संघ का प्रमाणपत्र नहीं चाहिए, भागवत के बयान से मोदी-शाह चिंतित हों: कांग्रेस

we dont need rss certificate amit shah and modi should worries about mohan bhagwat statement says Congress

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा आजादी की लड़ाई में कांग्रेस के योगदान की तारीफ किए जाने पर मुख्य विपक्षी पार्टी ने मंगलवार को कहा कि उसे ‘विभाजनकारी और नफरत फैलाने वाले’ संगठन से प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह भी कहा कि भागवत के बयान से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को चिंतित होना चाहिए क्योंकि ऐसा लगता है कि इस जोड़ी के ‘विध्वंसक रवैये’ से आरएसएस भी असहमत है.

सुरजेवाला ने कहा, ‘मैंने इस बारे में (भागवत के बयान) अखबारों में पढ़ा है. अगर इससे किसी को चिंतित होना चाहिए तो वह मोदी जी और अमित शाह की जोड़ी को होना चाहिए. ऐसा लगता है कि अब बीजेपी का मातृ संगठन मोदी-शाह जोड़ी के विध्वंसक रवैये से पूरी तरह असहमत है.’

उन्होंने कहा, ‘संपूर्ण भारत को पता है कि भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई और देश की एकता एवं अखंडता के लिए कांग्रेस ने क्या बलिदान दिए हैं. महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सरदार बेअंत सिंह, विद्याचरण शुक्ल और नंद कुमार पटेल और अन्य हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देश के लिए बलिदान दिया.’ सुरजेवाला ने कहा, ‘विभाजनकारी और नफरत पैदा करने वाले संगठन से कांग्रेस को किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है.’

आरएसएस के कार्यक्रम में सोमवार को भागवत ने यह कहकर सभी को चौंका दिया था कि कांग्रेस का आजादी की लड़ाई में बड़ा योगदान है और उसने देश को कई महान हस्तियां दी हैं.

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अमित शाह का अवैध आप्रवासन मुद्दा चुनाव के समय के लिए राजनीति भाषणबाजी का कला है

Amit Shah's illegal immigration rhetoric poll time gimmick

राजस्थान में मतदान के दौरान, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने एक बार फिर असम में नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) अभ्यास का बचाव किया और सभी बांग्लादेशी घुसपैठियों को निष्कासित करने की कसम खाई। इसे याद किया जाएगा कि जुलाई में जारी एनआरसी की अंतिम मसौदा सूची में 40 लाख लोग शामिल थे। लेकिन बाद की रिपोर्टों ने कई मामलों पर प्रकाश डाला जहां एक ही परिवार के सदस्यों को उनके एनआरसी अनुप्रयोगों के लिए अलग-अलग प्रतिक्रिया मिली। इसने अभ्यास की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, शाह कांग्रेस से लड़ रहे हैं – जिसने एनआरसी के कमजोर निष्पादन की आलोचना की है – और इसके वोट बैंक को बचाने के बाद आरोप लगाया है।

फिर भी, तथ्य यह है कि कोई भी नहीं जानता कि प्रक्रिया के अंत में घोषित अवैध आप्रवासियों के साथ क्या होगा। शाह के कहने के बावजूद, बांग्लादेश को निर्वासन एक विकल्प नहीं है क्योंकि वह देश 1972 से भारत में किसी भी बड़े पैमाने पर आउटबाउंड प्रवास को मान्यता नहीं देता है। और कुछ महीनों में बांग्लादेश में चुनाव के साथ, भारतीय स्थिति को स्वीकार करने के लिए ढाका में किसी भी शासन के लिए आत्मघाती होगा। इसके अलावा, नई दिल्ली अच्छी तरह से ढाका के साथ इस मुद्दे को मजबूर नहीं करेगी। हाल के दिनों में भारत-बांग्लादेश संबंध उत्कृष्ट रहे हैं और अवैध आप्रवासन दर्शक को उठाकर बांग्लादेश नेपाल के रास्ता देख सकते हैं।

इसलिए, यह स्पष्ट है कि शाह एनआरसी के साथ पहचान राजनीति खेल रहे हैं। शाह के पुनरावृत्ति ने यह पुष्टि की है कि सरकार का नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 पड़ोसी देशों से हिंदुओं को नागरिकता प्रदान करेगा – एक प्रावधान जो आगे प्रवास और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो सकता है, उन अदालतों में चुनौती दी जा सकती है जहां इसकी संवैधानिकता का परीक्षण किया जाएगा। आरक्षण के लिए अकिन, अवैध घुसपैठियों को निष्कासित करना राजनीतिक रूप से सही राजनीति है जो जमीन पर कुछ भी हल नहीं करेगा। एकमात्र व्यावहारिक पाठ्यक्रम बांग्लादेश के साथ उस देश से भविष्य में प्रवास को रोकने के लिए काम करना है।

 

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क्या एससी/एसटी ऐक्ट के अपने ही अजेंडे में फंस गई बीजेपी!

Is the BJP stuck in its own agenda of the SC ST Act

सोशल मीडिया में बड़ा कैम्पेन ‘नोटा’ को लेकर चलाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि एससी/एसटी कानून की मुखालिफ जातियां मतदान केंद्र तक जाएं, अगर उन्हें लगता है कि बीजेपी के खिलाफ वह किसी दूसरी पार्टी को वोट नहीं दे सकती हैं तो ‘नोटा’ का बटन दबा दें।

कहा जा रहा है कि इस कैम्पेन का सीधा नुकसान बीजेपी को होगा लेकिन इस अभियान की काट के लिए बीजेपी का आईटी सेल काफी सक्रिय हो गया है। वह इस अभियान को बेअसर करने में जुट गया है।

‘प्रॉक्सी वॉर’ भी शुरू हो गया है। जातियों के झगड़े में उलझे हिंदू समाज के लिए सोशल मीडिया पर एक संदेश बहुत तेजी के साथ वायरल हो रहा है- ‘जातियों के झगड़े में अगर मोदी जी को 2019 में हरा दिया तो याद रखना कि उसके बाद जाति तो क्या, धर्म भी बताना मुश्किल हो जाएगा।’ बीएसपी तो ‘नोटा कैम्पेन’ का भी बीजेपी की रणनीति का हिस्सा मानती है।

पार्टी का कहना है कि बीजेपी यह नहीं चाहती है कि उससे नाराज वोटर उसकी मुखालिफ पार्टियों के साथ खड़ा हो, इस वजह से बीजेपी ने साजिशन सोशल मीडिया पर यह कैम्पेन चलवाया है।

बीजेपी के लिए जोखिम दोनों ही हालात में था। अगर वह इस कानून को नरम होने देती, तो एकमुश्त चौथाई आबादी को खिलाफ कर लेती। ऐसे में बीजेपी ने कम खतरे वाली स्थिति के साथ जाना पसंद किया है।

बीजेपी के एक सीनियर लीडर ने एनबीटी से बातचीत में माना भी कि पार्टी को दोनों ही हालात में लड़कर ही बाहर आना पड़ता। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि बीजेपी अपनी रणनीति में फंस गई है।

(स्रोत: नवभारत टाइम्स)

 

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भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देने के बाद यदि अमित शाह सोचते हैं कि भाजपा 50 सालो तक राज करेगी तो इसका बड़ा कारण……

Girish Malviya article on Modi and Shah

गिरीश मालवीय

बीते रोज़ सोमवार को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर रुपया डॉलर के मुकाबले 72.67 पर पहुंच गया दरअसल इस साल डॉलर के मुकाबले रुपया 11 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुका है रुपये को इस गिरती हालत से बचाने के लिए आरबीआई अभी तक करीब 22 बिलियन डॉलर का फॉरेक्स रिजर्व का इस्तेमाल कर चुका है लेकिन हालात अभी नहीं सुधरे हैं।

