एनआरसी के मुद्दे पर भाजपा नेता भ्रम क्यों फैला रहे हैं?

‘विपक्षी दल चाहे जितना हो-हल्ला करें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार असम के 40 लाख घुसपैठियों में से एक-एक को बाहर करेगी. केंद्र सरकार घुसपैठियों के प्रति उदारता बरतने के मूड में नहीं है.’

यह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के उस वक्तव्य का अंश है, जो उन्होंने 12 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मेरठ में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के समापन सत्र में दिया.

अमित शाह यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि देश में जहां-जहां घुसपैठिये हैं, उन सबको देश से बाहर जाने का रास्ता भाजपा की सरकार दिखाएगी. उनका इशारा पश्चिम बंगाल की ओर था.

इसके बाद उन्होंने असम में विवादों की जड़ बन रहे नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 पर टिप्पणी की और कहा कि हिंदू शरणार्थियों को देश में लाया जाएगा और उन्हें नागरिकता प्रदान की जाएगी.

30 जुलाई को असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का फाइनल मसौदा जारी किया गया. इसमें शामिल होने के लिए 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन किया था, जिनमें से 2.89 करोड़ लोगों के नाम इस मसौदे में शामिल हुए. 40, 07,707 लोगों का नाम इस सूची में नहीं हैं.

एनआरसी का पहला मसौदा 31 दिसंबर और एक जनवरी को जारी किया गया था, जिसमें 1.9 करोड़ लोगों के नाम थे. एनआरसी की अंतिम सूची 31 दिसंबर 2018 को जारी की जानी है. तब तक अंतिम मसौदे में छूटे व्यक्ति अपनी आपत्तियां दर्ज करवा सकते हैं.

एनआरसी जारी होने के बाद इन 40 लाख लोगों को लगातार ‘घुसपैठिया’ या ‘अवैध बांग्लादेशी’ बताया जाने लगा, विभिन्न दलों के नेताओं ने सरकार से सवाल किया कि वह इन 40 लाख लोगों के साथ क्या करना चाहती है.

हालांकि राज्य सरकार का कहना था कि जिनके नाम रजिस्टर में नहीं है उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा.

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मसौदा जारी होने से पहले और बाद में भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों के नाम इस ड्राफ्ट में नहीं होंगे, उन्हें अपनी पहचान साबित करने के पर्याप्त मौके दिए जाएंगे. नाम न आने की स्थिति में किसी के अधिकार या विशेषाधिकार कम नहीं होंगे, न ही किसी को हिरासत में लिया जाएगा.

फाइनल ड्राफ्ट आने के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी आया कि इनमें बहुत से लोग ऐसे हैं, जिनका नाम 31 दिसंबर को जारी हुए ड्राफ्ट में था, पर इस मसौदे में नहीं है.

इस पर सरकार की ओर से कहा गया कि ऐसे लोगों को लेटर ऑफ इनफॉर्मेशन के जरिये सूचित कर उनके लिस्ट में शामिल न होने का कारण बताया जाएगा, जिससे वे इस गलती को सुधार सकें.

यानी स्पष्ट था कि ये सभी निश्चित तौर पर ‘अवैध बांग्लादेशी’ नहीं हैं और इन्हें अपनी पहचान को साबित करने के लिए दोबारा मौका दिया जाएगा.

लेकिन इस मसले पर राजनीति मसौदा जारी होने के साथ ही शुरू हो गयी. लगातार विपक्ष की ओर से सवाल किया गया कि इन 40 लाख लोगों का भविष्य क्या होगा. 30 जुलाई में इसी मुद्दे पर हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही स्थगित हुई.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से संशोधन लाने की मांग करते हुए सवाल किया, ‘जिन 40 लाख लोगों के नाम डिलीट कर दिए गए हैं वे कहां जाएंगे? क्या केंद्र के पास इन लोगों के पुनर्वास के लिए कोई कार्यक्रम है? अंतत: पश्चिम बंगाल को ही इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. ये भाजपा की वोट पॉलिटिक्स है.’

ममता यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला और कहा कि असम में एनआरसी में 40 लाख लोगों को शामिल नहीं किए जाने से देश में खूनखराबा और गृह युद्ध हो सकता है. मोदी सरकार राजनीतिक फायदे के लिए लाखों लोगों को राज्य विहीन करने की कोशिश कर रही है.

हालांकि 30 जुलाई को सदन में ही केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि इसमें उनकी सरकार की कोई भूमिका नहीं है.

Assam NRC BJP leaders spreading misinformation
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लोकसभा में बोलते हुए सिंह ने कहा कि इसमें केंद्र की कोई भूमिका नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मैं विपक्ष से पूछना चाहता हूं कि इसमें केंद्र की क्या भूमिका है? यह सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुआ है. ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.’

उन्होंने यह भी साफ किया कि यह मसौदा पूरी तरह ‘निष्पक्ष’ है और जिनका नाम इसमें शामिल नहीं है उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि उन्हें भारतीय नागरिकता साबित करने का मौका मिलेगा.

एक तरफ जहां गृहमंत्री सरकार की भूमिका से इनकार कर रहे थे, वहीं उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष इस पर अपनी पार्टी की पीठ ठोंक रहे थे.

सदन में एनआरसी के मुद्दे पर बोलते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि इसे लागू करने की हिम्मत कांग्रेस में नहीं थी इसलिए यह योजना अब तक लंबित रही.

उन्होंने कहा कि 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने असम समझौते के तहत एनआरसी बनाने की घोषणा की थी. एनआरसी को असम समझौते की आत्मा बताते हुए उन्होंने कहा, ‘एनआरसी को अमल में लाने की कांग्रेस में हिम्मत नहीं थी, हममें हिम्मत है इसलिए हम इसे लागू करने के लिए निकले हैं.’

इसके बाद 40 लाख लोगों पर किए जा रहे सवाल पर उन्होंने कहा, ‘ये 40 लाख लोग कौन हैं? इनमें बांग्लादेशी घुसपैठिये कितने हैं? मैं पूछना चाहता हूं कि क्या आप बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचाना चाहते हैं.’

उनके बयान से स्पष्ट था कि वे आश्वस्त थे कि ये 40 लाख लोग घुसपैठिये थे.

यहां जान लें कि एनआरसी की जड़ें असम के इतिहास से जुड़ी हुई हैं. 1979 से 1985 का समय राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का था. इस बीच लगातार आंदोलन हुए, जिन्होंने कई बार हिंसक रूप भी लिया. जातीय हिंसा चरम पर रही. इसी बीच अगस्त 1985 को तत्कालीन राजीव गांधी सरकार और आंदोलन के नेताओं के बीच समझौता हुआ, जिसे असम समझौते के नाम से जाना गया.

लेकिन इसके बाद सरकार के कई प्रयासों के बाद भी इस पर कोई काम नहीं हो सका. 2013 में असम पब्लिक वर्क नाम के एनजीओ सहित कई अन्य संगठनों इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे.

2017 तक सुप्रीम कोर्ट में इस बारे में कुल 40 सुनवाइयां हुईं, जिसके बाद नवंबर 2017 में असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि 31 दिसंबर 2017 तक एनआरसी को अपडेट कर दिया जाएगा.

2015 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और निगरानी में यह शुरू हुआ और 2018 जुलाई में एनआरसी का रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया की ओर से फाइनल ड्राफ्ट जारी किया गया.

इस मसौदे के आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ कहा है कि जो लोग एनआरसी के ड्राफ्ट में जगह बनाने से छूट गए हैं, उनके द्वारा दाखिल की जाने वाली आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष होनी चाहिए. वहीं चुनाव आयोग ने भी स्पष्ट किया कि एनआरसी से नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता सूची से भी ये नाम हट जाएंगे.

यानी न ही सुप्रीम कोर्ट और न ही चुनाव आयोग इन 40 लाख लोगों को ‘अवैध नागरिक’ मान रहे थे, लेकिन भाजपा के नेता लगातार इन्हें ‘घुसपैठिये’ और ‘बांग्लादेशी’ के नाम से पुकार रहे थे.

एक तरफ तो केंद्र सरकार इस मुद्दे पर राजनीति न करने की बात कर रही थी, तो दूसरी ओर पार्टी के विभिन्न नेता विभिन्न राज्यों में एनआरसी को लेकर अलग-अलग राग अलाप रहे थे.

Assam NRC BJP leaders spreading misinformation
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31 जुलाई को राज्यसभा में एनआरसी जारी करने की भाजपा की हिम्मत का बखान करने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई.

यहां वे बोले कि केंद्र सरकार के किसी के साथ भेदभाव नहीं कर रही है. उन्होंने कहा, ‘मुझे संसद में बोलने नहीं दिया गया. मैं देशवासियों को कहना चाहता हूं कि एनआरसी से किसी भारतीय का नाम नहीं काटा गया है और जिनका नाम लिस्ट में नहीं है वे घुसपैठिये हैं.’

इस बात पर ज़ोर देते हुए वो यहां तक कह गए कि इस लिस्ट में जिनका नाम नहीं है वह घुसपैठिये हैं और इसमें किसी भारतीय नागरिक का नाम नहीं कटा है.

खुद रजिस्ट्रार जनरल आॅफ इंडिया शैलेश भी इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं थे. उन्होंने मसौदा जारी करते हुए कहा था कि इस संबंध में लोगों को आपत्ति जताने की पूर्ण और पर्याप्त गुंजाइश दी जाएगी.

लेकिन ऐसा लगता है कि भाजपा के नेता इन नागरिकों के ‘घुसपैठिये’ होने के बारे में पूरी तरह आश्वस्त हैं. तेलंगाना से भाजपा के विधायक टी. राजा सिंह ने इस बारे में टिप्पणी करते हुए कहा कि अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस उनके देश नहीं लौटने पर गोली मार देनी चाहिए. हालांकि राजा सिंह अब पार्टी छोड़ दी है.

एनआरसी मसौदा जारी होने के बाद उन्होंने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर एक वीडियो संदेश पोस्ट में कहा, ‘अगर ये लोग, अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या शराफत से नहीं लौटते हैं तो उन्हें उनकी भाषा में समझाने की जरूरत है. उन्हें गोली मार देनी चाहिए तभी भारतीय सुरक्षित रह सकेंगे.’

उन्होंने कहा कि 1971 के युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में बांग्लादेशियों ने असम में घुसपैठ की, जहां 40 लाख लोग अब भी अवैध तरीके से रह रहे हैं.

एनआरसी को देश भर में लागू करने की मांग भी उठी और यह मांग ज्यादातर भाजपा नेताओं की ओर से की गयी. असम में नागरिकता संबंधी नियम देश भर से अलग हैं, असम समझौते के चलते वहां एनआरसी की ज़रूरत समझी गयी, लेकिन लगातार इसकी प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे.

देश के विभिन्न राज्यों में असल में एनआरसी की ज़रूरत है या नहीं, यह कितनी महत्वपूर्ण होगी, इस बारे में कोई स्पष्ट विचार न होने के बावजूद भाजपा नेता ‘घुसपैठियों’ को देश से निकाल फेंकने की मांग दोहरा रहे थे.

भाजपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि देश के सभी राज्यों में इसका अनुसरण किया जाना चाहिए क्योंकि अवैध बांग्लादेशी शरणार्थी देश के कई हिस्सों में रह रहे हैं.

नरेश अग्रवाल ने कहा, ‘यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है. उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य ऐसे राज्य हैं जहां असम की ही भांति अवैध बांग्लादेशी शरणार्थी रह रहे हैं.’

बीते एक अगस्त को दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी मांग की थी कि दिल्ली में भी एनआरसी की तरह सर्वे करवाया जाना चाहिए. तिवारी ने केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि दिल्ली में भी बड़ी संख्या में रोहिंग्या और विदेशी घुसपैठिये रह रहे हैं.

बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद अश्विनी चौबे का बयान भी आया. उन्होंने कहा, ‘ऐसे घुसपैठिये चाहे बंगाल में हों, बिहार में हों या दिल्ली में इन्हें निकाल कर बाहर करना चाहिए. निश्चित रूप से बांग्लादेशी बिहार में हैं, बंगाल में हैं. निश्चित रूप से जो असम में हुआ है वो बिहार में भी होना चाहिए. बिहार हो, बंगाल हर जगह करना चाहिए.’

वहीं बिहार के ही एक अन्य भाजपा नेता भी एनआरसी मसौदा जारी होने के बाद घुसपैठियों और शरणार्थियों में अंतर बताते नज़र आये. बिहार सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री विनोद नारायण झा ने कहा कि शरणार्थियों और घुसपैठियों में अंतर होता है. विपक्ष को ये सोचना चाहिए कि ये देश भारतीयों के लिए है, किसी घुसपैठियों के लिए नहीं.

हालांकि इस बीच भाजपा महासचिव राम माधव ने कहा कि एनआरसी केवल असम तक सीमित रहेगा. एनआरसी में ‘नेशनल’ शब्द इस्तेमाल किया गया है, लेकिन अब तक यह केवल असम के लिए ही है.

Assam NRC BJP leaders spreading misinformation
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एनआरसी का सबसे ज़्यादा विरोध पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया था, उनके विरोध के बाद पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष भी पीछे नहीं रहे.

घोष ने मसौदा जारी होने के बाद कहा, ‘अगर भाजपा यहां (बंगाल में) चुनाव जीतकर सत्ता में आई तो यहां भी एनआरसी लागू किया जाएगा. यहां रहने वाले तमाम अवैध नागरिकों को बांग्लादेश भेज दिया जाएगा. साथ ही घुसपैठियों का समर्थन करने वालों को भी देश से बाहर निकाल दिया जाएगा.

वहीं भाजपा महासचिव और पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने भी कहा कि पश्चिम बंगाल का युवा चाहता है कि बांग्लादेश से आए घुसपैठियों की पहचान हो, जिसकी वजह से उन्हें काफी दिक्कतों जैसे कि बेरोजगारी और कानून व्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है. भाजपा उनकी मांगों का समर्थन करती है.

2 अगस्त को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में मांग उठाई कि एनआरसी पूरे देश में लागू होनी चाहिए.

दुबे ने कहा कि एनआरसी का मुद्दा पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है. पूर्वी बंगाल से पश्चिमी बंगाल में लगातार पलायन होता रहा. असम में गोपीनाथ बारदोलोई ने इस विषय पर आंदोलन भी चलाया था. असम में एक लाख एकड़ भूमि पर ऐसे लोगों को बसाया भी गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि जम्मू कश्मीर, पूर्वोत्तर समेत कई क्षेत्रों में जनगणना नहीं हुई है और एक खास समुदाय की जनसंख्या काफी बढ़ी है.

इस बीच असम के राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी ने एनआरसी को उपलब्धि करार दिया और इसे देश में घुसपैठ की समस्या का कारगर समाधान बताया.

उन्होंने भी देश भर में एनआरसी लागू करने की पैरवी की और कहा कि जिस प्रकार से असम ने अपनी एनआरसी तैयार की है, देश के हित में यह बेहतर होगा कि हर राज्य अपनी एनआरसी तैयार कराए ताकि देश की सरकार को और राज्य की सरकार को यह पूर्ण जानकारी रहे कि राज्य और देश में कौन विदेशी रह रहे हैं और जो विदेशी रह रहे हैं उनको भी यह जानकारी हो कि वे बतौर विदेशी रह रहे हैं.

भाजपा नेताओं के इन दावों के बीच कई बार असम एनआरसी कोऑर्डिनेटर प्रतीक हजेला द्वारा कहा गया कि नागरिकों को डरने की आवश्यकता नहीं है. इस मसौदे के बारे में आपत्तियां 7 अगस्त के बाद दर्ज की जा सकेंगी, लेकिन भाजपा नेताओं को शायद इससे कोई फर्क नहीं पड़ा.

एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में पहुंचे भाजपा नेता एनआरसी ड्राफ्ट के पूरे होने की बात तो कह रहे थे, लेकिन इन नागरिकों को ‘घुसपैठिया’ ही कह रहे थे.

7 अगस्त को न्यूज18 इंडिया के एक कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि जिनका नाम एनआरसी में नहीं है, उनसे वोट देने का अधिकार ले लेना चाहिए. ये घुसपैठिये हैं. लेकिन जब तक एनआरसी ड्राफ्ट का काम पूरा नहीं हो जाता सभी को एक मौका दिया जाएगा. ऐसे लोग अपनी नागरिकता का सबूत पेश कर सकते हैं.

इसी कार्यक्रम में भाजपा नेता राम माधव और सुब्रमण्‍यम स्‍वामी भी इस बात पर राज़ी दिखे कि इन लोगों से वोट देने का अधिकार वापस ले लेना चाहिए.

लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने स्पष्ट कर चुके थे कि एनआरसी से नाम हटने पर मतदाता सूची से स्वत: नाम कटने का अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए.

लेकिन इसके बावजूद भाजपा नेताओं की देश की सुरक्षा के लिए ‘घुसपैठियों’ को बाहर निकालने हुंकार धीमी नहीं पड़ी.

11 अगस्त को खुदीराम बोस की पुण्यतिथि पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कोलकाता पहुंचे और एक रैली में कहा कि एनआरसी का मतलब घुसपैठियों को देश से भगाना है. घुसपैठिये टीएमसी के वोटर हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को निशाने पर लेते हुए वे यह भी बोले, ‘ममता दीदी, एनआरसी आपके रोकने से नहीं रुकेगी.’

इसके बाद 13 अगस्त को मेरठ पहुंचे शाह ने कहा, ‘हमने बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर साहस दिखाया तो कांग्रेस ने बखेड़ा शुरू कर दिया. ममता बनर्जी भी हाय-तौबा मचा रही हैं. हमारा साफ कहना है कि हमारे नेता नरेंद्र मोदी ने 56 इंच का सीना दिखाया है और एक भी घुसपैठिये को हम देश में रहने नहीं देंगे.’

Assam NRC BJP leaders spreading misinformation
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उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी थे. एनआरसी के मुद्दे पर बोलने से वे भी नहीं चूके. उन्होंने कहा कि अगर ज़रूरत हुई तो उत्तर प्रदेश में भी एनआरसी लागू किया जाएगा. देश एक भी घुसपैठिया स्वीकार नहीं करेगा.

इस बीच भाजपा के एक अन्य नेता भी पीछे नहीं रहे. भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर ने कहा देश को किसी भी सूरत में धर्मशाला नहीं बनने देंगे और 2019 में सत्ता में आने के बाद एनआरसी को संपूर्ण देश में लागू किया जाएगा.

उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे अपने परिवार के प्रति भी वफादार नहीं है, क्योंकि एनआरसी की शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ही की थी लेकिन कांग्रेस दस साल के कार्यकाल में एनआरसी को लागू करने की हिम्मत नहीं जुटा सकी.

हालांकि इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों को आश्वस्त किया कि किसी भी भारतीय नागरिक को देश नहीं छोड़ना पड़ेगा.

समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘मैं जनता को आश्वस्त करता हूं कि किसी भी भारतीय को देश नहीं छोड़ना पड़ेगा. लोगों को उचित प्रक्रिया के तहत संभावित अवसर दिए जाएंगे. एनआरसी हमारा वादा था जो हमने माननीय सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पूरा किया. यह राजनीति नहीं बल्कि जनता के बारे में है. अगर कोई इसके बारे में राजनीति कर रहा है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.’

