सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ #मेरा PM चोर है, लोग बोले- माँ गंगा का लाल, निकला अंबानी का दलाल

PM CHOR HAI Trend

राफेल मामले में फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद का बयान आने के बाद मोदी सरकार की देशभर में आलोचना हो रही है। सबसे ज़्यादा सवाल PM मोदी पर उठाए जा रहे हैं।

उनकी विश्वसनीयता का मजाक उड़ाया जा रहा है और उन्हें झूठा कहने के बाद अब ‘चोर’ कहा जा रहा है।

बता दें कि अभी तक मोदी सरकार का कहना था कि उसने राफेल विमान समझौते में अनिल अंबानी की कंपनी ‘रिलायंस डिफेन्स लिमिटेड’ का नाम फ़्रांस को नहीं दिया था बल्कि फ़्रांस की कंपनी ‘डासौल्ट’ ने खुद उसे अपना पार्टनर चुना था।

लेकिन इस समझौते के समय फ़्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांसा ओलांदे ने फ़्रांस के न्यूज़ संगठन ‘मीडियापार्ट’ के साथ इंटरव्यू में कहा है कि फ़्रांस ने रिलायंस को खुद नहीं चुना था बल्कि भारत सरकार ने रिलायंस कंपनी को पार्टनर बनाने का प्रस्ताव दिया था।

देश और दुनिया में राजनीतिक मुद्दों का सबसे बड़ा पटल बने सोशल मीडिया पर आज प्रधानमंत्री मोदी की इज़्ज़त नीलाम की जा रही है। जो सोशल मीडिया 2014 चुनावी अभियान में पीएम मोदी के साथ खड़ा था वो ही उन्हें आज चोर बता रहा है।

राफेल मामले पर फ्रांस्वा ओलांद का बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर #Mera_PM_Chor_Hai है शुरू हो गया है।

ये हैशटैग ट्विटर पर सबसे ज़्यादा ट्रेंडिंग में है। यहाँ तक कि लोग अपने हाथ पर ये बात लिखकर उसकी तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं।

तीन तलाक अध्यादेश को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी, होगी तीन साल की सज़ा

तीन तलाक पर मोदी सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार देर रात इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। केंद्र सरकार के पास अब इस बिल को 6 महीने में पास कराना होगा। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इस अध्यादेश को मंजूरी दी थी। यह अध्यादेश अब 6 महीने तक लागू रहेगा।

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी तीन तलाक के मामले सामने आ रहे थे, इसलिए अध्यादेश लाने की जरूरत पड़ी। बता दें कि तीन तलाक (मुस्लिम महिला, विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी है और यह राज्यसभा में लंबित है। विपक्ष इसमें कुछ संशोधन की मांग कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि संविधान में अध्यादेश का रास्ता बताया गया है। किसी विधेयक को लागू करने कि लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। संविधान के आर्टिकल 123 के जब संसद सत्र नहीं चल रहा हो तो राष्ट्रपति केंद्र के आग्रह पर कोई अध्यादेश जारी कर सकते हैं। अध्यादेश सदन के अगले सत्र की समाप्ति के बाद छह हफ्तों तक जारी रह सकता है। जिस विधेयक पर अध्यादेश लाया जाता है, उसे संसद में अगले सत्र में पारित करवाना ही होता है। ऐसा नहीं होने पर राष्ट्रपति इसे दोबारा भी जारी कर सकते हैं।

Triple Talaq ordinance to be approved by president
Triple Talaq ordinance to be approved by president

अध्यादेश लाने के लिए ऑल इंडिया मजलिस-ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार की आलोचना की है। ओवैसी ने कहा है कि यह अध्यादेश पूरी तरह मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ है। यहां तक कि ओवैसी ने मोदी सरकार के इस फैसले को समानता के मूलभूत अधिकार के खिलाफ बताया है।

अहम प्रावधान

1. किसी भी माध्यम से तुरंत तीन तलाक अपराध माना जाएगा। तीन साल की सजा का प्रावधान।

2. पीड़ित महिला या उसके रक्त संबंधियों की शिकायत पर ही कार्रवाई। पड़ोसी या अंजान व्यक्ति की शिकायत पर नहीं।

3. अपराध की सूचना पर पुलिस तुरंत गिरफ्तारी कर सकती है।

4. तीन तलाक देने वाले पति को मजिस्ट्रेट ही जमानत दे सकते हैं।

मीडिया पर नजरः BJP प्रवक्ताओं से भी ज्यादा बदजुबान हुआ गोदी मीडिया, आज तक ने ‘सरदार’ को बताया देश का गद्दार

Godi Media targeting Sidhu for his visit to Pakistan

जब मीडिया की निष्पक्षता के बारे में पढ़ाया जाता है, तब एक टर्म इस्तेमाल होता है ‘We Report You Decide’ इसका मतलब ये होता है कि पत्रकार ख़बर की पूरी जानकारी, तथ्य आदि देगा और दर्शक या पाठक उसी आधार पर अपनी राय बनाएंगे।

लेकिन भारतीय गोदी मीडिया ने इस टर्म को शीर्षासन करा दिया है। ये मीडिया किसी खबर की पूरी जानकारी, तथ्य नहीं देता लेकिन अपना जजमेंट जरूर दे देता है। दर्शकों को खुद से कोई राय बनाने का मौका ही मिल रहा क्योंकि गोदी मीडिया अपनी राय थोप रहा है।

गोदी मीडिया खबरों को जिस तरह परोस रहा है उसे Spoon Feeding नहीं जबरन ठूसना कहते हैं। अगर आंख बंद करके न्यूज चैनल देखा जाए तो न्यूज एंकर और सुप्रीम कोर्ट के जज में फर्क मालूम करना मुश्किल हो जाएगा। मीडिया Labeling इतनी खतरनाक हो चुकी है कि कब उमर खालिद जनता की नजरों में छात्र से आतंकवादी बन जाता है पता ही नहीं चलता।

अब ऐसी ही Labeling कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू के साथ की जा रही है। दरअसल सिद्धू के पाकिस्तान जाने और वहां के सेना अध्यक्ष से गले मिलने पर विवाद हो गया है। मीडिया अब अपनी पूरी उर्जा सिद्धू को पाकिस्तानी और ISI ऐजेंट घोषित करने में खर्च कर रही है।

खासकर जी न्यूज और आजतक ने तो मोर्चा ही खोल दिया है। प्रश्नवाचक चिह्न के साथ इन दोनो मीडिया संस्थानों ने सिद्धू के लिए वो सब लिख दिया जिससे कांग्रेस को बदनाम किया जा सकता है। जाहिर है कांग्रेस की बदनामी बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित होती है।

आज तक पर शाम 6 बजे प्रसारित होने वाले ‘हल्ला बोल’ में कल यानी 19 सितंबर का टॉपिक था ‘इमरान का सरदार, देश का गद्दार?’ प्रश्नवाचक चिह्न को ढाल बनाकर आजतक को जो कहना था उसने कह दिया।

जी न्यूज ने तो आज तक से चार कदम आगे बढ़कर लिख दिया ‘ISI के प्लान खालिस्तान में फंस गए सिद्धू?’ इसमे भी प्रश्नवाचक चिह्न ढाल मात्र है। ढाल मात्र इसलिए है क्योंकि जी न्यूज के पास अपनी बात को साबित करने के लिए कोई तथ्य नहीं है, इसलिए प्रश्नवाचक चिह्न लगाकर मन की बात कही जा रही है।

 

Source: boltaup.com

BSF जवान की गला रेत कर हत्या किए जाने पर भड़के सीएम केजरीवाल, बोले- “प्रधानमंत्री जी जवाब दें कि आख़िर कब तक भारत के सैनिकों पर अत्याचार जारी रहेगा?”

Arvind Kejriwal attack on PM Modi after being shot dead BSF jawans by pak soldiers

पाकिस्तानी सैनिकों ने जम्मू क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सरहद पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक जवान को कई गोली मारने के बाद उसका गला रेत दिया। भारतीय बलों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर यह अपनी तरह का पहला बर्बर कृत्य है। पाकिस्तानी सैनिकों के इस हरकत पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नराजगी जताते हुए पीएम मोदी पर जोरदार हमला बोला है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री से जवाब मांगते हुए पूछा कि ‘आखिर कब तक पाकिस्तान के सामने बेबस रहेगा भारत?’

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि घटना के बाद सुरक्षा बलों ने 192 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा तथा 740 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा पर ‘हाई अलर्ट’ जारी कर दिया, जिसकी रखवाली सेना करती है।

यह बर्बर घटना मंगलवार को रामगढ़ जिले में हुई जो नियंत्रण रेखा पर भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ इस तरह के हमलों की याद ताजा करता है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के लापता जवान की पहचान नरेंद्र सिंह के तौर पर हुई है।

अधिकारियों ने बताया, ‘जवान के शरीर में तीन गोलियां लगने के निशान हैं और उनका गला रेता गया है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारतीय सुरक्षा बल के साथ हुई यह अप्रत्याशित घटना है और पाकिस्तानी सैनिक इसके पीछे हैं। बीएसएफ और अन्य सुरक्षा बल सही समय पर जवाबी कार्रवाई करेंगे।’

पाकिस्तानी सैनिकों के इस हरकत पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को ट्वीट करते हुए लिखा, “प्रधान मंत्री जी जवाब दें कि आख़िर कब तक भारत के सैनिकों पर अत्याचार जारी रहेगा? कब तक भारत पाकिस्तान के सामने बेबस रहेगा? आख़िर क्या मजबूरियाँ हैं प्रधान मंत्री जी की?”

आम आदमी पार्टी (AAP) के हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद ने ट्वीट करते हुए लिखा, “अभी शहीद के गांव से दाहसंस्कार से आया हु गांव के लोग सरकार और नेताओं को गाली दे रहे थे बोल रहे थे आरपार क्यो नही करते मोदी जी पाकिस्तान से। कब तक पाकिस्तान के नाम से राजनीति चलती रहेगी कब जवान शहीद होते रहेंगे। नेताओ को भी कुछ दिन बॉर्डर पर भेजना चाहिए। ये गाँव वाले बोल रहे थे।”

Source: jantakareporter.com

पीएम मोदी के श्मशान-कब्रिस्तान वाले बयान पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने साधा निशाना!

Mohan Bhagwat attack PM Modi

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तीन दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के अंतिम दिन बुधवार (19 सितंबर) को सवालों के जवाब देते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कई मुद्दों पर विचार रखे। इस दौरान उत्तर प्रदेश चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कब्रिस्तान और श्मशान को लेकर दिए गए बयान पर मोहन भागवत ने इशारों-इशारों में पलटवार किया है।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के तीन दिवसीय सम्मेलन के आखिरी दिन उन्होंने विभिन्न विवादास्पद विषयों पर लिखित सवालों का जवाब दिया। इनमें अंतर जातीय विवाह, शिक्षा नीति, महिलाओं के खिलाफ अपराध, गौरक्षा जैसे मुद्दे भी शामिल थे। उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे पर वार्ता का समर्थन किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय राम मन्दिर समिति को करना है जो राम मन्दिर के निर्माण के लिए अभियान की अगुवाई कर रही है।

इस दौरान उनसे पूछा गया कि राजनीति में श्मशान, कब्रिस्तान, भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों को आप कैसे देखते हैं? इस सवाल का जवाब देते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि राजनीति में ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए और जब राजनीति अपने उद्देश्य से भटकती है, तभी ऐसी बातें होती हैं।

नवभारत टाइम्स के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘राजनीति लोककल्याण के लिए चलनी चाहिए। लोककल्याण का माध्यम सत्ता होता है। अगर राजनीतिक वर्ग के लोग ऐसे चलने लगें तो फिर श्मशान, कब्रिस्तान, भगवा आतंकवाद जैसी बातें होंगी ही नहीं। ये सारी बातें तब होती हैं, जब राजनीति केवल सत्ता के लिए चलती है। जो लोग राजनीति में हैं उनका उस तरह का प्रशिक्षण होने की जरूरत है।’ जानकारों का कहना है कि संघ प्रमुख ने इस सवाल का जिस प्रकार से जवाब दिया वह सीधे तौर पर पीएम मोदी के बयान की निंदा के रूप में देखा जा रहा है।

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल फरवरी विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सीएम अखिलेश यादव पर भेदभाव का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था, ‘अगर गांव में कब्रिस्तान बनता है तो श्मशान भी बनना चाहिए। रमजान में बिजली मिलती है तो दीवाली में भी मिलनी चाहिए। होली में बिजली मिलती है तो ईद पर भी मिलनी चाहिए। कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। सरकार का काम है भेदभाव मुक्त शासन चलाने का। किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए, धर्म और जाति के आधार पर बिल्कुल नहीं।’

RSS प्रमुख द्वारा कही गई प्रमुख बातें

  • आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने देश में आबादी का संतुलन कायम रखने के लिए एक नीति बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इसके दायरे में समाज के सभी वर्ग होने चाहिए। उन्होंने कहा कि शुरूआत उन लोगों से की जानी चाहिए जिनके अधिक बच्चे हैं और उनके पालन-पोषण के लिए सीमित साधन हैं।
  • भागवत ने विभिन्न समुदायों के लिए आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था का पुरजोर समर्थन किया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
  • उन्होंने दावा किया कि विश्व भर में हिन्दुत्व की स्वीकार्यता बढ़ रही है जो उनके संगठन की आधारभूत विचारधारा है। उन्होंने कहा कि इसके विरूद्ध भारत में उन विभिन्न गलत चलनों के कारण क्रोध है जो पिछले कई वर्षों में इसमें आ गये हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संघ उन्हें समाप्त करने के लिए काम कर रहा है।
  • भारत के विभिन्न भागों में बदल रहे आबादी के संतुलन और घटती हिन्दू आबादी के बारे में एक प्रश्न पर आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विश्व भर में आबादी संतुलन को महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे यहां भी कायम रखा जाना चाहिए।उन्होंने कहा, ‘‘इसे ध्यान में रखते हुए जनसंख्या पर एक नीति तैयार की जानी चाहिए।’’ अगले 50 वर्षों में देश की संभावित आबादी और इस संख्या बल के अनुरूप संसाधनों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
  • धर्मान्तरण के विरूद्ध भागवत ने कहा कि यह सदैव दुर्भावनाओं के साथ करवाया जाता है तथा इससे आबादी का असंतुलन भी होता है।
  • आरएसएस प्रमुख ने गायों की रक्षा का समर्थन करने के बावजूद यह नसीहत भी दी कि गौरक्षा के नाम पर कानून के विरूद्ध नहीं जाया जा सकता। उन्होंने कहा कि कानून को अपने हाथ में ले लेना एक अपराध है और ऐसे मामलों में कठोर दंड होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा, ‘‘हमें दोमुंही बातों को भी नकारना चाहिए क्योंकि गौ तस्करों द्वारा की जाने वाली हिंसा पर कोई नहीं बोलता।’’ उनसे देश में भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या करने तथा गौरक्षा के नाम पर हिंसा की बढ़ती घटनाओं के बारे में पूछा गया था।
  • अंतर जातीय विवाह के बारे में पूछे जाने पर भागवत ने कहा कि संघ इस तरह के विवाह का समर्थन करता है तथा यदि अंतर जातीय विवाहों के बारे में गणना करायी जाये तो सबसे अधिक संख्या में संघ से जुड़े लोगों को पाया जाएगा।
  • महिलाओं के विरूद्ध अपराध के बारे में अपनी उद्धिग्नता को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा माहौल तैयार किया जाना चाहिए जहां वे सुरक्षित महसूस कर सकें।
  • एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि लोगों को किसी भी तरह के भेदभाव से बचाने की जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की है। उन्होंने यह भी कहा कि एलजीबीटीक्यू को अलग थलग नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वे भी समाज का अंग हैं।
  • भागवत ने कहा कि संघ अंग्रेजी सहित किसी भी भाषा का विरोधी नहीं है किन्तु उसे उसका उचित स्थान मिलना चाहिए। उनका संकेत था कि अंग्रेजी किसी भारतीय भाषा का स्थान नहीं ले सकती। संघ प्रमुख ने कहा, ‘‘आपको अंग्रेजी सहित किसी भी भाषा का विरोध नहीं करना चाहिए और इसे हटाया नहीं जाना चाहिए…हमारी अंग्रेसी से कोई शत्रुता नहीं है। हमें योग्य अंग्रेजी वक्ताओं की आवश्यकता है।’’
  • अन्य मुद्दों पर पूछे गये सवालों के उत्तर में उन्होंने जम्मू कश्मीर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आरएसएस संविधान के अनुच्छेद 370 एवं 35 ए स्वीकार नहीं करता।
  • संविधान का अनुच्छेद 370 राज्य की स्वायत्तता के बारे में है जबकि अनुच्छेद 35 ए राज्य विधानसभा को यह अनुमति देता है कि वह राज्य के स्थायी निवासियों को परिभाषित करे।
  • मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मन्दिर का शीघ्र निर्माण होना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे पर वार्ता का समर्थन किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय राम मन्दिर समिति को करना है जो राम मन्दिर के निर्माण के लिए अभियान की अगुवाई कर रही है। संघ प्रमुख ने कहा कि उन्हें यह नहीं मालूम कि राम मंदिर के लिए अध्यादेश जारी किया जा सकता है क्योंकि वह सरकार के अंग नहीं हैं। उन्होंने कहा कि क्या अध्यादेश जारी किया जा सकता है और इसे कानूनी चुनौती मिल सकती है…ऐसे मुद्दों पर विचार किया जाना चाहिए।

Source: jantakareporter.com

राफेल पर बुरी फंस गई मोदी सरकार ! अब कांग्रेस ने CAG का दरवाजा खटखटाया, कहा- घोटाले की जांच हो

Congress Leader meets CAG for Rafale Scam

राफेल मामला 2019 चुनाव में मोदी सरकार के विरुद्ध प्रमुख मुद्दा बन सकता है। विपक्ष ने इस मामले में पूरी तरह से सक्रीय नज़र आ रहा है। कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने बुधवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से मुलाकात कर विस्तृत जांच की मांग की है।

राफेल डील को लेकर कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार पर कुछ महीनों से हमले तेज कर दिए हैं। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के सीएजी से मुलाकात के बाद कांग्रेस पार्टी नेता आनंद शर्मा ने कहा, हमने इनक्लोजर के साथ-साथ विस्तृत ज्ञापन सीएजी को सौंपा है जिससे स्पष्ट होता है कि राफेल खरीद में अनियमितता हुई हैं। उम्मीद है इस मामले में सीएजी जांच करेंगे।