इस गिरते हुए रुपये से भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान झेलना पड़ रहा है स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों से यह तथ्य सामने आया है कि रुपये के अवमूल्यन के कारण भारत को विदेशी कर्ज चुकाने में 68,500 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे यह लघु अवधि में चुकाए जाने वाले कर्ज हैं जिन्हें अगले कुछ महीनों में वापस किया जाना है।

इस दरमियान कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें ऐसी ही है जैसा कहा जाता है कि ‘एक तो दुबले ऊपर से दो आषाढ़’ , एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष का मानना है कि अगर कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत औसतन 76 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो देश का तेल आयात बिल 45,700 करोड़ रुपये बढ़ जाएगा।

बैंकों की हालत बढ़ते एनपीए के कारण पहले ही खराब है नोटबन्दी और जल्दबाज़ी में लागू की गयीं जीएसटी ने छोटे और मध्यम श्रेणी के उद्योगों पर गहरी मार मारी है असंगठित क्षेत्र पूरी तरह से बर्बाद हो गया है भारतीय अर्थव्यवस्था को इस कदर बर्बाद कर देने के बाद भाजपा यदि अब भी सोचती हैं कि 2019 में जीतने के बाद वह 50 सालो तक राज करेगी। तो इसका बड़ा कारण कमजोर विपक्ष भी है।

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार एंव स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

अमित शाह को अखिलेश का जवाब, ‘जनता अगले 50 हफ़्तों से पहले ही इनको जवाब दे देगी’

Akhilesh Yadav angry on BJP president

नई दिल्ली – भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि भाजपा पचास साल तक सत्ता में रहेगी। अब उनके इस बयान की आलोचना होनी शुरु हो गई है। सपा सुप्रिमो और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा अध्यक्ष के इस बयान को लेकर उन पर निशाना साधा है। अखिलेश ने कहा है कि जनता अगले 50 हफ़्तों से पहले ही इनको जवाब दे देगी।

सपा सुप्रिमो ने कहा कि अहंकारी कह रहे हैं कि अगले 50 साल तक भाजपा सरकार ही रहेगी. मीडिया, सांविधानिक संस्थानों व लोगों की भीड़तंत्रीय हत्याओं के बाद अब क्या ये जनता के सरकार चुनने के अधिकार की भी हत्या करेंगे, जो ऐसे तानाशाही बयान दे रहे हैं. देखियेगा जनता अगले 50 हफ़्तों से पहले ही इनको जवाब दे देगी.

अखिलेश यादव ने कहा कि नोटबंदी, जीएसटी, दलित, किसान, नारी व युवा उत्पीड़न, महँगाई, बेरोज़गारी, पेट्रोल-डीज़ल के रोज़ बढ़ते दाम, अमीरों से मुनाफ़ाख़ोरी के सौदे भाजपा के जन विरोधी कारनामे रहे हैं. अब तो जनता को ऐसा लगने लगा है कि भाजपा जनता को दुख देने और परेशान करने की एक प्रयोगशाला खोल के बैठी है.

अखिलेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधा है, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के लिए हर पिता ‘पितातुल्य’ होना चाहिए, उन्नाव की बलात्कार-पीड़िता का वो बेबस पिता भी जिसको उनकी पुलिस ने मार-मार कर मार डाला. इसी प्रकार हर पुत्री ‘पुत्रीतुल्य’ होनी चाहिए, वो पुत्री भी जिसे काला झंडा दिखाने पर जेल की काल कोठरी में डाला गया. यही सच्चा राजधर्म है.

हम पिछली बार से ज्यादा सीटें जीतेंगे, हमारे पास दुनिया के सबसे पॉपुलर नेता है- अमित शाह

National Executive Meet Party adopts Ajey BJP slogan Amit Shah promises bigger majority in 20

दिल्ली में आज से बीजेपी पदाधिकारियों की दो दिवसीय बैठक चल रही है, जिसमें पार्टी 2019 के चुनावों से लेकर राफेल और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर मंथन करने में लगी है। इसी बैठक में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी बीजेपी को अजेय पार्टी बनाएंगे। इसके लिए पदाधिकारियों की बैठक में अजेय बीजेपी का संकल्प लिया गया है।

साथ ही अमित शाह ने कहा कि तीन राज्यों के चुनाव के साथ-साथ तेलंगाना के चुनाव पर भी ध्यान दिया जाएगा। शाह ने कहा कि हमारे पास दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता हैं और हमें पिछले चुनाव से ज्यादा सीटों से जीतना है।

अमित शाह ने कहा, ‘हम आगामी चुनाव में पूर्ण बहुमत से जीतेंगे। संकल्प की शक्ति को कोई पराजित नहीं कर सकता।’ इस मीटिंग में पार्टी मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम को लेकर अपनी रणनीति तैयार करेगी।

एनडीए सरकार के कार्यकाल में ही बनवाए गए आंबेडकर इंटरनैशनल सेंटर को भी बीजेपी ने इसीलिए मीटिंग के लिए चुना है ताकि दलितों के बीच संदेश दिया जा सके।

इस मीटिंग में घरेलू और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर एक राजनीतिक प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा। इसके अलावा ‘अर्बन नक्सलियों’ की गिरफ्तारी और उसके परिणामों पर भी चर्चा होगी। इस मौके पर चुनावी राज्य अमित शह को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।

 

Source: hindi.siasat.com

सर्वे का रिजल्ट देख उड़ीं भाजपा की नींदें, सर्वे में भाजपा की हार तय

BJP lose election 2019 and 2018 survey

नई दिल्ली – 2014 में नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी ने एतिहासिक जीत दर्ज की थी . जनता ने सरकार से कितनी आस लगा रखी थी .नरेन्द्र मोदी के वादो पर जनता ने आँख बंद करके भरोसा किया . पर 2018 आते आते न तो 15 लाख रूपए खाते में आये, न बुलेट ट्रेन चली, न रोज़गार बढ़े और न महंगाई कम हुयी. यही सब कारण नरेन्द्र मोदी को हीरो से विलेन बना सकते हैं.

BJP lose election 2019 and 2018 survey
BJP lose election 2019 and 2018 survey

अभी चुनाव में तो समय है पर बीजेपी का जनाधार काफी घट गया है . अगर सर्वो की मानें तो दिसंबर में होने वाले तीन राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की हार तय है .अगर ऐसा हुआ तो 2019 में बीजेपी की वापसी की उम्मीदों को करारा झटका लग सकता है.

BJP lose election 2019 and 2018 survey
BJP lose election 2019 and 2018 survey

पिछले चार छः महीनों में राजनीति के पटल पे बहुत कुछ बदला है. कल जिस राहुल गांधी का मज़ाक बनाया जाता था आज लोग उनको गंभीरता से ले रहे हैं, उनको सून रहे हैं उन पर विश्वास कर रहे हैं . सर्वों से पता चलता है नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ़ गिर रहा और राहुल गांधी का ऊपर उठ रहा है . यह बीजेपी और संघ के लिए अच्छी ख़बर नहीं है. दूसरा बड़ा परिवर्तन उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर में चुनाव के समय देखने को मिला.

BJP lose election 2019 and 2018 survey
BJP lose election 2019 and 2018 survey

यहाँ बीजेपी की हार हुई जबकि यह मुख्यमंत्री योगी का संसदीय क्षेत्र था . यहाँ एसपी और बीएसपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था . इसके बाद सभी धर्म निरपेक्ष दलों को यह बात समझ आ गयी कि अगर वह मिल कर चुनाव लड़ें तो बीजेपी को आसानी से हरा सकते हैं . 2014 में बिखरे विपक्ष को 69% वोट मिले थे जबकि बीजेपी को 31% वोट मिले थे.