प्रधानमंत्री ने तो यह कह दिया, लेकिन पार्टी के अलग-अलग नेताओं के बयान इस मामले पर हो रही राजनीति में आग में घी का ही काम कर रहे हैं. एनआरसी को लेकर भाजपा का ही एकमत न होना जनता से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर उनकी गंभीरता पर सवाल खड़े करता है.

Source: thewirehindi.com

मीडिया की आज़ादी सत्ता को क्यों मंज़ूर नहीं है?

Media bol press freedom narendra modi govt

मीडिया बोल की 62वीं कड़ी में उर्मिलेश मीडिया की आज़ादी पर पूर्व पत्रकार व आप नेता आशुतोष और वरिष्ठ पत्रकार नीरेंद्र नागर से चर्चा कर रहे हैं.

 

Source: thewirehindi.com

अभी एक साथ नहीं कराए जा सकते लोकसभा-विधानसभा चुनाव: चुनाव आयोग

Election commission CEC OP Rawat denies holding lok sabha and assembly elections together citing various reasons

देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव अभी एक साथ नहीं कराए जाएंगे. न्यूज़18 से एक्सक्लूसिव बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने के लिए कानूनी और संवैधानिक बदलाव करने जरुरी हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए जनप्रतिनिधि कानून को बदलना होगा. इन बदलावों के बाद ही देश में एक साथ चुनाव संभव हैं.

उन्होंने एक साथ चुनाव नहीं करवाने के लिए पर्याप्त संख्या में वीवीपैट मशीनों की कमी का भी हवाला दिया. उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले (एक साथ चुनाव करवाने) को काफी मजबूती से इसे लागू करना होगा.

सोमवार को सूत्रों के हवाले से यह खबर आई थी कि केंद्र सरकार अगले साल होने वाले आम चुनाव के साथ-साथ देश के 11 राज्यों में भी विधानसभा चुनाव करवा सकती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की बात पर जोर देते रहे हैं. उनके मुताबिक इससे न सिर्फ ऊर्जा और समय की बचत होगी बल्कि देश हमेशा रहने वाले चुनावी मूड से भी बाहर निकलेगा.

 

Source: hindi.firstpost.com

बड़ी खबर: कांग्रेस ने अमित शाह की राज्यसभा सदस्यता सस्पेंड करने की भी मांग की!

Congress urges EC to suspend Amit Shahs Rajya Sabha membership over false affidavit

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह पर राज्यसभा चुनाव के समय अपने शपथ पत्र में देनदारियों का ब्यौरा जानबूझकर छिपाने का आरोप लगा है। कांग्रेस पार्टी ने शाह के खिलाफ चुनाव आयोग से आपराधिक मामला चलाने की मांग की है।

कांग्रेस ने कहा कि अमित शाह ने ऐसा करके जन प्रतिनिधि कानून की धारा 125 ए के तहत अपराध किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबित कांग्रेस ने बीजेपी अध्यक्ष की राज्यसभा सदस्या सस्पेंड करने की भी मांग की है।

कांग्रेस नेता कहा कि मीडिया में इस संबंध में आईं खबरों के अनुसार बीजेपी अध्यक्ष ने अपनी संपत्तियों और देनदारियों का पूरा विवरण जानबूझकर नहीं दिया है और ऐसा कर उन्होंने जन प्रतिनिधि कानून की धारा 125 ए के तहत अपराध किया है। आयोग को जानबूझकर छिपाई गई इस जानकारी को लेकर उनके खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, विवेक तन्खा तथा जयराम रमेश ने सोमवार को इस संबंध में यहां चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपा।

उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधि कानून 2004 के अनुच्छेद 75 ए के तहत चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को अपनी शैक्षिक योग्यता, संपत्ति और देनदारियों का शपथ देकर पूरे विवरण के साथ अनिवार्यरूप से सार्वजनिक करना होता है।

सिब्बल ने कहा कि खबरों के अनुसार बीजेपी अध्यक्ष के बेटे जय शाह ने कुसुम फिनसर्व नाम की अपनी नई कंपनी बनाई और इसके लिए अपने पिता की सम्पत्ति गिरवी रखकर गुजरात कोपरेटिव बैंक से 25 करोड़ रुपए का ऋण लिया था।

उन्होंने कहा कि यह देनदारी है। क्योंकि 25 करोड़ का ऋण तब ही मिलता है जब इसके लिए सम्पत्ति गिरवी रखी जाती है। इसका मतलब है कि निश्चित रूप से आपको पैसा लौटाना पड़ेगा और जो पैसा लौटाना होता है वह देनदारी है।

कांग्रेस ने कहा कि आयोग से शिकायत की गई है कि शाह ने इस बात का उल्लेख अपने शपथ पत्र में नहीं किया है और यह 2004 के नियम का उल्लंघन किया है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया है और राज्यसभा के लिए दायर शपथ पत्र में इस देनदारी का विवरण नहीं दिया है।

आयोग को उनकी इस याचिका को राज्यसभा के सभापति को भी भेजना चाहिए ताकि राज्यसभा भी उनके खिलाफ कार्रवाई शुरु की जा सके। उन्होंने कहा कि आयोग ने भरोसा दिया है कि वह इस मामले पर विचार करेगा और जल्द से जल्द फैसला लेकर जो जरूरी होगा कार्रवाई की जाएगी।

 

Source: hindi.siasat.com

NRC विवाद: ममता बनर्जी ने कहा- ’40 लाख लोग पूरी तरह भारतीय हैं’

NRC controversy Mamata Banerjee said 40 lakh people are completely Indians

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर ‘‘बंगाली विरोधी’’ होने का आरोप लगाया और भगवा पार्टी से सवाल किया कि क्या हिलसा मछली, जामदानी साड़ी, संदेश और मिष्टी दोई, जो मूल रूप से बांग्लादेश के हैं, को भी ‘‘घुसपैठिया या शरणार्थी’’ करार दिया जाएगा। संदेश और मिष्टी दोई मशहूर बंगाली मिठाइयां हैं।

असम की राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के अंतिम मसौदे में 40 लाख से ज्यादा लोगों के नाम शामिल नहीं किए जाने को लेकर केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर अपना हमला तेज करते हुए ममता ने यह टिप्पणी की।

ममता ने कहा कि ये 40 लाख लोग पूरी तरह भारतीय हैं। उन्होंने उन मानदंडों पर भी सवाल उठाए जिसके आधार पर 40 लाख से ज्यादा लोगों के नाम एनआरसी के अंतिम मसौदे में शामिल नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनसे उनके माता-पिता के जन्म प्रमाण-पत्र मांगेगी तो वह भी इन दस्तावेजों को पेश नहीं कर पाएंगी।

ममता ने कहा, ‘‘मैं अपने माता-पिता के जन्म की तारीखें नहीं जानती। मैं सिर्फ उनकी मृत्यु की तारीखें जानती हूं। मैं उनके जन्म की तारीख वाले कोई दस्तावेज पेश नहीं कर पाऊंगी। ऐसे मामलों को लेकर एक स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। आप आम लोगों को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते।’’ उन्होंने भाजपा को ‘‘बंगाली विरोधी’’ और ‘‘पश्चिम बंगाल विरोधी’’ करार दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘देश में नाइंसाफी हो रही है। अपनी चरमपंथी विचारधारा के साथ भाजपा लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है। मेरा मानना है कि वे देशवासियों के बीच बदले की राजनीति कर रही है। हम ऐसी राजनीति के पक्ष में नहीं हैं।’’

ममता ने कहा, ‘‘उन्हें (भाजपा को) नहीं भूलना चाहिए कि बंगाली बोलना अपराध नहीं है। यह दुनिया में बोली जाने वाली पांचवीं सबसे बड़ी भाषा है। भाजपा को बंगाल से क्या दिक्कत है? क्या वह बंगालियों और उनकी संस्कृति से डरी हुई है? उन्हें नहीं भूलना चाहिए कि बंगाल देश का सांस्कृतिक मक्का है।’’

 

Source: hindi.siasat.com

सरकार का जनता के यक़ीन और भरोसे के साथ खिलवाड़- मणिशंकर अय्यर

Mani Shankar Aiyar said government play peoples faith and confidence

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के NRC पर बयान पर कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा कि बड़ी खुशी है कि अमित शाह खुद को कांग्रेसी समझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 1985 का समझौता और ये जो कदम उठाया जा रहा है इनके बीच किसी प्रकार का संबंध नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘मैं खुद राजीव गांधी की सरकार में जॉइंट सेक्रेटरी था। जिस समय इस समझौते पर राजीव गांधी ने तय किया उस समय में उनके साथ ही था। उस आधार पर मैं कहता हूं कि जो समझौते में लिखा था और एनआरसी पर यह जो कदम उठाया जा रहा है इनमें में किसी प्रकार का संबंध नहीं है।

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर कहा कि विपक्षी दल इस मसले पर देश को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस वोटबैंक के चक्कर में बंगाली घुसपैठियों को बाहर करने का साहस नहीं दिखा सकी और अब सवाल उठा रही है।

उन्होंने कहा था कि असम एकॉर्ड जो राजीव गांधी जी की अध्यक्षता वाली सरकार के समय में हुआ था, NRC उसकी आत्मा है जिसमें व्याख्या की गई है कि एक-एक अवैध घुसपैठिये को चुनकर देश की मतदाता सूची से बाहर किया जाएगा।

वहीं, अय्यर ने कहा कि तत्कालीन समझौते में ये कहा गया था कि एक ट्रिब्यूनल बनेगा जो मुकम्मल तौर पर जांच करने के बाद निष्कर्ष पर पहुंचेगा कि मार्च 1971 कौन-कौन गैर कानूनी तरीके से आए। जब तक सुप्रीम कोर्ट ने इस ट्रिब्यूनल को गैर संवैधानिक करार नहीं दिया था तब तक काम बहुत तरीके से अच्छे से हो रहा था।

उन्होंने कहा कि उसी तरीके का कोई तर्क निकाला जाना चाहिए था लेकिन ये जो इन्होंने किया है कि अचानक 40 लाख जो हिंदुस्तान के बाशिंदे हैं। उनपर अब एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया गया है।

उन्होंने कहा, ‘एक लिस्ट बनाई गई है, जिसमें 40 लाख लोगों पर सवाल खड़े कर दिए गए हैं। हमारे जमाने में और 1985 के समझौते के तहत जिन लोगों को यह तय किया गया था कि वह गैर कानूनी तरीके से आए थे उनको वापस बांग्लादेश भेजा गया।

उनके अलावा, कांग्रेस प्रवक्ता आरपीएन सिंह ने कहा कि अमित शाह थोड़ा पढ़ लिया करें। राहुल गांधी ने पहले ही फेसबुक पेज पर इस मसले पर अपना स्टैंड साफ कर दिया है। राजीव गांधी ने समझौता साइन किया था, लेकिन सरकार ने इसको त्रुटिपूर्ण तरीके से करके चुनावी साल में चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल किया।

 

Source: hindi.siasat.com

VIDEO: मोदी को प्रधानमंत्री बनने की इजाजत नहीं दी जाएगी: मायावती

Modi will not be allowed to become prime minister Mayawati

नई दिल्ली: 2019 के चुनाव से पहले मायावती ने कहा कि मोदी को भारत का प्रधान मंत्री नहीं बनना चाहिए। मायावती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चार पदों पर कार्य किया है।

उन्होंने कहा, मोदी को प्रधान मंत्री बनने से रोक दिया जाना चाहिए या अन्यथा मुसलमान और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को उनके शासन के साथ कई समस्याएं आनी पड़ेगी। उन्होंने कहा, “मैं मोदी को रोकने के लिए सबकुछ कोशिश करुँगी।”

मायावती बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष है, जो बहुजन या दलित, अन्य पिछड़े वर्गों और धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति में सुधार के लिए सामाजिक परिवर्तन के मंच पर केंद्रित है।

2008 में, फोर्ब्स ने दुनिया की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में 59वें स्थान पर मायावती को जोड़ा था।

न्यूज़वीक ने उन्हें भारत के बराक ओबामा के रूप में वर्णित किया और वह 2007 में न्यूज़वीक की शीर्ष महिला प्राप्तकर्ता सूची में भी दिखाई दीं थीं।

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2019 में लोकसभा के साथ ही हो सकते हैं विधानसभाओं के चुनाव

2019 mai Loksabha election ke sath hi ho sakte hain vidhansabha election

पूरे देश में लोकसभा व विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने में भले ही संवैधानिक दिक्कतें हों, लेकिन अगले साल लोकसभा के साथ एक दर्जन राज्यों के विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। एक साथ चुनाव कराए जाने की दिशा में यह बड़ी शुरुआत होगी। इसके लिए किसी तरह के संविधान संशोधन व कानूनी बदलावों की जरूरत भी नहीं होगी।
भाजपा व सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, चूंकि चुनाव आयोग व अधिकांश दल एक साथ चुनाव कराए जाने के समर्थन में हैं, ऐसे में अगले साल लोकसभा चुनावों से इसकी शुरुआत हो सकती है। इसके लिए जो फार्मूला तैयार किया गया है उसके अनुसार लोकसभा चुनावों के साथ ओडिशा, आंध्र प्रदेश व तेलंगाना के चुनाव तो होने ही हैं। अन्य कुछ राज्य भी शामिल हो सकते हैं।

कुछ महीने बढ़ सकते हैं चार राज्यों के चुनाव
इसके पहले इस साल के आखिर में जिन चार राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान व मिजोरम के चुनाव होने हैं उनमें कुछ की विधानसभा अवधि फरवरी 2019 तक है। ऐसे में वहां पर दो-चार महीने का राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। चूंकि चुनाव आयोग भी एक देश एक चुनाव के पक्ष में हैं, इसलिए ऐसा करने में ज्यादा दिक्कत नहीं है।

लोकसभा के बाद वाले तीन राज्य पहले करा सकते हैं चुनाव
लोकसभा चुनावों के बाद हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड के विधानसभा चुनाव नवंबर 2019 में होने हैं। इन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं और वे पहले चुनाव करा सकती हैं। जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन है और वहां भी अगले साल चुनाव संभावित हैं। इस तरह लोकसभा के साथ अप्रैल मई में कम से कम 11 राज्यों के चुनाव हो सकते हैं।

बिहार भी हो सकता है शामिल
इसमें बिहार भी शामिल हो सकता है। वहां के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इसके समर्थक हैं और भाजपा के साथ गठबंधन में फिर से जनादेश लेने में वह भी समय से पहले चुनाव के लिए तैयार हो सकते हैं। भाजपा के एक प्रमुख नेता ने कहा है कि अगर एक साथ एक दर्जन राज्य विधानसभा चुनाव में जाते हैं तो उसके बाद देश भर में एक देश एक चुनाव का माहौल बनेगा। ऐसे में जरूरी संवैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करना भी आासल होगा।

 

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मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ में चुनाव जीत सकती है कांग्रेस: सर्वे

ABP News c voter opinion poll says Congress may win elections in Madhya Pradesh Rajasthan and Chhattisgarh

इस साल के अंत में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्‍थान में होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस बाजी मार सकती है. वर्तमान में तीनों ही राज्यों में बीजेपी सत्ता में है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पिछले 15 वर्षों से बीजेपी की ही सरकार है. इस बार तीनों सूबों में बीजेपी को बड़ा झटका लग सकता है.

हालांकि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी लहर के चलते बीजेपी इन तीनों राज्‍यों में कामयाबी पा सकती है. एबीपी न्‍यूज और सी-वोटर के ओपिनियन पोल में यह बात सामने आई है.

इस सर्वे में कहा गया है कि राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश और छत्‍तीसगढ़ में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिलेगा. एमपी में उसे 230 में से 117 सीटें, राजस्‍थान में 200 में से 130 सीटें और छत्‍तीसगढ़ में 90 में से 54 सीटें मिलेंगी. वहीं बीजेपी 106 (एमपी), 33 (छत्‍तीसगढ़) और 57 (राजस्‍थान) सीटों पर सिमट जाएगी.

इन राज्‍यों में जीत कांग्रेस के बड़ी कामयाबी होगी और लोकसभा से पहले उसके हौसले बुलंद हो सकते हैं. देश की यह सबसे पुरानी पार्टी अभी केवल 4 राज्‍यों में सत्‍ता में हैं. अगले साल के आम चुनाव से पहले इन राज्‍यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है. इन तीनों राज्‍यों में कुल मिलाकर 65 लोकसभा सीटें हैं.

एबीपी न्‍यूज और सी-वोटर के इस सर्वे में 28 हजार लोगों ने हिस्‍सा लिया.

इन्‍होंने राज्‍य और केंद्र के लिए अलग-अलग पार्टियों को वोट देने की बात कही. राज्‍य में जहां सत्‍ता बदलने की बात कही तो केंद्र में वर्तमान सरकार को ही दोहराने पर सहमति दी. प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी पहली पसंद रहे. कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी दूसरे नंबर पर रहे लेकिन उन्‍हें काफी कम वोट मिले.

राजस्‍थान

एबीपी न्यूज-सी वोटर के सर्वे में यहां कांग्रेस को सबसे ज्‍यादा फायदा होते दिखाया गया है. पार्टी को 51 फीसदी वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है जबकि बीजेपी को 37 प्रतिशत वोट मिलने की बात कही गई है. अगर ऐसा हुआ तो यह नतीजा 2013 के चुनावों से एकदम उलट होगा जब बीजेपी को 163 सीटें मिली थी. मुख्‍यमंत्री पद के लिए कांग्रेस के अशोक गहलोत सबसे लोकप्रिय चेहरे के तौर पर उभरे हैं. उन्‍हें 41 प्रतिशत लोगों ने वोट किया. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को 18 प्रतिशत लोगों ने ही पसंद किया. वहीं लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी को 47 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है. कांग्रेस 43 प्रतिशत वोट हासिल कर सकती है.

मध्‍य प्रदेश

चुनाव में यहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को 15 साल के सत्‍ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ सकता है. सर्वे में कांग्रेस को 42 और बीजेपी को 40 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई है. लोकसभा की बात करें तो बीजेपी को 46 और कांग्रेस को 39 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं. पीएम पद के लिए नरेंद्र मोदी को 54 और राहुल को 25 प्रतिशत लोगों ने यहां पसंद किया है.

छत्‍तीसगढ़

साल 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होकर बने इस राज्‍य में वोट शेयर के लिहाज से दोनों दलों में कड़ा मुकाबला रहेगा. कांग्रेस को 40 तो बीजेपी को 39 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान जताया गया है. इस लिहाज से राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से 54 कांग्रेस जीत सकती है जबकि बीजेपी के खाते में महज 33 सीटें आ सकती हैं.

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पीएम अगर ईमेल पर इंटरव्यू देते रहे तो पत्रकारों की नौकरी चली जाएगी: शिवसेना

Journalists will lose jobs if PM Modi continues interviews via emails says Shiv Sena

पीएम द्वारा ईमेल पर इंटरव्यू दिए जाने की आलोचना खुद बीजेपी सहयोगी शिवसेना ने कर दी. शिवसेना का आरोप है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को इंटरव्यू देने के लिए ‘ई-मेल का शॉर्ट कट’ रास्ता चुना है. साथ ही इसे ‘प्रोपगेंडा’ करार दिया है.

