लिम 34.22 प्रतिशत और ईसाई 3.74 प्रतिशत रहते हैं.

असम मे 1971 से 1991 के बीच में हिंदुओं की जनसंख्या में बढ़ोतरी 41.89 प्रतिशत की दर से हुई जबकि मुसलमानों की जनसंख्या की बढ़ोतरी 77.24 प्रतिशत की दर से हुई. इसी अंतराल में हिंदुओं में दलितों की जनसंख्या में बढ़ोतरी 81.84 प्रतिशत की दर से और अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या वृद्धि दर 78.9 प्रतिशत रहीं.

Assam NRC Modi government BJP Congress
Assam NRC Modi government BJP Congress

विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने संसद से लेकर सड़क तक केंद्र में कांग्रेस पार्टी की सरकार का ‘भारत-बांग्लादेश जमीन समझौते’ को लेकर विरोध किया परंतु केंद्र में सत्ता प्राप्त करने के पश्चात समझौते को अक्षरश: लागू किया.

देश के प्रत्येक राजनीतिक दल को यह ध्यान रखना होगा कि जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व भारत के बहुत ही संवेदनशील राज्य हैं. हालांकि भाजपा जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व भारत के राज्यों के हालात को लेकर उत्तर एवं पश्चिमी भारत में सांप्रदायिक उन्माद फैलाना चाहती है.

वर्तमान में देशवासियों को भी यह समझना होगा कि यदि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बेहतर मिले तो उन्हें वर्तमान में क्षेत्रीय, जातीय और धार्मिक उन्माद से बचना होगा. यह उन्माद किसी भी देश की शांति एवं विकास को बर्बाद कर सकता है.

भाजपा देश के मूल मुद्दों से ध्यान भटका कर सांप्रदायिकता की भट्टी को जलाकर अपनी रोटियां सेकना चाहती है. असम में 1950 से लेकर 1960 में कांग्रेस सरकारों ने लाखों की संख्या में मुस्लिम बांग्लादेशियों को वापस भेजा.

इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े करने की राजनीतिक दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाई. इंदिरा ने सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बांग्लादेशी नागरिकों के पलायन के मुद्दे को बेहतर तरीके से उठाया और पाकिस्तान के साथ एक निर्णायक युद्ध की भूमिका रचने का काम किया.

पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान में बांग्लादेश) के नागरिक भारी संख्या में पश्चिमी पाकिस्तान के अत्याचारों से त्रस्त होकर 1970 में 1971 में हजारों की संख्या में बांग्लादेश से भारत आए.

जिस तरह से नोटबंदी एवं जीएसटी कानून को गलत तरीके से लागू करने की वजह से देशवासियों को परेशानी के दौर से गुजरना पड़ा या गुजर रहे हैं ठीक उसी तरह से यह असम का रजिस्टर भी देशवासियों के लिए एक बड़ी परेशानी बन सकता है.

भाजपा की विभाजनकारी नीतियों की वजह से पहले ही राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं वैश्विक स्तर पर देश को पहले ही बहुत नुकसान हो चुका है. इस समय असम में शांति बनाए रखने हेतु प्रशासन एवं शासन को पूरी सजगता से कार्य करना होगा. साथ ही विभाजनकारी एवं शरारती तत्वों की पहचान करके उन पर सख्त कार्रवाई करनी होगी.

(लेखक कांग्रेस प्रवक्ता हैं.)