BJP lose election 2019 and 2018 survey
BJP lose election 2019 and 2018 survey

फिर हिन्दू समाज का वह ढांचा जिसे संघ और बीजेपी नि मुसलमानों का भय दिखा कर खड़ा किया था वह चरमरा रहा है. आज किसान पहले किसान, दलित पहले दलित, ओबीसी पहले ओबीसी है बाद में हिन्दू है. व्यापारी वर्ग भी सरकार से नाराज़ है. शहरी नक्सल के नाम पर हुई गिरफ्तारियों से भी सरकार के खिलाफ माहौल बन रहा है. ऐसे में अगर विपक्ष महागठबंधन बनाने में सफल होता है तो 2019 में राहुल गांधी की अगुवाई में एक नया भारत उभर सकता है.

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में ‘सुधा भारद्वाज’ की गिरफ्तारी पर बोले दिग्विजय सिंह, कहा- अब मोदी-शाह का असली चेहरा सामने आ रहा है

Digvijay Singh target Amit Shah and PM Modi over peoples arrested in Pune Bhima Koregaon violence case

देश के अलग-अलग हिस्सों में पुलिस छापामारी कर बोलने की आज़ादी और मानव अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वाले कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर रही है। महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक ये गिरफ्तारियां की जा रही हैं।

इनका आधार नक्सलियों से संपर्क रखना बताया जा रहा है। इस मामले में सुधा भारद्वाज जो एक सामाजिक कार्यकर्ता है और लंबे समय से खनन श्रमिकों के लिए लड़ती आई है उन्हें भी गिरफ्तार किया गया है।

सुधा भारद्वाज की गिरफ्तारी पर कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, सुधा भारद्वाज जैसी समाज सेविका के साथ जो महाराष्ट्र पुलिस झूँठे प्रकरण बना रही है उसकी मैं घोर निंदा करता हूँ। भाजपा और मोदी अमित शाह की जोड़ी का असली चेहरा अब सामने आने लगा है।

गौरतलब हो कि सुधा छत्तीसगढ़ में अपने काम के लिए जानी-पहचानी जाती हैं। वह 29 साल तक वहां रही हैं और दिवंगत शंकर गुहा नियोगी के छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा की सदस्य के तौर पर भिलाई में खनन श्रमिकों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ चुकी हैं।

आईआईटी कानपुर की छात्रा होने के दौरान पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में बिताए दिनों में श्रमिकों की दयनीय स्थिति देखने के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के साथ 1986 में काम करना शुरू किया था।

नागरिक अधिकार कार्यकर्ता एवं वकील सुधा जमीन अधिग्रहण के खिलाफ भी लड़ाई लड़ती रही हैं और वह अभी पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की छत्तीसगढ़ इकाई की महासचिव हैं।

 

Source: boltaup.com

मप्र चुनाव: BJP खेमे में इस बात से मचा हड़कंप, शिवराज को आनन फानन में अमित शाह ने बुलाया दिल्ली

MP Lok Sabha election 2019 BSP Congress ka gathbandhan se ghabrai BJP

मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा के रणनीतिकारों की चिंता बढ़ गई है। भाजपा नेताओं का मानना है कि मप्र में बसपा-कांग्रेस का गठबंधन तय है। उचित समय पर इसका ऐलान भी हो जाएगा। अमित शाह के पास कई तरह की सूचनाएं और रिपोर्ट पहुंची हैं। अमित शाह ने शिवराज सिंह को दिल्ली बुलाया है।

दिल्ली में 28 अगस्त को भाजपा शासित मुख्यमंत्रियों की मीटिंग है परंतु अमित शाह सीएम शिवराज सिंह से अलग से बात करेंगे। दरअसल, अमित शाह को विधानसभा से ज्यादा लोकसभा चुनाव की चिंता है। उन्होंने मप्र को 29 में से 29 सीटें जीतने का टारगेट दिया था परंतु अब वो चाहते हैं कि कम से कम 26 की 26 ही बची रहें।

MP Lok Sabha election 2019 BSP Congress ka gathbandhan se ghabrai BJP
MP Lok Sabha election 2019 BSP Congress ka gathbandhan se ghabrai BJP

मप्र में बसपा-कांग्रेस का गठबंधन तय मान रही है भाजपा

मुख्यमंत्रियों की बैठक से साफ है कि भाजपा चुनाव से पहले ही महा-गठबंधन का तोड़ निकालना चाह रही है। मध्य प्रदेश समेत राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में विधानसभा चुनाव नवंबर में प्रस्तावित हैं। इसमें मप्र-राजस्थान में बसपा के साथ कांग्रेस चुनाव लड़ सकती है, जिसका असर लोकसभा में भी पड़ सकता है, इसलिए भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अभी से तैयारी कर रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि मप्र में कांग्रेस और बसपा का गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है। चर्चा है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ तय समय पर इसका ऐलान कर सकते हैं।

MP Lok Sabha election 2019 BSP Congress ka gathbandhan se ghabrai BJP
MP Lok Sabha election 2019 BSP Congress ka gathbandhan se ghabrai BJP

अमित शाह चाहते हैं कम से कम 26 की 26 ही बनी रहें

यह गठबंधन विधानसभा चुनाव तक के लिए है या लोकसभा में दिखाई देगा, इस पर फिलहाल स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। भाजपा के सामने सबसे बड़ी मुश्किल भी इसी गठबंधन को लेकर है। जहां तक लोकसभा सीटों का सवाल है तो 2014 के चुनाव में भाजपा 29 में से 27 सीटों पर विजय रही थी। बाद में झाबुआ-रतलाम संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया जीत गए।

इस समय मप्र में 26 पर भाजपा और 3 सीटें कांग्रेस के पास हैं। यह आंकड़ा 2019 के चुनाव में बरकरार रहेगा या नहीं, अमित शाह प्रदेश नेतृत्व से जानकारी ले सकते हैं। पार्टी यह जानकारी भी देगी कि 2009 के आम चुनाव में भाजपा के पास 16 सीटें थीं। कांग्रेस 12 पर और एक सीट बसपा के खाते में गई थी।

MP Lok Sabha election 2019 BSP Congress ka gathbandhan se ghabrai BJP
MP Lok Sabha election 2019 BSP Congress ka gathbandhan se ghabrai BJP

पहले ही बन चुकी है लोकसभा की कमेटी

अमित शाह के जबलपुर दौरे के समय ही प्रदेश संगठन ने लोकसभा के लिए भी चुनाव प्रबंधन कमेटी की घोषणा कर दी है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर इसके भी संयोजक बनाए गए हैं। सितंबर में शाह अपने दौरे में विधानसभा के साथ-साथ लोकसभा चुनाव के लिहाज से भी रणनीति को अंतिम रूप देंगे।

MP Lok Sabha election 2019 BSP Congress ka gathbandhan se ghabrai BJP
MP Lok Sabha election 2019 BSP Congress ka gathbandhan se ghabrai BJP

मप्र से अलग बात करेंगे शाह

लोकसभा चुनावों की चर्चा के बाद अमित शाह मप्र के मामले में अलग से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा कर सकते हैं। इसमें जन आशीर्वाद यात्रा से लेकर तमाम कमेटियों का फीडबैक सीएम शाह को देंगे। साथ ही शाह अपने आगामी दौरे को लेकर मुख्यमंत्री से बात कर सकते हैं।

एनआरसी के मुद्दे पर भाजपा नेता भ्रम क्यों फैला रहे हैं?

‘विपक्षी दल चाहे जितना हो-हल्ला करें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार असम के 40 लाख घुसपैठियों में से एक-एक को बाहर करेगी. केंद्र सरकार घुसपैठियों के प्रति उदारता बरतने के मूड में नहीं है.’

यह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के उस वक्तव्य का अंश है, जो उन्होंने 12 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मेरठ में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के समापन सत्र में दिया.

अमित शाह यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि देश में जहां-जहां घुसपैठिये हैं, उन सबको देश से बाहर जाने का रास्ता भाजपा की सरकार दिखाएगी. उनका इशारा पश्चिम बंगाल की ओर था.