पार्टी के मुखपत्र सामना के संपादकीय में सेना ने लिखा है कि पीएम को ईमेल के बजाए लोगों के सवालों का जवाब देने के लिए ‘फेस टू फेस’ इंटरव्यू देना चाहिए. कुछ मीडिया संगठनों द्वारा पीएम के इंटरव्यू छापे गए. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सेना ने आरोप लगाया कि मोदी ने प्रधान मंत्री बनने के बाद से एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित नहीं किया है. यह उनके ‘व्यक्तित्व को शोभा’ नहीं देता क्योंकि 2014 के लोकसभा तक मोदी पत्रकारों के ‘दोस्त’ थे.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक शिवसेना ने कहा, ‘लेकिन प्रधान मंत्री बनने के बाद, उन्होंने खुद के चारों ओर एक पिंजरा बना लिया है.’

सामाना के संपादकीय में कहा गया, ‘अगर पीएम इसी तरह ई-मेल के जरिए इंटरव्यू देना जारी रखेंगे तो पत्रकारों की नौकरी चली जाएगी. फिर पत्रकारों को नौकरी दिलाने का एक और काम उनके जिम्मे आ जाएगा.’

सेना ने कहा, ‘प्रधान मंत्री मोदी ने अचानक ही ई-मेल के द्वारा इंटरव्यू दिया है. इसका मतलब है कि वे पत्रकारों के आमने-सामने नहीं थे. पत्रकारों ने प्रधान मंत्री कार्यालय को प्रश्न भेजे और उन्हें लिखित उत्तर दिए गए.’ पार्टी ने कहा, ‘दूसरे शब्दों में, इसे प्रोपगेंडा या प्रचार कहा जाता है.’

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राहुल गांधी का पीएम मोदी पर तंज- ’56 इंच का सीना है तो किसानों को दें 50 फीसदी लोन’

Rahul Gandhi said if PM Modi have 56 inch chest then provide 50 percent of the farm loan waived in karnataka

कर्नाटक के बीदर में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, ‘मैं इस मंच से पीएम को चुनौती देता हूं. कर्नाटक सरकार ने किसानों को कर्ज में छूट दी. केंद्र सरकार भी कर्नाटक के किसानों को कृषि के लिए 50 फीसदी ऋण दे. राहुल ने कहा, ‘अगर पीएम मोदी के पास 56 इंच का सीना है तो वह यह काम करके दिखाएं, हालांकि वह ऐसा नहीं करेंगे.’

राहुल ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘सीतारमन देश के युवाओं से झूठ बोल रही हैं. सीतारमन कहती हैं कि भारत और फ्रांस के बीच एक समझौता है, इसलिए वे राफेल की कीमतों को प्रकट नहीं कर सकतीं, लेकिन मैंने फ्रांस के राष्ट्रपति से बात की और उन्होंने किसी भी तरह के समझौता होने से इनकार कर दिया.’

राहुल ने कहा, ‘पीएम ने 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देने की बात कही थी लेकिन अब कहते हैं कि पकौड़े बनाओ, वो आपको गैस भी नहीं देंगे, गैस भी आपको नाले से निकाल कर कुकर में डालनी होगी.’

 

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सीएम केजरीवाल और सिसोदिया के खिलाफ चार्जशीट, मुख्य सचिव से मारपीट का मामला

Delhi Arvind Kejriwal Manish Sisodia accused in alleged assault on Delhi top bureaucrat

दिल्ली सरकार के मुख्‍य सचिव अंशु प्रकाश से मारपीट के मामले में सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को आरोपी बनाया गया है और उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है. चार्जशीट में 11 विधायकों को भी आरोपी बनाया गया है. कुल 13 लोगों के खिलाफ इस मामले में चार्जशीट दाखिल की गई है.

दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले में अरविंद केजरीवाल के पूर्व सलाहकार वीके जैन को मुख्य सरकारी गवाह बनाया है. गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से पहले ही पूछताछ कर चुकी है.

बता दें कि 19 फरवरी को सीएम आवास पर हुई मीटिंग के दौरान अंशु प्रकाश पर कथित रूप से हमला किया गया था और इस मामले में आप के दो विधायक प्रकाश जरवाल और अमानतुल्लाह खान जेल भी गए थे, हालांकि अभी दोनों विधायक जमानत पर हैं.

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अमित शाह के बेटे की एक और बड़ी लूट! 5 करोड़ की कंपनी को मिला 97 करोड़ का कर्ज, कर्ज देने वाले बैंक ‘भाजपा’ से संबंधित

Amit Shahs son get crores of credit on basis of cheap guarantees

भाजपा ने कई साल तक राहुल गाँधी को ‘शहज़ादा’ नाम से पुकारा। लेकिन पिछले साल से भारतीय राजनीति में एक नया शहज़ादा आया है जिसे राजनीतिक पार्टियाँ और मीडिया “शाहज़ादा” कहकर बुलाती है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह को इस नाम से पुकारा जा रहा है। इसका कारण है उनकी कंपनियों में अचानक आया कई गुना मुनाफा और उसका राजनीतिक संबंध। अब एक बार फिर से उनकी ऐसी ही एक कंपनी का खुलासा हुआ है।

‘द कैरावान’ पत्रिका की एक खबर के मुताबिक, जय शाह की कंपनी ‘कुसुम फिनसर्व’ को पिछले कुछ सालों में सहकारी बैंक, निजी बैंक और सरकारी कंपनी से 97.35 करोड़ रुपये का कर्ज मिला है। जबकि कंपनी लगातार घाटे में रही है और कंपनी का कुल मूल्य 5.83 करोड़ रुपये हैं। जो कर्ज के मुकाबले बहुत कम है।

जिन ज़मीनों को गिरवी रख ये कर्ज दिए जा रहे हैं उनकी कीमत भी कर्ज के मुकाबले बहुत कम है।

कर्ज देने वाले बैंक और सरकारी कंपनी से भाजपा और केंद्र सरकार का संबंध है। इसलिए इस बात का संदेह पैदा होता है कि अमित शाह अपने राजनीतिक कद का फायदा अपने बेटे जय शाह को फायदा पहुँचाने के लिए उठा रहे हैं और भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं।

गौरतलब है कि इस से पहले भी न्यूज़ वेबसाइट ‘द वायर’ ने खुलासा कर बताया था कि जय शाह की एक कंपनी ‘टेम्पल एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड’,जिसको 2014 में 50,000 का मुनाफा हुआ था, उसका मुनाफा अगले साल बढ़कर 80.5 करोड़ रुपयें हो गया। खुलासे के बाद अक्टूबर 2016 में इस कंपनी ने काम करना बंद कर दिया।

 

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PM मोदी के इंटरव्यू पर कांग्रेस का पलटवार, कहा ‘जुमलों के शहंशाह ने छिड़का परेशान देश के जख्मों पर झूठ का नमक’

Congress is angry on PM Modi interview

नई दिल्ली – कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बीते रविवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि यूं तो कहा यह जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने विभिन्न मुद्दों पर खुलकर विचार रखे. लेकिन पहले से तय कथित प्रश्नों के पूर्व नियत और निर्धारित उत्तरों में वे अपनी सरकार की एक भी उपलब्धि या पहल नहीं बता पाए. कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि अपने एकालाप में पीएम ने अर्थव्यवस्था और विकास पर सफेद झूठ बोला और सामाजिक समरसता के तहस नहस होने पर घड़ियाली आंसू बहाए.

उन्होंने कहा कि देश प्रधानमंत्री से यह एकतरफा कथ्य की नहीं बल्कि सत्य सुनना चाहता है. कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पीएम ने एक बार लोगों को अच्छे दिनों का झांसा देने की कोशिश की.कांग्रेस ने कहा कि 2014 में उन्होंने देश को सुनहरे सपने दिखाए थे, कि 60 महीने में अच्छे दिन आ जाएंगे, लेकिन जब सरकार का कार्यकाल पूरा हो रहा है और वे हर मोर्चे पर नाकाम हुए हैं तो सपनों की डेडलाइन 2022 कर दी गई है यानी 108 महीने.

पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पीएम को बताना चाहती है कि उनकी सरकार अब सिर्फ 9 महीने से ज्यादा नहीं चल पाएगी. और भले ही वे विपक्ष को कितने उलाहने दें और बुरा भला कहें, देश के लोग बीजेपी और मोदी को 2019 में करारा जवाब देंगे.कांग्रेस ने उन सभी मुद्दों को उठाया, जिन्हें प्रधानमंत्री ने अपने कथित इंटरव्यू में पेश किया था कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हर साल दो करोड़ नौकरियां और रोजगार का वादा किया था. लेकिन उनकी सरकार हर साल सिर्फ कुछ लाख नौकरियां और रोजगार ही दे सके. प्रधानमंत्री ने 20 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव के दौरान अपने भाषण में कहा था कि बीते एक साल में एक करोड़ रोजगार पैदा हुए हैं.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कुछ नहीं बस लोगों को गुमराह करने वाला बयान है, जिसका उपहास आम लोग उड़ा रहे हैं.कांग्रेस ने कहा कि सिर्फ ईपीएफओ में पंजीकरण का मतलब ही रोजगार या नौकरी की उपलब्धता नहीं मानी जा सकती, क्योंकि ये आंकड़े सिर्फ उन लोगों के होते हैं जो अनौपचारिक क्षेत्र से औपचारिक क्षेत्र में काम शुरु कर देते हैं.

पवन खेड़ा ने बताया कि कोई भी उपक्रम अगर 20 या अधिक लोगों को अपने यहां काम पर रखता है तो उसे नियमानुसार ईपीएफओ में सभी को पंजीकृत कराना जरूरी है. उन्होंने बताया कि अगर कोई ऐसा संस्थान जिसके यहां पहले से 19 कर्मचारी काम कर रहे थे और वहां एक और व्यक्ति को काम मिलता है तो उसे ईपीएफओ मे पंजीकरण कराना होता है. यह नई बीस नौकरियां नहीं हैं, बल्कि सिर्फ एक नई नौकरी है.

उन्होंने कहा कि नोटबंदी ने अनौपचारिक क्षेत्र की कमर तोड़कर रख दी और एक अव्यवस्थित और जल्दबाज़ी में लागू जीएसटी ने ट्रेडर और कारोबारियों की जिंदगी दुश्वार कर दी है. उन्होंने बताया कि नोटबंदी के पहले दो महीने में ही कम से कम 1.26 करोड़ लोगों से रोजगार छिन गया था. आईएलओ का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि उसके मुताबिक 2019 तक देश के 77 फीसदी कामकाजी लोगों के सामने नौकरी का खतरा मंडराता रहेगा.

कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा ऋण योजना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते रहे हैं. पवन खेड़ा ने बताया कि अगर प्रधानमंत्री के शब्दों से ही गणना करें तो पता चलता है कि इस योजना के 91 फीसदी लाभार्थियों को मात्र 23,000 रुपए का कर्ज मिला. इस पैसे से क्या कोई पकोड़े की दुकान खोलेगा?प्रधानमंत्री द्वारा जीएसटी पर पूछे सवाल में डकैत शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर पवन खेड़ा ने कहा कि असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल करना प्रधानमंत्री की आदत बन चुकी है. सब जानते हैं कि वे आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं जिनके आपत्तिजनक और असंसदीय शब्दों को संसद की कार्यवाही से निकाला गया है. ऐसे में उनसे डकैत शब्द सुनना अधिक हैरान नहीं करता. हकीकत यह है कि देश भर में अब भी जीएसटी का विरोध हो रहा है. अभी पिछले महीने ही देश भर ट्रकों की हड़ताल थी और इसका सर्वाधिक असर बीजेपी शासित महाराष्ट्र और गुजरात में था. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि हर चुनाव से पहले प्रधानमंत्री जीएसटी दरों में फेरबदल कर कुछ सामान सस्ते कर देते हैं ताकि वोटरों को लुभाया जा सके.

कांग्रेस ने बैंकों के लगातार बढ़ते एनपीए पर भी प्रधानमंत्री पर हमला बोला और कहा कि उनके शासन में बैंकों के एनपीए में जबरदस्त इजाफा हुआ है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि असम के एनआरसी को प्रधानमंत्री विभाजनकारी नीति और ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री विदेशियों को देश से भगाने के मुद्दे पर झूठ बोलना बंद करें.

कांग्रेस ने कहा कि संसद में दिए गए जवाबों से साबित होता है कि 2005 से 2013 के बीच यूपीए सरकार ने 82,728 बांग्लादेशी विदेशियों को देश से बाहर भेजा, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में मात्र 1,822 बांग्लादेशियों को ही देश से बाहर भेजा गया है.कांग्रेस ने एक बार फिर राफेल विमान सौदे का मुद्दा उठाया. कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से सीधे सवाल पूछे कि आखिर देश को हर विमान की कीमत क्यों नहीं बताई जा रही? ऑफसेट कांट्रेक्ट हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से छीनकर एक ऐसी निजी कंपनी को क्यों दिया गया जिसे इस क्षेत्र का कोई अनुभव नहीं है? 26 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने से पहले सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से मंजूरी क्यों नहीं ली गई?

सभार नवजीवन

मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर बोले केंद्रीय मंत्री वीके सिंह- यह समस्या पूरे भारत में है, पश्चिमी यूपी ही क्यों

VK Singh says of Mob Lynching in western up

पिछले कुछ दिनों से देश में लगातार बढ़ रहीं मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट पीटकर की जाने वाली हत्या) की घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार विपक्षी पार्टियों के निशाने पर है। इसी बीच, मॉब लिंचिंग को लेकर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने एक बड़ा दिया है।

समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने कहा, ‘मॉब लिंचिंग की समस्या पूरे भारत में हैं, पश्चिम यूपी को क्यों कहते हो’। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, यह समस्या किसी एक हिस्से में नहीं बल्कि पूरे देश में है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री वीके सिंह उत्तर प्रदेश के मेरठ में चल रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की कार्यसमिति की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इस दौरान जब मीडियाकर्मियों ने केंद्रीय मंत्री वीके सिंह से मॉब-लिंचिंग की घटनाओं को लेकर पूछा तो उन्होंने यह जवाब दिया।

बता दें कि इससे पहले एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में पीएम मोदी ने मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों पर हर किसी को राजनीति से ऊपर उठकर समाज में शांति और एकता सुनिश्चित करने के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा था ऐसे विषयों पर राजनीति करना गलत है, साथ ही पीएम मोदी ने ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठा रहा है।

गौरतलब है कि अलग-अलग वजहों से हुई मॉब लिंचिंग के चलते कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. जिसके चलते विपक्ष सरकार पर इस मुद्दे को लेकर कई बार हमला बोल चुका है। अभी हाल ही में राजस्थान के अलवर जिले में एक मुस्लिम युवक को कथित गो-तस्करी के आरोप में पीट-पीटकर भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया था।

Source: jantakareporter.com

ममता सरकार द्वारा न्यूज़ चैनलों को बंद किए जाने के अमित शाह के आरोपों पर पुण्य प्रसून बाजपेयी का तंज, बोले- “वाक़ई देश में लोकतंत्र है, अच्छा लगा सुनकर”

Punya Prasun Bajpai attack Amit Shah

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार (11 अगस्त) को कोलकाता में ममता सरकार पर हमला करते हुए कहा कि बंगाल को घुसपैठियों का घर नहीं बनने देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी शरणार्थियों के खिलाफ नहीं। रैली के दौरान उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस बांग्लादेश से घुसपैठ को संरक्षण दे रही है। ऐेसी सरकार को हटाना होगा।

इस दौरान अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बीजेपी अध्यक्ष ने ममता सरकार पर बंगाली चैनलों के सिग्नल को प्रभावित करने का आरोप लगाया। अमित शाह ने कहा कि रैली के दौरान अनेक प्रकार का व्यवधान डालने का काम किया गया। आज बंगाल की जनता रैली न देख पाए इसलिए सारे बांग्ला चैनलों को डाउन (बंद) कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि अभी यह रैली बंगाल की जनता देख नहीं पा रही है। बीजेपी अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि ममताजी हमारी आवाज बंद करने से यह आवाज रूकेगी नहीं। मैं बंगाल के हर जिले में जाऊंगा और टीएमसी को उखाड़ दूंगा। लोकतंत्र का इतिहास उठाकर देख लीजिए, जिन्होंने भी आवाज दबाने का काम किया है वह खत्म हो गए।

पुण्य प्रसून बाजपेयी ने कसा तंज

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा ममता सरकार पर बंगाली न्यूज चैनलों के सिग्नल को प्रभावित किए जाने के आरोपों पर वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने ट्वीट कर तंज कसा है। बाजपेयी ने ममता सरकार द्वारा चैनलों को बंद किए जाने के अमित शाह के बयान को शेयर करते हुए लिखा है, “वाक़ई देश में लोकतंत्र है…अभिव्यक्ति की आज़ादी होनी चाहिए…अच्छा लगा सुन कर”।

बता दें कि देश के प्रमुख हिंदी समाचार चैनल ABP न्यूज में पिछले दिनों भारी उथल पुथल देखने को मिला। मोदी सरकार के आलोचक के रूप में चैनल में कार्यरत प्रमुख नामों को या तो इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया गया या उन्हें रिपोर्ट ना करने के लिए निर्देश दे दिया गया। मोदी सरकार के कार्यों को लेकर सवाल पूछने वाले चैनल में कार्यरत कई पत्रकारों को तो जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है।

ABP न्यूज़ में 1-2 अगस्त को जो कुछ हुआ, वह काफी भयानक था। 24 घंटे के अंदर चैनल के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर और वरिष्ठ पत्रकार व एंकर पुण्य प्रसून बाजपेयी ने ABP न्यूज से इस्तीफा दे दिया। प्रसून के अलावा अभिसार शर्मा को भी लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है। बता दें कि बाजपेयी का ‘मास्टर स्ट्रोक’ शो हर रोज सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे आता था।

माना जा रहा है कि मिलिंद खांडेकर और पुण्य प्रसून बाजपेयी की विदाई ‘मास्टरस्ट्रोक’ के कारण ही हुई है। देश के वरिष्ठ पत्रकारों में से एक बाजपेयी अपने शो ‘मास्टर स्ट्रोक’ से मोदी सरकार की ना​कामियों और जनता से किए कथित झूठे वादों का सच उजागर कर रहे थे। जिसके चलते अब उन्हे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ गया है।

जानें, लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष और 10 बार सांसद रहे सोमनाथ चटर्जी के जीवन से जुड़ी 15 खास बातें

Somnath Chatterjee passed away

लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का सोमवार (13 अगस्त) सुबह कोलकाता के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। चटर्जी 89 वर्ष के थे और उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा एवं दो बेटियां हैं। चटर्जी को कल ‘‘दिल का हल्का दौरा’’ पड़ा था, जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई और सोमवार सुबह करीब सवा आठ बजे उनका निधन हो गया। चटर्जी को किडनी से संबंधित बीमारी थी और उन्हें गत मंगलवार को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

चटर्जी को कल सुबह दिल का दौरा पड़ा था। उनका आईसीयू में इलाज चल रहा था। लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष को पिछले महीने मस्तिष्क में रक्तस्राव हुआ था। उनका पिछले 40 दिन से इलाज चल रहा था और स्वास्थ्य में सुधार होने के चलते उन्हें तीन दिन के लिए अस्पताल से छुट्टी दी गई थी। लेकिन पिछले मंगलवार को उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

जानें, चटर्जी के जीवन से जुड़ीं खास बातें

  • सोमनाथ चटर्जी का जन्म 25 जुलाई, 1929 को असम के तेजपुर में हुआ था।
  • उनके पिता का निर्मल चंद्र चटर्जी और मां का नाम वीणापाणि देवी था।
  • मशहूर वकील निर्मलचंद्र चटर्जी अखिल भारतीय हिंदू महासभा से जुड़े थे।
  • सोमनाथ चटर्जी की शिक्षा-दीक्षा कलकत्ता और ब्रिटेन में हुई। उन्होंने ब्रिटेन के मिडल टेंपल से बैरिस्टर की पढ़ाई की थी।
  • चटर्जी ने पहली बार 1971 में लोकसभा चुनाव लड़ा और संसद पहुंचने में कामयाब रहे।
  • 1971 में पहली बार सांसद बने चटर्जी 10 बार लोकसभा सदस्य के रूप में चुने गए।
  • चटर्जी माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य थे। वह 1968 में माकपा में शामिल हुए थे।
  • वह वर्ष 2004 से 2009 तक लोकसभा के अध्यक्ष रहे।
  • उन्होंने 35 सालों तक सांसद के तौर पर देश की सेवा की और इसके लिए उन्हें साल 1996 में सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • माकपा के संप्रग की पहली सरकार से समर्थन वापस ले लेने के बावजूद चटर्जी ने लोकसभा के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था।
  • इस वजह से वरिष्ठ नेता को वर्ष 2008 में माकपा से निष्कासित कर दिया गया था।
  • ममता बनर्जी ने 1984 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर सोमनाथ चटर्जी को पटखनी दी थी।
  • सोमनाथ चटर्जी का आदर सभी पार्टियों में था। उन्हें एक बहुत ही सम्मान नेता के तौर पर देखा जाता है।
  • साल 2004 में 14वीं लोकसभा के अध्यक्ष के रूप में सोमनाथ चटजी का सर्वसम्मति से निर्वाचन सदन में एक इतिहास रच गया।
  • चटर्जी 89 वर्ष के थे और उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा एवं दो बेटियां हैं।

Source: jantakareporter.com

राहुल गांधी आज तेलंगाना दौरे पर, छात्रों-बेरोजगारों को करेंगे संबोधित

Rahul Gandhi is all set to kick start his party poll campaign in Telangana on monday

कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद अपनी पहली तेलंगाना यात्रा पर राहुल गांधी सोमवार और मंगलवार को हैदराबाद में अलग-अलग कार्यक्रमों में महिला स्वयं सहायता समूहों, विद्यार्थियों, बेरोजगार युवकों और उद्यमियों को संबोधित करेंगे.