इससे पहले पूर्व रक्षा मंत्री और कांग्रेस नेता एंटनी ने सीतारमण से पूछा था कि अगर केंद्र सरकार की ओर से खरीदा जा रहा विमान वाकई सस्ता है तो उसने 126 की बजाए 36 ही विमान क्यों खरीदे। इस पर उन्होंने कहा, ‘विमान खरीदना कोई साधारण खरीद प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए एक तय प्रक्रिया है।’

Congress Leader meets CAG for Rafale Scam
Congress Leader meets CAG for Rafale Scam

क्या है विवाद
राफेल एक लड़ाकू विमान है। इस विमान को भारत फ्रांस से खरीद रहा है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने विमान महंगी कीमत पर खरीदा है जबकि सरकार का कहना है कि यही सही कीमत है। ये भी आरोप लगाया जा रहा है कि इस डील में सरकार ने उद्योगपति अनिल अंबानी को फायदा पहुँचाया है।

बता दें, कि इस डील की शुरुआत यूपीए शासनकाल में हुई थी। कांग्रेस का कहना है कि यूपीए सरकार में 12 दिसंबर, 2012 को 126 राफेल विमानों को 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर (तब के 54 हज़ार करोड़ रुपये) में खरीदने का फैसला लिया गया था। इस डील में एक विमान की कीमत 526 करोड़ थी।

इनमें से 18 विमान तैयार स्थिति में मिलने थे और 108 को भारत की सरकारी कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), फ्रांस की कंपनी ‘डासौल्ट’ के साथ मिलकर बनाती। 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी फ़्रांस यात्रा के दौरान इस डील को रद्द कर इसी जहाज़ को खरीदने के लिए में नई डील की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई डील में एक विमान की कीमत लगभग 1670 करोड़ रुपये होगी और केवल 36 विमान ही खरीदें जाएंगें। नई डील में अब जहाज़ एचएएल की जगह उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी बनाएगी।

जबकि अनिल अम्बानी की कंपनी को विमान बनाने का कोई अनुभव नहीं है क्योंकि ये कंपनी राफेल समझौते के मात्र 14 दिन पहले बनी है। साथ ही टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर भी नहीं होगा जबकि पिछली डील में टेक्नोलॉजी भी ट्रान्सफर की जा रही थी।

राहुल गांधी ने साधा रक्षा मंत्री पर निशाना, कहा- फिर पकड़ा गया राफेल मिनिस्टर का झूठ

Rahul Gandhi demands resignation of Defence Minister Nirmala Sitharaman says Rafael Minister Lies

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल विमान सौदे को लेकर एक बार फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट कर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण हमला बोलते हुए कहा कि आरएम (राफेल मिनिस्टर) राफेल सौदे को लेकर बार-बार झूठ बोल रहीं हैं और हर बार उनका झूठ पकड़ा जा रहा है.

राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में पूर्व एचएएल चीफ टीएस राजू के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि राजू ने रक्षा मंत्री का झूठ सामने ला दिया कि एचएएल में राफेल बनाने की क्षमता नहीं है. रक्षा मंत्री अस्थिर हैं ऐसे में उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. आपको बता दें कि पूर्व एचएएल प्रमुख टीएस राजू ने कहा था कि सरकार राफेल लड़ाकू विमान भारत में ही बना सकती थी. जब एचएएल फोर्थ जनरेशन का फाइटेर जेट 25 टन का सुखोई-30 बना सकता है, तो राफेल भी बना सकता था.

राफेल विमान सौदे को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर कांग्रेस लगातार हमले कर रही है. बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) राजीव महर्षि से मुलाकात की थी. पार्टी नेताओं ने कहा था कि कैग ने उनसे कहा कि वह संसद में रिपोर्ट पेश करने के लिए पूरे मामले की पहले ही जांच कर रहे हैं और उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी तर्कों पर विचार किया जाएगा. कांग्रेस ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल को बताया कि कैग की रिपोर्ट जल्द ही संसद के पटल पर पेश की जाएगी.

गौरतलब है कि कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार ने फ्रांस की कंपनी दसाल्ट से 36 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद का जो सौदा किया है, उसका मूल्य पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के शासनकाल में किए गए समझौते की तुलना में बहुत अधिक हैं जिससे सरकारी खजाने को हजारों करोड़ों रूपए का नुकसान हुआ है. पार्टी का यह भी दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौदे को बदलवाया जिससे एचएएल से कॉन्ट्रैक्ट लेकर एक निजी समूह को कंपनी को दिया गया.

 

Source: hindi.firstpost.com

BSF जवान की हत्या पर कांग्रेस ने PM से पूछा- कहां गया 56 इंच का सीना और लाल आंख

Where is the 56 inch chest Congress asks Modi govt on BSF Jawans killing

सीमा पर टकराव बढ़ रहा है और पाकिस्तान की ओर से बार-बार संघर्षविराम का उल्लंघन किया जा रहा है. सीमा पार से हो रही गोलीबारी का हमारे जवान भी शिकार हो रहे हैं. मंगलवार को पाकिस्तानी सैनिकों ने जम्मू के पास अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक जवान का गला रेत दिया. इस बर्बर घटना को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है.

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने पूछा कि कहां गया 56 इंच का सीना और कहां गई लाल आंख? कहां गया एक के बदले 10 सिर लाने वाला वादा. सरकार को भ्रष्टाचारियों की फिक्र है, लेकिन जवानों की नहीं.

कांग्रेस प्रवक्ता ने ट्वीट कर कहा है कि मोदी जी, फौजी देश का आत्मसम्मान हैं. उस स्वाभीमान को अगवा कर, आंखें निकाल, टांगे काट, गला रेत, नापाक पाक ने हत्या कर डाली. क्या आपका खून नहीं खौलता. देश जवाब मांग रहा है.

सुरजेवाला ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि मोदी जी जवान हमारे भारत की आत्मा हैं. भारत की आत्मा, नरेंद्र सिंह को 9 घंटे टॉर्चर किया गया. शहीद नरेंद्र सिंह ने भारत माता का कर्ज उतार दिया. पर सवाल ये है कि पाकिस्तान को क्रिकेट बैट भिजवाने की बजाए आप हमारे जवानों के लिए कब बैट (आवाज उठाएंगे) करेंगे.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया था कि हेड कॉन्स्टेबल नरेंद्र कुमार के शरीर में तीन गोलियों के निशान भी मिले हैं. कुमार का शव छह घंटे के बाद भारत पाक बाड़ (फेंस) के आगे मिल पाया क्योंकि पाकिस्तानी पक्ष ने सीमा पर संयम बनाए रखने और बीएसएफ के खोजी दलों पर गोलीबारी न होना सुनिश्चित करने के आह्वान पर ‘कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.’

 

Source: hindi.firstpost.com

पंजाब जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव: 28 बूथों पर कल होगा दोबारा मतदान

Punjab Zila parishad and panchayat Samiti elections election commission has ordered repolling on 28 polling booths across seven districts

चुनाव आयोग ने पंजाब में जिला परिषद और पंचायत समिति के 28 बूथों पर दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया है. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक अब दोबारा मतदान कल यानी 21 सितंबर को सात जिलों में होगा.

Source: hindi.firstpost.com

संघ का प्रमाणपत्र नहीं चाहिए, भागवत के बयान से मोदी-शाह चिंतित हों: कांग्रेस

ED registers case against DK Shivakumar

प्रवर्तन निदेशालय ने कर्नाटक के मंत्री डीके शिवकुमार और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का एक मामला दर्ज किया है. अधिकारियों ने बताया कि यह मामला कथित कर चोरी और हवाला लेनदेन मामले के आधार पर दर्ज किया गया है. अधिकारियों ने बताया कि जांच एजेंसी ने शिवकुमार, नयी दिल्ली स्थित कर्नाटक भवन में कर्मचारी हनुमनथैया और अन्य के खिलाफ धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया है.

कथित कर चोरी और करोड़ों रूपए के हवाला लेनदेन के मामले में इस साल की शुरुआत में आयकर विभाग ने बेंगलुरू की एक विशेष अदालत में उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था. यह मामला उसी आरोप पत्र के आधार पर दर्ज किया गया है. आरोपियों के बयान दर्ज करने के लिए एजेंसी उन्हें जल्द ही समन भेज सकती है. आयकर विभाग ने शिवकुमार और उनके सहयोगी एसके शर्मा पर तीन अन्य लोगों की मदद से आय से अधिक धन नियमित तौर पर हवाला माध्यमों के जरिए लाने – ले जाने का आरोप लगाया है.

अन्य आरोपी- सचिन नारायण, अंजनेय हनुमनथैया और एन राजेंद्र हैं. आयकर विभाग ने आरोप लगाया कि सभी पांचों आरोपियों ने कर चोरी की साजिश रची. विभाग ने कहा कि बीते अगस्त में नयी दिल्ली और बेंगलुरू में छापेमारी के दौरान करीब 20 करोड़ रूपए की अवैध संपत्ति बरामद की गई, जिसका शिवकुमार से सीधा संबंध है.

 

Source: hindi.siasat.com

संघ का प्रमाणपत्र नहीं चाहिए, भागवत के बयान से मोदी-शाह चिंतित हों: कांग्रेस

we dont need rss certificate amit shah and modi should worries about mohan bhagwat statement says Congress

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा आजादी की लड़ाई में कांग्रेस के योगदान की तारीफ किए जाने पर मुख्य विपक्षी पार्टी ने मंगलवार को कहा कि उसे ‘विभाजनकारी और नफरत फैलाने वाले’ संगठन से प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह भी कहा कि भागवत के बयान से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को चिंतित होना चाहिए क्योंकि ऐसा लगता है कि इस जोड़ी के ‘विध्वंसक रवैये’ से आरएसएस भी असहमत है.

सुरजेवाला ने कहा, ‘मैंने इस बारे में (भागवत के बयान) अखबारों में पढ़ा है. अगर इससे किसी को चिंतित होना चाहिए तो वह मोदी जी और अमित शाह की जोड़ी को होना चाहिए. ऐसा लगता है कि अब बीजेपी का मातृ संगठन मोदी-शाह जोड़ी के विध्वंसक रवैये से पूरी तरह असहमत है.’

उन्होंने कहा, ‘संपूर्ण भारत को पता है कि भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई और देश की एकता एवं अखंडता के लिए कांग्रेस ने क्या बलिदान दिए हैं. महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सरदार बेअंत सिंह, विद्याचरण शुक्ल और नंद कुमार पटेल और अन्य हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देश के लिए बलिदान दिया.’ सुरजेवाला ने कहा, ‘विभाजनकारी और नफरत पैदा करने वाले संगठन से कांग्रेस को किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है.’

आरएसएस के कार्यक्रम में सोमवार को भागवत ने यह कहकर सभी को चौंका दिया था कि कांग्रेस का आजादी की लड़ाई में बड़ा योगदान है और उसने देश को कई महान हस्तियां दी हैं.

Source: hindi.firstpost.com

BJP के आने वाले समय पर अखिलेश का वार, मोदी सरकार पर लगाये ये आरोप

Akhilesh Yadav Samajwadi party president told bjp as a breaking party

यूपी में महागठबंधन का पेच फंसता नजर आ रहा है। सीटों के बंटवारे को लेकर मायावती के बयान के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस बैकफुट पर नजर आ रही हैं। हालांकि, समाजवादी पार्टी (एसपी) गठबंधन के लिए दो कदम पीछे जाने को भी तैयार है। एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि बीजेपी को हराने के लिए उनकी पार्टी गठबंधन करेगी, चाहे इसके लिए दो कदम पीछे हटना पड़े।

Akhilesh Yadav Samajwadi party president told bjp as a breaking party
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अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘बीजेपी को हराने के लिए एसपी गठबंधन करेगी, भले ही इसके लिए दो कदम पीछे हटना पड़े। हमारा अजेंडा देश को बचाना है। उसके लिए सभी को आगे आना चाहिए। सिर्फ राजनैतिक दल ही नहीं, बल्कि देश की जनता भी बीजेपी को हटाना चाहती है।’ अखिलेश ने आगे कहा, ‘मैं समझता हूं कि आने वाले समय में आप देखेंगे कि एक बहुत अच्छा गठबंधन तैयार होगा।’

वहीं पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार बढ़ोत्तरी अखिलेश ने कहा, ‘भारत कई मोर्चों पर पिछड़ रहा है। महंगाई और पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। हम चाहते हैं कि बीजेपी वाले ऐसा चमत्कार करें, उनकी आर्थिक नीतियों में ऐसा चमत्कार हो कि जितना आज डॉलर में रुपया आ रहा है, एक दिन ऐसा आए कि रुपये में उतना डॉलर हो।’

Akhilesh Yadav Samajwadi party president told bjp as a breaking party
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दरअसल, मायावती ने विपक्षी दलों को यह कहकर एक बार फिर से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि वह किसी भी गठबंधन में तभी जाएंगी, जब उन्हें सम्मानजनक सीटें मिलें। बीएसपी चीफ मायावती की ओर से सम्मानजनक सीटों की बात करना और कांग्रेस को भी महंगे ईंधन के लिए जिम्मेदार ठहराने के बयान को सीटों की सौदेबाजी के लिए दबाव के तौर पर देखा जा रहा है। यही नहीं बीएसपी चुपचाप अपने उन इलाकों में पैठ मजबूत करने में जुटी है, जिन्हें उसके मजबूत गढ़ों के तौर पर देखा जाता रहा है।

दूसरी तरफ एसपी चीफ अखिलेश यादव भी छोटी पार्टियों के संपर्क में बताए जा रहे हैं। वह निषाद पार्टी और पीस पार्टी को विपक्षी कैंप में लाने की कोशिश में हैं। हालांकि कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल सीटों के समझौते के मामले में अपनी जगह तलाशने की कोशिश में हैं। वहीं कहा जा रहा है कि कांग्रेस यूपी में 10 सीटों से कम पर तैयार नहीं है।

Akhilesh Yadav Samajwadi party president told bjp as a breaking party
Akhilesh Yadav Samajwadi party president told bjp as a breaking party

उधर, पूर्व केंद्रीय मंत्री अजीत सिंह की आरएलडी को सीटें आवंटन करने में काफी सतर्कता बरती जा रही है। माना जा रहा है कि कांग्रेस और आरएलडी के 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन को देखते हुए उनकी ज्यादा सीटों की मांग पर भी पेच फंस सकता है।

यदि बीएसपी को महागठबंधन में सबसे ज्यादा सीटें मिलती हैं तो फिर समाजवादी पार्टी उससे 5 सीट से ज्यादा कम पर समझौता नहीं करेगी। कांग्रेस को सीट-शेयरिंग के फॉर्म्युले में कम से कम 10 सीटें हाथ लगने की उम्मीद है। इसके अलावा, अजित सिंह का पार्टी आरएलडी को साधना भी चुनौतीपूर्ण होगा। कांग्रेस और आरएलडी के लिए मुश्किल यह है कि 2014 के आम चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव के परफॉर्मेंस के आधार पर उनका दावा कमजोर है।

RTI में खुलासा : नोटबंदी के बाद गुजरात में BJP नेताओं की अध्यक्षता वाले बैंकों में जमा हुआ हज़ारों करोड़, क्या मोदी ने कालेधन को किया सफ़ेद!

Thousands of crores deposited in gujarat banks after demonetisation

प्रधानमंत्री मोदी ने 8 नवम्बर 2016, को नोटबंदी की घोषणा करते हुए कहा था कि ये कदम कालेधन को खत्म करने के लिए हैं। लेकिन जिस तरह के तथ्य सामने आ रहे हैं उससे लग रहा है ये कदम कालेधन को ख़त्म करने के लिए नहीं बल्कि उसे सफ़ेद करने के लिए उठाया गया था।

एक आरटीआई में ये खुलासा हुआ है कि नोटबंदी के बाद गुजरात के उन सहकारी बैंकों में सबसे ज़्यादा पैसा जमा कराया गया जिनके अध्यक्ष भाजपा नेता थे। सहकारी बैंक किसी भी संस्था द्वारा शुरू किये जाते हैं। इनके प्रशासन में अक्सर राजनेता होते हैं।

मुंबई के आरटीआई कार्यकर्ता मनोरंजन राय ने इस संबंध में सरकार से जानकारी मांगी थी जिसके आधार पर मिली जानकारी के तहत गुजरात कांग्रेस दावा कर रही है कि 10 नवंबर 2016 से लेकर 14 नवंबर 2016 तक गुजरात के जिन 10 बैंकों में करोड़ों रुपए के पुराने नोट बैंकों में जमा कराए गए थे, उस बैंक के चेयरमैन, प्रेसिडेंट और डायरेक्टर सभी भाजपा के नेता ही रहे हैं।

इस रिपोर्ट के बाद गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष दोषी ने सरकार से इस मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद गुजरात से आते हैं और उनके नोटबंदी के ऐलान के बाद उनकी ही पार्टी के नेताओं के बैंकों में पैसा जमा कराया गया। इस पूरे मामले की जांच की जाना चाहिए।

ये हैं वो बैंक
इन बैंकों की सूची में सबसे ऊपर अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक (एडीसीबी) है, जिसके निदेशक भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और अध्यक्ष भाजपा नेता अजयभाई एच पटेल हैं. इस बैंक में नोटबंदी के दौरान सर्वाधिक 745.59 करोड़ मूल्य के प्रतिबंधित नोट जमा किए गए।

राजकोट के सबसे बड़े को-ऑपरेटिव बैंक राजकोट जिला को-ऑपरेटिव बैंक में शुरुआती चार दिनों के अंदर 693 करोड़ रुपए जमा कराए गए इस बैंक के चेयरमैन जयेश रादडिया हैं जो इस समय गुजरात सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

इसी तरह सूरत जिला को-ऑपरेटिव बैंक में शुरुआती 4 दिनों में 369 करोड़ रुपए जमा कराए गए थे और इस बैंक के चेयरमैन भाजपा के नेता नरेश पटेल और प्रभुभाई पटेल हैं।

साबरकांठा डिस्ट्रीक सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में 328 करोड़ जमा कराए गए और इसके चेयरमैन भाजपा के नेता महेशभाई पटेल हैं, जबकि डायरेक्टर भाजपा के नेता राजेंद्र सिंह चावड़ा और दूसरे डायरेक्टर के तौर पर प्रफुल्लभाई पटेल हैं।

