नोटबंदी के बाद सिर्फ BJP के आए अच्छे दिन, भाजपा की कमाई 570 करोड़ से बढ़कर 1034 करोड़ हुई

Notebandi Benefit BJP

नोटबंदी से भले ही 100 से ज्यादा मौतें हो गई हैं, लाखों लोगों को अपना रोजगार खोना पड़ा हो लेकिन बीजेपी दिन दूना रात चौगुनाढ़ती चली गई। इस दौरान भाजपा की कमाई 570.86 करोड़ से बढ़कर 1034 करोड़ हो गई यानी लगभग दोगुना । दिलचस्प बात तो यह है कि पारदर्शिता की बात करने वाली पार्टी ने इस कमाई के सोर्स को उजागर करने से मना कर दिया.

नोटबंदी के दौरान बीजेपी की इनकम 81.18% की दर से बढ़ी है लेकिन कांग्रेस की इनकम 14% की दर से घटी है और देश की अर्थव्यवस्था की तो रीढ़ ही टूट गई। इससे स्पष्ट हो जाता है कि नोटबंदी किसके लिए की गई थी और नोटबंदी से किसके अच्छे दिन आए हैं। इसी साल अप्रैल में ‘डेली ओ’ पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, देश की राष्ट्रीय पार्टियों की कुल कमाई का 66.4% अकेले भाजपा के खाते में आया है और कांग्रेस के खाते में सिर्फ 14 %. कांग्रेस मुक्त भारत का दावा करने वाले नरेंद्र मोदी सत्ता में आते ही अपनी पार्टी को कांग्रेस से ज्यादा कमाई करवाने लगे।

क्या आर्थिक मोर्चे पर की गई हर धोखाधड़ी का जवाब सिर्फ यही होगा कि मैं गरीब का बेटा हूं और मैं चाय बेचा करता था! क्या यह देश इतने बड़े निर्णय पर सवाल नहीं करेगा कि देश के लाखों करोड़ दांव पर लगा देने के पीछे तर्क ए क्या था ! जब नोटबंदी से हर वर्ग बेहाल है तो भारतीय जनता पार्टी मालामाल कैसे हो गई है!

नोटबंदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे साहसिक फैसला कहा जा सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसका देश के तकरीबन हर व्यक्ति पर सीधा असर होना था. ऐलान के शुरुआती दिनों में आम लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी. बैंकों की लाइनों में लोगों ने तकलीफ सहीं, एटीएम सेंटर के बाहर रात गुजारीं, पुलिस की लाठियां भी खाईं, लेकिन पीएम मोदी की मंशा पर कोई बड़ा सवाल नहीं खड़ा किया. जिन विपक्ष दलों ने इस मुद्दे पर पीएम को व्यक्तिगत रूप से घेरना चाहा उन्हें जनता का समर्थन नहीं मिला. ममता, केजरीवाल की इस मुद्दे पर हुई रैलियों में जुटी गिनी-चुनी भीड़ इसका सबूत है. आम लोगों का यही विश्वास पीएम मोदी का कद बढ़ाने में मददगार रहा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फरमान को लोगों ने काले धन, भ्रष्टाचार और नकली नोटों को अर्थव्यवस्था से खत्म करने के कदम के रूप में देखा. हालांकि इन मुद्दों पर नोटबंदी से कोई बहुत उल्लेखनीय उपलब्धि नहीं हासिल हुई लेकिन इसके बाजवूद ज्यादातर लोगों का मानना है कि नोटबंदी सही और जरूरी कदम था लेकिन उसे लागू करने को लेकर या तैयारियों के स्तर पर सरकार से कुछ चूकें हुईं.

आम खास सब बराबर

नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी से आम जनता में ये संदेश गया कि मोदी के राज में आम हों या खास, सब बराबर है. बैंकों की लाइन में खड़े मजदूर इस बात से खुश थे कि उन्हें थोड़ी मुश्किल जरूर हुई लेकिन उनका मालिक या साहूकार ज्यादा परेशान है. एक तरह से अमीरों को हुई दिक्कत गरीबों को लिए संतोष बन गई जिसका फायदा मोदी को हुआ क्योंकि आम जनता का उनमें विश्वास बढ़ा.