विधानपरिषद में कांग्रेस के उपनेता पी सुधाकर रेड्डी ने कहा, ‘यह यात्रा पार्टी का मनोबल ऊंचा करेगी. पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद उनकी यह पहली तेलंगाना यात्रा है. उन्होंने तेलंगाना बनने में अहम भूमिका निभाई है.’

सोमवार दोपहर को राहुल गांधी कर्नाटक के बीदर में नेहरू स्टेडियम में एक जनसभा को संबोधित करेंगे. उसके बाद तेलंगाना दौरे पर जाएंगे, जहां उनका दो दिन प्रवास का कार्यक्रम है.

तेलंगाना कांग्रेस की ओर से घोषित कार्यक्रम के मुताबिक गांधी सोमवार दोपहर पहुंचेंगे और महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ बातचीत के लिए यहां शम्साबाद के कन्वेंशन सेंटर में जाएंगे.

मंगलवार को गांधी 31600 बूथ कमेटी अध्यक्षों, मंडल और जिला कांग्रेस अध्यक्षों और प्रदेश इकाई के पदाधिकारियों के साथ टेलीकॉन्फ्रेंस करेंगे. उसके बाद वह होटल में एक घंटे तक मीडिया संपादकों और ब्यूरो प्रमुखों के साथ बातचीत करेंगे. उसके बाद वह तेलंगाना और आंध्रप्रदेश के करीब 150 युवा उद्योगपतियों और मुख्य कार्यकारियों को संबोधित करेंगे.

शाम में कांग्रेस अध्यक्ष सरूरनगर स्टेडियम में विद्यार्थियों और बेरोजगार युवकों की एक जनसभा में जाएंगे. रात साढ़े आठ बजे वह दिल्ली रवाना हो जाएंगे.

Source: hindi.firstpost.com

सरकार नीति में मुसलमान युवाओं को शरीक करे – क़ादरी

muslim student organization India
  • मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ का एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन

नई दिल्ली, 12 अगस्त। देश में पहली बार मुस्लिम युवा छात्रों ने मिलकर राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में उन्हें सम्मिलित कर सहयोग लेने की अपील की है। अगर भारत सरकार नहीं जानती है कि विश्व पर वहाबी ख़तरे का स्तर कितना विशाल है तो हम उन्हें बता सकते हैं। यह बात आज एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में उभरकर सामने आई जिसे भारत के सबसे बड़े मुस्लिम छात्र संगठन मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ ने दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित किया था।

इस मौक़े पर खचाखच भरे स्पीकर हॉल में युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता और संगठन के पूर्व अध्यक्ष सैयद मुहम्मद क़ादरी ने कहाकि भारत एक बहुलवादी देश है और इसकी एकता को बनाए रखने के लिए युवा सबसे महती भूमिका निभा सकते हैं। प्राय देश में यह माहौल बनाया जा रहा है कि भारत का मुसलमान एक ज़िम्मेदार नागरिक नहीं है जबकि हमारा तो यह दावा है कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में शामिल किए जाने से मुस्लिम युवाओं की भूमिका का सही आंकलन हो सकेगा और राष्ट्रीय एकता के लिए यह आवश्यक तत्व है। उन्होंने कहाकि हम देश के निर्माण, प्रगति, सुरक्षा और स्थिरता को लेकर कई विकासवादी क़दम उठा सकते हैं। हमें गर्व है कि हमारे 38 वर्ष पुराने संगठन में यह कार्य बहुत ज़िम्मेदारी से निभाए जा रहे हैं। सैयद मुहम्मद क़ादरी ने उपस्थित युवाओं से अपील की कि वह देश को कमजोर करने वाली ताक़तों से डटकर मुकाबला करें और भारत की स्थिरता के लिए अपने प्राणों की बलि देने में भी पीछे नहीं रहें क्योंकि 1857 से लेकर 1947 तक चली 90 साल की क्रांति में मुसलमानों के बलिदान की बेशुमार कहानियाँ हैं और यह हमारे बुज़ुर्गों की सुन्नत है।

इस मौक़े पर तंज़ीम उलामा ए इस्लाम के अध्यक्ष और सभा के अध्यक्ष मुफ्ती अशफाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि आज़ादी औऱ ज़िम्मेदारी एक ही शाख़ के दो फूल हैं। हमें नहीं भूलना चाहिए कि संभाल कर नहीं रखी गई आज़ादी गैर जिम्मेदारी के साथ ख़तरे में पड़ जाती है। हुसैन ने युवाओं को पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद की कई उक्तियों और क़ुरान के संदर्भ में समझाने की कोशिश की कि देश के प्रति ज़िम्मेदारी और प्रेम का नाम ही राष्ट्र प्रेम है। मुफ्ती अशफाक़ हुसैन ने कहाकि देश और दुनिया को वहाबी विचारधारा से गंभीर ख़तरे हैं और तथाकथित इस्लामी आतंकवाद इसी वहाबी नीति का दुष्परिणाम है। अगर भारत सरकार समझना चाहे तो हम उनकी मदद कर सकते हैं लेकिन कम से कम मुसलमानों को साथ लेकर चलना पहले सीखे। उन्होंने कहाकि देश के साथ मुसलमान का प्रेम और बढ़ जाता है जबकि उसे नीति में भागीदारी मिले। नीति में भागीदारी को सत्ता में भागीदारी से बड़ा समझा जाना चाहिए क्योंकि सत्ता को नीति ही नियमित करती है। मुफ्ती अशफ़ाक़ हुसैन ने बताया कि हज़रत हुसैन ने मानवता की रक्षा के लिए अपने पवित्र प्राणों की बलि दे दी थी जो हमें राष्ट्र और मानवता के सेवा करने के लिए हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

सभा में मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष मुफ्ती ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही ने कहाकि देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण तत्वों को बचाने, विकसित करने और संजोने के लिए युवाओं को प्रेरित करना आवश्यक है। यह देखा जाना चाहिए कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर युवाओं को देश को कमज़ोर करने वाली ताक़तों, विचारधाराओं, साज़िश और गतिविधियों को समझने, सूंघने और सुलझाने का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। हमारे संगठन ने गौरवपूर्ण तरीक़े से इस चुनौती से निपटने के लिए युवाओं को वहाबी विचारधारा को समझने और इससे निपटने का प्रशिक्षण और शिक्षा दी जाती है। कई सफल प्रयोगों में हमने कई कट्टरवादी तत्वों को सूफ़ीवाद की विचारधारा की तरफ़ मोड़कर राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है।

अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी केरल सेंटर के शाहनवाज़ अहमद मलिक वारसी ने कहा कि देश में मानवाधिकार और सामाजिक न्याय के सम्मुख चुनौतियों से समाज में बहुत गंभीरता से विचार हो रहा है। मुसलमानों और दलित- जनजातियों को बेवजह निशाना बनाना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि देश की मूल भावना और सामाजिक ताना बाना निहित राजनीतिक स्वार्थों से अतिरिक्त है। इस पर गंभीरता से विचार करके सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने के प्रयासों और इसके लिए किए गए सूफ़ी आध्यात्मिक प्रयोगों पर चर्चा करना चाहिए। हमें गर्व है कि कई विश्वास, धर्म और नस्ल के लोगों के बीच भारतीय आध्यात्मिक सामाजिक समरसता के विचार को हमने सार्वजनिक किया है और इसके विकास, उत्थान और विस्तार के लिए हमको लगातार प्रयत्नशील रहना चाहिए, इसके लिए इंटरफेथ कॉन्फ्रेंस और सिम्पोज़ियम के बेशुमार कार्यक्रम किए जा चुके हैं और विश्वास है कि भविष्य में भी किए जाते रहेंगे।

सम्मलेन के संयोजक और कन्जुल इमान के एडिटर मौलाना ज़फरुद्दीन बरकाती ने कहाकि भारत का स्वभाव बहुलता में एकता में निहित है। इसलिए देश के सामने साम्प्रदायिक घटकों की चुनौती को कम करके नहीं आंका जा सकता। हर समुदाय को इससे निपटना चाहिए जिसमें मुसलमानों के बीच सबसे बेहतर सूफ़ी विचारधारा इसका निवारण प्रस्तुत करती है।

अम्बर मिस्बाही ने कहाकि हमें देश के प्रति जवाबदेही के लिए अन्तर सामाजिक कार्यक्रमों की आवश्यकता है क्योंकि देश में परस्पकर सामुदायिक अज्ञानता के अभाव में दूषित और असत्य जानकारी का आदान प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने तकनीक के बेहतर इस्तेमाल करने और इसे समाज, देश और खुद को मज़बूत करने में इस्तेमाल किए जाने पर बल दिया।

मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष शुजात अली क़ादरी ने कहाकि भारत का स्वभाव सामुदायिक है जिसे एक रंग, भाषा और सम्प्रदाय के तौर पर नहीं लाया जा सकता। हमें लगता है कि भारतीय मुस्लिम युवा जिसमें बहुमत सूफ़ी समुदाय का है, वह देश के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को समझता है। उन्होंने कहाकि रोज़गार और कौशल प्रशिक्षण से उसे अपने साथ लाया जा सकता है। इस मौक़े पर एक रेंडम सर्वे के आधार पर शुजात क़ादरी ने युवाओं से कई सवाल पूछे जिसके प्रत्युत्तर में उन्होंने एक छह सूत्रीय प्रतिवेदन का प्रारूप तैयार किया जिसे बाद में डाक से भारत सरकार के नाम भेजा जाएगा।

छह सूत्रीय प्रतिवेदन

इस मौक़े पर मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया ने सभा में उपस्थित लोगों के लिए छह सूत्रीय प्रतिवेदन पेश किया जिसमें देश की सुरक्षा, सामाजिक न्याय, आतंकवाद एवं कट्टरता से निवारण, रोज़गार एवं कौशल प्रबंधन, सामाजिक कार्यक्रम और पर्यावरण से जुड़े बिन्दुओं पर युवाओं को दिशा निर्देश दिए गए। इस मौक़े पर उपस्थित जनसमुदाय को यह प्रतिवेदन पढ़ कर सुनाया गया। सभी ने देश की नीति में मुस्लिम सूफ़ी युवाओं की भूमिका पर इस प्रतिवेदन को स्वीकार किया और इसे लागू किए जाने की भारत सरकार से अपील की।

यह भी रहे शामिल

सभा में कारी सगीर रिज़वी, मौलाना अब्दुल वाहिद, डॉ इमरान कुरैशी, MSO दिल्ली प्रदेश सचिव साकिब बरकाती, मुमताज़ अत्तारी, आफताब रिज़वी के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्र  भी शामिल रहे और देश की सलामती और सद्भावना के लिए सभी ने कार्यक्रम के अंत में दुआ माँगी।

मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को हटाने की तैयारी में केजरीवाल सरकार?

Delhi assembly wants chief secretary Anshu Prakash removed

अरविंद केजरीवाल सरकार क्या दिल्ली के मुख्य सचिव (चीफ सेक्रेटरी) अंशु प्रकाश को हटाने की तैयारी में है. यह सवाल इसलिए उठता है क्योंकि शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित कर मुख्य सचिव को कथित रूप से बीजेपी के इशारे पर सीसीटीवी कैमरा प्रोजेक्ट में बाधा पहुंचाने के लिए तत्काल हटाने की मांग की गई.

इस कदम से नौकरशाहों और सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है।

आप की बहुमत वाली दिल्ली विधानसभा की ओर से विचार व्यक्त किया गया कि दिल्ली में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाना फौरन जरूरी है.

विधानसभा में पारित प्रस्ताव में कहा गया, ‘सदन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश की सीसीटीवी परियोजना को बाधित करने के लिए निंदा करता है जो केंद्र की बीजेपी सरकार की ओर से काम करते प्रतीत होते हैं. उनका कृत्य सीसीटीवी परियोजना को बाधित करने के विपक्ष की साजिश का हिस्सा लगता है. सदन मांग करता है कि अंशु प्रकाश को दिल्ली के मुख्य सचिव पद से तत्काल हटाया जाए.’

बता दें कि 19-20 फरवरी की आधी रात अरविंद केजरीवाल के आवास पर राशन कार्ड और अन्य मुद्दों पर बुलाई गई बैठक के दौरान मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ कथित रूप से हाथापाई की गई थी. अंशु प्रकाश ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री वहां मौजूद थे मगर वो तमाशबीन बने रहे.

Delhi assembly wants chief secretary Anshu Prakash removed
Delhi assembly wants chief secretary Anshu Prakash removed

जुलाई महीने में एलजी के आवास में अरविंद केजरीवाल और उनके कैबिनेट के 3 मंत्री धरने पर बैठ गए थे
इस घटना के बाद दिल्ली के आईएएएस अधिकारियों ने केजरीवाल सरकार और मंत्रियों से मिलना बंद कर दिया था. अधिकारियों के इस रुख को लेकर मुख्यमंत्री केजरीवाल बीते जून महीने में अपने 3 मंत्रियों के साथ एलजी ऑफिस में 9 दिन तक धरने पर बैठे रहे थे.

(भाषा से इनपुट)

 

Source: hindi.firstpost.com

मराठा आरक्षण आंदोलन को बदनाम कर रहे हैं कुछ लोग: शिवसेना नेता

Some people are defaming the Maratha reservation movement Shiv Sena leader

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा इस वक्त जोरों-शोरों से उठाया जा रहा है. मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान 9 अगस्त को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया गया था लेकिन इस बंद के दौरान आंदोलन हिंसक हो गया और लोगों ने तोड़फोड़ की.

इस हिंसा पर लोकसभा में शिवसेना नेता चंद्रकांत खैरे ने कहा कि कुछ लोग मराठा आरक्षण आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. खैरे ने कहा कि मराठा आरक्षण की मांग को लेकर किए गए शांतिपूर्ण बंद को कुछ लोग बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए चंद्रकांत खैरे ने कहा कि गुरुवार को मराठा आरक्षण की मांग को लेकर हुआ महाराष्ट्र बंद शांतिपूर्ण रहा. लेकिन मराठा समुदाय के लोगों को बदनाम करने के लिए कुछ असामाजिक तत्वों ने एक औद्योगिक क्षेत्र में तोड़फोड़ की और पुलिस मूकदर्शक बनी रही.

उन्होंने मांग की कि इस घटना की जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो.

शून्यकाल में ही बीजेपी के रमेश पोखरियाल ने कहा कि उत्तराखंड के हरिद्वार में आदमखोर बाघ के अलावा हाथी से लोगों को खतरा पैदा हो रहा है. इसलिए, वह जंगली जानवरों से लोगों की सुरक्षा के लिए तार की बाड़ लगाने या दीवारें खड़ी करने का अनुरोध करते हैं. उन्होंने जानवरों के हमलों में मारे गए लोगों के आश्रितों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की भी मांग की.

समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने कहा कि उत्तरप्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षा प्रेरकों की नौकरी चली गई है. वे बेरोजगार हो गए हैं. जब शिक्षा प्रेरक आंदोलन कर रहे थे तब केंद्रीय गृह मंत्री ने इस विषय पर आश्वासन दिया था. उन्होंने मांग की कि इन शिक्षा प्रेरकों के बकाए का भुगतान किया जाए.

इनेलो के दुष्यंत चौटाला ने मांग की कि दूध के लिए 40 रुपए प्रति लीटर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए. बीजेपी के पशुपति नाथ सिंह ने पूरे देश में एक तरह की न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करने की मांग की.

Source: hindi.firstpost.com

राहुल गांधी आज जयपुर में, राजस्थान में फूंकेंगे कांग्रेस का चुनावी बिगुल

Rahul Gandhi Jaipur visit will start Rajasthan assembly poll election campaign

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज यानी शनिवार को जयपुर के दौरे पर आएंगे. वो यहां राजस्थान में पार्टी के चुनाव अभियान की औपचारिक शुरुआत करेंगे.

तय कार्यक्रम के मुताबिक राहुल गांधी यहां रामलीला मैदान में राज्यभर से आए पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकताओं को संबोधित करेंगे. गांधी जयपुर हवाई अड्डे से रामलीला मैदान तक एक स्पेशल बस से पहुंचेंगे. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव अशोक गहलोत ने यहां पहुंचकर राहुल गांधी के दौरे की तैयारियों का जायजा लिया और जरूरी निर्देश दिए.

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने शुक्रवार को बताया कि राहुल कांग्रेस पार्टी के चुनावी अभियान को शुरू करने के लिए आ रहे हैं. वह पार्टी के कार्यकताओं को विधानसभा चुनाव में जीत दिलाने का संदेश देंगे और उन्हें बताएंगे कि अगले तीन महीने किस तरह से चुनावी अभियान को चलाया जाएगा.

40 दिन की गौरव यात्रा पर हैं सीएम राजे

जयपुर शुरू से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का गढ़ रहा है. राहुल का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जबकि राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे चालीस दिन की ‘राजस्थान गौरव यात्रा’ पर हैं और अपनी जनसभाओं में वह कांग्रेस अध्यक्ष पर लगातार निशाना साधे हुए हैं. खासकर राहुल गांधी के मंदिरों में जाने को लेकर दोनों पक्षों में हाल ही में काफी जुबानी जंग हुई है.