हज कमिटी ऑफ़ इंडिया को नहीं मिलती सरकार से एक रूपये की भी मदद

Haj committee of India does not get a helping hand from the government

हज को लेकर भारत की राजनीति में हमेशा से ही बवाल मचता आया है। पहले हज सब्सिडी को लेकर मुसलमानों को निशाना बनाया जाता रहा। अब हज कमिटी ऑफ़ इंडिया को मिलने वाली सहूलतों को लेकर सवाल उठाए जा रहे है। ऐसे में स्पष्ट कर देना जरूरी है कि भारत सरकार की और से हज कमिटी ऑफ़ इंडिया को किसी भी प्रकार का कोई फ़ंड नहीं मिलता है।

हज कमिटी ऑफ़ इंडिया के सीईओ डॉ. मक़सूद अहमद खान के अनुसार, हज कमिटी को कोई पांच पैसा भी नहीं देता है। दफ़्तर में काम करने वाले हर अधिकारी व स्टाफ़ की तन्ख्वाह हज कमिटी ऑफ़ इंडिया ही देती है। इतना ही नहीं  मंत्री व सरकारी अधिकारियों के तमाम मीटिंग्स के खर्चे को भी हज कमिटी ऑफ़ इंडिया खुद ही वहन करती है।

हज कमिटी ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन चौधरी महबूब अली क़ैसर बताते है कि हज कमिटी ऑफ़ इंडिया सभी खर्च हाजियों के पैसे से ही पूरा करती है। उन्होने सवाल उठाते हुए कहा कि कम से कम हाजियों की जो परेशानियां हैं, उस तरफ़ सरकार या उसके मंत्री को ध्यान ज़रूर देना चाहिए।

हज कमेटी मुंबई में कमिटी अपना हज हाऊस का हॉल किराये पर लगाती है। शादी के लिए इस हॉल का किराया 50-60 हज़ार रूपये लिया जाता है, तो वहीं अन्य धार्मिक व सामाजिक प्रोग्रामों के लिए इस रक़म में डिस्काउंट किया जाता है.। यही नहीं, बैंक में रखी रक़म से हर साल करोड़ों की कमाई होती है।

Haj committee of India does not get a helping hand from the government
Haj committee of India does not get a helping hand from the government

हज हाउस का मालिक कौन ? 

मुंबई का हज हाऊस हज कमिटी ऑफ़ इंडिया की मिल्कियत है। वहीं हज कमिटी ऑफ़ इंडिया एक सरकारी संस्था है। बावजूद ये इमारतें सरकारी फंड से नहीं, बल्कि मुसलमानों की अपनी रक़म से वजूद में आई है। और इनका खर्च भी मुसलमान अपने पैसे से उठाते है। ज़्यादातर राज्यों में हज हाऊस, हज कमिटी ऑफ़ इंडिया के फंड से ही बने हैं। यहाँ तक कि ग़ाज़ियाबाद के हज हाऊस की बिल्डिंग के निर्माण में हज कमिटी ऑफ़ इंडिया ने अच्छी-ख़ासी रक़म की मदद की थी।

अफ़रोज़ आलम साहिल के इनपुट के साथ

ABP न्यूज़ मामला पहुंचा सदन, कांग्रेस सांसद बोले- आलोचना करने वाले पत्रकारों को PM मोदी चैनल से निकलवा रहे हैं

ABP News sacking issues kharge alleges arm twisting by govt

पत्रकारों के निष्कासन पर संसद में बहस शुरू हो गई। कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले पर पीएम मोदी को आड़े हाथों लिया और कहा पीएम मोदी की आलोचना करने की वजह से चैनल पर दबाव डालकर एडिटर और एंकरो को हटाया जा रहा है।

इस मामले पर सूचना और प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने जवाब दिया की चैनल ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उनकी टीआरपी लगातार गिर रही थी।

संसद में कांग्रेस सांसद खड़गे ने कहा कि सेंट्रल हॉल में राज्यसभा के एक सांसद ने मीडिया को चुनौती देते हुए कहा तह कि हमारे हिसाब से नहीं चले तो चैनल बंद कर दिया जायेगा।

उन्होंने कहा कि ये प्रेस की आज़ादी पर सरकार का सीधा हमला है क्योंकि सरकार चैनल को बंद करना चाहती है मीडिया को दबाना चाहती है। इसपर केंद्रीय मंत्री राठौर ने जवाब देता हुआ कहा कि जिस चैनल की बात सदन में हो रही है वो पहले गलत खबर दिखाई गई इसके बावजूद सरकार ने किसी भी तरह की दखलंदाजी नहीं की। उन पत्रकारों को गिरती टीआरपी के कारण निकाला गया है।