कालेधन और आतंकियों को झटका
नोटबंदी के अपने ऐतिहासिक ऐलान के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि ये फैसला कालेधन, भ्रष्टाचर और आतंकवादी संगठनों पर लगाम लगाने के लिए है. भले ही इस संबंध में अभी कोई ठोस आंकड़े सामने नहीं आए हैं, लेकिन इसका असर जरूर दिखा है. इसे देश की अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आई है और कालेधन पर कुछ हद तक नियंत्रण दिखा. यही वजह थी कि मोदी के नोटबंदी के फैसले को देश की जनता का भरपूर सहयोग मिला. क्योंकि देश की आवाम भ्रष्टाचार और कालेधन से आजिज हो गई थी. बीजेपी ने भी इसे जन आंदोलन का रूप दिया, जिसे बाकायदा लोगों ने स्वीकार किया.

कांग्रेस का वचन, सत्ता मिलने पर होगा हर जिले में गौशाला

Rahul with Cow

कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के लिए अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। कांग्रेस ने इस अपना ‘वचन पत्र’ बताया है, और जनता के लिए वादों की झड़ी लगा दी है.

Rahul Ji ka Hah Gaay ke sath
Rahul Ji ka Hah Gaay ke sath

भोपाल में घोषणा पत्र जारी करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस का वचन पत्र अलग-अलग विषयों पर आधारित है। कमलनाथ ने कहा कि महिलाओं को सक्षम बनाने के लिए उन्हें स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जाएगा.

कमलनाथ ने मंडी शुल्क को 1 फीसदी करने का वादा किया। उन्होंने कहा कि अगर राज्य में कांग्रेस सत्ता में आती है तो दैनिक वेतन भोगी और सफाई कर्मचारियों को स्थायी किया जाएगा। वहीं एमपी कांग्रेस के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वचन पत्र जारी करते हुए कहा कि हर परिवार में एक बेरोजगार एक युवा को कांग्रेस देगी 10 हज़ार रुपये प्रति महीना देगी जब तक कि उसको नौकरी ना मिल जाए.

Rahul Gandhi Love India
Rahul Gandhi Love India

उन्होंने ऐलान किया कि एमपी के हर जिले के 10वीं टॉपर को एक लैपटॉप मुफ्त में सरकार देगी. कांग्रेस ने राज्य में विधान परिषद के गठन का भी वादा किया है। यही नहीं कमलनाथ ने कहा कि अगर सूबे में कांग्रेस की सरकार बनती है तो बेटियों के विवाह के लिए 51 हजार रुपये का अनुदान भी सरकार देगी.

राज्य सरकार ने सत्ता में आने पर एमपी के सभी पंचायतों में एक गोशाला बनाने का वादा किया है. एमपी में कांग्रेस की ओर से सीएम पद के दावेदारों में शामिल कमलनाथ ने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो किसानों का कर्जा माफ किया जाएगा, साथ ही किसानों का बिजली बिल आधा कर दिया जाएगा.

कमलनाथ ने जन आयोग का गठन कर करप्शन के खिलाफ बड़ी लड़ाई की घोषणा की है। सामाजिक सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि को 300 रुपये से बढ़ाकर 1000 हजार रुपये किया जाएगा.

कर्नाटक उप चुनाव ने तीन नये स्पीड ब्रेकर खड़े कर दिये हैं मोदी के रास्ते में

Rahul win modi lose

कर्नाटक के उप चुनाव में पांच में से चार सीटे पर पीछे रह कर बीजेपी के लिये तीन बड़ी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं. बीजेपी बेल्लारी लोकसभा सीट पर भी बड़ी हार की तरफ है जो रेड्डी भाइयों का गढ़ माना जाता है और वो बीजेपी के लिये पानी की तरह पैसा बहाते हैं.

