RBI मॉनिटरी कमेटी के मेंबर ने उठाए 8.2% की विकास दर पर सवाल, मोदी सरकार ने GDP फ़ॉर्मूला में की गड़बड़ी!

RBI Monetary committee speaks on 8.2 percent GDP

ये कहा जा रहा है कि जब निवेश से लेकर रोज़गार तक के क्षेत्रों से बुरी ख़बरें आ रही हैं। रुपया गिर रहा है और तेल के दाम थम नहीं रहे हैं तब इतनी विकास दर आना कैसे संभव है।

अब इसी तरह के सवाल रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) की मॉनिटरी कमेटी के एक सदस्य ने उठाए हैं। उन्हें लगता है कि जब दुनिया अमेरिका- चीन ट्रेड वॉर और इमर्जिंग देश करेंसी संकट से परेशान हों तब मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की इतनी ज्यादा ग्रोथ गले नहीं उतरती।

जून की तिमाही में जीडीपी 8.2 प्रतिशत रही है, जिसपर मौद्रिक नीति समिति के सदस्य रविंद्र ढोलकिया ने सवाल उठाते हुए लेख लिखा है।

बता दें कि ढोलकिया इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (अहमदाबाद) में फैकल्टी भी हैं। वहीं नागराज इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ डिवेलपमेंट रिसर्च, मुंबई में प्रफेसर हैं और पांड्या डायरेक्टरेट ऑफ इकनॉमिक्स ऐंड स्टैटिस्टिक्स (गुजरात सरकार) में पढ़ाते हैं।

वींद्र ढोलकिया ने आर नागराज और मनीष पंड्या के साथ मिलकर EPW पत्रिका में लिखे लेख में कहा है कि नए फॉर्मूले से पुरानी सीरीज के मुकाबले जीडीपी में ग्रोथ में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का वेटेज बढ़ गया है। मतलब जीडीपी निकालने का तरीका पहले से बदल दिया गया है इसलिए जीडीपी के आकड़े बढ़कर सामने आए हैं।

लेख के मुताबिक, इस बार उत्पादन की क्षमता देखने के लिए इंडस्ट्री के सालाना सर्वे की जगह कॉर्पोरेट फाइनैंशल डेटा ने ली है और इस वजह से ही पहले के मुकाबले जीडीपी ज्यादा दिखाई दे रही है।

लेख में पूछा गया है कि जीडीपी को 8.2 प्रतिशत करते वक्त विनिर्माण उत्पादन को जरूरत से ज्यादा तो नहीं आंक लिया गया। लेख में सवाल किया गया है कि क्या नई सीरीज में विनिर्माण मूल्य के बारे में पूरी जानकारी दी गई या फिर इसका जरूरत से ज्यादा अंदाजा लगा लिया है।

लेख में लिखा है, ‘उत्पादन क्षेत्र की ज्यादा बढ़ोतरी से नए अनुमानों की सत्यता शंका पैदा करती है, यह आंकड़े मेक्रो इकनॉमिक्स से मेल भी नहीं खाते।’

 

Source: boltaup.com

RBI के आंकड़ों ने पूर्व PM मनमोहन सिंह का कद बढ़ाया, नोटबंदी के बाद कहा था- ये सबसे बड़ा घोटाला है

After noteban Manmohan Singh said this is biggest scam

नोटबंदी को लेकर आरबीआई के जो अंतिम आंकड़े सामने आए हैं उन्होंने मोदी सरकार के नोटबंदी के कदम को गलत तो ठहरा ही दिया है साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरबीआई ने अपनी सालाना रिपोर्ट में बताया है कि प्रतिबंधित 99.3% नोट बैंकों में वापस आया गए हैं।

इन आंकड़ों ने केंद्र सरकार के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के दावे और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हकीकत भी जनता के सामने लाकर रख दी है। इस बात की तुलना करना ज़रूरी हो गया है दोनों में से किसके दावे सच हुए हैं।

8 नवम्बर 2016 की रात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक से टेलीविज़न स्क्रीन पर आ जाते हैं। वो बताते हैं कि उनकी सरकार ने नोटबंदी का कदम उठाया है। यानि 500 और 1000 रुपए के तत्कालीन चलन के नोट बंद कर दिए गए हैं।

After noteban Manmohan Singh said this is biggest scam
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इसका मकसद वो कालेधन पर सख्त कदम उठाना और देश से उसका खात्मा करना बताते हैं। उस लम्बे भाषण में वो कई दावे करते हैं। जैसे इस कदम के बाद कालाधन बैंकों में वापस नहीं आएगा।