वैसे ही बनासकांठा डिस्ट्रीक को-ऑपरेटिव बैंक में उन 4 दिनों में 295 करोड़ जमा हुए। इसके चेयरमैन थे तत्कालीन गुजरात सरकार मंत्री शंकर चौधरी।

महेसाना जिला सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में भी 4 दिनों में बड़ी मात्रा में पैसा जमा कराया गया. इस बैंक में 215 करोड़ जमा हुए, जिसमें राज्य के उपमुख्यमंत्री नीतिन पटेल बडे़ पद पर विराजमान हैं।

राज्य के अन्य जिला को-ऑपरेटिव बैंकों में अमरेली जिला सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक, भरुच जिला सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक, वडोदरा जिला सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक, जुनागढ़ जिला को-ऑपरेटिव बैंक और पंचमहल जिला को-ऑपरेटिव बैंक में भी मोटी रकम जमा कराई गई। इन बैंकों के उच्च पदों पर भी भाजपा के नेता ही काबिज हैं।

Source: boltaup.com

वीडियो: राहुल बोले- मोदी सरकार में तानाशाही एक पेशा बन गई है

Dictatorship in Modi government has become a profession Rahul Gandhi

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस के लाठीचार्ज को सरकार की तानाशाही बताया है। राहुल गांधी बुधवार को नरेंद्र मोदी सरकार एवं रमन सिंह सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार में तानाशाही अब एक पेशा बन चुकी है।

गांधी ने घटना का वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘नरेंद्र मोदी की हुकूमत में तानाशाही एक पेशा बन गई है। बिलासपुर में रमन सिंह की सरकार द्वारा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मौलिक अधिकारों पर बुजदिली से किए गए इस प्रहार को वहाँ की जनता सियासी जुल्म के रूप में याद रखेगी।’

बिलासपुर में पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की कथित रूप से पिटाई की जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अटल श्रीवास्तव घायल हो गये। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया है।

खबरों के मुताबिक कांग्रेस कार्यकर्ता नगर निकाय मंत्री अमर अग्रवाल के घर पर प्रदर्शन करने गए थे जहां उनकी पिटाई की गई।

दरअसल, कुछ दिन पहले अमर अग्रवाल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कचरा कह दिया था जिससे भड़के पार्टी कार्यकर्ता विरोध स्वरूप मंत्री के घर पर कचरा फेंकने पहुंचे थे। (इनपुट:भाषा)

 

Source: amarujala.com

कांग्रेस के खिलाफ ‘फर्जी’ खबर शेयर करने पर BBC ने मोहनदास पाई को किया शर्मिंदा, पत्रकारों ने लगाई लताड़

मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन के चेयरमैन और इन्फोसिस के पूर्व डायरेक्टर मोहनदास पाई कांग्रेस के खिलाफ एक ‘फर्जी’ खबर शेयर कर बुरी तरह फंस गए हैं। इस वजह से सोशल मीडिया पर उन्हें जमकर ट्रोल किया जा रहा है। साथ ही बीबीसी या ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोंरेशन ने भी ट्वीट कर पाई को शर्मिंदा कर दिया है। बता दें कि पिछले कुछ समय से मोहनदास पाई को सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुख्यात प्रशंसक के रूप में काफी प्रसिद्धि मिली है।

दरअसल, मोहनदास पाई सोमवार सुबह BBC न्यूज हब (BBC News Hub) नाम के एक फर्जी वेबसाइट का एक आर्टिकल ट्वीट किया, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को दुनिया की सबसे भ्रष्ट पार्टियों में से एक बताया गया है। इस फर्जी लेख को ट्वीट करते हुए पाई ने लिखा, ‘शॉकिंग! एक भारतीय राजनीतिक पार्टी भी शामिल।’ पाई ने जो आर्टिकल शेयर किया है उसकी हेडलाइन है, ‘दुनिया में 2018 की टॉप 10 सबसे भ्रष्ट राजनीतिक पार्टियां’

इस फर्जी न्यूज को लेकर देश के तमाम वरिष्ठ पत्रकारों ने नाराजगी व्यक्त की। क्योंकि पाई के ट्वीट को बीजेपी समर्थकों द्वारा काफी तेजी से रिट्वीट और लाइक किया जाने लगा। पाई जैसे ही कई लोग, इस वेबसाइट के URL bbcnewshub.com को असली BBC News Hub मानकर इस फर्जी लेख पर विश्वास करने लगे। इस वेबसाइट को ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन की समझ रहे थे और इस रिपोर्ट को भी BBC के सर्वेक्षण पर आधारित मानने लगे।

बीबीसी सहित तमाम पत्रकारों ने लगाई लताड़

BBC में काम करने वाले कई पत्रकारों के साथ ही ट्विटर यूजर्स ने पाई को इस बात से अवगत कराया कि उन्होंने जो लिंक शेयर किया है वह फर्जी है। पत्रकारों ने पाई से इस फर्जी ट्वीट डीलीट करने के लिए भी कहा। हालांकि, पाई ने ट्वीट डीलीट नहीं किया और उन्होंने एक और ट्वीट में लिखा, ‘फेक साइट हो या नहीं, अधिकतर राजनीतिक पार्टियां 50 साल पुरानी हैं, उनका इतिहास सब जानते हैं, उनके भ्रष्टाचार से भी सब अवगत हैं।’

BBC calls out Mohandas pai's fake news on Congress party
BBC calls out Mohandas pai’s fake news on Congress party

BBC के पत्रकार ट्रुशर बरोट ने भी ट्वीट कर इस फर्जी खबर को डिलीट करने को कहा। बरोट ने कहा कि हनदास जी मैं बीबीसी में काम करता हूं। कृपया आप अपना मूल ट्वीट हटा सकते हैं? अन्यथा यह फैलता रहेगा। इस पर पाई लिखा, ‘आप आधिकारिक तौर पर इस रिपोर्ट का खंडन क्यों नहीं करते और क्यों नहीं कहते कि आपका इससे कोई लेना देना नहीं है। यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप अपने ब्रांड की देखरेख करें! यहां तक कि आप गलत खबरें प्रकाशित करते हैं और लोग विरोध करते हैं लेकिन आप भी परवाह नहीं करते।’

BBC calls out Mohandas pai's fake news on Congress party
BBC calls out Mohandas pai’s fake news on Congress party

पाई ने एक और ट्वीट में कहा, ‘अच्छा है यह BBC नहीं, उसकी तरह दिखता है, लेकिन जानकारी दिलचस्प है।’ जिसके बाद बीबीसी (BBC News Press Team) ने भी अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर इस खबर को फर्जी करार दिया है। बीबीसी ने टाइम्स ऑफ इंडिया की उस खबर का लिंक भी शेयर किया जिसमें इस लेख को फर्जी बताया गया है। ‘टाइम्स फैक्ट चेक’ टीम ने अपनी पड़ताल में पाया है कि मोहनदास पाई ने जो लेख ट्वीट किया है वह फर्जी वेबसाइट का लिंक है।

ये है इस फर्जी वेबसाइट की सच्चाई

दरअसल, BBC न्यूज हब एक फेक वेबसाइट है जो फर्जी खबरों और विवादित न्यूज आर्टिकलों के जरिए हिट्स पाती है। पिछले साल नवंबर में इस वेबसाइट ने ऐसा ही फर्जी लेख छापा था, जिसमें नरेंद्र मोदी को दुनिया के सबसे भ्रष्ट प्रधानमंत्रियों में से एक बताया था। इस वेबसाइट ने ठीक यही लेख एक बार फिर इस साल प्रकाशित किया। भारत में कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों के समर्थक एक-दूसरे के बारे में गलत जानकारियां फैलाने के लिए इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख का इस्तेमाल करते रहते हैं।

 

Source: jantakareporter.com

 

45 दिन में 500 करोड़ का मिशन, चंदा जुटाकर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस

Congress will launch mission rs 500 crore on 2nd october Gandhi Jayanti lok sampark movement amid funds crisis in election year

कांग्रेस पिछले कई महीनों से कह रही है कि पार्टी के पास फंड की कमी है. लोकसभा चुनावों में 6 महीने का वक्त है. लिहाजा चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस फंड का इंतजाम करने में जुट गई है. फंड जुटाने के लिए कांग्रेस लोक संपर्क मूवमेंट शुरू करने वाली है. कांग्रेस का यह मूवमेंट महात्मा गांधी जयंती पर 2 अक्टूबर से शुरू होगा. इसमें पार्टी चंदा के जरिए फंड जुटाएगी.

कैसे जमा होगा फंड?

लोक संपर्क मूवमेंट के जरिए कांग्रेस का मकसद 45 दिनों में 500 करोड़ रुपए जुटाना है. इसमें सबसे पहले पार्टी के सांसद और विधायक अपनी एक महीने की सैलरी देंगे. इसके अलावा देशभर के 10 लाख बूथों में से हर बूथ पर 5000 रुपए जमा किए जाएंगे.

कांग्रेस की सभी शाखाएं मसलन इंडियन यूथ कांग्रेस, महिला कांग्रेस और अन्य इस मुहिम को आगे बढ़ाएंगी. यह जिम्मेदारी लेने के बाद अहमद पटेल राज्य अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ लीडर से मिल रहे हैं.

प्रिंट के मुताबिक, राहुल गांधी के सामने एक अंदरूनी रिपोर्ट पेश की गई थी. उसमें यह बताया गया था कि 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए 1000 करोड़ रुपए की जरूरत होगी. मई 2018 में पार्टी ने सोशल मीडिया पर लोगों से निवेदन किया था कि वह पार्टी को 250 रुपए से लेकर 10,000 रुपए तक दान दें. शनिवार को सचिन पायलट ने सोशल मीडिया पर राज्य इकाई के लिए एक अलग मुहिम शुरू की है.

 

Source: hindi.firstpost.com

Delhi sealing: बीजेपी एमपी मनोज तिवारी को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

Delhi Sealing Supreme Court issues contempt notice to bjp mp manoj tiwari

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली के बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी को नोटिस जारी कर दिया है. कोर्ट की तरफ बनाई गई कमिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मनोज तिवारी ने सीलिंग तोड़ी थी.

जस्टिस मदन बी लोकुर, एस अब्दुल नजीर और दीपक गुप्ता की बेंच ने बीजेपी सांसद मनोज तिवारी को 25 सितंबर कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है. पीठ ने कहा कि यह ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ है कि चुने गए प्रतिनिधि कोर्ट के फैसले की अवमानना करते हैं.

सीलिंग तोड़ने के बाद मनोज तिवारी की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं. कोर्ट के नोटिस से पहले उनके खिलाफ एफआईआर भी हो चुका है. दिल्ली पुलिस ने मनोज तिवारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 188, डीएमसी एक्‍ट 461 और 465 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

क्या है मामला?

दरअसल रविवार को मनोज तिवारी का गोकुलपुरी में एक दुकान की सीलिंग का ताला तोड़ते हुए वीडियो वायरल हुआ था. इसके बाद एमसीडी ने उनके खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी ने भी इसे लेकर नाराजगी जाहिर की थी.

मनोज तिवारी ने अपनी इस हरकत पर कहा था कि ‘अगर उस इलाके में एक हजार घर हैं तो एक घर सील्ड क्यों रहेगा. मैं ‘पिक एंड चूज’ सिस्टम के खिलाफ हूं. इसलिए मैंने सीलिंग का ताला तोड़ दिया.’

 

Source: hindi.firstpost.com

सांसद संजय सिंह का पीएम मोदी पर हमला, कहा ‘चेहरे पर जो लाली है, वो राफेल की दलाली है’

Sanjay Singh angry on Modi sarkar for Rafale

लखनऊ – आम आदमी पार्टी के तेज तर्रार प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने लखनऊ के VVIP गेस्ट हाउस में प्रेस कांफ्रेंस की. जिसमें उन्होंने भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। संजय सिंह ने बताया कि आम आदमी पार्टी की सहारनपुर से नोएडा तक की दूसरे चरण की पद यात्रा खत्म हो चुकी है। अभी तीन यात्रा और होनी है। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल के क्षेत्र में 250 किलोमीटर यात्रा होगी। संजय सिंह के मुताबिक दूसरी यात्रा का परिणाम काफी अच्छा रहा. किसान , शिक्षामित्र, आशा बहु सभी संगठनो से मिलाकर सबने अपनी समस्या सामने रखी।

Sanjay Singh angry on Modi sarkar for Rafale
Sanjay Singh angry on Modi sarkar for Rafale

संजय सिंह ने बताया कि बार के लोगो ने पश्चिमी उत्त्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की मांग की। वहीं 11 हज़ार करोड़ गन्ना किसानों का बाकी है , योगी जी उनके जले पर नमक छिड़क रहे हैं। सहारनपुर के आदमी के लिए इलाहाबाद कोर्ट की अपेक्षा लाहौर का कोर्ट नजदीक पड़ता है। मुख्यमंत्री बोल रहे है गन्ना उगाने से डायबिटीज हो रहा है। संजय सिंह ने सवाल किया कि किसान गन्ना न उगाए तो क्या भगवा वस्त्र पहन कर मंदिर चले जाएं। शर्म आती है उत्तर प्रदेश के युवाओं की योग्यता का माजक उड़ाते है।

Sanjay Singh angry on Modi sarkar for Rafale
Sanjay Singh angry on Modi sarkar for Rafale

संजय सिंह ने कहा कि नौकरी के लिए लोग आते हैं लेकिन पेपर लीक हो जाता है और उनको लाठियों से पिटवाया जाता है। यात्रा में यशवंत सिन्हा, सत्रुघ्न सिन्हा और अरविंद केजरीवाल भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में चार राज्य बनाने की मांग को लेकर आंदोलन करेगी। संजय ने कहा कि आज पेट्रोल डीजल के दाम आसमान छू रहे है। पेट्रोल डीजल दाम बढ़ रहे है इसका कारण मोदी सरकार की नीतियां है। 14 लाख करोड़ टैक्स के नाम पर मोदी सरकार ने जनता से लेने का काम किया है। 99.3 प्रतिशत पैसा फ़िर से वापस आ गया,काला धन कहा गया।

Sanjay Singh angry on Modi sarkar for Rafale
Sanjay Singh angry on Modi sarkar for Rafale

नोटबंदी और राफेल

आम आदमी पार्टी के सांसद ने कहा कि नोटबन्दी के नाम पर 150 जिंदगियां ले ली। उन्होंने कहा कि नोटबन्दी आजादी के बाद का सबसे बड़ा घोटाला था। राफेल का घोटाला रक्षा क्षेत्र का आजादी के बाद का सबसे बड़ा घोटाला हैं। उन्होंने कहा कि 36 हजार करोड़ का घोटाला है। उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि चेहरे पर जो लाली है, वो राफेल की दलाली है। अब इनका हर काम 22 में हो रहा है, 19 में विदाई हो रही नही देख रहे। विजय माल्या का जो मामला है, वो बिना सरकार की मदद के ये लोग बाहर नही जा सकते।

Sanjay Singh angry on Modi sarkar for Rafale
Sanjay Singh angry on Modi sarkar for Rafale

उन्होंने कहा कि 21 हजार की लूट करके नीरव मोदी प्रधानमंत्री के साथ फोटो खींचता है और भाग जाता है। विजय माल्या अरुण जेटली के साथ 20 मिनट की मीटिंग करता है और विदेश चला जाता है। सीबीआई को कौन संचालित करता है पूरा देश जानता है। आम आदमी पार्टी अभी तक किसी गठबंधन का हिस्सा नही है। संजय सिंह ने कहा कि अगर नफरत के सौदागर को हराने के लिए कुछ पार्टियां गठबंधन कर रही है तो वो सराहनीय है। उन्होंने कहा कि हम देश में लगभग 100 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में 4 राज्य बनाने की मांग करेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध प्रदेश, पूर्वांचल उत्तर प्रदेश, बुन्देलखण्ड प्रदेश की मांग करेंगे।

Sanjay Singh angry on Modi sarkar for Rafale
Sanjay Singh angry on Modi sarkar for Rafale

उन्होंने कहा कि सबसे ज़्यादा पेट्रोल और डीज़ल के दाम रुला रहा है , और इसकी हकीकत जानना सबके लिए ज़रूरी है। बढ़े दामो के लिए नरेन्द्र मोदी जी की नीति ज़िम्मेदार है। नोट बंदी में रिश्वतखोरी को और आसान बना दिया। नोट बंदी देश की आज़ादी के बाद से सबसे गलत फैसला था।

सोशलः फर्जी डिग्री बनाने वाले को अगर चार पैसे मिल जाते हैं तो वो ‘रोजगार’ नहीं है क्या ?

Social Media reactions on ABVP Ankit Basoya Fake Degree

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के बाद अब ABVP के नेता पर भी फर्जी डिग्री रखने का आरोप लग रहा है।

दरअसल NSUI ने दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष अंकित बसोया की मार्कशीट और प्रमाण पत्र फर्जी बताया है।

NSUI के छात्रों का आरोप है कि अंकित बासोया की थ‌िरुवल्लुवर यूनिवर्सिटी की मार्कशीट और प्रमाण पत्र फर्जी है। अब सवाल उठता है कि NSUI को कैसे पता चला कि अंकित बासोया की मार्कशीट और प्रमाण पत्र फर्जी है?

इसके जवाब में NSUI का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव के दौरान ही उनकी तमिलनाडु की शाखा ने थ‌िरुवल्लुवर यूनिवर्सिटी में जाकर अंकित बासोया की मार्कशीट और डिग्री के बारे में जानकारी मांगी। लेकिन विश्वविद्यालय ने जो जवाब दिया वो आश्चर्यजनक है।

NSUI के मुताबिक थ‌िरुवल्लुवर विश्वविद्यालय का कहना है कि अंकित बासोया की मार्कशीट और डिग्री फर्जी है। NSUI का दावा है कि अंकित ने गलत मार्कशीट देकर डीयू में एडमिशन ले लिया था। इससे जुड़ा एक कथित दस्तावेज भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

NSUI के आरोप के बाद अंकित बासोया अपने वरिष्ठ नेताओं स्मृति ईरानी और पीएम नरेंद्र मोदी के समानांतर आ चुके हैं। स्मृति ईरानी और पीएम नरेंद्र मोदी पर फर्जी डिग्री के आरोप लगते रहते हैं।

सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि राष्ट्रीय संस्कृति का विकास इसे कहते हैं! केवल प्रधानमंत्री की डिग्री फ़र्ज़ी नहीं मानी गयी है, अब एबीवीपी से दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष की डिग्री भी फ़र्ज़ी बतायी जा रही है!