इसके बाद उन्होंने असम में विवादों की जड़ बन रहे नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 पर टिप्पणी की और कहा कि हिंदू शरणार्थियों को देश में लाया जाएगा और उन्हें नागरिकता प्रदान की जाएगी.

30 जुलाई को असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का फाइनल मसौदा जारी किया गया. इसमें शामिल होने के लिए 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन किया था, जिनमें से 2.89 करोड़ लोगों के नाम इस मसौदे में शामिल हुए. 40, 07,707 लोगों का नाम इस सूची में नहीं हैं.

एनआरसी का पहला मसौदा 31 दिसंबर और एक जनवरी को जारी किया गया था, जिसमें 1.9 करोड़ लोगों के नाम थे. एनआरसी की अंतिम सूची 31 दिसंबर 2018 को जारी की जानी है. तब तक अंतिम मसौदे में छूटे व्यक्ति अपनी आपत्तियां दर्ज करवा सकते हैं.

एनआरसी जारी होने के बाद इन 40 लाख लोगों को लगातार ‘घुसपैठिया’ या ‘अवैध बांग्लादेशी’ बताया जाने लगा, विभिन्न दलों के नेताओं ने सरकार से सवाल किया कि वह इन 40 लाख लोगों के साथ क्या करना चाहती है.

हालांकि राज्य सरकार का कहना था कि जिनके नाम रजिस्टर में नहीं है उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा.

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मसौदा जारी होने से पहले और बाद में भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों के नाम इस ड्राफ्ट में नहीं होंगे, उन्हें अपनी पहचान साबित करने के पर्याप्त मौके दिए जाएंगे. नाम न आने की स्थिति में किसी के अधिकार या विशेषाधिकार कम नहीं होंगे, न ही किसी को हिरासत में लिया जाएगा.

फाइनल ड्राफ्ट आने के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी आया कि इनमें बहुत से लोग ऐसे हैं, जिनका नाम 31 दिसंबर को जारी हुए ड्राफ्ट में था, पर इस मसौदे में नहीं है.

इस पर सरकार की ओर से कहा गया कि ऐसे लोगों को लेटर ऑफ इनफॉर्मेशन के जरिये सूचित कर उनके लिस्ट में शामिल न होने का कारण बताया जाएगा, जिससे वे इस गलती को सुधार सकें.

यानी स्पष्ट था कि ये सभी निश्चित तौर पर ‘अवैध बांग्लादेशी’ नहीं हैं और इन्हें अपनी पहचान को साबित करने के लिए दोबारा मौका दिया जाएगा.

लेकिन इस मसले पर राजनीति मसौदा जारी होने के साथ ही शुरू हो गयी. लगातार विपक्ष की ओर से सवाल किया गया कि इन 40 लाख लोगों का भविष्य क्या होगा. 30 जुलाई में इसी मुद्दे पर हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही स्थगित हुई.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से संशोधन लाने की मांग करते हुए सवाल किया, ‘जिन 40 लाख लोगों के नाम डिलीट कर दिए गए हैं वे कहां जाएंगे? क्या केंद्र के पास इन लोगों के पुनर्वास के लिए कोई कार्यक्रम है? अंतत: पश्चिम बंगाल को ही इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. ये भाजपा की वोट पॉलिटिक्स है.’

ममता यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला और कहा कि असम में एनआरसी में 40 लाख लोगों को शामिल नहीं किए जाने से देश में खूनखराबा और गृह युद्ध हो सकता है. मोदी सरकार राजनीतिक फायदे के लिए लाखों लोगों को राज्य विहीन करने की कोशिश कर रही है.

हालांकि 30 जुलाई को सदन में ही केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि इसमें उनकी सरकार की कोई भूमिका नहीं है.

Assam NRC BJP leaders spreading misinformation
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लोकसभा में बोलते हुए सिंह ने कहा कि इसमें केंद्र की कोई भूमिका नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मैं विपक्ष से पूछना चाहता हूं कि इसमें केंद्र की क्या भूमिका है? यह सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुआ है. ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.’

उन्होंने यह भी साफ किया कि यह मसौदा पूरी तरह ‘निष्पक्ष’ है और जिनका नाम इसमें शामिल नहीं है उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि उन्हें भारतीय नागरिकता साबित करने का मौका मिलेगा.

एक तरफ जहां गृहमंत्री सरकार की भूमिका से इनकार कर रहे थे, वहीं उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष इस पर अपनी पार्टी की पीठ ठोंक रहे थे.

सदन में एनआरसी के मुद्दे पर बोलते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि इसे लागू करने की हिम्मत कांग्रेस में नहीं थी इसलिए यह योजना अब तक लंबित रही.

उन्होंने कहा कि 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने असम समझौते के तहत एनआरसी बनाने की घोषणा की थी. एनआरसी को असम समझौते की आत्मा बताते हुए उन्होंने कहा, ‘एनआरसी को अमल में लाने की कांग्रेस में हिम्मत नहीं थी, हममें हिम्मत है इसलिए हम इसे लागू करने के लिए निकले हैं.’

इसके बाद 40 लाख लोगों पर किए जा रहे सवाल पर उन्होंने कहा, ‘ये 40 लाख लोग कौन हैं? इनमें बांग्लादेशी घुसपैठिये कितने हैं? मैं पूछना चाहता हूं कि क्या आप बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचाना चाहते हैं.’

उनके बयान से स्पष्ट था कि वे आश्वस्त थे कि ये 40 लाख लोग घुसपैठिये थे.

यहां जान लें कि एनआरसी की जड़ें असम के इतिहास से जुड़ी हुई हैं. 1979 से 1985 का समय राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का था. इस बीच लगातार आंदोलन हुए, जिन्होंने कई बार हिंसक रूप भी लिया. जातीय हिंसा चरम पर रही. इसी बीच अगस्त 1985 को तत्कालीन राजीव गांधी सरकार और आंदोलन के नेताओं के बीच समझौता हुआ, जिसे असम समझौते के नाम से जाना गया.

लेकिन इसके बाद सरकार के कई प्रयासों के बाद भी इस पर कोई काम नहीं हो सका. 2013 में असम पब्लिक वर्क नाम के एनजीओ सहित कई अन्य संगठनों इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे.

2017 तक सुप्रीम कोर्ट में इस बारे में कुल 40 सुनवाइयां हुईं, जिसके बाद नवंबर 2017 में असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि 31 दिसंबर 2017 तक एनआरसी को अपडेट कर दिया जाएगा.

2015 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और निगरानी में यह शुरू हुआ और 2018 जुलाई में एनआरसी का रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया की ओर से फाइनल ड्राफ्ट जारी किया गया.

इस मसौदे के आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ कहा है कि जो लोग एनआरसी के ड्राफ्ट में जगह बनाने से छूट गए हैं, उनके द्वारा दाखिल की जाने वाली आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष होनी चाहिए. वहीं चुनाव आयोग ने भी स्पष्ट किया कि एनआरसी से नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता सूची से भी ये नाम हट जाएंगे.

यानी न ही सुप्रीम कोर्ट और न ही चुनाव आयोग इन 40 लाख लोगों को ‘अवैध नागरिक’ मान रहे थे, लेकिन भाजपा के नेता लगातार इन्हें ‘घुसपैठिये’ और ‘बांग्लादेशी’ के नाम से पुकार रहे थे.

एक तरफ तो केंद्र सरकार इस मुद्दे पर राजनीति न करने की बात कर रही थी, तो दूसरी ओर पार्टी के विभिन्न नेता विभिन्न राज्यों में एनआरसी को लेकर अलग-अलग राग अलाप रहे थे.

Assam NRC BJP leaders spreading misinformation
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31 जुलाई को राज्यसभा में एनआरसी जारी करने की भाजपा की हिम्मत का बखान करने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई.

