यशवंत सिन्हा का आरोप- PM मोदी ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर खुद ही ‘राफेल डील’ को तय किया

Yashwant Sinha attacks PM Modi on Rafale Deal

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने प्रधानमंत्री मोदी पर बड़ा आरोप लगाया है। कथित राफेल घोटाले को लेकर यशवंत सिन्हा ने कहा है कि पीएम मोदी ने विशेष कंपनी को फायदा पहुँचाने के लिए अपने सभी अधिकारों से आगे जाते हुए इस समझौते को खुद तय किया है।

बोलता हिंदुस्तान से राफेल डील पर बात करते हुए पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि जब हम लोग इस मामले की तय में गए तो बहुत सारे चौकाने वाले तथ्य सामने आए। और तब ही हमने तय किया कि हम इस मामले को देश की जनता के सामने रखेंगे।

उन्होंने कहा कि देश में बोफोर्स घोटाले के बाद रक्षा सौदों में कड़े नियमों का पालन किया जाता रहा है लेकिन मोदी सरकार ने राफेल सौदें में सभी नियमों की धड़ल्ले से उपेक्षा की है।

उन्होंने सरकार पर देश की रक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस सौदे में पहले फ़्रांस की ‘डासौल्ट’ कम्पनी के साथ मिलकर भारत की सरकारी कंपनी एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) विमान बनाने वाली थी।

लेकिन इस 50 वर्षीय अनुभव वाली कंपनी को हटाकर अनिल अंबानी की 14 दिन पुरानी कंपनी को इसकी जगह दे दी गई।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि पीएम मोदी ने फ़्रांस जाकर अपने स्तर पर राफेल विमान खरीदने के लिए नया सौदा तय किया।

इसके लिए उन्होंने रक्षा विभाग और रक्षा समितियों की इजाज़त नहीं ली जो कि किसी भी रक्षा सौदे को तय करने के लिए अनिवार्य है। उनको इस तरह से रक्षा सौदा तय करने का अधिकार नहीं है लेकिन उन्होंने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाते हुए इसको तय किया।

क्या है विवाद
राफेल एक लड़ाकू विमान है। इस विमान को भारत फ्रांस से खरीद रहा है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने विमान महंगी कीमत पर खरीदा है जबकि सरकार का कहना है कि यही सही कीमत है। ये भी आरोप लगाया जा रहा है कि इस डील में सरकार ने उद्योगपति अनिल अंबानी को फायदा पहुँचाया है।

बता दें, कि इस डील की शुरुआत यूपीए शासनकाल में हुई थी। कांग्रेस का कहना है कि यूपीए सरकार में 12 दिसंबर, 2012 को 126 राफेल विमानों को 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर (तब के 54 हज़ार करोड़ रुपये) में खरीदने का फैसला लिया गया था। इस डील में एक विमान की कीमत 526 करोड़ थी।

इनमें से 18 विमान तैयार स्थिति में मिलने थे और 108 को भारत की सरकारी कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), फ्रांस की कंपनी ‘डासौल्ट’ के साथ मिलकर बनाती। 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी फ़्रांस यात्रा के दौरान इस डील को रद्द कर इसी जहाज़ को खरीदने के लिए में नई डील की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई डील में एक विमान की कीमत लगभग 1670 करोड़ रुपये होगी और केवल 36 विमान ही खरीदें जाएंगें। नई डील में अब जहाज़ एचएएल की जगह उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी बनाएगी।

जबकि अनिल अम्बानी की कंपनी को विमान बनाने का कोई अनुभव नहीं है क्योंकि ये कंपनी राफेल समझौते के मात्र 14 दिन पहले बनी है। साथ ही टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर भी नहीं होगा जबकि पिछली डील में टेक्नोलॉजी भी ट्रान्सफर की जा रही थी।

 

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‘आप’ की नोएडा रैली में शरीक होंगे यशवंत और शत्रुघ्न सिन्हा