पायलट के मुताबिक, पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद गांधी पहली बार प्रदेश यात्रा पर आ रहे हैं और यह वही शहर है जहां से उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया था. इस कारण से कांग्रेस पार्टी के लिए जयपुर एक अहम जगह है. पायलट ने कहा कि गांधी बीजेपी के गढ़ माने जाने वाले स्थान से कांग्रेस पार्टी के चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे.

पायलट का बीजेपी सरकार पर निशाना

पायलट ने कहा, ‘बीजेपी हमेशा दावा करती है कि जयपुर ऐसा शहर रहा है जहां पार्टी मजबूत रही है, कल (शनिवार) हम इस दावे को झूठा साबित कर देंगे. बीजेपी पहले से ही बेचैन है और इसी के चलते आरोप और भ्रामक बयानबाजी कर रही है जो उनकी चिंता को दिखाता है.’ उन्होंने कहा कि हर जिले के पार्टी प्रतिनिधि रामलीला मैदान में राहुल गांधी की बैठक में भाग लेंगे.

मुख्यमंत्री राजे की ‘राजस्थान गौरव यात्रा’ पर टिप्पणी करते हुए पायलट ने कहा कि राजे ने अपनी यात्रा कांग्रेस के ‘मेरा बूथ मेरा गौरव’ कार्यक्रम के बाद शुरू की है. कांग्रेस पने ‘मेरा बूथ मेरा गौरव’ कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 200 विधानसभा क्षेत्रों में से 195 विधानसभा क्षेत्रों के बूथ स्तर तक कवर किया है.

राहुल गांधी शनिवार को दिल्ली से जयपुर के सांगानेर हवाई अड्डे पर आएंगे जहां पार्टी नेता उनका स्वागत किया जाएगा और उसके बाद वे हवाई अड्डे से रामलीला मैदान तक विशेष बस में जाएंगे. राज्य में इस साल के आखिर में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के मद्देनजर गांधी आगामी दिनों में कई रैलियों को संबोधित करेंगे.

Source: hindi.firstpost.com

यशवंत सिन्हा, शौरी का मोदी सरकार पर वार, अकेले सभी फैसले लेता है PMO

Yashwant Sinha Arun Shourie attack Modi government

पूर्व केंद्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी और बीजेपी के असंतुष्ट चल रहे सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने नरेंद्र मोदी सरकार पर फिर निशाना साधा है.

शुक्रवार को मुंबई में ‘लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ’ विषय पर परिचर्चा के दौरान यशवंत सिन्हा ने दावा किया कि एनडीए सरकार में निर्णय ‘अकेले ही लिए जा रहे हैं.’ उन्होंने राजनाथ सिंह का नाम लिए बिना दावा किया कि गृह मंत्री को जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन से हटने के पार्टी के निर्णय के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

उन्होंने कहा कि इसी तरह से वित्त मंत्री को जानकारी नहीं थी कि नोटबंदी की घोषणा होने जा रही है. उन्होंने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को ‘35 हजार करोड़ रुपए का घोटाला बताया जो कि 64 करोड़ रुपए के बोफोर्स घोटाले से कहीं बड़ा है.’

वहीं अरुण शौरी ने आरोप लगाया, ‘निश्वित रूप से संविधान और लोकतंत्र खतरे में है. अभी तक पीट-पीटकर मार डालने (मॉब लिन्चिंग) की 72 घटनाएं हुई हैं. सोहराबुद्दीन (फर्जी मुठभेड़) मामले में 54 गवाह पलट चुके हैं. सीबीआई का दुरूपयोग किया जा रहा है. ऐसी उम्मीद नहीं लगती कि चीजें बदलेंगी.’

उन्होंने कहा कि मीडिया सरकार से भयभीत है क्योंकि उसका विज्ञापन बंद हो सकता है.

इस अवसर पर बीजेपी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने फिर दोहराया कि वो खुद से पार्टी नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने कहा, ‘हालांकि यदि वो मुझे बाहर करना चाहें तो मैं उनके विवेक पर सवाल नहीं उठाऊंगा.’

Source: hindi.firstpost.com

ट्रिपल तलाक बिल पर मोदी सरकार को झटका, राज्यसभा में नहीं हो पाया पेश

Triple Talaq par Modi sarkar ko jhatka Rajyasabha me nahi ho paya pesh

आगामी लोकसभा चुनाव के चलते ट्रिपल तलाक बिल को राज्यसभा में पारित कराने मे जुटी मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा है। कैबिनेट की और से तीन संशोधनों को मंजूरी के बाद भी बिल आज राज्यसभा में पेश नहीं हो पाया।

शुक्रवार को राज्यसभा के चेयरमैन वेंकैया नायडू ने कहा कि बिल पर सदन में एकता नहीं है इसलिए इसे आज नहीं रखा जाएगा। क्योंकि इस पर आम सहमति नहीं बन पाई है। माना जा रहा है कि अब इसे शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। हालांकि सरकार के पास इस पर अध्यादेश लाने का भी विकल्प है।

मॉनसून सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। 2.30 बजे जब राज्यसभा की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो सभापति ने साफ कर दिया कि इस बिल को आज नहींं लिया जाएगा। संसद के मॉनसून सत्र का आज आखिरी दिन है, ऐसे में सरकार द्वारा इसी सत्र में तीन तलाक बिल को पास कराने की मंशा अधूरी रह गई।

बता दें कि मोदी कैबिनेट ने जो तीन तलाक संशोधन बिल को मंजूरी दी है, उसके मुताबिक ये तय किया गया है कि संशोधित बिल में दोषी को ज़मानत देने का अधिकार मेजिस्ट्रेट के पास होगा और कोर्ट की इजाज़त से समझौते का प्रावधान भी होगा।

तीन तलाक बिल पर यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने कहा कि हमारी पार्टी की स्थिति बिल को लेकर एकदम साफ है। मैं इस बारे में और कुछ अभी नहीं कहना चाहूंगी।

कोलकाता में अमित शाह का भारी विरोध, लगे – ‘BJP वापस जाओ’ के पोस्‍टर

Posters of go back BJP pop up in Kolkata ahead of Amit Shah rally

पश्चिम बंगाल में अपनी जड़े मजबूत करने में जुटी बीजेपी का भारी विरोध हो रहा है। कोलकाता में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली से पहले पूरे शहर में ‘BJP वापस जाओ’ के पोस्‍टर देखने को मिल रहे है। हालांकि बीजेपी का दावा है कि ये पोस्टर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा लगाये गए हैं।

एएनआई ने पोस्टरों के तस्वीर जारी की हैं। इन पोस्टरों पर ‘‘भाजपा बंगाल छोड़ो’’ और ‘‘बंगाल विरोधी भाजपा वापस जाओ’’ लिखा है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक ये पोस्टर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा लगाये गए हैं। हालांकि इस आरोप से पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इनकार किया।

उधर, बीजेपी ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अमित शाह की रैली में आनेवाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। इतना ही नहीं बीजेपी ने दावा किया कि कुछ अज्ञात लोगों ने नयाबसात इलाके में शुक्रवार देर रात एक बस पर हमला कर दिया। इस बस में अमित शाह की रैली में जाने वाले कार्यकर्ता शामिल थे। हालांकि, घटना में कोई घायल नहीं हुआ है।

जानकारी के मुताबिक मायो रोड पर बीजेपी अध्यक्ष शाह ‘युवा स्वाभिमान समवेश’ रैली को संबोधित करेंगे। यह रैली दोपहर 1 बजे होगी। बता दें कि बंगाल में लोकसभा की 43 सीटें हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी को अकेले 34 सीटें मिली थीं।

2019 लोकसभा चुनाव: पीएम उम्मीदवारी पर राहुल गांधी ने कही यह बात!

Rahul Gandhi said on 2019 Lok Sabha Elections

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी से पीछे हटने का लगभग साफ संकेत देते हुए कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य मोदी एवं भाजपा को सत्ता में आने से रोकने का है।

राहुल गांधी ने शुक्रवार को वरिष्ठ पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस बारे में नंबर आने पर चुनाव के बाद बात हो जाएगी। इसका खास मायने नही है और न ही इसको लेकर कोई समस्या है।

उन्होने यह भी विश्वास जताया कि भाजपा को अगर 200 से कम सीटे हासिल हुई तो मोदी को उनके सहयोगी दल ही प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार नही करेंगे। उन्होने कहा कि भाजपा के विजय रथ को वह गठबन्धनों के बूते पर रोकने में सफल रहेंगे।

उन्होने कहा कि उत्तरप्रदेश एवं बिहार में बनने वाले गठबंधनों से मोदी को करारा झटका मिलने वाला है। उन्होने कहा कि उत्तरप्रदेश में बसपा सपा के गठबंधन में कांग्रेस भी शामिल होगी,इसके लिए बातचीत चल रही है।अगर तीनो दल मिलकर चुनाव लड़े तो मोदी को पांच सीटे भी उत्तरप्रदेश में नही मिल पाएंगी।

पिछले लोकसभा चुनाव में राज्य की 80 सीटों में से भाजपा एवं उसके सहयोगी दल ने 73 सीटे जीती थी। कांग्रेस को केवल दो सीटे रायबरेली एवं अमेठी मिली थी। रायबरेली से सोनिया गांधी तो काफी अच्छे अन्तर से विजयी हुई थी लेकिन राहुल को काफी जबर्दस्त चुनौती का अमेठी में सामना करना पड़ा था।

उत्तरप्रदेश में गठबंधन में कांग्रेस को कितनी सीटे मिलेगी इस बारे में उन्होने कुछ नही कहा। गांधी ने बिहार का जिक्र किया और कहा कि वहां भी राजद,कांग्रेस एवं अन्य दलों के गठबंधन द्वारा मोदी को करारी चुनौती मिलने वाली है। उन्होने कहा कि इन्ही दो राज्यों में मिलने वाली शिकस्त से मोदी का रास्ता रुक जाएगा।

 

Source: hindi.siasat.com

18 अगस्त को पाकिस्तान की कमान संभालेंगे इमरान खान

Imran Khan be sworn Pak PM aug 18 Kapil Dev Gavaskar Sidhu invited

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी के चेयरमैन इमरान खान आजादी का जश्न मनाने के बाद 18 अगस्त को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे. उनके शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तय हो गई है.

इससे पहले PTI ने इमरान खान को प्रधानमंत्री पद के लिए नामांकित किया. इस्लामाबाद के निजी होटल में पार्टी की संसदीय समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया.इमरान खान ने विश्वास जताने के लिए पार्टी का शुक्रिया अदा किया. शुक्रवार को PTI के प्रवक्ता फैसल जावेद खान ने घोषणा की कि इमरान खान का शपथ ग्रहण समारोह 18 अगस्त को होगा. इसमें कपिल देव और नवजोत सिद्धू समेत अन्य शिरकत करेंगे.

बता दें कि क्रिकेटर से नेता बने 65 वर्षीय इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ 25 जुलाई को हुए आम चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी. इसके बाद PTI ने दावा किया कि उसे पाकिस्तान की 342 सदस्यीय नेशनल असेंबली में कम से कम 180 का समर्थन हासिल है. इन 342 सीटों में 272 वो सीटें भी शामिल हैं, जिनके लिए 25 जुलाई को आम चुनाव हुए थे. इसके अलावा नेशनल असेंबली में 60 सीटें महिलाओं के लिए और 10 सीटें धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षित हैं. पाकिस्तान में कोई भी पार्टी तभी सरकार बना सकती है, जब उसके पास कुल 172 सीटें हो.

 

Source: hindi.siasat.com

जवाहरलाल नेहरू पर दिए अपने बयान के लिए दलाई लामा ने माफी मांगी

Dalai Lama regrets statement on Jawaharlal Nehru

शुक्रवार को तिब्बत के आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा ने जवाहर लाल नेहरु पर दिए अपने बयान के लिए माफी मांग ली. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक दलाई लामा ने कहा- मेरे बयान ने विवाद हो गया है. अगर मैंने कुछ गलत कहा है तो मैं मांफी मांगता हूं. ये माफी दलाई लामा ने अपने उस बयान पर मांगी जिसमें उन्होंने कहा था, ‘महात्मा गांधी जी जिन्ना को प्रधान मंत्री बनाने के लिए इच्छुक थे लेकिन पंडित नेहरू ने इनकार कर दिया था.’

इसके पहले इसी हफ्ते की शुरुआत में दलाई लामा ने कहा था कि महात्मा गांधी चाहते थे कि मोहम्मद अली जिन्ना देश के शीर्ष पद पर बैठें, लेकिन पहला प्रधानमंत्री बनने के लिए जवाहरलाल नेहरू ने ‘आत्म केंद्रित रवैया’ अपनाया. दलाई ने ये भी दावा किया था कि यदि महात्मा गांधी की जिन्ना को पहला प्रधानमंत्री बनाने की इच्छा को अमल में लाया गया होता तो भारत का बंटवारा नहीं होता.

गोवा में एक सेमिनार में बोल रहे थे लामा:

गोवा प्रबंध संस्थान के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 83 वर्षीय दलाई लामा ने यह बात कही थी.

सही निर्णय लेने संबंधी एक छात्र के प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा था, ‘मेरा मानना है कि सामंती व्यवस्था के बजाय प्रजातांत्रिक प्रणाली बहुत अच्छी होती है. सामंती व्यवस्था में कुछ लोगों के हाथों में निर्णय लेने की शक्ति होती है, जो बहुत खतरनाक होता है.’

उन्होंने कहा, ‘अब भारत की तरफ देखें. मुझे लगता है कि महात्मा गांधी जिन्ना को प्रधानमंत्री का पद देने के बेहद इच्छुक थे. लेकिन पंडित नेहरू ने इसे स्वीकार नहीं किया.’

उन्होंने कहा,’मुझे लगता है कि स्वयं को प्रधानमंत्री के रूप में देखना पंडित नेहरू का आत्म केंद्रित रवैया था….यदि महात्मा गांधी की सोच को स्वीकारा गया होता तो भारत और पाकिस्तान एक होते.’

उन्होंने कहा था, ‘मैं पंडित नेहरू को बहुत अच्छी तरह जानता हूं, वह बेहद अनुभवी और बुद्धिमान व्यक्ति थे, लेकिन कभी-कभी गलतियां हो जाती हैं.’

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VIDEO: राफेल डील के खिलाफ संसद परिसर में कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों का प्रदर्शन, सोनिया गांधी भी प्रदर्शन में हुईं शामिल

Sonia Gandhi protest rafale deal issue

‘जनता का रिपोर्टर’ द्वारा राफेल विमान सौदे को लेकर किए गए खुलासों के बाद कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियां विमान सौदे में कथित गड़बड़ी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हर रोज निशाना साध रही है। कांग्रेस राफेल का मुद्दा लगातार चर्चा में बनाए रखना चाहती है। इसी के तहत खुद पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर राफेल विमान सौदे में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए रोजाना ट्वीट कर रहे हैं।

इस बीच राफेल डील के खिलाफ कांग्रेस का विरोध-प्रदर्शन जारी है। गुरुवार (10 अगस्त) को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले संसद परिसर में कांग्रेस के सांसदों ने राफेल विमान सौदे के खिलाफ हाथ में तख्ती लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस के अलावा सीपीआई, आरजेडी और आम आदमी पार्टी सहित अन्य पार्टियों के सांसद भी शामिल हुए।

इस प्रदर्शन में यूपीए चेयरमैन सोनिया गांधी भी शामिल हुईं। इसके अवाला शुक्रवार को राफेल डील का मुद्दा संसद में भी सुनाई दी। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने राफेल डील को लेकर मोदी सरकार पर उठाए सवाल। कांग्रेस नेता ने कहा कि राफेल डील में मोदी सरकार ने बड़ा घोटाला किया है, इस पर बहस जरूर होनी चाहिए।

संसद परिसर में राफेल डील के खिलाफ प्रदर्शन में सोनिया गांधी के अलावा गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और अम्बिका सोनी समेत कांग्रेस के कई सांसद शामिल हुए। बता दें कि राहुल गांधी राफेल डील को लेकर मोदी सरकार पर लगातार हमला कर रहे हैं। उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भी यह मुद्दा उठाया था।

कांग्रेस ने इसी मामले में प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे रखा है। पार्टी का आरोप है कि राफेल विमानों की कीमत बताने के संदर्भ में मोदी और सीतारमण ने सदन को गुमराह किया है। पिछले दिनों राहुल के गंभीर आरोपों का रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब देते हुए कहा था कि 25 जनवरी 2008 को फ्रांस के साथ सीक्रेसी अग्रीमेंट कांग्रेस की ही सरकार ने किया था, हम तो इसे आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि इस अग्रीमेंट में राफेल डील भी शामिल है। रक्षा मंत्री ने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार थी उस समय तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने फ्रांस की सरकार के साथ सीक्रेसी अग्रीमेंट्स किया था। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस के अध्यक्ष जब फ्रेंच प्रेजिडेंट से मिले तो क्या बात हुई, नहीं पता।

बता दें ‘जनता का रिपोर्टर’ ने राफेल विमान सौदे को लेकर दो भागों (पढ़िए पार्टी 1 और पार्टी 2 में क्या हुआ था खुलासा) में बड़ा खुलासा किया था। जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में भुचाल आ गया। कांग्रेस राफेल डील को लेकर मोदी सरकार पर सीधे तौर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है। खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘जनता का रिपोर्टर’ की खबर को शेयर कर कई बार मोदी सरकार पर हमला बोल चुके हैं।

 

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केजरीवाल पर कांग्रेस का वार, कहा- अवसरवाद से राजनीति नहीं की जा सकती

Congress spokesperson Sharmishtha Mukherjee says AAP does politics of opportunism

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने आज अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला किया. उन्होंने कहा कि राज्यसभा के उप-सभापति चुनावों का ‘बहिष्कार’ कर आम आदमी पार्टी ने सिर्फ भाजपा की मदद ही की है. 2015 में सत्ता में आने के बाद से ही अरविंद केजरीवाल का केंद्र और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ झगड़ा रहा है. लेकिन आज के मतदान से आम आदमी पार्टी के तीन सांसदों ने बहिष्कार कर न सिर्फ विपक्ष के आंकड़ों को कम कर दिया बल्कि बहुमत की संख्या को कम करके करके सरकार की मदद भी की. पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने ट्वीट किया- “आम आदमी पार्टी कहती है, ‘राजनीति अहंकार पर नहीं चलती है. बिल्कुल! यही कारण है कि अरविंद केजरीवाल ने भाजपा की मदद करते हुए राज्यसभा में मतदान से दूर रहने का फैसला किया.”

आप ने विपक्ष के उम्मीदवार बीके हरिप्रसाद को सशर्त समर्थन दिया था. वे चाहते थे कि राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल को फोन करें और उनसे मदद मांगे. जब राहुल गांधी ने फोन नहीं किया तो पार्टी ने घोषणा की कि वह चुनाव से बाहर रहेगी. कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए पार्टी नेता संजय सिंह ने कहा, ‘अगर राहुल गांधी नरेंद्र मोदी को गले लगा सकते हैं, तो वह अरविंद केजरीवाल से उनके पार्टी के उम्मीदवार के समर्थन के लिए क्यों नहीं पूछ सकते हैं.’

कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि तीन वरिष्ठ नेताओं – गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और अहमद पटेल – ने फोन किया था. लेकिन केजरीवाल राहुल गांधी से फोन कॉल चाहते थे.

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने ट्वीट किया:

आखिर राहुल गांधी को ऐसे इंसान से समर्थन की मांग क्यों करनी चाहिए जिसने खुलेआम 2019 के चुनावों में बीजेपी के समर्थन की घोषणा की है. अगर उनकी मांग पूरी हो जाए तो 2019 के चुनावों में वो बीजेपी का समर्थन करेंगे. राजनीति विचारधाराओं की लड़ाई है. ये अवसरवादी लोगों के लिए एक हाथ दे एक हाथ दे के तर्ज पर नहीं की जाती.

जून में दिल्ली विधानसभा में केजरीवाल ने घोषणा की थी कि अगर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया तो वह 2019 में बीजेपी के लिए प्रचार करने के लिए तैयार हैं. शर्मिष्ठा मुखर्जी अपने ट्वीट में इसी घोषणा का जिक्र कर रही थीं. कांग्रेस और आप के बीच के तनावपूर्ण संबंध 2011 से ही चले आ रहे हैं. जब आप का गठन नहीं हुआ था और केजरीवाल और उनके करीबी अन्ना हजारे के सहयोगी थे. अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का नेतृत्व किया था. यह आंदोलन 2014 के चुनावों में कांग्रेस की हार का एक बड़ा कारण बना था.

2013 में आप ने दिल्ली में कांग्रेस के समर्थन के साथ सरकार बनाई. लेकिन 49 दिनों के बाद ही अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस पर भाजपा के साथ सहयोग करने और जन लोकपाल विधेयक को रोकने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया.

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गौरव यात्रा में सरकारी धन के खर्च को लेकर बीजेपी अध्यक्ष को नोटिस जारी

Rajasthan High Court gives notice BJP for the expenditure of government money in Gaurav Yatra

जयपुर। राजस्थान हाइकोर्ट ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की ओर से प्रदेश में निकाली जा रही राजस्थान गौरव यात्रा में हो रहे सरकारी खर्च को लेकर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन लाल सैनी को नोटिस जारी कर 16 अगस्त तक जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नांदजोग और न्यायाधीश जीआर मूलचंदानी की खंडपीठ ने यह आदेश विभूति भूषण शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

जनहित याचिका में कहा गया है कि चालीस दिन चलने वाली इस यात्रा में 165 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करते हुए 134 आम सभाएं की जाएगी। यह यात्रा छह हजार 54 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। यात्रा शुरू करने से पहले गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने बयान जारी कर इसे भाजपा की यात्रा बताते हुए पार्टी फंड से खर्चा उठाने की बात कही थी। इसके अलावा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी ने भी ऐसी ही बात कही थी। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार की ओर से विभागों को आदेश जारी कर यात्रा में व्यवस्थाएं करने को कहा है। यात्रा की मीडिया कवरेज के लिए डीआईपीआर को निर्देश दिए गए हैं।

जनहित याचिका में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सहित सरकारी अधिकारियों को पक्षकार बनाते हुए कहा गया कि पार्टी विशेष के चुनाव प्रचार के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग को व्यवस्था करने को कहा गया है। जिसमें करोड़ों रुपये का खर्चा होगा। याचिका में कहा गया कि सरकारी राजकोष से किसी राजनीतिक पार्टी का चुनाव अभियान नहीं चलाया जा सकता। याचिका में गुहार की गई है कि गौरव यात्रा में खर्च होने वाली राशि की भाजपा से वसूली की जाए। वहीं सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया की मामले में पीडब्ल्यूडी को दिए आदेश वापस ले लिए गए हैं। इस पर अदालत ने बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

 

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अगर मायावती लोकसभा चुनाव में नेतृत्‍व करती हैं तो नरेंद्र मोदी की घर वापसी तय है- जिग्नेश मेवानी

Mayawati should lead in Lok Sabha polls Narendra Modi return home says Jignesh Mevani

दलित नेता एवं गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी ने केंद्र सरकार पर संविधान एवं कानून की धज्जियां उड़ाने और दलित विरोधी होने का गंभीर आरोप लगाया है।

मेवानी ने वाराणसी में आयोजित ‘नव दलित सम्मलेन’ को संबोधित करते हुए प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर भी जमकर बोला। इस दौरान मेवानी ने कहा कि अगर मायावती लोकसभा चुनाव में नेतृत्‍व करती हैं तो नरेंद्र मोदी की घर वापसी तय है।

उन्होंने कहा कि गत 4 वर्षों में जिस प्रकार से दलितों को झूठे मुकदमों में फंसाया गया है, ऐसा आजादी के बाद कभी नहीं हुआ। गत 9 अप्रैल के भारत बंद के दौरान सैंकड़ों दलितों पर झूठे मुकदमे दायरे किए गए।

अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले दलितों को निशाना बनाने का सिलसिला जारी है। हालत ये है कि दलित आंदोलन को आर्थिक मदद देने वाले अधिकारियों को खोज-खोज कर परेशान किया जा रहा है।

मेवानी ने कहा कि केंद्र सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए विपक्षी राजनीतिक दलों एवं लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले सामाजिक संगठनों को मिलकर चलना होगा। उन्होंने कहा कि भारत के लोकतंत्र को बचाने के लिए 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता से बेदखल करना होगा।

सभा के बाद विधायक मेवानी ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व को स्वीकारने का संकेत दिया।

उन्होंने कहा कि बहनजी के एक तरफ जिग्नेश और दूसरी तरफ चंद्रशेखर रावण खड़ा होगा, तो उनका कोई मुकाबला नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार के दौरान बदमाशों को पकड़ने के नाम पर फर्जी मुठभेड़ में गरीबों एवं दलितों को मारा जा रहा है। उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाया जा रहा है।

 

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तीन तलाक़ बिल: बीजेपी ने व्हिप जारी किया, सोनिया गांधी ने कहा- ‘कांग्रेस का रुख साफ़ है’

Sonia Gandhi says our party position is absolutely clear Triple Talaq bill

संसद के मॉनसून सत्र का शुक्रवार (10 अगस्त) को अंतिम दिन है। सरकार शुक्रवार को राज्यसभा में तीन तलाक विधेयक को पेश करेगी। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने कहा कि ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख साफ है और वो इससे ज्यादा और कुछ नहीं कहना चाहती है।

आपको बता दें कि बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। लिहाजा, इस बिल को संसद की मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

वहीं, कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने इस मसले पर विपक्ष से सलाह-मशविरा नहीं किया। वहीं, विपक्ष राफेल डील को लेकर सदन में हंगामा कर सकता है।

आपको बता दें कि इससे पहले गुरुवार (09 अगस्त) को सरकार ने मुस्लिमों में तीन तलाक से जुड़े प्रस्तावित कानून में आरोपी को सुनवाई से पहले जमानत जैसे कुछ संरक्षणात्मक प्रावधानों को मंजूरी दे दी थी।

सरकार ने इस कदम से इन चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया है कि तीन तलाक की परंपरा को अवैध घोषित करने तथा पति को तीन साल तक की सजा देने वाले इस प्रस्तावित कानून का दुरुपयोग किया जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, मोदी सरकार ट्रिपल तलाक बिल को राज्यसभा में पेश करेगी और इसे पास कराने की पूरी कोशिश करेगी। सूत्रों के अनुसार, सरकार तीन तलाक बिल को संसद के दोनों सदनों में पारित कराने के लिए एक दिन का सत्र भी बढ़ा सकती है।

 

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टीडीपी सांसद हिटलर बनकर पहुंचे संसद, दी पीएम मोदी को बड़ी चुनौती

TDP MP becomes Hitler parliament

संसद में बार-बार अपने अनोखे हुलिए के लिए चर्चा में रहने वाले तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी) के सांसद और पूर्व अभिनेता नरामली शिवप्रसाद गुरुवार (9 अगस्‍त) को जर्मनी के तानाशाह अडाेल्‍फ हिटलर का भेष धारण करके संसद पहुंच गए।उन्होंने हिटलर की तरह अपने बाल और मूंछों को सेट करवाया। साथ ही उनकी ड्रेस भी हिटलर की तरह ही थी।

इस दौरान सांसद नरमल्ली शिवप्रसाद ने कहा, ”मैंने अपना जीवन जर्मन सेना के सिपाही के तौर पर शुरू किया था और खूब इज्जत कमाई लेकिन मैं सत्ता का लालची था और परिणामस्वरूप, मेरी वजह से द्वितीय विश्व युद्ध तक हुआ। इस युद्ध के कारण करोड़ों लोगों की जान चली गई और बाद में मैंने खुद को भी मार लिया।”

उन्होंने आगे कहा, ”मोदी को उस रास्ते पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए। वह पहले ही आंध्र प्रदेश और मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू को धोखा दे चुके हैं। अगर अभी भी उन्हें अपनी गलती का पछतावा नहीं हुआ तो वह जल्दी ही अपना पतन होते हुए देखेंगे।”

बता दें कि तीन दिन पहले शिवप्रसाद संसद में भगवान राम का रूप रखकर आए थे। आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलवाने की मांग पर अड़े शिवप्रसाद, सत्य साईं और नारद मुनि का रूप रखकर भी संसद आ चुके हैं। बता दें कि टीडीपी पहली ऐसी पार्टी है जिसने 2014 में एनडीए की सरकार बनने के बाद गठबंधन तोड़ा है।

राजस्थान में BJP सरकार बदल रही मुस्लिम गांवों के नाम !

After Mughal Sarai Rajasthan renames muslim sounding village

विधानसभा चुनाव से पहले राजस्थान सरकार ने नया सियासी दांव चला है. राजस्थान में अब हिंदू बहुल गांवों के मुस्लिम नाम बदले जा रहे हैं.

राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग की सिफारिश पर भारत सरकार ऐसे करीब 15 गांवों के नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग गांव के नए नामों का गजट प्रकाशित कर रही है.

सरकार का कहना है कि गांव की पंचायत की सिफारिश पर यह सब किया जा रहा है. गांव के लोगों का कहना है उनकी ये मांग लंबे समय से थी जिसकी सुनवाई अब जाकर हो रही है.

‘मियां का बाड़ा’ का नाम बदला

राजस्थान के बाडमेर का ‘मियां का बाड़ा’ का नाम अब महेश नगर हो गया है. ‘मियां का बाड़ा’ नाम के साइनबोर्ड हटाकर जिला कलेक्टर हर जगह महेश नगर का साइन बोर्ड लगा रहे हैं. स्कूल से लेकर पंचायत भवन तक सभी नए सिरे से नए नाम से पुतवाए जा रहे हैं.

गांव के लोगों का कहना है कि मियां शब्द मुस्लिम लोगों के लिए प्रयोग होता है और बाड़ा मतलब रहने की जगह होती है ऐसे में ऐसा प्रतित होता था कि ये मुस्लिमों का गांव है जबकि केवल तीन घर में 21 लोगों की मुस्लिम आबादी है.

गांव के पूर्व सरपंच हनुवंत सिंह का कहना है कि मुगल काल में इसका नाम महेश नगर था जिसे बाद में बदलकर ‘मियां का बाड़ा’ कर दिया गया. महेशनगर के पूर्व सरपंच हनुवंत सिंह ने बताया कि दस साल पहले हमने मारवाड़ राजघराने से दस्तावेज निकालकर राजस्थान सरकार को पेश किया था मगर खुशी है कि अब जाकर हमारी यह मांग पूरी हुई है.

राजस्थान सरकार के राजस्व राज्यमंत्री अमराराम ने कहा कि मियां के बाड़ा में तीन मुस्लिम परिवार रहता है ऐसे में इसका नाम ‘मियां का बाड़ा’ क्यों रखा जाए हमने पूरी प्रक्रिया अपनाने के बाद नाम बदला है.

सलेमाबाद भी बना श्री निंबार्क तीर्थ

‘मियां का बाड़ा’ अकेले महेश नगर नहीं बना है बल्कि अजमेर जिले के किसनगढ़ के सलेमाबाद का नाम भी बदलकर श्री निंबार्क तीर्थ कर दिया गया है. सलेमाबाद के सरपंच धरणीधर उपाध्याय ने बताया कि नाम यहां के रहने वाले जागीरदार सलीम खान के नाम पर पड़ा था, लेकिन यहां हिंदूओं के निंबार्क तीर्थ होने की वजह से लंबे समय से इसका नाम बदलने की मांग हो रही थी. यहां पर मात्र एक मुस्लिम परिवार रहता है.

राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने तो भारत सरकार की सहमति से पहले ही यहां के स्कूल के नाम में निंबाकाचार्य जोड़ दिया है.

झूंझनू में दो इस्माईलपुर हैं जहां पर केवल हिंदुओं की आबादी है. राजस्थान में कई गांव ईस्माईलपुर के नाम से है क्योंकि जयपुर के नगर नियोजक मिर्जा ईस्माईल थे जिनके नाम पर आज भी जयपुर का एमआई रोड है.

एक ईस्माईलपुर का नाम पिचनवा खुर्द रख दिया गया है, जबकि दूसरे इस्माईलपुर का नाम कौशलनगर या ईश्वर नगर रखना चाहते हैं. यहां के लोगों का कहना है कि गांव में हिंदू आबादी ही है ऐसे में मुस्लिम नाम रखने का कोई औचित्य नहीं है.

सरपंच नितीराज सिंह ने बताया कि हम काफी लंबे समय से नाम बदलने की मांग कर रहे हैं. हमारे गांव में कोई मुस्लिम परिवार नही रहता.

चित्तौडगढ़ जिले की भदेसर तहसील का राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार मंडफिया गांव देश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. यहां सांवलिया सेठ का विशाल मंदिर है, जिसका अक्षरधाम की तर्ज पर विकास हुआ है. ऐसे में सांवलिया सेठ का नाम प्रदेशवासियों के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र है. सुबह उठते ही लोग सांवलियाजी का नाम ही लेते हैं, ऐसे में गांव की पहचान भी सांवलियाजी के रूप में ही बन गई है.

लंबे समय से मंडफिया गांव का नाम सांवलियाजी करने की मांग उठती आई है. आज भी इस गांव का मंडफिया ही है. ऐसे में कई बार श्रद्धालुओं को दिक्कत का सामना करना पड़ता है.

भीलवाड़ा जिले की सीमा पर मंडपिया गांव भी है, ऐसे में कई बार सांवलियाजी की डाक सहित महत्वपूर्ण दस्तावेज जिनमें चढ़ावे में आने वाले चेक, मनीऑर्डर आदि भी समय पर नहीं पहुंचते. जिसके चलते क्षेत्रवासियों की भावना है कि गांव का नाम सांवलियाजी हो.

चित्तौड़ के ही मोहम्मदपुरा का नाम मेडी का खेड़ा, नवाबपुरा का नाम नईसरथल, रामपुर-आजमपुर का सीताराम जी का खेड़ा रखने का नाम भी प्रस्तावित है.

नाम बदलने की प्रक्रिया लंबी

राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग के सब रजिस्ट्रार सुरेश सिंधी का कहना है कि एक पूरी प्रक्रिया अपना कर नाम बदला जाता है. पहले पंचायत सबूत या फिर नाम बदलने के आधार पर सर्वसम्मति से राजस्व विभाग को सिफारिश भेजता है जिसकी पुष्टि कर राज्य सरकार भारत सरकार को भेजता है जहां से अनुमति मिलने के बाद हम नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू करते हैं. हमने कई नाम बदल दिए हैं और कई प्रक्रिया में है.

इन गांवों के अलावा बहुत सारे ऐसे गांव भी हैं जिनका नाम या तो जातियों के आधार पर बदला जा रहा है या फिर पंचायत की मांग पर सही किया जा रहा है. राजस्थान के जालौर का नरपाड़ा का नाम नरपुरा, मेडा ब्राह्मन का नाम मेडा पुरोहितान, नवलगढ़ के डेवा की ढाणी के नाम गिरधारीपुरा किया गया है.

हालांकि बीजेपी सरकार का यह बदलाव कांग्रेस को रास नहीं आया. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि बीजेपी हमेशा लोगों को सियासी फायदा लेने के लिए लोगों को बांटने का काम करती है.

 

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दिल्ली में NRC जैसा अभियान कराना चाहती है भाजपा, आप ने किया कड़ा विरोध

BJP Leaders demand in assembly assam like NRC in Delhi

दिल्ली विधानसभा में विपक्षी भाजपा ने राष्ट्रीय राजधानी से अवैध आव्रजकों को बाहर निकालने के लिए राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) जैसा अभियान चलाने की मांग की. इसका आप विधायकों ने जमकर विरोध किया. दोनों दलों की इस मांग और विरोध के बीच सदन में जमकर हंगामा हुआ.

बीजेपी विधायक विजेन्द्र गुप्ता और उनके साथियों ने जैसे ही यह मांग उठाई आप विधायक तुरंत इसका विरोध करने लगे. दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा और किसी ने सदन में शांति बनाए रखने की विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गायेल की अपील नहीं सुनी. कुछ विधायक तो प्रदर्शन करते हुए अध्यक्ष के आसन तक आ पहुंचे.

बता दें कि असम के पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत ने सरकार से पश्चिम बंगाल के निवासियों के लिये भी इसी तरह की सूची तैयार करने का अनुरोध किया था. उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल भी बांग्लादेश से ‘अवैध प्रवासियों से प्रभावित’ है.

BJP Leaders demand in assembly assam like NRC in Delhi
BJP Leaders demand in assembly assam like NRC in Delhi

उन्होंने यह भी कहा कि असम में एनआरसी को अद्यतन करने की चल रही प्रक्रिया पुख्ता होनी चाहिये और किसी भी भारतीय को छोड़ा नहीं जाना चाहिये. असम निवासियों की अंतिम सूची में किसी भी अवैध प्रवासी का नाम नहीं शामिल किया जाना चाहिये.

महंत ने भी 1985 के असम समझौते पर हस्ताक्षर किया था. इस समझौते में राज्य से अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें उनके देश भेजने का प्रावधान था. उन्होंने कहा कि यहां तक कि पश्चिम बंगाल के स्थानीय निवासी भी राज्य में एनआरसी के पक्ष में हैं.

Source: hindi.siasat.com

अटल सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा बोले- मुझे गर्व है कि मैं उस भाजपा का हिस्सा नहीं हूँ जिसने देश को बर्बाद कर दिया

Yashwant Sinha target Modi govt over Rafale Deal

राफेल डील पर कल बीजेपी दो पूर्व दिग्गज नेता यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस की। इस दौरान यशवंत सिन्हा मोदी सरकार पर काफी हमलावर रहे।

यशवंत सिन्हा ने नोटबंदी से लेकर सरकार के मंत्रालयों पर सवाल उठाते हुए कहा कि रक्षा मंत्री को राफेल डील के बारे में पता नहीं होता और वित्त मंत्री को नोटबंदी के बारे में पता नहीं होता। सिन्हा ने कहा कि ऐसी कैसी कैबिनेट चल रही है देश में जहां किसी को कुछ पता ही नहीं है।

अटल सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने खुद को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा, हास्यास्पद है कि आज तक रिज़र्व बैंक नोटबन्दी के दौरान जमा हुए नोट आज तक नहीं गिन पाया। मुझे गर्व है कि मैं वर्तमान सरकार और भाजपा का हिस्सा नहीं हूँ।

बता दें कि इससे पहले यशवंत सिन्हा ने बीजेपी ने छोड़ राजनैतिक जीवन को अलविदा कह दिया था। वहीँ वो मोदी सरकार की हर कदम पर आलोचना करते हुए आये है। इससे पहले उन्होंने नोटबंदी के ठीक जीएसटी लागू करने पर मोदी सरकार पर जमकर कोसा था।

 

Source: boltaup.com

राज्यसभा में हार पर सोनिया ने कहा- कभी जीत होती है तो कभी हार

After Rajya Sabha defeat Sonia Gandhi said we win some time and lose some time

राज्यसभा के उपसभापति के लिए हुए चुनाव में एक बार फिर विपक्ष को हार का मुंह देखना पड़ा है. इस हार के बाद सोनिया गांधी ने कहा कि कभी हम जीतते हैं और कभी हार होती है. कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ चुकी सोनिया फिलहाल यूपीए चेयरपर्सन हैं.