Social Media reactions on ABVP Ankit Basoya Fake Degree
Social Media reactions on ABVP Ankit Basoya Fake Degree

वहीं कुछ लोग अंकित बासोया की कथित फर्जी डिग्री को पीएम के पकौड़ा रोजगार वाले बयान से भी जोड़कर लतीफे लिख रहे हैं। ट्विटर आईडी @humanbeing1857 से लिखा है कि ‘फर्जी डिग्री बनाने वाले को अगर चार पैसे मिल जाते हैं तो वो रोजगार नहीं है क्या??’

बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव का परिणाम तमाम विवादों के बाद 13 सितंबर को घोषित हुआ था। अध्यक्ष सहित चार में से कुल तीन सीटों पर RSS की छात्र इकाई ABVP ने जीत हासिल की।

अध्यक्ष पद पर अंकित बसोया, उपाध्यक्ष पद पर शक्ति सिंह और संयुक्त सचिव के पद पर ज्योति चौधरी। वहीं NSUI को बस सचिव पद जीत मिली। अमित शाह ने इस जीत को ऐतिहासिक और राष्ट्रीय विचारधारा की जीत बतायी थी।

Source: boltaup.com

यशवंत सिन्हा का आरोप- PM मोदी ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर खुद ही ‘राफेल डील’ को तय किया

Yashwant Sinha attacks PM Modi on Rafale Deal

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने प्रधानमंत्री मोदी पर बड़ा आरोप लगाया है। कथित राफेल घोटाले को लेकर यशवंत सिन्हा ने कहा है कि पीएम मोदी ने विशेष कंपनी को फायदा पहुँचाने के लिए अपने सभी अधिकारों से आगे जाते हुए इस समझौते को खुद तय किया है।

बोलता हिंदुस्तान से राफेल डील पर बात करते हुए पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि जब हम लोग इस मामले की तय में गए तो बहुत सारे चौकाने वाले तथ्य सामने आए। और तब ही हमने तय किया कि हम इस मामले को देश की जनता के सामने रखेंगे।

उन्होंने कहा कि देश में बोफोर्स घोटाले के बाद रक्षा सौदों में कड़े नियमों का पालन किया जाता रहा है लेकिन मोदी सरकार ने राफेल सौदें में सभी नियमों की धड़ल्ले से उपेक्षा की है।

उन्होंने सरकार पर देश की रक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस सौदे में पहले फ़्रांस की ‘डासौल्ट’ कम्पनी के साथ मिलकर भारत की सरकारी कंपनी एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) विमान बनाने वाली थी।

लेकिन इस 50 वर्षीय अनुभव वाली कंपनी को हटाकर अनिल अंबानी की 14 दिन पुरानी कंपनी को इसकी जगह दे दी गई।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि पीएम मोदी ने फ़्रांस जाकर अपने स्तर पर राफेल विमान खरीदने के लिए नया सौदा तय किया।

इसके लिए उन्होंने रक्षा विभाग और रक्षा समितियों की इजाज़त नहीं ली जो कि किसी भी रक्षा सौदे को तय करने के लिए अनिवार्य है। उनको इस तरह से रक्षा सौदा तय करने का अधिकार नहीं है लेकिन उन्होंने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाते हुए इसको तय किया।

क्या है विवाद
राफेल एक लड़ाकू विमान है। इस विमान को भारत फ्रांस से खरीद रहा है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने विमान महंगी कीमत पर खरीदा है जबकि सरकार का कहना है कि यही सही कीमत है। ये भी आरोप लगाया जा रहा है कि इस डील में सरकार ने उद्योगपति अनिल अंबानी को फायदा पहुँचाया है।

बता दें, कि इस डील की शुरुआत यूपीए शासनकाल में हुई थी। कांग्रेस का कहना है कि यूपीए सरकार में 12 दिसंबर, 2012 को 126 राफेल विमानों को 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर (तब के 54 हज़ार करोड़ रुपये) में खरीदने का फैसला लिया गया था। इस डील में एक विमान की कीमत 526 करोड़ थी।

इनमें से 18 विमान तैयार स्थिति में मिलने थे और 108 को भारत की सरकारी कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), फ्रांस की कंपनी ‘डासौल्ट’ के साथ मिलकर बनाती। 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी फ़्रांस यात्रा के दौरान इस डील को रद्द कर इसी जहाज़ को खरीदने के लिए में नई डील की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई डील में एक विमान की कीमत लगभग 1670 करोड़ रुपये होगी और केवल 36 विमान ही खरीदें जाएंगें। नई डील में अब जहाज़ एचएएल की जगह उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी बनाएगी।

जबकि अनिल अम्बानी की कंपनी को विमान बनाने का कोई अनुभव नहीं है क्योंकि ये कंपनी राफेल समझौते के मात्र 14 दिन पहले बनी है। साथ ही टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर भी नहीं होगा जबकि पिछली डील में टेक्नोलॉजी भी ट्रान्सफर की जा रही थी।

 

Source: boltaup.com

देश कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस सरकार ने दी राज्य के लोगों को राहत, पेट्रोल-डीजल के दाम में की कटौती

in a big relief to people of Karnataka Congress JDS government of state reduces petrol and diesel price

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश राव ने पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते दामों को लेकर पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने का फैसला किया है। ये उनकी सरकार की तरफ से पीएम नरेंद्र मोदी को जन्मदिन का तोहफा है।
देश भर में पेट्रोल-डीजल के दामों में लगी आग की खबरों के बीच कर्नाटक के लोगों को राहत देने वाली एक खबर आई है। प्रदेश की कांग्रेस-जेडीएस सरकार ने राज्य में पेट्रोल-डीजल के दाम में 2-2 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने का ऐलान किया है। सोमवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने राज्य की जनता को राहत देने का ऐलान करते हुए कहा कि उनकी सरकार पेट्रोल और डीजल पर दो रुपये कम करने जा रही है।

वहीं, राज्य सरकार में शामिल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश राव ने पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते दामों को लेकर पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने का फैसला किया है। ये उनकी सरकार की तरफ से पीएम नरेंद्र मोदी को जन्मदिन का तोहफा है। उन्होंने कहा, “हम उन्हें यह बताना चाहते हैं कि अगर राज्य सरकार पेट्रोल-डीजल पर राहत दे सकती है तो केंद्र सरकार भी तो दे सकती है।पेट्रोल-डीजल के दामों में लगभग रोज हो रही बढ़ोतरी के बीच ये खबर लोगों को राहत देने वाली है। बता दें कि सोमवार को भी तेल के दामों में बढ़ोतरी जारी रही। सोमवार को दिल्ली में पेट्रोल 15 पैसे बढ़कर 82.06 और डीजल 6 पैसे बढ़कर 73.78 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। वहीं मुंबई में पेट्रोल 89.44 और डीजल 78.33 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।

हालांकि, इससे पहले भी कई राज्यों ने जनता को राहत देने के लिए अपने यहां पेट्रोल-डीजल के दामों में कटौती का ऐलान किया है। इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रदेश में पेट्रोल-डीज़ल के दाम में एक रुपए की कटौती का ऐलान कर चुकी हैं। जबकि आंध्र प्रदेश की सरकार ने 2 रुपये प्रति लीटर की राहत देने का ऐलान किया है। वहीं, राज्य में आगामी चुनावों को देखते हुए राजस्थान में वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने भी प्रदेश में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट में चार फीसदी की कमी करने का ऐलान किया है। जिससे वहां के लोगों को करीब ढाई रुपए प्रति लीटर की राहत मिलेगी।

बिहार में बीजेपी-जेडीयू सीट शेयरिंग पर सहमति! उपेक्षा से दूसरे सहयोगी दलों के तल्ख तेवर

Seat sharing between BJP and JDU in Bihar other parties in NDA getting angry

पटना में जेडीयू की राज्य कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन के मुद्दे पर सहमति होने का ऐलान कर दिया. नीतीश कुमार ने कहा, ‘सारी बातचीत हो चुकी है जो कि बहुत ही कॉन्फिडेंशियल है. बात इतनी कॉन्फिडेंशियल है कि मेरे अगल-बगल रहने वालों को भी इसकी भनक नहीं है. बीजेपी ने उन्हें कितनी सीटें दी है इसका राज वह अभी नहीं खोलेंगे.’ नीतीश ने कहा ‘बीजेपी ने उन्हें ऐसा करने से मना किया है.’

जेडीयू-बीजेपी में बनी बात !

बिहार की कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार के ऐलान के बाद अब जेडीयू-बीजेपी के बीच गठबंधन को लेकर चल रही किसी तरह की खींचतान के कयासों पर विराम लग गया है. जेडीयू सूत्रों के मुताबिक, ‘जेडीयू के खाते में 15 सीटें मिल सकती हैं. हालांकि, एक और सीट पर अभी बातचीत चल रही है. यानी समझौते के मुताबिक, जेडीयू 15 से 16 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. हालांकि अभी यह खुलासा नहीं हो पाया है कि जेडीयू को मिली सीटों में झारखंड और यूपी में भी लोकसभा की एक-दो सीट होगी या नहीं.

जेडीयू सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी प्रवक्ताओं को भी बीजेपी के साथ सीट शेयरिंग पर चुप रहने की नसीहत दी है.

Seat sharing between BJP and JDU in Bihar other parties in NDA getting angry
Seat sharing between BJP and JDU in Bihar other parties in NDA getting angry

पूरे मामले को बेहद कॉन्फिडेंशियल बताना और दूसरी तरफ सीट शेयरिंग पर कंफिडेंस दिखाना साफ संकेत दे रहा है कि नीतीश कुमार की बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात के बाद जो माहौल बना था वो सही दिशा में जा रहा है.

जेडीयू के प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार फर्स्टपोस्ट से बातचीत के दौरान कहते हैं ‘सीट शेयरिंग के मुद्दे पर जिन लोगों ने विवाद पैदा करने और भ्रम फैलाने की कोशिश की थी उन्हें अब औंधे मुंह गिरना पड़ा है. जेडीयू की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में स्पष्ट हो गया है कि अपने कार्यक्रम की बदौलत और अपने काम की बदौलत जेडीयू हर चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए तैयार है.’

नीतीश के ऐलान से नाराज दूसरे सहयोगी

लेकिन, जेडीयू-बीजेपी के साथ सीट शेयरिंग का मुद्दा फाइनल होने की बात कहे जाने पर एनडीए के दूसरे सहयोगी अनजान हैं. उन्हें लगता है कि बड़ी पार्टी होने के नाम पर जेडीयू और बीजेपी की तरफ से उनकी उपेक्षा की जा रही है. बिहार में एनडीए की सहयोगी आरएलएसपी ने नीतीश कुमार के राज्य कार्यकारिणी में गठबंधऩ पर दिए बयान को यूनिलेटरल (एकतरफा) फैसला बताया है.

आरएलएसपी के इंटेलेक्चुएल सेल के प्रमुख सुबोध कुमार का कहना है ‘यह एरोगेंस ऑफ पावर है.’ सुबोध कुमार ने फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में नीतीश कुमार के बयान को ‘व्याकुलता की निशानी’ बताया है. उनका मानना है ‘इस तरह से एकतरफा ऐलान नहीं होना चाहिए था, बल्कि, कोऑर्डिनेशन के जरिए बात होनी चाहिए थी.’ उन्होंने मांग की है ‘जल्द से जल्द एनडीए के सभी घटक दलों के साथ बैठक कर सीट शेयरिंग पर अंतिम फैसला कर लेना चाहिए.’

उधर आरएलएसपी से अलग राह पर चल रहे जहानाबाद से सांसद अरुण कुमार भी इस फैसले को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सुशील मोदी दोनों पर प्रहार कर रहे हैं. अरुण कुमार ने फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में बताया, ‘बिहार में नीतीश कुमार और सुशील मोदी का मिलन ही राज्य के हित में नहीं है. यहां शिक्षा का कबाड़ा बना दिया गया है, कानून-व्यवस्था ध्वस्त है, शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि बिहार में फर्जी शिक्षक हैं.’ अरुण कुमार बिहार में मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री की जोड़ी के खिलाफ ही लड़ाई की बात कर रहे हैं.

हालांकि एलजेपी की तरफ से कोई तल्ख प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन, पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बिहार में जेडीयू-बीजेपी के साथ मिलकर ही एलजेपी चुनाव लड़ेगी.

बिहार में एनडीए के सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी की तरफ से जिस तरह संकेत दिया जा रहा है उससे साफ है कि कुशवाहा किसी भी कीमत पर कम सीटों पर समझौते के मूड में नहीं हैं. उनकी पार्टी के नेता लोकसभा में जेडीयू से बड़ी पार्टी होने की बात कर रहे हैं. लेकिन, नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी के बाद पूरा समीकरण बदल गया है. अब बातचीत की टेबल पर अनदेखी से एनडीए के दूसरे दल नाराज हो रहे हैं.

दशहरा बाद नीतीश कैबिनेट का विस्तार

Seat sharing between BJP and JDU in Bihar other parties in NDA getting angry
Seat sharing between BJP and JDU in Bihar other parties in NDA getting angry

लेकिन, नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ बात बनने के बाद अब लोकसभा चुनाव से पहले संगठन और सरकार दोनों को चुस्त करने का फैसला किया है. उम्मीद की जा रही है कि दशहरा के बाद नीतीश कैबिनेट का विस्तार किया जाएगा, जिसमें वक्त के हिसाब से कुछ नए चेहरों को जगह दी जाएगी, जबकि कुछ पुरानों की छुट्टी भी की जाएगी.

जेडीयू सूत्रों के मुताबिक, ‘कैबिनेट विस्तार से पहले ब्लॉक से लेकर जिला और राज्य स्तर पर 20 सूत्री कमिटी का गठन किया जाएगा. 20 सूत्रीय इस कमेटी के गठन के बाद आयोग और बोर्ड-निगम में खाली पड़े पदों को भरा जाएगा. कहा जा रहा है कि बोर्ड और निगमों में जेडीयू के नेताओं को पद पर बैठाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कैबिनेट का विस्तार करेंगे.

नीतीश कुमार बीजेपी के साथ ‘कॉन्फिडेंशियल’ बातचीत के बाद भले ही ज्यादा आश्वस्त लग रहे हों, लेकिन, दूसरे सहयोगियों के रुख को देखकर लोकसभा चुनाव से पहले बिहार में एनडीए में उलटफेर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

 

Source: hindi.firstpost.com

कांग्रेस ने गोवा में सरकार बनाने का दावा किया पेश, चिट्ठी लेकर राजभवन पहुंचे विधायक

Congress in talks with others for stable alternative in goa says aicc incharge

गोवा में कांग्रेस ने सरकार बनाने का दावा पेश किया है. एबीपी न्यूज के अनुसार कांग्रेस के 14 विधायक सोमवार को राज्यपाल मृदुला सिन्हा से मिलने राजभवन पहुंचे. यहां राज्यपाल को न पाकर कांग्रेस का प्रतिनिधित्वमंडल सरकार बनाने का दावा पेश करने वाली चिट्ठी छोड़कर आया.

बता दें कि गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर पिछले कुछ महीने से गंभीर रूप से बीमार रहे हैं. उनकी बीमारी को देखते हुए किसी नए को यहां सरकार की कमान देने की अटकलें लगाई जा रही हैं. हालांकि बीजेपी ने इससे इनकार किया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर रविवार को पर्रिकर को विशेष विमान से दिल्ली लाया गया जहां चेकअप के लिए उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया.

इस वजह से बीते 7 महीने से 3 बार इलाज के सिलसिले में अमेरिका होकर लौटे हैं.

Source: hindi.firstpost.com

बीजेपी सांसद के पैर धोकर कार्यकर्ता ने पीया पानी, विवाद देख ग्रन्थों से जायज ठहराया

BJP Worker wash the feet of BJP MP and Drunk

गोड्डा : कलाली से कन्हवारा गांव में कझिया नदी पर 21 करोड़ की लागत से बनने वाले हाइलेवल पुल के शिलान्यास के मौके पर भाजपा कार्यकर्ता द्वारा बीजेपी सांसद डॉ निशिकांत दुबे के पैर धोकर उसी पानी को पीने का मामला सामने आया है।

डॉ. निशिकांत दुबे ने अपनी फेसबुक वाल पर इसकी तस्वीर साझा करते हुए कार्यकर्ता की काफी प्रशंसा की, हालांकि आलोचना के शिकार होते देख काफी देर के बाद उन्होंने उस पोस्ट को एडिट कर पांव पखार कर पीने की बात को हटा दिया।

इस तस्वीर को अपने फेसबुक पर डालते हुए सांसद ने लिखा कि आज मैं खुद को बहुत छोटा कार्यकर्ता समझ रहा हूं। उन्होंने बताया कि भाजपा के महान कार्यकर्ता पवन साह ने पुल बनाने की खुशी में हजारों लोगों के सामने उनके पैर धोए। उन्होंने आगे ऐसी इच्छा भी जताई कि उन्हें भी यह मौका मिले और वह भी कार्यकर्ता के पैर धोकर ‘चरणामृत’ पिएं।

विवाद बढ़ता देख उन्होने अपनी सफाई में लिखा कि “अपनों में श्रेष्ठता बांटी नही जाती और कार्यकर्ता यदि खुशी का इजहार पैर धोकर कर रहा है तो क्या गजब हुआ?” उन्होंने संस्कृति और परंपरा के हवाले से कहा कि पैर धोना तो झारखंड में अतिथि के लिए होता ही है। सारे कार्यक्रम में आदिवासी महिलाएँ क्या यह नहीं करती हैं?

उन्होंने अपनी आलोचना को गलत ठहराते हुए लिखा कि इसे राजनीतिक रंग क्यों दिया जा रहा है? अतिथि के पैर धोना गलत है तो अपने पुरखों से पूछिए कि महाभारत में कृष्ण जी ने क्या पैर नहीं धोए थे? लानत है घटिया मानसिकता पर।

बिहार: माझी ने मचाई राजनीतिक हलचल, इतने सीटों की मांग कर महागठबंधन की चिंता बढ़ाई!