Yashwant and Shatrughan Sinha will be joining AAP Noida rally

2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों में चुनाव अभियान की शुरुआत के लिए आम आदमी पार्टी (आप) की नोएडा में आगामी शनिवार को होने वाली रैली में भाजपा के बागी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा भी शामिल होंगे।

‘आप’ के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने गुरुवार को बताया कि पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में आठ सितंबर को नोएडा में होने वाली रैली में यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा भी शामिल होंगे।

न्यूज एजेंसी भाषा के अनुसार, दिल्ली की सात लोकसभा सीटों पर चुनाव अभियान शुरू करने के बाद ‘आप’ ने अन्य राज्यों में प्रचार कार्य की शुरुआत उत्तर प्रदेश से करने का फैसला करते हुए नोएडा रैली का आयोजन किया है।

संजय सिंह ने बताया कि इसके लिए उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए इससे प्रभावित हो रही जनता के अधिकारों की बहाली की मांग के लिए वह राज्य में जन अधिकार पदयात्रा कर रहे हैं। इसके पहले चरण में उन्होंने पिछले महीने पूर्वी उत्तर प्रदेश में बलिया से बनारस तक पदयात्रा की थी।

दूसरे चरण में सिंह की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर से नोएडा तक की पदयात्रा जारी है। शनिवार को नोएडा पहुंच रही इस यात्रा के समापन पर स्थानीय कमर्शियल ग्रांउड में जन अधिकार रैली आयोजित की गई है।

उल्लेखनीय है कि पिछले लोकसभा चुनाव में भी ‘आप’ ने उत्तर प्रदेश में किस्मत आजमाने की कोशिश की थी, लेकिन बेहतर नतीजे हासिल नहीं हुए थे। हाल ही में उत्तर प्रदेश नगर निगम चुनाव में आप के 60 प्रत्याशी जीते थे।

सिंह ने बताया कि नगर निगम चुनाव के बाद बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव में एक बार फिर पूरे दमखम से उतरने की तैयारी में है। उन्होंने बताया कि अगले चरण में वह रुहेलखंड में बरेली से अमरोहा तक और फिर अंतिम चरण में बुंदेलखंड में ललितपुर से झांसी तक की पदयात्रा करेंगे।

 

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यशवंत सिन्हा, शौरी का मोदी सरकार पर वार, अकेले सभी फैसले लेता है PMO

Yashwant Sinha Arun Shourie attack Modi government

पूर्व केंद्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी और बीजेपी के असंतुष्ट चल रहे सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने नरेंद्र मोदी सरकार पर फिर निशाना साधा है.

शुक्रवार को मुंबई में ‘लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ’ विषय पर परिचर्चा के दौरान यशवंत सिन्हा ने दावा किया कि एनडीए सरकार में निर्णय ‘अकेले ही लिए जा रहे हैं.’ उन्होंने राजनाथ सिंह का नाम लिए बिना दावा किया कि गृह मंत्री को जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन से हटने के पार्टी के निर्णय के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

उन्होंने कहा कि इसी तरह से वित्त मंत्री को जानकारी नहीं थी कि नोटबंदी की घोषणा होने जा रही है. उन्होंने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को ‘35 हजार करोड़ रुपए का घोटाला बताया जो कि 64 करोड़ रुपए के बोफोर्स घोटाले से कहीं बड़ा है.’

वहीं अरुण शौरी ने आरोप लगाया, ‘निश्वित रूप से संविधान और लोकतंत्र खतरे में है. अभी तक पीट-पीटकर मार डालने (मॉब लिन्चिंग) की 72 घटनाएं हुई हैं. सोहराबुद्दीन (फर्जी मुठभेड़) मामले में 54 गवाह पलट चुके हैं. सीबीआई का दुरूपयोग किया जा रहा है. ऐसी उम्मीद नहीं लगती कि चीजें बदलेंगी.’