डिजिटल इंडिया को बढ़ावा मिलेगा। मुद्रा ना होने से आतंकवाद की कमर टूट जाएगी और देश में नकली मुद्रा का धंदा भी ठप हो जाएगा।

नही?
नोटबंदी के ठीक 15 दिन बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राज्यसभा में खड़े होकर नोटबंदी को भारत के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बताते हैं।

वो ये दावा करते हैं कि इस कदम से कालेधन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। नकली मुद्रा फिर से बाज़ार में आ जाएगी। इस से देश की जीडीपी गिरेगी और लोग लाखों की संख्या में बेरोजगार होंगे।

After noteban Manmohan Singh said this is biggest scam
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नोटबंदी के दो दिन बाद ही कर्नाटक में नए शुरू हुए 2000 के नकली नोट पकड़े जाते हैं। ये खबर पीएम मोदी के नकदी मुद्रा के धंदे को ख़त्म करने के दावे पर पानी फेर देती है।

After noteban Manmohan Singh said this is biggest scam
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गृह राज्यमंत्री हंसराम गंगाराम अहीर संसद में एक सवाल के जवाब में बताते हैं कि 2017 आतंकवाद के लिहाज़ से जम्मू-कश्मीर का सबसे हिंसक वर्ष रहा है।

2016 में जहाँ 155 आतंकी घटनाएँ राज्य में हुई वहीं 2017 में ये बढ़कर 184 हो गई। ये आंकड़े इस बात को साबित करते हैं कि नोटबंदी से आतंकवाद की नहीं बल्कि सिर्फ आम आदमी की कमर टूटी।

After noteban Manmohan Singh said this is biggest scam
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डिजिटल लेनदेन बढ़ने की बात करे तो नवम्बर 2017 में नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया ने बताया कि नोटबंदी के बाद डिजिटल लेन देन में बढ़ावा तो हुआ लेकिन ये लगातार कम हो रहा है।

नवम्बर 2016 में ये 94 लाख करोड़ का डिजिटल ट्रान्सफर हुआ, उसके बाद मार्च 2017 में 149 लाख करोड़ दर्ज किया गया, फिर जुलाई में 107 लाख करोड़ और अक्टूबर 2017 में 99.28 लाख करोड़। मतलब कि डिजिटल लेन-देन लगभग वहीं पर आ रहा है जहाँ ये नोटबंदी के समय था।

After noteban Manmohan Singh said this is biggest scam
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नोटबंदी के छह महीने बाद जब जीडीपी के आंकड़े सामने आए तो जीडीपी दो साल के सबसे निचले स्तर पर चली गई। जीडीपी गिर कर 6.1% पर आ गई जो इसी तिमाही में पिछले साल 7.6% थी।

After noteban Manmohan Singh said this is biggest scam
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अगस्त 2018 में एक आरबीआई रिपोर्ट में सामने आया है कि नोटबंदी से देश के छोटे व्यवसायों को 9 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है।

After noteban Manmohan Singh said this is biggest scam
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रिपोर्ट में बताया गया है कि नोटबंदी और जीएसटी ने देश के एमएसएमई यानि छोटे कारखानें और व्यापार को लाखों करोड़ रुपयें का नुकसान पहुँचाया है और बड़ी संख्या में लोगों को बेरोजगार किया है।

गौरतलब है कि देश में 6 करोड़ 30 लाख एमएसएमई इकाईयां हैं। ये क्षेत्र देश की जीडीपी में 30% का योगदान देता है। देश का 45% उत्पादन इन्ही एमएसएमई इकाईयों में होता है। निर्यात में इस क्षेत्र का 40% का योगदान है।

और अब आरबीआई ने प्रतिबंधित नोटों के गिनती ख़त्म कर बताया है कि कि नोटबंदी के दौरान 15.44 लाख करोड़ रुपए के नोटों पर प्रतिबन्ध लगाया गया था। और इनमें से 15.31 लाख करोड़ रुपिए बैंकों में वापस आ चुके हैं।

मतलब केवल 13000 करोड़ रुपए ही बैंकों में वापस नहीं आ सके। यानि की प्रतिबन्ध किए गए नोटों के 1 प्रतिशत से भी कम। नोटबंदी के दौरान बंद किये गए 500 और 1000 रुपये के 99.3% नोट वापस आ गए हैं। आरबीआई ने ये जानकारी बुधवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में दी।