यहां वे बोले कि केंद्र सरकार के किसी के साथ भेदभाव नहीं कर रही है. उन्होंने कहा, ‘मुझे संसद में बोलने नहीं दिया गया. मैं देशवासियों को कहना चाहता हूं कि एनआरसी से किसी भारतीय का नाम नहीं काटा गया है और जिनका नाम लिस्ट में नहीं है वे घुसपैठिये हैं.’

इस बात पर ज़ोर देते हुए वो यहां तक कह गए कि इस लिस्ट में जिनका नाम नहीं है वह घुसपैठिये हैं और इसमें किसी भारतीय नागरिक का नाम नहीं कटा है.

खुद रजिस्ट्रार जनरल आॅफ इंडिया शैलेश भी इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं थे. उन्होंने मसौदा जारी करते हुए कहा था कि इस संबंध में लोगों को आपत्ति जताने की पूर्ण और पर्याप्त गुंजाइश दी जाएगी.

लेकिन ऐसा लगता है कि भाजपा के नेता इन नागरिकों के ‘घुसपैठिये’ होने के बारे में पूरी तरह आश्वस्त हैं. तेलंगाना से भाजपा के विधायक टी. राजा सिंह ने इस बारे में टिप्पणी करते हुए कहा कि अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस उनके देश नहीं लौटने पर गोली मार देनी चाहिए. हालांकि राजा सिंह अब पार्टी छोड़ दी है.

एनआरसी मसौदा जारी होने के बाद उन्होंने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर एक वीडियो संदेश पोस्ट में कहा, ‘अगर ये लोग, अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या शराफत से नहीं लौटते हैं तो उन्हें उनकी भाषा में समझाने की जरूरत है. उन्हें गोली मार देनी चाहिए तभी भारतीय सुरक्षित रह सकेंगे.’

उन्होंने कहा कि 1971 के युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में बांग्लादेशियों ने असम में घुसपैठ की, जहां 40 लाख लोग अब भी अवैध तरीके से रह रहे हैं.

एनआरसी को देश भर में लागू करने की मांग भी उठी और यह मांग ज्यादातर भाजपा नेताओं की ओर से की गयी. असम में नागरिकता संबंधी नियम देश भर से अलग हैं, असम समझौते के चलते वहां एनआरसी की ज़रूरत समझी गयी, लेकिन लगातार इसकी प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे.

देश के विभिन्न राज्यों में असल में एनआरसी की ज़रूरत है या नहीं, यह कितनी महत्वपूर्ण होगी, इस बारे में कोई स्पष्ट विचार न होने के बावजूद भाजपा नेता ‘घुसपैठियों’ को देश से निकाल फेंकने की मांग दोहरा रहे थे.

भाजपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि देश के सभी राज्यों में इसका अनुसरण किया जाना चाहिए क्योंकि अवैध बांग्लादेशी शरणार्थी देश के कई हिस्सों में रह रहे हैं.

नरेश अग्रवाल ने कहा, ‘यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है. उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य ऐसे राज्य हैं जहां असम की ही भांति अवैध बांग्लादेशी शरणार्थी रह रहे हैं.’

बीते एक अगस्त को दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी मांग की थी कि दिल्ली में भी एनआरसी की तरह सर्वे करवाया जाना चाहिए. तिवारी ने केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि दिल्ली में भी बड़ी संख्या में रोहिंग्या और विदेशी घुसपैठिये रह रहे हैं.

बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद अश्विनी चौबे का बयान भी आया. उन्होंने कहा, ‘ऐसे घुसपैठिये चाहे बंगाल में हों, बिहार में हों या दिल्ली में इन्हें निकाल कर बाहर करना चाहिए. निश्चित रूप से बांग्लादेशी बिहार में हैं, बंगाल में हैं. निश्चित रूप से जो असम में हुआ है वो बिहार में भी होना चाहिए. बिहार हो, बंगाल हर जगह करना चाहिए.’

वहीं बिहार के ही एक अन्य भाजपा नेता भी एनआरसी मसौदा जारी होने के बाद घुसपैठियों और शरणार्थियों में अंतर बताते नज़र आये. बिहार सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री विनोद नारायण झा ने कहा कि शरणार्थियों और घुसपैठियों में अंतर होता है. विपक्ष को ये सोचना चाहिए कि ये देश भारतीयों के लिए है, किसी घुसपैठियों के लिए नहीं.

हालांकि इस बीच भाजपा महासचिव राम माधव ने कहा कि एनआरसी केवल असम तक सीमित रहेगा. एनआरसी में ‘नेशनल’ शब्द इस्तेमाल किया गया है, लेकिन अब तक यह केवल असम के लिए ही है.

Assam NRC BJP leaders spreading misinformation
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एनआरसी का सबसे ज़्यादा विरोध पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया था, उनके विरोध के बाद पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष भी पीछे नहीं रहे.

घोष ने मसौदा जारी होने के बाद कहा, ‘अगर भाजपा यहां (बंगाल में) चुनाव जीतकर सत्ता में आई तो यहां भी एनआरसी लागू किया जाएगा. यहां रहने वाले तमाम अवैध नागरिकों को बांग्लादेश भेज दिया जाएगा. साथ ही घुसपैठियों का समर्थन करने वालों को भी देश से बाहर निकाल दिया जाएगा.

वहीं भाजपा महासचिव और पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने भी कहा कि पश्चिम बंगाल का युवा चाहता है कि बांग्लादेश से आए घुसपैठियों की पहचान हो, जिसकी वजह से उन्हें काफी दिक्कतों जैसे कि बेरोजगारी और कानून व्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है. भाजपा उनकी मांगों का समर्थन करती है.

2 अगस्त को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में मांग उठाई कि एनआरसी पूरे देश में लागू होनी चाहिए.

दुबे ने कहा कि एनआरसी का मुद्दा पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है. पूर्वी बंगाल से पश्चिमी बंगाल में लगातार पलायन होता रहा. असम में गोपीनाथ बारदोलोई ने इस विषय पर आंदोलन भी चलाया था. असम में एक लाख एकड़ भूमि पर ऐसे लोगों को बसाया भी गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि जम्मू कश्मीर, पूर्वोत्तर समेत कई क्षेत्रों में जनगणना नहीं हुई है और एक खास समुदाय की जनसंख्या काफी बढ़ी है.

इस बीच असम के राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी ने एनआरसी को उपलब्धि करार दिया और इसे देश में घुसपैठ की समस्या का कारगर समाधान बताया.

उन्होंने भी देश भर में एनआरसी लागू करने की पैरवी की और कहा कि जिस प्रकार से असम ने अपनी एनआरसी तैयार की है, देश के हित में यह बेहतर होगा कि हर राज्य अपनी एनआरसी तैयार कराए ताकि देश की सरकार को और राज्य की सरकार को यह पूर्ण जानकारी रहे कि राज्य और देश में कौन विदेशी रह रहे हैं और जो विदेशी रह रहे हैं उनको भी यह जानकारी हो कि वे बतौर विदेशी रह रहे हैं.

भाजपा नेताओं के इन दावों के बीच कई बार असम एनआरसी कोऑर्डिनेटर प्रतीक हजेला द्वारा कहा गया कि नागरिकों को डरने की आवश्यकता नहीं है. इस मसौदे के बारे में आपत्तियां 7 अगस्त के बाद दर्ज की जा सकेंगी, लेकिन भाजपा नेताओं को शायद इससे कोई फर्क नहीं पड़ा.

एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में पहुंचे भाजपा नेता एनआरसी ड्राफ्ट के पूरे होने की बात तो कह रहे थे, लेकिन इन नागरिकों को ‘घुसपैठिया’ ही कह रहे थे.

7 अगस्त को न्यूज18 इंडिया के एक कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि जिनका नाम एनआरसी में नहीं है, उनसे वोट देने का अधिकार ले लेना चाहिए. ये घुसपैठिये हैं. लेकिन जब तक एनआरसी ड्राफ्ट का काम पूरा नहीं हो जाता सभी को एक मौका दिया जाएगा. ऐसे लोग अपनी नागरिकता का सबूत पेश कर सकते हैं.