Jitan Ram Manjhi has increased the difficulties of the alliance

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी है। मांझी ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद आगामी लोकसभा चुनाव में सभी 40 सीटों पर तैयारी होने का दावा किया है।

साथ ही मांझी ने लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के लिए 20 और विधानसभा में 120 सीटें का दावा किया है। ज्ञात हो कि मांझी महागठबंधन का हिस्सा हैं।

इसके अलावा सवर्ण आरक्षण के मुद्दे पर जी मीडिया से बात करते हुए मांझी ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से अलग रुख अख्तियार करते हुए गरीब सवर्णों के लिए आरक्षण की मांग की है।

मांझी के दावे पर आरजेडी ने भी प्रतिक्रिया दी है। आरजेडी विधायक शिवचन्द्र राम ने मांझी को महागठबंधन का बड़ा नेता बताते हुए कहा कि हर पार्टी को यह आकांक्षा रहती है कि ज्यादा से ज्यादा सीटों पर लड़े।

महागठबंधन में शामिल सभी दलों के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक साथ बैठेंगे और सीटों का बंटवारा होगा। उन्होंने कहा कि महागठबंधन का एकमात्र लक्ष्य देश में नरेंद्र मोदी और बिहार में नीतीश कुमार को हराना है।

मांझी के दावे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भी तंज कसा है। बिहार सरकार के मंत्री विनोद नारायण झा ने 20 सीटों के दावे पर कहा कि मांझी के इस बयान का कोई मतलब नहीं है।

यह बयान हवा-हवाई है। जीतन राम मांझी डिंग हाक रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह महागठबंधन के लोगों को ब्लैकमेल कर रहे हैं। उन्हें दो से अधिक सीट नहीं मिलने वाली है। मांझी को स्वार्थी बताते हुए उन्होंने कहा कि उनका अपना और बेटे का मामला सेटल हो गया है, अब दामाद के लिए परेशान हैं।

जेडीयू प्रवक्ता सुहेली मेहता ने कहा कि जीता राम मांझी ने आरजेडी और कांग्रेस को हैसियत बता दी है। जो बिना काम किए दलितों की हितैषी बन जा रहे हैं, उनको अब मांझी के लिए दरियादिली दिखानी चाहिए।

 

Source: hindi.siasat.com

PM मोदी के चहेते CBI अधिकारी एके शर्मा ने ‘विजय माल्या’ को देश से भगायाः राहुल गांधी

Rahul Gandhi alleged CBI joint director ak Sharma weakened Mallya lookout notice

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने विजय माल्या के मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर एक बार फिर बड़ा हमला बोला है।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि पीएम मोदी के एक पसंदीदा अधिकारी ने माल्या के खिलाफ़ लुकआउट नोटिस को कमज़ोर किया था।

राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, “सीबीआइ के संयुक्त निदेशक एके शर्मा ने माल्या के लुकआउट नोटिस को कमजोर किया, जिससे माल्या को भागने में मदद मिली।

एके शर्मा जो कि गुजरात कैडर के अधिकारी हैं और सीबीआई में पीएम मोदी के पसंदीदा हैं”। कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के भागने में भी इसी अधिकारी का हाथ है।

इससे पहले शुक्रवार को राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि सीबीआई ने ‘हिरासत’ नोटिस को ‘सूचना’ में बदलकर माल्या को देश से निकल भागने में मदद की। सीबीआई सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रिपोर्ट करती है। ऐसे में यह समझ से परे है कि सीबीआई ने मोदी की अनुमति के बिना इतना बड़ा कदम उठा लिया।

बता दें कि माल्या ने बुधवार को दावा किया था कि उसने ब्रिटेन आने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी। जिसके बाद से कांग्रेस लगातार मोदी सरकार पर हमलावर है।

राहुल ने गुरुवार को कहा था कि जेटली ने माल्या को देश छोड़ने में मदद की। वह लगातार झूठ बोल रहे हैं। उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए और मामले की जांच होनी चाहिए।

सिर्फ विपक्ष ही नहीं बल्कि बीजेपी के अपने नेता सुब्रमण्यम स्वामी का भी यह मानना है कि विजय माल्या के भागने की ख़बर सरकार को थी। उन्होंने कहा था कि सरकार के इशारे पर विजय माल्या के लिए लुकआउट नोटिस को बदला गया।

 

Source: boltaup.com

मोदीराज में सरकारी बैंक हुए कंगाल! NPA से दो सालों में बैंकों का लाभांश 65.6 अरब रुपए घटा

Government banks Danger in modi govt

फंसे हुए कर्ज (एन.पी.ए) भारतीय बैंकों की सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। इन कर्जों के कारण बैंकों की कमाई घट रही है, घाटा बढ़ रहा है और अब उनके लाभांश पर भी एन.पी.ए का असर दिखाई दे रहा है। लाभांश यानि सालाना फायदे में से बटने वाला हिस्सा।

सरकारी बैंकों में ज़्यादातर शेयर की मालिक सरकार ही होती है इस कारण हर साल बैंकों की कमाई में से उसे हिस्सा मिलता है। लेकिन एन.पी.ए की बढ़ती समस्या के कारण इसमें पिछले कुछ सालों में भारी गिरावट आई है।

2016-17 में पांच बैंकों ने लाभांश की घोषणा की जबकि 2014-15 में 22 सरकारी बैंकों में से 20 ने लाभांश चुकाया था। सरकारी बैंकों ने वित्त वर्ष 2015 में जहां 70 अरब रुपए लाभांश दिया था, जो पिछले वित्त वर्ष में 4.4 अरब रुपए रह गया।

यानि केवल दो ही सालों में 65.6 अरब रुपए लाभांश घटा है और 20 में से केवल पांच बैंक लाभांश देने लायक बचे हैं बाकि सब एन.पी.ए से बर्बाद होने की स्तिथि में पहुँच चुके हैं।

एन.पी.ए बैंकों का वो लोन होता है जिसके वापस आने की उम्मीद नहीं होती, इस कर्ज़ में 73% से ज़्यादा हिस्सा उद्योगपतियों का है। अक्सर उद्योगपति बैंक से कर्ज़ लेकर खुद को दिवालिया दिखा देते हैं और उनका लोन एन.पी.ए में बदल जाता है। यही उस लोन के साथ होता है जिसे बिना चुकाए नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग देश छोड़कर भाग जाते हैं।

मोदी सरकार के कार्यकाल में भारतीय बैंकों की स्तिथि बहुत ज़्यादा बिगड़ चुकी है। सरकार पर उद्योगपतियों से पैसा ना वसूलने और उन्हें देश से भगाने का आरोप लग रहा है। सरकारी बैंकों के एन.पी.ए में भी पिछले कुछ सालों में इसी तरह का बढ़ोतरी देखी गई है।

रिज़र्व बैंक ने बताया है कि मार्च 2018 में एनपीए 10.40 लाख करोड़ रुपए पहुँच चुका है। जबकि 2013-14 में ये 2 लाख 40 हज़ार करोड़ रुपए था। देश में लगभग 90% एन.पी.ए सरकारी बैंकों का ही है।

गौरतलब है कि लगातार सामने आ रहे बैंक घोटालों के चलते पिछले कुछ महीनों से बैंकों का घाटा बढ़ता जा रहा है। देश के 21 सरकारी बैंकों में से 15 को 2017-18 की चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च) में 47000 करोड़ रुपए से ज्यादा का घाटा हुआ है।

 

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मनोज तिवारी ने तोड़ा सील बंद मकान का ताला, वीडियो वायरल होते ही बढ़ा विवाद

Manoj Tiwari break sealing in Gokulpuri

दिल्ली के भाजपा प्रमुख मनोज तिवारी द्वारा एक सीलबंद घर का ताला तोड़ने का वीडियो सामने आया है। यह घर मनोज तिवारी के संसदीय क्षेत्र पूर्वी दिल्ली के गोकुलपुरी का है। आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस ने इस वीडियो को दिल्ली के भाजपा शासित नगर निगमों से जोड़ दिया है।

आप के संयोजक और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा की नोटबंदी और जीएसटी के बाद अब सीलिंग ने दिल्ली को बर्बाद कर दिया है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘वह (भाजपा) सुबह में सीलिंग करती है और शाम में ताला तोड़ती है। क्या वह समझती है कि लोग बेवकूफ हैं।’

इसके अलावा ‘न्याय युद्ध’ अभियान चला रहे पूर्व कांग्रेस विधायक मुकेश शर्मा ने कहा, “रविवार को गोकलपुर इलाके में मनोज तिवारी द्वारा सील किए गए घर के ताले को तोड़ना एक ‘ड्रामा’ है। यदि बीजेपी इस मुद्दे पर गंभीर है, तो तिवारी समेत दिल्ली के सभी सांसदों को अपनी सरकार से सीलिंग के खिलाफ एक अध्यादेश लाने की मांग करनी चाहिए। आने वाले दिनों में कांग्रेस सीलिंग के खिलाफ अपने अभियान को तेज करेगी।”

वहीं तिवारी ने कहा कि वह गोकुलपुर गए थे जहां लोगों ने उन्हें बताया कि 1000 के बीच केवल एक घर को निगम ने सील किया है। उन्होंने कहा, ‘मैंने निगम की चुनिंदा नीति के विरुद्ध सील को तोड़ दिया। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि सभी मकान अवैध रुप से बनाये गए हैं लेकिन खास मकान को ही निगम ने कार्रवाई के लिए चुना।’

उन्होंने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय और उसकी निगरानी समिति से यह सुनिश्चित करने की अपील करना चाहते हैं कि सीलिंग अभियान के नाम पर चुनिंदा कार्रवाई न की जाए।

रुपया गिरने से 2018 में पहली बार 400 अरब डॉलर से नीचे आया ‘विदेशी मुद्रा भंडार’, 5800 करोड़ का नुकसान

Foreign exchange reserves fall first time in 2018

2014 में भाजपा की तरफ से दावा किया गया था कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद डॉलर के मुकाबले रुपया नहीं गिरेगा और ना ही पेट्रोल-डीजल की कीमतें असमान पर पहुंचेंगी।

लेकिन 2018 में देश की अर्थव्यवस्था इन दोनों मुश्किलों का सामना कर रही है और इसके कई अन्य परिणाम भी भुगतने पड़ रहे हैं।

देश का ‘विदेशी मुद्रा भंडार’ सात सितंबर को समाप्त सप्ताह में 81.95 करोड़ डॉलर कम होकर 399.282 अरब डॉलर पर आ गया। यह पिछले एक साल में यानि 2018 में पहला मौका है जब विदेशी मुद्रा भंडार 400 अरब डॉलर से नीचे आया है।

रिजर्व बैंक के शुक्रवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार यह लगातार दूसरा सप्ताह है जब विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट आयी है। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते विदेशी मुद्रा भण्डार में 1.191 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी।

ये नुकसान केवल देश में ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी देश को झेलना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से निकासी का विशेष अधिकार 15 लाख डॉलर कम होकर 1.476 अरब डॉलर रह गया है। आईएमएफ में देश का भंडार भी 25 लाख डॉलर घटकर 2.474 अरब डॉलर पर आ गया।

 

Source: boltaup.com

खनन क्षेत्र में 15 गुना निवेश गिरा, ‘नोटबंदी’ के बाद अब ‘निवेश में मंदी’ ले डूबेगी लाखों नौकरियां

Huge fall in fdi for mining industry

देश की अर्थव्यवस्था के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। देश में एक तरफ जहाँ स्वदेशी कारोबार का ग्राफ गिर रहा है और लोग बेरोजगारी से परेशान हैं वहीं अब विदेशी निवेश यानि एफडीआई भी घटती जा रही है।

मोदी सरकार का दावा है कि उसके आने के बाद देश को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान मिली है। पहले के मुकाबले सभी क्षेत्र के ज़्यादा लोगों ने भारत की तरफ आकर्षित होना शुरू किया है। लेकिन आंकड़े कुछ और कहानी बता रहे हैं।

बिज़नस स्टैण्डर्ड की एक खबर के मुताबिक, खनन क्षेत्र क्षेत्र में एफडीआई लगातार गिरती जा रही है। जहाँ वर्ष 2014-15 में खनन क्षेत्र में 659 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानि कि लगभग 3,737 करोड़ रुपिए का विदेशी निवेश हुआ था वहीं, ये इस वर्ष 2017-18 में गिरकर 36 मिलियन डॉलर यानि कि लगभग 250 करोड़ रुपए रह गया है।

मतलब 3,383 करोड़ रुपए का नुकसान!

खनन क्षेत्र में इन तीन सालों में ये बड़ी गिरावट आई है। ये तब है जब मोदी सरकार देश में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए कई श्रम विरोधी कानूनों को बढ़ावा दे रही है।

गौरतलब है कि खनन क्षेत्र का जीडीपी में 7-8% का योगदान देता है और करोड़ों की संख्या में लोग इसमें कार्यरत हैं। ऐसे में अगर निवेश गिरेगा तो नौकरियों पर भी मुसीबत आ सकती है।

दरअसल, नोटबंदी के बाद से देश में जिस तरह के आर्थिक हालत बदले हैं। उसके बाद से ज़्यादातर क्षेत्रों के की स्तिथि ख़राब नज़र आ रही है। जीएसटी ने इन हालातों को और ज़्यादा ख़राब करने का काम किया है। और ऐसे में विदेशी निवेशक भी पैसा निवेश करने से बचते नज़र आ रहे हैं।

 

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पूर्व RBI गवर्नर राजन का खुलासा: ‘पीएमओ को भेजी थी बड़े घोटालेबाजों की लिस्ट’, लेकिन…

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने संसदीय समिति को सौंपे एक रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने देश में हाई प्रोफाइल घोटालेबाजों की एक लिस्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी थी लेकिन उस पर क्या कार्रवाई हुई, उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।

Ex RBI governor ne PM ki bheji thi ye badi list
Ex RBI governor ne PM ki bheji thi ye badi list

अपनी रिपोर्ट में राजन ने कहा है कि बैंक अधिकारियों के अति उत्साह, सरकार की निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुस्ती तथा आर्थिक वृद्धि दर में नरमी डूबे कर्ज के बढ़ने की प्रमुख वजह है। इसके अलावा संसदीय समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी को दिये नोट में उन्होंने कहा, ‘‘कोयला खदानों का संदिग्ध आवंटन के साथ जांच की आशंका जैसे राजकाज से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के कारण यूपीए और एनडीए दोनों सरकारों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में देरी हुई।’‘

राजन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में धोखाधड़ी के मामले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। राजन ने संसदीय समिति से कहा, “जब मैं गवर्नर था तब आरबीआई ने फ्रॉड मॉनिटरिंग का एक विभाग बनाया था ताकि छानबीन करने वाली एजेंसी को फ्रॉड केस की जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।

Ex RBI governor ne PM ki bheji thi ye badi list
Ex RBI governor ne PM ki bheji thi ye badi list

मैंने तब पीएमओ को हाई प्रोफाइल फ्रॉड केस की लिस्ट भेजी थी और उनमें से किसी एक या दो घोटालेबाज की गिरफ्तारी के लिए कॉर्डिनेशन की गुजारिश की थी। मुझे नहीं मालूम कि उस बारे में क्या प्रगति हुई है। यह ऐसा मामला है जिस पर तत्परता से कार्रवाई होनी चाहिए थी।”

राजन ने कहा कि दुर्भाग्यवश किसी भी एक बड़े घोटालेबाज की गिरफ्तारी नहीं हो सकी, इस वजह से ऐसे मामलों में कमी नहीं आ सकी। बता दें कि राजन सितंबर 2013 से सितंबर 2016 तक आरबीआई के गवर्नर थे। राजन की रिपोर्ट पर कांग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है और पूछा है कि प्रधानमंत्री बताएं कि क्यों पीएमओ ने उन चिन्हित डिफाल्टरों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की?

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के वक्त 2014 में एनपीए 2.83 लाख करोड़ का था जो मोदी सरकार में बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये हो गया है। हालांकि, राजन ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि बड़ी संख्या में बैंकों का डूबा कर्ज या एनपीए 2006 से 2008 के दौरान बढ़ा जब देश की आर्थिक वृद्धि दर काफी तेज थी।

Ex RBI governor ne PM ki bheji thi ye badi list
Ex RBI governor ne PM ki bheji thi ye badi list

राजन ने कहा कि यही वह समय था जब बैंकों ने गलतियां कीं। उन्होंने पीछे की वृद्धि और प्रदर्शन के आधार पर भविष्य का अनुमान लगा लिया और परियोजनाओं के लिए बड़ा कर्ज दिया, जबकि उनमें प्रवर्तकों की इक्विटी कम थी। राजन ने कहा कि कई बार बैंकों ने कर्ज देने के लिए प्रवर्तक के निवेशक बैंक की रिपोर्ट के आधार पर करार किया और अपनी ओर से पूरी जांच पड़ताल नहीं की।

अखिलेश का बड़ा बयान, कहा: ‘… तो 2019 में ख़त्म हो जायेगा लोकतंत्र’

2019 ko lekar akhilesh ne kaha khatm ho jayega loktantra

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि अगर 2019 में फिर से बीजेपी जीत गई तो देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। शुक्रवार (14 सितंबर) को इटावा में एक रैली को संबोधित करते हुए अखिलेश ने कहा कि अगर बीजेपी 2019 में जीत जाती है और केंद्र की सत्ता में वापसी करती है तो इस बात की प्रबल संभावना है कि उसके बाद देश में कोई चुनाव नहीं होगा।

2019 ko lekar akhilesh ne kaha khatm ho jayega loktantra
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उन्होंने पार्टी समर्थकों से कहा कि साल 2019 में लोकतंत्र को बचाने का आखिरी मौका है। पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी सरकार देश को जातिवाद और संप्रदायवाद की आग में झोक रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार दलितों के हित के खिलाफ काम कर रही है।

इससे पहले अखिलेश ने बीजेपी सरकार को तेल की बढ़ती कीमतों, रुपये के गिरते भाव, बढ़ती महंगाई, एलपीजी सिलेंडर के बढ़ते दाम पर घेरा और लोगों से 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को सबक सिखाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की बीजेपी सरकार सभी मोर्चों पर फेल हो चुकी है।

2019 ko lekar akhilesh ne kaha khatm ho jayega loktantra
2019 ko lekar akhilesh ne kaha khatm ho jayega loktantra

2014 के चुनावों में जितने वादे किए थे उनमें कुछ बी पूरा नहीं किया। अखिलेश ने नोटबंदी और जीएसटी का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लोगों ने नोटबंदी और जीएसटी लागू किया उनलोगों ने देश की आर्थिक प्रगति रोक दी है। सपा अध्यक्ष ने कहा कि बीजेपी ने अपना कालाधन सफेद करने के लिए नोटबंदी लागू किया लेकिन अब लोकसभा चुनाव आ गया है, जनता बीजेपी को करारा जवाब देगी।