ये सभी जानकारियां प्रधानमंत्री मोदी के दावों को झूठ साबित करती हैं और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन के दावों को सही। इस से ये भी पता चलता है कि नोटबंदी को कितनी कम तैयारी के साथ अंजाम दिया गया कि सरकार उस से होने वाली तबाही का अंदाज़ा नहीं लगा सकी। जबकि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने मात्र 15 दिनों में नोटबंदी से भविष्य में बनने वाली स्तिथि का आकलन कर उसे राज्यसभा में बता दिया।

एक दावा जो पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने किया था कि नोटबंदी भारत का सबसे बड़ा घोटाला है। इसके लिए कुछ चीज़ों को देखा जा सकता है। मोदी सरकार पर आरोप लगता है कि वो उद्योगपतियों की सरकार है। उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडानी को उनका करीबी माना जाता है।

नोटबंदी के बाद जब 2017 में विश्व उद्योगपतियों पर फोर्ब्स की लिस्ट सामने आती है तो उसमें पता चलता है कि मुकेश अंबानी कि संपत्ति उस वर्ष 76.3% की वृद्धि हुई और वो विश्व के 20वें सबसे मीर व्यक्ति बन गए। वहीं उनके बाद भारत में सबसे ज़्यादा संपत्ति गौतम अडानी की बढ़ी। उस साल उनकी संपत्ति 40% बढ़ी।

After noteban Manmohan Singh said this is biggest scam
After noteban Manmohan Singh said this is biggest scam

ये आंकड़े जो कहते हैं उन्हें परिभाषित करने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन आरबीआई के हालियाँ आंकड़ो ने पूर्व पीएम मनमोहन के सामने पीएम मोदी के दावों को बौना साबित तो कर ही दिया है।

साथ ही एक सवाल और खड़ा कर दिया है कि हमें प्रधानमंत्री स्टेज पर खड़े होकर बोलने के लिए चाहिए या चुप रहकर देश और उसकी अर्थव्यवस्था को सही दिशा में ले जाने के लिए?

 

Source: boltaup.com

फिर से घटी मोदी सरकार की विकास की रफ़्तार, इंडियन रेटिंग्स ने भारत का GDP अनुमान घटाकर किया 7.2%

India ratings reduced india's GDP estimate by 7-2

केंद्र की मोदी सरकार देश की अर्थव्यवस्था के हालात सुधरने का दावा कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से भाषण देते हुए ये दावा किया। लेकिन रेटिंग एजंसियों का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल गहरा रहे हैं। इसलिए भारत की जीडीपी का अनुमान घटा दिया गया है।

रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने 2018-19 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर के अपने अनुमान को घटा दिया है। एजेंसी के अनुसार इस वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.2 फीसदी रहने का अनुमान है। जबकि इससे पहले एजेंसी ने इसके 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।

India ratings reduced india's GDP estimate by 7-2
India ratings reduced india’s GDP estimate by 7-2

एजेंसी ने इसकी प्रमुख वजह 2018-19 में कच्चे तेल के दाम बढ़ने की वजह से मुद्रास्फीति में बढ़ोत्तरी की संभावना होना बताया है। रेटिंग एजेंसी ने अपनी वित्तवर्ष 2018-19 के लिए मध्यावधि परिदृश्य रिपोर्ट में कहा कि बढ़ते व्यापार संरक्षणवाद, रुपए में गिरावट और गैर-निष्पादित आस्तियों में कमी आने के फिलहाल मजबूत संकेत नहीं दिख रहे हैं।

एजेंसी ने कहा कि इसी के चलते उसका अनुमान है कि देश की आर्थिक वृद्धि दर इस दौरान 7.2 फीसदी ही रहेगी। एजेंसी ने कहा है कि 2018- 19 में निजी अंतिम उपभोग व्यय 7.6 फीसदी बढ़ेगा जो कि 2017- 18 में 6.6 फीसदी बढ़ा था।

रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि केवल सरकारी खर्च अकेले पूंजी व्यय चक्र को बढ़ाने के लिए काफी नहीं है। 2012- 2017 से के दौरान अर्थव्यवस्था के कुल पूंजीव्यय में उसका हिस्सा केवल 11.1 फीसदी ही है।

 

Source: boltaup.com

चिदंबरम की चुनौती, यूपीए सरकार के समय जीडीपी दर सबसे बेहतर, बराबर लाकर दिखाएं पीएम मोदी