इसी कार्यक्रम में भाजपा नेता राम माधव और सुब्रमण्‍यम स्‍वामी भी इस बात पर राज़ी दिखे कि इन लोगों से वोट देने का अधिकार वापस ले लेना चाहिए.

लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने स्पष्ट कर चुके थे कि एनआरसी से नाम हटने पर मतदाता सूची से स्वत: नाम कटने का अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए.

लेकिन इसके बावजूद भाजपा नेताओं की देश की सुरक्षा के लिए ‘घुसपैठियों’ को बाहर निकालने हुंकार धीमी नहीं पड़ी.

11 अगस्त को खुदीराम बोस की पुण्यतिथि पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कोलकाता पहुंचे और एक रैली में कहा कि एनआरसी का मतलब घुसपैठियों को देश से भगाना है. घुसपैठिये टीएमसी के वोटर हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को निशाने पर लेते हुए वे यह भी बोले, ‘ममता दीदी, एनआरसी आपके रोकने से नहीं रुकेगी.’

इसके बाद 13 अगस्त को मेरठ पहुंचे शाह ने कहा, ‘हमने बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर साहस दिखाया तो कांग्रेस ने बखेड़ा शुरू कर दिया. ममता बनर्जी भी हाय-तौबा मचा रही हैं. हमारा साफ कहना है कि हमारे नेता नरेंद्र मोदी ने 56 इंच का सीना दिखाया है और एक भी घुसपैठिये को हम देश में रहने नहीं देंगे.’

Assam NRC BJP leaders spreading misinformation
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उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी थे. एनआरसी के मुद्दे पर बोलने से वे भी नहीं चूके. उन्होंने कहा कि अगर ज़रूरत हुई तो उत्तर प्रदेश में भी एनआरसी लागू किया जाएगा. देश एक भी घुसपैठिया स्वीकार नहीं करेगा.

इस बीच भाजपा के एक अन्य नेता भी पीछे नहीं रहे. भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर ने कहा देश को किसी भी सूरत में धर्मशाला नहीं बनने देंगे और 2019 में सत्ता में आने के बाद एनआरसी को संपूर्ण देश में लागू किया जाएगा.

उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे अपने परिवार के प्रति भी वफादार नहीं है, क्योंकि एनआरसी की शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ही की थी लेकिन कांग्रेस दस साल के कार्यकाल में एनआरसी को लागू करने की हिम्मत नहीं जुटा सकी.

हालांकि इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों को आश्वस्त किया कि किसी भी भारतीय नागरिक को देश नहीं छोड़ना पड़ेगा.

समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘मैं जनता को आश्वस्त करता हूं कि किसी भी भारतीय को देश नहीं छोड़ना पड़ेगा. लोगों को उचित प्रक्रिया के तहत संभावित अवसर दिए जाएंगे. एनआरसी हमारा वादा था जो हमने माननीय सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पूरा किया. यह राजनीति नहीं बल्कि जनता के बारे में है. अगर कोई इसके बारे में राजनीति कर रहा है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.’

प्रधानमंत्री ने तो यह कह दिया, लेकिन पार्टी के अलग-अलग नेताओं के बयान इस मामले पर हो रही राजनीति में आग में घी का ही काम कर रहे हैं. एनआरसी को लेकर भाजपा का ही एकमत न होना जनता से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर उनकी गंभीरता पर सवाल खड़े करता है.

Source: thewirehindi.com

बड़ी खबर: कांग्रेस ने अमित शाह की राज्यसभा सदस्यता सस्पेंड करने की भी मांग की!

Congress urges EC to suspend Amit Shahs Rajya Sabha membership over false affidavit

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह पर राज्यसभा चुनाव के समय अपने शपथ पत्र में देनदारियों का ब्यौरा जानबूझकर छिपाने का आरोप लगा है। कांग्रेस पार्टी ने शाह के खिलाफ चुनाव आयोग से आपराधिक मामला चलाने की मांग की है।

कांग्रेस ने कहा कि अमित शाह ने ऐसा करके जन प्रतिनिधि कानून की धारा 125 ए के तहत अपराध किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबित कांग्रेस ने बीजेपी अध्यक्ष की राज्यसभा सदस्या सस्पेंड करने की भी मांग की है।

कांग्रेस नेता कहा कि मीडिया में इस संबंध में आईं खबरों के अनुसार बीजेपी अध्यक्ष ने अपनी संपत्तियों और देनदारियों का पूरा विवरण जानबूझकर नहीं दिया है और ऐसा कर उन्होंने जन प्रतिनिधि कानून की धारा 125 ए के तहत अपराध किया है। आयोग को जानबूझकर छिपाई गई इस जानकारी को लेकर उनके खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, विवेक तन्खा तथा जयराम रमेश ने सोमवार को इस संबंध में यहां चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपा।

उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधि कानून 2004 के अनुच्छेद 75 ए के तहत चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को अपनी शैक्षिक योग्यता, संपत्ति और देनदारियों का शपथ देकर पूरे विवरण के साथ अनिवार्यरूप से सार्वजनिक करना होता है।

सिब्बल ने कहा कि खबरों के अनुसार बीजेपी अध्यक्ष के बेटे जय शाह ने कुसुम फिनसर्व नाम की अपनी नई कंपनी बनाई और इसके लिए अपने पिता की सम्पत्ति गिरवी रखकर गुजरात कोपरेटिव बैंक से 25 करोड़ रुपए का ऋण लिया था।

उन्होंने कहा कि यह देनदारी है। क्योंकि 25 करोड़ का ऋण तब ही मिलता है जब इसके लिए सम्पत्ति गिरवी रखी जाती है। इसका मतलब है कि निश्चित रूप से आपको पैसा लौटाना पड़ेगा और जो पैसा लौटाना होता है वह देनदारी है।

कांग्रेस ने कहा कि आयोग से शिकायत की गई है कि शाह ने इस बात का उल्लेख अपने शपथ पत्र में नहीं किया है और यह 2004 के नियम का उल्लंघन किया है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया है और राज्यसभा के लिए दायर शपथ पत्र में इस देनदारी का विवरण नहीं दिया है।

आयोग को उनकी इस याचिका को राज्यसभा के सभापति को भी भेजना चाहिए ताकि राज्यसभा भी उनके खिलाफ कार्रवाई शुरु की जा सके। उन्होंने कहा कि आयोग ने भरोसा दिया है कि वह इस मामले पर विचार करेगा और जल्द से जल्द फैसला लेकर जो जरूरी होगा कार्रवाई की जाएगी।

 

Source: hindi.siasat.com

सरकार का जनता के यक़ीन और भरोसे के साथ खिलवाड़- मणिशंकर अय्यर

Mani Shankar Aiyar said government play peoples faith and confidence

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के NRC पर बयान पर कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा कि बड़ी खुशी है कि अमित शाह खुद को कांग्रेसी समझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 1985 का समझौता और ये जो कदम उठाया जा रहा है इनके बीच किसी प्रकार का संबंध नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘मैं खुद राजीव गांधी की सरकार में जॉइंट सेक्रेटरी था। जिस समय इस समझौते पर राजीव गांधी ने तय किया उस समय में उनके साथ ही था। उस आधार पर मैं कहता हूं कि जो समझौते में लिखा था और एनआरसी पर यह जो कदम उठाया जा रहा है इनमें में किसी प्रकार का संबंध नहीं है।

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर कहा कि विपक्षी दल इस मसले पर देश को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस वोटबैंक के चक्कर में बंगाली घुसपैठियों को बाहर करने का साहस नहीं दिखा सकी और अब सवाल उठा रही है।

उन्होंने कहा था कि असम एकॉर्ड जो राजीव गांधी जी की अध्यक्षता वाली सरकार के समय में हुआ था, NRC उसकी आत्मा है जिसमें व्याख्या की गई है कि एक-एक अवैध घुसपैठिये को चुनकर देश की मतदाता सूची से बाहर किया जाएगा।