पहली सबसे बड़ी मुश्किल है कि कांग्रेस के गठबंधन से बीजीपी अब अकेले नहीं लड़ सकती. इन नतीजों के बाद मोदी-अमित शाह के सामने बड़ी चुनौती होगी कि मौजूदा गठबंधन को किसी तरह बचाये रखे और विस्तार भी करे. इन दोनों उद्देश्यों में राम मंदिर एक बड़ी रुकावट बनेगा. वैचारिक पार्टनर बीजीपी के पास सिर्फ शिव सेना और अकाली दल हैं.

दूसरा प्रमुख पहलू है – इन नतीजों के साथ ही अमित शाह और मोदी के खास येदियुरप्पा की राजनीतिक पारी का अंत हो गया. 75 के हो चुके येदियुरप्पा पर तमाम नेताओं को नाराज़ कर के मोदी ने दांव खेला था. ये उनकी तीसरी विफलता है. 2019 के चुनाव मे वो बीजेपी के लिये कर्नाटक में क्या पाएंगे दिख ही गया.

तीसरा और सबसे अहम पहलू है उत्तर के तीन बड़े राज्यों में अगले कुछ सप्ताह के भीतर ही चुनाव हैं – राजस्थान, मध्य प्रदेश और छ्त्तीसगढ़ तीनों राज्यों में बीजेपी की सरकार और चुनौती कांग्रेस से है. हालांकि दक्षिण और उत्तर के राजनीतिक समीकरण मेल नहीं खाते हैं पर ऐसी बुरी हार बीजेपी के मनोबल पर असर डालेगी. महंगाई, पेट्रोल की कीमत, घोटालों की वजह से बीजेपी पहले ही रक्षात्मक मुद्रा में है.

इन नतीजों ने मोदी की ताकत को निश्चित तौर पर और कम किया है. समय कम है उनके पास और फासला बढ़ रहा है.

From – Prashant Tandon Facebook Post

राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनावों में फोन बांटने का खेल क्या है

Rajasthan Chhattisgarh Election

हमारे वक्त की राजनीति को सिर्फ नारों से नहीं समझा जा सकता है। इतना कुछ नया हो रहा है कि उसके अच्छे या बुरे के असर के बारे में ठीक-ठीक अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो रहा है। समझना मुश्किल हो रहा है कि सरकार जनता के लिए काम कर रही है या चंद उद्योगपतियों के लिए। मीडिया में इन नई बातों की समीक्षा कम है। समीक्षा करने की काबिलियत भी कम है। मीडिया सिर्फ नारों के पीछे भाग रहा है। मीडिया के भागते रहने के लिए हर हफ्ते एक नारा लांच कर दिया जाता है।

बिजनेस स्टैंडर्ड में आधे पन्ने पर पांच कॉलम का कुमार संभव श्रीवास्तव का लेख पढ़ा। यह लेख राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सरकार द्वारा बांटे गए जियो कनेक्शन से लैस मोबाइल पर है। आपको पता होगा कि विधानसभा चुनावों को देखते हुए राजस्थान और छत्तीसगढ़ में डेढ़ करोड़ परिवारों को मोबाइल हैंडसेट बांटे गए हैं। इस फोन में इंटरनेट कनेक्शन भी है। दोनों राज्यों की तीन-चौथाई आबादी के पास सरकारी स्मार्ट फोन पहुंच गया है। पर इसका क्या असर है, इससे किस तरह की जानकारी एक कंपनी या एक कंपनी के ज़रिए सरकार के पास जा रही है, इसकी न जनता के बीच समझ है और न ही समझने का दावा करने वालों के बीच।

यह सब पब्लिक टेंडर से हुआ है। दोनों राज्यों में टेंडर के ज़रिए जियो मोबाइल को मौका मिला है। छत्तीसगढ़ में खुला टेंडर के ज़रिए रिलायंस जियो को पचास लाख परिवारों को इंटरनेट कनेक्शन देने का ठेका मिला है। अंग्रेज़ी में नेटवर्क लिखा है। इस फोन में दो साल तक जियो का ही नेट कनेक्शन रहेगा।बीच में इसे नहीं बदला जा सकेगा। उपभोक्ता को छह महीने तक इंटरनेट मुफ्त मिलेगा। बदले में कंपनी को राज्य सरकार अपना टावर लगाने के लिए ज़मीन देगी जिसका दस साल तक कोई किराया नहीं लगेगा। इसके साथ एक विकल्प भी मिला है कि वह सरकार के ई-पेमेंट सेवाओं को भी चलाए। फोन माइक्रोमेक्स का है और इंटरनेट जियो का। सरकार इस पर 1400 करोड़ से अधिक की रकम ख़र्च करेगी।