2019 ko lekar akhilesh ne kaha khatm ho jayega loktantra
2019 ko lekar akhilesh ne kaha khatm ho jayega loktantra

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बयान पर अखिलेश ने चुटकी ली और कहा कि वो कहते हैं हम पचास साल तक सत्ता से दूर नहीं जाएंगे। लगता है कि उन लोगों को उप चुनाव के नतीजे याद नहीं हैं। तीन सीटों पर उप चुनाव हुए सभी पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। अखिलेश ने सीएम योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा और कहा कि उनकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। महंत से सीएम बने योगी 2019 के बाद सीएम नहीं रहेंगे।

JNUSU चुनावः ABVP की गुंडागर्दी के बाद मतगणना स्थगित, अलका बोलीं- ये गोडसे के तरीकों से चुनाव जीतना चाहते हैं

Alka Lamba slams ABVP after jnusu vote counting suspended

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव के नतीजे घोषित होने वाले है। मगर उससे पहले आरएसएस की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों ने जमकर हंगामा काटा और तोड़फोड़ की।

बताया जा रहा है कि एबीवीपी के छात्रों ने सुबह करीब चार बजे इलेक्शन कमिश्नर पर धावा बोल दिया और बूथ कैपचरिंग की कोशिश की, जिसमें एक सुरक्षा में तैनात गार्ड को चोट भी आई हैं। इस दौरान एबीवीपी के छात्रों ने एक पत्रकार से भी बदसलूकी की।

एबीवीपी छात्रों की इस गुंडागर्दी को लेकर आम आदमी पार्टी की विधायक अलका लांबा ने बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है।

उन्होंने ट्विटर के ज़रिए कहा कि यहां भी इन संघ समर्थित ABVP का दंगाई खेल चालू है, यह लोकतांत्रिक तरीकों से नहीं बल्कि हिंसक, गोड़से के तरीकों से चुनाव जीतने में विश्वास रखते हैं।

कल डीयू था, आज जेएनयू है, कल देश का चुनाव होगा। इन भाजपाईयों की गुंडई जारी रहेगी। सत्ता के दम पर यह लोकतंत्र का दमन करेंगे।

दरअसल जेएनयू में एबीवीपी छात्रों की नाराजगी थी कि उसके प्रतिनिधि को नहीं बुलाया गया जबकि इलेक्शन कमीशन की तरफ से कहा गया कि उन्होंने बुलाया गया था लेकिन वह समय पर नहीं पहुंच सके।

कमीशन का आरोप है कि एक अध्यक्ष और जॉइंट सिकरेट्री पद के प्रत्याशी ने चुनाव समिति के साथ मारपीट की, चुनाव समिति की महिला सदस्यों के साथ मारपीट भी की गई।

इस हिंसा से जेएनयू छात्रसंघ इलेक्शन कमीशन ने काउंटिंग रोक दी है। छात्रों ने बताया कि इलेक्शन कमीशन ने एबीवीपी के लोगों को तीन बार बुलाया मगर कोई गया नहीं जिसके बाद गुस्साए एबीवीपी छात्रों ने इलेक्शन कमीशन के लोगों के साथ हाथापाई की।

इस हाथापाई के बाद कमीशन ने अनिश्चितकालीन वक़्त के लिए काउंटिंग रोक दी। उनका कहना है कि जब तक एबीवीपी के लोग अपनी हरकत जारी रखेंगें काउंटिंग नहीं शुरू की जाएगी।

वहीँ एबीवीपी का कहना है कि जेएनयूएसयू इलेक्शन में पहले राउंड काउंटिंग (साइंस स्कूल और अन्य स्पेशल सेन्टर) शुरू होने के समय एबीवीपी के काउंटिंग एजेंट को बुलाए बिना चुनाव समिति के सदस्यों ने लेफ्ट के कार्यकर्ताओं के साथ काउंटिंग शुरू कर दिया है।

छात्रों का कहना है कि चुनाव समिति के मेंबर्स और लेफ्ट दोनों मिलकर साजिश और धांधली कर रहे हैं।

बता दें कि बीते शुक्रवार जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के चार अहम पदों के लिए शुक्रवार को वोटिंग हुई थी। जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पदों के लिए हुए इस चुनाव में 68 फीसदी वोटिंग हुई थी।

जिसके नतीजे 16 सितंबर को घोषित किए जाएंगे। चुनाव में एबीवीपी, बापसा, एनएसयूआई, संयुक्त वाम मोर्चा, छात्र राजद और सवर्ण मोर्चा ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था।

 

Source: boltaup.com

PM मोदी की तरह अगर राहुल गांधी ने ख़ुद को ‘बोहरा समाज’ का हिस्सा बताया होता तो अब तक वो ‘मुल्ला’ घोषित कर दिए जाते : आचार्य

Acharya Pramod comment on PM Modi's meet with Bohra samaj

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को इंदौर में बोहरा समाज की वाअज (प्रवचन) में शिरकत करने के लिए पहुंचे। उन्होंने यहां माणिकबाग स्थित सैफी मस्जिद में ख़ुद को बोहरा समाज का हिस्सा बताते हुए बोहरा समाज की जमकर तारीफ़ की।

पीएम मोदी ने कहा कि शांति-सद्भाव, सत्याग्रह और राष्ट्रभक्ति के प्रति बोहरा समाज की अहम भूमिका रही है। इसलिए आप सबके बीच आना मुझे एक नया अनुभव देता है।

बोहरा समाज के गुरु सैयदना साहब की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि सैयदना साहब ने समाज को जीने की सीख दी।

पीएम मोदी ने कहा कि अपने देश, मातृभूमि से प्रेम की सीख सैयदना साहब देते रहे हैं। सैयदना साहब ने गांधीजी के साथ मिलकर मूल्यों की स्थापना में अहम योगदान दिया था।

पीएम मोदी की बोहरा समुदाय से इस मुलाकात पर आध्यात्मिक गुरु आचार्य प्रमोद ने टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मोदी जी ने बोहरा समुदाय के लोगों से मस्जिद में मिलकर ख़ुद को उनके समाज का हिस्सा बताया, अगर इसी तरह राहुल गांधी ने ख़ुद को बोहरा समाज का हिस्सा कहा होता तो अबतक उन्हें मुस्लिम घोषित कर दिया जाता।

उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “मस्जिद में जाकर मोदी जी का ये बयान बहुत अच्छा है, कि मैं आपके समाज का हिस्सा हूँ, लेकिन अगर यही बात राहुल गांधी ने कही होती, तो वो ‘मुल्ला’ हो जाता”।

ग़ौरतलब कि सोशल मीडिया पर आपको राहुल गांधी की कई ऐसी तस्वीरें मिलेंगी जिनमें कैप्शन के साथ उन्हें ‘मुल्ला’ लिखा जाता है।

राहुल गांधी को मुल्ला लिखे जाने की वजह सिर्फ इतनी होती है कि वो इन तस्वीरों में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से मिलते-जुलते दिखाई देते हैं।

अब सवाल यह उठता है कि जब राहुल गांधी पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से मिलने पर मुसलमान का तमगा लगाया जा सकता है तो फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैसे मुसलमानों से मिलने पर हिंदू हृदय सम्राट बन जाते हैं?

 

Source: boltaup.com

चौकीदार और दरबान में फर्क होता है मोदीजी, चौकीदार ‘माल्या’ को रोक लेता और दरबान पैसा लेकर गेट खोल देता हैः कुणाल कामरा

Comedian Kunal Kamra hoops PM Modi

भारतीय बैंकों को हज़ारों करोड़ की चपत लगाने वाले उद्योगपति विजय माल्या के वित्त मंत्री अरुण जेटली से भारत छोड़ने से पहले मुलाकात वाले बयान के बाद सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

विपक्ष के साथ-साथ सोशल मीडिया पर अब ‘चौकीदार पीएम’ पर बहस होने लगी है। जगजाहिर है कि कई मौकों पर खुद पीएम मोदी ने अपने आपको देश का चौकीदार कहा है।

इसी कड़ी में ट्विटर पर कॉमेडियन कुणाल कामरा ने लिखते हुए पीएम मोदी कि चौकीदारी पर ही सवाल उठाए हैं। कुणाल ने ‘चौकीदार’ और ‘दरबान’ में फर्क बताते हुए लिखा है की, “चौकीदार और दरबान में फर्क होता है मोदीजी।

चौकीदार माल्या को रोक लेता और दरबान गेट खोलकर सल्यूट करता, बक्शीश लेता और जाने देता।”

कुणाल ने आगे पीएम मोदी से पूछा है कि अब आप ही बताओ आप चौकीदार हो या दरबान?

माल्या ने लंदन की कोर्ट के बाहर बुधवार को खुलासा करते हुए कहा था कि भारत छोड़ने से पहले उसने मामला सुलझाने के लिए वित्त मंत्री (अरुण जेटली) से मुलाकात की थी।

यह चौकाने वाली बात है की वित्त मंत्री और सीबीआई प्रधानमंत्री को सीधे रिपोर्ट करते हैं ऐसे में विजय माल्या संसद भवन के सेंट्रल हॉल में सरकार के कद्दावर मंत्री से मिलने के बाद देश छोड़कर भाग जाता है।

लेकिन, वित्त मंत्री अरुण जेटली सीबीआई और ईडी को खबर तक नहीं करते। वरना माल्या को पकड़ने में इतनी मशक्कत नहीं करती पड़ती। ये सब घटना तब हुई जब विजय माल्या के घोटाले की बात उजागर हो चुकी थी।

वहीं विपक्षी नेता विजय माल्या के आए बयान से पहले से ही बोलते आ रहे थे कि उसे विदेश भागने में जरुर केंद्र सरकार ने मदद की है। वरना बैंकों का हजारों करोड़ रुपए लेकर विदेश भागना इतना आसान नहीं है वो भी घोटाले के उजागर होने के बाद!

 

Source: boltaup.com

DUSU चुनाव : EVM में धांधली कर ABVP को जिताया गया, बैलेट पेपर से दोबारा कराए जाएं चुनावः अजय माकन

Ajay Maken demands revoting fo DUSU with Ballot papers

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनावों में मतगणना के दौरान ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने चुनाव फिर से मतपत्र के ज़रिए कराने की अपील की है।

दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय माकन ने कहा कि हमारी मांग है कि डूसू चुनाव फिर से मतपत्र से कराएं जाएं। उन्होंने डुसू के अन्य सभी चुनावों को भी मतपत्र के ज़रिए कराए जाने की अपील करते हुए कहा कि हम यह भी चाहते हैं कि मतगणना कैमरे की निगरानी में हो।

ईवीएम में गड़बड़ी के बाद एबीवीपी की जीत पर सवाल खड़े करते हुए माकन ने कहा कि ऐसा क्यों होता है कि जब ईवीएम खराब होती है तो इसका फायदा सिर्फ बीजेपी और एबीवीपी को मिलता है, ईवीएम कभी कांग्रेस और एनएसयूआई को फ़ायदा नहीं पहुंचाती।

ग़ौरतलब है कि ईवीएम में गड़बड़ी की ख़बरों के बाद चुनाव आयोग ने सफ़ाई देते हुए कहा कि उन्होंने यूनिवर्सिटी को कोई ईवीएम नहीं दी। आयोग ने कहा कि मुमकिन है छात्र संघ चुनावों में इस्तेमाल की गई मशीनें यूनिवर्सिटी प्रशासन ने निजी तौर पर तैयार कराई हों।

चुनाव आयोग के इस बयान पर संदेह व्यक्त करते हुए माकन ने कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा है कि चुनाव आयोग ने दिल्ली विश्वविद्यालय को कोई ईवीएम नहीं दी।

यहां तो चुनाव आयोग की कोई बात नहीं थी। हम तो सिर्फ यह कह रहे हैं कि डीयू में मशीनों से छेड़छाड़ हुई है। इस पर तो डीयू को जवाब देना चाहिए, लेकिन चुनाव आयोग जवाब दे रहा है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो वो अदालत का दरवाज़ा भी खटखटा सकते हैं। वहीं पत्रकार जैनेन्द्र कुमार ने इस मामले में जानकारी जेते हुए ट्विटर के ज़रिए कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी ने उसी ECIL से ईवीएम खरीदा है जो चुनाव आयोग को भी ईवीएम सप्लाई करता है।

अगर डूसू में ईवीएम से छेड़छाड़ हो सकती है तो विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी गड़बड़ी की जा सकती है। इसलिए मतपत्र से चुनाव होने चाहिए।

 

Source: boltaup.com

खुलासा : SBI को SC के वकील ने बताया था कि ‘माल्या’ भागने वाला है फिर भी ‘वित्त मंत्रालय’ ने कुछ नहीं किया

SBI delayed action against Mallya said SC Lawyer dushyant dave

विजय माल्या के मामले को लेकर अब नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जिस तरह से चीज़े सामने आ रही हैं उसके बाद सरकार पर शराब कारोबारी विजय माल्या को भगाने के आरोप बढ़ते जा रहे हैं।

अब पता चला है कि वित्त मंत्रालय को कई स्रोतों से माल्या के भागने की जानकारी थी लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के मुताबिक, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (एसबीआई) को माल्या के भागने की जानकारी दे दी गई थी। इसके बावजूद बैंक ने कोई कदम नहीं उठाया।

गौरतलब है कि एसबीआई देश का सबसे बड़ा बैंक है और वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आता है। विजय माल्या पर देश के बैंकों का 9000 करोड़ से ज़्यादा का कर्ज है जिसे बिना चुकाए वो देश छोड़कर भाग गया।

वहीं, माल्या ने बुधवार को लंदन में कोर्ट के बाहर कहा है कि वो भारत छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिले थे। और माल्या के भागने से कुछ महीने पहले जांच एजेंसी सीबीआई ने उसके लिए निकाले गए ‘लुक आउट’ नोटिस में ‘हिरासत’ के नियम को बदलकर सिर्फ ‘सूचना देना’ कर दिया।

मतलब इस नोटिस से ये होता है कि अगर आरोपी भारत छोड़ने की कोशिश करे तो उसे हिरासत में ले लिया जाता है। लेकिन सीबीआई ने हिरासत के नियम को बदलकर ये कर दिया कि उसे बस इमिग्रेशन वाले बता दें कि आरोपी भाग रहा है वो उसे रोके नहीं।

ये सभी बाते माल्या के पक्ष में गई और वो आसानी से देश छोड़कर भाग गया। ये भी उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार पर लगातार सीबीआई को अपने लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगता रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि 2 मार्च, 2016 को जब विजय माल्या देश छोड़कर फरार हुआ था, उससे 4 दिन पहले ही उन्होंने बैंक को कहा था कि माल्या भारत छोड़कर फरार हो सकता है, इसलिए आप उसे रोकने के लिए कोर्ट में गुहार लगाएं।

लेकिन हैरानी की बात है कि एसबीआई बैंक ने इस मामले पर कोई कारवाई नहीं की, जिसका नतीजा ये हुआ कि विजय माल्या आराम से देश के बैंकों को कई हजार करोड़ रुपए का चूना लगाकर फरार हो गया।

 

Source: boltaup.com

PM मोदी की अनुमति के बगैर CBI ने कैसे विजय माल्या का लुकआउट नोटिस बदला होगा?- राहुल गांधी

Rahul Gandhi attacks on PM Modi issue of Vijay Mallya

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के मामले पर शुक्रवार को सरकार पर फिर हमला बोला और कहा कि यह समझ से परे है कि इतने बड़े मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुमति के बिना सीबीआई ने लुकआउट नोटिस बदला होगा।

गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘ सीबीआई ने बड़ी खामोशी से डिटेन नोटिस को इन्फॉर्म नोटिस में बदल दिया जिससे माल्या देश से बाहर भाग सका. सीबीआई सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करती है।

ऐसे में यह समझ से परे है कि इतने बड़े और विवादित मामले में सीबीआई ने प्रधानमंत्री की अनुमति के बगैर लुकआउट नोटिस बदला होगा।

राहुल गांधी ने गुरुवार को भी इस मामले को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा था और आरोप लगाया था कि ‘जेटली की मिलीभगत’ से माल्या भागने में सफल रहा।

 

Source: hindi.siasat.com

CM योगी ने गन्ना किसानों पर दिया था ऊंटपटांग बयान, अब आज़म ने किया तंज, ‘यूपी वालों को अपने मुंह पर ज़ोर से…’

Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane

रामपुर – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गन्ने वाले ब्यान को लेकर सपा नेता आजम खां ने जमकर निशाना साधा है. आजम खां ने तंज कसते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता को आज अपने मुंह पर जोर से दो थप्पड़ मारने चाहिए कि उन्होंने कितने पढ़े लिखे आदमी को मुख्यमंत्री बनाया है. अब जनता के लिए ये प्रकोप है, सजा है.

Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane
Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane

क्या है पूरा मामला

मंगलवार को बागपत में एक जन जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि किसान कम गन्ना उगाए, वैसे भी देश में शुगर के मरीज बढ़ते जा रहे हैं. उनके इस बयान पर पलटवार करते हुए पूर्व मंत्री और सपा के कद्दावर नेता आजम खां ने कहा कि असल में योगी जी ने गलत क्षेत्र में बयान दे दिया.

Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane
Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane

प्रदेश के मुखिया का क्या बयान है, पूरे प्रदेश की जनता को शर्म आनी चाहिए और आज प्रदेश की जनता को अपने मुंह पर दो थप्पड़ मारने चाहिए कि उन्होंने कितने पढ़े लिखे और कितनी महान पार्टी के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया है.

Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane
Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane

यह तो जनता के लिए प्रकोप है, सजा है. मैं तो जाहिल गवार हूं. अगर मैं इस बयान पर कोई जवाब दूं तो मुख्यमंत्री को ऐसे बयान पर शर्म आनी चाहिए क्योंकि आप उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हो और पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रदेश के अधिकतर किसान गन्ना की पैदावार करता है.

Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane
Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane

आप उस किसान को प्रोत्साहित ना करके आप उसको यह कह रहे हो कि वह गन्ना की खेती ना करें. इससे यह साबित होता है कि जनता को किस तरह से मूर्ख बनाया गया और जनता बनी भी. इस पर और कुछ कहना तो जाहिल पन ही होगा क्योंकि ऐसे बयान पर बात करना ही सबसे बड़ी शर्मिंदगी की बात होगी और यह मैं नहीं करूंगा.

Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane
Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane

उन्होंने कहा कि जहां किसान गन्ना उगाता है और उससे झूठा वादा किया जाता है कि 14 दिनों के अंदर उसका भुगतान हो जाएगा जबकि 6 महीने बीत जाने के बावजूद भी करोड़ों रुपए बकाया है. उन्होंने कहा कि तुम्हें शर्म आनी चाहिए अगर वह ऐसा बयान देते हैं.

Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane
Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane

इससे साफ जाहिर हो जाता है कि BJP सरकार किसानों की कितनी बड़ी हितैषी है और किस तरह से वह किसानों के विकास के लिए काम कर रही है. बड़े वादे करने से कुछ नहीं होता जमीनी स्तर पर भी कुछ करना होता है और जब इंसान कुछ नहीं कर पाता है तो ऐसे शर्मिंदगी भरे बयान देता है.

माल्या केस में ललित मोदी की एंट्री, कहा- अरुण जेटली को झूठ बोलने की आदत

Lalit Modi's entry in the case of Mallya said Arun jaitley's habit of lying

भारत से करोड़ो रुपए लेकर फरार शराब कारोबारी विजय माल्या ने देश छोडने से पहले हाल ही में वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ मुलाक़ात का खुलासा किया है। जिसके बाद भारत की राजनीति में भूचाल सा आ गया। हालांकि जेटली ने माल्या के दावों को पूरी तरह से खारिज किया है।

इसी बीच अब इस पूरे विवाद में अब आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी की एंट्री हुई है। उन्होने जेटली की तुलना सांप से की। उन्होंने कहा, ‘अरुण जेटली को झूठ बोलने की आदत है।’

ललित मोदी ने ट्वीट करचे हुए लिखा है कि अरुण जेटली को झूठ बोलने की आदत है, विजय माल्या से अरुण जेटली की कथित मुलाकात पर कहा कि जेटली इस तरह का इनकार क्यों कर रहे हैं जब कई लोग इस बात को जानते हैं कि उसने मुलाकात की थी, जो वहां मौजूद थे। अरुण जेटली को झूठ बोलने की आदत है। आप एक सांप (चिह्न) से क्या उम्मीद कर सकते हैं। ललित मोदी पर आईपीएल के ठेके देने में रिश्वत लेने, मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं और वह भारत से 2010 से फरार है।

बता दें कि कल विजय माल्या ने लंदन में दावा किया था कि वो भारत छोड़ने से पहले सेटलमेंट के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मिला था। माल्या के दावों को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, ‘मेरे संज्ञान में यह बात सामने आई है कि विजय माल्याय ने सेटलमेंट ऑफर के लिए मुझसे मिलने का दावा किया है जो कि पूरी तरह से गलत हैं क्योंकि यह सच को सामने नहीं रखता।’ उन्होंने कहा, कि उन्होंने साल 2014 के बाद से ही माल्या को कभी मुलाकात का समय नहीं दिया।

पीएम मोदी को कहा था अनपढ़, अब बोले संजय निरुपम – ‘लोकतंत्र में पीएम भगवान नहीं होता’

PM Modi has said illiterate says Sanjay Nirupam

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बुधवार को एक विवादित बयान दिया। उन्होंने मोदी को ‘निरक्षर’ करार दिया।

महाराष्ट्र के स्कूलों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जिंदगी पर बनी लघु फिल्म दिखाने के राज्य सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए निरुपम ने कहा, ‘जो बच्चे स्कूल, कॉलेज में पढ़ रहे हैं मोदी जैसे अनपढ़-गंवार के बारे में जानकर उननो क्या मिलने वाला है? यदि कोई बच्चा पीएम की शैक्षणिक योग्यता के बारे में सवाल करेगा तो आप उसे क्या बताएंगे? लोगों को उनकी योग्यता नहीं पता है। किन ताकतों ने दिल्ली विश्विद्यालय पर दवाब डाला ताकि उनकी डिग्री जारी ना की जाए। जबकि उन्होंने दावा किया था वह वहां पढ़ चुके हैं?’

बयान पर विवाद बढ्ने पर उन्होने कहा कि “यह लोकतंत्र है, और लोकतंत्र में प्रधानमंत्री भगवान नहीं होते हैं लोग उनके बारे में डेकोरम का ध्यान रखकर ही बात करते हैं। मैंने जिन शब्दों का इस्तेमाल किया, वे अभद्र नहीं थे।”

वहीं दूसरी और भाजपा महाराष्ट्र इकाई के प्रवक्ता शाइना एनसी ने निरुपम को ‘मानसिक तौर पर विक्षिप्त’ करार दिया है।निरुपम की आपत्तिजनक टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए साइना एनसी ने ट्वीट किया, ‘मानसिक रूप से विक्षिप्त संजय निरुपम द्वारा एक और अप्रिय टिप्पणी। लगता है कि वह भूल गए हैं कि नरेंद्र मोदी 125 करोड़ भारतीयों द्वारा चुने गए हैं जो ‘अनपढ़ या गंवार’ नहीं हैं। विचारधारा और प्रासंगिक प्रश्नों से कांग्रेस दूर हो गई है, जनता 2019 में जवाब देगी।’

पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों पर बोले ओवैसी – मोदी सरकार ने सबकी जिंदगी में भर दिया अंधेरा

Owaisi on the rising prices of Petrol and Diesel

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (आईएमआईएम) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि मोदी सरकार ने सबकी जिंदगी में अंधेरा भर दिया है।

उन्होने कहा कि मैं पीएम मोदी से कहना चाहता हूं कि उन्होंने हमेशा एक अंधेरे में रखने का माहौल बनाया है यह दिखाने के लिए कि पेट्रोल और डीजल के दाम आम आदमी की पहुंचे से बाहर है। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने किए गए वादों को पूरा नहीं करके अंधेरा बनाया है। आगे कहा कि हम प्रकाश हैं, विरोधी अंधेरा है।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा कि ये समझ के बाहर है कि सिर से लेकर पांव तक भ्रष्टाचार के मामलों में डूबे कांग्रेसी नेता नैतिकता की बात करते हैं। पिछले चार वर्षों में केंद्र सरकार न केवल घरेलू बल्कि विदेशी मोर्चे पर कामयाब रही है।

बता दें कि शुक्रवार को पेट्रोल के दाम में 28 पैसे का इजाफा हुआ है। वहीं डीजल की कीमत भी 22 पैसे प्रति लीटर के हिसाब से बढ़ गई है। दिल्ली में शुक्रवार को पेट्रोल की नई कीमत 81.28 तो डीजल की कीमत 73.30 रुपए पहुंच गई।

केजरीवाल ने 2016 में ही बता दिया था ‘माल्या’ भागा नहीं है बल्कि उसे मोदी सरकार द्वारा भगाया गया है !

Kejriwal had told in 2016 that the govt helped Mallya

भारतीय बैंकों को हज़ारों करोड़ की चपत लगाने वाले उद्योगपति विजय माल्या ने वित्त मंत्री अरुण जेटली पर बड़ा आरोप लगाया है। माल्या ने लंदन की कोर्ट के बाहर बुधवार को कहा कि भारत छोड़ने से पहले उसने मामला सुलझाने के लिए वित्त मंत्री से मुलाकात की थी।

विपक्षी नेता विजय माल्या के आए बयान से पहले से ही बोलते आ रहे थे कि उसे विदेश भागने में जरुर केंद्र सरकार ने मदद की है। वरना बैंकों का हजारों करोड़ रुपए लेकर विदेश भागना इतना आसान नहीं है वो भी घोटाले के उजागर होने के बाद!

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने मार्च 2016 में ही ट्वीट करते बताया था कि माल्या को भगाने में मोदी सरकार की मिलीभगत है।

अपने मार्च 2016 के ट्वीट में केजरीवाल ने लिखा था कि, “सीबीआई सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करती है, प्रधानमंत्री की जवाबदेही है कि माल्या को भारत छोड़ने की अनुमति क्यों दी गई? सीबीआई सरकार की सहमति के बिना माल्या को विदेश जाने की इजाज़त नहीं दे सकती।

अरविन्द केजरीवाल साथ ही मोदी सरकार पर ये भी आरोप लगाते रहे हैं कि विजय माल्या भागा नहीं है बल्कि उसे मोदी सरकार द्वारा भगाया गया है।

वहीं भाजपा वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने साल के जून महीने में कहा था कि, “माल्या भारत छोड़ ही नहीं सकते थे, क्योंकि उनके खिलाफ कई नोटिस एयरपोर्ट्स पर लगे थे।

लेकिन, फिर वो दिल्ली आए और किसी शक्तिशाली (संभवतः अरुण जेटली) शख्स से मुलाकात की और उनके विदेश प्रस्थान करने से पहले सारे नोटिस एयरपोर्ट से हटा लिए गए। आखिर कौन था वो शख्स? जिसने उसे जाने दिया”?

विजय माल्या के इस बयान के बाद बीजेपी में बड़ी हलचल पैदा हो गई है। साथ ही कांग्रेस बीजेपी को इस मामले में घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। अन्य विपक्षी दल के नेता भी इस मामले को लेकर लगातार बीजेपी पर हमलावर हैं।

Source: boltaup.com

पुण्यप्रसून वाजपेयी का लेखः अरबों रुपये लुटाकर जो संसद पहुंचा, वह तो देश लूटेगा ही और सत्ता-संसद ही उसे बचाएगी

Punya Prasun Bajpai article on election and leader

एक मार्च 2016 को विजय माल्या संसद के सेन्ट्रल हाल में वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलते हैं. दो मार्च को रात ग्यारह बजे दर्जन भर बक्सों के साथ जेय एयरवेज की फ्लाइट से लंदन रवाना हो जाते हैं. फ्लाइट के अधिकारी माल्या को विशेष यात्री के तौर पर सारी सुविधाये देते हैं. और उसके बाद देश में शुरु होता है माल्या के खिलाफ कार्रवाई करने का सिलसिला या कहें कार्रवाई दिखाने का सिलसिला. क्योंकि देश छोड़ने के बाद देश के 17 बैंक सुप्रीम कोर्ट में विजय माल्या के खिलाफ याचिका डालते हैं. जिसमें बैक से कर्ज लेकर अरबो रुपये ना लौटाने का जिक्र होता है और सभी बैंक गुहार लगाते है कि माल्या देश छोड़कर ना भाग जाये इस दिशा में जरुरी कार्रवाई करें. माल्या के देश छोडने के बाद ईडी भी माल्या के देश छोडने के बाद अपने एयरलाइन्स के लिये लिये गये 900 करोड रुपये देश से बाहर भेजने का केस दर्ज करता है. माल्या के देश छोडने के बाद 13 मार्च को हैदराबाद हाईकोर्ट भी माल्या के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करता है.

Punya Prasun Bajpai article on election and leader
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क्योंकि माल्या जीएमआर हेदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम जो पचास लाख का चेक देते हैं, वह बाउंस कर जाता है. 24 अप्रैाल को राज्यसभा की ऐथिक्स कमेटी की रिपोर्ट में माल्या को राज्यसभा की सदस्यतता रद्द करने की बात इस टिप्पणी के साथ कहती है कि 3 मई को वह माल्या को सदन से निलंबित किया जाये या नही इस पर फैसला सुनायेगी. और फैसले के 24 घंटे पहले यानी 2 मई को राज्यसभा के चैयरमैन हामिद अंसारी के पास विजय माल्या का फैक्स आता है जिसमें वह अपने उपर लगाये गये आरोपो को गलत ठहराते हुये राज्यसभा की सदस्यतता से इस्तीफा दे देते हैं. और अगले दिन यानी तीन मई 2016 को राज्यसभा के एथिक्स कमेटी माल्या की सदस्यता रद्द करने का फैसला दे देती है. उसके बाद जांच एजेंसियां जागती हैं. पासपोर्ट अवैध करार दिये जाते हैं . विदेश यात्रा पर रोक लग जाती है. तमाम संपत्ति जब्त करने की एलान हो जाता है. और किसी आर्थिक अपराधी यानी देश को चूना लगाने वाले शख्स के खिलाफ कौन-कौन सी एजेंसी क्या क्या कर सकती है, वह सब होता है. चाहे सीबीआई हो आईबी हो ईडी हो या फिर खुद संसद ही क्यो ना हो.

Punya Prasun Bajpai article on election and leader
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तो क्या वाकई देश ऐसे चलता है जैसा आज कांग्रेसी नेता पूनिया कह गये कि अगर संसद के सीसीटीवी को खंगाला जाये तो देश खुद ही देख लेगा कि कैसे माल्या और जेटली एक मार्च 2016 को संसद के सेन्ट्रल हाल में बात नहीं बल्कि अकेले गुफ्तगु भर नहीं बल्कि बैठक कर रहे थे. और यह झूठ हुआ तो वह राजनीति छोड देंगे. या फिर वित्त मंत्री अरुण जेटली बोले, माल्या मिले थे. पर बतौर राज्यसभा सांसद वह तब किसी से भी मिल सकते थे. पर कोई बैठक नहीं हुई. तो सवाल तीन हैं. पहला, जो संसद कानून बनाती है उसे ही नहीं पता कानून तोडने वाले अगर उसके साथ बैठे हैं तो उसे क्या करना चाहिये.

Punya Prasun Bajpai article on election and leader
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दूसरा, सांसद बन कर अपराध होता है या अपराधी होते हुये सांसद बन कर विशेषाधिकार पाकर सुविधा मिल जाती है. तीसरा , देश में कानून का राज के दायरे में सांसद या संसद नहीं आती है क्योंकि कानून वही बनते हैं. दरअसल तीनों सवालो के जवाब उस हकीकत में छिपे हैं कि आखिर कैसे विजयमाल्या सांसद बनते है और कैसे देश की संसदीय राजनीति करोडो के वारे न्यारे तले बिक जाती है. उसके लिये विचार , कानून या ईमानदारी कोई मायने नहीं रखती है. कैसे ? इसके लिये आपको 2002 और 2010 में राज्यसभा के लिये चुने गये विजय माल्या के पैसो के आगे रेंगते कांग्रेस और बीजेपी के सांसदों के जरीये समझना होगा. या फिर कार्नाटक में मौजूदा सत्ताधारी जेडीएस का खेल ही कि कैसे करोडों-अरबों के खेल तले होता रहा इसे भी समझना होगा और संसद पहुंचकर कोई बिजनेसमैन कैसे अपना धंधा चमका लेता है इसे भी जानना होगा. 2002 में कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता थी. तो राज्यसभा के चार सदस्यों के लिये चुनाव होता है. चुने जाने के लिये हर उम्मीदवार को औसत वोट 43.8 चाहिये थे. कांग्रेस के तीन उम्मीदवार जीतते हैं और 40 विधायकों को संभाले बीजेपी के एक मात्र डीके तारादेवी सिद्दार्थ हार जाते हैं. क्योंकि बीजेपी को हराने के लिये कांग्रेस जेडीएस के साथ मिलकर निर्दलीय उम्मीदवार विजयमाल्या को जीता देती है.

Punya Prasun Bajpai article on election and leader
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और मजे की बाज तो ये भी होती है कि बीजेपी के चार विधायक भी तब बिक जाते हैं. यानी रिजल्ट आने पर पता चलता है कि विजयमाल्या को 46 वोट मिल गये. यानी दो वोट ज्यादा. और तब अखबारों में सुर्खियां यही बनती है कि करोडों का खेल कर विजय माल्या संसद पहुंच गये. तब हर विधायक के हिस्से में कितना आया इसकी कोई तय रकम तो सामने नहीं आती है लेकिन 25 करोड रुपये हर विधायक के आसरे कर्नाटक के अखबार विश्लेषण जरुर करते हैं. आप सोच सकते हैं कि 2002 में 46 वोट पाने के लिये 25 करोड़ के हिसाब से 11 अरब 50 करोड रुपये जो बांटे गये होंगे, वह कहां से आये होंगे और फिर उसकी वसूली संसद पहुंच कर कैसे विजय माल्या ने की होगी. क्योंकि वाजपेयी सरकार के बाद जब मनमोहन सिंह की सरकार बनती है और उड्डयन मंत्रालय एनसीपी के पास जाता है.

Punya Prasun Bajpai article on election and leader
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प्रफुल्ल पटेल उड्डयन मंत्री बनते हैं और तब विजय माल्या उड्डयन मंत्रालय की समिति के स्थायी सदस्य बन जाते हैं. और अपने ही धंधे के ऊपर संसदीय समिति का हर निर्णय कैसे मुहर लगाता होगा, ये बताने की जरुर नहीं है. और उस दौर में किगंफिशर की उड़ान कैसे आसामान से उपर होती है, ये कोई कहां भूला होगा. पर बात यही नहीं रुकती . 2010 में फिर से कर्नाटक से 4 राज्यसभा सीट खाली होती हैं. इस बार सत्ता में बीजेपी के सरकार कर्नाटक में होती है. और औसत 45 विधायकों के वोट की जरुरत चुने जाने के लिये होती है. बीजेपी के दो और कांग्रेस का एक उम्मीदवार तो पहले चरण के वोट में ही जीत जाता है. पर चौथे उम्मीदवार के तौर पर इस बार कांग्रेस का उम्मीदवार फंस जाता है. क्योंकि कांग्रेस के पास 29 वोट होते हैं. बीजेपी के पास 26 वोट होते है . और 27 वोट जेडीएस के होते हैं.

Punya Prasun Bajpai article on election and leader
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जेडीएस सीधे करोडों का सौदा एकमुश्त करती है. तो 5 निर्दलीय विधायक भी माल्या के लिये बिक जाते हैं. और 13 वोट बीजेपी की तरफ से पड़ जाते हैं. यानी 2002 की सुई काग्रेस से घुम कर 2010 में बीजेपी के पक्ष में माल्या के लिये घुम जाती है. फिर कर्नाटक के अखबारों में खबर छपती है करोडों-अरबों का खेल हुआ है. इसबार रकम 25 करोड से ज्यादा बतायी जाती है. यानी 2002 की साढे ग्यारह अरब की रकम 20 अरब तक बतायी जाती है. तो फिर ये रकम कहां से विजय माल्या लाये होंगे और जहां से लाये होंगे, वहां वापस रकम कैसे भरेंगे. ये खेल संसद में रहते हुये कोई खुले तौर पर खेलता है. इस दौर में आफशोर इन्वेस्टमेंट को लेकर जब पनामा पेपर और पैराडाइड पेपर आते है तो उसमें भी विजय माल्या का नाम होता है. यानी एक लंबी फेरहिस्त है माल्या को लेकर. लेकिन देश जब नये सवाल में जा उलझा है कि संसद में 1 मार्च 2016 को विजयमाल्या लंदन भागने से पहले वित्त मंत्री से मिले या नहीं? या क्या वह वाकई कह रहे थे कि वह भाग रहे हैं, पीछे सब देख लेना. और पीछे देखने का सिललिसा कैसे होता है, ये पूरा देश देख समझ सकता है.