वहीं, अय्यर ने कहा कि तत्कालीन समझौते में ये कहा गया था कि एक ट्रिब्यूनल बनेगा जो मुकम्मल तौर पर जांच करने के बाद निष्कर्ष पर पहुंचेगा कि मार्च 1971 कौन-कौन गैर कानूनी तरीके से आए। जब तक सुप्रीम कोर्ट ने इस ट्रिब्यूनल को गैर संवैधानिक करार नहीं दिया था तब तक काम बहुत तरीके से अच्छे से हो रहा था।

उन्होंने कहा कि उसी तरीके का कोई तर्क निकाला जाना चाहिए था लेकिन ये जो इन्होंने किया है कि अचानक 40 लाख जो हिंदुस्तान के बाशिंदे हैं। उनपर अब एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया गया है।

उन्होंने कहा, ‘एक लिस्ट बनाई गई है, जिसमें 40 लाख लोगों पर सवाल खड़े कर दिए गए हैं। हमारे जमाने में और 1985 के समझौते के तहत जिन लोगों को यह तय किया गया था कि वह गैर कानूनी तरीके से आए थे उनको वापस बांग्लादेश भेजा गया।

उनके अलावा, कांग्रेस प्रवक्ता आरपीएन सिंह ने कहा कि अमित शाह थोड़ा पढ़ लिया करें। राहुल गांधी ने पहले ही फेसबुक पेज पर इस मसले पर अपना स्टैंड साफ कर दिया है। राजीव गांधी ने समझौता साइन किया था, लेकिन सरकार ने इसको त्रुटिपूर्ण तरीके से करके चुनावी साल में चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल किया।

 

Source: hindi.siasat.com

अमित शाह के बेटे की एक और बड़ी लूट! 5 करोड़ की कंपनी को मिला 97 करोड़ का कर्ज, कर्ज देने वाले बैंक ‘भाजपा’ से संबंधित

Amit Shahs son get crores of credit on basis of cheap guarantees

भाजपा ने कई साल तक राहुल गाँधी को ‘शहज़ादा’ नाम से पुकारा। लेकिन पिछले साल से भारतीय राजनीति में एक नया शहज़ादा आया है जिसे राजनीतिक पार्टियाँ और मीडिया “शाहज़ादा” कहकर बुलाती है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह को इस नाम से पुकारा जा रहा है। इसका कारण है उनकी कंपनियों में अचानक आया कई गुना मुनाफा और उसका राजनीतिक संबंध। अब एक बार फिर से उनकी ऐसी ही एक कंपनी का खुलासा हुआ है।

‘द कैरावान’ पत्रिका की एक खबर के मुताबिक, जय शाह की कंपनी ‘कुसुम फिनसर्व’ को पिछले कुछ सालों में सहकारी बैंक, निजी बैंक और सरकारी कंपनी से 97.35 करोड़ रुपये का कर्ज मिला है। जबकि कंपनी लगातार घाटे में रही है और कंपनी का कुल मूल्य 5.83 करोड़ रुपये हैं। जो कर्ज के मुकाबले बहुत कम है।

जिन ज़मीनों को गिरवी रख ये कर्ज दिए जा रहे हैं उनकी कीमत भी कर्ज के मुकाबले बहुत कम है।

कर्ज देने वाले बैंक और सरकारी कंपनी से भाजपा और केंद्र सरकार का संबंध है। इसलिए इस बात का संदेह पैदा होता है कि अमित शाह अपने राजनीतिक कद का फायदा अपने बेटे जय शाह को फायदा पहुँचाने के लिए उठा रहे हैं और भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं।

गौरतलब है कि इस से पहले भी न्यूज़ वेबसाइट ‘द वायर’ ने खुलासा कर बताया था कि जय शाह की एक कंपनी ‘टेम्पल एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड’,जिसको 2014 में 50,000 का मुनाफा हुआ था, उसका मुनाफा अगले साल बढ़कर 80.5 करोड़ रुपयें हो गया। खुलासे के बाद अक्टूबर 2016 में इस कंपनी ने काम करना बंद कर दिया।

 

Source: boltaup.com

ममता सरकार द्वारा न्यूज़ चैनलों को बंद किए जाने के अमित शाह के आरोपों पर पुण्य प्रसून बाजपेयी का तंज, बोले- “वाक़ई देश में लोकतंत्र है, अच्छा लगा सुनकर”

Punya Prasun Bajpai attack Amit Shah

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार (11 अगस्त) को कोलकाता में ममता सरकार पर हमला करते हुए कहा कि बंगाल को घुसपैठियों का घर नहीं बनने देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी शरणार्थियों के खिलाफ नहीं। रैली के दौरान उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस बांग्लादेश से घुसपैठ को संरक्षण दे रही है। ऐेसी सरकार को हटाना होगा।

इस दौरान अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बीजेपी अध्यक्ष ने ममता सरकार पर बंगाली चैनलों के सिग्नल को प्रभावित करने का आरोप लगाया। अमित शाह ने कहा कि रैली के दौरान अनेक प्रकार का व्यवधान डालने का काम किया गया। आज बंगाल की जनता रैली न देख पाए इसलिए सारे बांग्ला चैनलों को डाउन (बंद) कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि अभी यह रैली बंगाल की जनता देख नहीं पा रही है। बीजेपी अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि ममताजी हमारी आवाज बंद करने से यह आवाज रूकेगी नहीं। मैं बंगाल के हर जिले में जाऊंगा और टीएमसी को उखाड़ दूंगा। लोकतंत्र का इतिहास उठाकर देख लीजिए, जिन्होंने भी आवाज दबाने का काम किया है वह खत्म हो गए।

पुण्य प्रसून बाजपेयी ने कसा तंज

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा ममता सरकार पर बंगाली न्यूज चैनलों के सिग्नल को प्रभावित किए जाने के आरोपों पर वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने ट्वीट कर तंज कसा है। बाजपेयी ने ममता सरकार द्वारा चैनलों को बंद किए जाने के अमित शाह के बयान को शेयर करते हुए लिखा है, “वाक़ई देश में लोकतंत्र है…अभिव्यक्ति की आज़ादी होनी चाहिए…अच्छा लगा सुन कर”।

बता दें कि देश के प्रमुख हिंदी समाचार चैनल ABP न्यूज में पिछले दिनों भारी उथल पुथल देखने को मिला। मोदी सरकार के आलोचक के रूप में चैनल में कार्यरत प्रमुख नामों को या तो इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया गया या उन्हें रिपोर्ट ना करने के लिए निर्देश दे दिया गया। मोदी सरकार के कार्यों को लेकर सवाल पूछने वाले चैनल में कार्यरत कई पत्रकारों को तो जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है।

ABP न्यूज़ में 1-2 अगस्त को जो कुछ हुआ, वह काफी भयानक था। 24 घंटे के अंदर चैनल के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर और वरिष्ठ पत्रकार व एंकर पुण्य प्रसून बाजपेयी ने ABP न्यूज से इस्तीफा दे दिया। प्रसून के अलावा अभिसार शर्मा को भी लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है। बता दें कि बाजपेयी का ‘मास्टर स्ट्रोक’ शो हर रोज सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे आता था।

माना जा रहा है कि मिलिंद खांडेकर और पुण्य प्रसून बाजपेयी की विदाई ‘मास्टरस्ट्रोक’ के कारण ही हुई है। देश के वरिष्ठ पत्रकारों में से एक बाजपेयी अपने शो ‘मास्टर स्ट्रोक’ से मोदी सरकार की ना​कामियों और जनता से किए कथित झूठे वादों का सच उजागर कर रहे थे। जिसके चलते अब उन्हे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ गया है।