राजस्थान में सरकार जियो कनेक्शन और फोन के बदले कंपनी को प्रति फोन 1000 रुपये देगी। छत्तीसगढ़ की तरह यहां सरकार ने कोई टेंडर भी जारी नहीं किया था। सारी कंपनियों को बुलाया गया कि वे सरकारी कैंप के ज़रिए अपना फोन बेचें। एक करोड़ परिवारों को फोन और नेट कनेक्शन देने का काम मिल गया।लाभार्थी के खाते में सरकार ने इसके लिए 1000 रुपये डाल दिए। 500 फोन के और 500 इंटरनेट के। यह योजना सारी टेलिकाम कंपनियों के लिए थी मगर जियो को पहले आने का लाभ मिला। ज़िला प्रशासन को आदेश दिया गया कि भामाशाह डिजिटल परिवार योजना के तहत जियो भामाशाह कार्यक्रम शिविर कायम की गई और जियो फोन बेचे जाने लगे। इसके कई हफ्ते बाद दूसरी कंपनियों को बुलाया गया तब तक जियो ने पकड़ बना ली। सरकार इस पर 10 अरब यानी 1000 करोड़ ख़र्च कर रही है। दोनों राज्यों के अधिकारियों ने इंकार किया है कि जियो को अनुचित लाभ दिया गया है। जियो अधिकारी ने भी इंकार किया है।

यह योजना छत्तीसगढ़ के 81 प्रतिशत परिवारों और राजस्थान के 77 प्रतिशत परिवारों तक पहुंचती है। छत्तीसगढ़ में 71 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास फोन नहीं है। शहरों में 26 प्रतिशत परिवारों के पास।
राजस्थान में 32 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास फोन नहीं है। शहरों में 15 प्रतिशत परिवारों के पास नहीं है। अंग्रेजी में इसके लिए हाउसहोल्ड का इस्तमाल होता है। ये सभी पहली बार फोन का इस्तमाल करेंगे। सरकारें चुनाव के समय जनता के बीच खैरात बांटती हैं जैसे यूपी में लैपटॉप बांटा गया।

गौर करने वाली बात है कि जो फोन जनता को दिए जा रहे हैं उसमें किस तरह के एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए कहा जा रहा है, किस तरह की जानकारी सरकार के पास पहुंच रही है। यह पहले से नया और बड़े स्केल पर है। इन फोन में नमो-एप है। रमन सिंह का एप है। दोनों ही ग़ैर सरकारी एप हैं। दोनों नेताओं का प्रचार करते हैं। स्कीम के कागज़ात देखने के बाद कुमार संभव श्रीवास्तव ने लिखा है कि इसकी शर्तों के अनुसार छत्तीसगढ़ सरकार अपने नए नए एप्लिकेशन भी इसमें डालती रहेगी। अपडेट भी करेगी। यह भी लिखा है कि राज्य सरकार इनके ज़रिए जो डेटा जमा होगा वह अलग सर्वर पर जमा होगा। राजस्थान सरकार के दस्तावेज़ बताते हैं कि सरकार टेलिकाम कंपनी से लोगों की जानकारी ले सकती है।

छत्तीसगढ़ में तो तीन तीन बार टेंडर निकला मगर पहली बार में कोई कंपनी नहीं आई। दूसरे दौर में एयरटेल और लावा मोबाइल कंपनी आई। तीसरे दौर में सरकार ने दो साल तक सिम-लॉक की शर्त जोड़ दी तब जाकर जियो-माइक्रोमैक्स आई। सिम-लॉक का मतलब यह हुआ कि फोन जिसे मिलेगा वह दो साल तक किसी दूसरी कंपनी का इंटरनेट कनेक्शन नहीं ले सकेगा। अंतिम दौर की नीलामी में जियो-माइक्रोमैक्स ने ठेका जीत लिया। एयरटेल-लावा ने 2,650 और 4,550 रुपये का आफर दिया जबकि जियो और माइक्रोमेक्स ने 2,250 और 4,142 का दिया।