गौरतलब है कि एबीपी न्यूज़ नेटवर्क से मिलिंद खांडेकर के मैनेजिंग एडिटर का पद छोड़ने के बाद अब सोशल मीडिया के ज़रिए यह ख़बर आ रही है कि प्राइम टाइम एंकर एवं वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी ने चैनल से इस्तीफा दे दिया है।

बाजपेयी के इस्तीफे के बाद अब एबीपी न्यूज़ पर रात 9 बजे प्रसारित होने वाले ‘मास्टर स्ट्रोक’ शो को बंद कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि मास्टरस्ट्रोक आज (गुरुवार) रात से नहीं आएगा। दरअसल, हाल ही में वाजपेयी के शो ‘मास्टरस्ट्रोक’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक प्रोग्राम में बोले गए झूठ का ख़ुलासा किया था।

मास्टरस्ट्रोक में पिछले महीने कथित तौर पर ये साबित किया गया था कि किस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में एक महिला से ग़लत तरीके से सरकार की झूठी उपलब्धियों की तारीफ़ करवाई गयी थी।

 

Source: boltaup.com

AAP नेता ने पुण्य प्रसून वाजपेयी की ईमानदारी को किया सलाम, कहा- ‘गोदी पत्रकारों’ का नंबर भी आएगा

Sanjay Singh commented on ABP News row

एबीपी न्यूज़ नेटवर्क से मिलिंद खांडेकर के मैनेजिंग एडिटर का पद छोड़ने के बाद अब प्राइम टाइम एंकर एवं वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी ने चैनल से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही चैनल ने अपने एंकर अभिसार शर्मा को भी 15 दिनों के ऑफ़ एयर कर दिया है। माना जा रहा है कि इन पत्रकारों को मोदी सरकार का विरोध करने की सज़ा मिली है।

आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह ने इस मामले को लेकर मोदी सरकार का गुणगान करने वाले पत्रकारों पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “भाजपाईयों के पक्ष में दिन रात चिल्लाने वाले मोदी के गोदी मीडिया वालों के लिये ख़तरे की घंटी है न। सबका आयेगा किसी का आज किसी का कल। पुण्य प्रसून वाजपेयी, अभिसार शर्मा और मिलिंद खांडेकर को सलाम”।

दरअसल, हाल ही में वाजपेयी के शो ‘मास्टरस्ट्रोक’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक प्रोग्राम में बोले गए झूठ का ख़ुलासा किया था। मास्टरस्ट्रोक में पिछले महीने कथित तौर पर ये साबित किया गया था कि किस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में एक महिला से ग़लत तरीके से सरकार की झूठी उपलब्धियों की तारीफ़ करवाई गई।

एबीपी न्यूज़ की इस रिपोर्ट कर केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने सख्त नाराज़गी ज़ाहिर की थी। जिसके बाद मास्टरस्ट्रोक के प्रसारण में बाधा की खबरें आने लगी थीं। कई पत्रकारों का मानना था कि ये बाधाएं सरकार द्वारा जानबूझकर उत्पन्न की जा रही हैं।

ग़ौरतलब है कि पुण्य प्रसून वाजपेयीज से पहले चैनल के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि अभी तक उनके इस्तीफे की वजह सामने नहीं आई है, लेकिन उनके अचानक चैनल से चले जाने के पीछे मोदी सरकार की मंशा बताई जा रही है।

वहीं, चैनल के मशहूर एंकर अभिसार शर्मा को 15 दिनों के लिए छुट्टी पर भेज दिया गया है। बता दें कि अभिसार शर्मा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार के सबसे मुखर आलोचकों में से एक रहे हैं। वह अपनी रिपोर्ट और वीडियो ब्लॉग के माध्यम से मोदी सरकार की कमियों को उजागर करते आ रहे हैं।

 

Source: boltaup.com