उन्होंने कहा कि मीडिया सरकार से भयभीत है क्योंकि उसका विज्ञापन बंद हो सकता है.

इस अवसर पर बीजेपी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने फिर दोहराया कि वो खुद से पार्टी नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने कहा, ‘हालांकि यदि वो मुझे बाहर करना चाहें तो मैं उनके विवेक पर सवाल नहीं उठाऊंगा.’

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अटल सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा बोले- मुझे गर्व है कि मैं उस भाजपा का हिस्सा नहीं हूँ जिसने देश को बर्बाद कर दिया

Yashwant Sinha target Modi govt over Rafale Deal

राफेल डील पर कल बीजेपी दो पूर्व दिग्गज नेता यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस की। इस दौरान यशवंत सिन्हा मोदी सरकार पर काफी हमलावर रहे।

यशवंत सिन्हा ने नोटबंदी से लेकर सरकार के मंत्रालयों पर सवाल उठाते हुए कहा कि रक्षा मंत्री को राफेल डील के बारे में पता नहीं होता और वित्त मंत्री को नोटबंदी के बारे में पता नहीं होता। सिन्हा ने कहा कि ऐसी कैसी कैबिनेट चल रही है देश में जहां किसी को कुछ पता ही नहीं है।

अटल सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने खुद को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा, हास्यास्पद है कि आज तक रिज़र्व बैंक नोटबन्दी के दौरान जमा हुए नोट आज तक नहीं गिन पाया। मुझे गर्व है कि मैं वर्तमान सरकार और भाजपा का हिस्सा नहीं हूँ।

बता दें कि इससे पहले यशवंत सिन्हा ने बीजेपी ने छोड़ राजनैतिक जीवन को अलविदा कह दिया था। वहीँ वो मोदी सरकार की हर कदम पर आलोचना करते हुए आये है। इससे पहले उन्होंने नोटबंदी के ठीक जीएसटी लागू करने पर मोदी सरकार पर जमकर कोसा था।

 

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BJP के दो पूर्व मंत्रियों ने माना- राफेल विमान सौदा आजाद भारत का सबसे बड़ा ‘रक्षा घोटाला’ है

Yashwant and Arun Shourie press conference on Rafale Deal

राफेल विमान को लेकर अब मोदी सरकार पर सबसे बड़ा वार कर दिया गया है। पहले इस घोटाले को लेकर आरोप केवल सड़क पर थे जिसे विपक्ष ने संसद में पहुँचाया। और अब भाजपा के अपने ही नेताओं ने इन आरोपों को अख़बारों की सुर्खियाँ बनने पर मजबूर कर दिया है।

राफेल विमान सौदा आजाद भारत का सबसे बड़ा रक्षा सौदा घोटाला और इससे देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया है। ये आरोप भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने लगाए।

इन आरोपों को उन्होंने किसी अखबार में लेख लिखकर नहीं बल्कि खुलेआम सबूत और दलीलें पेश करते हुए पूरी मीडिया के सामने लगाया है। इसके लिए इन तीनों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेस की थी।

दिल्ली के प्रेस क्लब में हुई एक प्रेस कांफ्रेंस में अरुण शौरी ने कहा कि राफेल विमान डील आजाद भारत का सबसे बड़ा डिफेंस घोटाला है और इसमें एक नहीं कई गड़बड़ियां की गई हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री ने लोकसभा में कहा था कि अनिल अंबानी की कंपनी को राफेल विमान बनाने का ऑर्डर क्यों और कैसे मिला, इसकी जानकारी नहीं दे सकतीं, क्योंकि वे फ्रांस सरकार के साथ हुए गोपनीयता के समझौते से बंधी हुई हैं।

अरुण शौरी ने कहा कि रक्षा मंत्री ने लोकसभा में सबसे बड़ा झूठ बोला। उन्होंने बताया कि भारत और फ्रांस के बीच हुए गोपनीयता समझौते में साफ लिखा है कि सिर्फ विमान की तकनीक से जुड़ी जानकारियों के लिए ही यह समझौता प्रभावी होगा। उन्होंने सवाल पूछा कि रक्षा मंत्री बताएं कि अनिल अंबानी की कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट क्यों दिया गया, क्योंकि यह समझौता इसका जवाब देने से नहीं रोकता है।