राजस्थान के दस्तावेज़ों को देखकर लगता है कि केंद्र सरकार भी इसमें शामिल है। डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्युनिकेशन ने जियो, वोडाफोन और एयरटेल को इसके लिए विशेष नंबर जारी किए। इन्हीं नंबरों को लोगों में बांटा गया।

दोनों राज्यों में फोन देने से पहले आधार और बैंक खाते से जोड़ना ज़रूरी है। तभी फोन चालू होगा। जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि आधार से लिंक नहीं करना है। कुमार संभव ने लिखा है कि यह साफ नहीं है कि कोर्ट का आदेश यहां लागू होता है या नहीं। छत्तीसगढ़ सरकार डेटा वेयरहाउस भी बनाने जा रही है जहां इस तरह की जानकारियां संरक्षित की जाएंगी। फोन में जो एप होंगे उनके डेटा को इन वेयरहाउस में रखा जाएगा। सरकार डेटा एनालिटिक सेंटर भी बनाने जा रही है। जहां अलग अलग चैनल से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर लोग क्या सोच रहे हैं, उसका विश्लेषण किया जाएगा और भविष्यवाणी भी। 29 अगस्त की बैठक में राजस्थान सरकार ने टेलिकॉम कंपनियों को कहा कि उन्हें लाभार्थियों का डेटा सरकार से शेयर करना होगा। एक एक व्यक्ति का डेटा देना होगा।

हाल ही में केब्रीज एनालिटिका का विवाद हुआ था। बिना यूज़र की जानकारी की उसके सोशल मीडिया डेटा को लेकर संभावित वोटर का पता लगाने का प्रयास हो रहा था, उसे अपनी तरफ मोड़ने का प्रयास हो रहा था। कांग्रेस पार्टी का नाम इसमें भी जुड़ा था। अब दोनों राज्यों में एक विशेष कंपनी के ज़रिए लोगों तक फोन पहुंचा कर नागरिक का कैसा डेटा हासिल होगा, उस डेटा का क्या होगा, यह समझना ज़रूरी है। दुनिया भर में डेटा के ज़रिए चुनावी राजनीति को प्रभावित करने के खेल रचे जा रहे हैं। इस खेल में बड़े बिजनेस के लिए संभावनाएं बनाई जा रही हैं और बदले में नेता या पार्टी के लिए संभावनाएं बन रही हैं। अब हम या आप इस बात को सामान्य रूप से नहीं समझ पाते हैं कि इसके ज़रिए लोकतंत्र और उसमें लोक की संस्था को कैसे प्रभावित किया जाएगा। कुछ कुछ अंदाज़ा कर सकते हैं मगर ठोस समझ बनाना आसान नहीं। दुनिया भर में ऐसी बातों का गहन अध्ययन होता है। भारत में अध्ययन के नाम पर राम मंदिर की बात होती है।

नोट- मैंने यह लेख बिजनेस स्टैंडर्ड के कुमार संभव श्रीवास्वत की लंबी रिपोर्ट के आधार पर लिखा है। कई पैराग्राफ सीधे सीधे अनुवाद किए हैं। कुमार का शुक्रिया। ऐसी रिपोर्ट का। कम से कम प्रयास करने का कि डेटा और फोन के इस निर्दोष से लगने वाले बंटवारे के क्या परिणाम हो सकते हैं।

