RBI की रिपोर्ट : 10 लाख करोड़ के बाद भी बढ़ता रहेगा NPA, मोदी जी कब तक गरीब चुकाता रहेगा अमीरों का कर्ज ?

RBI report says NPA will cross over 10 lakhs crore

फंसे हुए कर्जों (एनपीए) भारतीय बैंकों के लिए सबसे बड़ी समस्यां बन चुका है। मोदी सरकार इस मामले में आलोचना का सामना कर रही है।

सरकार का कहना है कि उसने इससे निजात पाने के लिए कानून बनाया है लेकिन रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) के हालिया बयान सरकार को दावे को निराधार साबित कर दिया है।

आरबीआई ने कहा है कि बैंकों को अभी एनपीए की समस्या से निजात नहीं मिलने वाली है। ये 10 लाख करोड़ से ज़्यादा हो गया है, अभी और बढ़ेगा। केंद्रीय बैंक ने कहा कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष में बैंकों का डूबा क़र्ज़ और बढ़ेगा।

एन.पी.ए बैंकों का वो लोन होता है जिसके वापस आने की उम्मीद नहीं होती, इस कर्ज़ में 90% से ज़्यादा हिस्सा उद्योगपतियों का है।

अक्सर उद्योगपति बैंक से कर्ज़ लेकर खुद को दिवालिया दिखा देते हैं और उनका लोन एन.पी.ए में बदल जाता है। यही उस लोन के साथ होता है जिसे बिना चुकाए नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग देश छोड़कर भाग जाते हैं।

रिज़र्व बैंक की 2017-18 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार बैंकिंग प्रणाली में मार्च, 2018 के अंत तक कुल एनपीए और पुनर्गठित क़र्ज़ कुल ऋण के 12.1 प्रतिशत पर पहुंच गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एनपीए पर प्रावधान बढ़ने और बांड पर प्राप्ति बढ़ने की वजह से मार्क टू मार्केट (एमटीएम) ट्रेजरी नुकसान जैसे सामूहिक प्रभाव से बैंकों का मुनाफे पर असर हुआ है और शुद्ध रूप से उनको घाटा उठाना पड़ा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) का कुल सकल एनपीए 31 मार्च, 2018 तक बढ़कर 10,35,528 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो 31 मार्च, 2015 को 3,23,464 करोड़ रुपये था.

गौरतलब है कि लगातार सामने आ रहे बैंक घोटालों के चलते पिछले कुछ महीनों से बैंकों का घाटा बढ़ता जा रहा है। देश के 21 सरकारी बैंकों में से 15 को 2017-18 की चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च) में 47000 करोड़ से ज्यादा का घाटा हुआ है।

सरकारी बैंकों के एन.पी.ए में भी पिछले कुछ सालों में इसी तरह का बढ़ोतरी देखी गई है। रिज़र्व बैंक ने बताया है कि मार्च 2018 में एनपीए 10.40 लाख करोड़ पहुँच चुका है। जबकि 2013-14 में ये 2 लाख 40 हज़ार करोड़ था। देश में लगभग 90% एन.पी.ए सरकारी बैंकों का ही है।

 

Source: boltaup.com