कीमत का खुलासा न करने का तर्क भी बेकार है। सरकार के रक्षा राज्यमंत्री 18 नवम्बर 2016 को खुद लोकसभा में कीमत बता चुके हैं- 670 करोड़ प्रति विमान, जिसमें हथियार से लेकर टेक्नालॉजी ट्रांसफर तक सब कुछ शामिल है।

शौरी ने कहा कि सरकार की गाइडलाइन कहती है कि हर ऑफ़सेट कॉन्ट्रेक्ट चाहे वह जिस भी क़ीमत का हो, रक्षा मंत्री की मंज़ूरी से होगा। सरकार झूठ बोल रही है कि रिलायंस को कॉन्ट्रेक्ट डेसाल्ट ने दिया।

प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मोदी सरकार ने राफेल डील में देश की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ किया है।

प्रशांत भूषण ने कहा कि इस सौदे से देश को 35000 करोड़ दी चपत लगी है। सौदे में विमान की तादाद घटाए जाने से देश की सुरक्षा को ख़तरा बढ़ा है। प्रशांत भूषण ने कहा कि देश को सुरक्षा के लिए सात स्क्वाड्रन की ज़रूरत है, तभी 126 विमानों की बात हुई थी। लेकिन मोदी सरकार ने इस हकीकत को जानते हुए भी यह संख्या 36 कर दी, वह भी बिना किसी की जानकारी के। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ है।

तादाद 126 से 36 किए जाने की जानकारी न तो रक्षा मंत्री को थी न वायुसेना में किसी को। सरकार गोपनीयता नियम का बहाना करके छिपाना चाह रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी की मंजूरी के बिना प्रधानमंत्री को कोई अधिकार नहीं था कि वे यह समझौता करते, इस नाते यह आपराधिक आचरण का मामला बनता है। यह जानते हुए ही सरकार ने उस कानून को संशोधित कर दिया।

प्रशांत भूषण ने कहा कि इस सौदे में पहले सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को राफेल विमान बनाने की तकनीक मिलनी थी, लेकिन फ्रांस के साथ राफेल विमान सौदे से महज पांच महीने पहले अचानक अस्तित्व में आई अनिल अंबानी की कंपनी को फ्रांस के साथ राफेल विमान बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिल गया।

उन्होंने कहा कि अनिल अंबानी की कंपनी को साधारण विमान बनाने का भी कोई अनुभव नहीं है। प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि कंपनी बनाई ही इसलिए गई ताकि ये कॉन्ट्रैक्ट हासिल हो सके। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी बात ये है कि जिस उद्योगपति को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी गई, उसका पिछला इतिहास यही कहता है कि उसके ज्यादातर बड़े प्रोजेक्ट्स नाकाम साबित हुए और उसकी कंपनी बड़े कर्ज में डूबी हुई है।

प्रेस कांफ्रेंस में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि विदेश सचिव ने समझौते से दो दिन पहले कहा था कि पुरानी डील को ही आगे बढ़ाएंगे, पर वहां जाकर नई डील कर ली गई। उन्होंने कहा कि इस लोकसभा में संयुक्त संसदीय समिति को मौका नहीं मिलेगा, क्योंकि समय कम है। इसलिए इस मामले की सीएजी से जांच कराई जानी चाहिए और तीन महीने के अंदर समयबद्ध जांच हो।

उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी के बाद जो दो हजार के नोट छपवाये गये थे, अब वे बाजार में जल्दी नहीं दिखते। दो हजार के अधिकांश नोटों को कालेधन के रुप में जमा कर रखा गया है और जरुरत पड़ने पर उन्हे खर्च किया जाएगा।

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