मंत्री भी तलने लगे पकौड़ा- सरकार को भी मिला रोज़गार

BJP pakoda party

प्रधान सेवक के सच्चे सेवक। पकौड़ा तलते हुए मंत्री जी। स्व-रोज़गार जनता का है या सरकार का? सरकार रोज़गार दे नहीं सकती( कोई भी सरकार) तो वह आपके रोज़गार को अपना तो बता ही सकती है। प्रधानमंत्री के पकौड़ा तलने की बात की आलोचना हुई, लतीफ़े बने और लोग भूल गए। मंत्री जी उनकी बात को सैद्धांतिक जामा पहनाते हुए। अपने फ़िटनेस का प्रदर्शन काम से ज्यादा करते हैं।तस्वीरों के ज़रिए लोगों के मन में कई परतें बनानी होती हैं। नेता सामान्य है यह सबसे बड़ी तस्वीर है। यह समोसा खाकर या पकौड़ा तल कर हासिल की जा सकती है। जनता अपने चश्मे का नंबर बदले या शीशा साफ़ करे, उलझन में है। चुनाव नेता का मनोरंजन है और जनता का रसरंजन। नौजवान पकौड़ा तलें। परीक्षा की तैयारी न करें। हिन्दू- मुस्लिम कीजिए। नेता यही चाहते हैं। रोज़गार की चिन्ता न करें। पकौड़ा कभी भी तला जा सकता है। दरअसल यहाँ पकौड़ा नहीं जनता के अरमानों को तला जा रहा है।

तस्वीर – राजस्थान पत्रिका से साभार

नोट- कई लोग कमेंट में लिख रहे हैं कि जकार्ता एशियाड में मंत्री जी खिलाड़ियों को नाश्ता पेश कर रहे थे। 26 अगस्त को उनकी ट्रे लेकर जाते हुए तस्वीर ट्वीट होती है जिसमें इस बारे में कुछ नहीं लिखा होता है। सिर्फ तस्वीर होत है। सबने अतिउत्साह में यह खबर चला दी कि मंत्री नाश्ता पेश कर रहे हैं जो कि सही नहीं था। Alt news ने उस पर विस्तार से लिखा था, आप देख सकते हैं। मगर आल्ट न्यूज़ से ज्यादा लोगों तक तस्वीर के बहाने झूठी कहानी पहुंची और दिमाग़ में रह गई। अब आप चेक नहीं करेंगे, खुद को सतर्क नहीं रखेंगे तो ऐसी छवियों के जाल में फंसेंगे।

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018: बीजेपी ने 177 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की, बुधनी से लड़ेंगे सीएम शिवराज

madhya pradesh election

मध्य प्रदेश विधान सभा चुनावों में उम्मीदवारों के नाम पर काफी माथापच्ची करने के बाद भाजपा ने आज (शुक्रवार, 02 नवंबर, 2018) 177 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। लिस्ट के मुताबिक राज्य के सीएम शिवराज सिंह अपनी परंपरागत सीट बुधनी से ही चुनाव लड़ेंगे।

उनके अलावा उनकी सरकार के मंत्री नरोत्तम मिश्र दतिया और यशोधरा राजे सिंधिया शिवपुरी से चुनाव लड़ेंगी। गुरूवार देर रात तक दिल्ली स्थित भाजपा के मुख्यालय में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई, जिसमें इन नामों पर मुहर लगाई गई। पार्टी ने एमपी के अलावा मिजोरम विधान सभा के लिए 24 और तेलंगाना विधान सभा चुनाव के लिए 28 उम्मीदवारों का भी एलान किया है।

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 177 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान शुक्रवार को कर दिया। सीएम शिवराज सिंह चौहान बुधनी विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में होंगे।

मध्य प्रदेश के लिए बीजेपी की इस पहली सूची में मंत्री नरोत्तम मिश्रा को दतिया से उम्मीदवार बनाया गया है। इसके अलावा यशोधरा राजे सिंधिया शिवपुरी से प्रत्याशी होंगी।

इसके अलावा बीजेपी ने मिजोरम और तेलंगाना के लिए भी उम्मीदवारों का ऐलान किया है। पार्टी ने मिजोरम के लिए 24 और तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए 28 प्रत्याशियों की सूची जारी की है।

230 सदस्यों वाले मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए पार्टी ने पहली लिस्ट में 177 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है जिसके मुताबिक पार्टी ने दो मंत्रियों का टिकट काटा है। लिस्ट के मुताबिक श्योर से दुर्गालाल विजय, सुरखी से सुधीर यादव, देवरी से तेज सिंह राजपूत, खुरई से भूपेंद्र सिंह, पृथ्वीपुर से अभय यादव को उम्मीदवार बनाया गया है।