एनडीए की तरफ से जेडीयू के राज्यसभा सदस्य हरिवंश उपसभापति पद के लिए उम्मीदवार थे. गुरुवार को उन्हें इस पद के लिए चुना गया. उन्हें विपक्ष की ओर से कांग्रेस के उम्मीदवार बी के हरिप्रसाद को मिले 105 मतों के मुकाबले 125 मत मिले.

हरिवंश के पक्ष में जेडीयू के आरसीपी सिंह, बीजेपी के अमित शाह, शिव सेना के संजय राउत और अकाली दल के सुखदेव सिंह ढींढसा ने प्रस्ताव किया. वहीं हरिप्रसाद के लिए बीएसपी के सतीश चंद्र मिश्रा, आरजेडी की मीसा भारती, कांग्रेस के भुवनेश्वर कालिता, एसपी के रामगोपाल यादव और एनसीपी की वंदना चव्हाण ने प्रस्ताव पेश किया.

नेता सदन अरुण जेटली, नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार और संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल ने हरिवंश को बधाई देते हुए उन्हें उपसभापति के निर्धारित स्थान पर बिठाया. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश को शुभकामनाएं देते हुए उनके अनुभव के हवाले से उनके निर्वाचन को सदन के लिए गौरव का विषय बताया.

सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि हरिवंश को बीजेपी गठबंधन पार्टियों के 91 सदस्यों के अलावा तीन नामित सदस्यों और निर्दलीय अमर सिंह का वोट मिला. इसके अलावा उन्हें गैर एनडीए दलों-एआईएडीएमके के 13, टीआरएस के छह, इनेलो के एक सदस्य का समर्थन मिला. बीजेडी के 9 सांसदों ने भी हरिवंश को वोट किया. कुल मत 123 हुए लेकिन कहा जा रहा है कि दो निर्दलीय सांसदों ने भी एनडीए के पक्ष में वोट किया जिससे कुल आंकड़ा 125 बैठता है. वाईएसआर कांग्रेस के दो सदस्य वोटिंग से गैर-हाजिर रहे.

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BJP के दो पूर्व मंत्रियों ने माना- राफेल विमान सौदा आजाद भारत का सबसे बड़ा ‘रक्षा घोटाला’ है

Yashwant and Arun Shourie press conference on Rafale Deal

राफेल विमान को लेकर अब मोदी सरकार पर सबसे बड़ा वार कर दिया गया है। पहले इस घोटाले को लेकर आरोप केवल सड़क पर थे जिसे विपक्ष ने संसद में पहुँचाया। और अब भाजपा के अपने ही नेताओं ने इन आरोपों को अख़बारों की सुर्खियाँ बनने पर मजबूर कर दिया है।

राफेल विमान सौदा आजाद भारत का सबसे बड़ा रक्षा सौदा घोटाला और इससे देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया है। ये आरोप भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने लगाए।

इन आरोपों को उन्होंने किसी अखबार में लेख लिखकर नहीं बल्कि खुलेआम सबूत और दलीलें पेश करते हुए पूरी मीडिया के सामने लगाया है। इसके लिए इन तीनों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेस की थी।

दिल्ली के प्रेस क्लब में हुई एक प्रेस कांफ्रेंस में अरुण शौरी ने कहा कि राफेल विमान डील आजाद भारत का सबसे बड़ा डिफेंस घोटाला है और इसमें एक नहीं कई गड़बड़ियां की गई हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री ने लोकसभा में कहा था कि अनिल अंबानी की कंपनी को राफेल विमान बनाने का ऑर्डर क्यों और कैसे मिला, इसकी जानकारी नहीं दे सकतीं, क्योंकि वे फ्रांस सरकार के साथ हुए गोपनीयता के समझौते से बंधी हुई हैं।

अरुण शौरी ने कहा कि रक्षा मंत्री ने लोकसभा में सबसे बड़ा झूठ बोला। उन्होंने बताया कि भारत और फ्रांस के बीच हुए गोपनीयता समझौते में साफ लिखा है कि सिर्फ विमान की तकनीक से जुड़ी जानकारियों के लिए ही यह समझौता प्रभावी होगा। उन्होंने सवाल पूछा कि रक्षा मंत्री बताएं कि अनिल अंबानी की कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट क्यों दिया गया, क्योंकि यह समझौता इसका जवाब देने से नहीं रोकता है।

कीमत का खुलासा न करने का तर्क भी बेकार है। सरकार के रक्षा राज्यमंत्री 18 नवम्बर 2016 को खुद लोकसभा में कीमत बता चुके हैं- 670 करोड़ प्रति विमान, जिसमें हथियार से लेकर टेक्नालॉजी ट्रांसफर तक सब कुछ शामिल है।

शौरी ने कहा कि सरकार की गाइडलाइन कहती है कि हर ऑफ़सेट कॉन्ट्रेक्ट चाहे वह जिस भी क़ीमत का हो, रक्षा मंत्री की मंज़ूरी से होगा। सरकार झूठ बोल रही है कि रिलायंस को कॉन्ट्रेक्ट डेसाल्ट ने दिया।

प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मोदी सरकार ने राफेल डील में देश की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ किया है।

प्रशांत भूषण ने कहा कि इस सौदे से देश को 35000 करोड़ दी चपत लगी है। सौदे में विमान की तादाद घटाए जाने से देश की सुरक्षा को ख़तरा बढ़ा है। प्रशांत भूषण ने कहा कि देश को सुरक्षा के लिए सात स्क्वाड्रन की ज़रूरत है, तभी 126 विमानों की बात हुई थी। लेकिन मोदी सरकार ने इस हकीकत को जानते हुए भी यह संख्या 36 कर दी, वह भी बिना किसी की जानकारी के। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ है।

तादाद 126 से 36 किए जाने की जानकारी न तो रक्षा मंत्री को थी न वायुसेना में किसी को। सरकार गोपनीयता नियम का बहाना करके छिपाना चाह रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी की मंजूरी के बिना प्रधानमंत्री को कोई अधिकार नहीं था कि वे यह समझौता करते, इस नाते यह आपराधिक आचरण का मामला बनता है। यह जानते हुए ही सरकार ने उस कानून को संशोधित कर दिया।

प्रशांत भूषण ने कहा कि इस सौदे में पहले सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को राफेल विमान बनाने की तकनीक मिलनी थी, लेकिन फ्रांस के साथ राफेल विमान सौदे से महज पांच महीने पहले अचानक अस्तित्व में आई अनिल अंबानी की कंपनी को फ्रांस के साथ राफेल विमान बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिल गया।

उन्होंने कहा कि अनिल अंबानी की कंपनी को साधारण विमान बनाने का भी कोई अनुभव नहीं है। प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि कंपनी बनाई ही इसलिए गई ताकि ये कॉन्ट्रैक्ट हासिल हो सके। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी बात ये है कि जिस उद्योगपति को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी गई, उसका पिछला इतिहास यही कहता है कि उसके ज्यादातर बड़े प्रोजेक्ट्स नाकाम साबित हुए और उसकी कंपनी बड़े कर्ज में डूबी हुई है।

प्रेस कांफ्रेंस में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि विदेश सचिव ने समझौते से दो दिन पहले कहा था कि पुरानी डील को ही आगे बढ़ाएंगे, पर वहां जाकर नई डील कर ली गई। उन्होंने कहा कि इस लोकसभा में संयुक्त संसदीय समिति को मौका नहीं मिलेगा, क्योंकि समय कम है। इसलिए इस मामले की सीएजी से जांच कराई जानी चाहिए और तीन महीने के अंदर समयबद्ध जांच हो।

उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी के बाद जो दो हजार के नोट छपवाये गये थे, अब वे बाजार में जल्दी नहीं दिखते। दो हजार के अधिकांश नोटों को कालेधन के रुप में जमा कर रखा गया है और जरुरत पड़ने पर उन्हे खर्च किया जाएगा।

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राज्यसभा उपसभापति चुनाव: PDP ने मतदान नहीं करने का फैसला लिया!

Rajya Sabha Deputy Chairman Election PDP decided not to vote

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने तय किया है कि वह राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए होने वाले मतदान मे हिस्सा नहीं लेगी। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रफी अहमद मीर ने कहा, ‘‘पीडीपी ने मतदान से अलग रहने का फैसला लिया है… यह फैसला भाजपा के साथ गठबंधन टूटने के आलोक में लिया गया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘साथ ही संप्रग ने समर्थन के लिए पीडीपी से संपर्क नहीं किया है। इसलिए, विचार-विमर्श के बाद यह उचित लगा कि मतदान से अलग रहना पार्टी के हित में है।’’ गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से राज्यसभा की तीन सीटें हैं। इनमें से दो सीटें पीडीपी के पास हैं, जबकि एक भाजपा के पास है।

उपसभापति पद के लिए कल होने वाले चुनाव में राजग के उम्मीदवार हरिवंश और विपक्ष के उम्मीदवार बी. के. हरिप्रसाद के बीच दिलचस्प मुकाबला होने की उम्मीद है क्योंकि दोनों ही पक्ष बहुमत होने का दावा कर रहे हैं। हालांकि बहुमत का झुकाव सत्तारूढ़ राजग के पक्ष में दिख रहा है।

 

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मंजू वर्मा के इस्तीफे पर बोले तेजस्वी- फ़ुल टॉस बॉल पर ही नीतीश जी का एक विकेट गिर गया, अभी तो बाउन्सर, गुगली बाकी है

Tejashwi Yadav react on Manju Verma resign

मुज्ज़फरपुर रेप कांड में समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा है। ऐसा खुद मंजू वर्मा का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष और मीडिया ने उनपर जो सवाल उठाये है इसके चलते उन्होंने अपना पद छोड़ दिया है। वहीँ मंजू वर्मा के इस्तीफे के बाद राजद नेता तेजस्वी यादव ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है।

क्रिकेटर से नेता बने तेजस्वी यादव ने क्रिकेट की भाषा में ही अपना जवाब दिया है। उन्होंने मंजू वर्मा के इस्तीफे को अपना पहले विकेट बताते हुए चेतावनी दी की अभी तो बाउन्सर, गुगली, दूसरा और यॉर्कर फेका जाना बाकी है।

तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर लिखा, फ़ुल टॉस बॉल पर ही नीतीश जी का एक विकेट गिर गया। अभी बाउन्सर, गुगली, दूसरा और यॉर्कर तो बाक़ी है। देखते रहना, विपक्ष की आक्रामक फ़ील्डिंग और बालिंग के आगे बेचैनी में कहीं हिट विकेट आउट ना हो जाए।

गौरतलब हो कि पटना में मुजफ्फरपुर मामले में जेल में बंद ठाकुर समेत 10 आरोपियों की आज विशेष पॉक्सो कोर्ट में पेशी थी। इसी दौरान ठाकुर ने नीतीश सरकार में समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति के साथ अपने रिश्तों पर बोलते हुए ठाकुर ने बताया कि मेरा उनसे कोई रिश्ता नहीं हाँ कभी कभी बात ज़रूर होती थी।

बता दें कि मंजू वर्मा के इस्तीफे मांग विपक्ष कर रहा था। अब जब मंजू वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है तो इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता की बालिका गृह मामले में बच्चियों के साथ दुष्कर्मों में उनकी भूमिका थी या नहीं इसकी जांच सीबीआई को करनी है।

 

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मुज्ज़फरपुर रेप कांड : मंत्री मंजू वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है अब श्री ‘शर्मसार’ कब कुर्सी छोड़ेंगे : मीसा भारती

MisaB harti said CM Nitish Kumar should resign on morality

मुज्ज़फरपुर रेप कांड में नीतीश सरकार में समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति का नाम आने के बाद अपना इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद राजद नेता और राज्यसभा सांसद मीसा भारती ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

मीसा ने सोशल मीडिया पर लिखा, अब श्री “शर्मसार” भी इस्तीफ़ा दें। अपनी जवाबदेही से वह बच नहीं सकते। मीडिया रिपोर्टें एडिट होती होंगी, जनाक्रोश नहीं होंगी।

गौरतलब हो कि पटना में मुजफ्फरपुर मामले में जेल में बंद ठाकुर समेत 10 आरोपियों की आज विशेष पॉक्सो कोर्ट में पेशी थी। इसी दौरान ठाकुर ने नीतीश सरकार में समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति के साथ अपने रिश्तों पर बोलते हुए ठाकुर ने बताया कि मेरा उनसे कोई रिश्ता नहीं हाँ कभी कभी बात ज़रूर होती थी।

बता दें कि मंजू वर्मा के इस्तीफे मांग विपक्ष कर रहा था। अब जब मंजू वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है तो इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता की बालिका गृह मामले में बच्चियों के साथ दुष्कर्मों में उनकी भूमिका थी या नहीं इसकी जांच सीबीआई को करनी है।

 

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महिलाओ में फैला आतंक, योगी के एनकाउंटर वाली सरकार पर अखिलेश ने झाड़ा

Akhilesh Yadav speech on encounters in Uttar Pradesh policy by Yogi Adityanath

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपराध के मुद्दे पर बीजेपी सरकार को घेरा है। योगी सरकार भले ही एनकाउंटर के जरिए यूपी को अपराध मुक्त बनाने के दावे कर रही हो, लेकिन अखिलेश यादव सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराधियों की जगह आज नारी आतंकित हो रही है।

Akhilesh Yadav speech on encounters in Uttar Pradesh policy by Yogi Adityanath
Akhilesh Yadav speech on encounters in Uttar Pradesh policy by Yogi Adityanath

ये है अखिलेश का ट्वीट

अखिलेश यादव ने इस संबंध में ट्वीट कर योगी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने ट्वीट में हाल की कुछ आपराधिक घटनाओं का उदाहरण दिया।

उन्होंने लिखा, ‘प्रदेश में कहीं कोचिंग की छात्रा की सरेआम गोली मारकर हत्या हो रही है, तो कहीं भाजपा विधायक पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली महिला सरकार से निराश होकर मुख्यमंत्री आवास पर आत्मदाह कर रही है। क्या यही है ‘एनकाउंटर वाली’ सरकार का खौफ कि अपराधियों की जगह आज नारी आतंकित हो रही है।’

Akhilesh Yadav speech on encounters in Uttar Pradesh policy by Yogi Adityanath
Akhilesh Yadav speech on encounters in Uttar Pradesh policy by Yogi Adityanath

बीजेपी विधायक पर आरोप

रविवार को राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के सामने एक महिला ने आत्मदाह की कोशिश की थी। महिला ने उन्नाव के बांगरमऊ से बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर गैंगरेप का आरोप लगाया है। आरोप है कि विधायक पक्ष की तरफ से पीड़ित महिला के परिवार पर हमला किया गया, जिसमें घायल पीड़िता के पिता अस्पताल में मौत हो गई है।

इसी मुद्दे को आधार बनाते हुए अखिलेश यादव ने यूपी में कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर योगी सरकार को घेरा है।

गौरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा पर मोदी की चुप्पी, थरूर ने उठाए सवाल

Modi's silence on the violence of gau rakshak Tharoor

देश में गौरक्षा के नाम पर जारी हिंसा को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पीएम मोदी पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद के नाम पर ‘हिंदू राष्ट्र परियोजना’ को आगे बढ़ाया जाना मूलभूत रूप से भारत के अतीत और उसके संवैधानिक मूल्यों के साथ विश्वासघात होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को अग्निपरीक्षा से गुजारा जा रहा है और जो ‘भारत माता की जय’ कहने पर सहमत नहीं होते हैं (ऐसा सरकार की शह पर कराया जाता है) उन्हें परेशान किया जा रहा है।

थरूर ने कहा, ‘‘वे सहिष्णुता के मुख्य हिंदू मूल्य को धता बता रहे हैं जिसने हमें इस देश में साढ़े छह दशक तक सांप्रदायिक सद्भाव दिया। उन्होंने ऐसा राष्ट्रवाद के नाम पर किया है जो अपने आप में देशभक्ति से परे है।’’

Modi's silence on the violence of gau rakshak Tharoor
Modi’s silence on the violence of gau rakshak Tharoor

कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘हिंदू राष्ट्र परियोजना मूलभूत रूप से भारत के अतीत के साथ विश्वासघात होगी, यह हमारे देश के संवैधानिक मूल्यों के साथ मूलभूत रूप से विश्वासघात होगी।’’ बता दें कि इससे पहले थरूर ने  पीएम द्वारा मुसलमानों की टोपी न पहने पर भी उनकी निंदा की थी।

उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपनी यात्राओं के दौरान ‘अजीब सी’ नगा और दूसरी टोपियां पहनते हैं, लेकिन मुसलमानों की टोपी पहनने से मना कर देते हैं। थरूर ने कहा, ‘मैं आपसे पूछता हूं कि हमारे प्रधानमंत्री देश-विदेश में जहां कहीं भी जाते हैं, हर तरह की अजीबो गरीब टोपियां क्यों पहनते हैं? वह मुसलमानों की टोपी पहनने क्यों हमेशा मना कर देते हैं?’

बोफोर्स से बड़ा राफेल घोटाला, सरकारी खजाने को ज्यादा बड़ा नुकसान- अरुण शौरी

Big Rafael scam from Bofors big loss to government treasury Arun Shourie

नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का मामला विवादों में घिरता जा रहा है. जहां एक तरफ बीते कुछ महीनों के दौरान कांग्रेस पार्टी ने राफेल सौदे में अनियमितता का दावा करते हुए कई बार प्रेस कांफ्रेंस की है वहीं अब अन्य राजनीतिक दलों के नेता और समाजसेवी भी डील पर उंगली उठा रहे हैं.

इसी क्रम में बुधवार को मशहूर वकील प्रशांत भूषण, असंतुष्ट बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने दावा किया कि मोदी सरकार की राफेल डील ने सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान पहुंचाने का काम किया है और इस डील से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का काम किया गया है.

तीनों नेताओं ने दावा किया कि राफेल डील में पारदर्शिता की कमी के साथ-साथ निर्धारित मानदंडों को नजरअंदाज करने का काम किया गया है. इसके साथ ही इन नेताओं ने आरोप लगाया कि इस डील के जरिए अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को फायदा पहुंचाने का काम किया गया है.

तीनों नेताओं ने आरोप लगाया कि 2015 में मोदी सरकार ने फ्रांस दौरे के वक्त जब डील का ऐलान किया तब उन्होंने न सिर्फ प्रोटोकॉल को नजरअंदाज किया बल्कि पूर्व की कांग्रेस सरकार (यूपीए) के कार्यकाल में की गई सस्ती राफेल डील को भी किनारे कर दिया.

