अडानी और अंबानी पर 50,000 करोड़ के कोयला घोटाले का आरोप, DRI ने दिए सबूत, बॉम्बे HC पहुंचे अडानी

Adani and Ambani accused of 50000 crore coal scam

मोदी सरकार के करीबी माने जाने वाले गौतम अडानी और अनिल अंबानी पर 50,000 करोड़ से ज़्यादा के कोयल घोटाला का आरोप राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने लगाया है। अडानी समूह मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा है।

समूह ने एक याचिका दायर करते हुए समूह की कुछ फर्मों के खिलाफ जारी किए गए लेटर्स रोगेटरी (एलआर) को रद्द करने की अपील की है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ये एलआर डीआरआई ने इन फर्मों द्वारा इंडोनेशिया से आयात किए गए कोयले की कीमत को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए जाने (ओवर इनवॉयसिंग) के मामले में जारी किए हैं।

एलआर एक औपचारिक अनुरोध पत्र होता है जो किसी आरोपित कंपनी की जांच के लिए दूसरे देश से न्यायिक सहायता मांगने के लिए दिया जाता है।

अडानी समूह ने यह कदम उसकी कंपनी अडानी ग्लोबल के खिलाफ सिंगापुर हाई कोर्ट के फैसले के बाद उठाया है। वहां की एक निचली अदालत ने अडानी समूह की कुछ कंपनियों के अलावा कुछ शिपिंग कंपनियों और बैंकों से कहा था कि वे इस मामले में जरूरी दस्तावेज उसके पास जमा कराएं।

अदालत ने यह कदम डीआरआई से एलआर मिलने के बाद उठाया था। इसके खिलाफ अडानी ग्लोबल सिंगापुर हाई कोर्ट में गई थी। लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली थी।

क्या है घोटाला
मार्च, 2016 में डीआरआई ने दावा किया था कि बिजली उत्पादन क्षेत्र में सक्रिय कई कंपनियों द्वारा इंडोनेशिया से आयात किये जा रहे कोयले की ओवर इनवॉयसिंग की गई। जानकारों के मुताबिक इस तरह से न सिर्फ कालेधन को सफेद बनाया जाता है बल्कि सरकारों पर बिजली के दाम बढ़ाने का दबाव भी बनाया जाता है।

‘द कैरावान’ पत्रिका की खबर के मुताबिक, डीआरआई ने पिछले चार साल में अपनी जांच में पाया है कि कोयला खनन और बिजली उत्पादन का कार्य करने वाली निजी कम्पनियाँ ने हज़ारों करोड़ के घोटाले को अंजाम दिया है।

इन कंपनियों में उद्योगपति गौतम अडानी और अनिल अम्बानी की कंपनियां का भी शामिल हैं। इन दोनों ही उद्योगपतियों को मोदी सरकार का करीबी माना जाता है। बता दें, कि डीआरआई वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आती है।

डीआरआई का आरोप है कि इन कंपनियों ने बिजली के लिए विदेश से जो कोयला मंगाया उसकी ओवर-इनवॉइसिंग की यानि उसकी कीमत असल कीमत से बढ़ाकर दिखाई और इस तरह इसका प्रभाव बिजली के दामों पर पड़ा।

अंत में हमेशा की तरह इस घोटाले से भी जनता की कमर टूटी और जनता ने बिजली के महंगे दाम चुकाए। इस तरह इन्होने जनता से बिजली के महंगे दाम वसूल कर घोटाले को अंजाम दिया।

डीआरआई के मुताबिक, ये घोटाला लगभग 50,000 करोड़ का है। इसमें से 30,000 करोड़ रुपये का कोयला इंडोनेशिया से मंगाया गया और 20,000 करोड़ रुपये का चीन से। इसमें सरकारी कम्पनियाँ जैसे ‘नेशनल थर्मल पॉवर कारपोरेशन’ भी शामिल हैं जो इन निजी कंपनियों के साथ मिलकर कार्य करती हैं।

 

Source: boltaup.com