कोलकाता में अमित शाह का भारी विरोध, लगे – ‘BJP वापस जाओ’ के पोस्‍टर

Posters of go back BJP pop up in Kolkata ahead of Amit Shah rally

पश्चिम बंगाल में अपनी जड़े मजबूत करने में जुटी बीजेपी का भारी विरोध हो रहा है। कोलकाता में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली से पहले पूरे शहर में ‘BJP वापस जाओ’ के पोस्‍टर देखने को मिल रहे है। हालांकि बीजेपी का दावा है कि ये पोस्टर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा लगाये गए हैं।

एएनआई ने पोस्टरों के तस्वीर जारी की हैं। इन पोस्टरों पर ‘‘भाजपा बंगाल छोड़ो’’ और ‘‘बंगाल विरोधी भाजपा वापस जाओ’’ लिखा है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक ये पोस्टर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा लगाये गए हैं। हालांकि इस आरोप से पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इनकार किया।

उधर, बीजेपी ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अमित शाह की रैली में आनेवाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। इतना ही नहीं बीजेपी ने दावा किया कि कुछ अज्ञात लोगों ने नयाबसात इलाके में शुक्रवार देर रात एक बस पर हमला कर दिया। इस बस में अमित शाह की रैली में जाने वाले कार्यकर्ता शामिल थे। हालांकि, घटना में कोई घायल नहीं हुआ है।

जानकारी के मुताबिक मायो रोड पर बीजेपी अध्यक्ष शाह ‘युवा स्वाभिमान समवेश’ रैली को संबोधित करेंगे। यह रैली दोपहर 1 बजे होगी। बता दें कि बंगाल में लोकसभा की 43 सीटें हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी को अकेले 34 सीटें मिली थीं।

शाह झूठ बोल रहे हैं, UPA सरकार ने 80 हजार बांग्लादेशियों को लौटाया: कांग्रेस

Congress says UPA deported more than 80000 bangladeshis NDA just 1822 in 4 years

कांग्रेस ने अवैध प्रवासियों को देश से बाहर भेजने के अमित शाह के दावे को झूठ का पुलिंदा बताया है और उनसे गलतबयानी के लिए माफी मांगने को कहा.

कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2005 से 2013 के दरम्यान यूपीए सरकार ने 82,728 बांग्लादेशियों को प्रत्यर्पित किया, जबकि मोदी सरकार के पिछले चार साल में मात्र 1,822 लोगों को लौटाया गया है. सुरजेवाला ने एनआरसी को भी कांग्रेस का ‘विचार’ बताया.

सुरजेवाला ने प्रत्यर्पण से जुड़े आंकड़े बताने के लिए राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से दिए गए जवाबों का हवाला दिया. साल 2008, 2016 और 2018 में भारत से कितने विदेशी वापस भेजे गए, इस बाबत राज्यसभा में तीन अलग-अलग प्रश्न पूछे गए थे.

उसके जवाब में बताया गया था कि 2005-2013 के बीच (यूपीए सरकार के दौरान) 88,792 बांग्लादेशी नागरिक वापस भेजे गए, जबकि 2014 से 2017 के बीच 1,822 बांग्लादेशियों को बैरंग लौटाया गया. इस दौरान एनडीए की सरकार थी.

Congress says UPA deported more than 80000 bangladeshis NDA just 1822 in 4 years
Congress says UPA deported more than 80000 bangladeshis NDA just 1822 in 4 years

‘मई 2016 तक तरुण गोगोई सरकार ने NRC के 80% काम पूरा कर लिया था’

इससे पहले शनिवार को दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में सुरजेवाला ने कहा, ‘मई 2016 तक असम में तरुण गोगोई की सरकार ने एनआरसी के 80 प्रतिशत काम पूरा कर लिया था. कांग्रेस असम करार से पूरी तरह जुड़ी हुई है लेकिन इस प्रक्रिया से 40 लाख लोग बाहर रह गए. इसमें हिन्दू बंगाली हैं, सेना के लोग हैं, दूसरे राज्यों के लोगों के नाम भी हैं.’

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस का यह भी मानना है कि हर भारतीय नागरिक को अपनी नागरिकता साबित करने का भरपूर मौका मिलना चाहिए.’ सुरजेवाला ने आरोप लगाया, ‘बीजेपी पूरी प्रक्रिया को सामाजिक तानेबाने को तोड़ने के लिए इस्तेमाल कर रही है. इसका कारण है कि मोदी सरकार अपनी नाकामियों से देश का ध्यान भटकाना चाहती है.

Source: hindi.firstpost.com

2019 में BJP को हराने के लिए शिवसेना भी ममता की रैली में होगी शामिल, मोदी सरकार के खिलाफ भरेगी हुंकार

Uddhav Thackeray Mamata Banerjee rally BJP

बीजेपी के खिलाफ विपक्ष के साथ साथ उनके सहयोगी दल भी अब खुलकर उनके विरोध में सामने आने लगे है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जहां एक तरफ विपक्ष को एकजुट करने में लगी है वहीँ बीजेपी के सहयोगी दल भी ममता का साथ देते नज़र आने लगे है।

यही वजह है कि शिवसेना से साफ किया है की ममता बनर्जी की रैली में उद्धव ठाकरे भी शामिल होने जायेंगें।

दरअसल ममता बनर्जी ने दिल्ली आते ही सभी दलों से मुलाकात की। इनमें एनसीपी से लेकर कांग्रेस, AAP और शिवसेना जैसे दल शामिल है। ऐसे में शिवसेना का ममता की रैली में शामिल होना बीजेपी के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है।

ऐसा इसलिए क्योंकि ममता ने पहले से साफ़ कर दिया है की विपक्ष को एकजुट होने ज़रूरत है बाकी प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव के बाद फैसला लिया जायेगा।

बता दें कि बीजेपी और शिवसेना के बीच आई दूरियों की वजह महाराष्ट्र की राजनीति है। भले ही अमित शाह कह चुके हो की हम एक साथ है मगर शिवसेना इस बात को नहीं मानती है। इसलिए तो अब वो मोदी सरकार के विरोध में होने जा रही रैली में ममता के साथ बीजेपी के खिलाफ हुंकार भरती नज़र आएगी।

 

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UP पुलिस के लिए योगी ‘भगवान’ है लेकिन बेटी ‘देवियाँ’ नहीं ! वहाँ नतमस्तक होते हैं लेकिन बेटियों पर लाठियां बरसाते हैं

Congress Leader targets Yogi govt over two student get arrested during protest against Amit Shah

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के इलाहाबाद दौरे पर छात्राओं पर लाठियां बरसाई गई। पुलिस सत्ता के सामने नतमस्तक हो रही है। वहां इंसाफ की कैसे उम्मीद की जा सकती है जहां छात्राओं को सीधे गिरफ्तार करके जेल में ठूस दिया गया हो मगर पुलिस अधिकारी सत्ता के आगे सर झुका लिए।

इस मामले पर कांग्रेस नेता राधिका खरे ने सोशल मीडिया पर लिखा- एक तरफ़ मुख्यमंत्री के सामने नतमस्तक हो जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ़ शांतिपूर्वक प्रदर्शन करती हुई छात्रा को घसीट कर मारते हैं।

गौरतलब हो कि गुरुपूर्णिमा के मौके पर गुरु शिष्य की परंपरा को डीएसपी और सूबे के सीएम योगी निभाते नज़र आये। मगर एक पुलिस वाला जब वर्दी में अपने आप को गुटनों के बल रखते हुए जब आदर सत्कार कर रहे थे तब कानून की रखवाली करने वाले ही कानून की धज्जियाँ उड़ाते नज़र आये और हाथ जोड़कर सीएम योगी का आशीर्वाद लेते नज़र आये थे।

बेरोजगारी और बदहाल शिक्षा व्यवस्था पर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने जब अमित शाह के काफिले के सामने विरोध किया तो पुलिस ने न सिर्फ उन्हें बाल पकड़कर घसीटते हुए नज़र आये बल्कि उन्हें अभी तक जेल में कैद कर रखा है।

 

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