इन नेताओं ने दावा किया कि यूपीए सरकार ने दसॉल्ट के साथ बिडिंग प्रक्रिया के बाद 18 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट खरीदने का समझौता किया. इस समझौते के तहत जहां कंपनी को रेडी टू फ्लाई एयरक्राफ्ट देने के साथ ही केन्द्र सरकार की कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को टेक्नोलॉजी समेत 108 अन्य एयरक्राफ्ट बनाने में मदद देगी. इन तीनों नेताओं ने दावा किया कि यूपीए सरकार की इस डील से सरकारी खजाने पर महज 40 हजार करोड़ रुपए का बोझ पड़ा.

वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब फ्रांस के साथ यह डील की तो उसने पुरानी डील का संज्ञान नहीं लिया और 36 एयरक्राफ्ट को खरीदने के लिए 60 हजार करोड़ रुपये में समझौता किया. खास बात है कि 2015 में की गई इस डील में यूपीए की डील के तहत एचएएल द्वारा 108 एयरक्राफ्ट निर्मित कराने पर कोई समझौता नहीं शामिल किया गया. वहीं चौंकाने वाली बात यह भी है कि 2015 में किए गए करार में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के संबंध में भी कोई समझौता नहीं किया गया जिसके चलते सरकारी खजाने को एक तरह से नुकसान पहुंचाने का काम किया गया.

शौरी, भूषण और सिन्हा ने यह भी दावा किया कि संभव है कि केन्द्र सरकार जानबूझकर इस डील पर से पर्दा नहीं उठाना चाहती है. तीनों नेताओं ने बताया कि इस डील से महज एक हफ्ते पहले तत्कालीन केन्द्रीय रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने फ्रांस सरकार से 126 फाइटर जेट खरीदने का बयान जारी किया था.

लेकिन हफ्ते भर बाद जब खुद पीएम मोदी ने 36 विमान खरीदने का ऐलान फ्रांस दौरे पर किया तो एक बात पूरी तरह साफ हो गई कि इस डील के ऐलान से पहले देश के रक्षा मंत्री को डील के संबंध में कुछ नहीं पता था. इस सच्चाई से भी यह डील संदेह के घेरे में आती है.

राफेल डील पर केन्द्र सरकार के बयानों में खामी दर्शाने के लिए तीनों नेताओं ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा राफेल डील का ऐलान करने से महज 2 दिन पहले तत्कालीन विदेश सचिव एस जयशंकर दो अहम बात की. पहली, कि फ्रांस सरकार के साथ राफेल पर बातचीत में एचएएल की भी भूमिका है वहीं प्रधानमंत्री मोदी का फ्रांस दौरा महज दो देशों के नेतृत्व स्तर पर मुलाकात के लिए है. जयशंकर के मुताबिक प्रधानमंत्री के दौरे में राफेस समझौते का एजेंडा नहीं शामिल है.लिहाजा, आखिर कैसे संभव हुआ कि विदेश सचिव के बयान के दो दिनों के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फ्रांस के साथ नई राफेल डील का ऐलान कर दिया. इन तीनों नेताओं ने संकेत दिया राफेल डील में रक्षा मंत्री की तरह विदेश सचिव को भी भूमिका नहीं अदा करने दी गई.अंत में तीनों नेताओं ने दावा किया राफेल डील पर जारी सस्पेंस से साफ है कि यह डील भी बोफोर्स डील की तर्ज पर संदिग्ध है. इन नेताओं ने दावा किया कि जिस तरह से बोफोर्स डील में कांग्रेस सरकार ने सच्चाई छिपाने की कोशिश की उसी तरह राफेल डील में मोदी सरकार सच्चाई पर पर्दा डालने का काम कर रही है.

हालांकि तीनों नेताओं ने दावा किया कि राफेल डील में भ्रष्टाचार का स्तर 1980 के दशक में हुए बोफोर्स घोटाले के भ्रष्टाचार से काफी बड़ा है और राफेल डील ने बोफोर्स डील से बड़ा नुकसान सरकारी खजाने को पहुंचाने का काम किया है.

 

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मुस्लिमो की आवाज़ बनी मायावती, मोदी सरकार से लगायी ये गुहार

Mayawati asked for reservation to Muslims

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा चीफ मायावती ने मुस्लिमों के लिए आरक्षण की मांग की है। लोकसभा में सोमवार को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन विधेयक, 2018 के पारित होने के बाद उन्होने ये मांग की है।

Mayawati asked for reservation to Muslims
Mayawati asked for reservation to Muslims

बीएसपी चीफ ने कहा, ‘अगर केंद्र सरकार संविधान में संशोधन कर ऊंची जाति के गरीबों को आरक्षण देने का कोई कदम उठाती है तो बसपा इसका पहले स्वागत करेगी। चूंकि मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों में काफी गरीबी है। ऐसे में अगर केंद्र सरकार ऊंची जाति के गरीबों के लिए कोई कदम उठाती है तो मुसलमानों और दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।’

मायावती ने कहा विभिन्न राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए ही केंद्र सकार ने मजबूरी में एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून को पहले की तरह मूल रूप में बहाल करने संबंधित संशोधन विधेयक लाया। जो लोकसभा में पास हो गया है। बसपा को उम्मीद है कि ये राज्यसभा में भी जरूर पास हो जाएगा।

Mayawati asked for reservation to Muslims
Mayawati asked for reservation to Muslims

उन्होंने कहा​ कि इस विधेयक को काफी देर से लाया गया, जिसके कारण इन वर्गों को काफी नुकसान हुआ है। फिर भी बसपा इस विधेयक का स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि इसका श्रेय उनकी पार्टी एससी-एसटी वर्गों के तमाम लोगों को देती है, जिसमें बसपा समर्थक भी शामिल हैं।

बता दें कि लोकसभा में सोमवार को अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन विधेयक, 2018 पारित हो गया था। इस संशोधन के जरिए सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश निष्प्रभावी हो जाएगा, जिसके तहत एससी/एसटी अत्याचार निवारण के मामले में आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई थी।

बैंक ऑफ बड़ौदा के चेयरमैन रवि वेंकटेशन बोले, ‘मोदी सरकार की नीतियों ने बर्बाद किए सरकारी बैंक’

Ravi venkatesan attack on PM Modi on bank

गिरीश मालवीय

नई दिल्ली – देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक पीएनबी को इस वित्तवर्ष की पहली तिमाही में 940 करोड़ का घाटा हुआ है और तीसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक , बैंक ऑफ बड़ौदा (बॉब) के चेयरमैन रवि वेंकटेशन ने कहा है कि मोदी सरकार की कड़ी नीतियों की वजह से बैंकिंग सेक्टर खत्म होता जा रहा है.

बॉब के चेयरमैन का कहना है कि सरकार की कड़ी नीतियों की वजह से सरकारी बैंकों के सामने नए निवेशकों को लुभाने और बुरे वित्तीय हालातों से निकलना मुश्किल हो गया है अंग्रेजी वेबसाइट ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में वेंकटेशन ने कहा कि भारत को इस समय कम, बेहतर पूंजीकृत और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की आवश्यकता है लेकिन इसके उलट काम हो रहा है।

वेंकटेशन का कहना है कि आज जानबूझकर बैंकों के निजीकरण पर जोर दिया जा रहा है. इसका कारण यह है कि आज सरकारी बैंक अपनी पूंजी और मार्केट शेयर गवां रहे हैं. बॉब चेयरमैन ने कहा कि बीते वित्त वर्ष में करीब 70 फीसदी जमा प्राइवेट बैंकों के पास हुआ है. उन्होंने अनुमान जताया कि 2020 तक खराब लोन बढ़कर 80 फीसदी तक पहुंच जाएगा. खराब लोन के बढ़ने से सरकारी बैंकों को पूंजी बढ़ाने और नए लोन देने में परेशानी होती है.

वेंकटेशन ने कहा कि खराब बैलेंस शीट और 51 फीसदी शेयर सार्वजनिक क्षेत्र के लिए रखने के नियम से सरकारी बैंकों की नई पूंजी के लिए सरकार पर निर्भरता बढ़ रही हैं। रवि वेंकटेशन ने कहा कि मोदी सरकार की बैंकिंग सेक्टर की कायापलट करने की योजना को पूरा करने असंभव है. इसका कारण यह कि देश के कुल खराब लोन में 90 फीसदी हिस्सेदारी सरकारी बैंकों की है।

(पूरा इंटरव्यू पत्रिका में छपा है जिसे आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं)

DMK ने करुणानिधि की मौत के बाद उनके लिए मरीना बीच की जंग जीती

After the death of karunanidhi dmk won the war of marina beach for them

प्रसिद्ध मरीना बीच DMK अध्यक्ष एम करुणानिधि की जीवनयात्रा का अंतिम स्थान होगा. मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को उन्हें बीच पर दफनाने का रास्ता साफ कर दिया.

मरीना बीच पर करुणानिधि को दफनाने के लिए स्थान देने की DMK की याचिका पर विशेष सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने राज्य सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि इसमें कानूनी अड़चनें हैं.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एच जी रमेश और न्यायमूर्ति एस एस सुंदर की पीठ ने कहा, ‘स्थान आवंटित ना करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है. याचिकाकर्ता द्वारा दी गई रूपरेखा के अनुसार सम्मानजनक रूप से दफनाने के लिए फौरन एक स्थान मुहैया कराएं.’

कोर्ट ने कहा कि सरकार यह बताने में विफल रही कि मरीना बीच पर नेता को दफनाने की अनुमति देने के रास्ते में कौन सी कानूनी अड़चनें हैं. इससे पहले पारिस्थितिकी और अन्य चिंताओं को लेकर बीच पर दफनाने के खिलाफ पांच याचिकाएं वापस ले ली गई.

पीठ ने कहा, ‘स्थान आवंटित करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं है. पहले ही सभी द्रविड नेताओं के लिए मरीना में स्थान आवंटित किया हुआ है. मौजूदा मामले में अलग रुख अपनाने की कोई जरुरत नहीं है.’

कोर्ट का आदेश आते ही वहां से करीब आठ किलोमीटर दूर राजाजी हॉल में DMK के हजारों समर्थकों ने ‘कलैगनार पुगाझ ओनगुगा’ के नारे लगाए.

मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ ट्रैफिक रामस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में मरीना बीच पर करुणानिधि के अंतिम संस्कार के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. रामस्वामी की इस अपील को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया.

करुणानिधि के ताबूत के पास खड़े उनके बेटे और DMK के कार्यकारी अध्यक्ष एम के स्टालिन फूट फूटकर रो रहे थे लेकिन जब उन्हें फैसले की खबर लगी तो उनके मुरझाए चेहरे पर संतोष के भाव दिखे.

इससे पहले मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी आधुनिक समय के सबसे बड़े DMK नेता को श्रद्धांजलि देने राजाजी हॉल पहुंचे तो उन्हें ‘वेंडम वेंडम, मरीना वेंडम’ के नारे सुनने पड़े.

कोर्ट का आदेश AIADMK के लिए बड़ा झटका है जिसने करुणानिधि को मरीना बीच पर दफनाने का स्थान ना देने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

सरकार ने यह हवाला देते हुए करुणानिधि को वहां दफनाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया कि AIADMK संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री एम जी रामचंद्रन और उनकी शिष्या जे जयललिता को बीच पर इसलिए दफनाया गया क्योंकि पद पर रहते हुए उनका निधन हुआ था लेकिन करुणानिधि को ऐसी मंजूरी नहीं दी जा सकती क्योंकि वह मौजूदा मुख्यमंत्री नहीं थे.

DMK संस्थापक और करुणानिधि के मार्गदर्शक सी एन अन्नादुरई भी 1969 में अपने निधन के समय मुख्यमंत्री थे. हालांकि, कोर्ट ने सरकार की यह दलील खारिज कर दी.

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देवरिया मामला: CM योगी ने की CBI जांच की सिफारिश, सरकार ने माना- शेल्टर होम में लड़कियों का हुआ यौन शोषण

Deoria Shelter abuse case

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में भी शेल्टर होम ((मां विंध्यवासिनी बालिका संरक्षण गृह) में बिहार के मुजफ्फरपुर जैसा मामला सामने आने के बाद सरकार से लेकर प्रशासनिक अमले तक के होश उड़ गए हैं। मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने देवरिया में नारी संरक्षण गृह में चल रहे सेक्स रैकेट मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की सिफारिश की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार (7 अगस्त) को खुद इसकी जानकारी दी।

Deoria Shelter abuse case
Deoria Shelter abuse case

सीएम योगी ने कहा, ‘देवरिया की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी गंभीरता को देखते हुए दोपहर में बैठक की थी… बालिकाओं के बयान और अन्य स्थितियों को देखते हुए मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए ही इसे सीबीआई को भेजने का निर्णय किया गया है।’ उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने स्तर से एसआईटी क

गठन किया है, जो इस पूरे प्रकरण की जांच करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल कल्याण समिति ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया, इसलिए उसे निलंबित करने का फैसला किया जा रहा है। बता दें कि देवरिया स्थित मां विंध्यवासिनी महिला एवं बालिका संरक्षण गृह की मान्यता स्थगित होने के बाद भी संरक्षण गृह को हाईकोर्ट से स्थगनादेश लेकर चलाया जा रहा था। रविवार (5 अगस्त) की रात इस संस्था से सेक्स रैकेट संचालित होने का खुलासा हुआ, जिसके बाद शासन गंभीर हो गया।

लड़कियों के साथ हुआ शारीरिक शोषण

इस बीच महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने यह बात स्वीकार की है कि शेल्टर होम में लड़कियों का शारीरिक शोषण होता था। उच्च स्तरीय जांच कमिटी की रिपोर्ट के बाद मंत्री ने मीडिया से बातचीत में यह बात स्वीकार की है कि शेल्टर होम में लड़कियों के साथ शारीरिक शोषण की बात से इनकार नहीं किया जा सकता है।

जोशी ने कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि देवरिया में लड़कियों के साथ यौन शोषण हुआ है। रिपोर्ट आने के बाद इसमें जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा जताया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने इस मसले पर विपक्षी दलों खासकर सपा व बसपा पर जमकर हमला बोला। कहा यह सारे कारनामे इन दोनों पार्टियों की सरकारों के समय के हैं।

मामले में एक और गिरफ्तार

नारी संरक्षण गृह की घिनौनी घटना मामले में पुलिस ने संचालिका गिरिजा त्रिपाठी व उसके पति मोहन त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद मंगलवार (7 अगस्त) को बेटी व नारी संरक्षण गृह की अधीक्षक कंचनलता को भी गिरफ्तार कर लिया है। वहीं इस मामले में तत्कालीन जिला प्रोवेशन अधिकारी प्रभात कुमार की तहरीर पर पुलिस ने अधीक्षक कंचनलता, उसकी मां व संचालिका गिरिजा त्रिपाठी और पिता मोहन त्रिपाठी के खिलाफ मानव तस्करी, देह व्यापार व बालश्रम से जुड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।

सोमवार को गिरिजा त्रिपाठी व मोहन त्रिपाठी को पुलिस ने जेल भेज दिया, जबकि फरार अधीक्षक कंचनलता की लोकेशन लखनऊ में मिलने पर दो टीमें लखनऊ पहुंचीं और छापेमारी की, लेकिन वह नहीं मिली। मगर मंगलवार सुबह पुलिस ने अधीक्षक कंचनलता को ढूंढ़ निकाला और गिरफ्तार कर लिया। उसे पुलिस लाइन में रखकर पूछताछ की जा रही है।

 

Source: jantakareporter.com

मध्य प्रदेश: विधानसभा चुनाव से पहले BJP और CM शिवराज के लिए बुरी खबर, स्थानीय चुनावों में कांग्रेस की बड़ी जीत

Congress sweeps MP civic body polls

मध्य प्रदेश में इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए बुरी खबर है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नगरपालिका और नगर पंचायत के उपचुनाव चुनावों में सत्ताधारी पार्टी की हार हुई है, जबकि विपक्षी पार्टी कांग्रेस का जलवा देखने को मिला है। मध्यप्रदेश के 14 नगरीय निकायों में एक-एक वार्ड में पार्षद पद के लिए उपचुनाव में तीन जुलाई को हुए मतदान के परिणाम मंगलवार (7 अगस्त) को घोषित कर दिए गए।

इनमें 9 स्थानों पर कांग्रेस तथा चार स्थानों पर बीजेपी तथा एक स्थान पर निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली है। मालूम हो कि इस साल ही अंत में प्रदेश में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। आधिकारिक तौर पर बताया गया कि प्रदेश में 14 नगरीय निकायों में उपचुनाव के तहत एक-एक वार्ड के पार्षद पद के लिए तीन जुलाई को हुए मतदान के परिणाम मंगलवार को घोषित किए गए।

मीडिया रिपोर्ट्स में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि राज्य में 14 नगरपालिकाओं में पार्षद पद के लिए हुए उपचुनाव में बीजेपी की करारी हार हुई है। जबकि कांग्रेस के सबसे ज्यादा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। राज्य के 14 स्थानों पर हुए पार्षदों के उपचुनाव में कुल 14 सीटों में से 9 पर कांग्रेस, 4 पर बीजेपी और 1 पर निर्दलीय ने चुनाव जीते हैं।

समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय से दी गई जानकारी के अनुसार, मंगलवार को हुई मतगणना में बुरहानपुर के नेपानगर, नीमच के सरवानिया महाराज, छिंदवाड़ा के न्यूटन खिलची, ग्वालियर के डबरा, छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव, सिंगरौली के सिंगरौली, सतना के सतना, गुना के राघौगढ़ की नगरीय निकाय के एक-एक वार्ड में कांग्रेस के उम्मीदवार विजयी रहे।

वहीं, दमोह नगर पालिका के एक वार्ड, मंदसौर के शामगढ़ के एक वार्ड, दतिया के एक वार्ड और अनूपपुर के बिजुरी के एक वार्ड से भाजपा उम्मीदवार जीते। इसके अलावा भिंड के गोरमी से निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। मतदान तीन अगस्त को हुआ था।

इसके साथ ही दो नगरीय निकायों में अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने के लिए हुए निर्वाचन में खरगौन जिले के नगर परिषद करही पांडल्याखुर्द में बीजेपी की आशा प्रेमचंद्र बासुरे विजयी रहीं। बालाघाट जिले की नगर परिषद लांजी में बहुजन समाज पार्टी की मीरा नानाजी समरीते विजयी रहीं। पहले भी यही अध्यक्ष थीं।

पंचायत निर्वाचन में एक जिला पंचायत सदस्य, 12 जनपद पंचायत सदस्य, 98 सरपंच पद के लिए भी मतगणना हुई। 12 जनपद पंचायत सदस्य में से आठ निर्विरोध और संरपच के लिए 21 प्रत्याशी निर्विरोध विजयी घोषित किए गए। विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्यमंत्री शिवराज के लिए इसे करारा झटका माना जा रहा है।

गौरतलब है कि इस साल के आखिरी में देश के तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। जिसमें मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। खास बात यह है कि इन तीनों राज्यों में बीजेपी की ही सरकार है। मध्य प्रदेश में अक्टूबर से दिसंबर के बीच में विधानसभा चुनाव होने की उम्मीद है, जिससे पहले नगर पालिका और नगर पंचायत के उप चुनावों की जीत किसी खुशखबरी से कम नहीं है।

 

Source: jantakareporter.com