Punya Prasun Bajpai article on election and leader
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लेकिन आखिरी सवाल तो यही है कि जिस संसद में 218 सांसद दागदार हैं, उसी संसद के एक पूर्व सदस्य से अरबों रुपये लेकर कर्नाटक की सियासत और देश की संसद अगर 2002 से लेकर 2016 तक चलती रही तो यह क्यो ना मान लिया जाये कि संसद ऐसे ही चलती है और अरबों रुपये लुटाकर जो संसद पहुंचेगा वह देश को नहीं तो किसे लुटेगा.

(लेखक जाने माने पत्रकार हैं, यह लेख उनके फेसबुक वॉल से लिया गया है)

शर्मनाकः RSS के दीनदयाल उपाध्याय की मूर्ती लगाने के लिये उखाड़ दी स्वतंत्रता सेनानी पंडित नेहरू की प्रतिमा

RSS ke Deendayal Upadhyaya ki murti lagane ke liye ukhad diye pandit nhairu ki prathima

इलाहाबाद – नेहरू-गांधी परिवार के पैतृक शहर इलाहाबाद में आज देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की मूर्ति को क्रेन के जरिये जबरन हटाए जाने पर जमकर हंगामा मचा. नेहरू की यह मूर्ति उनके पैतृक आवास आनंद भवन के बाहर से महज इसलिए हटाई गई क्योंकि पड़ोस में लगी जनसंघ के अध्यक्ष रहे पंडित दीन दयाल उपाध्याय के मूर्ति स्थल का विस्तार किया जाना था.

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दीनदयाल उपाध्याय के मूर्ति स्थल के विस्तार के लिए पंडित नेहरू की मूर्ति पर रस्सी और बोरियां बांधकर क्रेन के जरिये हटाया गया जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया. कांग्रेस कार्यकर्ताओं की नाराज़गी नेहरू के मूर्तिस्थल को जूते और चप्पल पहने हुए मजदूरों से तोड़वाए जाने पर ज़्यादा रही.

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हटाई गई पंडित नेहरू की मूर्ति साल 1995 में लगाई गई थी, जिसका उदघाटन तत्कालीन गवर्नर मोतीलाल बोरा ने किया था. पंडित दीन दयाल उपाध्याय की मूर्ति साल 1991 में लगाई गई थी, जिसके उद्घाटन समारोह में यूपी के तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. मुरली मनोहर जोशी और नेता बीजेपी संसदीय दल लाल कृष्ण आडवाणी ने किया था. पंडित नेहरू की हटाई गई मूर्ति को शाम को पड़ोस में ही एक जगह पर शिफ्ट कर दिया गया।

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कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने क्रेन को रोककर योगी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उस पर बदले की भावना और भेदभाव के साथ काम करने का आरोप लगाया. हंगामा करने वाले कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी की सरकारें महापुरुषों की मूर्तियों का लगातार अपमान कर रही है. इलाहाबाद में आनंद भवन के बाहर से नेहरू की मूर्ति को अपमानजनक तरीके से हटाया जाना एक विचारधारा को ख़त्म किये जाने की साजिश है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ शुक्रवार से आंदोलन की शुरुआत की जाएगी.

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नेहरू की मूर्ति को क्रेन से जबरन हटाए जाने की घटना के दौरान सैकड़ों की तादात में तमाशबीनों की भीड़ जुटी रही. नेहरू की इसहटाई गई मूर्ति को पड़ोस में ही दूसरी जगह लगाया जाएगा. इस बारे में सरकारी अमला कैमरे पर कुछ भी बोलने से साफ़ बचता नजर आया. अफसरों की दलील है कि चौराहे के सौंदर्यीकरण की वजह से ऐसा करना ज़रूरी था. हालांकि उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि सौंदर्यीकरण के लिए दीनदयाल उपाध्याय के मूर्ति स्थल और बीजेपी सांसद श्यामाचरण गुप्ता के बंगले से कोई छेड़छाड़ क्यों नहीं की गई.

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इलाहाबाद में पंडित नेहरू के पैतृक आवास आनंद भवन से महज सौ मीटर की दूरी पर बालसन चौराहे पर तीन अलग-अलग पार्कों में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और जनसंघ के अध्यक्ष रहे पंडित दीन दयाल उपाध्याय की मूर्तियां लगी हैं. कुंभ मेले के मद्देनजर इलाहाबाद में इन दिनों चौराहों के सौंदर्यीकरण और चौड़ीकरण का काम चल रहा है. विकास प्राधिकरण ने बालसन चौराहे पर पंडित दीन दयाल उपाध्याय के मूर्ति स्थल को बढ़ाकर उसे नेहरू के मूर्ति स्थल तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है. इसके बाद की जगह पर सड़क बनाकर रास्ता तैयार किया जाएगा.

प्राधिकरण ने इसके लिए ही बृहस्पतिवार को दोपहर में नेहरू की मूर्ति को हटाने का काम शुरू किया. इसके लिए जो तरीका अपनाया गया, उस पर भी सवाल उठ रहे हैं. सम्मानजनक तरीके से मूर्ति हटाए जाने के बजाय उसे चेहरे के साथ बोरे में लपेट दिया गय।

लोकसभा चुनावों में अपने पिता के खिलाफ लड़ेंगी रामविलास पासवान की बेटी

Ramvilas Paswan daughter Asha Paswan says will fight against him in loksabha election from RJD ticket

लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की बेटी आशा पासवान ने गुरुवार को घोषणा की कि अगर अगले लोकसभा चुनावों में उन्हें राष्ट्रीय जनता दल से टिकट मिलता है तो वो अपने पिता के खिलाफ चुनाव में खड़ी होंगी.

रामविलास पासवान बिहार के हाजीपुर संसदीय सीट से सांसद हैं और यहीं से उनकी बेटी उनका मुकाबला करने की बात कर रही हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, आशा पासवान ने अपने पिता पर बेटे-बेटियों में भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पिता ने उनके भाई चिराग पासवान और उनमें हमेशा भेदभाव किया है. उनका कहना था कि ‘मुझे हमेशा नजरअंदाज किया गया. चिराग को उन्होंने एलजेपी का नेता बना दिया. आज वो जमुई के सांसद हैं. अगर आरजेडी मुझे टिकट देती है तो मैं हाजीपुर से लडूंगी.’

उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव उनके चाचा जैसे हैं और तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव उनके कजिन हैं.

बता दें की रामविलास पासवान ने दो शादी की है. उनकी पहली बीवी राजकुमारी देवी से उनको एक बेटी और दूसरी बीवी रीना से एक बेटी और बेटा है. उन्होंने 1981 में अपनी पहली बीवी को तलाक दे दिया था.

आशा पासवान अपने पति अनिल साधु के साथ पटना में रहती हैं. दिलचस्प बात ये है कि पिछले बुधवार को साधु खुद पासवान के खिलाफ लड़ने की बात कर चुके हैं. वो पहले एलजेपी में थे लेकिन हाल ही में उन्होंने आरजेडी जॉइन किया है. उन्होंने कहा था कि पासवान के खिलाफ या तो वो खड़े होंगे या उनकी बीवी आशा.

रामविलास पासवान पर अकसर ही परिवारवाद के आरोप लगते हैं. उनके बेटे चिराग पासवान के अलावा उनके छोटे भाई पशुपति कुमार पारस एलजेपी के बिहार अध्यक्ष हैं. भतीजे प्रिंस राज पार्टी के स्टूडेंट विंग के अध्क्ष और दूसरे भाई रामचंद्र पासवान सांसद हैं.

Source: hindi.firstpost.com

जिस विजय माल्या पर करोड़ों का कर्ज़ है उसे जेटली ने विदेश भागने से रोका क्यों नहीं? दाल में कुछ तो काला है : कीर्ति आजाद

Kirti Azad ask question to Arun Jaitley

भारतीय बैंकों का हज़ारों करोड़ रूपए लेकर भागे उद्योगपति विजय माल्या ने बुधवार को बड़ा खुलासा करते हुए ब्रिटिश कोर्ट के बाहर मीडिया से कहा कि “वो भारत छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिले थे।“

माल्या के इस बयान के बाद मोदी सरकार और खासकर वित्त मंत्री अरुण जेटली सवालों के घेरे में गए हैं। अरुण जेटली और मोदी सरकार को बैंकों का पैसा लेकर भाग रहे उद्योगपतियों को विदेश भागने को लेकर संदेह की नजर से देखा जा रहा है।

अब तक केंद्र सरकार पर विजय माल्या को भगाने का आरोप लग रहा था। लेकिन ये बयान देकर माल्या ने सभी आरोपों को सच में बदल दिया है।

इस मामले के सामने आने के बाद विपक्ष के साथ में खुद बीजेपी के नेता अरुण जेटली पर हमलावर है। भाजपा सांसद कीर्ति आजाद ने ट्वीट करके कहा है कि, “जब जेटली विजय माल्या से मिले तो फिर क्या हुआ?

जब अरुण जेटली को मालूम था कि विजय माल्या लंदन जा रहा है और उसके ऊपर करोड़ों का कर्ज़ है तो फिर जेटली ने ईडी और सीबीआई जैसे एजेंसियों को इसकी सूचना क्यों नहीं दी?”

कीर्ति आजाद ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से सवाल पूछा कि, “माल्या को विदेश भागने से रोका क्यों नहीं? दाल में काला है या फिर पूरी दाल काली है? मामला गड़बड़ है।”

केंद्र सरकार पर इससे पहले भी माल्या की मदद करने के आरोप लग चुके हैं। आरोप है कि केंद्र सरकार सीबीआई का इस्तेमाल कर माल्या के खिलाफ लंदन के कोर्ट में चल रहे मामले को कमज़ोर कर रही है।

जिन धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दायर किया गया है और जिस तरह सबूत कोर्ट में पेश किये जा रहे हैं वो मामले को कमज़ोर कर रहे हैं।

बता दें, कि विजय माल्या पर भारतीय बैंकों का 9,990 करोड़ रुपिए का कर्ज़ बकाया है जिसे बिना चुकाए वो भारत छोड़कर इंग्लैंड भाग गए थे।

Source: boltaup.com

DUSU मतगणना स्थगित किए जाने पर बोले आप नेता- जो EVM एक यूनिवर्सिटी का चुनाव नहीं करा पाया वो देश का चुनाव कैसे कराएगा

DUSU elections postponed due to EVM fault aap leader raised question on EVM

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में हो रही मतगणना ईवीएम में गड़बड़ी के चलते आज के लिए स्थगित कर दी गई है। बताया जा रहा है कि जब मतगणना स्थगित की गई तब एनएसयूआई के सन्नी छिल्लर अध्यक्ष पद पर और एनएसयूआई के ही आकाश चौधरी सेक्रेटरी पद पर आगे चल रहे थे।

एनएसयूआई के सदस्यों ने आरोप लगाते हुए कहा कि एबीवीपी अध्यक्ष पर पीछे चल रही है इसलिए प्रशासन रिजल्ट में छेड़छाड़ की कोशिश कर रहा है। बता दें कि मतगणना की शुरुआत ही बाधाओं के साथ हुई।

पहले तो मतगणना एक घंटे देर से शुरू हुई। बाद में डूसू के काउंटिंग सेंटर पर ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर विवाद हो गया। छात्रों के बीच झड़प हुई। मतगणना केंद्र पर शीशे के दरवाजे तोड़े गए और जमकर हंगामा काटा गया।

डूसू इलेक्शन ऑफिसर ने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव की मतगणना ईवीएम में गड़बड़ी और छात्रों के हंगामे के कारण स्थगित कर दी गई है। उन्होंने बताया कि मतगणना की तारीख का ऐलान अब बाद में किया जाएगा।

इस मामले के सामने आने के बाद आप नेता विपिन राठौर ने ईवीएम पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जो ईवीएम एक विश्वविद्यालय का चुनाव नहीं करा पाया वो लोकसभा का चुनाव कैसे कराएगा।

उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “जो एक विश्वविद्यालय का चुनाव जीतने के लिए लोकतंत्र व लोकतांत्रिक व्यवस्था को तार-तार कर सकता है वो लोकसभा चुनाव में क्या करेंगा अंदाजा लगाना सहज है और हाँ जब एक विश्वविद्यालय का चुनाव EVM से नहीं हो पाया तो देश का चुनाव क्या खाक होगा”।

बता दें कि बुधवार को हुए दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में करीब 44.46 प्रतिशत वोटिंग हुई। मतदान शांतिपूर्ण हुआ। कॉलेजों में 52 केंद्रों पर वोट डाले गए। डीयू में 1.35 लाख छात्र हैं। 23 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। चुनाव के लिए करीब 700 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें लगाई गईं थीं।

 

Source: boltaup.com

अमित शाह का अवैध आप्रवासन मुद्दा चुनाव के समय के लिए राजनीति भाषणबाजी का कला है

Amit Shah's illegal immigration rhetoric poll time gimmick

राजस्थान में मतदान के दौरान, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने एक बार फिर असम में नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) अभ्यास का बचाव किया और सभी बांग्लादेशी घुसपैठियों को निष्कासित करने की कसम खाई। इसे याद किया जाएगा कि जुलाई में जारी एनआरसी की अंतिम मसौदा सूची में 40 लाख लोग शामिल थे। लेकिन बाद की रिपोर्टों ने कई मामलों पर प्रकाश डाला जहां एक ही परिवार के सदस्यों को उनके एनआरसी अनुप्रयोगों के लिए अलग-अलग प्रतिक्रिया मिली। इसने अभ्यास की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, शाह कांग्रेस से लड़ रहे हैं – जिसने एनआरसी के कमजोर निष्पादन की आलोचना की है – और इसके वोट बैंक को बचाने के बाद आरोप लगाया है।

फिर भी, तथ्य यह है कि कोई भी नहीं जानता कि प्रक्रिया के अंत में घोषित अवैध आप्रवासियों के साथ क्या होगा। शाह के कहने के बावजूद, बांग्लादेश को निर्वासन एक विकल्प नहीं है क्योंकि वह देश 1972 से भारत में किसी भी बड़े पैमाने पर आउटबाउंड प्रवास को मान्यता नहीं देता है। और कुछ महीनों में बांग्लादेश में चुनाव के साथ, भारतीय स्थिति को स्वीकार करने के लिए ढाका में किसी भी शासन के लिए आत्मघाती होगा। इसके अलावा, नई दिल्ली अच्छी तरह से ढाका के साथ इस मुद्दे को मजबूर नहीं करेगी। हाल के दिनों में भारत-बांग्लादेश संबंध उत्कृष्ट रहे हैं और अवैध आप्रवासन दर्शक को उठाकर बांग्लादेश नेपाल के रास्ता देख सकते हैं।

इसलिए, यह स्पष्ट है कि शाह एनआरसी के साथ पहचान राजनीति खेल रहे हैं। शाह के पुनरावृत्ति ने यह पुष्टि की है कि सरकार का नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 पड़ोसी देशों से हिंदुओं को नागरिकता प्रदान करेगा – एक प्रावधान जो आगे प्रवास और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो सकता है, उन अदालतों में चुनौती दी जा सकती है जहां इसकी संवैधानिकता का परीक्षण किया जाएगा। आरक्षण के लिए अकिन, अवैध घुसपैठियों को निष्कासित करना राजनीतिक रूप से सही राजनीति है जो जमीन पर कुछ भी हल नहीं करेगा। एकमात्र व्यावहारिक पाठ्यक्रम बांग्लादेश के साथ उस देश से भविष्य में प्रवास को रोकने के लिए काम करना है।

 

Source: hindi.siasat.com

क्या एससी/एसटी ऐक्ट के अपने ही अजेंडे में फंस गई बीजेपी!

Is the BJP stuck in its own agenda of the SC ST Act

सोशल मीडिया में बड़ा कैम्पेन ‘नोटा’ को लेकर चलाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि एससी/एसटी कानून की मुखालिफ जातियां मतदान केंद्र तक जाएं, अगर उन्हें लगता है कि बीजेपी के खिलाफ वह किसी दूसरी पार्टी को वोट नहीं दे सकती हैं तो ‘नोटा’ का बटन दबा दें।

कहा जा रहा है कि इस कैम्पेन का सीधा नुकसान बीजेपी को होगा लेकिन इस अभियान की काट के लिए बीजेपी का आईटी सेल काफी सक्रिय हो गया है। वह इस अभियान को बेअसर करने में जुट गया है।

‘प्रॉक्सी वॉर’ भी शुरू हो गया है। जातियों के झगड़े में उलझे हिंदू समाज के लिए सोशल मीडिया पर एक संदेश बहुत तेजी के साथ वायरल हो रहा है- ‘जातियों के झगड़े में अगर मोदी जी को 2019 में हरा दिया तो याद रखना कि उसके बाद जाति तो क्या, धर्म भी बताना मुश्किल हो जाएगा।’ बीएसपी तो ‘नोटा कैम्पेन’ का भी बीजेपी की रणनीति का हिस्सा मानती है।

पार्टी का कहना है कि बीजेपी यह नहीं चाहती है कि उससे नाराज वोटर उसकी मुखालिफ पार्टियों के साथ खड़ा हो, इस वजह से बीजेपी ने साजिशन सोशल मीडिया पर यह कैम्पेन चलवाया है।

बीजेपी के लिए जोखिम दोनों ही हालात में था। अगर वह इस कानून को नरम होने देती, तो एकमुश्त चौथाई आबादी को खिलाफ कर लेती। ऐसे में बीजेपी ने कम खतरे वाली स्थिति के साथ जाना पसंद किया है।

बीजेपी के एक सीनियर लीडर ने एनबीटी से बातचीत में माना भी कि पार्टी को दोनों ही हालात में लड़कर ही बाहर आना पड़ता। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि बीजेपी अपनी रणनीति में फंस गई है।

(स्रोत: नवभारत टाइम्स)

 

Source: hindi.siasat.com