GDP rate was highest during UPA rule P Chidambaram dares PM Modi to match up

रिपोर्ट आने के बाद कांग्रेस ने लिखा कि जीडीपी श्रृंखला पर आधारित आंकड़ा आखिर आ ही गया। ये साबित करता है कि यूपीए शासन के दौरान (औसतन 8.1 प्रतिशत) की वृद्धि दर मोदी सरकार का कार्यकाल की औसत वृद्धि दर (7.3%) से अधिक रही।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को चुनौती दी कि वे अपने कार्यकाल के पांचवें साल की जीडीपी दर को यूपीए सरकार के बराबर लाकर दिखाए।उन्होंने कहा कि जीडीपी की पुरानी गणना पद्धति ने साबित किया है कि आर्थिक वृद्धि के सबसे सर्वश्रेष्ठ वर्ष यूपीए सरकार के (2004-14) थे। केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों का जिक्र करते हुए चिदंबरम ने कहा, “सच की जीत। जीडीपी गणना की पुरानी पद्धति ने साबित किया है कि आर्थिक वृद्धि दर के सर्वश्रेष्ठ साल संप्रग सरकार के थे।”

उन्होंने कहा, “मैं आशा करता हूं कि मोदी सरकार पांचवें साल अच्छा करेगी। यह यूपीए एक का तो मुकाबला नहीं कर सकती, लेकिन मैं कामना करता हूं कि यूपीए दो के बराबर पहुंच जाए।”

उन्होंने कहा, “यूपीए सरकार ने अबतक की सर्वश्रेष्ठ दशकीय वृद्धि दर दी थी और 14 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला था। उन्होंने 10 साल तक सेवा का मौका देने के लिए लोगों को धन्यवाद दिया।”

रिपोर्ट आने के बाद कांग्रेस पार्टी ने लिखा, “जीडीपी श्रृंखला पर आधारित आंकड़ा आखिर आ ही गया। ये साबित करता है कि यूपीए शासन के दौरान (औसतन 8.1 प्रतिशत) की वृद्धि दर मोदी सरकार का कार्यकाल की औसत वृद्धि दर (7.3%) से अधिक रही।”

Source: navjivanindia.com

भाजपा नेताओं की संसदीय समिति ने कहा- मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र और सेनाओं को 1962 की स्थिति में पहुंचा दिया है

Modi government has weakened the armies

मोदी सरकार पर पिछले कुछ समय से लगातार आरोप लग रहा है कि वो राष्ट्रवाद का ढोंग कर देश के रक्षा क्षेत्र और देश की सेनाओं को कमज़ोर कर रही है। अब ये बात संसद की एक समिति ने भी मान ली है।

सबसे बड़ी चीज़ ये है कि इस समिति के अध्यक्ष किसी विपक्षी पार्टी के नेता नहीं बल्कि एक समय प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शक रह चुके भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी हैं। इतना ही नहीं समिति में 16 भाजपा सांसद भी हैं। मोदी सरकार पर ये अबतक का सबसे बड़ा धब्बा है।

मुरली मनोहर जोशी ने कहा है कि मोदी सरकार आज देश के रक्षा क्षेत्र को उस स्तिथि में ले आई जैसी 1962 में चीन से हार के बाद उसकी थी।

‘सशस्त्र बलों की रक्षा – रक्षा उत्पादन और खरीद’ पर महत्व देते हुए समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मोदी सरकार देश की राष्ट्रीय सुरक्षा की उपेक्षा कर रही है। ये भविष्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

समिति ने तीनों सेनाओं के प्रमुखों से भी बात की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018-19 के बजट में सरकार ने रक्षा क्षेत्र को जीडीपी का 1.6% हिस्सा दिया है। 1962 के बाद देश की रक्षा क्षेत्र को मिला ये जीडीपी का सबसे कम हिस्सा है।

समिति ने कहा है कि जब देश दो मोर्चों पर घिरा है। दूसरी तरफ हिन्द महासागर में भी उसे दबदबा बनाए रखना है। ऐसी स्तिथि में इतना कम बजट रक्षा को देना आलोचनात्मक है। समिति ने सिफरिश करते हुए कहा है कि रक्षा क्षेत्र को वर्तमान ज़रूरतों और भविष्य में हथियारों के आधुनिकरण के लिए प्रयाप्त बजट दिया जाए।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मोदी सरकार आने के बाद देश के रक्षा क्षेत्र पर सरकार ने पूंजी व्यय प्रतिशत यानि सालाना खर्च कम कर दिया है। 2013-14 में तत्कालीन सरकार ने सालाना खर्च का 39% रक्षा क्षेत्र को दिया था। लेकिन अब 2017-18 और 2018-19 में इसे घटाकर क्रमश: 33% और 34% कर दिया गया है।

Source: boltaup.com